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Sunday, January 27, 2013

दिन के चौथे प्रहर के कुछ आकर्षक राग

स्वरगोष्ठी – 106 में आज

राग और प्रहर – 4

गोधूली बेला के श्रम-परिहार करते राग


‘स्वरगोष्ठी’ के 106ठें अंक में, मैं कृष्णमोहन मिश्र आप सब संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। इन दिनों आपके प्रिय स्तम्भ पर लघु श्रृंखला ‘राग और प्रहर’ जारी है। पिछले अंक में हमने दिन के तीसरे प्रहर के रागों की चर्चा की थी। आज बारी है, चौथे प्रहर के रागों की। इस प्रहर में सूर्य अस्ताचलगामी होता है। इस प्रहर के उत्तरार्द्ध काल को गोधूली बेला भी कहा जाता है। चूँकि इस समय गायों का झुण्ड चारागाहों से वापस लौटता है और उनके चलने से धूल का एक गुबार उठता है, इसीलिए इसे गोधूली बेला कहा जाता है। इस प्रहर के रागों में ऐसी स्वर-संगतियाँ होती हैं, जिनसे दिन भर के श्रम से तन और मन को शान्ति मिलती है। आज के अंक में हम इस प्रहर के हेमन्त, पटदीप, मारवा और गौड़ सारंग रागों की चर्चा करेंगे। 


दिन का चौथा प्रहर, अपराह्न तीन बजे से लेकर सूर्यास्त होने के बीच की अवधि को माना जाता है। यह वह समय होता है, जब जन-जीवन अपने दैनिक शारीरिक और मानसिक क्रियाओं से थका-हारा होता है तथा उसे थोड़ी विश्रान्ति की तलाश होती है। ऐसे में दिन के चौथे प्रहर के राग उसे राहत देते हैं। चौथे प्रहर में प्रयोग किये जाने वाले रागों में राग ‘गौड़ सारंग’ एक ऐसा राग है जिसे तीसरे प्रहर में भी गाया-बजाया जाता है। सारंग अंग से संचालित होने वाले इस राग को कल्याण थाट के अन्तर्गत माना जाता है। सम्पूर्ण-सम्पूर्ण जाति के इस राग के आरोह और अवरोह दोनों में वक्र गति से स्वर लगाए जाते हैं। राग में दोनों मध्यम का और शेष सभी शुद्ध स्वरों का प्रयोग होता है। आलाप में पंचम, ऋषभ, षडज और निषाद, ऋषभ, षडज का आवर्तन किया जाता है। इसका वादी स्वर गान्धार और संवादी स्वर धैवत अथवा निषाद होता है।

आज हम आपको राग ‘गौड़ सारंग’ पर आधारित एक फिल्मी गीत सुनवा रहे हैं। संगीतकार अनिल विश्वास ने 1953 में फिल्म 'हमदर्द' के लिए एक गीत 'रागमाला' में तैयार किया था। ‘रगमाला’ संगीत का वह प्रकार होता है, जब किसी गीत में एक से अधिक रागों का प्रयोग हो और सभी राग स्वतंत्र रूप से रचना में उपस्थित हों। अनिल विश्वास ने गीत के चार अन्तरों को चार अलग-अलग रागों में संगीतबद्ध किया था। उन दिनों का चलन यह था कि ऐसे गीतों को गाने के लिए फिल्म जगत के बाहर के विशेषज्ञों को बुलाया जाता था। परन्तु अनिल विश्वास ने इस युगलगीत में पुरुष स्वर के लिए मन्ना डे का और नारी स्वर के लिए लता मंगेशकर का चयन किया। फिल्म 'हमदर्द' के इस गीत के बोल हैं- ‘ऋतु आए ऋतु जाए सखी री मन के मीत न आए...’। गीत की स्थायी की पंक्ति से लेकर अन्तरे के समापन तक राग 'गौड़ सारंग' के स्वरों में पिरोया गया है। गीत के शेष तीन अन्तरे अलग-अलग रागों में निबद्ध हैं। इस गीत को ऐतिहासिक बनाने में वाद्य संगीत के श्रेष्ठतम कलाकारों का योगदान भी रहा। गीत में सुप्रसिद्ध बाँसुरी वादक पन्नालाल घोष और सारंगी वादक पण्डित रामनारायण ने संगति की थी। आज हम प्रेम धवन के लिखे, अनिल विश्वास द्वारा संगीतबद्ध किये तथा मन्ना डे व लता मंगेशकर के स्वरों में 'हमदर्द' फिल्म के इस 'रागमाला' गीत का पहला अन्तरा सुनते हैं।


राग ‘गौड़ सारंग’ : फिल्म ‘हमदर्द’ : ‘ऋतु आए ऋतु जाए सखी री...’ : मन्ना डे और लता मंगेशकर



दिन के चौथे प्रहर का एक बेहद प्रचलित राग ‘पटदीप’ है। इसे राग ‘पटदीपिका’ भी कहते हैं। काफी थाट के अन्तर्गत माना जाने वाला राग पटदीप औड़व-सम्पूर्ण जाति का राग है। इसके आरोह में ऋषभ और धैवत स्वर का प्रयोग नहीं होता। गान्धार कोमल और शेष सभी स्वर शुद्ध प्रयोग किए जाते हैं। इस राग का वादी स्वर पंचम और संवादी स्वर षडज होता है। आज के अंक में हम आपको राग पटदीप में निबद्ध श्रृंगार रस प्रधान एक मोहक खयाल रचना सुनवाते हैं। इसे प्रस्तुत कर रहे हैं, रामपुर, सहसवान घराने के जाने-माने गायक उस्ताद राशिद खाँ। राग पटदीप के इस खयाल के बोल हैं- ‘रंग रँगीला बनरा मोरा हमरी बात न माने...’ और यह द्रुत एकताल में निबद्ध है। तबला संगति पण्डित विश्वनाथ शिरोड़कर ने की है।


राग ‘पटदीप’ : ‘रंग रँगीला बनरा मोरा...’ : उस्ताद राशिद खाँ




चौथे प्रहर के रागों में ‘हेमन्त’ भी एक बेहद मधुर राग है। इसे राग ‘हेम’ भी कहा जाता है। कुछ विद्वानों का मत है कि उस्ताद अलाउद्दीन खाँ ने इस राग का सृजन किया था। परन्तु फिल्म संगीतकार एस.एन. त्रिपाठी के मतानुसार तानसेन इस राग के सर्जक थे और उन्होने इस राग की एक प्राचीन ध्रुवपद बन्दिश- ‘सुध बिसर गई आज अपने गुनन की...’ की रचना की थी। श्री त्रिपाठी ने इस ध्रुवपद रचना को 1962 की अपनी फिल्म ‘संगीत सम्राट तानसेन’ में भी इस्तेमाल किया था। ‘हेमन्त’ औड़व-सम्पूर्ण जाति का राग है, जिसे पूर्वी थाट के अन्तर्गत माना जाता है। इसके आरोह में गान्धार धैवत स्वर का प्रयोग नहीं होता। इसमें ऋषभ, गान्धार धैवत स्वर कोमल और मध्यम स्वर तीव्र प्रयोग किया जाता है। इसका वादी स्वर ऋषभ और संवादी पंचम होता है। यह ऋतु प्रधान राग भी है। हेमन्त ऋतु में यह किसी भी समय गाया-बजाया जा सकता है, किन्तु अन्य परिवेश में इसे सूर्यास्त से पहले गाने-बजाने की परम्परा है। इस राग में उप-शास्त्रीय और सुगम संगीत की रचनाएँ खूब निखरती है। आज हम आपको राग ‘हेमन्त’ की एक बेहद लोकप्रिय ठुमरी- ‘याद पिया की आए...’ सुनवाते हैं। इसे सुप्रसिद्ध गायक उस्ताद बड़े गुलाम अली खाँ ने बड़े भावपूर्ण अंदाज़ में प्रस्तुत किया है।

राग ‘हेमन्त’ : ठुमरी- ‘याद पिया की आए...’ : उस्ताद बड़े गुलाम अली खाँ



लघु श्रृंखला ‘राग और प्रहर’ की आज की कड़ी में हम चौथे प्रहर के रागों की चर्चा कर रहे हैं। इस प्रहर में में गाये-बजाये जाने वाले रागों में ‘मारवा’ एक अत्यन्त भावपूर्ण राग है। यह मारवा थाट का आश्रय राग है, जिसकी जाति षाड़व-षाड़व है। इसमें पंचम स्वर का प्रयोग नहीं किया जाता। कोमल ऋषभ और तीव्र मध्यम स्वर का प्रयोग होता है। पूर्वांग प्रधान इस राग का वादी स्वर धैवत और संवादी स्वर ऋषभ होता है। राग मारवा में प्रयोग किये जाने वाले स्वर राग पूरिया और सोहनी में भी होते हैं। परन्तु राग पूरिया का चलन सप्तक के पूर्वांग में और सोहनी का चलन सप्तक के उत्तरांग में होता है, जबकि मारवा का चलन सप्तक के मध्य अंग में होता है। इसके अलावा मारवा में ऋषभ और धैवत स्वर बलवान होता है, जबकि पूरिया में निषाद और गान्धार स्वर बली होते हैं। राग मारवा के स्वरों में गोधूली बेला के परिवेश को सार्थक बनाने की अद्भुत क्षमता होती है। अब हम आपको राग मारवा की एक मधुर रचना सितार पर सुनवाते हैं। वादक है, विश्वविख्यात सितार-वादक उस्ताद विलायत खाँ। तबला संगति पण्डित अनिंदों चटर्जी ने की है। आप मधुर सितार-वादन का आनन्द लीजिए और मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम लेने की अनुमति दीजिए।


राग ‘मारवा’ : मध्य लय तीनताल का तराना : उस्ताद विलायत खाँ



आज की पहेली

‘स्वरगोष्ठी’ के 106ठें अंक की पहेली में आज हम आपको एक राग आधारित फिल्मी गीत का अंश सुनवा रहे है। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। पहेली के 110वें अंक तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला का विजेता घोषित किया जाएगा। 



1 - संगीत के इस अंश को सुन कर पहचानिए कि यह गीत किस राग पर आधारित है?

2 - इस गीत को किस ताल में निबद्ध किया गया है?

आप अपने उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 108वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ के 104थे अंक में हमने आपको 1966 में बनी फिल्म ‘मेरा साया’ से एक राग आधारित गीत का अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग भीमपलासी और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- संगीतकार मदनमोहन। दोनों प्रश्नो के सही उत्तर जबलपुर की क्षिति तिवारी, लखनऊ के प्रकाश गोविन्द और हमारे एक नए पाठक मिनिसोटा, अमेरिका से दिनेश कृष्णजोइस ने दिया है। बैंगलुरु के पंकज मुकेश और जौनपुर के डॉ. पी.के. त्रिपाठी ने एक-एक प्रश्न का ही सही जवाब दिया है। इन्हें एक-एक अंक से ही सन्तोष करना होगा। पाँचो प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ।

झरोखा अगले अंक का

मित्रों, ‘स्वरगोष्ठी’ पर इन दिनो लघु श्रृंखला ‘राग और प्रहर’ जारी है। आगामी अंक में हम आपके साथ रात्रि के पहले प्रहर अर्थात सूर्यास्त के बाद से लेकर रात्रि के नौ बजे के मध्य प्रस्तुत किये जाने वाले रागों पर चर्चा करेंगे। प्रत्येक रविवार को प्रातः साढ़े नौ बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के एक नए अंक के साथ उपस्थित होते हैं। आप सब संगीत-प्रेमियों से अनुरोध है कि इस सांगीतिक अनुष्ठान में आप भी हमारे सहभागी बनें। आपके सुझाव और सहयोग से हम इस स्तम्भ को और अधिक उपयोगी स्वरूप प्रदान कर सकते हैं।


प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र 

Friday, November 14, 2008

वो बुतखाना, ये मयखाना सब धोखा है...

भोपाल शहर की एक अलसाई सी दोपहर, एक सूनी गली का आखिरी मकान जहाँ जमा हैं "मार्तण्डया" संगीत समूह के सभी संगीत सदस्य. फिज़ा में विरक्ति के स्वर हैं, जैसे सब देखा जा चुका है, अनुभव किया जा चुका है महसूस किया जा चुका है हुस्न और इश्क जैसी सब बातों का खोखलापन, अब कहाँ दिल लगायें. मन बैरागी चाहता है कि कहीं दूर जंगल में डेरा डाला जाए और दरवेशों में बसर किया जाए. कुछ ऐसे ही भाव लिए है वर्तमान सत्र का ये २० वां गीत. संजय द्विवेदी ने लिखा है इसे और स्वरबद्ध किया है चेतैन्य भट्ट और कृष्णा पंडित ने. आवाजें हैं कृष्णा पंडित, रुद्र प्रताप और अभिषेक की. टीम के गिटारिस्ट हैं सागर और रिदम संभाला है हेमंत ने. सुनते हैं इस उभरते हुए जबरदस्त सूफी संगीत समूह का ये नया दमदार गीत. अपनी बेशकीमती राय देकर इन नए संगीत योद्धाओं का मार्गदर्शन अवश्य करें.

गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -



After the success of their first song "sooraj chand aur sitare" with us, this new upcoming sufi band from bhopal "martandya" is back again, with a completely different flavored song - "husn". under the guidance of Krishana Pandit and Chaitanya Bhatt, Rudra Pratap and Abhishek done the vocals. supported by Hemant and Sagar, this song has again penned by Sanjay Dwivedi. if you like the song do spare a few minutes to encourage/ guide these young talented musicians.

To listen to this brand new song, please click on the player.




Lyrics - गीत के बोल

ये हुस्न है क्या, ये इश्क है क्या,
सब धोखा है, सब धोखा है,
ये चाँदनी शब्, ये ठंडी हवा,
सब धोखा है, सब धोखा है...

वो कैस की लैला धोखा थी,
वो हीर का राँझा धोखा था,
ये ताज महल, ये लाल किला,
सब धोखा है, सब धोखा है ....

वहां शेख ठगी में माहिर है,
यहाँ साकी चालें चलता है,
वो बुतखाना, ये मयखाना,
सब धोखा है, सब धोखा है ...

अब दरवेशों में काट उमर,
यहाँ दौलत शोहरत छोड़ भी आ,
क्या फरक हुआ, जब जान लिया,
सब धोखा है, सब धोखा है ...

दूसरे सत्र के २० वें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज

SONG # 20, SEASON # 02, "HUSN", OPENED ON AWAAZ ON 14/11/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.


Friday, October 17, 2008

मैं इबादत करूँ...या मोहब्बत करूँ.....

दूसरे सत्र के सोलहवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज -

सूफी संगीत की मस्ती का आलम कुछ अलग ही होता है. आज आवाज़ पर हम आपको जिस संगीत टीम से मिलवा रहे हैं उनका संगीत भी कुछ युहीं डुबो देने वाला है. भोपाल मध्य प्रदेश की यह संगीत टीम अब तक आवाज़ पर पेश हुई किसी भी संगीत टीम से बड़ी है, सदस्यों की संख्या के हिसाब से. आप कह सकते हैं कि ये एक मुक्कमल संगीत टीम है, जहाँ गायक, संगीत संयोजक गीतकार और सभी सजिंदें एक टीम की तरह मिल कर काम करते हैं. टीम की अगुवाई कर रहे हैं गायक अरेंजर और रिकोरडिस्ट कृष्णा पंडित और निर्देशक हैं चेतन्य भट्ट. साथ में हैं गीटारिस्ट सागर, रिदम संभाला है हेमंत ने गायन में कृष्णा का साथ दिया है अभिषेक और रुद्र प्रताप ने. इस सूफियाना गीत के बोल लिखे हैं गीतकार संजय दिवेदी ने. पूरी टीम ने मिलकर एक ऐसा समां बंधा है की सुनने वाला कहीं खो सा जाता है. तो सुनकर आनंद उठायें इस बेहद मदमस्त गीत का और इस दमदार युवा संगीत टीम को अपना आशीर्वाद और प्रेम देकर हौसला अफजाई दें.

गीत को सुनने के लिए नीचे वाले प्लेयर पर क्लिक करें-



A complete sufi band is here to present the 16th song of the season - "sooraj chand aur sitare". lead playback by Krishna Pandit supported by Abhishek aur Rudra Pratap, Chetanya Bhatt plays the director, lead guitarist is Sagar.Hemant handled the rhythm section while Krishna Pandit did the arranging and recording work. this very soulful sufiyana song has been penned by lyricist Sanjay Diwedi is surely has the power to uplift your spirit. so enjoy this song here and encourage this very young team who has all the elements in them to make it big in the coming days. all they need is your love and support.

Click on the player to listen to this brand new song -



गीत के बोल - Lyrics

सूरज चाँद और सितारे,
तेरे ही दम के सहारे,
तेरे ही करिश्में में जग समाया है,
मेरी साँसों में धडकनों में,
इश्क के जज्बातों में,
और सभी के दिलों में तू समाया है...
सूरज चाँद और सितारे ...

धडकनों की जबां पे नाम तेरा ही है,
हर एक लम्हें में जुस्तुजू तेरी है
इस गुलिस्तान में तुझको पाया,
आरजू में तू ही छाया,
मेरे हर सफर में तू समाया है...

इस जमीं आसमान में तेरा ही जलवा है,
तेरी एक नज़र से महका ये आलम है
हर तरफ़ है तेरा जादू,
हर खुशी हर गम है तू,
इस दुनिया का तू सरमाया है....

मैं इबादत करूँ या मोहब्बत करूँ
तेरे दीवाने पन में मैं दीवाना बनूँ,
तेरी चाहत में सबको भूलूँ
तू मेरा और मैं तेरा हो लूँ ,
तेरे ही इश्क में तुझको पाया है....


SONG # 16, SEASON # 02, "SOORAJ CHAND AUR SITARE..." OPENED ON AWAAZ, HINDYUGM ON 17/10/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.


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