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Sunday, March 22, 2009

क्या नील नितिन मुकेश में भी हैं गायिकी के गुण ?

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (14)
आ देखें ज़रा किसमें कितना है दम - नील की चुनौती
गायिकी के सरताज रहे मुकेश के सुपुत्र नितिन मुकेश ने भी गायिकी में ठीक ठाक मुकाम हासिल किया, पर बहुत अधिक कामियाब नहीं रह पाए तो उनके बेटे और सदाबहार मुकेश के पोते नील ने अभिनय का रास्ता चुना, "जोंनी गद्दार" में अपने शानदार अभिनय से नील ने एक लम्बी पारी की उम्मीद जगाई है. अब उनकी आने वाली नयी त्रिल्लर फिल्म "आ देखें ज़रा" में नील मात्र अभिनय नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने खानदान की परंपरा निभाते हुए उन्होंने इस फिल्म का शीर्षक गीत भी खुद ही गाया है, जो कि वास्तव में एक पुराने गीत "आ देखें ज़रा किस में कितना है दम" का नया वर्ज़न है. नील इस गीत के माध्यम से आर डी बर्मन और किशोर दा को अपनी श्रद्धांजली देना चाहते हैं. नील के दामन में इस वक़्त आदित्य चोपडा की "न्यू यार्क", मधुर भंडारकर की "जेल" और सुधीर मिश्रा की "तेरा क्या होगा जोंनी" जैसी फिल्में हैं. देखना ये होगा कि क्या इनमें से किसी फिल्म में भी श्रोताओं को उनकी गायिकी का नमूना देखने को मिलेगा.



भारतीय संगीत में भारतीयता होनी ही चाहिए - हरिहरन


फिल्मों में गायन हो या शास्त्रीय, या फिर किसी पॉप धुन पर ताल मिलाना हो, हरिहरन हमेशा अपनी मधुर आवाज़ और श्रेष्ठतम गायिकी को बेहद सधे हुए अंदाज़ में पेश करते रहे हैं. पर जब उनसे पुछा गया कि उन्हें सबसे अधिक क्या गाना पसंद है तो जवाब था कि ग़ज़ल गायन से अधिक संतुष्ठी किसी अन्य गायन में नहीं मिलती. उनका कहना है कि उन्होंने भाषा को सीखने में बहुत मेहनत की है, ग़ज़ल में शायरी, ख्याल, ठुमरी, सरगम, तान और रिदम का जबरदस्त संगम होता है, और चुनौती सबसे बड़ी ये होती है इन सब के बीच आपको शब्दों की गरिमा बनाये रखनी होती है, क्योंकि ग़ज़ल मुख्यता शब्द प्रधान होते हैं. हरिहरन मानते हैं कि माडर्न होना अपनी संस्कृति को भूलना नहीं है. भारतीय संगीत की आत्मा में भारतीयता होनी ही चाहिए. वो अपनी एल्बम "कोलोनिअल कसिन" की कमियाबी का श्रेय भी इसी भारतीयता में बसी अपनी जड़ों को मानते हैं.


अभिजीत सावंत अब नायक भी

फिल्म के चाहने वालों के लिए इस हफ्ते एक नहीं दो नहीं बल्कि ५ नयी फिल्में प्रदर्शन के लिए उतरी है. और मज़े की बात है कि इन पांचों फिल्मों के माध्यम से ५ नए निर्देशकों ने अपनी कला को दुनिया के सामने रखा है. इनमें अभिनेत्री नंदिता दास (फिराक) भी शामिल हैं. पहले इंडियन आइडल रहे अभिजीत सावंत अभिनीत "लौटरी" का निर्देशन किया है हेमंत प्रभु ने, अन्य नवोदित निर्देशकों में हैं रजा मेनोन (बारह आना), रूबी ग्रेवाल (आलू चाट), और पार्वती बलागोपालन (स्ट्रेट). एक और अच्छी खबर ये है कि अब भारतीय फिल्म संगीत की तरह हिंदी फिल्मों की कहानियां भी हॉलीवुड के निर्देशकों को भा रही है, हालिया प्रर्दशित माधवन अभिनीत "१३ बी" अब विदेशी कलाकारों को लेकर अंग्रेजी में भी बनेगी. तो दोस्तों इस सप्ताह की ५ नयी फिल्मों के अलावा आपके पास "13 बी" और "गुलाल" जैसी फिल्में भी हैं, देखने के लिए. अब तक नहीं देखी तो अब देखिये.

दिल गिरा कहीं दफतन

किसी भी गीत की कामियाबी में उसके फिल्मांकन का भी बहुत बड़ा हाथ होता है. आज के "साप्ताहिक गीत" शृंखला में हम न सिर्फ आपको एक गीत सुनवायेंगें बल्कि उसका विडियो भी दिखाएंगें. दिल्ली ६ के यूँ तो सभी गीत मशहूर हुए हैं पर इस गीत को बहुत अधिक लोकप्रियता नहीं मिल पायी, पर शायद इसीलिए निर्देशक राकेश ने इस गीत को चुना अपनी कल्पनाशीलता की ऊंचाईयां दिखाने का जरिए. गीत बहुत धीमा है पर जब आप इसे परदे पर देखते हैं तो शब्द और संगीत कहीं पीछे छूट जाते हैं और दृश्य आप पर जादू सा कर देते हैं. न्यू यार्क शहर में दिल्ली ६ को स्थापित करता ये गीत दो संस्कृतियों को जैसे एक कर देता है, और प्रेम की सुखद अनुभूतियों के बीच धीमे धीमे स्पंधित होता है पार्श्व में - प्रसून के बोल और ए आर आर का संगीत.
निश्चित ही बहतरीन फिल्मांकित गीतों में सूची में ये गीत एक नया शाहकार है - देखिये और सुनिए



(विडियो क्वालिटी बहुत अच्छी नहीं है )

Sunday, February 15, 2009

बिल्लू को कहना नही कोई हज्ज़ाम...

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (11)
नामांकन में आना भी एक उपलब्धि है - पंडित रवि शंकर
ग्रैमी पुरस्कार विजेता उस्ताद जाकिर हुसैन को बधाई देने वालों में तीन बार ग्रैमी हुए पंडित रवि शंकर भी हैं. एक ताज़ा इंटरव्यू में पंडित जी ने कहा-"विश्व मोहन भट्ट को जब ग्रैमी मिला तब इस बाबत मीडिया में जग्रता आयी. मेरे पहले दो सम्मानों के बारे में तो मुझे भी ख़बर नही लगी देशवासियों की बात तो दूर है. कई बार जूरी के सदस्यों के वोट न मिल पाने के कारण कोई अच्छा संगीतकार विजयी होने से रह जाता है पर इससे उसके संगीत की महत्ता कम नही होती, मेरा मानना है कि नामांकन में आना भी एक बड़े सम्मान की बात है. मुझे दुःख है कि लक्ष्मी शंकर ग्रैमी नही जीत पायी, वे बेहद प्रतिभाशाली हैं.पर खुशी इस बात की है कि जाकिर ने इसे जीता." गौरतलब है कि मोहन वीणा वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट भी पंडित रवि शंकर जी के ही शिष्य हैं. भारत रत्न पंडित रवि शंकर ऐ आर रहमान को भी बधाई देना नही भूले-"मैं हिन्दी फ़िल्म संगीतकारों का सालों से प्रशंसक रहा हूँ, सी रामचंद्र, सलिल चौधरी, एस डी और आर डी बर्मन, इल्ल्याराजा और अब ऐ आर रहमान जो निरंतर इतनी सुंदर धुनों से संगीत को संवार रहे हैं. फिल्मों के लिए उनका पार्श्व संगीत भी सराहनीय रहा है. विदेशों में भी अब उन्हें ख्याति प्राप्त करते देख खुशी हो रही है." दुनिया भर से ढेरों सम्मान पाने वाले पंडित रवि शंकर के लिया सबसे बड़ा सम्मान क्या है ? -"जो कुछ भी मिला है उसके लिए मैं ईश्वर, अपने गुरु और अपने प्रशंसकों को धन्येवाद देना चाहता हूँ, पर जब मैं परफोर्म करता हूँ और अपने संगीत में डूबे हुए किसी श्रोता का गर दिल भर आए और उसकी आँख से आंसू का एक कतरा गिरे, तो वो मेरे लिए सर्वोत्तम पुरस्कार है..". आपको नमन है ऐ संगीत शिरोमणि.



मैं एक खिलाड़ी जैसा महसूस कर रहा हूँ - ऐ आर रहमान

बाफ्टा की फ़तेह के बाद अब रहमान चले हैं एक और गढ़ जीतने न्यू यार्क शहर को. मनीष के ख़ास निर्मित बंद गले के सूट पहने रहमान इस समय ख़ुद को एक खिलाड़ी सा महसूस कर रहे हैं जिस पर सारे देश की नज़र है और जिससे ओलंपिक गोल्ड की पूरी पूरी उम्मीद की जा रही है -"ओलंपिक के लिए निकलते किसी खिलाड़ी से जिसपर पूरे देश को स्वर्ण लेकर आने की उम्मीद रहती है, मैं ख़ुद को इस वक्त उस खिलाड़ी सा महसूस कर रहा हूँ, पता नही मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरूंगा या नही, खुदा ने मुझे पहले ही मेरी काबिलियत से अधिक दिया है, इसलिए मैं कभी भी ज्यादा की महत्वकांक्षा नही कर पाता, ये मेरा स्वाभाविक गुण है...".


भारतीय संगीत एल्बम के लिए ग्रैमी जीतना चाहता हूँ - उस्ताद जाकिर हुसैन

"जब कोई दूसरा देश आपकी कला को सम्मान देता है, सबकी निगाहें आपकी तरफ़ उठ जाती है, पर जब आपका गुरु आपको शाबाशी दे कोई गौर नही करता. पर मेरे लिए दूसरी बात अधिक मायने रखती है", ग्रैमी जीतने वाले उस्ताद जाकिर हुसैन ने एक ताज़ा इंटरव्यू में ये बात कही -"मेरे गुरु और पिता मरहूम उस्ताद अल्लाह रखा खान ने मात्र दो बार मुझसे ये कहा कि मैंने अच्छा बजाया. दो बार उनके इन शब्दों से मिला सम्मान मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है. मैं कभी एक पूरी तरह से भारतीय शास्त्रीय संगीत के किसी एल्बम के लिए ग्रैमी जीतना चाहता हूँ, जैसा कि पंडित रवि शंकर जी ने कर दिखाया था. विदेशी संगीतकारों के साथ गठबंधन ग्रैमी तक पहुँचने का आसान रास्ता बना देता है...".


बिल्लू को कहना नही कोई हज्ज़ाम

एक और बड़ी फ़िल्म और एक और नया विवाद, अब तो जैसे ये एक परम्परा ही हो गई है...खैर हम विवादों की तरफ़ न जाकर सुनते हैं सप्ताह का सॉलिड गीत फ़िल्म "बिल्लू" से. ठेठ देसी अंदाज़ के इस गीत में गुलज़ार साहब ने कमाल के शब्द चुने हैं. "लोशन खुसबुदार" और "उस्तरे की धार" जैसे शब्दों ने गीत को खासा नया पन दे दिया है. प्रीतम ने भी बहुत बढ़िया धुन और संयोजन किया है. आवाजें हैं रघुबीर यादव, अजय जिन्गरान और कल्पना की...हाँ ...और गाने का अन्तिम हिस्सा सबसे शानदार है....सुनिए और आनन्द लीजिये.





Sunday, December 7, 2008

कलाकार की कोई पार्टी नही होती - दलेर मेहंदी

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (६)

टेलंट शो कितने कारगर

एक ज़माने में हुए एक बड़ी "प्रतिभा खोज" के फलस्वरूप हमें मिले थे महेंद्र कपूर, सुरेश वाडकर जिनका हमने पिछले दिनों आवाज़ पर जिक्र किया था वो भी इसी रास्ते से फ़िल्म इंडस्ट्री में आए. १९९६ में "मेरी आवाज़ सुनो" की विजेता थी हम सब की प्रिय सुनिधी चौहान. इसी प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रही वैशाली सावंत मानती है कि टेलंट शो मात्र आपको दुनिया के सामने प्रस्तुत कर देते हैं असली संघर्ष तो उसके बाद ही शुरू होता है. ख़ुद वैशाली को सात साल लगे प्रतियोगिता के बाद "आइका दाजिबा" तक का सफर तय करने में. रॉक ऑन ने गायन की शुरुआत करने वाली गायिका केरालिसा मोंटेरियो भी मानती हैं कि "आज भी बहुत से नए कलाकार पारंपरिक तरीके से शुरुआत करना पसंद करते हैं. अनुभव आपको इसी से मिलता है कि आप संगीतकारों से मिलें, बात करें और गानों के बनने की प्रक्रिया और उसका मर्म समझें. अक्सर इन प्रतियोगिताओं के विजेता ये मान बैठते हैं कि बस अब मंजिल मिल गई. पर ऐसा नही होता. एक बार शो खत्म होने के बाद उन्हें राह दिखाने वाला कोई नही होता." जो भी हो पर इतना तो तय है कि विभिन्न चैनलों पर चलने वाले इन प्रतियोगिताओं ने नई प्रतिभाओं के प्रति लोगों की सोच अवश्य ही बदली है. अब हर कोई सुनिधी या अभिजीत सावंत जैसा भाग्यशाली भी तो नही हो सकता न...


कलाकार की कोई पार्टी नही होती - दलेर मेहंदी

पिछले दिनों मीडिया ने दिखाया कि अपने दलेर मेहंदी साहब कहीं एक जगह किसी एक पार्टी विशेष का प्रचार कर रहे थे तो कुछ दिनों बाद वो दिखे एक विरोधी पार्टी का गुणगान गाते. ऐसा कैसे और क्यों दिलेर साहब.? पूछने पर दिलेर साहब ने संशय का निवारण किया. "रैली में जिन्हें मीडिया ने दलेर कह कर जनता को बरगलाया वो मेरा भाई शमशेर था, जो एक पार्टी विशेष से टिकट लेकर चुनाव लड़ रहे हैं, ये ठीक है कि बिल्कुल मेरे जैसे लगते हैं और मेरे अंदाज़ के कपड़े पहनते हैं पर रैली में कई बार उनके नाम की उद्घोषणा हुई पर मीडिया ने जान कर मुद्दे को तूल दिया और शमशेर का मायावती जी के पैर छूने की क्लिप्पिंग बार बार ये कह कर दिखाते रहे कि ये दलेर है." तो क्या दलेर साहब अब अपने भाई के उस पार्टी विशेष का प्रचार भी करेंगे. जवाब सुनिए ख़ुद उन्हीं की जुबानी - "कलाकार और डॉक्टर की कोई पार्टी या जात नही होती. मेरा सहयोग अच्छे उम्मीदवार के साथ रहेगा उनकी पार्टी से मुझे कुछ लेना देना नही". अच्छे विचार हैं दलेर जी...


वार्षिक गीतमाला आवाज़ पर

साल खत्म होने को है, इस वर्ष बाज़ार में आए तमाम फिल्मी और गैर फिल्मी गीतों की लम्बी फेहरिस्त में से शीर्ष ५० गीतों को क्रमबद्ध रूप से आपके लिए लेकर आयेंगे हम आवाज़ पर, दिसम्बर २७ तारिख से ३१ तक. आप भी अपने पसंदीदा गीतों की सूची podcast.hindyugm@gmail.com पर हमें भेज सकते हैं. कोशिश करें कि चुराए हुए धुनों पर आधारित गानों को पीछे रख अच्छे और ओरिजनल गीतों को हम इस गीतमाला में स्थान दें. इस सम्बन्ध में और अधिक जानकारी हम जल्द ही आपको उपलब्ध करवायेंगे.

Monday, December 1, 2008

"मैं उस दिन गाऊंगा जिस दिन आप धारा प्रवाह हिन्दी बोल कर दिखायेंगे..."- प्रसून जोशी

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (५)

साहित्य और संगीत एक एल्बम में

हिंद युग्म का पहला एल्बम "पहला सुर" कई मायनों में अनोखा था. इसमें पहली बार साहित्य और संगीत को एक धागे में पिरोकर प्रस्तुत किया गया था. बेशक ये बहुत बड़े पैमाने पर नही था पर सोच अपने समय से आगे की थी. इस बात की पुष्टि करता है टाईम्स म्यूजिक का नया एल्बम "द म्यूजिक ऑफ़ सुपरस्टार इंडिया". जो कि शोभा डे की लिखी पुस्तक "सुपरस्टार इंडिया" से प्रेरित है.संगीत का मोर्चा संभाला है मिति अधिकारी और नील अधिकारी ने जो मिलकर बनते हैं MANA. बंगाल के बाउल और राजस्थान के लंगास के मन लुभावने संगीत के बीचों बीच आप सुन सकते हैं शोभा की आवाज़ में पुस्तक के अंश भी. इन पारंपरिक गीतों को MANA ने बहुत आधुनिक अंदाज़ में प्रस्तुत किया है, यहाँ लाउंज भी है, रेग्गे भी, ट्रांस भी और क्लब भी, जो शायद हर पीढी को संगीत का आनंद भरपूर दे पायेगी. दुर्लभ संगीत अल्बम्स के संकलन के शौकीन संगीत प्रेमी इसे अवश्य खरीदें.


"सॉरी भाई" ये मेरा गाना है...

संगीत की चोरी का मामला एक बार फ़िर प्रकाश में हैं, आपको याद होगा किस प्रकार संगीतकार राम सम्पंथ ने निर्देशक राकेश रोशन को अदालत का दरवाज़ा दिखलाया था जब संगीतकार राजेश रोशन ने राम सम्पथ की धुन चुरा कर फ़िल्म "क्रेजी ४" में इस्तेमाल किया था. पॉप और सूफी गायक रब्बी ने आरोप लगाया है फ़िल्म 'सॉरी भाई' के एक गाने की धुन उनकी रचना की हुबहू नक़ल है. फ़िल्म के संगीतकार हैं गौरव दयाल. अदालत ने फ़िल्म के प्रदर्शन पर से तो रोक हटा ली है पर निर्माता वाशु भगनानी से जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है. वाशु का कहना है कि उन्हें इस बाबत जानकारी नही थी. उन्हें गौरव ने धुन अपनी कह कर सुनवाई थी, पर वो रब्बी को जरूरी मुहवाजा देने को तैयार हैं, यदि उनकी बात सही पायी गई तो. आए दिन आने वाली चोरी की इन खबरों से संगीत जगत स्तब्ध है.


प्रसून एक गायक भी

गीतकार प्रसून के लिखे गीतों से हम सब वाकिफ हैं, पर बहुत कम लोग जानते है कि वो उन्होंने उस्ताद हफीज अहमद खान से शास्त्रीय संगीत की दीक्षा भी ले रखी है.उनके उस्ताद उन्हें ठुमरी गायक बनाना चाहते थे. उन दिनों को याद कर प्रसून बताते हैं कि उनके पास रियाज़ का समय नही होता था, तो बाईक पर घर लौटते समय गाते हुए आते थे और उनका हेलमेट उनके लिए "अकॉस्टिक" का काम करता था. प्रसून संगीत को अपना उपार्जन नही बना पाये. उनके पिता उन्हें प्रशासन अधिकारी बनाना चाहते थे पर ये उनका मिजाज़ नही था, तो MBA करने के बाद आखिरकार विज्ञापन की दुनिया में आकर उनकी रचनात्मकता को जमीन मिली. बचपन से उन्हें हिन्दी और उर्दू भाषा साहित्य में रूचि थी. उनके शहर रामपुर के एक पुस्तकालय में उर्दू शायरों का जबरदस्त संकलन मौजूद था. मात्र १७ साल की उम्र में उनका पहला काव्य संकलन आया. कविता अभी भी उनका पहला प्रेम है. प्रसून मानते हैं कि यदि संगीत के किसी एक घटक की बात की जाए जो आमो ख़ास सब तक पहुँचता हो और जहाँ हमने विश्व स्तर की निरंतरता बनाये रखी हो तो वो गीतकारी का घटक है. ५० के दशक से आज तक फ़िल्म जगत के गीतकारों ने गजब का काम किया है. "हम तुम", "फ़ना" और "तारे जमीन पर" जैसी फिल्मों के गीत लिख कर फ़िल्म फेयर पाने वाले प्रसून तारे ज़मीन पर के अपने सभी गीतों को अपनी बेटी ऐश्निया को समर्पित करते हैं, और बताते हैं कि किस तरह एक ८० साल के बूढे आदमी ने उनके लिखे "माँ" गीत की तारीफ करते हुए उनसे कहा था कि वो अपनी माँ को बचपन में ही खो चुके थे, गाने के बोल सुनकर उन्हें उनका बचपन याद आ गया. ऐ आर रहमान के साथ गजिनी में काम कर रहे प्रसून से जब रहमान गीत को आवाज़ देने की "गुजारिश" की तो प्रसून ने बड़ी आत्मीयता से कहा कि जिस दिन आप धाराप्रवाह हिन्दी बोलने लगेंगे उस दिन मैं आपके लिए अवश्य गाऊंगा.देखते हैं वो दिन कब आता है.


मैं ऐक्टर तो नही....मगर...

लीजिये एक और गायक /संगीतकार का काम अब एक्टिंग की दुनिया से जुड़ने वाला है. विश्वास कीजिये हमारे बप्पी दा यानी कि मशहूर संगीतकार और गायक बप्पी लहरी अब फिल्मों में अभिनय करते नज़र आयेंगे. "इट्स रोक्किंग दर्द ऐ डिस्को" नाम से बन रही इस फ़िल्म में बप्पी दा प्रमुख किरदार निभा रहे हैं साथ ही गायन और संगीत भी उन्हीं का है. इसके अलावा वो सलमान और करीना की आने वाली फ़िल्म "मैं और मिसेस खन्ना" में भी एक प्रमुख रोल में नज़र आयेंगे. चौकिये मत अभी ये सूची और लम्बी होने वाली है. इंडियन आइडल अभिजीत सावंत नज़र आयेंगें आने वाली फ़िल्म "लूटेरे" में, तो आनंद राज आनंद और सुखविंदर के भी बारे में भी ख़बर आई है कि वो भी जल्द ही फिल्मों अपना अभिनय कौशल दिखलायेंगे. लगता है हमारे संगीत सितारों को "हिमेशिया सरूर" हो गया है

Sunday, November 23, 2008

संगीत जगत की नई सुर्खियाँ

भारत-पाक रॉक बैंड समागम

हिंदुस्तान के हिन्दी रॉक बैंड "यूफोरिया" (धूम पिचक और माये री से मशहूर) ने पाकिस्तानी बैंड स्ट्रिंग्स के साथ जोड़ बनाने के बाद अब एक और पाकिस्तानी बैंड "नूरी" के साथ अपने नए एल्बम पर काम शुरू कर दिया है. पाकिस्तान में हुए एक सम्मान समारोह में यूफोरिया के सदस्य नूरी के अली नूर और अली हमजा बंधुओं से मिले थे. अगस्त में नूरी की टीम भारत दौरे पर भी आई थी. पाकिस्तान के इस बेहद मशहूर बैंड के साथ काम कर यूफोरिया के सदस्य काफ़ी उत्साहित हैं. एक गीत "वो क़समें" है जो आधा भारत और आधा पाकिस्तान में फिल्माया जाएगा. पहली बार पाकिस्तान की किसी बड़ी कंपनी द्वारा किसी हिन्दुस्तानी रॉक बैंड का एल्बम निकला जा रहा है, जो कि निश्चित ही एक अच्छी शुरुआत है.


जेथ्रो तुल और अनुष्का की बेजोड़ जुगलबंदी

मशहूर ब्रिटिश रॉक समूह जेथ्रो तुल अपने एक सप्ताह के भारत दौरे पर हैं, ३० नवम्बर को दिल्ली के प्रगति मैदान में सितार वादिका अनुष्का शर्मा के साथ जुगलबंदी के बाद ये ६ सदस्यया समूह कोलकत्ता, मुंबई, बंगलोरु और हैदराबाद की यात्रा करेगा. १९६७-६८ में गठित हुए इस समूह की खासियत इनके गायन के अंदाज़ के साथ साथ टीम प्रमुख इआन एंडरसन का बांसुरी वादन भी है. हालाँकि एंडरसन का ये पांचवां भारत दौरा है पर ये पहली बार है जब वो पंडित रवि शंकर की सुपुत्री के साथ ताल मिला रहे हैं. इससे पहले वो पंडित हरी प्रसाद चौरसिया जी के साथ भी मंच बाँट चुके हैं. यदि आप उपरोक्त शहरों में हैं तो इस अवसर को जाया मत होने दें.


बॉलीवुड अभिनेत्रियों की नई आवाज़

बॉलीवुड के ताज़ा हिट्स "ठा करके" (गोलमाल रिटर्न), "मेरी एक अदा शोला सी" (किड्नाप) और जोनी गद्दार और वेल्कम के शीर्षक गीत को अपनी आवाज़ देने वाली पार्श्व गायन् की दुनिया की नई सनसनी हैं आकृति ककर. टेलीविजन के एक टेलेंट प्रतियोगिता में जीतने के बाद भी आकृति के लिए बॉलीवुड के दरवाज़े नही खुले, पर परिवार का सहयोग निरंतर बना रहा. दीपल शाह पर फिल्माए गए "रंगीला रे" के रीमिक्स ने आकृति को थोडी बहुत पहचान जरूर दी पर वो ख़ुद मानती हैं कि रीमिक्स गाकर कोई भी अपने हुनर को भरपूर तरीके से पेश नही कर सकता. शंकर एहसान और लोय के लिए गाये गीत "छम से " ने उन्हें सही मौका मिला. कैटरिना कैफ के लिए आदर्श आवाज़ मानी जा रही आकृति अपनी इस शुरूआती सफलता से बेहद खुश है, आने वाली बिल्लू बार्बर, तो बात पक्की और लव हुआ जैसी फिल्मों में हम आकृति की आवाज़ का लुत्फ़ उठा सकेंगें, साथ ही आकृति शंकर महादेवन के साथ एक एल्बम पर भी काम कर रही है. ख़ुद अपने दम पर इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में जुटी आकृति को हिंद युग्म आवाज़ की शुभकामनायें.


भव्य है युवराज का संगीत भी

देश भर में चुनावों की सरगर्मियाँ जोर पकड़ रही हैं. युवाओं को वोट डालने के लिए प्रेरित करने के लिए इन दिनों ए आर रहमान के मशहूर गीत "पप्पू कांट डांस" की तर्ज पर एक पैरोडी गीत बना कर हर जगह बजाया जा रहा है, साथ ही चुनाव आयोग ए आर को व्यक्तिगत तौर पर भी आकर इस मुहीम में शामिल होने की फरमाइश कर चुका है. यूँ भी इन दिनों ए आर की नई फ़िल्म युवराज का संगीत, संगीत प्रेमियों पर जादू चला रहा है. शो-मैन सुभाष घई की इस फ़िल्म का आधार ही संगीत है.फ़िल्म के सभी प्रमुख किरदार किसी न किसी रूप में संगीत से जुड़े हुए दिखाए गए हैं और रहमान ने अपने संगीत से इन सभी किरदारों को अलग अलग रंग दिए हैं. दिल से और साथिया जैसी फिल्मों के बाद गुलज़ार -रहमान एक बार फ़िर अपनी सफलता को दोहराने में कामियाब हुए हैं. अपनी भव्यता और संगीत की मधुरता के लिए ये फ़िल्म देखी जा सकती है.

Saturday, November 15, 2008

परदा है परदा

गायक कलाकार भी बड़े परदे पर दिखने की कसक को रोक नहीं पाते। हिमेश रेशमिया तो अब ख़ुद को स्टार मानने लगे हैं, सोनू निगम भी एक बार फ़िर वापसी का मन बना रहे हैं। हमारे कैलाश खेर मगर ख़ुद को अभिनय से दूर रखना चाहते हैं, हालाँकि अपने पहले ही मशहूर गीत "अल्लाह के बन्दे" में वो अपने गीत को गाते हुए दुनिया को दिखे थे। उस्ताद नुसरत फतह अली खान ने भी बड़े परदे पर अपनी कव्वाली पर अभिनय किया था और अब अपने गुरु के पदचिन्हों पर चलते उस्ताद राहत फतह अली खान साहब भी दिखेंगे फ़िल्म "दिल कबड्डी" में ख़ुद अपने गाने पर अभिनय करते हुए, अभिनेत्री सोहा अली खान के साथ। यकीनन ये गीत फ़िल्म का सबसे खूबसूरत पहलू होने वाला है.


परी को मिला सपनों का शहजादा

"परी हूँ मैं..." गाकर पॉप संगीत को लोकप्रिय बनाने वाली सुनीता राव आखिरकार विवाह के बंधन में बंध ही गईं। फ़िल्म "रॉक ऑन" के सिनेमाटोग्राफर (छायाकार), जर्मनी के जासन वेस्ट हैं इस परी के सपनों के शहजादे। जासन सुनीता को पाने के लिए जर्मनी छोड़ मुंबई भारत में आकर बस गए हैं। फ़िल्म रॉक ऑन के आलावा उन्होंने सुनीता के नये वीडियो "सुन ज़रा" का भी छायांकन किया है। सुनीता और जासन को आवाज़ परिवार की बधाई।


तीन पहर संगीत बजे

मुंबई में धूम मचाने के बाद "तीन पहर" (शास्त्रीय संगीत और लोक संगीत समारोह) इस बार दिल्ली में आयोजित हुआ। दिन के तीन पहर तक चलने वाले इस संगीत उत्सव की खासियत ये है कि इसमें प्रस्तुत होने वाली सभी जुगलबंदियां और वाध्य संगीत के रचयिता नए उभरते हुए कलाकार होते हैं। इस माध्यम से श्रोताओं को इन आने वाले समय के होने वाले उस्तदों के फन का पहला जायका मिल जाता है। सोमबाला सतले, राकेश चौरसिया, उस्ताद शुजात हुसैन खान, देवकी पंडित, और मुकुल शिवपुत्र जैसे बड़े कलाकारों ने भी इस कार्यकम में शिरकत की। संचालक महेश बाबू बताते हैं राहुल शर्मा ने १२ साल पहले इस कार्यक्रम में अपना जौहर दिखाया था और आज वो शिखर पर हैं। हम दुआ करेंगे कि और भी नामी और गुणी कलाकार इस मंच से उभर कर सामने आयें.


बड़े कलाकारों की टक्कर में संगीत प्रेमियों का फायदा

दिसम्बर के अंत तक तीन बड़ी फिल्में प्रर्दशित होने वाली हैं. और इंडस्ट्री की मशहूर "ज़ंग-ए-खान" फिर छिड़ने वाली है। शाहरुख़ खान अपने लौह पुरूष अंदाज़ से बिल्कुल अलग इस बार एक आम आदमी के किरदार में लग रहे हैं फ़िल्म "रब ने बना दी जोड़ी" में तो आमिर ने "माचों मेन" का लुक दिया है अपने "गजनी" के किरदार को। वहीं अपने चिर परिचित प्रेमी के अंदाज़ में हैं सलमान खान फ़िल्म "युवराज" में। अब तीनों ही बड़ी फिल्में बड़े बैनर की हैं। संगीत के धुरंधरों ने इन फिल्मों को सजाया है तो जाहिर सी बात है कि तीनों फिल्मों का संगीत जबरदस्त होगा ही। " रब ने..." में सलीम सुलेमान का संगीत है तो "युवराज" और "गजनी" में ए॰आर॰ रहमान का संगीत हैं। युवराज के गीतकार हैं गुलज़ार साहब और गजनी के प्रसून जोशी। इन फिल्मों के "आजा के हवाओं में...", "धीमे धीमे..." और "गुजारिश" जैसे गीत आजकल सब की जुबान पर चढ़ चुके हैं...कुल मिलाकर संगीत प्रेमियों के लिए एक अच्छी "ट्रीट" होंगीं ये फिल्में, ये तय है।

Sunday, November 9, 2008

रॉक ऑन के सितारे जुटे बाढ़ राहत कार्य में

आवाज़ ने संगीतप्रेमियों से इस फ़िल्म की सिफारिश की थी, और आज यह फ़िल्म साल की श्रेष्ट फिल्मों में एक मानी जा रही है. फ़िल्म के संगीत का नयापन युवाओं को बेहद भाया. फरहान अख्तर ने बतौर अभिनेता और गायक अपनी पहचान बनाई. बिहार में कोसी नदी में आई बाढ़ के पीडितों के लिए मुंबई में अभी हाल ही में इस फ़िल्म के सितारों और संगीत टीम के सदस्यों ने जबरदस्त शो किया और इस नेक काम के लिए धन अर्जित किया. "मेरी लौंड्री का एक बिल..." गीत जब ऋतिक रोशन थिरके तो दर्शक समूह झूम उठा. "रॉक ऑन" का संगीत वास्तव में रोक्किंग है.


रविन्द्र जैन की वापसी

लंबे समय के बाद सुप्रसिद्ध गीतकार संगीतकार रविन्द्र जैन फ़िल्म संगीत में वापसी कर रहे हैं. ७ नवम्बर को राजश्री प्रोडक्शन के साथ उनकी नई फ़िल्म "एक विवाह ऐसा भी" प्रर्दशित हो रही है. रविन्द्र जी ने राजश्री फ़िल्म्स के साथ लगभग १७ फिल्मों में काम किया है. "अबोध" की असफलता के लगभग २० वर्षों के बाद फ़िल्म "विवाह" से रविन्द्र जी ने बड़जात्या परिवार के साथ अपनी वापसी की थी. अब "एक विवाह ऐसा भी" से भी इसी तरह की सफलता की दर्शकों और श्रोताओं को उम्मीदें हैं.


नदीम श्रवण की जोड़ी दिखायेगी फ़िर से कमाल

आशिकी, दिल है कि मानता नहीं, सड़क, सजन, दीवाना, राजा हिन्दुस्तानी और परदेस जैसी फिल्मों से ९० के दशक में संगीत जगत पर राज करने वाली संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण २००५ में हुए "स्प्लिट" के बाद अब फ़िर से एक होकर काम करेगी. धर्मेश दर्शन की "बावरा" और डेविड धवन की "डू नोट डिसटर्ब" होंगीं उनकी आने वाली फिल्में, जहाँ एक बार फ़िर क्रेडिट टाइटल में नदीम और श्रवण का नाम एक साथ देखा जाएगा. संगीत प्रेमियों के लिए यह निश्चित ही एक सुखद ख़बर है...उम्मीद करेंगें कि जतिन ललित की जोड़ी भी अपने मतभेद भूलकर एक साथ आयें जल्द ही...


एक दौर समाप्त

भारतीय फ़िल्म जगत के मशहूर निर्माता-निर्देशक बीआर चोपड़ा का लंबी बीमारी के बाद बुधवार सुबह मुंबई में निधन हो गया। फिल्मी दुनिया को 'नया दौर' देने वाले बलदेव राज चोपड़ा का जन्म 22 अप्रैल 1914 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। ‘दादा साहब फाल्के’ पुरस्कार से सम्मानित चोपड़ा ने धूल का फूल’, ‘वक़्त’, ‘नया दौर’, ‘क़ानून’, ‘हमराज’, ‘इंसाफ़ का तराज़ू’ और ‘निकाह’ जैसी कई सफल फ़िल्में बनाई। 'आवाज़' की विनम्र श्रद्धाँजलि!!


पं॰ भीमसेन जोशी को दिया जायेगा भारत-रत्न

सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी को सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित करने का फ़ैसला किया है. किराना घराने के ८६ वर्षीय भीमसेन ने महज़ १९ वर्ष की उम्र से गाना शुरू किया था। कर्नाटक के गडक ज़िले के एक छोटे से शहर में वर्ष १९२२ में जन्मे और मुख्य रूप से खयाल शैली और भजन के लिए मशहूर पंडित जोशी को वर्ष १९९९ में पद्मबिभूषण, १९८५ में पद्मभूषण और १९७२ में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।

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