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Friday, May 8, 2009

"छोटे से पंख" - सार्थक लघु फिल्म निर्माण के क्षेत्र में युग्म का पहला प्रयास.

आपकी रचनात्मकता तभी सार्थक है जब आप खुद की जिम्मेदारी से ऐसा कुछ करते हैं जिससे समाज में एक सकारात्मक बदलाव आये। भारत में दृश्य और श्रव्य, जन साधारण तक अपनी बात पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम है। कविता के भावों को सुरों में सजाकर सरल रूप में लोगों तक पहुँचने के लिए जुलाई २००८ में आवाज़ की शुरूआत की थी हिंद युग्म ने। आज इस कड़ी में एक और नयी पहल जुड़ रही है। नए संगीत का दूसरा कामियाब महासत्र पूरा करने के बाद अब युग्म ने दृश्य माध्यम से भी जन चेतना जगाने का बीडा उठाया है। ये शुरुआत मनुज मेहता, जगदीप सिंह, दिव्य प्रकाश दुबे और अकबर-आज़म जैसे युवा फिल्मकारों के दम पर हो रही है। इसी शृंखला की पहली फिल्म का आज विमोचन हो रहा है। हिंद युग्म के दिव्य प्रकाश दुबे जिन्हें हम DPD के नाम से भी संबोधित करते हैं, ने अपनी खुद की प्रोडक्शन "मास्टरस्ट्रोक प्रोडक्शन" के बैनर तले बनायी है ये लघु फिल्म। अधिक जानते हैं खुद दिव्य से-


"मुझे हमेशा से लगा है कि कुछ लोग हमारी दुनिया को बेहतर बनाने की दिशा में सतत प्रयासरत हैं और बहुत ही शांति से, धीरे-धीरे अपने मकसद की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं ...

मुझे लगता है कि ऐसी हर बात हर कोशिश ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुंचनी चाहिए| इस बार जैसे ही मुझे फुर्सत मिली तो मैंने सोचा कि एक शोर्ट मूवी बनाने की हिम्मत की जाये ..क्योंकि कई बार कविता बहुत अधूरी बात ही कह पाती है और उसमें वो सब नहीं आ पाता जो आप कहना चाहते हैं ..तो बस मैंने अपने कॉलेज (http://sibm.edu/) के मित्र (समर्थ) के साथ मिल के एक मूवी बना डाली ...दिक्कतें आयीं थोडी बहुत और उन थोड़ी बहुत दिक्कतों की वजह से ही हम बहुत सी बातें सीख भी पाए |"

Behind the scenes जानने के लिए यहाँ क्लिक करें )

Movie (छोटे से पंख ) के बारे में थोड़ा सा

हम सब में से कईयों के घर में पुरानी साइकिल पड़ी होती है। किसी-किसी के घर में एक से ज्यादा होती है जो बेकार पड़ी रहती है कई बार .... एक NGO इस दिशा में काम कर रहा है जो शहरों से ऐसी ही साइकिल लेते हैं ... और गाँव में वो साईकिल बाँट देते हैं ताकि कोई बच्चा स्कूल जा पाए, उसको स्कूल के लिए मीलों पैदल न चलना पड़े!!

इस विचार ने मुझे बहुत प्रभावित किया और तब हमने एक ऐसी मूवी बनाने की सोची जो इस विचार को आगे बढा पाए ...

कलाकार

रूबी - हमारे मोहल्ले में काम करने वाले माली की बिटिया है जो की अपनी क्लास में सेकंड आयी है, इसलिए उसको साईकिल चाहिए।

गौरांग- कॉन्वेंट में पढ़ने वाला मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का है, जिसको साईकिल नहीं स्कूटी चलाना बहुत पसंद है।

(ये वो पात्र हैं जो आप सभी को अपने घर के आस पास मिल जायेंगे, गौरांग शायद आपके घर में हो, पड़ोस में हो ...और रूबी घर के बाहर खेलते हुए, पैदल स्कूल जाते हुए जरूर दिखती होगी आपको)



हो सकता कुछ लोग जानना चाहें कि Master Stroke क्या है ? कैसे बना, वो सब जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

आग्रह -अपने ईमानदार, बेबाक सुझाव दें ...इससे हमारी अगली कोशिश को बेहतर होने में मदद मिलेगी !!

- दिव्य प्रकाश दुबे


हमारे अन्य फिल्मकार भी कुछ इसी तरह के सार्थक विषयों पर अपनी बात कहेंगे जिन्हें हम समय समय पर अपने मंच के माध्यम से आप तक पहुंचाते भी रहेंगे. यदि आप भी कुछ ऐसी बात "विसुअल" माध्यम से जन जन तक पहुंचाना चाहें तो हमसे संपर्क करें. हिंद युग्म के फिल्मकार मनुज मेहता ने दिल्ली के रेड लाइट इलाके को केंद्र कर जो डॉक्युमेंटरी फिल्म बनायीं थी उसका प्रीमियर भी हमने पिछले साल आवाज़ पर किया था, यदि अब तक आपने नहीं देखी तो इसे भी अवश्य देखें.
एक संवेदनशील फिल्म जी बी रोड की सच्चाईयों पर...

Saturday, November 8, 2008

SIBM, पुणे के युवाओं का "जज्बा"

आज हिंद युग्मी दिव्य प्रकाश दुबे अपना २७ वां जन्मदिन मना रहे हैं, उनकी कविताओं से तो हम सब वाकिफ हैं, पर हम आपको बता दें कि उनका एक संगीत ग्रुप भी है- "जज्बा". जिसका बनाया हुआ ये गीत "आंगन में पंछी" हम चाहते थे कि हमारे वर्तमान सत्र का हिस्सा बनें, पर चूँकि ग्रुप के सभी छात्र अपनी पढ़ाई के अन्तिम दौर में हैं, इस कारण इस गीत को मुक्कमल तौर पर रिकॉर्ड नहीं कर पाये, पर एक preview के तौर पर इस शानदार गीत को आज हम यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं. साथ में है इस गीत का एक फोटो विडियो भी, जिसमें आप SIBM, पुणे के इन छात्रों की आँखों में बसे एक नए हिंद के सपनों को देख पायेंगें, और महसूस कर पायेंगें उस जज्बे को जिसको देखकर आपको अपनी इस नई पीढ़ी पर अवश्य गर्व होगा.

Presenting to you all

"The passion to live it up and the spirit to wear it on our sleeve"

Debut song of team Jazba



अब सवाल ये है कि जज़्बा आखिर है क्या तो जानिए ख़ुद दिव्य से -


जज़्बा में आभार दाधीच, शिखर रंजन, विकास और दिव्य प्रकाश ये चार लोग हैं जो की SIBM,Pune (सिम्ब्योसिस इंस्टिट्यूट ऑफ़ बिज़नस मैनेजमेंट, पुणे ) में पढ़ रहे हैं| इसको कॉलेज का एक छोटा मोटा band कह लीजिये या एक साथ कुछ नया गढ़ने की ललक जो हम सबको एक साथ लायी. ये सपने देखने की उम्र है और ये गाना उस spirit की ही बात करता है, जो आज का नया भारत अपनी रगों में महसूस करता है, ये गाना उस सपने को जीने को कहता है.... इसीलिए इसका नाम Spirit of SIBM (symbiosis institute of business management) रखा गया | यहाँ पे पढ़ने वाले हर एक शख्स का यही सपना है की एक दिन वो अपने हिस्से की दुनिया में अपने बनाये हुए रंग भरेगा .... ये गाना उन सभी लोगों को समर्पित है जो सपने देखते हैं और उन सपनों को जीने की हिम्मत रखते हैं ....

आशा है ये आप सबको पसंद आयेगा
साभार
टीम "ज़ज्बा"



Spirit of SIBM (बोल)

आंगन में पंछी आए ख्वाब सजाने को
आँखों में सपने लाये ,कुछ कर दिखाने को
कुछ सपने पीछे छूटे पलकों पे आंसू बनके
कुछ अपने पीछे छूटे पलकों पे आंसू बनके
कुछ ख्वाब झांकते हैं आँखों में मोती बनके
कुछ वादे अपनों के हैं ,कुछ वादे अपने से
कल दुनिया महकेगी फूल जो आज खिलने को हैं ....2
खिलने दो रंगों को फूलों को अपने संग
महकेगी दुनिया सारी ,बहकेगी अपने संग
ख्वाबों के परवाजो से आसमान झुकाने को है........2
आंगन में पंछी आए ख्वाब सजाने को
आँखों में सपने लाये ,कुछ कर दिखाने को
क़दमों की आहट अपनी दुनिया हिला देगी
यारों की यारी अपनी हर मुश्किल भुला देगी
-दिव्य प्रकाश दुबे


Divya Prakash Dubey
SIBM Batch of 2007-09
dpd111@gmail.com

एक बार फ़िर "टीम ज़ज्बा" के सभी सदस्यों को हिंद युग्म परिवार की बधाइयाँ और दिव्य को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनायें.

Sunday, July 27, 2008

पॉडकास्ट कवि सम्मेलन का आमंत्रण अंक

दोस्तो,

जैसाकि हमने वादा किया था कि महीने के अंतिम रविवार को पॉडकास्ट सम्मेलन का प्रसारण करेंगे। इंटरनेट की गति हर एक प्रयोक्ता के पास अलग-अलग है, इसलिए हम एक समान गुणवत्ता नहीं तो रख पाये हैं, मगर फिर भी एक सम्मिलित प्रयास किया है। आशा है आप सभी को पसंद आयेगा।

नीचे के प्लेयर से सुनें।



प्रतिभागी कवि
रंजना भाटिया, दिव्य प्रकाश दुबे, मनुज मेहता, नरेश राणा, शोभा महेन्द्रू, शिवानी सिंह, अनिता कुमार, अभिषेक पाटनी
संचालक- हरिहर झा
उप-संचालक- शैलेश भारतवासी

हमें हरिहर झा, ब्रह्मनाथ त्रिपाठी अंजान और पीयूष पण्डया की भी रिकॉर्डिंग प्राप्त हुई थी, लेकिन उन्हें आसानी से सुन पाना सम्भव नहीं था। इसलिए हम उनका इस्तेमाल नहीं कर सके।

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)




VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis


हम सभी कवियों से यह गुज़ारिश करते हैं कि अपनी आवाज़ में अपनी कविता/कविताएँ रिकॉर्ड करके podcast.hindyugm@gmail.com पर भेजें। आपकी ऑनलाइन न रहने की स्थिति में भी हम आपकी आवाज़ का समुचित इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे।

# Podcast Kavi Sammelan. Part 1. Month: July 2008.

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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