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Tuesday, November 3, 2015

काजल कुमार की लघुकथा आढ़तिया

लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछली बार आपने अनुराग शर्मा के स्वर में उषा छाबड़ा की लघुकथा "बचपन का भोलापन" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं काजल कुमार लिखित लघुकथा आढ़तिया, जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

इस कहानी आढ़तिया का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 45 सेकंड है। इसका गद्य कथा-कहानी ब्लॉग पर उपलब्ध है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

कवि, कथाकार और कार्टूनिस्ट काजल कुमार के बनाए चरित्र तो आपने देखे ही हैं। उनकी व्यंग्यात्मक लघुकथायेँ "समय", "एक था गधा", "ड्राइवर", "लोकतनतर", और कुत्ता आप पहले सुन चुके हैं। काजल कुमार दिल्ली में रहते हैं।

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"कमाई इतनी भी नहीं हो रही थी कि खर्च निकल आए।”
 (काजल कुमार की लघुकथा "आढ़तिया" से एक अंश)


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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
आढ़तिया MP3

#Twenty Second Story, Adhatiya; Kajal Kumar; Hindi Audio Book/2015/22. Voice: Anurag Sharma

Tuesday, September 29, 2015

हार की जीत (सुदर्शन)

लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछली बार आपने मोनिका गुप्ता के स्वर में उन्हीं की व्यंग्य रचना "बिजली जाने का सुख" का पाठ सुना था।

आज हम आपके लिए लेकर आये हैं हिन्दी के अमर साहित्यकार पण्डित सुदर्शन की कालजयी रचना "हार की जीत", उषा छाबड़ा के स्वर में।

इस कहानी हार की जीत का गद्य भारत दर्शन पर उपलब्ध है. कहानी का कुल प्रसारण समय 11 मिनट 34 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।



पं0 बद्रीनाथ भट्ट "सुदर्शन" (1896-1967)

प्रेमचन्द, कौशिक और सुदर्शन, इन तीनों ने हिन्दी में कथा साहित्य का निर्माण किया है।
~ भगवतीचरण वर्मा (हम खंडहर के वासी)

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"खड़गसिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था। लोग उसका नाम सुनकर काँपते थे।”
 (पं0 सुदर्शन की कथा "हार की जीत" से एक अंश)


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हार की जीत mp3

#Eighteenth Story, Har Ki JeetHar Ki Jeet; Pt Sudarshan; Hindi Audio Book/2015/18. Voice: Usha Chhabra

Tuesday, September 22, 2015

बिजली जाने का सुख - मोनिका गुप्ता

लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछली बार आपने उषा छाबड़ा के स्वर में अमर साहित्यकार वैद्यनाथ मिश्र का व्यंग्य बम भोलेनाथ" सुना था।

आज हम आपकी सेवा में मोनिका गुप्ता लिखित व्यंग्य बिजली जाने का सुख, उन्हीं के स्वर में प्रस्तुत कर रहे हैं।

इस व्यंग्य बिजली जाने का सुख का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 29 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।


हरियाणा निवासी, साहित्यकार और रेडियो व्यक्तित्व मोनिका गुप्ता के लेख जाने माने राष्ट्रीय समाचार पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन कार्यक्रमों के अलावा इन्होनें जिंगल्स और वाईस ओवर भी किए हैं। हरियाणा साहित्य अकादमी से बाल साहित्य पुरस्कार मिल चुका है। अभी तक सात किताबे प्रकाशित हुई हैं जिसमें से दो नेशनल बुक ट्र्स्ट से हैं। लेखन और वाचन के साथ साथ कार्टूनों के माध्यम से भी अपने विचार व्यक्त कर रही है।

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"बिजली जाने के तो सुख ही सुख है।”
 (मोनिका गुप्ता के व्यंग्य "बिजली जाने का सुख" से एक अंश)


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बिजली जाने का सुख MP3

#Seventeenth Story, Bijli Jane Ka Sukh; Monica Gupta; Hindi Audio Book/2015/17. Voice: Monica Gupta

Tuesday, August 20, 2013

खत जो लिखा नहीं गया - शिशिर कृष्ण शर्मा

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा के स्वर में उन्हीं का लिखा लघु संस्मरण "पाकिस्तान में एक ब्राह्मण की आत्मा" सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं प्रसिद्ध फिल्म इतिहासकार, पत्रकार और लेखक शिशिर कृष्ण शर्मा द्वारा कश्मीर के मार्मिक हालात पर लिखित हृदयस्पर्शी कहानी खत जो लिखा नहीं गया जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

जनसत्ता सबरंग के दिसम्बर 1998 अंक में प्रकाशित प्रस्तुत कथा का गद्य "व्यंग्योपासना ब्लॉग" पर उपलब्ध है। "खत जो लिखा नहीं गया" का कुल प्रसारण समय 13 मिनट 11 सेकंड है। सुनिए और बताइये कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।




सालभर में कई कई रंग बदलते हैं ये पहाड़। इन दिनों जब वृक्षों पर नए पत्ते और फूल आते हैं तो पहाड़ों का रंग सुनहरी हो उठता है ! ...लालिमा लिए हुए सुनहरी।
 ~ शिशिर कृष्ण शर्मा

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"इंसान से हम भेड़-बकरियों में तब्दील हो गए। बहुत बुरा सुलूक़ करते थे वो लोग हमारे साथ।”
 (शिशिर कृष्ण शर्मा कृत "खत जो लिखा नहीं गया" से एक अंश)


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खत जो लिखा नहीं गया MP3

#28th Story, Khat Jo Likha Nahin Gaya: Shishir Krishna Sharma Hindi Audio Book/2013/28. Voice: Anurag Sharma

Tuesday, January 29, 2013

बोलती कहानियाँ: अपनों ने लूटा - डा. अमर कुमार

'बोलती कहानियाँ' स्तम्भ के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको प्रसिद्ध कहानियाँ सुनवाते रहे हैं। पिछले सप्ताह आपने पंडित बदरीनाथ भट्ट "सुदर्शन" की कहानी "परिवर्तन" का पॉडकास्ट अनुराग शर्मा की आवाज़ में सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं डा. अमर कुमार की लघुकथा "अपनों ने लूटा", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने। लघु कहानी "अपनों ने लूटा" का गद्य (टेक्स्ट) डा० अमर के पन्नों पर पढ़ा जा सकता है।

कहानी "अपनों ने लूटा" का कुल प्रसारण समय 3 मिनट 55 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।


जन्म मिथिला में, बचपन वैशाली में, प्रारंभिक शिक्षा कोसी क्षेत्र से, माध्यमिक शिक्षा एवँ जीवन से मुठभेड़ का प्रारंभ बैसवारा (रायबरेली) से, चिकित्सा स्नातक कानपुर मेडिकल कॉलेज़। सँप्रति निज चिकित्सा व्यवसाय व शौकिया लेखन रायबरेली में ही! चिकित्सक, ब्लॉगर, व्यंग्यकार, देशभक्त, डॉ अमर कुमार एक संवेदनशील व्यक्ति थे जोकि अपने प्रशंसकों के दिल में सदैव जीवित रहेंगे।  ~ अनुराग शर्मा

डॉक्टर की फ़ीस बहुत मंहगी होती है साहब जी ! हमारी बीमारी तो पंसारी के पुडिये वाली दवाईयों से ही ठीक हो जाती है।
(डा. अमर कुमार की कहानी "अपनों ने लूटा" से एक अंश)





अपने को डिस्कवर करने की मशक्कत में हूँ, बड़ा दुरूह है अभी कुछ बताना। एक उनींदे शहर के चिकित्सक को आकाश का जितना टुकड़ा दिखता है, उसीके कुछ शेड तलब ही मौज़ूद होने का सबब है। साहित्य मेरा व्यसन है और संवेदनायें मेरी पूँजी!
~ डॉ. अमर कुमार


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#Fourth Story, Apnon Ne Loota: Dr. Amar Kumar/Hindi Audio Book/2013/4. Voice: Anurag Sharma

Tuesday, January 22, 2013

बोलती कहानियाँ: पंडित सुदर्शन की लघुकथा परिवर्तन

'बोलती कहानियाँ' स्तम्भ के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको प्रसिद्ध कहानियाँ सुनवाते रहे हैं। पिछले सप्ताह आपने हरिशंकर परसाई की कहानी "ठिठुरता हुआ गणतंत्र" का पॉडकास्ट अर्चना चावजी की आवाज़ में सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं पंडित सुदर्शन की लघुकथा "परिवर्तन", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने। लघु कहानी "परिवर्तन" का गद्य (टेक्स्ट) हिन्दी समय पर पढ़ा जा सकता है।

कहानी का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 29 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।


हिन्दी साहित्य में "हार की जीत" जैसी प्रसिद्धि बहुत कम कहानियों को मिली है। जब मैंने जम्मू में पांचवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में पहली बार "हार का जीत" पढी थी, तब से ही इसके लेखक के बारे में जानने की उत्सुकता थी। दुःख की बात है कि "हार की जीत" जैसी कालजयी रचना के लेखक के बारे में जानकारी बहुत कम लोगों को है। गुलज़ार और अमृता प्रीतम पर आपको अंतरजाल पर बहुत कुछ मिल जाएगा मगर यदि आप पंडित सुदर्शन की जन्मतिथि, जन्मस्थान या कर्मभूमि के बारे में ढूँढने निकलें तो निराशा ही होगी। पंडित सुदर्शन के नाम से प्रसिद्ध साहित्यकार का वास्तविक नाम पंडित बदरीनाथ भट्ट था। उनका जन्म 1896 में स्यालकोट पंजाब (अब पाकिस्तान) में हुआ था। मुंशी प्रेमचंद और उपेन्द्रनाथ अश्क की तरह पंडित सुदर्शन भी हिन्दी और उर्दू में लिखते रहे हैं। उनकी गणना प्रेमचंद संस्थान के लेखकों में विश्वम्भरनाथ कौशिक, राजा राधिकारमणप्रसाद सिंह, भगवतीप्रसाद वाजपेयी आदि के साथ की जाती है। उन्हें गद्य और पद्य दोनों ही में महारत थी। मुख्य धारा के साहित्य-सृजन के अतिरिक्त उन्होंने अनेकों फिल्मों की पटकथा और गीत भी लिखे हैं. सोहराब मोदी की सिकंदर (१९४१) सहित अनेक फिल्मों की सफलता का श्री उनके पटकथा लेखन को जाता है। सन १९३५ में उन्होंने "कुंवारी या विधवा" फिल्म का निर्देशन भी किया। इस फिल्म के देशभक्ति-भाव से ओत-प्रोत गीत "भारत की दीन दशा का तुम्हें भारतवालों, कुछ ध्यान नहीं ..." ने पराधीन भारत के फिल्म-दर्शकों के मन में देशप्रेम का एक ज्वार सा उत्पन्न किया। उनकी रचनाओं में तीर्थ-यात्रा, पत्थरों का सौदागर, पृथ्वी-वल्लभ आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। फिल्म धूप-छाँव (१९३५) के प्रसिद्ध गीत तेरी गठरी में लागा चोर, बाबा मन की आँखें खोल आदि उन्ही के लिखे हुए हैं। इसी फ़िल्म में उनका लिखा और पारुल घोष, सुप्रभा सरकार और हरिमति का गाया गीत “मैं ख़ुश होना चाहूँ, हो न पाऊँ...” सही अर्थ में भारतीय सिनेमा का पहला प्लेबैक गीत था। वे १९५० में बने फिल्म लेखक संघ के प्रथम उपाध्यक्ष थे। ~ अनुराग शर्मा



उसके सिर के, दाढ़ी के और मूँछों के बाल सफेद हो चुके थे और आँखों में यौवन की चमक के स्‍थान पर बुढ़ापे की उदासीनता थी।
(पंडित सुदर्शन की कहानी "परिवर्तन" से एक अंश)



रेडियो प्लेबैक इंडिया पर पंडित सुदर्शन की अन्य कहानियाँ
* पंडित सुदर्शन की कालजयी रचना हार की जीत
* पंडित सुदर्शन की "तीर्थयात्रा
* साईकिल की सवारी - पंडित सुदर्शन
* पंडित सुदर्शन की "अठन्नी का चोर"
* तेरी गठरी में लागा चोर - पंडित सुदर्शन


शिशिर कृष्ण शर्मा जी के ब्लॉग बीते हुए दिन पर पढ़िये -
* कलम के सिकंदर: पण्डित सुदर्शन


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#Third Story, Parivartan: Pt. Sudarshan/Hindi Audio Book/2013/3. Voice: Anurag Sharma

Tuesday, January 15, 2013

बोलती कहानियाँ - ठिठुरता हुआ गणतन्त्र

'बोलती कहानियाँ' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अर्चना चावजी की आवाज़ में मंटो की रचना "खोल दो" का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हरिशंकर परसाई का व्यंग्य "ठिठुरता हुआ गणतंत्र" जिसे स्वर दिया है अर्चना चावजी ने।

इस व्यंग्य का पाठ (टेक्स्ट) हिंदिनी पर पढ़ा जा सकता है। "ठिठुरता हुआ गणतन्त्र" का कुल प्रसारण समय 5 मिनट 29 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

"इस देश के बुद्धिजीवी शेर हैं, पर वे सियारों की बरात में बैंड बजाते हैं।"
 ~ हरिशंकर परसाई (1922-1995)

हर सप्ताह "बोलती कहानियाँ" पर सुनें एक नयी कहानी

"समाजवाद परेशान है। उधर जनता भी परेशान है। समाजवाद आने को तैयार खड़ा है, मगर समाजवादियों में आपस में धौल-धप्पा हो रहा है।"
(हरिशंकर परसाई के व्यंग्य "ठिठुरता हुआ गणतंत्र" से एक अंश)

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#2nd Story, Thithurata Gantantra: Harishankar Parsai/Hindi Audio Book/2013/2. Voice: Archana Chaoji

Tuesday, November 6, 2012

बोलती कहानियाँ: आचार्य चतुरसेन की अब्बाजान

'बोलती कहानियाँ' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में भारतेंदु हरिश्चंद्र की कहानी अद्भुत संवाद का प्रसारण सुना था।

आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं आचार्य चतुरसेन की कहानी "अब्बाजान", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। कहानी का कुल प्रसारण समय है: 12 मिनट 39 सेकंड।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।




आचार्य चतुरसेन

(१८५०-१८८५)

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी कहानी

“तो मैं सब्र ही करूंगा हुज़ूर! तमाम उम्र सब्र ही किया है।”
(आचार्य चतुरसेन की "अब्बाजान" से एक अंश)


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#37th Story, Abbajan: Acharya Chatursen/Hindi Audio Book/2012/37. Voice: Anurag Sharma

Saturday, May 29, 2010

सुनो कहानी: माय नेम इज खान

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में शरद जोशी की व्यंग्य कहानी "एक बंगला फिल्म" का पॉडकास्ट सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं अनुराग शर्मा की एक लघुकथा "माय नेम इज खान", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

कहानी का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 45 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

इस कथा का टेक्स्ट बर्ग वार्ता ब्लॉग पर उपलब्ध है।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।




पतझड़ में पत्ते गिरैं, मन आकुल हो जाय। गिरा हुआ पत्ता कभी, फ़िर वापस ना आय।।
~ अनुराग शर्मा

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनें एक नयी कहानी

ये पत्ते किसलिए लाये हैं? क्या देसी बकरी पाली है?
(अनुराग शर्मा की "माय नेम इज खान" से एक अंश)


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#74th Story, My name is Khan: Anurag Sharma/Hindi Audio Book/2009/19. Voice: Anurag Sharma

Saturday, March 14, 2009

पंकज सुबीर के कहानी-संग्रह 'ईस्ट इंडिया कम्पनी' का विमोचन कीजिए

दोस्तो,

आज सुबह-सुबह आपने भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा नवलेखन पुरस्कार से सम्मानित कथा-संग्रह 'डर' का विमोचन किया और इस संग्रह से एक कहानी भी सुनी। अब बारी है लोकप्रिय ब्लॉगर, ग़ज़ल प्रशिक्षक पंकज सुबीर के पहले कहानी-संग्रह 'ईस्ट इंडिया कम्पनी' के विमोचन की। गौरतलब है कि इस पुस्तक के साथ-साथ १२ अन्य हिन्दी साहित्यिक कृतियों के विमोचन का कार्यक्रम आज ही हिन्दी भवन सभागार, आईटीओ, नई दिल्ली में चल रहा है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता २००६ के भारतीय ज्ञानपीठ सम्मान से सम्मानित कवि कुँवर नारायण कर रहे हैं। सभी पुस्तकों का विमोचन दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के हाथों होना है।

लेकिन घबराइए नहीं। हम आपको ऑनलाइन और पॉडकास्ट विमोचन का नायाब अवसर दे रहे हैं, जिसके तहत आप इस कहानी-संग्रह का विमोचन अपने हाथों कर सकेंगे, वह भी शीला दीक्षित से पहले। साथ ही साथ हम इस कहानी संग्रह की शीर्षक कहानी भी सुनवायेंगे। तो कर दीजिए लोकार्पण

अनुराग शर्मा की आवाज़ में इस संग्रह की शीर्षक कहानी 'ईस्ट इंडिया कम्पनी' नीचे के प्लेयर से सुनें: -


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ईस्ट इंडिया कम्पनी mp3




आपको बताते चलें कि युवा कहानीकार पंकज सुबीर के इस कथासंग्रह में अलग-अलग रंगों की १५ कहानियाँ सम्मिलित हैं। संग्रह में ईस्ट इंडिया कम्पनी के अलावा अन्य कहानियां हैं कुफ्र, अंधेरे का गणित, घेराव, ऑंसरिंग मशीन, हीरामन, घुग्घू, तस्वीर में अवांछित, एक सीप में, ये कहानी नहीं है, रामभरोस हाली का मरना, तमाशा, शायद जोशी, छोटा नटवरलाल, तथा और कहानी मरती है हैं। ये सारी ही कहानियां वर्तमान पर केन्द्रित हैं। शीर्षक कहानी ईस्‍ट इंडिया कम्‍पनी उस मानसिकता की कहानी है जिसमें उंगली पकड़ते ही पहुंचा पकड़ने का प्रयास किया जाता है। कुफ्र कहानी में धर्म और भूख के बीच के संघर्ष का चित्रण किया गया है। अंधेर का गणित में समलैंगिकता को कथावस्‍तु बनाया गया है तो घेराव और रामभरोस हाली का मरना में सांप्रदायिक दंगे होने के पीछे की कहानी का ताना बाना है। आंसरिंग मशीन व्‍यवस्‍था द्वारा प्रतिभा को अपनी आंसरिंग मशीन बना लेने की कहानी है। हीरामन ग्रामीण परिवेश में लिखी गई एक बिल्‍कुल ही अलग विषय पर लिखी कहानी है। घुग्‍घू कहानी में देह विमर्श कथा के केन्‍द्र में है जहां गांव से आई एक युवती के सामन कदम-कदम पर दैहिक आमंत्रण हैं। तस्‍वीर में अवांछित कहानी एक ऐसे पुरुष की कहानी है जो कि अपनी व्‍यस्‍तता के चलते अपने ही परिवार में अवांछित होता चला जाता है। एक सीप में तीन लड़कियां रहती थीं मनोवैज्ञानिक कहानी है जिसमें एक ही घर में रहने वाली तीन बहनों की कहानी है जो एक एक करके हालात का शिकार होती हैं। ये कहानी नहीं है साहित्‍य के क्षेत्र में चल रही गुटबंदी और अन्‍य गंदगियों पर प्रकाश डालती है। तमाशा एक लड़की के अपने उस पिता के विद्रोह की कथा है जो उसके जन्‍म के समय उसे छोड़कर चला गया था। शायद जोशी मनोवैज्ञानिक कहानी है। छोटा नटवरलाल में समाचार चैनलों द्वारा समाचारों को लेकर जो घिनौना खेल खेला जाता है उसे उजागर करती है। और कहानी मरती है लेखक की हंस में प्रकाशित हो चुकी वो कहानी है जिसमें कहानी के पात्र कहानी से बाहर निकल निकल कर उससे लड़तें हैं और उसे कटघरे में खड़ा करते हैं। ये पंद्रह कहानियां अलग अलग स्‍वर में वर्तमान के किसी एक विषय को उठाकर उसकी पड़ताल करती हैं और उसके सभी पहलुओं को पाठकों के सामने लाती हैं।

आने वाले दिनों में आप कहानी-कलश पर इस कहानी-संग्रह की कुछ कहानियाँ पढ़ सकेंगे और साथ उनके पॉडकास्ट भी सुन सकेंगे।

Saturday, August 23, 2008

सुनो कहानीः प्रेमचंद की 'अंधेर'

सुनिए 'सुनो कहानी' अभियान की पहली कड़ी- प्रेमचंद की कहानी 'अंधेर' का पॉडकास्ट


अभी २ दिन पहले ही हमने वादा किया था कि हम हिन्दी साहित्य के ऑडियो बुक पर काम करेंगे। लीजिए हम हाज़िर है एक कहानी लेकर। इससे पहले हम ५ कहानियों का पॉडकास्ट प्रासरित भी कर चुके हैं। नियमित कहानी प्रासरण की शृंखला की पहली कड़ी के तहत हम उपन्यास सम्राट प्रेमचंद की कहानी 'अंधेर' लेकर उपस्थित हैं।

इस कहानी को वाचा है अनुराग शर्मा उर्फ़ स्मार्ट इंडियन ने।

नीचे के प्लेयर से सुनें.

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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)





VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis


आज भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं, तो यहाँ देखें।

#First Story, Andher: Munsi Premchand/Hindi Audio Book/2008/01. Voice: Anuraag Sharma

Tuesday, August 19, 2008

सुनो कहानी- बेज़ुबान दोस्त

सुनिए विश्व प्रसिद्ध कहानीकार एस आर हरनोट की कहानी 'बेज़ुबान दोस्त'


भारत में हिन्दी कहानियों के वाचन पर काम बहुत कम हुआ है। कहानियों, उपन्यासों का नाट्य रूपांतरण करके रेडियो पर तो बहुत पहले से सुनाया जाता रहा है, लेकिन कहानियों को किसी एक या दो आवाज़ों द्वारा पढ़कर ऑडियो-बुक का रूप देने का काम बहुत कम दिखलाई पड़ता है।

आवाज़ का प्रयास है कि हिन्दी साहित्य की हर विधा को हर तरह से समृद्ध करे। इसी कड़ी में हम आज 'सुनो कहानी' के अंतर्गत अनुराग शर्मा की आवाज़ में विश्व प्रसिद्ध कथाकार एस आर हरनोट की कहानी 'बेज़ुबान दोस्त' लेकर उपस्थित हैं। अब हम इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं, यह तो आप श्रोता ही बतायेंगे।

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#First Story: Bezuban Dost; Author: S. R. Hrnot; Voice: Anurag Sharma; Hindi Audio Book/2008/01

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