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Saturday, July 29, 2017

चित्रकथा - 29: इस दशक के नवोदित नायक (भाग - 2)

अंक - 29

इस दशक के नवोदित नायक (भाग - 2)


"ये तेरा हीरो इधर है..." 



’रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। समूचे विश्व में मनोरंजन का सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम सिनेमा रहा है और भारत कोई व्यतिक्रम नहीं। बीसवीं सदी के चौथे दशक से सवाक् फ़िल्मों की जो परम्परा शुरु हुई थी, वह आज तक जारी है और इसकी लोकप्रियता निरन्तर बढ़ती ही चली जा रही है। और हमारे यहाँ सिनेमा के साथ-साथ सिने-संगीत भी ताल से ताल मिला कर फलती-फूलती चली आई है। सिनेमा और सिने-संगीत, दोनो ही आज हमारी ज़िन्दगी के अभिन्न अंग बन चुके हैं। ’चित्रकथा’ एक ऐसा स्तंभ है जिसमें बातें होंगी चित्रपट की और चित्रपट-संगीत की। फ़िल्म और फ़िल्म-संगीत से जुड़े विषयों से सुसज्जित इस पाठ्य स्तंभ में आपका हार्दिक स्वागत है। 



हर रोज़ देश के कोने कोने से न जाने कितने युवक युवतियाँ आँखों में सपने लिए माया नगरी मुंबई के रेल्वे स्टेशन पर उतरते हैं। फ़िल्मी दुनिया की चमक-दमक से प्रभावित होकर स्टार बनने का सपना लिए छोटे बड़े शहरों, कसबों और गाँवों से मुंबई की धरती पर क़दम रखते हैं। और फिर शुरु होता है संघर्ष। मेहनत, बुद्धि, प्रतिभा और क़िस्मत, इन सभी के सही मेल-जोल से इन लाखों युवक युवतियों में से कुछ गिने चुने लोग ही ग्लैमर की इस दुनिया में मुकाम बना पाते हैं। और कुछ फ़िल्मी घरानों से ताल्लुख रखते हैं जिनके लिए फ़िल्मों में क़दम रखना तो कुछ आसान होता है लेकिन आगे वही बढ़ता है जिसमें कुछ बात होती है। हर दशक की तरह वर्तमान दशक में भी ऐसे कई युवक फ़िल्मी दुनिया में क़दम जमाए हैं जिनमें से कुछ बेहद कामयाब हुए तो कुछ कामयाबी की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं। कुल मिला कर फ़िल्मी दुनिया में आने के बाद भी उनका संघर्ष जारी है यहाँ टिके रहने के लिए। ’चित्रकथा’ में आज से हम शुरु कर रहे हैं इस दशक के नवोदित नायकों पर केन्द्रित एक लघु श्रॄंखला जिसमें हम बातें करेंगे वर्तमान दशक में अपना करीअर शुरु करने वाले शताधिक नायकों की। प्रस्तुत है ’इस दशक के नवोदित नायक’ श्रॄंखला की दूसरी कड़ी।



मिमो और बिलाल
र दौर की तरह इस दशक में भी फ़िल्म जगत की कई बड़ी-बड़ी हस्तियों के बेटे-बेटियों या पोते-पोतियों, नाती-नातिनों ने फ़िल्म जगत में क़दम रखे। आज के इस अंक में हम ऐसे ही कुछ नौजवानों की बातें करने जा रहे हैं। फ़िल्मकार कमल अमरोही को कौन नहीं जानता! ’महल’, ’मुग़ल-ए-आज़म’, ’दिल अपना और प्रीत पराई’, ’पाक़ीज़ा’ और ’रज़िआ सुल्तान’ जैसी यादगार फ़िल्मों के जनक कमल अमरोही के पोते बिलाल अमरोही ने 2014 में ’ओ तेरी’ फ़िल्म से अपना फ़िल्मी सफ़र शुरु किया। कमल अमरोही की पत्नी महमूदी की तीन संतान थे जिनमें दो बेटे शानदार और ताजदार तथा बेटी रुख़सार। कमल अमरोही के दो पोते हैं - मशहूर अमरोही और बिलाल अमरोही। मशहूर ने 2008 में फ़िल्म ’हमसे है जहाँ’ से अपना फ़िल्मी सफ़र शुरु तो किया था, पर फ़िल्म के बुरी तरह पिट जाने से वो गुमनाम ही रह गए। इस फ़िल्म को उनके वालिद ताजदार अमरोही ने प्रोड्युस किया था। बड़े भाई के नक़्श-ए-क़दम पर चलते हुए बिलाल ने भी 2014 में ’ओ तेरी’ में पुल्कित सम्राट के साथ सह-नायक की भूमिका में नज़र आए। अतुल अग्निहोत्री की इस हास्य फ़िल्म को दर्शकों ने पसन्द किया, लेकिन बिलाल की तरफ़ लोगों का ध्यान बहुत ज़्यादा आकर्षित नहीं हो पाया। इस फ़िल्म में बिलाल के किरदार का नाम था AIDS (आनन्द इशवराम देवदत्त सुब्रह्मण्यम)। बिलाल की अभिनय क्षमता अच्छी है, इसलिए हम यही उम्मीद करेंगे कि उनका फ़िल्मी सफ़र आगे भी जारी रहेगा। बॉलीवूड सुपरस्टार मिथुन चक्रबर्ती के बेटे मिमो ने भी फ़िल्मों में क़िस्मत आज़मायी, लेकिन वो भी बिलाल की तरह एक हिट फ़िल्म के इन्तज़ार में हैं। मिमो का असली नाम है महाक्षय चक्रबर्ती। मिमो ने अपना डेब्यु 2008 की फ़िल्म ’जिम्मी’ में किया था जिसमें उन्होंने एक DJ का रोल निभाया था जिसे ख़ून के झूठे केस में फँसाया जाता है। उनके अभिनय के लिए उस वर्ष फ़िल्मफ़ेअर के बेस्ट मेल डेब्यु के लिए उनका नामांकन भी हुआ था। फिर 2011 में उन्होंने अभिनय किया ’द मर्डरर’ फ़िल्म में जो अभी तक रिलीज़ नहीं हो पायी है। इसी वर्ष उनकी फ़िल्म आयी ’Haunted - 3D' जो भारत की पहली "stereo-scopic 3D horror film" थी। इस फ़िल्म को समीक्षकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली और फ़िल्म हिट साबित हुई। लेकिन इसके बाद इसी साल की फ़िल्म ’लूट’, 2013 की दो फ़िल्में - ’रॉकी’ और ’एनिमी’, और 2015 की फ़िल्म ’इश्क़ेदारियाँ’ फ़्लॉप रही जिस वजह से मिमो धीरे धीरे पीछे होते चले गए। लेकिन मिमो की अभिनय क्षमता को देखते हुए यही कहेंगे कि उनकी क़िस्मत ने उनका साथ नहीं दिया, पर अब भी देर नहीं हुई है। आशा करेंगे कि उनके सितारे बुलन्द हों और वो कम बैक करें।


मुस्तफ़ा और प्रतीक
फ़िल्मकार अब्बास-मस्तान और उनकी ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों को कौन नहीं जानता! अब्बास बर्मावाला के बेटे मुस्तफ़ा बर्मावाला ने 2017 में फ़िल्म जगत में बतौर नायक क़दम रखा। अब्बास-मस्तान ने उन्हें लौंच किया ’मशीन’ फ़िल्म में। इस थ्रिलर फ़िल्म में मुस्तफ़ा की नायिका रहीं किआरा अडवानी। स्टार किड होने पर जितना लाभ होता है, उतना ही दबाव भी होता है सबकी आशाओं पर खरे उतरने का। मुस्तफ़ा को यह फ़िल्म बस इसलिए नहीं मिली कि वो अब्बास साहब के बेटे हैं। उनका भी ऑडिशन लिया गया था। दरसल इस फ़िल्म में वो सहयक निर्देशक के रूप में काम करने वाले थे। लेकिन मुस्तफ़ा ने 15 मिनट की एक शो-रील बनाई जिसे देख कर अब्बास-मस्तान को उन्हें बतौर नायक लेने का भरोसा मिल गया। इसके बाद वो NSD में गए जहाँ एन. के. शर्मा ने उनके अभिनय क्षमता को और निखारा। अभिनय के अलावा इस फ़िल्म के लिए मुस्तफ़ा ने नृत्य, जिमनास्टिक्स और मार्शल आर्ट्स की भी ट्रेनिंग् हासिल की। मुस्तफ़ा ने एक साक्षात्कार में बताया कि फ़िल्म के सेट पर अब्बास साहब और वो पिता-पुत्र के रिश्ते से नहीं बल्कि निर्देशक-अभिनेता के रिश्ते से काम करते थे। उन्हें भी सेट पर दूसरे अभिनेताओं जैसा ही ट्रीटमेण्ट मिलता। मुस्तफ़ा ने बताया कि अब्बास साहब उनसे सख़्ती से पेश आते थे ताकि वो कम्फ़ोर्ट ज़ोन में न चले जाएँ। ’मशीन’ फ़िल्म कुछ ख़ास नहीं चली। लेकिन मुस्तफ़ा के अभिनय को काफ़ी सराहना मिली। निस्संदेह वो आने वाली फ़िल्मों में इससे भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे। स्मिता पाटिल और राज बब्बर के बेटे प्रतीक बब्बर ने ऐड फ़िल्म मेकर प्रहलाद कक्कर के सहायक के रूप में काम करना शुरु किया और इसी दौरान उन्हें ऐड फ़िल्मों में अभिनय करने के भी मौके मिलने लगे। एक फ़िल्म अभिनेता के रूप में उनका पदार्पण हुआ 2008 की आमिर ख़ान प्रोडक्शन की फ़िल्म ’जाने तू या जाने ना’ में जिसमें इमरान ख़ान और जेनेलिया का भी पदार्पण हुआ था। जेनेलिया के चिड़चिड़े भाई के किरदार में प्रतीक के अभिनय को काफ़ी सराहना मिली और कई पुरस्कार भी मिले, लेकिन अगले तीन साल तक उन्हें दूसरी कोई फ़िल्म नहीं मिली। लेकिन नए दशक में उनकी एक के बाद एक कई फ़िल्में आईं। 2011 में वो चार फ़िल्मों में नज़र आए - किरण राव की ’धोबी घाट’ जिसे दुनिया भर के फ़िल्म उत्सवों में सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ मिली, ऐक्शन थ्रिलर ’दम मारो दम’ जिसमें उन्होंने अभिषेक बच्चन और राना डग्गुबाती के साथ अभिनय किया, प्रकाश झा निर्देशित ’आरक्षण’ में अमिताभ बच्चन, सैफ़ अली ख़ान और दीपिका पडुकोणे के साथ, और ’माइ फ़्रेन्ड पिन्टो’ में काल्की कोएचलिन के साथ उन्होंने अभिनय किया। इसके बाद ’एक दीवाना था’ और ’इस्सक’ जैसी फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस में टिक नहीं पायी। इन दिनों वो सौरभ चक्रवर्ती की बांग्ला फ़िल्म ’ऑरोनि तॉखोन’ में अभिनय कर रहे हैं। 2013 में प्रतीक ड्रग्स के नशे के शिकार हो गए थे और तीन सालों के चिकित्सा के बाद 2015 में वो एक बार फिर नज़र आए हास्य फ़िल्म ’उमरिका’ में जो 2015 के Sundance Film Festival में प्रदर्शित हुई। प्रतीक ने 2016 में Jeff Goldberg Studio से अभिनय का प्रशिक्षण लिया और लघु फ़िल्म ’The Guitar' में नज़र आए। प्रतीक अपने करीअर को सुदृढ़ करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हमारी शुभकामनाएँ उनके साथ हैं।


रुसलान और शिव
अभिनेत्री अंजना मुमताज़ को कौन नहीं जानता। उनके बेटे रुसलान मुमताज़ भी आज टेलीविज़न का जाना पहचाना चेहरा हैं। लेकिन रुसलान ने अपना अभिनय सफ़र टेलीविज़न से नहीं बल्कि फ़िल्मों से शुरु किया था। आम तौर पर उल्टा होता है कि अभिनेता छोटे परदे से बड़े परदे पर जाता है, लेकिन रुसलान के साथ ऐसा नहीं था। 25 वर्ष की आयु में रुसलान ने फ़िल्म जगत में क़दम रखा, फ़िल्म थी ’MP3 - मेरा पहला पहला प्यार’। 2009 में उनकी दूसरी फ़िल्म आई ’तेरे संग’। ये दोनों ही फ़िल्में नहीं चली। रुसलान ने हार नहीं मानी और नए दशक में भी उन्होंने कुछ और फ़िल्मों में अभिनय किया जैसे कि ’जाने कहाँ से आयी है’ (2010), ’डेन्जरस इश्क़’ (2012), ’I Don't Luv U’ (2013), 'मस्तांग मामा’ (2013) और ’रोमियो इडियट जटनी जुलियट’ (2014)। इन सभी फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफ़िस पर कोई कमाल नहीं दिखा पाया। इसी दौरान रुस्लान ने टेलीविज़न में अपनी क़िस्मत आज़मानी चाही। 2013 में उन्होंने छोटे परदे पर अपनी नई पारी की शुरुआत की। ध्रुव के चरित्र में वो नज़र आए ’कहता दिल जी ले ज़रा’ में जो काफ़ी पसन्द की गई। ’बालिका वधु’ में कृष की भूमिका में और ’एक विवाह ऐसा भी’ में रवि परमार की भूमिका में वो छाए हुए हैं। अब देखना यह है कि क्या वो फ़िल्मों में धमाकेदार वापसी कर पाते हैं या नहीं। 2014 में अपने बेटे शिव दर्शन को लौंच करने के लिए निर्माता सुनील दर्शन ने फ़िल्म ’कर ले प्यार कर ले’ की योजना बनाई। शिव दर्शन केवल सुनील दर्शन के बेटे ही नहीं बल्कि फ़िल्म जगत के कई जानेमाने हस्तियों से उनका पारिवारिक संबंध भी है। शिव नानाभाई भट्ट के परपोते हैं। शिव मशहूर निर्देशक धर्मेश दर्शन के भतीजे और महेश भट्ट के परपोते-भतीजे भी हैं (सुनील दर्शन के पिता दर्शन सभरवाल ने महेश भट्ट की बड़ी बहन शीला से विवाह किया था)। इस तरह से पूजा भट्ट और आलिया भट्ट से भी शिव का रिश्ता है। अभिनेता इमरान हाश्मी के दूर के रिश्तेदार भी लगते हैं शिव। यही नहीं वो 30 के दशक की अदाकारा शिरिन के पोते भी हैं (शिव के दादा के साथ शिरिन की बड़ी बेटी शीला का विवाह हुआ था)। फ़िल्म ’कर ले प्यार कर ले’ की बात करें तो यह फ़िल्म बुरी तरह से असफल रही। हाँ, शिव दर्शन और हसलीन कौर के अंग प्रदर्शन और कामुक दृश्यों की कुछ समय तक चर्चा ज़रूर हुई थी। 2017 में सुनील दर्शन ने एक बार फिर शिव को लौंच करने की कोशिश की ’एक हसीना थी एक दीवाना था’ फ़िल्म के ज़रिए। हाल ही में प्रदर्शित हुई इस फ़िल्म को समीक्षकों से 5 में केवल 1 रेटिंग् मिली। इस तरह से शिव का करीयर अभी भी डगमगा रहा है।


सिड और तनुज
अब बात करते हैं सिड माल्या की। बिज़नेसमैन और इन दिनों चर्चा के केन्द्रबिन्दु में रहने वाले विजय माल्या के बेटे सिद्धार्थ माल्या का जन्म कैलिफ़ोर्णिया में हुआ और पले बढ़े इंगलैण्ड में। क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी से बिज़नेस मैनेजमेण्ट की स्नातक डिग्री प्राप्त करने के बाद सिड बिज़नेस में ही रुचि लेने लगे और बिज़नेस के साथ-साथ मॉडलिंग् भी करने लगे। नायक जैसी कदकाठी और सुन्दर चेहरे की वजह से उन्होंने फ़िल्मों में अपनी क़िस्मत आज़मानी चाही। इस क्षेत्र में उनका पदार्पण हुआ स्टीव बैरन निर्मित फ़िल्म ’ब्राह्मण नमन’ में जो एक सेक्स कॉमेडी फ़िल्म थी। इसमें उन्होंने अपनी शख़्सियत ही की तरह रॉनी का किरदार निभाया जो एक अमीर और हैन्डसम क्रिकेट खिलाड़ी है और जो लड़कियों में बेहद मशहूर है। सेक्स कॉमेडी होने की वजह से सिड माल्या घर-घर तो नहीं पहुँच पाए, लेकिन उनका अभिनय समीक्षकों ने सराहा। ’ब्राह्मण नमन’ 2016 की फ़िल्म थी, लेकिन 2015 में उन्हें लेकर ’होम कमिंग्’ नामक फ़िल्म की योजना बनी थी जो अब तक बन कर तैयार नहीं हो पायी है। अपनी स्टाइल और सुपर मॉडल लूक्स की वजह से उन्हें देश-विदेश के कई पुरस्कार मिले और 2012 में उन्हें India's Sexiest Bachelor घोषित किया गया था। अभिनेत्री रति अग्निहोत्री के बेटे तनुज विरवानी ने 2013 में फ़िल्म जगत में क़दम रखा ’लव यू सोनियो’ फ़िल्म से। यह फ़िल्म नहीं चली। फिर उसके अगले ही साल तनुश्री चटर्जी निर्देशित फ़िल्म ’पुरानी जीन्स’ में वो नज़र आए इज़ाबेल लेइते और आदित्य सील के साथ। इसी फ़िल्म में रति अग्निहोत्री ने तनुज की माँ का किरदार भी निभाया था। लेकिन जिस फ़िल्म के लिए तनुज की चर्चा हुई, वह फ़िल्म थी 2016 की ’वन नाइट स्टैण्ड’ जिसमें उनकी नायिका थीं सनी लियोन। कहा जाता है कि शुरु में इस फ़िल्म के लिए राना दग्गुबाती का चयन हुआ था, लेकिन वो समय ना दे पाने की वजह से यह रोल तनुज को ऑफ़र किया गया। ’वन नाइट स्टैण्ड’ अपनी शीर्षक और विषय वस्तु की वजह से प्रदर्शित होने से पहले ही सनसनी पैदा कर चुके थे। उपर से सनी लियोन के नायिका होने से भी यह चर्चा में रही। लेकिन कोई भी फ़िल्म सनसनी के ज़रिए टिक नहीं सकती जब तक उसमें कोई ठोस बात ना हो। इस फ़िल्म के साथ भी यही हुआ, फ़िल्म ख़ास नहीं चली। अगर लोगों ने कुछ देखा तो बस बन्द कमरे में बैठ कर यू-ट्युब पर तनुज और सनी लियोन के कामुक दृश्यों को देखा। तनुज को इस इन्डस्ट्री में अपनी छाप छोड़ने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है।


टाइगर
अभिनेता जैकी श्रॉफ़ और निर्माता आयेशा दत्त के बेटे टाइगर श्रॉफ़ आज फ़िल्म जगत का एक जाना पहचाना नाम है। पिता ने ’हीरो’ से शुरुआत की थी, बेटे ने की ’हीरोपन्ती’ से। टाइगर का असली नाम था जय हेमन्त जो उन्होंने फ़िल्मों में उतरने के समय बदल दी। अमेरिकन स्कूल ऑफ़ बॉम्बे से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वो शरीर चर्चा मे जुट गए। मार्शल आर्ट्स और ताएक्वोन्दो में पाँचवे डिग्री के ब्लैक बेल्ट का ख़िताब हासिल करने वाले टाइगर ने ’धूम 3’ फ़िल्म से पहले आमिर ख़ान को उनकी बॉडी बनाने में प्रशिक्षण दी थी। जून 2012 में साजिद नडियाडवाला ने टाइगर को साइन किया ’हीरोपन्ती’ के लिए। ’हीरोपन्ती’ फ़िल्म एक बॉक्स ऑफ़िस हिट साबित हुई और समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ मिली। इस फ़िल्म में टाइगर के स्टण्ट्स और डान्स की काफ़ी प्रशंसा हुई। दूसरी तरफ़ उनके अभिनय क्षमता पर उंगली भी उठी। फ़िल्म इंडस्ट्री के कई लोग टाइगर का मज़ाक भी उड़ाते हैं। उनके शरीर में बाल ना होने और उनकी दाढ़ी-मूंछ ना उगने के लिए उन्हें कई बार मज़ाक का विषय बनना पड़ा। एक अवार्ड सेरिमनी में अर्जुन कपूर ने उनका मज़ाक उड़ाते हुए कहा था - "उसकी आती नहीं और मेरी जाती नहीं"। ख़ैर, टाइगर श्रॉफ़ की दूसरी फ़िल्म 2016 में आई - ’बाग़ी’। यह फ़िल्म भी व्यावसायिक रूप से कामयाब रही और दुनिया भर में इसने अच्छा कारोबार किया। इस फ़िल्म में टाइगर के अभिनय की भी प्रशंसा हुई। तमाम ऐक्शन दृश्यों के लिए उन्होंने डबल का इस्तमाल नहीं किया, हर स्टण्ट को ख़ुद निभाया। इस साल उनकी एक और फ़िल्म ’फ़्लाइंग् जट’ भी आई, जो एक सुपरहीरो फ़िल्म थी, लेकिन यह ज़्यादा नहीं चली। 2017 में टाइगर नज़र आएँगे ’मुन्ना माइकल’ में जो निर्माणाधीन है। कहा जा रहा है कि 2018 में ’बाग़ी 2’, ’रैम्बो’ और ’अधूरा’ जैसी फ़िल्मों के लिए टाइगर को साइन किया गया है। ’हीरोपन्ती’ फ़िल्म के लिए उन्हें ’बेस्ट मेल डेब्यु’ के कई पुरस्कार मिले जैसे कि ’स्टारडस्ट अवार्ड्स’, ’स्टार गिल्ड अवार्ड्स’, ’IIFA अवार्ड्स’ और ’लाइफ़ ओके स्क्रीन अवार्ड्स’। केवल ’फ़िल्मफ़ेयर’ उन्हें नहीं मिल पाया जो उस साल धनुष को ’रांझना’ के लिए दिया गया। टाइगर श्रॉफ़ कई म्युज़िक विडियोज़ में भी नज़र आ चुके हैं जैसे कि आतिफ़ असलम के ’ज़िंदगी आ रहा हूँ मैं’, अरिजीत सिंह के ’चल वहाँ जाते हैं’ तथा मीत ब्रदर्स के ’बेफ़िक्रा’ में। कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि टाइगर श्रॉफ़ सही राह पर चल रहे हैं। उनके सामने एक उज्वल भविष्य है इसमें कोई संदेह नहीं।


वरुण
वर्तमान दशक में फ़िल्म जगत में क़दम रखने वाले नायकों में अब तक के सबसे सफल नायक हैं वरुण धवन जो फ़िल्मकार डेविड धवन के सुपुत्र हैं। इंगलैण्ड के नोटिंघम ट्रेन्ट यूनिवर्सिटी से बिज़नेस मैनेजमेण्ट की डिग्री प्राप्त करने के बाद वरुण ने 2010 में करण जोहर की फ़िल्म ’माइ नेम इज़ ख़ान’ में सहयक निर्देशक के रूप में काम किया। उसी दौरान करण अपनी अगली फ़िल्म ’स्टुडेन्ट ऑफ़ दि यीअर’ की कहानी पर काम शुरु करने जा रहे थे और इस फ़िल्म के लिए उन्हें दो नौजवान नए नायकों की ज़रूरत थी। ऐसे में वरुण के लूक्स, अंदाज़ और शारीरिक गठन को देख कर उन्हें उनमें संभावना नज़र आई। इस तरह से सिद्धार्थ मल्होत्रा और आलिया भट्ट के साथ वरुण भी चुने गए इस फ़िल्म के लिए। फ़िल्म सुपर-डुपर हिट हुई और तीनों अभिनेता रातों रात फ़िल्म इंडस्ट्री में छा गए। इस फ़िल्म के पाँच साल बीत चुके हैं, और ये तीनों अभिनेता एक के बाद एक हिट फ़िल्में देते चले जा रहे हैं। वरुण धवन की 2014 में दो फ़िल्में आईं। पहली फ़िल्म थी ’मैं तेरा हीरो’ जिसे उनके पिता डेविड धवन ने निर्देशित किया। इस फ़िल्म में उनके अभिनय, नृत्य और कॉमिक टाइमिंग् को देखते हुए समीक्षकों ने उनकी तुलना गोविन्दा से की जो उनके लिए सम्मान का विषय थी। दूसरी फ़िल्म थी ’हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’ जो ’दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे - पार्ट 2’ कहलाया गया। करण जोहर निर्मित इस फ़िल्म में भी वरुण-आलिया की जोड़ी की ख़ूब तारीफ़ें हुईं। वरुण धवन के स्टार बन चुके थे; उनका स्क्रीन प्रेज़ेन्स, उनकी पर्सोनलिटी, कुल मिला कर एओ एक सफल हीरो बन चुके थे। इन दोनों फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफ़िस पर झंडे गाढ़ दिए। अपनी इमेज को तोड़ते हुए वरुण ने 2015 में ’बदलापुर’ में एक ऐसा रोल निभाया जिसकी लोगों ने कल्पना भी नहीं की थी। इस क्राइन थ्रिलर में वरुण एक ऐसे आदमी का किरदार निभाता है जो पन्द्रह साल के समयकाल में अपनी पत्नी और बेटे के कत्ल का बदला लेता है। इस चरित्र को निभाते हुए वरुण मानसिक अवसाद में चले गए थे और उन्हें लग रहा था जैसे कि यह एक हक़ीक़त है फ़िल्म नहीं। इस फ़िल्म के लिए उन्हे फ़िल्मफ़ेअर के तहत ’श्रेष्ठ अभिनेता’ के पुरस्कार का नामांकन मिला था। 2015 की दो और फ़िल्में थीं ’ABCD 2' और ’दिलवाले’। इन दोनों फ़िल्मों को कुछ ख़ास प्रशंसा ना मिली हो, लेकिन व्यावसायिक रूप से ये फ़िल्में सफ़ल मानी गईं और वरुण के काम को भी सराहा गया। 2016 में वरुण नज़र आए जॉन एब्रहम के साथ ’डिशूम’ में जो एक ऐशन ड्रामा फ़िल्म थी। इस फ़िल्म का निर्देशन वरुण के बड़े भाई रोहित धवन ने किया। दो जेनरेशन के सेक्स सिम्बॉल, जॉन और वरुण, की जोड़ी सफ़ल रही। ’हम्पटी शर्मा की दुल्हनिया’ की सीक्वील ’बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ आई 2017 में जिसमें वरुण और आलिया ने एक बार फिर सिद्ध किया कि उनकी जोड़ी हिट है। इस वर्ष डेविड धवन की फ़िल्म ’जुड़वा 2’ में वरुण नज़र आएँगे। गोविन्दा, शाहरुख़ ख़ान, सलमान ख़ान जैसे सुपरस्टार्स की फ़िल्मों के सीक्वील में वरुण हर बार कामयाब सिद्ध हो रहे हैं। इसमें कोई शक़ नहीं कि वरुण आज के समय के सफलतम नायकों में से एक हैं, बिल्कुल वैसा जैसा कि उन्हीं के एक गीत में कहा गया है, "तेरा ध्यान किधर है, ये तेरा हीरो इधर है"।


आख़िरी बात

’चित्रकथा’ स्तंभ का आज का अंक आपको कैसा लगा, हमें ज़रूर बताएँ नीचे टिप्पणी में या soojoi_india@yahoo.co.in के ईमेल पते पर पत्र लिख कर। इस स्तंभ में आप किस तरह के लेख पढ़ना चाहते हैं, यह हम आपसे जानना चाहेंगे। आप अपने विचार, सुझाव और शिकायतें हमें निस्संकोच लिख भेज सकते हैं। साथ ही अगर आप अपना लेख इस स्तंभ में प्रकाशित करवाना चाहें तो इसी ईमेल पते पर हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। सिनेमा और सिनेमा-संगीत से जुड़े किसी भी विषय पर लेख हम प्रकाशित करेंगे। आज बस इतना ही, अगले सप्ताह एक नए अंक के साथ इसी मंच पर आपकी और मेरी मुलाक़ात होगी। तब तक के लिए अपने इस दोस्त सुजॉय चटर्जी को अनुमति दीजिए, नमस्कार, आपका आज का दिन और आने वाला सप्ताह शुभ हो!





शोध,आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 
प्रस्तुति सहयोग : कृष्णमोहन मिश्र  



रेडियो प्लेबैक इण्डिया 

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