Showing posts with label nadeem shrawan. Show all posts
Showing posts with label nadeem shrawan. Show all posts

Thursday, November 13, 2008

क्या फिर लौटेगा "आशिकी" का दौर


वो १९७२ में मिले थे एक दूजे से। १९८१ में आई फ़िल्म "मैंने जीना सीख लिया" से इस संगीतकार जोड़ी ने कदम रखा फ़िल्म जगत में। "हिसाब खून का", "लश्कर", और "इलाका" जैसी फिल्मों में इनका काम किसी की भी नज़र में नहीं आया, फिर इन्हें मिला संगीत की दुनिया में नई मिसाल बनाने की योजनायें लेकर दिल्ली से मुंबई पहुंचे गुलशन कुमार का साथ। १९९० में आई महेश भट्ट निर्देशित फ़िल्म "आशिकी" ने संगीत की दुनिया को हिला कर रख दिया, और उभर कर आए - नदीम-श्रवण। एक ऐसा दौर जब फ़िल्म संगीत अश्लील शब्दों और भौंडे संगीत की गर्त में जा रहा था, एक साथ कई नए कलकारों ने आकर जैसे संगीत का सुनहरा दौर वापस लौटा दिया। शुरूआत हुई आनंद मिलिंद के संगीत से सजी फ़िल्म "क़यामत से क़यामत तक" से और इसी के साथ वापसी हुई रोमांस के सुनहरे दौर की भी। फ़िल्म "आशिकी" भी इसी कड़ी का एक हिस्सा थी, कमाल की बात यह थी कि इस फ़िल्म के सभी गीत एक से बढ़कर एक थे और बेहद मशहूर हुए। इसके बाद नदीम-श्रवण ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक सुपर हिट संगीत से सजी फिल्में -दिल है कि मानता नहीं, साजन, सड़क, फूल और कांटे, दीवाना....और सूची लम्बी होती चली गई। नदीम-श्रवण के साथ साथ गीतकार समीर, गायक कुमार सानू, अलका याग्निक, और साधना सरगम ने भी कमियाबी का स्वाद चखा। लगातार तीन सालों तक वो फ़िल्म फेयर सम्मान के सरताज रहे, १९९६ में "राजा हिन्दुस्तानी" और १९९७ में आई "परदेश" जैसी फिल्मों से उन्होंने अपना एक नया अंदाज़ दुनिया के सामने रखा.

गुलशन कुमार की निर्मम हत्या और नदीम पर लगे आरोपों ने संगीत के इस सुहावने सफर में एक ग्रहण का काम किया। लंबे समय तक इस जोड़ी ने फिल्मों से ख़ुद को दूर रखा, २००५ में लन्दन से फ़ोन कर नदीम ने श्रवण से कहा कि "मैं कुछ समय तक अपने परफ्यूम के काम पर ध्यान देना चाहता हूँ..." इसी के साथ लगा कि यह जोड़ी अब टूट गई। श्रवण की सुनें तो उन्होंने स्वीकार किया कि-"नदीम की इस बात से वो आहत ज़रूर हुए, शुरू में नहीं समझ पाये कि आखिर वो ऐसा क्यों कर रहे हैं, पर अब सोचता हूँ कि यह अन्तराल हम दोनों के लिए ज़रूरी सा था"।

एक समय आया जब यह जोड़ी संगीत-प्रेमियों की नज़र से ओझल हो गई। लेकिन कलाकार काम किये बिने चैन नहीं पाता। श्रवण ने अकेले ही 'सिर्फ़ तुम' में संगीत दिया और बहुत हिट हुए। लेकिन संगीत प्रेमियों को संगीत को वह सुंगंध और ताजगी एकाकी संगीत में नहीं मिली। न्यायिक कारणों ने सिर्फ तुम के एल्बम पर संगीतकार का नाम तक नहीं लिखा गया।

इस जोड़ी ने 'राज़' से दुबारा वापसी की, या यूँ कहिए कि दमदार वापिसी की। वैसे धड़कन फिल्म के संगीत ने ही इस जोड़ी ने लौटने का संकेत दे ही दिया था, लेकिन इनकी संगीत का असली फ्लैवर राज़ में दिखा। इसके बाद कसूर का संगीत हिट हुआ। संगीत प्रेमियों के लिए अब ये खुशी की बात है कि अब ये जोड़ी एक बार फ़िर साथ में काम करेगी, और वो भी फूरे जोर-शोर के साथ। डेविड धवन की "डू नोट डिसटर्ब" और धर्मेश दर्शन की "बावरा" है उनकी आने वाली फिल्में। हो सकता है फ़िर कुछ ऐसे नगमें सुनने को मिलें जो बरसों तक यादों में बसे रहें।
आइए सुनते हैं इसी जोड़ी द्वारा संगीतबद्ध कुछ एवरग्रीन गीत


Sunday, November 9, 2008

रॉक ऑन के सितारे जुटे बाढ़ राहत कार्य में

आवाज़ ने संगीतप्रेमियों से इस फ़िल्म की सिफारिश की थी, और आज यह फ़िल्म साल की श्रेष्ट फिल्मों में एक मानी जा रही है. फ़िल्म के संगीत का नयापन युवाओं को बेहद भाया. फरहान अख्तर ने बतौर अभिनेता और गायक अपनी पहचान बनाई. बिहार में कोसी नदी में आई बाढ़ के पीडितों के लिए मुंबई में अभी हाल ही में इस फ़िल्म के सितारों और संगीत टीम के सदस्यों ने जबरदस्त शो किया और इस नेक काम के लिए धन अर्जित किया. "मेरी लौंड्री का एक बिल..." गीत जब ऋतिक रोशन थिरके तो दर्शक समूह झूम उठा. "रॉक ऑन" का संगीत वास्तव में रोक्किंग है.


रविन्द्र जैन की वापसी

लंबे समय के बाद सुप्रसिद्ध गीतकार संगीतकार रविन्द्र जैन फ़िल्म संगीत में वापसी कर रहे हैं. ७ नवम्बर को राजश्री प्रोडक्शन के साथ उनकी नई फ़िल्म "एक विवाह ऐसा भी" प्रर्दशित हो रही है. रविन्द्र जी ने राजश्री फ़िल्म्स के साथ लगभग १७ फिल्मों में काम किया है. "अबोध" की असफलता के लगभग २० वर्षों के बाद फ़िल्म "विवाह" से रविन्द्र जी ने बड़जात्या परिवार के साथ अपनी वापसी की थी. अब "एक विवाह ऐसा भी" से भी इसी तरह की सफलता की दर्शकों और श्रोताओं को उम्मीदें हैं.


नदीम श्रवण की जोड़ी दिखायेगी फ़िर से कमाल

आशिकी, दिल है कि मानता नहीं, सड़क, सजन, दीवाना, राजा हिन्दुस्तानी और परदेस जैसी फिल्मों से ९० के दशक में संगीत जगत पर राज करने वाली संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण २००५ में हुए "स्प्लिट" के बाद अब फ़िर से एक होकर काम करेगी. धर्मेश दर्शन की "बावरा" और डेविड धवन की "डू नोट डिसटर्ब" होंगीं उनकी आने वाली फिल्में, जहाँ एक बार फ़िर क्रेडिट टाइटल में नदीम और श्रवण का नाम एक साथ देखा जाएगा. संगीत प्रेमियों के लिए यह निश्चित ही एक सुखद ख़बर है...उम्मीद करेंगें कि जतिन ललित की जोड़ी भी अपने मतभेद भूलकर एक साथ आयें जल्द ही...


एक दौर समाप्त

भारतीय फ़िल्म जगत के मशहूर निर्माता-निर्देशक बीआर चोपड़ा का लंबी बीमारी के बाद बुधवार सुबह मुंबई में निधन हो गया। फिल्मी दुनिया को 'नया दौर' देने वाले बलदेव राज चोपड़ा का जन्म 22 अप्रैल 1914 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। ‘दादा साहब फाल्के’ पुरस्कार से सम्मानित चोपड़ा ने धूल का फूल’, ‘वक़्त’, ‘नया दौर’, ‘क़ानून’, ‘हमराज’, ‘इंसाफ़ का तराज़ू’ और ‘निकाह’ जैसी कई सफल फ़िल्में बनाई। 'आवाज़' की विनम्र श्रद्धाँजलि!!


पं॰ भीमसेन जोशी को दिया जायेगा भारत-रत्न

सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी को सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित करने का फ़ैसला किया है. किराना घराने के ८६ वर्षीय भीमसेन ने महज़ १९ वर्ष की उम्र से गाना शुरू किया था। कर्नाटक के गडक ज़िले के एक छोटे से शहर में वर्ष १९२२ में जन्मे और मुख्य रूप से खयाल शैली और भजन के लिए मशहूर पंडित जोशी को वर्ष १९९९ में पद्मबिभूषण, १९८५ में पद्मभूषण और १९७२ में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



Popular Posts सर्वप्रिय रचनाएँ