Skip to main content

माँ! तेरी जय हो। 'जय हो' का एक रूप यह भी

रहमान और भारत माता को राजकुमार 'राकू' का सलाम


रहमान के गीत 'जय हो' को ऑस्कर मिलने के बाद इस गीत के ढेरों संस्करण इंटरनेट पर उपलब्ध हो गये। भारतीय राजनीतिज्ञों के ऊपर व्यंग्य कसती 'जेल हो' गीत भी चर्चा में है। हिन्द-युग्म के राजकुमार राकू' ने रहमान की इस उपलब्धि को रहमान को भारत माँ को सलाम कहा। सब अपनी-अपनी तरह से रहमान को सलाम कर रहे थे, इसी बीच राजकुमार 'राकू' और उनकी टीम ने एक नया गीत गढ़ा 'माँ! तेरी जय हो'। इस गीत को लिखा है खुद राकुमार 'राकू' ने। राकू ने संगीत विवेक अस्थाना के साथ मिलकर इस गीत को धुन दी है। संगीत-संयोजन किया है बॉलीवुड के उभरते संगीतकार विवेक अस्थाना ने। गीत में आवाज़ें हैं राजकुमार राकू (कमेंट्री), राजेश बिसेन, सुमेधा और साथियों की। आपको बताते चलें कि यह गीत आने वाली फिल्म 'कलाम का सलाम' का हिस्सा होगा। इस गीत में सभी भारतीय वाद्य-यंत्रों का इस्तेमाल किया गया है। 'माँ' से जुड़ीं भावों को पिरोने के लिए राग दुर्गा का और विजय भाव के लिए राग जयजयवंती का प्रयोग किया गया है। आवाज़ के श्रोताओं को दुबारा याद दिला दें कि राकू और विवेक अस्थाना की जोड़ी द्वारा तैयार भिखारी ठाकुर का गीत 'हँसी-हँसी पनवा' हमने आपको दिसम्बर २००८ में सुनवाया था। आज सुनिए रहमान और भारत माँ को समर्पित यह गीत



वॉयस ओवर-
तेरी संतानों ........तेरे बच्चों ने, कला की दुनिया में तेरा नाम आसमानों पे लिख दिया। माता तेरी जय हो।
लेकिन तेरी ' आन, बान, शान, मान ' से से बढ़ कर क्या हो सकता है कोई भी सम्मान? तेरे बेटे 'रहमान' ने तो कह भी दिया .........." मेरे पास माँ है ...........!"
सच्चा बेटा तेरा ! सच्चा हिन्दोस्तानी ! उसकी गूँज तो सभी ने सुनी
और आज, उसकी शानदार ऊँचाई को मेरा छोटा सा सलाम ...........माँ! तेरे नाम!

गीत के बोल-
जय हो.........जय हो..............जय हो !
जननी मेरी .................. तेरी जय हो !
माता मेरी ....................तेरी जय हो !

तेरी गोद रहे ................आँगन मेरा!
आँचल हो तेरा ............चाहत मेरी!
ममता से भरी ............आँखें तेरी,
काबा मेरा ......काशी मेरी ..........
जय माँ मेरी माँ जय हो
महिमा तेरी माँ, जय हो
माँ शक्तिशाली जय हो
माँ सबसे न्यारी, जय हो
जयति जय, जयति जय, जय हो ..........जय हो .......जय ,जय ,जय , जय , जय , जय , हो !

ये सारा सम्मान मेरा
सौभाग्य मेरा .........अरमान मेरा !
ईमान मेरा ............भगवान् मेरा !
ये सारा हिन्दुस्ताँ, ये सारा हिन्दुस्ताँ मेरा
माँ सब कुछ है ..............वरदान तेरा !
जय हो, जय हो, जय हो
जयति जय, जय हो
जय हो ..........जय हो .......जय ,जय ,जय , जय , जय , जय , हो !

तेरी सेवा ................अनहद नाद रहे
बस तू ही तूही .........याद रहे !
आनंद रहे ..........उन्माद रहे !
हम मिट जायें ....कि..... रहे न रहें ।
बस तेरे सर पे .............ताज रहे ।
तेरे दामन में .........आबाद हैं हम ,
तो फिर कैसी......... फरियाद रहे ?

दुनिया देखे ............देखे दुनिया...............ऐसी तेरी, माँ तेरी जय हो ...ऐसी तेरी, माँ तेरी जय हो

जय हो.....जय हो ! ................जय ही जय हो !
आई मेरी ..............माई मेरी !
जननी मेरी .........माता मेरी !
भारतमाता ..........माय मदर इंडिया
माय मदर इंडिया ...........भारतमाता !
जय हो .......तेरी.तेरी जय हो .........तेरी जय हो .....................जय हो !
जय हो !

गीत पसंद आया?

१॰ अपने ब्लॉग/वेबसाइट पर लगाने के लिए, ऑरकुट/फेसबुक/माय-स्पैस पर शेयर करने के लिए कोड कॉपी करें।



2. डाउनलोड करें और हमेशा सुनें

कम्प्यूटर/साउँड सिस्टम के लिए128 Kbps Mp364Kbps MP3Ogg Vorbis
मोबाइल/I-POD के लिए32 Kbps Mp3AMR

Comments

किसी अच्छी से अच्छी चीज की रेड मारने में हमारा कोई जवाब नहीं. भा.ज.पा. की तरफ से एक एस एम् एस आया... ओस्कर के लिए कोंग्रेस बधाई की पात्र है क्योंकी आजादी के ६२ साल बाद भी झोपडी-झुग्गियों के लिए वही जिम्मेदार है. जय हो.

क्या इसका अर्थ यह नहीं की भा. ज. पा. ६२ सालों में देश को कुछ नहीं दे पाई. दूसरे का असफल होना अपनी सफलता नहीं है- यह कौन बतायेगा इन को
ajit gupta said…
बहुत ही सुन्‍दर गीत है। कभी वन्‍देमातरम् और अब माँ तेरी जय हो। अब लगने लगा है कि भारत माता के दिन फिरने वाले हैं। आपको बधाई।
Nidhi said…
बहुत सुंदर गीत, उत्तम धुन के साथ !

Popular posts from this blog

भला हुआ मेरी मटकी फूटी.. ज़िन्दगी से छूटने की ख़ुशी मना रहे हैं कबीर... साथ हैं गुलज़ार और आबिदा

महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११३ सू फ़ियों-संतों के यहां मौत का तसव्वुर बडे खूबसूरत रूप लेता है| कभी नैहर छूट जाता है, कभी चोला बदल लेता है| जो मरता है ऊंचा ही उठता है, तरह तरह से अंत-आनन्द की बात करते हैं| कबीर के यहां, ये खयाल कुछ और करवटें भी लेता है, एक बे-तकल्लुफ़ी है मौत से, जो जिन्दगी से कहीं भी नहीं| माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे । एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रोदुंगी तोहे ॥ माटी का शरीर, माटी का बर्तन, नेकी कर भला कर, भर बरतन मे पाप पुण्य और सर पे ले| आईये हम भी साथ-साथ गुनगुनाएँ "भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे"..: भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे । मैं तो पनिया भरन से छूटी रे ॥ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय । जो दिल खोजा आपणा, तो मुझसा बुरा ना कोय ॥ ये तो घर है प्रेम का, खाला का घर नांहि । सीस उतारे भुँई धरे, तब बैठे घर मांहि ॥ हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को हुशारी क्या । रहे आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ॥ कहना था सो कह दिया, अब कछु कहा ना जाये । एक गया सो जा रहा, दरिया लहर समाये ॥ लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल । लाली देखन मैं गयी, मैं भी हो गयी लाल ॥ हँस हँस कु...

"जाने कहाँ गए वो दिन...", कौन कौन से थे इस गीत के वो तीन अन्तरे जो जारी नहीं हुए?

एक गीत सौ कहानियाँ - 95 'जाने कहाँ गए वो दिन ...'   रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, हम रोज़ाना  रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारे जीवन से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़े दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तम्भ 'एक गीत सौ कहानियाँ'।  इसकी 95-वीं कड़ी में आज जानिए 1970 की फ़िल्म ’मेरा नाम जोकर’ के मशहूर गीत "जाने कहाँ गए वो दिन..." के बारे में जिसे मुके...

छम छम नाचत आई बहार....एक ऐसा मधुर गीत जिसे सुनकर कोई भी झूम उठे

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 366/2010/66 "ए क बार फिर बसंत जवान हो गया, जग सारा वृंदावन धाम हो गया, आम बौराई रहा, सरसों भी फूल रहा, खेत खलिहान शृंगार हो गया, पिया के हाथ दुल्हन शृंगार कर रही, आज धूप धरती से प्यार कर रही, बल, सुंदरता के आगे बेकार हो गया, सृष्टि पे यौवन का वार हो गया, रात भी बसंती, प्रभात भी बसंती, बसंती पिया का दीदार हो गया, सोचा था फिर कभी प्यार ना करूँगा, पर 'अंजाना' बसंत पे निसार हो गया, एक बार फिर बसंत जवान हो गया।" अंजाना प्रेम ने अपनी इस कविता में बसंत की सुंदरता को शृंगार रस के साथ मिलाकर का बड़ा ही ख़ूबसूरत नज़ारा प्रस्तुत किया है। दोस्तों, इन दिनों आप 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर सुन रहे हैं इस रंगीले मौसम को और भी ज़्यादा रंगीन बनानेवाले कुछ रंगीले गीत इस 'गीत रंगीले' शृंखला के अंतर्गत। आज प्रस्तुत है राग बहार पर आधारित लता मंगेशकर की आवाज़ में फ़िल्म 'छाया' का गीत "छम छम नाचत आई बहार"। राजेन्द्र कृष्ण के लिखे इस गीत की तर्ज़ बनाई है सलिल चौधरी ने। १९६१ की यह फ़िल्म ऋषिकेश मुखर्जी की फ़िल्म थी जिसमें मुख्य कलाकार थे सुनिल...