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Monday, March 30, 2009

ये रहे सरताज गीत, लोकप्रिय गीत और शीर्ष 10 गीत

आज दिन है आवाज़ पर बहुप्रतीक्षित परिणामों का. आवाज़ पर नए संगीत का दूसरा सत्र जुलाई 2008 के प्रथम शुक्रवार से आरंभ हुआ था जो दिसम्बर के अंतिम शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस दौरान कुल 27 नए गाने प्रसारित किये गए। संगीत के इस महाकुम्भ में कुल 47 नए संगीत कर्मियों ने अपने फन का जौहर दुनिया के सामने रखा, जिसमें 15 संगीतकार, 13 गीतकार, 24 गायक/गायिकाएँ, 2 संगीत सहायक शामिल हैं। इससे पहले अपने पहले सत्र के 10 गीतों को लेकर युग्म ने अपना प्रथम संगीत एल्बम "पहला सुर" फरवरी 2008 में जारी किया गया था। पर दूसरा सत्र हर लिहाज से बेहतर रहा; अपने पहले सत्र की तुलना में. पहले से अधिक संगीत कर्मी, पहले से अधिक रचनाएँ और तकनीकी स्तर पर भी लगभग हर गीत की गुणवत्ता इस सत्र के गीतों में बहुत बेहतर रही, इन सभी गीतों को श्रोताओं का भरपूर प्यार मिला, इन गीतों को हमने 5 संगीत विशेषज्ञों ने भी सुना, परखा, और दो चरण में सपन्न हुए इस प्रक्रिया में इन गीतों को अंक दिए गए, जिनके आधार पर निर्धारित किया गया कि एक सरताज गीत चुना जायेगा, और श्रेष्ठ 10 चुने हुए गीतों को हिंद युग्म अपने दूसरे संगीत एल्बम का हिस्सा बनाएगा। श्रोताओं की राय जानने के लिए एक पोल भी आयोजित हुआ, जिसमें कुल श्रोताओं ने अपनी राय रखी। श्रोताओं ने जिस गीत को सबसे अधिक पसंद किया उसे सत्र का सबसे लोकप्रिय गीत माना जायेगा. आज इन्हीं परिणामों की घोषणा करते हुए आवाज़ का संचालन दल बेहद गर्व और ख़ुशी अनुभव कर रहा है।

समीक्षक क्या कहते हैं?

हालांकि हमने अपने सभी समीक्षकों के नाम गुप्त रखे थे पर अंतिम समीक्षक जो कि देश के सबसे अनुभवी संगीत समीक्षकों में जाने जाते हैं, उनके कुछ विचार आप तक पहुँचाना जरूरी है, अजात शत्रु एक ऐसा नाम है जिससे संगीत से जुड़े सभी लोग अच्छी तरह से वाकिफ हैं, अपनी तमाम व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने हिंद युग्म के लिए इस कार्य को करने का बीड़ा उठाया, चूँकि वो इन्टरनेट से दूर हैं उन्होंने खुद इन पक्तियों के लेखक को फ़ोन कर बधाई दी और सत्र के गीतों कि मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा -"इस संकलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है, कविता-शायरी. "आवाज़ के पंखों पर...", "खुशमिजाज़ मिटटी पहले उदास थी...", तथा "ओ मुनिया मेरी गुड़िया संभल के चल..." जैसे गीत तो बेसाख्ता "वाह" कहा ले जाते हैं, मेलोडी के हिसाब से "ओ मुनिया" संकलन का सर्वोत्तम गीत है, यही वो धुन और संगीत्तना है जिस पर मेरी दो साल पूरी करती नातिन, एक अबोध बच्ची, थिरक उठी थी. गायक भी बेबाक है और खुलकर गाता है...". अजात शत्रु जी गायकों से अधिक संतुष्ट नज़र नहीं आये. उन्होंने कहा -" संकलन में एक दो गायकों की आवाज़ में बेस है, पर संवेदनशील गायन किसी का नहीं है, और न ही उनके गायन में कोई चौंकाने वाला तत्व है, 'अचानक' भी गायक से कुछ हो जाता है जो रिहर्सल के वक़्त नहीं था मगर रिकॉर्डिंग में पैदा हो जाता है. 'अचानक' का ये तत्व सभी में गायब है। फिर भी अपनी सीमा में उन्होंने प्रशंसनीय काम किया है"। हालाँकि उन्होंने यहाँ भी 'ओ मुनिया' के गायक की तारीफ की -"ओ मुनिया गीत का गायक ही इस आयोजन का पहला और अंतिम गायक है जिस पर किसी गायन, परंपरा या ज़माने का असर नहीं है वह सिर्फ अपने तौर पर गाता है..."। संगीतकारों को उन्होंने गायकों का चुनाव करने सम्बंधित ये सुझाव दिया -"सबसे पहले धुन पर ध्यान दें, फिर गायक का चुनाव करें, अच्छी शायरी भी मधुर धुन के बिना असर नहीं छोड़ती, अधिक से अधिक वह पढ़ने की चीज़ है. पर गाना प्रथमतः सिर्फ सुने जाने के लिए होता है। धुन की मेलोडी पर बहुत मेहनत करनी चाहिए, कहिये कि धुन ही सब कुछ है, जिस गीत पर बच्चा, पागल और गंवार थिरक उठे, वही अल्लाह का संगीत है"। अजात शत्रु जी ने और भी बहुत सी बातें कही, पर एक बात जो उन्होंने कही वो परिणामों की घोषणा करने से पहले हम भी कहना चाहेंगे- "कोई भी फैसला अंतिम या सम्पूर्ण नहीं होता। जो आज असफल वो कल संभवतः हीरो होंगे, हमारी नज़र में तो इस आयोजन में शामिल सभी कलाकार विजेता हैं। तो एक बार फिर सभी प्रतिभागियों को तहे दिल से ढेरों शुभकामनायें देते हुए सबसे पहले हम घोषणा कर रहे हैं सरताज गीत की।

सरताज़ गीत

सरताज गीत के रूप में टाई हुआ है दो गीतों को 40.5 अंक मिले हैं जो अधिकतम है। इस कारण हम इन दो गीतों को सामूहिक रूप से सरताज गीत घोषित करते हैं। मज़े की बात ये है कि इन दोनों गीतों या कहें गज़लों के गायक/संगीतकार एक ही हैं, जी हाँ आपने सही पहचाना- दूसरे सत्र की नायाब खोज - रफीक शेख. और ग़ज़लें हैं "जो शजर" और "सच बोलता है" जिनके शायर हैं क्रमशः दौर सैफी और अज़ीम नवाज़ राही। इसके अलावा इनकी टीम में एक संगीत संयोजक भी हैं- अविनाश। सभी 4 लोगों को बहुत बहुत बधाई। सरताज गीत को हिंद युग्म की तरफ से 6000 रुपए का नकद पुरस्कार दिया जायेगा. समीक्षकों के अंतिम अंक तालिका के अनुसार टॉप १० गीत जो चुने गए वो इस प्रकार हैं-

टॉप 10 गीत

1. जो शजर 40.5/50
2. सच बोलता है 40.5/50
3. चाँद का आंगन 40/50
4. वन अर्थ- हमारी एक सभ्यता 39.5/50
5. आखिरी बार बस 39/50
6. जीत के गीत 38/50
7. हुस्न 38/50
8. मुझे वक़्त दे 38/50
9. संगीत दिलों का उत्सव है 37.5/50
10. खुशमिजाज़ मिटटी 37.5/50
11. आवारदिल 37.5/50

चूँकि अंतिम 3 गीतों के अंक बराबर हैं इस कारण 10 के स्थान पर 11 गीतों को एल्बम में शामिल किया जायेगा. अन्य गीतों के कुछ इस प्रकार अंक मिले हैं -

12. चले जाना 36.5/50
13. जिस्म कमाने निकल गया है 35.5/50
14. चाँद नहीं विश्वास चाहिए 35/50
15. तेरे चेहरे पे 34/50
16. ओ साहिबा 34/50
17. सूरज चाँद और सितारे 33/50
18. तू रूबरू 33/50
19. मैं नदी 32/50
20. बढ़े चलो 31/50
21. बे इंतेहा 31/50
22. उड़ता परिंदा 31/50
23. ओ मुनिया 30/50
24. डरना झुकना 30/50
25. माहिया 28/50
26. राहतें सारी 27.5/50
27. मेरे सरकार 24/50

लोकप्रिय गीत

हिन्द-युग्म ने 2 मार्च से 28 मार्च 2009 के मध्य एक पोल का भी आयोजन किया, जिसके माध्यम से लोकप्रिय गीत (श्रोताओं की पसंद) जानने की कोशिश की गई। इस पिल पृष्ठ को अब तक 3165 बार देखा गया जो किसी भी हिन्द) वेबसाइट के किसी एक पेज इतनी बार इतने समय अंतराल में कभी नहीं देखा गया। कुल 1067 मत मिले जिसमें से 233 मत फॉल्स हैं। चूँकि 25 मार्च को संध्या 7 से 9 बजे के बीच हमारे पास मात्र 57 श्रोता आये और 'चाँद नहीं विश्वास चाहिए' को इतने ही समय में 290 मत मिल गये, जो कि सम्भव नहीं है, क्योंकि हम एक सिस्टम से एक मत मान रहे थे। हम 57 मत चाँद नहीं विश्वास चाहिए को दे रहे हैं।

'संगीत दिलों का उत्सव है' और 'मेरे सरकार' के बीच जबरदस्त टक्कर रही। जहाँ 'संगीत दिलों का उत्सव है' को 223 वोट मिले, वहीं 'मेरे सरकार' को 221 । 'चाँद नहीं विश्वास चाहिए' को अधिकतम 57 देने के बाद 177। इस तरह 'संगीत दिलों का उत्सव है' को हम लोकप्रिय गीत चुन रहे हैं। इस गीत के टीम को रु 4000 का नग़द इनाम दिया जायेगा। सुनिए लोकप्रिय गीत-



हिन्द-युग्म सरताज गीत, लोकप्रिय गीत और शीर्ष 10 गीतों का एल्बम भी निकालने की योजना बना चुका है। यह एल्बम जल्द ही किसी सार्वजनिक महोत्सव में ज़ारी किया जायेगा।

स्पॉनसर करें (प्रायोजक बनें)

हिन्द-युग्म अपने कलाकारों के साथ मिलकर बहुत से सांगैतिक कार्यक्रमों को आयोजित करने की योजना बना है, जिसके लिए हम स्पॉन्सर (Sponsorer) की तलाश कर रहे हैं। स्पान्सर को निम्नलिखित लाभ होगा-

1. हिन्द-युग्म डॉट कॉम नेटवर्क के सभी वेबसाइट की लाखों की ट्रैफिक।
2. छः महीने तक सभी नेटवर्क पर बैनर फ्लैश करने का अवसर
3. कार्यक्रमों (जैसे सिंगिंग शो, ग़ज़ल कंसर्ट इत्यादि) के माध्यम से जन समुदाय तक अपना बॉन्ड पहुँचाने का मौका।

अधिक जानकारी के लिए admin@radioplaybackindia.com पर ईमेल करें या 9873734046, 9871123997 पर फोन करें।

Monday, March 2, 2009

चुनिए प्रदर्शित 27 गीतों में से अपनी पसंद

हिन्द-युग्म ने इंटरनेटीय जुगलबंदी से बने पहले एल्बम 'पहला सुर' को जब ३ फरवरी २००८ को विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में रीलिज किया था, तभी से यह तय कर लिया था कि इसे नई प्रतिभाओं को उभारने का कुशल माध्यम बनायेगा।

सजीव सारथी के अनुभवी संयोजन में ४ जुलाई २००८ से प्रत्येक शुक्रवार इसी इंटरनेट जैमिंग से बने स्वरबद्ध गीत का विश्वव्यापी प्रदर्शन इसी वेबसाइट पर किया जाने लगा। उद्देश्य था कि हिन्दी को विश्वव्यापी पहुँच मिले और गायक, संगीतकार और गीतकार को एक मंच। ३१ दिसम्बर २००८ तक एक-एक करके गीत रीलिज किये गये। इस तरह से कुल २७ गीत वर्ष २००८ (सत्र २००८-०९) में प्रदर्शित हुए।

नियमित श्रोता जानते हैं कि हम इन गीतों की समीक्षा २ चरणों में ५ अलग-अलग संगीत पारखियों से करवायी जा चुकी है।

हिन्द-युग्म ने तय किया है कि समीक्षकों द्वारा चुने गये शीर्ष गीत को नगद इनाम भी देगा। वह सरताज़ गीत होगा।
आम श्रोता की पसंद समीक्षकों से अलग हो सकती है। हम एक लोकप्रिय गीत भी चुनना चाहते हैं। जिसके लिए हम श्रोताओं को अवसर दे रहे हैं। श्रोताओं की राय पर समीक्षकों की राय का असर न पड़े, इसलिए हम समीक्षकों द्वारा तय सरताज़ गीत की जानकारी नहीं प्रकाशित कर रहे हैं। हम श्रोताओं द्वारा चुने गये सर्वश्रेष्ठ गीत की टीम को भी नग़द इनाम देंगे।
ऊपर के लिंक से आप हर गीत के बनने की कहानी पढ़ सकते हैं और अलग से सुन भी सकते हैं। आप नीचे के प्लेयर से सभी गीतों को एक साथ सुन सकते हैं। एक-एक करके सुन सकते हैं। जो श्रोता नये हैं, वे इसी प्लेयर से सभी गीत को सुन सकते हैं।



आपका निर्णय






वोटिंग विंडो २८ मार्च रात्रि ११.५९ तक खुली रहेगी. ३० मार्च सोमवार को हम सरताज गीत, लोकप्रिय गीत और टॉप १० गीतों के नतीजे आपके सामने रखेंगे.

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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