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Friday, November 29, 2013

नए साल पर टी सीरीस का एक संगीतमय तोहफा : "आई लव न्यू ईयर"

टी सीरीस के भूषण कुमार संगीतमयी रोमांटिक फिल्मों के सफल निर्माता रहे हैं. चूँकि इन फिल्मों का संगीत भी दमदार रहता है तो उनके लिए दोहरे फायदे का सौदा साबित होता है. इस साल आशिकी २ और नौटंकी साला की जबरदस्त सफलता के बाद वो हैट्रिक लगाने की तैयारी में थे आई लव न्यू ईयर के साथ. मगर फिल्म की प्रदर्शन तिथि, एक के बाद एक कारणों से टलती चली गयी. पहले यमला पगला दीवाना २ के प्रमोशन के चलते फिल्म का प्रदर्शन अप्रैल-मई से टल कर सितम्बर कर दिया गया. फिर भूषण और फिल्म के नायक सन्नी देओल के बीच कुछ धन राशि के भुगतान को लेकर मामला छिड़ गया. अब जाकर फिल्म को दिसंबर के अंतिम सप्ताह में जारी करने की सहमती बनी है. फिल्म के शीर्षक के लिहाज से भी ये एक सही कदम है. पर अभी तक फिल्म का प्रचार ठंडा ही दिखाई दे रहा है. बहरहाल हम फिल्म के संगीत की चर्चा तो कर ही सकते हैं. 

फिल्म में प्रीतम प्रमुख संगीतकार हैं, मगर एक एक गीत फलक शबीर (नौटंकी साला वाले), और अनुपम अमोद के हिस्से भी आया है, साथ ही पंचम द के एक पुराने हिट गीत को भी एल्बम में जोड़ा गया है. गीत मयूर पुरी, सईद कादरी और फलक शबीर ने लिखे हैं. फिल्म के निर्देशक राधिका राव और विनय सप्रू हैं जिनकी पहली फिल्म लकी - नो टाईम फॉर लव बॉक्स ऑफिस पर भी लकी साबित हुई थी, जिसमें सलमान खान की लोकप्रियता और अदनान सामी के संगीत का बड़ा योगदान था. यानी इस निर्देशक जोड़ी को अच्छे संगीत की पहचान निश्चित ही है और जब साथ हो टी सीरीस जैसे बैनर का तो उम्मीदें बढ़ ही जाती है, आईये देखें कि कैसा है आई लव न्यू ईयर  के संगीत एल्बम का हाल.

गुड नाल इश्क मीठा एक पारंपरिक पंजाबी गीत है जो शादी ब्याह और संगीत के मौकों पर अक्सर गाया बजाया जाता है. इसी पारंपरिक धुन को संगीतकार अनुपम अमोद ने बेहद अच्छे टेक्नो रिदम में डाल कर पेश किया है एल्बम के पहले गीत में, और उतने ही मस्त मौजी अंदाज़ में गाया है बेहद प्रतिभाशाली तोचि रैना ने जिनकी आवाज़ को अलग से पहचाना जा सकता है. आज के दौर में जहाँ नए गायकों की भरमार है ये एक बड़ी उपलब्धि है. गीत निश्चित ही कदम थिरकाने वाला है. मयूर पुरी ने 'पंच' को वैसा ही रखा है और उसके आप पास अच्छे शब्द रचे हैं.

तुलसी कुमार और सोनू निगम साथ आये हैं अगले गीत जाने न क्यों/आओ न में. धीमी शुरुआत के बाद गीत अच्छी उड़ान भरता है और एक बार श्रोताओं को अपनी जद में लेने के बाद अपनी पकड़ ढीली नहीं पड़ने देता. रिदम में तबले का सुन्दर प्रयोग है अंतरे से पहले सेक्सोफोन का पीस भी शानदार है. सोनू पूरे फॉर्म में हैं और तुलसी की आवाज़ भी उनका साथ बखूबी देती है. सैयद कादरी के शब्द बेहद अच्छे हैं. बहुत ही खूबसूरत युगल गीत है जो कहीं कहीं प्रीतम के जब वी मेट दिनों की यादें ताज़ा कर देती हैं.

फलक शबीर के बारे में हम पहले भी काफी कुछ कह चुके हैं. उनका लिखा, स्वरबद्ध किया और बहतरीन अंदाज़ में गाया गीत जुदाई एल्बम का खास आकर्षण है. धुन में कुछ खास नयेपन के अभाव में भी गीत टीस से भर देता है. इसे एक ब्रेक अप गीत माना जा सकता है. और शायद एक ब्रेक अप सिचुएशन पर पहली बार कोई गीत बना है. गीत सुनते हुए आप महसूस कर सकते हैं दो छूटते हुए हाथ, चार नम ऑंखें और बहुत सा दर्द. गीत का एक अनप्लग्ड संस्करण भी है जो सुनने लायक है.

तुलसी कुमार एक बार फिर सुनाई देती है, इस बार शान के साथ गीत हल्की हल्की में. ये एक हंसी मजाक वाला गीत है. वास्तव में इस एल्बम के सभी गीत मेरे लिए एक सुखद आश्चर्य ही हैं. हर गीत को सुनने से पहले मेरी उम्मीदें बिलकुल शून्य थी, मगर हर गीत को सुनना एक हैरान करने वाला अनुभव साबित हुआ हर बार. ये भी एक बेहद सुरीला गीत है, जहाँ संयोजन में सधी हुई सटीकता है. दोनों गायकों की परफेक्ट ट्यूनिंग जानदार है और मयूर पुरी के शब्द भी ठीक ठाक है.

पंचम ने फिल्म सागर में जो थीम पीस रचा था, टी सीरिस ने उसी धुन को लेकर एस पी बालासुब्रमण्यम से गवाया था बरसों पहले आज मेरी जान का नाद. इसी रचना को एक बार फिर से जिंदा किया गया है एल्बम में. मौली दवे की नशीली आवाज़ में इस रचना को सुनना पंचम की सुर गंगा में एक बार फिर उतरने जैसा है. खुशी की बात है कि गीत की मूल सरंचना से अधिक छेड छाड नहीं की गयी है.

आई लव न्यू ईयर एक अच्छी एल्बम है जहाँ कोई भी गीत निराश नहीं करता. ये गीत धीरे धीरे आपके दिल में उतर जायगें और लंबे समय तक वहीँ घर बना लेंगें.

एल्बम के बहतरीन गीत - गुड नाल इश्क, जुदाई, आओ न, आजा मेरी जान 
हमारी रेटिंग - ४.४  .   

  

Friday, November 8, 2013

'चिंगम' चबा के आया गोरी तेरे प्यार में

संगीतकार जोड़ी विशाल शेखर का अपना एक मुक्तलिफ़ अंदाज़ है. उनके गीतों में नयापन भी होता है और अपने ही किस्म की शोखी भी. अनजाना अनजानी, आई हेट लव स्टोरी और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के संगीत में हमें यही खूबी बखूबी नज़र आई थी. इस साल आई चेन्नई एक्सप्रेस में उनके गीत बेशक से कामियाब रहे पर उन्हें हम विशाल शेखर के खास अंदाज़ से नहीं जोड़ सकते. इसी कमी को पूरा करने के लिए ये जोड़ी लौटी है अपनी नई एल्बम गोरी तेरे प्यार में के साथ. आईये देखें क्या क्या लाये हैं विशाल शेखर अपने संगीत पिटारे में इस बार. 

आइटम रानी ममता शर्मा और मिका सिंह की जोशीली आवाज़ में आया है पहला गीत टून।  रिदम ऐसी है जो क़दमों को थिरकने पर मजबूर कर दे. ममता और मिका की आवाजों में पर्याप्त मस्ती और जोश है. निश्चित ही विशाल शेखर का निराला रूप जमकर बिखरा है इस शादी गीत में. 

अदिति सिंह शर्मा और सनम पुरी है मायिक के पीछे, पार्टी गीत धत तेरे की में. शब्द कुछ आपत्तिजनक अवश्य हैं और गीत की मस्ती और रिदम जबरदस्त है. पार्टी का मूड हो, मन और तेवर कुछ बागी से हों तो ये नया गीत लगाएं और जम कर नाचिये. एक और विशाल शेखर ट्रेड मार्क गीत. 

चिंगम गीत एल्बम का सबसे सधा हुआ गीत है जिसमें शंकर महादेवन की चटपटी आवाज़ को बहुत अच्छे से टक्कर दी है श्यामली खोलगडे ने. गीत का आरंभ जिस पीस से होता है उसी से खत्म भी होता है, ये बहुत ही बढ़िया पीस है, गीत का संयोजन भी एल्बम के अन्य गीतों से बेहतर है. जल्दी ही ये गीत श्रोताओं की जुबाँ पे चढा होगा इसमें कोई शक नहीं. 

कमाल खान और नीति मोहन की सुरीली आवाजों में तेरे नैना गीत बढ़िया है पर कुछ नया पेश नहीं करता। राहत मार्का इस सूफी गीत को कमाल ने बेशक बहुत बढ़िया निभाया है. नीति बहुत बाद में गीत का हिस्सा बनती है, पर इस गीत को कमाल का ही कमाल माना जाना चाहिए।

श्रुति पाठक और नितीश कदम का गाया दिल डफ्फर एक बार फिर विशाल शेखर के चिर परिचित अंदाज़ का गीत  है जहाँ नितीश की दबी आवाज़ पर श्रुति की मिठास भरी खुली खुली आवाज़ का विरोधाभास खूब जचता है. गीत का संयोजन सरल और मनभावन है. एल्बम के ने गीतों की तुलना में इस गीत के शब्द बेहतर हैं. 

एक बेहद अलग अंदाज़ का गुज्जू गीत है मोटो घोटालो, जहाँ शब्द चटपटे हैं और धुन नटखटी है. सुखविंदर की आवाज़ गीत की जान है. गुजराती शब्द का तडका बेहद सुहाता है. एल्बम में विशाल शेखर की हर एल्बम की तरह एक मेशअप भी है जो ठीक ठाक है पर उतना बढ़िया नहीं है जितना स्टूडेंट ऑफ द ईयर का था. बहरहाल एक बार फिर विशाल शेखर ने अच्छी वापसी की है. अन्विता गुप्तन, कौसर मुनीर, और कुमार के शब्द कुछ अनूठे न सही पर शायद फिल्म की कहानी की जरुरत अनुरूप हैं. 

एल्बम के बेहतरीन गीत - चिंगम, धत तेरे की, दिल डफ्फर
हमारी रेटिंग - ४/५         
      

Friday, November 1, 2013

बुलट राजा आये हैं तमंचे पे डिस्को कराने

त्योहारों का मौसम गर्म है, यही वो समय होता है जब सभी नाम चीन सितारे जनता के दरबार में उतरते हैं अपने अपने मनोरंजन का पिटारा लेकर.  इस बार दिवाली पर हृतिक क्रिश का चोगा पहनेगें तो क्रिसमस पर अमीर धूम मचाने की तैयारी कर रहे हैं. शाहरुख, सलमान, अक्षय और अजय देवगन कुछ छुट्टी के मूड में थे तो उनकी कमी को भरने मैदान में उतरेगें शाहिद (आर...राजकुमार), इमरान (गोरी तेरे प्यार में) जैसे नए तीरंदाज़ तो सैफ (बुलट राजा) और सन्नी देओल (सिंह साहेब द ग्रेट) जैसे पक्के खिलाड़ी भी अपना जौहर लेकर दर्शकों के मनोरजन का पूरा इंतजाम रखेंगें. इन सभी फिल्मों के संगीत की हम बारी बारी चर्चा करेगें, तो चलिए आज जिक्र छेड़ते हैं सैफ अली खान और सोनाक्षी सिन्हा की बुलट राजा के सगीत की.

तिन्ग्मान्शु धुलिया पान सिंह तोमर और साहेब बीवी और गैंगस्टर जैसी लीक से हटकर फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, पर जहाँ तक बुलट राजा का सवाल है, ऐसा लग रहा है कि ये बॉलीवुड व्यावसायिक फिल्मों की तरफ मसालों से भरी पूरी होने वाली है. संदीप नाथ, कौसर मुनीर, शब्बीर एहमद और रफ़्तार के हैं शब्द और प्रमुख संगीतकार हैं साजिद वाजिद, एक गीत देकर अतिथि संगीतकार की भूमिका निभा रहे हैं मशहूर पॉप बैंड RDB. 

बुलट राजा की संगीत एल्बम RDB के दनदनाते तमंचे पे डिस्को से खुलता है. गीत में निंदी कौर भी हैं RDB के साथ. गीत में पर्याप्त मस्ती है और रिदम भी कदम थिरकाने वाला है. शब्द बेतरतीब हैं जिनका जिक्र जरूरी नहीं है, गीत का उद्देश्य कदम थिरकाना और मौज मस्ती लुटाना है जिसमें गीत कामियाब है. 

श्रेया घोषाल की मधुर आवाज़ है गीत सामने है सवेरा में. गीत बेहद मधुर है, और साजिद वाजिद की चिरपरिचित छाप लिए हुए है. पुरुष स्वर है वाजिद की इस युगल गीत में. गीत में बोन्नी चक्रवर्ति का गाया एक छोटा सा बांग्ला पीस भी है जिसके साथ श्रेया के स्वर बेहद खूबसूरती से घुलमिल गए हैं. कह सकते है कि ये एल्बम का सबसे यादगार गीत होने वाला है. 

बहुत दिनों बाद सुनाई दिए नीरज श्रीधर, जो इन दिनों प्रीतम कैम्प से कुछ गायब से हैं. गीत है हरे गोविंदा हरे गोपाला. नीरज का ठप्पा है पूरे गीत में. यूँ भी वो सैफ के लिए बहुत से हिट गीतों में पार्श्व गायन कर चुके हैं. शब्द चुटीले हैं और धुन भी बेहद कैची है. गीत का फिल्मांकन इसे लोकप्रिय बनाने में मदद करेगा.  

ममता शर्मा के लेकर एक और मुन्नी सरीखा आईटम रचने की कोशिश की है साजिद वाजिद ने डोंट टच माई बॉडी में. ममता ने जरूरी उन्ह आह भरा है गीत में (कन्फुज शब्द का उच्चारण बेहद चुटीला लगता है). पर शब्दों की तुकबंदी बेअसर है, धुन और संयोजन में भी कोई नयापन नहीं मिलता. ममता जैसी गायिका से कुछ और भी तरह के गीत गवा लीजिए साजिद वाजिद भाई, और मुन्नी के हैंगओवर से बहार आ जाईये. 

कीर्ति सगाथिया ने सुखविंदर के अंदाज़ में गाया है बुलट राजा का शीर्षक गीत. गीत की रिदम और ताल बेशक जबरदस्त है. पर गीत साजिद वाजिद के दबंग और दबंग २ के शीर्षक गीतों से कुछ अलग और बेहतर पेश नहीं करता. हुर्र...चुर्र मुर्र...सब मसाले ज्यों के त्यों मौजूद हैं यहाँ भी. 

सटाके ठोको फिर एक ऐसा गीत है जहाँ बस एक पंच शब्द युग्म पर गीत परोसा गया है. कीर्ति सगाथिया ने अच्छा निभाया है गीत का. शब्दों में भी यहाँ कुछ विविधता है, और वाजिद वाजिद ने संयोजन भी सिचुएशन के हिसाब से बढ़िया किया है. गीत परदे पर बेहद बढ़िया लगेगा, हाँ फिल्म के जाने के बाद इसे याद रखा जायेगा या नहीं, कहना मुश्किल है.

एल्बम के बहतरीन गीत - सामने है सवेरा, तमंचे पे डिस्को, हरे गोविदा हरे गोपाला...
हमारी रेटिंग - ३.४/५ 

Monday, June 3, 2013

राम संपथ सफल रहे 'फुकरों' संग एक बार फिर कुछ नया करने में

ताज़ा  सुर ताल - फुकरे

मित त्रिवेदी की ही तरह राम सम्पंथ भी एक और ऐसे संगीतकार जिनके काम से हमेशा ही नयेपन की उम्मीद रहती है. राम की नयी एल्बम है फिल्म फुकरे  का संगीत. आईये आज की इस महफ़िल में चर्चा करें इसी एल्बम की. यहाँ गीतकार हैं विपुल विग और मुन्ना धिमान. गौरतलब है कि विपुल फिल्म के स्क्रीन लेखक भी हैं. 

शीर्षक गीत की रफ़्तार, राम के रचे डी के बॉस  जैसी है, यहाँ भी भूत  है जो लँगोटी लेके भाग  रहा है, पर शाब्दिक रूप से गीत का फ्लेवर काफी अलग है. एक नए गायक अमजद भगडवा की ताज़ी ताज़ी आवाज़ में है ये गीत और शीर्षक गीत अनुरूप पर्याप्त मसाला है गीत में. अमजद की आवाज़ प्रभावी है. 

क्लिंटन सेरेजो की दमदार आवाज़ में है अगला गीत रब्बा, जो शुरू तो होता है बड़े ही नर्मो नाज़ुक अंदाज़ में होता है जिसके बाद गीत का रंग ढंग पूरी तरह से बदल जाता है, शब्द बेहद ही खूबसूरत है, और संगीत संयोजन में विविधता भरपूर है जिससे श्रोता पूरे समय गीत से जुड़ा ही रहता है 

संगीत  संयोजन की यही विविधता ही अगले गीत जुगाड  की भी शान है, जहाँ धुन कव्वाली नुमा है और बेहद सरल है. जुबान पर चढ़ने में सहज है और तीन अंतरे का ये गीत भी पूरे समय श्रोताओं की दिलचस्पी बरकरार रखता है. शब्द एकदम सामयिक हैं, वास्तव में यही आज की तस्वीर भी है, बेहद सरल शब्दों में गीतकार बहुत कुछ कह गए हैं यहाँ. जुगाड  के इस काल में ये गीत किसी एंथम से कम नहीं है. और हाँ गायक के रूप में कैलाश खेर से बेहतर चुनाव और कौन हो सकता था, कीर्ति सगाथिया ने भी उनका अच्छा साथ निभाया है.

आंकड़ों की बात की जाए तो मिका  सिंह का कोई तोड़ नहीं है, शायद ही उनका कोई गीत कम चर्चित रह जाता होगा. अगले गीत में मिका के साथ हैं खुद राम सम्पंथ और तरन्नुम मलिक. बेडा  पार  नाम के इस गीत में भी राम ने विविधता से सजाया है, पर गीत उतना प्रभावी नहीं बन पाया. गीत का कैच भी उतना जबरदस्त नहीं है जितना उपरोक्त दो गीतों में था. 

लग  गयी लॉटरी  एक और मजेदार गीत हैं, राम संपथ और तरन्नुम मालिक के युगल स्वरों में ये गीत अपनी सरल धुन के चलते जुबाँ पे चढ़ने लायक है. गीत बहुत लंबा नहीं है इसलिए विविधताओं के अभाव में भी गीत बढ़िया लगता है. 

राम संपथ की एल्बम हो और सोना महापात्रा की आवाज़ में कोई गीत न हो कैसे संभव है ? अम्बर सरिया  (अमृतसर के मुंडे ) को संबोधित ये गीत बेहद मधुर है. हालाँकि धुन कुछ कुछ हिमेश के रचे नमस्ते  लन्दन  के रफ्ता रफ्ता  गीत से काफी हद तक मिलती जुलती है पर फिर भी सोना ने इसे एक अलग ही रूप दे डाला है. मुन्ना धिमान के पंजाबी जुबान की चाशनी में डूबे शब्द इसकी मधुरता में जरूरी इजाफा करते हैं.  एल्बम का सबसे बढ़िया गीत है ये और राम के बहतरीन गीतों में से निश्चित ही एक.

हमारी राय में एल्बम के बहतरीन गीत -

जुगाड, रब्बा , और अम्बर सरिया 

हमारी रेटिंग - ३.७ / ५  

संगीत समीक्षा - सजीव सारथी

आवाज़ - अमित तिवारी

 

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