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Saturday, October 21, 2017

चित्रकथा - 41: भाई-दूज विशेष: फ़िल्म-संगीत जगत में भाई-बहन की जोड़ियाँ

अंक - 41

भाई-दूज विशेष: फ़िल्म-संगीत जगत में भाई-बहन की जोड़ियाँ


"एक हज़ारों में मेरी बहना है..." 



'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार! प्रस्तुत है फ़िल्म और फ़िल्म-संगीत के विभिन्न पहलुओं से जुड़े विषयों पर आधारित शोधालेखों का स्तंभ ’चित्रशाला’। आज रक्षाबंधन है, इस पावन अवसर पर हम अपने सभी पाठकों का हार्दिक अभिनन्दन करते हैं। दोस्तों, हिन्दी सिने संगीत जगत में कई भाई-बहन की जोड़ियों ने काम किया है। आज रक्षाबंधन के अवसर पर आइए ’चित्रशाला’ के ज़रिए याद करें कुछ ऐसे भाई-बहनों को जिन्होंने फ़िल्म संगीत को समृद्ध किया है। तो आइए क्यों ना आज ’चित्रकथा’ के इस अंक में हम याद करें कुछ ऐसी ही भाई-बहन की जोड़ियों को जिन्होंने फ़िल्म-संगीत जगत में अपनी पहचान बनाई हैं, अपनी छाप छोड़ी है।




क ही परिवार के दो भाई या दो बहनों के फ़िल्म संगीत जगत में काम करने के उदाहरण तो हमें बहुत से मिल जायेंगे, पर एक ही परिवार से एक भाई और एक बहन की जोड़ियों की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती है। फ़िल्म संगीत के शुरुआती दौर की तरफ़ चलें तो सबसे पहले जिस भाई-बहन की जोड़ी हमें याद आती है, वह है सुनहरे दौर के फ़िल्म संगीतकारों में भीष्म-पितामह की हैसियत रखने वाले संगीतकार अनिल बिस्वास और फ़िल्म संगीत की प्रथम पार्श्वगायिका पारुल घोष की जोड़ी। पारुल घोष अनिल दा से दो वर्ष छोटी थीं। भाई बहन दोनों में संगीत के बीज बोये उनकी माँ ने जिन्हें संगीत से बहुत लगाव था। पारुल का विवाह अनिल दा के मित्र और बांसुरी नवाज़ पंडित पन्नालाल घोष से सम्पन्न हुआ और संगीत की धारा बहती चली गई। भाई ने अपनी बहन को अपने द्वारा स्वरबद्ध किए हुए बहुत से गीत गवाए, जिनमें पारुल घोष का सबसे हिट गीत "पपीहा रे मेरे पिया से कहियो जाए" भी शामिल है।

अनिल बिस्वास - पारुल घोष के बाद जिस जोड़ी का ज़िक्र हमारे ज़हन में आता है, वह है पार्श्वगायिका गीता दत्त और कमचर्चित संगीतकार मुकुल रॉय की। मुकुल रॉय जो आजकल महाराष्ट्र के नासिक में रहते हैं, उन्होंने अपनी बहन गीता दत्त की जीवनी "Geeta Dutt - The Skylark" को प्रकाशित करने में लेखिका हेमन्ती बनर्जी की बहुत सहायता की है। मुकुल रॉय अपनी बहन की तरह कामयाब तो नहीं हुए, पर ’सैलाब’, ’डीटेक्टिव’ और ’भेद’ जैसी फ़िल्मों में उनके स्वरबद्ध गीत बहुत लोकप्रिय हुए थे। गीता दत्त की आवाज़ में ’डीटेक्टिव’ का "मुझको तुम जो मिले ये जहान मिल गया" और ’सैलाब’ का "है यह दुनिया कौन सी ऐ दिल" गली गली गूंजा करता था। मुकुल अपनी बहन के बहुत करीब थे और गीता दत्त की ज़िन्दगी में जब निराशा और हताशा ने घर कर लिया था, तब मुकुल ही थे जिन्होंने उनका हमेशा साथ दिया। गुरु दत्त और गीता दत्त की असामयिक मृत्यु के बाद इनकी संतानों - तरुण और अरुण - को मुकुल रॉय ने ही बड़ा किया। एक भाई का अपनी बहन के प्रति निस्वार्थ प्रेम का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है भला!

एक ऐसा परिवार जिसने फ़िल्म संगीत जगत को शायद सर्वाधिक योगदान दिया है, वह है मंगेशकर परिवार। चार बहनों और एक भाई ने मिल कर संगीत का ऐसा ताना-बाना बुना है कि फ़िल्म संगीत का जब भी इतिहास लिखा जाएगा, उसके कम से कम आधे हिस्से में इस परिवार के किसी ना किसी का उल्लेख रहेगा। मंगेशकर परिवार के बारे में नई बात बताने को अब कुछ बाक़ी नहीं बचा है। लता, मीना, आशा, उषा और हृदयनाथ - चार बहनें और एक भाई - स्वाभाविक है कि इन चारों दीदी से हृदयनाथ को अपार प्यार मिला। हालाँकि हृदयनाथ हिन्दी फ़िल्म जगत में ज़्यादा काम नहीं कर सके, पर मराठी और ग़ैर फ़िल्म-संगीत में उनका योगदान उल्लेखनीय है। लता, आशा और उषा ने उनके बहुत सी सुन्दर रचनाओं को कंठ दिया है। मंगेशकर परिवार में भाई-बहन का रिश्ता अगली पीढ़ी में भी जारी रहा। आशा की संताने - हेमन्त और वर्षा - जब संगीतकार और गायिका बनीं तब आशा की ख़ुशियों का ठिकाना न रहा। आशा के शब्दों में, "कोई भी क्षण ज़िन्दगी के ऐसे होते हैं जो भुलाये नहीं जा सकते, बड़े मज़ेदार होते हैं। मेरा लड़का हेमन्त, आप समझते होंगे माँ के लिए बेटा क्या चीज़ होता है, एक दिन वो म्युज़िक डिरेक्टर बन गया और मेरे पास आकर कहने लगा कि यह मेरा गाना है, तुम गाओ। कैसा लगता है ना? जो कल तक इतना सा था, आज वो मुझसे कह रहा है कि मेरा गाना गाओ। फिर उसने अपनी बहन, मेरी बेटी वर्षा से कहने लगा कि तुम्हे भी गाना पड़ेगा। वर्षा बहुत शर्मिली है, उसने कहा कि बड़ी मासी इतना अच्छा गाती है, माँ इतना अच्छा गाती है, मैं नहीं गाऊँगी। लेकिन हेमन्त ने बहुत समझाया और उसका पहला गाना रेकॉर्ड हुआ। मैं स्टुडियो पहुँची तो देखा कि लड़की माइक के सामने खड़ी है और उसका भाई वन-टू बोल रहा है। यह क्षण मैं कभी नहीं भूल सकती। और वह गाना था फ़िल्म ’जादू-टोना’ का "यह गाँव प्यारा-प्यारा..."।" अफ़सोस की बात है कि हेमन्त और वर्षा, दोनों में से किसी को भी सफलता नहीं मिली, और वर्षा ने तो हाल ही में आत्महत्या भी कर ली।

भाई-बहन का रिश्ता हमेशा ख़ून का ही रिश्ता हो यह ज़रूरी नहीं। लता मंगेशकर का मदन मोहन के साथ सगे भाई जैसा ही रिश्ता था। इस रिश्ते की शुरुआत और पहली बार राखी बंधवाने का क़िस्सा लता के शब्दों में कुछ यूं है - "मैं पहली बार मदन भ‍इया से उनका स्वरबद्ध कोई गीत गाने के लिए नहीं बल्कि उनके साथ एक डुएट गीत गाने के लिए मिली थी। मास्टर ग़ुलाम हैदर ने हम दोनो को फ़िल्म ’शहीद’ में एक भाई-बहन के रिश्ते के गीत को गाने के लिए बुलाया था जिसके बोल थे "पिंजरे में बुलबुल बोले मेरा छोटा सा दिल डोले..."। गीत के बाद हम दोनों ने एक दूसरे की तारीफ़ की और तुरन्त हमारे बीच एक जुड़ाव सा हो गया। उन्होंने मुझसे यह वादा लिया कि जब भी वो संगीतकार बनेंगे तो उनकी पहली फ़िल्म में मुझे गाना पड़ेगा। मैंने वादा किया। पर किसी कारण से मैं उनकी पहली फ़िल्म ’आँखें’ में नहीं गा सकी और हमारे मीठे रिश्ते में एक खटास आई। मदन भ‍इया का दिल टूट गया। पर कुछ ही दिनों में मदन भ‍इया हमारे घर आए और कहा कि हमारा रिश्ता भाई-बहन के एक प्यार भरे गीत से शुरु हुआ था, आज रक्षाबंधन है, मेरी कलाई पर यह राखी बाँधो और वादा करो कि हम हमेशा भाई-बहन रहेंगे और तुम हमेशा मेरे लिए गाओगी। उन्हें राखी बाँधते हुए मेरी आँखों से आँसू टपकने लगी।"

संगीत के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण परिवार रहा है पंडित जसराज जी का। सुलक्षणा, विजेता, जतिन और ललित उन्हीं के भतीजी/भतीजे हैं। जब जतिन और ललित फ़िल्म जगत में आए तब तक सुलक्षणा फ़िल्मों से संयास ले चुकी थीं। इसलिए सुलक्षणा द्वारा जतिन-ललित के किसी गीत के गाने की जानकारी नहीं है। छोटी बहन विजेता ने ज़रूर जतिन-ललित के निर्देशन में कुछ गीत गाई हैं जिनमें "जवाँ हो यारों यह तुमको हुआ क्या" (जो जीता वही सिकन्दर) और "सच्ची यह कहानी है" (कभी हाँ कभी ना) चर्चित रहे। मंगेशकर और पंडित परिवार के बाद अब ज़िक्र शिवराम परिवार का। संगीतकार पंडित शिवराम कृष्ण का नाम आज लोग लगभग भुला चुके हैं पर चार पीढ़ियों से उनका परिवार संगीत की सेवा में निरन्तर लगा हुआ है। संगीतकार जोड़ी जुगल किशोर और तिलक राज उन्हीं के बेटे हैं जिन्होंने ’भीगी पलकें’, ’समय की धारा’ आदि फ़िल्मों में संगीत दिया है। ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ को दिए एक साक्षात्कार में जुगल किशोर जी ने अपने परिवार के बारे में बताते हुए अपनी बहनों का भी उल्लेख किया था कुछ इस तरह - "तिलक राज तो मेरा ही छोटा भाई है। बचपन से ही हम दोनों साथ में संगीत की चर्चा भी करते थे और साथ ही में बजाते भी थे। अपने स्कूल के वार्षिक दिवस के कार्यक्रम के लिए दोनों साथ में मिल कर नए गाने कम्पोज़ करते थे और स्टेज पर साथ में गाते थे। हमने अपना ऑरकेस्ट्रा भी बनाया था 'जयश्री ऑरकेस्ट्रा' के नाम से। जयश्री मेरी छोटी बहन है। आपने जयश्री शिवराम का नाम सुना होगा जो एक प्लेबैक सिंगर रही है। 'रामा ओ रामा' फ़िल्म का शीर्षक गीत उसी ने ही गाया था। हम लोग आठ भाई बहने हैं और सभी के सभी फ़िल्म इंडट्री से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। मैं वायलिनिस्ट, कम्पोज़र और सिंगर, तिलक राज कम्पोज़र और सिंगर, मुकेश शिवराम एक सिंगर है, भगवान शिवराम एक रिदम प्लेअर, पूर्णिमा परिहार एक सिंगर, नवीन शिवराम एक कीबोर्ड प्लेअर, तथा जयश्री शिवराम व निशा चौहान सिंगर्स। इस तरह से तीन पीढ़ियों से हमारा परिवार संगीत की सेवा में लगा हुआ है।" अपनी बहन के नाम पर ऑरकेस्ट्रा रखने वाले जुगल किशोर और तिलक राज ने अपनी बहन जयश्री को फ़िल्म ’समय की धारा’ और ’तेरे बिना क्या जीना’ में गीत गवाया था। मशहूर संगीतकार बप्पी लाहिड़ी ने बरसों पहले अपनी बेटी रीमा को लौन्च किया था, और अब हाल में उनके बेटे बप्पा ने भी फ़िल्म जगत में क़दम रख दिया है। नए-नए संगीतकार बने बप्पा लाहिड़ी ने बहन रीमा को अपनी पहली फ़िल्म ’जय वीरू’ में हार्ड कौर के साथ एक गीत गवाया है "ऐसा लश्कारा..."। 

अब तक जितने भी भाई-बहन जोड़ियों की हमने बातें की, उन सब में भाई संगीतकार और बहन गायिका हैं। अब ज़िक्र करते हैं उन भाई-बहन जोड़ियों की जिनमें भाई और बहन दोनो ही गायक/गायिका हैं। पहली जोड़ी है नाज़िया हसन और ज़ोहेब हसन की। नाज़िया और ज़ोहेब, दोनों का बचपन कराची और लंदन में बीता। 70 के दशक के अन्त में दोनो ने साथ मिल कर "संग संग चलें" और "कलियों का मेला" जैसे लोकप्रिय म्युज़िकल शोज़ में गाया। 1976 में दोनो नज़र आये Beyond the Last Mountain फ़िल्म के एक गीत में। नाज़िया हसन की पहली और बेहद कामयाब ऐल्बम ’डिस्को दीवाने’ में ज़ोहेब की भी आवाज़ शामिल थी। इसके बाद ’बूम बूम’ ऐल्बम भी ख़ूब चला, जिसके गाने ’स्टार’ फ़िल्म में लिया गया। बप्पी लाहिड़ी ने नाज़िया और ज़ेहेब से फ़िल्म ’शीला’ में गीत गवाये। नाज़िय को जितनी लोकप्रियता हासिल हुई, भाई ज़ोहेब को उतनी कामयाबी नहीं मिली। अफ़सोस की बात है कि मात्र 35 वर्ष की आयु में नाज़िया हसन इस दुनिया से चल बसीं और भाई-बहन की यह जोड़ी टूट गई। सरहद के इस पार इसी तरह की एक जोड़ी रही है शान और सागरिका की। पार्श्व गायन के क्षेत्र में क़दम जमाने से पहले संगीतकार मानस मुखर्जी के बेटे शान ने अपनी बड़ी बहन सागरिका के साथ मैगनासाउण्ड कंपनी के साथ एक अनुबन्ध किया और कई ग़ैर फ़िल्मी ऐल्बम्स में गाये जिनमें ’नौजवान’ और ’Q – Funk’ ख़ास चर्चित रहे। जिस तरह से बिद्दु ने नाज़िया और ज़ोहेब की जोड़ी को काफ़ी काम दिये, वैसे ही शान और सागरिका से भी बहुत से गीत और रीमिक्स गवाये। शान-सागरिका की जोड़ी भी बहुत ज़्यादा नहीं चल सकी क्योंकि शान पार्श्वगायन में व्यस्त हो गए और सागरिका का भी अपना अलग स्टाइल था। पर भाई-बहन के आपसी रिश्ते में कभी दरार नहीं आई। मशहूर पार्श्वगायिका अलका याज्ञनिक ने अपने भाई समीर याज्ञनिक के साथ मिल कर एक प्राइवेट ऐल्बम ’दिल था यहाँ अभी’ में गीत गाए। अपने भाई को बढ़ावा मिल सके इसी उद्देश्य से अलका ने यह ऐल्बम की जिसके गीत पसन्द तो बहुत किए गए पर समीर के करीयर को सँवारने में यह ऐल्बम असफल रही।

इस तरह से हर दशक में भाई-बहन की जोड़ियाँ हिन्दी फ़िल्म-संगीत जगत में आती रही हैं और शायद आगे भी आती रहेंगी, और यह परम्परा यूं ही चलती रहेगी।


आख़िरी बात

’चित्रकथा’ स्तंभ का आज का अंक आपको कैसा लगा, हमें ज़रूर बताएँ नीचे टिप्पणी में या soojoi_india@yahoo.co.in के ईमेल पते पर पत्र लिख कर। इस स्तंभ में आप किस तरह के लेख पढ़ना चाहते हैं, यह हम आपसे जानना चाहेंगे। आप अपने विचार, सुझाव और शिकायतें हमें निस्संकोच लिख भेज सकते हैं। साथ ही अगर आप अपना लेख इस स्तंभ में प्रकाशित करवाना चाहें तो इसी ईमेल पते पर हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। सिनेमा और सिनेमा-संगीत से जुड़े किसी भी विषय पर लेख हम प्रकाशित करेंगे। आज बस इतना ही, अगले सप्ताह एक नए अंक के साथ इसी मंच पर आपकी और मेरी मुलाक़ात होगी। तब तक के लिए अपने इस दोस्त सुजॉय चटर्जी को अनुमति दीजिए, नमस्कार, आपका आज का दिन और आने वाला सप्ताह शुभ हो!




शोध,आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 
प्रस्तुति सहयोग : कृष्णमोहन मिश्र  



रेडियो प्लेबैक इण्डिया 

Tuesday, August 10, 2010

सलीम-सुलेमान की आशाएँ ढल गई हैं धीमी गति के प्रेरक गीतों में.. साथ हैं प्रीतम और शिराज़ भी

ताज़ा सुर ताल ३०/२०१०

सुजॊय - 'ताज़ा सुर ताल' के सभी श्रोताओं व पाठकों को हमारा प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, इसे इत्तेफ़ाक़ ही कहिए या कुछ और, हमारी फ़िल्म इंडस्ट्री में कुछ नायक ऐसे हुए हैं जिनकी फ़िल्मों के गानें हमेशा ही सुपरहिट हुआ करते हैं। जैसे कि राजेश खन्ना की शायद ही कोई फ़िल्म ऐसी होगी जिसके गानें चले ना हों। नए दौर में सलमान ख़ान ऐसे नायक बनें जिनकी फ़िल्मों के गानें बेहद लोकप्रिय होते आए हैं और आज भी होते हैं। ऐसे ही एक और अभिनेता हैं जॊन एब्राहम जिनकी फ़िल्मों का संगीत भी चलता आया है, फिर चाहे फ़िल्म चले या ना चले।

विश्व दीपक - 'जिस्म', 'साया', 'धूम', 'सलाम-ए-इश्क़', 'काल', 'गरम मसाला', 'दोस्ताना', 'गोल', 'न्यू यार्क', 'पाप', 'टैक्सी नंबर ९ २ ११', ये सारी जॉन की फ़िल्में संगीत के लिहाज़ से सफल ही मानी जाएंगी। आज हम जॉन की नई फ़िल्म 'आशाएँ' के गानें लेकर उपस्थित हुए हैं, और इन गीतों को सुनने के बाद हमें और आपको मिलकर यह निर्णय लेना है कि क्या जॉन की पिछली सारी फ़िल्मों के संगीत की तरह इस फ़िल्म के संगीत पर भी 'हिट सुपरहिट' की मोहर लगाई जा सकती है या नहीं।

सुजॊय - सब से पहले तो फ़िल्म के शीर्षक की बात करेंगे। परसेप्ट पिक्चर कंपनी के बैनर तले बनी इस फ़िल्म को लिखा व निर्देशित किया है नागेश कुकुनूर ने। अब आप समझ गए होंगे कि हमने फ़िल्म के शीर्षक का ज़िक्र क्यों किया। जी हाँ, नागेश की मशहूर फ़िल्म 'इक़बाल' के मशहूर गीत "आशाएँ खिले दिल की" से इस फ़िल्म का शीर्षक प्रेरित है।

विश्व दीपक - जॉन एब्राहम के अलावा इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार हैं नवोदित अभिनेत्री सोनल सहगल (जो हिमेश भाई के साथ उनकी फ़िल्म रेडियो में भी दिखी थीं), गिरिश कारनाड, फ़रीदा जलाल, आश्विन चितले, अनिता नायर प्रमुख। श्रेयस तलपडे का भी एक गेस्ट अपीयरेन्स है फ़िल्म में। पॉण्डिचेरी और हैदराबाद के लोकेशन्स पर फ़िल्माये गये इस फ़िल्म के लिए जॉन को १६ किलो का वज़न कम करना पड़ा है ऐसा सुनने में आया है। ये तो थे फ़िल्म से जुड़े कुछ तथ्य, आइए अब गीतों का सिलसिला शुरु किया जाए। फ़िल्म में कुल ८ गीत हैं और ५ रीमिक्स ट्रैक्स।

सुजॊय - 'स्ट्राइकर' और 'राजनीति' की तरह 'आशाएँ' में भी एकाधिक संगीतकार हैं, मुख्य संगीतकार हैं सलीम-सुलेमान, जिन्होंने फ़िल्म का पार्श्व संगीत भी तय्यार किया है। और जो दूसरे संगीतकार हैं, वो हैं प्रीतम (२ गीत) और शिराज़ उप्पल (१ गीत)। गीतकार हैं मीर अली हुसैन, समीर, कुमार और शक़ील सोहैल। तो आइए सुनते हैं पहला गीत नीरज श्रीधर की आवाज़ में। नीरज का नाम देख कर आप समझ ही गए होंगे कि इसके संगीतकार हैं प्रीतम। इस गीत को समीर ने लिखा है।

गीत - मेरा जीना है क्या


विश्व दीपक - नीरज श्रीधर और प्रीतम की जोड़ी जिस तरह के गानें हमें देती आई है आज तक (हरे राम हरे राम, प्रेम की नैय्या, तुम मिले, वगेरह), उससे कुछ अलग हट के है यह गीत। गीत शुरु होता है नर्मोनाज़ुक अंदाज़ में, लेकिन बाद में रॉक शैली आ जाती है। नीरज की आवाज़ अच्छी बैठी है इस गीत में लेकिन यह गीत तो के.के वाला गीत है बिल्कुल। आजकल इस गीत को ख़ूब टीवी पर दिखाया जा रहा है फ़िल्म के प्रोमो में। और नीरज और उस प्रोमो में प्रीतम भी नज़र आ रहे हैं रॉक सिंगर्स की तरह।

सुजॊय - मुझे यह गीत अच्छा ही लगा, लेकिन मेरा भी ख़याल है कि के.के की आवाज़ में गीत और ज़्यादा खुल कर सामने आता। ख़ैर, नीरज ने भी अच्छा निभाया है। आगे बढ़ते हैं दूसरे गीत की तरफ़, और अब की बार गीतकार कुमार के बोल, प्रीतम का ही संगीत, और इसे गाया है शान और तुलसी कुमार ने। एक सुरीले मेलोडियस युगल गीत की उम्मीद हम ज़रूर रख सकते हैं, क्यों? आइए ख़ुद सुनते हैं और फिर निर्णय लेते हैं।

गीत - दिलकश दिलदार दुनिया


सुजॊय - अनुप्रास अलंकार!!! लेकिन जिस तरह के मेलोडियस नर्मोनाज़ुक रोमांटिक युगल गीत की कल्पना मैंने की थी, वैसा नहीं पाया। मैंने तो सोचा था कि "तेरी ओर" और "ख़ुदा जाने" जैसा कुछ सुनने को मिलेगा। लेकिन इस गीत का अंदाज़ कुछ अलग सा है। शान की आवाज़ भी कुछ बदली हुई-सी लगी। तुल्सी कुमार की आवाज़ में तो मुझे कभी कोई ख़ास बात नज़र नहीं आई। ग़लत अर्थ ना निकालें तो मैं यही कहूँगा कि तुलसी कुमार जैसी आवाज़ और गायकी तो हर रियल्टी शो में सुनने को मिल जाती है। इस आवाज़ में ख़ास बात क्या है कोई मुझे समझाए ज़रा!

विश्व दीपक - इस गीत के बारे में इतना ही कहूँगा कि कम्पोजिशन अच्छा है, बीट बेस्ड सॉंग है, ठीक ठाक गीत है। लेकिन प्रीतम से हम कुछ और बेहतर उम्मीद रखते हैं, ख़ास कर रोमांटिक नर्मोनाज़ुक गीतों में। चलिए अब बढ़ते हैं तीसरे गीत की ओर। प्रीतम के बाद अब है शिराज़ उप्पल की बारी। उन्होंने ना केवल इस गीत को स्वरबद्ध किया है, बल्कि शक़ील सोहैल के लिखे इस गीत को ख़ुद गाया भी है। सुनते हैं "रब्बा"।

गीत - रब्बा


विश्व दीपक - गायक-संगीतकार शिराज़ उप्पल पाक़िस्तान से ताल्लुक़ रखते हैं। गाना तो अच्छा ही बना है, धुन भी अच्छी है, गाया भी ठीक-ठाक है, लेकिन पता नहीं क्यों इस गीत ने कोई आस असर नहीं छोड़ा। बस यही कह सकता हूँ कि "रब्बा ये क्या हुआ"।

सुजॊय - यह शायद इसलिए भी हो सकता है कि शिराज़ की आवाज़ में ऊँचे नोट्स वाले गीत ज़्यादा अच्छे लगते हैं। नीचे सुर के गीतों में उनकी आवाज़ खुल के बाहर नहीं आती। इस गीत के बारे में यही कहूँगा कि शक़ील सोहैल ने अच्छा कलम चलाया है।

विश्व दीपक - अच्छा, हमने तीन गीत सुनें, अब से अगले पाँच गीतों में संगीत सलीम सुलेमान का है और गीतकार हैं मीर अली हुसैन। सुनते हैं इस गीतकार-संगीतकार जोड़ी की पहली रचना ज़ुबीन की आवाज़ में।

गीत - अब मुझको जीना


सुजॊय - यह आशावादी और प्रेरणादायक गीत था। ज़ुबीन आसाम से ताल्लुक़ रखते हैं और वहाँ पर ख़ूब लोकप्रिय हैं। हिंदी में प्रीतम ने उनसे फ़िल्म 'गैंगस्टर' में "या अली रहम अली" गवाया था जो बहुत लोकप्रिय हुआ था। इस गीत को भी उन्होंने पूरे जोश के साथ गाया है। ज़ोरदार ऑरकेस्ट्रेशन और क़दमों को थिरकाने वाला गीत है। पिछले तीन गीत भी अच्छे थे लेकिन कुछ ना कुछ कमी लग रही थी उनमें। इस गीत को सुन कर एक ताज़गी जैसी आ गई, बहुत ही खुल कर यह गीत आया है और सही में गीत अच्छा है।

विश्व दीपक - इस गीत की शुरुआत में कुछ कुछ 'Summer of 69' जैसा लगा, फिर गीत ने तेज़ गति पकड़ ली और अपनी अलग राह पकड़ कर अपने मुक़ाम तक पहुँच गई। ज़ुबीन गर्ग की आवाज़ में एक अलग कशिश है और भीड़ से अलग सुनाई देती है। उनसे और भी ज़्यादा गानें संगीतकार गवा सकते हैं। 'आशाएँ' फ़िल्म का पाँचवा गीत है शफ़ाक़त अमानत अली की आवाज़ में, "शुक्रिया ज़िंदगी"। आइए गीत सुनते हैं, फिर बात करते हैं।

गीत - शुक्रिया ज़िंदगी


सुजॊय - ज़िंदगी का शुक्रिया अदा करता हुआ यह गीत सुन कर हम सलीम सुलेमान, मीर अली हुसैन और शफ़ाक़त अमानत अली का शुक्रिया अदा ही कर सकते हैं। "छन के आई तो क्या चांदनी तो मिली" जैसे अन्योक्ति अलंकार में सजकर यह गीत ज़िंदगी के प्रति आशावादी होने की प्रेरणा देती है। मुझे तो यह गीत सुनते हुए फ़िल्म 'सदमा' का वो मशहूर याद गया कि "ऐ ज़िंदगी गले लगा ले, हमने भी तेरे हर एक ग़म को गले से लगाया है, है न"।

विश्व दीपक - बेहद ख़ूबसूरत बोल लिखे हैं मीर अली हुसैन ने। मुझे तो लग रहा है कि अच्छे गीतकारों और अच्छे बोल वाले गीतों का ज़माना वापस आ गया है। पिछले कुछ समय से निम्न स्तर के बोल वाले गानें बहुत ही कम हो गए हैं। क्या फ़िल्म संगीत एक बार फिर से करवट ले रहा है?

सुजॊय - काश ऐसा हो जाए, और फ़िल्म संगीत का एक और सुनहरा दौर आ जाए तो मज़ा आ जाए! शफ़ाक़त अमानत अली के बाद अब बारी है श्रेया घोषाल की सुरीली आवाज़ की। "पल में मिला जहाँ" श्रेया की मधुर आवाज़ में ढलकर बेहद सुरीला सुनाई देता है, आइए सुनते हैं।

गीत - पल में मिला जहां (श्रेया)


विश्व दीपक - श्रेया की नर्म आवाज़ में बिना किसी साज़ के जैसे ही "पल में मिला जहां" शुरु होता है, गीतकार किस ख़ूबसूरती से हर पंक्ति की शुरुआत "पल में" से करके "पल में" पर ही ख़त्म करते हैं, गीत को सुन कर महसूस किया जा सकता है।

पल में मिला जहां, है धुआँ पल में,
पल में यक़ीन था, अब गुमां पल में,
पल में उम्मीद थी, अरमां पल में,
पल में बहार थी, अब ख़िज़ाँ पल में।

सुजॊय - गीत में कम से कम साज़ों का इस्तेमाल हुआ है, जिस वजह से श्रेया को काफ़ी मेहनत करनी पड़ी होगी क्योंकि पूरा दायित्व उनकी गायकी पर आ गया है। गीत तो निस्संदेह उत्कृष्ठ है, लेकिन देखना यह है कि आज के जेनरेशन के कितने लोगों को इस गीत को पूरा सुनने का धैर्य रहेगा। इसी गीत का एक पुरुष संस्करण भी है शंकर महादेवन की आवाज़ में, आइए लगे हाथ इसे भी सुन लिया जाए।

गीत - पल में मिला जहां (शंकर)


विश्व दीपक - इन दोनों संस्करणों को सुन कर कह पाना मुश्किल है कि कौन सा बेहतर है। शंकर ने ज़्यादा ज़ोर डाल कर गाया है। शंकर एक ऐसे गायक और संगीतकार हैं जिन्हे हर संगीतकार पसंद करते हैं, उनकी गायकी के साथ साथ उनके मीठे स्वभाव के कारण भी। तभी तो दूसरे संगीतकार उनसे समय समय पर गवाते रहते हैं। हाल ही में फ़िल्म 'राजनीति' में "धन धन धरती रे" उन्होंने गाया था।

सुजॊय - और आठवें और अंतिम गीत की बारी जिसे गाया है मोहित चौहान ने। एक और धीमी गति वाला गीत जिसमें है रोमांस, लेकिन गभीरता के साथ। "चला आया प्यार" में परक्युशन का सुंदर इस्तेमाल हुआ है।

विश्व दीपक - तबले का भी सुंदर इस्तेमाल सुनाई देता है। आम तौर पर फ़्युज़न गीतों में गीत देसी होता है, सुर देसी होते हैं और बीट्स विदेशी होते हैं; लेकिन इस गीत में गायकी और गीत की धुन आधुनिक है, लेकिन जो रीदम है उसे तबले की थापों पर शास्त्रीय अंदाज़ में तय्यार किया गया है जिससे एक नवीनता आई है गाने में। सुना जाए...

गीत - चला आया प्यार


इन आठ गीतों को सुन कर हमारी तरफ़ से तो थम्प्स अप है। हाँ, गानें ज़रा धीमी लय के और गहरे शब्दों वाले हैं। आख़िर नागेश कुकुनूर की फ़िल्म है, उसमें कुछ गहरी बातें तो होंगी। अभी हाल ही में इस फ़िल्म की टीम (जॉन, सोनल सहगल और नागेश कुकुनूर) इण्डियन आइडल में गेस्ट बन कर आए थे अपनी इस फ़िल्म को प्रोमोट करने के लिए। उसमें इन लोगों ने कहा कि यह फ़िल्म लीक से हट कर है और कम बजट की फ़िल्म है। लेकिन यह लोगों के दिलों को ज़रूर छूएगी। फ़िल्म के गीतों ने तो हमारे दिल को छुआ है, देखना है कि फ़िल्म किस तरह का कमाल दिखाती है। हमारी तरफ़ से इस फिल्म को लाखों दुआएँ!

ढर्रे के अनुसार हमें यह भी तो बताना होगा कि अगली बार हम किस फिल्म की समीक्षा लेकर हाज़िर होने वाले हैं। तो दोस्तों, अभी हमारे सामने दो फिल्में हैं - "वी और फ़ैमिली" और "दबंग"। अब कौन सी फिल्म किस्मत वाली साबित होगी, यह तो वक़्त हीं बताएगा। हाँ, अगर आप इन दोनों में से किसी एक को खासा-पसंद करते हैं तो टिप्पणी में इसका ज़िक्र जरूर कर दें। हम आपकी राय का पूरा ख्याल रखेंगे। वैसे अंतिम निर्णय तो हमारा है काहे कि हम तो ठहरे दबंग :)

आवाज़ रेटिंग्स: आशाएँ: ***१/२

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ८८- ये गुलशन कुमार की सुपुत्री हैं और इस कारण भी संगीत की दुनिया में इनका नाम है। पिछले दिनों आई फिल्म "वन्स अपॉन ए टाईम इन मुंबई" में भी इन्होंने एक गाना गाया था। २००९ में रीलिज हुई इनके डेब्यु एलबम का नाम बताईये।

TST ट्रिविया # ८९- नागेश कुकुनूर की उस फ़िल्म का नाम बताएँ जिसमें दोस्ती को समर्पित एक गाना था। वह गाना किसने गाया था?

TST ट्रिविया # ९०- "फ़ना" के गीत "चाँद सिफ़ारिश" की प्रोग्रामिंग किस संगीतकार (संगीतकार बंधुओं) ने की थी? इसी (इन्हीं) की सलाह पर इस गाने में "शुभान-अल्लाह" डाला गया था।


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. "चरके बोदन चिरबी चकर" का इस्तेमाल हुआ है जो किशोर कुमार ने फ़िल्म 'पड़ोसन' के मशहूर गीत "एक चतुर नार" में किया था।
२. शैल हाडा।
३. "एक तीखी तीखी सी उफ़ करारी से लड़की" (लागा चुनरी में दाग)।

Monday, November 16, 2009

"ऑल इज वेल" है शांतनु-स्वानंद की जोड़ी के रचे "३ इडियट्स" के संगीत में

ताजा सुर ताल TST (35)

दोस्तो, ताजा सुर ताल यानी TST पर आपके लिए है एक ख़ास मौका और एक नयी चुनौती भी. TST के हर एपिसोड में आपके लिए होंगें तीन नए गीत. और हर गीत के बाद हम आपको देंगें एक ट्रिविया यानी हर एपिसोड में होंगें ३ ट्रिविया, हर ट्रिविया के सही जवाब देने वाले हर पहले श्रोता की मिलेंगें २ अंक. ये प्रतियोगिता दिसम्बर माह के दूसरे सप्ताह तक चलेगी, यानी 5 अक्टूबर से १४ दिसम्बर तक, यानी TST के ४० वें एपिसोड तक. जिसके समापन पर जिस श्रोता के होंगें सबसे अधिक अंक, वो चुनेगा आवाज़ की वार्षिक गीतमाला के 60 गीतों में से पहली 10 पायदानों पर बजने वाले गीत. इसके अलावा आवाज़ पर उस विजेता का एक ख़ास इंटरव्यू भी होगा जिसमें उनके संगीत और उनकी पसंद आदि पर विस्तार से चर्चा होगी. तो दोस्तों कमर कस लीजिये खेलने के लिए ये नया खेल- "कौन बनेगा TST ट्रिविया का सिकंदर"

TST ट्रिविया प्रतियोगिता में अब तक-

पिछले एपिसोड में, अब तो लगता है सीमा जी अकेली रनर रह गयी हैं, अब उन्हें चुनौती देना तो असंभव सा ही लग रहा है...


सजीव - सुजॉय, 'ताज़ा सुर ताल' में इस हफ़्ते हम चर्चा करेंगे विधु विनोद चोपड़ा की आनेवाली फ़िल्म '3 Idiots' का, और इस फ़िल्म के कुछ गीत भी सुनेंगे।

सुजॉय - मैने सुना है कि यह फ़िल्म चेतन भगत के उपन्यास Five Point Someone पर आधारित है, क्या यह सच है?

सजीव - मैने भी पहले पहले यही सुना था, लेकिन औपचारिक तौर पर शायद ऐसा नहीं है। हाल में जब इस फ़िल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी से यह सवाल किया गया था तो उन्होने साफ़ इंकार कर दिया था कि '3 Idiots' का Five Point Someone से कोई संबंध नहीं है। और जब यह सवाल चेतन भगत से किया गया तो उन्होने भी कहा कि वो इस फ़िल्म में किसी भी तरह से नहीं जुड़े, हालाँकि निर्माता ने उन्हे यह बताया है कि भले ही इस फ़िल्म की कहानी उनकी उपन्यास के प्लॊट से मिलती जुलती है लेकिन उनके उपन्यास से इस फ़िल्म का कोई संबध नहीं है।

सुजॉय - अच्छा तभी मैं कहूँ कि फ़िल्म की नामावली में कहानी के लिए राजकुमार हिरानी और अभिजात जोशी को क्यों क्रेडिट किया गया है। यह बात तो सच है कि चेतन भगत का नाम नामावली में कहीं नहीं आता।

सजीव - पता नहीं आमिर ख़ान, माधवन और शरमन जोशी के किरदारों के साथ हम Five Point Someone के आलोक गुप्ता, रियान ओबेरॊय और लेखक के किरदारों में कोई मेल ढ़ूंढ पाएँगे या नहीं, लेकिन मेरे ख़्याल से जिन लोगों ने भी Five Point Someone पढ़ी है, वो बार बार उन्ही चरित्रों को ढ़ूँढने की कोशिश करेंगे।

सुजॉय - इससे पहले भी चेतन भगत की एक और बेहद कामयाब उपन्यास One Night @ the Call Center को आधार बनाकर 'Hello' फ़िल्म बनाई गई थी, लेकिन फ़िल्म उतनी बुरी तरह से पिट गई जितनी उस उपन्यास को कामयाबी मिली थी। अब देखना है कि '3 Idiots' कुछ कमाल दिखाती है या उसकी भी 'Hello' जैसी हालत होती है।

सजीव - नहीं सुजॉय, मुझे लगता है कि यह फ़िल्म चलेगी, एक तो विधु विनोद चोपड़ा और राजकुमार हिरानी की जोड़ी, उपर से आमिर ख़ान भी जुड़े हैं इस फ़िल्म में। बोमन इरानी भी हैं, नायिका हैं करीना कपूर, गीत और संगीत स्वानंद किरकिरे और शांतनु मोइत्रा का, यानी कि लगभग पूरी की पूरी मुन्ना भाई वाली टीम, कुछ तो कमाल ज़रूर करेगी यह फ़िल्म!

सुजॉय - मैं भी चाहता हूँ कि यह एक अच्छी फ़िल्म के रूप में सामने आए, वैसे भी कोई अच्छी फ़िल्म देखे हुए एक अरसा सा हो गया है। और बताइए कि और क्या जानकारी है इस फ़िल्म के बारे में आपके पास?

सजीव - दो एक बातें और है, लेकिन उससे पहले इस फ़िल्म का एक गीत सुन लेते हैं, फिर आगे बातें करेंगे।

गीत: All is well



सुजॉय - सोनू निगम और शान की आवाज़ें बहुत दिनों के बाद किसी गीत में सुन कर अच्छा लगा, क्यों सजीव?

सजीव - हाँ, और साथ में स्वानंद किरकिरे की आवाज़ भी थी। क्योंकि फ़िल्म के तीनों किरदार कॊलेज स्टुडेंट्स हैं तो ज़ाहिर है कि गानों में भी आज की पीढ़ी को लुभाने वाली यूथ अपील होगी। एक और ख़ास बात देखिये इस गीत में....शांतनु ने सभी वाध्य "ट्रेश" सामानों से उठाये हैं, सुनकर आर डी बर्मन की याद आ गयी.

सुजॉय - स्वानंद और शांतनु बहुत चुनिंदा काम करते हैं और दूसरों से बहुत अलग हट कर काम करते हैं। और स्वानंद तो ख़ुद भी एक उम्दा गायक भी हैं। "बावरा मन देखने चला एक सपना" गीत को भला कौन भूल सकता है! अच्छा सजीव, आप '3 Idiots' से संबंधित कुछ और जानकारी देने वाले थे न?

सजीव - हाँ, यह फ़िल्म रिलीज़ होगी क्रीस्मस के दिन, यानी कि २५ दिसंबर को। और इस फ़िल्म में काजोल नज़र आएँगी एक स्पेशल अपीयरेंस में। अच्छा, अब एक और गीत सुनते हैं सोनू निगम और श्रेया घोषाल की आवाज़ों में। बोल हैं "ज़ूबी डूबी"। पहले गीत को सुनो और फिर बताओ कि इस गीत में तुम्हे कौन सी बात अच्छी लगी।

गीत: Zoobi Doobi



सुजॉय - शांतनु मोइत्र के संगीत की ख़ासीयत है कि पाश्चात्य संगीत और रीदम को भी बहुत ही सुरीले तरीके से वो पेश करते हैं। तुम्हे याद है कि नहीं मुझे नहीं मालूम लेकिन एक फ़िल्म आई थी 'खोया खोया चाँद'। उस फ़िल्म में शांतनु ने ५० और ६० के दशकों को जीवित कर दिया था। ख़ास कर सोनू निगम की आवाज़ में "ये निगाहें निगाहें झुकी झुकी" गीत की मुझे याद आ गई इस गीत को सुनते हुए। यह कोई साधारण युगल गीत नहीं है, बल्कि एक बहुत ही नए किस्म का रोमांस है इस गीत में। स्वानंद की पंच लाइन "जैसा फिल्मों में होता है..." कमाल है.

सजीव - हाँ, और कुछ कुछ 'लगे रहो मुन्ना भाई' के "पल पल पल हर पल" गीत से भी थोड़ा बहुत मिलता जुलता है। रीदम light western music पर आधारित है। सोनू और श्रेया ने जब भी युगल गीत गाए हैं वो हर बार मक़बूल हुए हैं, चाहे 'परिणिता' में "पिहू बोले" हो या "पल पल हर पल" हो, 'ख़ाकी' में "तेरी बाहों में हम जीते मरते रहे" हो या फिर 'फिर मिलेंगे' का "बेताब दिल है धड़कनों की क़सम", और 'क्रिश' फ़िल्म में तो कई गानें हैं इस जोड़ी के जिन्हे ख़ूब ख़ूब बजाया और सुना गया है।

सुजॉय - बिल्कुल सही बात कही आपने! चलिए जब सोनू निगम की बात चल ही रही है तो उनकी एकल आवाज़ में इस फ़िल्म का एक और गीत सुन लिया जाए, "जाने नहीं देंगे"।

गीत: जाने नहीं देंगे



सजीव - क्या गाया है सोनू ने इस गीत को। हाल के दिनों में जितने भी नए नए गायक उभरे हैं और उभर रहे हैं, उन सब से अभी भी बहुत आगे हैं पिछली पीढ़ी के गायक, और उन सब में सोनू निगम सब से आगे हैं। उनकी आवाज़ की जो रेंज है ना, कमाल है। इस गीत को सुन कर इसका भली भाँति अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

सुजॉय - सही में, चाहे बहुत लो स्केल में ठहराव वाली जगह हो या फिर बहुत ऊँचा सुर लगाने की बात, सोनू को दोनों में महारथ हासिल है। और ख़ास कर इस गीत में तो उन्होने सही में अपना लोहा मनवाया है। और सजीव, इस फ़िल्म में मैने सुना है कि कुछ नई आवाज़ें भी सुनाई देंगी, क्या ख़याल है इस बारे में आपका?

सजीव - ठीक ही सुना है तुमने। अब हम ऐसे दो गीत सुनेंगे। पहला गीत जिसे गाया है सूरज जगन और शरमन जोशी ने, और दूसरा गीत है शान और शांतनु मोइत्र का गाया हुआ। ये दोनों गीत फ़िल्म की कहानी के अनुसार सिचुएशनल होंगे, जिनका मज़ा फ़िल्म को देखते हुए ही उठाया जा सकेगा।

सुजॉय - लेकिन कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि शांतनु मोइत्र और स्वानंद किरकिरे की तरफ़ से कुछ अलग और रिफ़्रेशिंग् गीत संगीत सुनने को मिलेगा, नहीं तो हम बस एक ही तरह के गानें सुन सुन कर ऊब गए हैं।

सजीव - ज़रूर! तो चलो, अब एक के बाद एक दो गीत सुनते हैं और इस चर्चा को यहीं समाप्त करते हैं।

गीत: Give me some sunshine



गीत: बहती हवा सा



और अब बारी है ट्रिविया की

TST ट्रिविया # 28- '3 Idiots' की शूटिंग्‍ कौन से IIM (Indian Institute of Management) में हुआ है और Five Point Someone उपन्यास किस शैक्षिक संस्थान से संबम्धित है?

TST ट्रिविया # 29- 'मैं हूँ ना', 'कौन है जो सपनों में आया', 'चेहरा' और 'मुस्कान' फ़िल्मों के साथ आप '3 Idiots' को किस तरीके से जोड़ सकते हैं?

TST ट्रिविया # 30- स्वानंद किरकिरे को आकाशवाणी के किस केन्द्र में 'युवावाणी' कार्यक्रम में भाग लेने का मौका मिला था?


३ इडियट्स अल्बम को आवाज़ रेटिंग ***1/2
फिल्म के अधिकतर गीत सिचुएशनल हैं. फिल्म के प्रदर्शन के बाद यदि फिल्म दर्शकों को पसंद आती है तो ये सभी गीत भी खूब सराहे जायेंगे, "आल इस वेल" और "जूबी डूबी" जल्दी ही लोगों को जुबान पर होंगें. "गीव मी सम सनसाईन" और "बहती हवा" बार बार सुने जाने पर और इनके प्रोमोस रीलिस होने पर अधिक पसंद किये जायेंगें, "जाने नहीं दूंगा तुझे..." लम्बे समय तक सोनू निगम की गायिकी के लिए याद किया जायेगा, और संगीत प्रतियोगिताओं ने नए गायक इसे गाकर खूब तालियाँ बटोरेंगें.

आवाज़ की टीम ने इस अल्बम को दी है अपनी रेटिंग. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसे लगे? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत अल्बम को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

शुभकामनाएँ....



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

Monday, August 17, 2009

शहर अमरुद का है ये, शहर है इलाहाबाद.....पियूष मिश्रा ने एक बार फिर साबित किया अपना हुनर

ताजा सुर ताल (15)

ताजा सुर ताल का नया अंक लेकर उपस्थित हूँ मैं सुजॉय और मेरे साथ है सजीव.

सजीव - नमस्कार दोस्तों..सुजॉय लगता है आज कुछ ख़ास लेकर आये हैं आप हमारे श्रोताओं के लिए.

सुजॉय - हाँ ख़ास इस लिहाज से कि आज हम मुख्य गीत के साथ-साथ श्रोताओं को दो अन्य गीत भी सुनवायेंगें उसी फिल्म से जिसका का मूल गीत है.

सजीव - कई बार ऐसा होता है कि किसी अच्छे विषय पर खराब फिल्म बन जाती है और उस फिल्म का सन्देश अधिकतम लोगों नहीं पहुँच पाता....इसी तरह की फिल्मों की सूची में एक नाम और जुडा है हाल ही में...फिल्म "चल चलें" का.

सुजॉय - दरअसल आज के समय में बच्चे भी अभिभावकों के लिए स्टेटस का प्रतीक बन कर रह गए हैं. वो अपने सपने अपनी इच्छाएँ उन पर लादने की कोशिश करते हैं जिसके चलते बच्चों में कुंठा पैदा होती है और कुछ बच्चे तो जिन्दगी से मुँह मोड़ने तक की भी सोच लेते हैं. यही है विषय इस फिल्म का भी...

सजीव - फिल्म बेशक बहुत प्रभावी न बन पायी हो, पर एक बात अच्छी है कि निर्माता निर्देशक ने फिल्म के संगीत-पक्ष को पियूष मिश्र जैसे गीतकार और इल्लाया राजा जैसे संगीतकार को सौंपा. फिल्म को लोग भूल भी जाएँ पर फिल्म का थीम संगीत के सहारे अधिक दिनों तक जिन्दा रहेगा इसमें कोई शक नहीं....हालाँकि पियूष भाई ने कोई कसर नहीं छोडी है पर इल्लाया राजा ने अपने संगीत से निराश ही किया है....

सुजॉय- हाँ सजीव, मुझे भी संगीत में उनके इस बार कोई नयापन नहीं मिला....श्रोताओं ये वही संगीतकार हैं जिन्होंने मेरा एक सबसे पसंदीदा गीत बनाया है. आज एक लम्बे अरसे के बाद संगीतकार इलय्या राजा का ख़याल आते ही मुझे 'सदमा' फ़िल्म का वह गीत याद आ रहा है "ऐ ज़िंदगी गले लगा ले"। आज भी इस गीत को सुनता हूँ तो एक नयी उर्जा तन मन में जैसे आ जाती है ज़िंदगी को और अच्छे तरीके से जीने के लिए। जहाँ तक मेरे स्मरण शक्ति का सवाल है, मुझे याद है 'सदमा', 'हे राम', 'लज्जा', 'अंजली', 'अप्पु राजा', 'महादेव', 'चीनी कम', जैसी फ़िल्मों में उनका संगीत था।

सजीव - 2 जून 1953 को तमिल नाडु के पन्नईपूरम (मदुरई के पास) में इलय्याराजा का जन्म हुआ था पिता रामास्वामी और माता चिन्नथयी के घर संसार में। उनका असली नाम था ज्ञानदेसीकन, और उन्हे बचपन में प्यार से घर में रसय्या कह कर सब बुलाते थे। बाद में उन्होने अपने नाम में 'राजा' का प्रयोग शुरु किया जो उनके गुरु धनराज मास्टर ने रखा था। इन्हीं के पास उन्होंने अलग-अलग साज़ों की शिक्षा पायी थी। और आख़िरकार उनका नाम इलय्याराजा तमिल फ़िल्मों के निर्देशक पंजु अरुणाचलम ने रखा। पिता के मौत के बाद उनकी माताजी ने बच्चों को पाल-पोस कर बड़ा किया। 1968 में फ़िल्मों के प्रति उनका लगाव उन्हें मद्रास खींच ले आया सगीत में कुछ कर दिखाने का ख़्वाब लिए हुए। इन्हीं दिनों वो प्रयोगधर्मी संगीत की रचना किया करते थे और 'पवलर ब्रदर्स' के नाम से एक और्केस्ट्रा को भी संगठित किया। इस टोली को लेकर उन्होंने कई जगहों पर शोज़ किए जैसे कि स्टेज पर, चर्च में, इत्यादि। फिर वो संस्पर्श में आये संगीतकार वेंकटेश के, जिनके वो सहायक बने।

सुजॉय - बिना किसी विधिवत शिक्षा के इलय्याराजा ने जो मुकाम हासिल किया है, वो सही मायने में एक जिनीयस हैं। उन्हे ट्रिनिटी कालेज औफ़ लंदन ने क्लासिकल गीटार में स्वर्णपदक से सम्मानित किया था। इलय्याराजा ने अपने भाई की याद में 'पवलर प्रोडक्शन्स' के बैनर तले कुछ फ़िल्मों का भी निर्माण किया था। उनके इस भाई का उस समय निधन हो गया था जब उनका परिवार चरम गरीबी से गुज़र रही थी। इलय्याराजा का तमिल फ़िल्म जगत मे पदार्पण हुआ था सन् 1976 में जब उन्हे मौका मिला था फ़िल्म 'अन्नाकिलि' में संगीत देने का। फ़िल्म कामयाब रही और संगीत भी ख़ासा पसंद किया गया क्योंकि उसमें एक नयापन जो था। मुख्य संगीत और पार्श्वसंगीत मिलाकर उन्होंने कुल 750 फ़िल्मों में काम किया है। उन्हें 1998 का लता मंगेशकर पुरस्कार दिया गया था। 'चल चलें' उनके संगीत से सजी लेटेस्ट फ़िल्म है। पीयूष मिश्रा ने इस फ़िल्म में गानें लिखे हैं। गीतों में आवाज़ें हैं शान, कविता कृष्णामूर्ती, हरिहरण, साधना सरगम, सुनिधि चौहान, आदित्य नारायण और कृष्णा की।

सजीव - अच्छा सुजॉय, ये बताओ दिल्ली और मुंबई के अलावा किसी और शहर पर बना कोई गीत तुम्हें याद आया है.

सुजॉय - हूँ ....एक गीत है फिल्म चौदहवीं का चाँद में "ये लखनऊ की सरजमीं...", "झुमका गिरा रे बरेली के बाज़ार में" गीत है और एक गीत है जिसमें बीकानेर शहर का जिक्र है फिल्म राजा और रंक में "मेरा नाम है चमेली...". याद आया आपको ?

सजीव - हाँ बिलकुल पर यदि बड़े शहरों को छोड़ दिया जाए तो ऐसे गीत लगभग न के बराबर हैं जो छोटे शहरों पर आधारित हो. मतलब जिसमें उस शहर से जुडी तमाम बातों का जिक्र हो ...

सुजॉय - हाँ तभी तो हमें आज इस गीत को चुना है जिसमें खूब तारीफ है "संगम" के शहर इलाहाबाद की."शहर है ख़ूब क्या है ये, शहर अमरूद का है ये, शहर है इलाहाबाद"। गंगा, जमुना, सरस्वती के संगम का ज़िक्र, हरिवंशराय और अमिताभ बच्चन के ज़िक्र, और तमाम ख़ूबियों की बात कही गयी है इलाहाबाद के बारे में। गीत पेपी नंबर है, जिसे शान, श्रेया घोषाल और कृष्णा ने मस्ती भरे अंदाज़ में गाया है।

सजीव - पियूष मिश्रा ने बहुत सुंदर लिखे हैं बोल. संगीत साधारण है....जिस कारण लोग जल्दी ही इस गीत को भूल जायेंगें. पर इलाहाबाद शहर के चाहने वाले तो इस गीत को सर आँखों पे बिठायेंगे ही. कुल मिलाकार गीत मधुर है. आपकी राय सुजॉय ?

सुजॉय - मुझे ऐसा लगा है कि आज फ़िल्म संगीत जिस दौर से गुज़र रही है, जिस तरह के गीत बन रहे हैं, उसमें इस फ़िल्म के गीत थोड़े से अलग सुनाई देते हैं। मिठास भी है और आज की पीढ़ी को आकर्षित करने का सामान भी है। लेकिन अगर आप मेरी व्यक्तिगत राय लेंगे तो अब भी इलय्याराजा के स्वरबद्ध किए 'सदमा' के गीतों को ही नंबर एक पर रखूँगा।

सजीव - बिलकुल....तभी तो आवाज़ की टीम ने दिए इस गीत को 3 अंक 5 में से, अब हमारे सुधि श्रोता बताएं कि उनकी राय क्या है. गीत के बोल इस प्रकार हैं -

शहर हाय खूब क्या है ये,
शहर अमरूद का है,
शहर है इलाहाबाद...
हाँ यही रहे थे,
हरिबंश हमारे,
क्या खूब निराला, वाह अश्क दुलारे,
कभी तो गंगा को चूम ले,
कभी तो जमुना को चूम ले,
सरस्वती आके झूम ले, अरे वाह
वाह वाह वाह...

ये तो अमिताभ का,
चटपटी चाट का,
साथ में कलम दवात और किताब का,
चुटकुले है यहाँ,
फिर भी गंभीर है,
है मज़ा यही तो यहाँ ये संग साथ का...
वो है एल्फ्रेड पार्क, जो है इतना पाक,
कि लड़ते लड़ते यहीं मरे आज़ाद...
ये तो इलाहाबाद है,
इसकी क्या ही बात है,
ये तमाम शहरों का ताज मेरी जान...

संगम की नाद से देता कोई तान है,
वो देखो सामने आनंद भवन में शाम है,
पंडित नेहरु हो कि यहाँ लाल बहादुर शास्त्री,
हिंदुस्तान के तख्त के जन्मे हैं राजा यहीं,
रस के जनों का ठौर है ये,
महादेवी का मान है ये,
नेतराम का चौराहा,
आज भी इसकी शान है ये,
अलबेला ये फुर्तीला मगर रुक-रुक के चलता है,
महंगा है न खर्चीला,
तनिक थोडा अलग सा शहर है ये....




सजीव - सुजॉय जैसा कि हमें वादा किया था कि आज हम इस फिल्म के दो गीत श्रोताओं को और सुन्वायेंगें. उसका कारण ये है कि इस फिल्म का मूल थीम है जिसका हमने ऊपर जिक्र किया है को बहुत अच्छे तरीके से उभारता है. पियूष मिश्रा के उत्कृष्ट बोलों के लिए इन गीतों को सुनना ही चाहिए. तो श्रोताओं सुनिए ये दो गीत भी -

बतला दे कोई तो हमें बतला दे



चल चलें (शीर्षक)



आवाज़ की टीम ने दिए इस गीत को 3 की रेटिंग 5 में से. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसा लगा? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीत को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

क्या आप जानते हैं ?
आप नए संगीत को कितना समझते हैं चलिए इसे ज़रा यूं परखते हैं. कैलाश खेर ने मधुर भंडारकर की किस फिल्म में गायन और अभिनय किया है....और वो गीत कौन सा है ? बताईये और हाँ जवाब के साथ साथ प्रस्तुत गीत को अपनी रेटिंग भी अवश्य दीजियेगा.

पिछले सवाल का जवाब तो अब तक आपको मिल ही चुका होगा...पर अफ़सोस हमारे श्रोता कोई इसे नहीं बूझ पाए, चलिए इस बार के लिए शुभकामनाएँ.


अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

Monday, July 20, 2009

तेरे बिन कहाँ हमसे जिया जायेगा....शान और श्रेया की आवाजों का है ये जादू

ताजा सुर ताल (11)

जाने क्या जादू है प्रेम गीतों में कि हम कभी इनसे ऊबते नहीं. कठोर से कठोर आदमी के मन में कहीं एक छुपा हुआ प्रेम का दरिया रहता है, कभी तन्हाई में जब कभी वो इन गीतों को सुनता है वह दरिया उसके मन का बहने लगता है. यदि मैं आपसे पूछूँ कि आपके सबसे पसंदीदा १० गीत कौन से हैं तो यकीनन उनमें से कम से कम ६ गीत प्रेम गीत होंगें और उनमें भी युगल गीतों के क्या कहने, यदि किसी प्रेम गीत को गायक और गायिका ने पूरी शिद्दत से प्रेम में डूब कर गीत के भावों को समझ कर गाया हो तो वो गीत एकदम ही आपके दिल के तार झनका देता है. अभी कुछ दिन पहले इस शृंखला में हमने आपको फिल्म "शोर्टकट" का एक मधुर प्रेम गीत सुनवाया था. आज भी बारी है एक और प्रेम गीत की. बेहद सुरीले हैं शान और श्रेया घोषाल और जब दोनों की सुरीली आवाजें मिल जाए तो गीत यूं भी संवर जाता है.

आज का गीत है फिल्म "जश्न" से. रॉक ऑन की तरह ये फिल्म भी एक रॉक गायक के जीरो से हीरो बनने की दास्तान है. फिल्म संगीत प्रधान है तो जाहिर है संगीतकार के लिए एक अच्छी चुनौती भी है और एक बहतरीन मौका भी खुद को साबित करने का. शारिब और तोशी की जोड़ी ने संतुलित रॉक गीतों से सजाया है इस एल्बम को. फिल्म के अन्य सभी गीत रॉक आधारित है, पर एक यही गीत है एकलौता जिसमें मेलोडी है. जहाँ अधिकतर गीत पुरुष सोलो है, जो नायक के व्यावसायिक संघर्ष की जुबान है वहीं प्रस्तुत गीत एकदम अलग मन की कोमल भावनाओं का युगल बयां है. चूँकि फिल्म के अन्य गीत कहानी और थीम के हिसाब से अधिक महत्वपूर्ण हैं तो उनके बीच इस गीत का प्रचार ज़रा कम कर हो रहा है. "दर्द - ए- तन्हाई" और "आया रे" जैसे गीत इन दिनों खूब धूम मचा रहे हैं. पर आने वाले समय में ये सुरीला प्रेम गीत श्रोताओं को अवश्य भायेगा ऐसा हमारा अनुमान है. नीलेश मिश्रा के बोलों में कुछ ख़ास नयापन नहीं है. संगीत भी सामान्य ही है, हाँ धुन ज़रूर कर्णप्रिय है, पर ये शान और श्रेया जैसे गायकारों का दम ख़म है जो इस गीत को इतना तारो ताजा बना देता है. गीत एक बार में ही आपके जेहन में घर कर लेता है और धीरे धीरे होंठों पर चढ़ भी जाता है. तो आज ताजा सुर ताल के इस अंक में सुनते हैं हम और आप यही गीत -

तेरे बिन कहाँ हमसे जिया जायेगा,
जिद छोड़ दी लो आज कह दिया...

जिंदगी भाग कर हमसे आगे चली,
थाम लो न हमें चाँद तारों तले...
तोड़ डाली तन्हाई है,
अब मोहब्बत रुत आई है....

तेरे बिन....

जाने कितने बरस धूप में मैं चला,
तुम मिले जिस घडी जैसे बादल मिला...
बरसो न टूट कर ज़रा,
भीग जाए मन ये बावरा....

तेरे बिन....



आवाज़ की टीम ने दिए इस गीत को 3.5 की रेटिंग 5 में से. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसा लगा? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीत को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

क्या आप जानते हैं ?
आप नए संगीत को कितना समझते हैं चलिए इसे ज़रा यूं परखते हैं. फिल्म "जश्न" से एक नए स्टार पुत्र का फिल्म जगत में पदार्पण हो रहा है. क्या आप जानते हैं उस नए कलाकार का नाम ? और हाँ जवाब के साथ साथ प्रस्तुत गीत को अपनी रेटिंग भी अवश्य दीजियेगा.

पिछले सवाल का सही जवाब था गीत "हम जो चलने लगे...." फिल्म जब वी मेट का. पर अफ़सोस किसी ने भी सही जवाब नहीं दिया. हाँ इस बार शमिख जी ने रेटिंग जरूर दी. शुक्रिया जनाब. मनु जी क्या रेटिंग है आपकी ? ये सस्पेंस क्यों. मंजू और दिशा जी आपने गीत का आनंद लिया हमें अच्छा लगा. रेटिंग भी देते तो और मज़ा आता.


अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

Sunday, January 11, 2009

संगीत के रियल्टी शो में अब नही नज़र आयेंगें शान

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (8)

संगीत मददगार है केलास्ट्रोल कम करने में भी

अगर कोई बीमार व्यक्ति ३० मिनट प्रतिदिन अपनी पसंद का संगीत सुनने में लगाता है तो ये सिर्फ़ उसे मानसिक रूप से आराम नही देता, बल्कि शारीरिक रूप से भी बेहद फायदेमंद साबित होता है, ऐसा अमेरिका में हुए ताज़ा रिसर्च से प्राप्त परिणाम बताते हैं. संगीत आपके रुधिर धमनियों को साफ़ करने में भी मददगार साबित होता है. इन नतीजों के मुताबिक आपके मन का संगीत रुधिर धमनियों में नैट्रिक ऑक्साइड का संचार करता है जो रक्त ग्रथियाँ बनने से रोकने और हानिकारक केलास्ट्रोल को बनने से रोकने में सहायक साबित होते हैं. महँगी और नुकसानदायक दवाईयों से परेशान लोगों के लिए ये निश्चित ही अच्छी ख़बर है..वैसे अच्छा संगीत आपको आवाज़ पर भी सुनने को मिलता है.....तो चिंताओं को तज कर हमारे साथ संगीत का आनंद लें और स्वस्थ रहें.


खुश है अदनान

"मैं अपने सगीत में इस कदर व्यस्त रहा, कभी एक पियानिस्ट के तौर पर तो कभी बतौर गायक और संगीतकार, कभी अपनी एल्बम पर काम करने तो कभी उनकी मार्केटिंग आदि कामों ने मुझे कभी एक्टिंग के बारे में सोचने का मौका ही नही दिया. पर अब मैं अपने इस नए काम से बहुत संतुष्ट हूँ..." कहते हैं अदनान सामी, जिन्होंने अपने रोल के लिए अपना वज़न कई किलो घटा दिया. वैसे अदनान के लिए ये भी खुशी की बात है कि लंबे अन्तराल के बाद वो अभी हाल ही में अपने बेटे से मिले, दरअसल पत्नी जेबा बख्तियार (हिना फेम) से तलाक़ के बाद लगभग १० साल तक लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद उन्हें अपने बेटे से मिलने की इजाज़त मिली है. अदनान इस मिलन का एक एक पल भरपूर जीना चाहते हैं...वैसे हमें भी आपकी फ़िल्म का इंतज़ार है अदनान...


कैलाश बंधेगें प्रणय सूत्र में...

अदनान की ही तरह हिंदुस्तान में सूफी गीतों के बेताज बादशाह कैलाश खेर भी आजकल बहुत खुश हैं. उनकी खुशी के दो कारण हैं, एक तो वो ग्लोबलफेस्ट २००९ के हिस्सा चुने गए हैं, दूसरा उनको अपना जीवन साथी आखिरकार मिल ही गया है, जी हाँ कैलाश फरवरी के अन्तिम सप्ताह में विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं, इस बाबत पूछे जाने पर कैलाश ने कहा कि वो इसे एक प्राइवेट अफेयर ही रखना चाहते हैं और इस सिलसिले में बहुत ज्यादा खुलासा नही करना चाहते. कोई बात नही कैलाश मुबारकबाद तो स्वीकार कर ही सकते हैं....


अलविदा रियलटी शोस को

७ सालों से संगीत रियलिटी शो का हिस्सा रहे शान अब छोटे परदे पर होस्टिंग करते नही नज़र आयेंगे. शान अपने गायन कैरियर को नई ऊँचाईयाँ देने के उद्देश्य से इन कार्यक्रमों को अलविदा कहने का मन बना लिया है. उनका कहना है कि इन कार्यक्रमों में बहुत ज़ोर ज़ोर से चिल्ला कर बोलना पड़ता है जिससे आपका गला चोक हो जाता है और आपके गायन पर इसका असर साफ़ देखा जा सकता है. मेरा रियाज़ बिल्कुल छूट सा गया है....जो कि ग़लत है. मेरे लिए गायन अधिक महत्वपूर्ण है. मैंने पहले भी इसे छोड़ने का सोचा था, पर कुछ मजबूरियां ऐसी आ गई कि नही कर पाया...पर अब ये फैसला पक्का है....भाई हम तो यही कहेंगें कि शान आपका ये फैसला हमें तो बिल्कुल सही प्रतीत होता है...शायद हमारे श्रोता भी सहमत होंगें...


Wednesday, August 20, 2008

गा के जियो तो गीत है जिंदगी...

"जीत के गीत" गाने वाले बिस्वजीत हैं, आवाज़ पर इस हफ्ते के उभरते सितारे.

यह संयोग ही है कि उनका लघु नाम (nick name) भी जीत है, और जो पहला गीत उन्होंने गाया हिंद युग्म ले लिए, उसका भी शीर्षक "जीत" ही है. जैसा कि हम अपने हर फीचर्ड आर्टिस्ट से आग्रह करते हैं कि वो अपने बारे में हिन्दी में लिखें, हमने जीत से भी यही आग्रह किया, और आश्चर्य कि जीत ने न सिर्फ़ लिखा बल्कि बहुत खूब लिखा, टंकण की गलतियाँ भी लगभग न के बराबर रहीं, तो पढ़ें कि क्या कहते हैं बिस्वजीत अपने बारे में -


मैं उड़ीसा राज्य के एक छोटे शहर कटक से वास्ता रखता हूँ. मेरा जन्म यहीं हुआ और बचपन इसी शहर में बीता. मैं हमेशा से ही पढ़ाई में उच्च रहा और मुझे कभी नहीं पता था कि मुझ में गायन प्रतिभा है. एक बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मैंने बिना सोचे अपने स्कूल के गायन प्रतियोगिता में भाग लिया और अपने सभी अध्यापको से सराहा गया. तभी से मुझ में गायन की जैसे मानो लहर सी चल गई. और जब में अपने कॉलेज के दौरान ड्रामाटिक सेक्रेटरी चुना गया तो मुझे अलग अलग तरह के कार्यक्रमों में गाने का अवसर प्राप्त हुआ और तभी मैं कॉलेज का चहेता गायक बन गया. मैं अपने कॉलेज के दौरान किशोर कुमार, कुमार सानू,हरिहरन, एस पी बालासुब्रमन्यम के गानों को गाकर प्यार बटोरा करता था.

मैं व्यवसाय में सॉफ्टवेर इंजिनियर हूँ और मैं इसको भगवान का आशीर्वाद मानता हूँ. मेरे व्यवसाय ने मुझे कभी गायन में मदद तो नहीं की, पर हमेशा ऐसे लोगो से मिलवाया है जो संगीत से ताल्लुक रखते है और इससे हमेशा मेरे व्यक्तित्व में उन्नति हुई है. मैं हमेशा से ही किशोर कुमार जी का प्रशंसक रहा हूँ. नए दौर के गायकों में सोनू निगम, केके और शान को पसंद करता हूँ.

संगीत मेरी चाह है. अच्छे संगीत से मैं हमेशा उत्सुक रहता हूँ. मैं समझता हूँ की संगीत ईश्वरीय है और इसमें संसार को बदलने की परिपूर्णता है .किसी ने बोला है 'गाके जियो तो गीत है ये जिंदगी'. अगर संगीत हमारे जीवन का एक हिस्सा हो, जीवन एक गीत की तरह सुंदर बन जाता है. मैं गायक की निर्मलता और शुद्धता में विश्वास रखता हूँ. जैसे ताजगी फूलो को असामान्य बना देती है वैसे ही सादगी गायकी को ईश्वरीय बना देती है. आनेवाले सालो में, मैं हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सीखना चाहूँगा.

मैं और हिंद युग्म

हिंद युग्म के साथ मेरी मुलाक़ात एक अचम्भे की तरह हुई. समाज मे बहुत कम ऐसी वेबसाइट्स है, जो हिन्दुस्तानी संगीत की संस्कृति और हिन्दी भाषा को बढ़ावा देते है,यही हिंद युग्म की सबसे बड़ी विशेषता है. इसके साथ जब मुझे जीत के गीत गाने का मौका मिला, मेरी खुशी दुगनी हो गयी. हिंद युग्म के माध्यम से मुझे अर्थपूर्ण गायन का मौका मिला जो हमेशा से मेरा सपना रहा है. मुझे गर्व है की मेरा गाया हुआ गीत "जीत के गीत" सभी को प्रेरित करने योग्य है.

रिषीजी और सजीवजी के साथ काम करना मेरे सौभाग्य की बात है जिनके संगीत और शब्दों में जादू है.

पाठको के लिए संदेश

भगवान ने दुनिया की रचना की शुरूवात नाद और संगीत के माध्यम से की थी. नदी की बहाव में, बादलों की गरज में और प्रकर्ति के हर सौंदर्य में नाद और संगीत कहीं न कहीं छिपे हुए है. यही कारण है कि हमेशा नाद और संगीत हमें शान्ति की और ले जाते है और मानें तो भगवान के करीब ले जाते है. तो चलिए अपने जीवन को हिंद युग्म के द्वारा नाद और संगीत से परिपूर्ण कर दे.

जितना सुंदर गायन है, उतने ही सुंदर विचार हैं, बिस्वजीत के, तो लीजिये एक बार फ़िर सुनिए उनका गाया ये पहला गीत, और इस बेहद प्रतिभावान गायक को, अपना मार्गदर्शन दे, प्रोत्साहन दें.

Wednesday, July 30, 2008

अलविदा इश्मित...

स्टार प्लस की संगीत प्रतियोगिता वायस आफ इंडिया के विजेता और पंजाबी के प्रसिद्ध गायक इश्मित सिंह की मंगलवार को डूबने से मौत हो गई, जिसके साथ ही हमने एक उभरती हुई आवाज़ को हमेशा के लिए खो दिया है.
उनके साथ बिताये लम्हों को याद कर रहे हैं, आवाज़ के लिए, लुधिआना से रिपोर्टर
जगदीप सिंह

ईश्वर का मीत हो गया इश्मीत
नाम-इश्मीत सिंह

जन्म-3 सितंबर 1989
उम्र-19 साल
एजूकेशन- बीकॉम, सेकेंड इयर, सीए अधूरी छोड़ी थी।
24 नवंबर 2007 को वॉयस ऑफ इंडिया बना, इसी दिन गुरु नानक देव जी का प्रकाशोत्सव था।
शौक-गायकी, कम्पयूटर इंटरनेट, स्पोट्र्स

आज मैं ऊपर, आसमां नीचे... यह गाना गाने वाला इश्मीत इतनी जल्दी आसमां के पार चला जाएगा, यकीन नहीं होता। हम जितना भी इस युवा गायक के बारे में सोचते हैं, उतनी ही मीठी यादें ताजा हो जाती हैं। 19 साल का यह फरिश्तों सा गायक जो खुद पानी की तरह था, जो हर हाल में खुद को ढाल लेता था, आखिर पानी की भेंट चढ़ गया। दूसरों के छोटे से दुख से उसकी आंखें छलक आती थीं। आज वह अपने चाहने वालों की आखों में ढेरों आंसू छोड़ गया।

सफर जिंदगी का

धर्म को समर्पित और एक कर्मठ परिवार में जन्मा इश्मीत बचपन से ही होनहार था। शास्त्री नगर स्थित घर के आसपास वह अपनी गायकी और रिज़र्व अंदाज़ के कारण बेहद मशहूर था.

बस जीतना था जुनून.

हर मैदान में जीतना उसका जुनून था। चाहे गायकी हो या पढ़ाई उसने हर जगह अच्छा प्रदर्शन किया। गुरु नानक पब्लिक स्कूल का स्टूडेंट रहा इश्मीत अपने दोस्तों में दोस्ती के साथ ही पढ़ाई में होशियारी के लिए भी जाना जाता था। यही वजह थी कि मुश्किल माने जाने वाले चार्टेड अकाउंटेंसी के कोर्स के शुरूआती एग्जाम उसने बहुत आराम से पास कर लिए थे। संस्थान के नियम बदलने की वजह से सीए न कर पाने का उसे अफसोस भी था। मुझे याद है कि एक निजी मुलाकात में उसने कहा था कि अब बीकॉम के साथ सीए नहीं कर पाऊंगा।

अधूरी रही महाराजा रणजीत सिंह बनने की चाहत.

इश्मीत की डील-डोल शख्सियत को देखकर बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता राज बब्बर ने उसे पंजाब के सबसे महान शहंशाह महाराजा रणजीत सिंह की किशोर अवस्था का रोल ऑफर किया था। साल के अंत में शुरू होने वाले सीरियल की शूटिंग उसने विदेश दौरे से लौट कर शुरू करनी थी। इश्मीत को बॉलीवुड के दिग्गज संगीतकार उत्तम सिंह ने भी गाने का प्रस्ताव दिया था।

जगजीत के बेटे की याद में मिला पहला सम्मान

चोटी के गजल गायक जगजीत सिंह के मरहूम बेटे विवेक सिंह की याद में स्थापित किया गया पहला अवार्ड इश्मीत को दिया गया था। लुधियाना में हुए कार्यक्रम के दौरान अवार्ड प्राप्त करते हुए जहां इश्मीत फफक-फफक कर रो पड़ा था, वहीं खुद जगजीत और चित्रा सिंह की छलकती आखें रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। इश्मीत सिंह की जिंदगी का ये यादगार पल था।

कंपनियों का भी बना चहेता

वॉयस ऑफ इंडिया बनने से पहले ही इश्मीत काफी लोकप्रिय हो गया था। कंपनियां भी उसे अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाने के लिए रुचि दिखा रही थीं। फाइनल से पहली ही सोनाटा कंपनी ने अपनी युवा घडिय़ों की रेंज उसी से लांच करवाई थी। कीर्ति लाल ज्यूलर ने उसे हीरों से नवाजा था, तो पंजाब स्टेट लॉजरीज ने भी उसे अपनी लॉटरीज का ब्रांड एम्बेसडर बनाया था।

दुनिया घूमने को था उत्साहित

वॉयस ऑफ इंडिया बनने के बाद जब उसे 50 देशों में शो करने का कार्यक्रम दिया गया तो वह काफी उत्साहित था। उसका कहना था कि दुनिया भर में अपना टैलेंट इस तरह दिखाना खास तजुर्बा रहेगा।

मुंबई में नहीं लगा था दिल.

तरक्की और शोहरत की खातिर मुंबई गए इश्मीत का दिल अपने शहर और दोस्तों में बसा था। एक निजी मुलाकात में उसने कहा था कि मुंबई में तो अपने लिए वक्त ही नहीं मिलता चौबीस घंटे बस काम ही काम।

पब्लिसिटी से दूर

लुधियाना आने पर अक्सर इश्मीत घर में आराम करने और अपने दोस्तों के साथ समय बिताने को तरजीह देता था। कई बार परिवार के लोग चाहते भी थे कि वह मीडिया से इंटरेक्ट करे तो इश्मीत टालने की कोशिश करता था।

विकलांगों के साथ बिताया दिन

संवेदनशील इश्मीत को आम लोगों का दर्द काफी भावुक कर देता था। विकलांग दिवस पर इश्मीत रखबाग में पिकनिक मना रहे मंदबुद्धि और विकलांग बच्चों के पास पहुंच गया। वहां पर उनके साथ वक्त बिताने के साथ ही उन्हें कुछ कर दिखाने को प्रोत्साहित किया।

तिरंगे पर नहीं दिया ऑटोग्राफ

गायकी का दीवाना इश्मीत देश-भक्ति से सराबोर था। जीतने के बाद लुधियाना में एक कार्यक्रम के दौरान एक नन्हे प्रशंसक ने जब छोटे से तिरंगे पर उससे ऑटोग्राफ देने को कहा तो इश्मीत ने बच्चे को समझाया कि राष्ट्रीय झंडे के सम्मान को बरकरार रखने के लिए ऐसा नहीं करते।

कंपनी को झुकाया

गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब में अरदास में किए वादे के मुताबिक इश्मीत अपनी पहली धार्मिक एलबम निकालना चाहता था, लेकिन उसकी कामर्शियल एलबम लाना चाहती थी। आखिर इश्मीत की भावनाओं के आगे झुकते हुए बिग म्यूजिक ने उसकी धार्मिक एलबम को गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब में रिलीज किया।

नहीं मनेगा जन्मदिन का जश्न

तीन सितंबर को इश्मीत के जन्मदिन को लेकर सभी दोस्त उत्साहित थे। वायस आफ इंडिया बनने के बाद सभी ने उसका जन्मदिन ·का जश्न मनाने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन अब सबके चहरों पर उदासी छा गई है।


जगदीप सिंह
रिपोर्टर, लुधिआना

दोस्तों, याद करें इश्मित को, VOICE OF INDIA में उनके गाये उनके इस भावपूर्ण गीत के साथ -


Ishmit (Ishmeet) Singh: An unforgotten young voice of Punjab

Wednesday, July 16, 2008

लता मंगेशकर को अपना रोल मॉडल मानती हैं, गायिका -मानसी पिम्पले, आवाज़ पर इस हफ्ते का उभरता सितारा

आवाज़ पर इस हफ्ते की हमारी "फीचर्ड आर्टिस्ट" हैं - मानसी पिम्पले, हिंद युग्म पर अपने पहले गीत "बढ़े चलो" से चर्चा में आयीं मानसी रमेश पिम्पले, मूल रूप से महाराष्ट्र से हैं, और इन्हे हिंद युग्म से जोड़ने का श्रेय जाता है, युग्म की बेहद सक्रिय कवयित्री सुनीता यादव को. मानसी इन्हीं की शिष्या थीं कभी, और तभी से सुनीता ने इनके हुनर को परख लिया था. मानसी ने अभी-अभी ही अपनी बारहवीं की पढ़ाई पूरी की है, और अब अपने कैरियर से जुड़ी दिशा की तरफ़ अग्रसर है. संगीत को अपना जनून मानने वाली मानसी, लता जी को अपना रोल मॉडल मानती हैं, तथा आज के दौर के, श्रेया घोषाल और शान इनके सबसे पसंदीदा गायिका/गायक हैं. Zee tv के कार्यक्रम Hero Honda सा रे गा मा पा, के लिए भी मानसी का चुनाव हुआ था,जहाँ हिमेश रेशमिया भी बतौर जज़ मौजूद थे, पर नियति ने शायद पहले ही, उनकी कला को दुनिया तक पहुँचने का माध्यम, हिंद युग्म को चुन लिया था. चित्रकला और टेबल टेनिस का भी शौक रखने वाली मानसी, युग्म को एक शानदार प्लेटफोर्म मानती हैं, नए कलाकारों के लिए. जब हमने उनसे बात की तो वो अपने पहले गीत को मिली आपार सराहना से बेहद खुश नज़र आयीं. "I saw a means of pursuing my passion through Hind Yugm, which is a very good platform for new talent and art" - ये कथन थे मानसी के.

नीचे पेश है, हिंद युग्म की मानसी से हुई बातचीत के कुछ अंश, आप भी मानसी की आवाज़ में ये दमदार गीत "बढ़े चलो" अवश्य सुनें और इस उभरती हुई प्रतिभावान गायिका को अपना स्नेह दे.

हिंद युग्म - मानसी स्वागत है एक बार फ़िर, ये बताइए कि संगीत आपके जीवन में क्या महत्त्व रखता है ?

मानसी - संगीत मेरा जनून है, और ये मेरे जीवन में विशेष स्थान रखता है, मेरा मानना है शब्द जब संगीत में ढल कर आते हैं तो हर व्यक्ति तक अपनी पहुँच बना पाते हैं, संगीत वो कड़ी है जो आपको इश्वर से जोड़ती है.

हिद युग्म - आप zee tv के सा रे गा मा पा शो के लिए भी चुनी गई थीं, उसके बारे में बताइए.

मानसी - मैं २००४ में चुनी गई थी पहले राउंड के लिए मगर १८ वर्ष से कम उम्र होने के कारण प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं बन पायी, उसके बाद कभी कोशिश नही की, फ़िर पढ़ाई की तरफ फोकस बदल गया.

हिंद युग्म - क्या आपके अभिभावक आपके इस जनून को बढ़ावा देते हैं ?

मानसी - जी बिल्कुल, ये उनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन ही है जो मैं आज यहाँ हूँ, वो मेरे सबसे अच्छे समीक्षक है, जब भी मुझे कुछ गाना होता है, सब से पहले उन्हें ही सुनाती हूँ, ध्यान से सुनकर वो मेरी कमियों को दुरुस्त करते हैं, अगर मैंने कुछ अच्छा गाया है तो ये उन्ही की बदौलत है .

हिंद युग्म - अब आप B Pharma की पढ़ाई करने जा रही हैं, पढ़ाई के साथ-साथ अपने शौक को कैसे प्लान किया है आपने ?

मानसी - अभी तो सारा ध्यान दाखिले और पढ़ाई की तरफ़ ही है, पर संगीत तो हमेशा ही दिनचर्या का हिस्सा रहेगा, मेरी कोशिश रहेगी की इस दौरान अपने रियाज़ के लिए और अधिक समय निकालूं और ख़ुद को इतना काबिल कर लूँ कि किसी भी नए गीत और उन्दा तरीके से निभा पाऊं.

हिंद युग्म - आप हिंद युग्म के लिए एक खोज हैं, हमारे संगीतकार ऋषि एस के साथ काम करना कैसा रहा ?

मानसी - मैं सुनीता मेम की शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने मुझे हिंद युग्म और ऋषि एस से मिलवाया, ऋषि जी के संगीत के एक आत्मा है, वो हर गीत पर बहुत मेहनत करते हैं, और गायक को अपनी बात बड़े अच्छे तरीके से समझाते हैं, वो आपको हमेशा सहज महसूस कराते हैं, उनके साथ काम करना बेहद बढ़िया अनुभव रहा.

हिंद युग्म - "बढे चलो" में आपकी गायकी की बहुत तारीफ हुई है, आप कैसा महसूस कर रही हैं ?

मानसी - मैं बहुत खुश हूँ, साथ ही धन्येवाद देना चाहूंगी ऋषि जी और सजीव जी को, जिन्होंने मुझे इस गीत को गाने का मौका दिया, और अलोक शंकर जी का जिन्होंने बहुत सुंदर लिखा इस गीत को, और अपने तमाम समीक्षकों /श्रोताओं का जिन्होंने अपनी टिप्पणियों से मुझे प्रोत्साहित किया, मेरा सोलो गीत "मैं नदी" भी सब को पसंद आएगा, ऐसी मुझे आशा है.

हिंद युग्म - बहुत बहुत शुक्रिया मानसी, आपके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनायें, संगीत का जनून बरकरार रहे और आप इसी तरह मधुर गीत गाती रहें, यही हमारी कामना है ...

मानसी - जी शुक्रिया, मैं हर गाने में अपना बेस्ट देने की कोशिश करूंगी, और उम्मीद करती हूँ कि हिंद युग्म परिवार भी मुझे यूँ ही प्रोत्साहित करता रहेगा .


मूल इंटरव्यू ( original interview )

Hind Yugm - Hi Manasi, Welcome once again, first of all tell us, what place music has in your life, how you connect with music?

Manasi - Music is my passion. It is very close to my heart and it holds a very high place in my life. Music has the power to convey every human feeling which words alone cannot do. And I feel that music is a form of worship, too.

Hind Yugm - You also got selected for ZEE TV, sa re ga ma pa, what was that story?

Manasi- I gave the auditions for Sa Re Ga Ma in 2004 and I just got short-listed in the preliminary round when they informed me that I was under-age (below 18) and so could not participate in the competition. So there was no further development in that and I haven’t tried to participate again after that as studies became my priority.

Hind Yugm - Do your parents support your interest?

A patriotic SongManasi - Oh yes, of course. Without their support and guidance I couldn’t have been whatever I am today. They are my biggest and best critics. If I have to perform or sing, they personally hear the song and point out all the mistakes and make me correct them before I give my performance. Their guidance and support is of extreme importance in my life.

Hind Yugm - Now you are going to study B Pharma, what plan you have, to manage your interest of singing in the coming days ?

Manasi - Right now I am concentrating mainly on my admission and studies. But that doesn’t mean I’ll put a full stop to my passion. I would try to train my voice in this period of my studies so that I can sing even better and be prepared to face any sort of challenge, i.e., to be able to sing any song flawlessly and with the same ease. I would try to continue my ‘riyaaz’ so that I stay in touch with music.

Hind Yugm - You are a found to hind yugm ( thanks to sunita yadav ) how was the experience of working with Rishi S. the composer ?

Manasi - Definitely, I myself wish to thank Sunita ma’am for introducing me to Hind Yugm and Rishi S Balaji. It was really a pleasant experience working on these two songs with Rishi Sir. He is an excellent upcoming composer and his music is definitely the soul of his songs. He makes it a point that the singer understands whatever he wants them to sing and is ready to explain it until it is understood. I consider myself very fortunate to have worked with such a talented person.

Hind Yugm - We are looking forward to hear your first solo song “main nadi",”badhe chalo“ is also well received by the audience, how is the feeling?

Manasi - I am feeling elated and at the same time I wish to thank Rishi sir and Sajeev sir for giving me an opportunity to sing these two songs. and Alok Shankar ji for providing such excellent lyrics, I also wish to thank all our critics who have given their precious comments which will help us to eliminate our flaws and present something much better. I only wish to request all of them to always give their support and encouragement. I am myself looking forward to the release of ‘Main Nadi’ and I hope it gets a good response.

Hind Yugm - Thank you very much manasi, and all the best for your future plans.....keep this passion for music, and keep singing such beautiful songs always ...

Manasi - Thanks for everything. I’ll try my best to give my best to each song I sing and I hope my association with Hind Yugm continues…

बिल्कुल मानसी, हम भी यही उम्मीद करेंगे, कि आप युहीं अपनी आवाज़ का जादू अपने हर गीत में बिखेरती रहें, हिंद युग्म कि समस्त टीम की तरफ़ से आपके उज्जवल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनायें.

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