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Friday, September 10, 2010

गीली आँखों के धुंधले मंजर में भी दिखी उम्मीद की लहर - बॉलीवुड अंदाज़ के जख्मों को हॉलीवुड अंदाज़ का मरहम

Season 3 of new Music, Song # 19

आज आवाज़ महोत्सव में पहली बार एक ऐसा गीत पेश होने जा रहा है, जिसमें रैप गायन है, जो दो पुरुष गायकों की आवाजों में है और जिसमें दो भाषाओं में शब्द लिखे गए हैं. "प्रभु जी" गीत की आपार सफलता के बाद श्रीनिवास पंडा फिर लौटे हैं इस सत्र में और जैसा हर बार होता है वो अपने श्रोताओं के लिए कुछ नया लेकर ही आये हैं. गीत दृभाषीय है, तो यहाँ हिंदी के शब्द सजीव सारथी ने लिखे है अंग्रेजी शब्द रचे हैं खुद रैपर आसिफ ने जो खुद को "रेग्गड स्कल" कहते हैं. श्रीराम की आवाज़ आप इससे पहले सूफी गीत "हुस्न-ए-इलाही" में सुन चुके है, आज के गीत में उनका अंदाज़ एकदम अलग है. ये एक एक्सपेरिमेंटल गीत है जिसमें संगीत के दो अलग अलग आयामों का मिश्रण करने की कोशिश की गयी है, हम उम्मीद करेंगें कि हमारे श्रोताओं को ये प्रयोग अच्छा लगेगा.

गीत के बोल -

सांसे चुभे सीने में जैसे खंजर,
गीली हैं ऑंखें धुंधला है सारा मंजर, (2)
मेरे पैरों हैं जमीं न सर पे आसमाँ है,
जब से वो खफा हुआ,
कोई पूछे क्या गिला है, जाने क्या वज़ा है,
जो वो बेवफा हुआ……

You should know nothin’ ever gonna last
But you dwellin’ on the past and you hurtin’ pretty bad
And I hate that I’m blunt but you gonna understand
In a week in, a month when you back up on the track
I can imagine what you going through I’ve been there
Cursin’ sometimes at the times that she been there
Lookin at her pictures reminiscing; it was rapture
The ones that hurt is the one with all the laughter [x2]
But the day will come when you gonna skip to another chapter
And then you gonna be smiling hereafter.

कोई कैसे मुस्कुराए, पलकों में छुपाये,
आंसू ओं का सैलाब,
कोई शम्मा न सितारा, दिल है बेसहारा,
मिटने को है बेताब,

खामोशियों में डूबी हर सदा है,
बेचैनियों का क्या ये सिलसिला है,
मेरे रूठे दो जहाँ हैं, टूटे सब गुमाँ है,
जब से वो जुदा हुआ,
कोई पूछे क्या गिला है, जाने क्या वज़ा है,
जो वो बेवफा हुआ……

I know at nights you be losin’ ya sleep
Bleedin inside from your wounds and it’s deep
Just breathe – hold it in for a second
Expellin’ all ya hurt, exhale the depression
Time waits for no man but heals all wounds
No time to waste thinkin it ended too soon
Never brood over love don’t be lost to the gloom
She ain’t know what she lost she ain’t got no clue
Remember the things that you loved in her dude
But you gotta live your life coz you’re worth one too
Gotta forget cuz I am sure that you through.

कोई कैसे भूल पाए, यादों से छुडाये,
लाये दिल को बहला,
कोई सपना वो नहीं था, अपना था यहीं था,
पल में जो है बदला,
कैसे सहें हम, गम जो ये मिला है,
चाक जिगर कब किसका सिला है,
उस पे सब कुछ मिटाके, जान-ओ-दिल लुटाके,
क्योंकर मैं फ़िदा हुआ,
कोई पूछे क्या गिला है, जाने क्या वज़ा है,
जो वो बेवफा हुआ……

Truth is you had something in your life
That most never find when they look all the time
And you stuck here waitin’ for the hurt to pass
But you can’t have the light without the dark it’s a fact
Move on – forget the past let it be
Where it be and you still got hope so believe
That you’ll find – someone more fine
With something more divine !!


यह गीत अब आर्टिस्ट एलोड़ पर बिक्री के लिए उपलब्ध है...जिसकी शर्तों के चलते इस पृष्ठ से निकाल दिया गया है, कृपया सुनने और खरीदने के लिए यहाँ जाएँ.

मेकिंग ऑफ़ "सांसें चुभे" - गीत की टीम द्वारा

श्रीनिवास पंडा: मैंने अपने बहुत से दोस्तों को अक्सर "ब्रेक अप" के बाद बेहद निराश और उदास होते देखा है. तो मन में ख्याल आया कि क्यों न एक गीत के माध्यम से उस दौर से गुजर रहे अपने साथियों कुछ प्रेरणा दूं. मैं इस गीत में रैप चाहता था, तो विचार आया कि इसे एक संवाद रूप में बनाया जाए, दो किरदारों के लिए अलग अलग स्वर लेकर. मैंने एक धुन बनायीं और सजीव जी से इस बारे में बात की. कुछ दिनों में ही उन्होंने इतना बढ़िया गाना उस धुन पर लिख भेजा कि मेरा भी अर्रेंज्मेंट करने का उत्साह बढ़ गया. इस गीत में सबसे बड़ी चुनौती थी, एक अच्छा रैपर ढूँढने की. इस काम में मित्र राहुल सोमन ने मदद की. हमें आसिफ जैसा रैपर ढूँढने में करीब ४ महीने लगे. अधिकतर रैपर अपने शब्द खुद लिखते हैं. आसिफ ने भी अपने लिखे शब्दों को गा कर मुझे भेजा अपनी तमाम व्यस्ताओं के बीच भी, वो भी मात्र एक माह में. इसी दौरान ऋषि के माध्यम से मुझे श्रीराम का परिचय मिला, उन्होंने भी गाने का निमंत्रण सहर्ष स्वीकार कर लिए और इस तरह करीब ६ महीनों की मेहनत के बाद बन कर तैयार हुआ ये गीत.

श्रीराम ईमनि: जब श्रीनि ने पहली बार मुझसे इस गीत की बात की तो उनकी बातों से लगा कि ये बहुत ही आसान सा गाना होगा. पर जब मैंने इसे सुना तो तो इसकी होंटिंग धुन और सोलफुल शब्दों ने मुझे डुबो ही दिया. उपर से रेग्गड़ स्कल के शानदार रैप इस पर चार चाँद लगा रहा था. मैंने फैसला किया कि मैं इस गीत को भरपूर समय दूँगा और जब तक पूरी तरह से रिहर्स न कर लूं अंतिम टेक नहीं लूँगा. धुन जो सुनने में सरल लगती है बहुत से उतार छडाव से भरी है, और दूसरी चुनौती ये थी कि अधिकतर पंक्तियाँ एक सांस में गाने वाली थी, तमाम शब्दों में छुपे भावों के ध्यान में रखकर. मुझे लगता है कि अंतिम परिणाम से श्रीनि भाई संतुष्ट होंगें. मैं रैपर रेग्गड़ स्कल को विशेष बधाई देना चाहूँगा, जब मैंने पहली बार सुना तो लगा कि किसी विदेशी फनकार ने किया होगा. यक़ीनन ये बहुत ही प्रो है. सजीव जी के शब्द और श्रीनिवास का अर्रेंज्मेंट ने इस गीत को एक अलग ही मुकाम दिया है, मेरे लिए इस गीत में काम करना एक संतोषजनक तजुर्बा रहा

सजीव सारथी: इस गीत में दो किरदार हैं और मेरा काम एक किरदार को शब्द देना था जो अपनी महबूबा या प्रेमिका के धोखे से बेहद दुखी और निराश है, उसकी सोच नकारात्मक है. काफी क्लीशे सिचुएशन था पर देखिये श्रीनि ने इसमें भी कितना नयापन प्रस्तुत कर दिखाया है. धुन का बहाव बहुत ही बढ़िया था, तो मुझे लगा कि यहाँ शब्दों को तोड़ तोड़ कर खेला जा सकता है. इस गीत पर काम करने में बहुत मज़ा आया, और श्रीराम को ख़ास आभार कि उन्होंने उन तोड़े हुए शब्दों को बेहद अच्छे से और भाव में डूब कर गाया. श्रीनि के साथ काम करना हमेशा ही एक सुखद अनुभव होता है, और मुझे ख़ुशी है कि उन्होंने इस अनूठे और दिलचस्प गीत का मुझे हिस्सा बनाया. राहुल और आसिफ को ख़ास धन्येवाद जिनके योगदान के बिना शायद ये संभव नहीं हो पाता.

आसिफ अकबर (Ragged Skull): जब श्रीनिवास ने पहले मुझे ये गीत सुनाया तो मुझे लगा कि ये मेरे लिए एक नयी जमीं पर खुदाई करने जैसा होगा. दरअसल मैं रोजमर्रा के जीवन पर अपनी कलम चलाता था, पर पहले कभी इस तरह के किसी विषय पर लिखने का नहीं सोचा, क्योंकि मैं जानता हूँ कि यादें कभी मरती नहीं हैं, वो छुपी रहती है, और जब कोई कुरेदे तो फिर जाग उठती हैं, तो यक़ीनन आसान नहीं है कहना कि भूल जाओ...श्रीनिवास की धुन में गीत के थीम के सभी भाव थे मुझे बस उसके बीट पकड़ने थे अपने शब्दों के लिए, सजीव ने जो लिखा उसने निश्चित ही मुझे प्रेरणा दी. ये मेरे पहले के सभी प्रोजेक्ट्स से अलग था, क्योंकि श्रीनिवास के जेहन में बिलकुल साफ़ था कि वो क्या चाहते हैं. अंतिम शब्द सरंचना से पहले हमारे बीच बहुत सी चर्चाएं हुई. मैं अपने काम से बेहद संतुष्ट हूँ और श्रीनिवास, सजीव और श्रीराम के साथ और भी इस तरह के विचारोत्तेजक गीतों में काम करना चाहूँगा.
श्रीराम ईमनि
मुम्बई में जन्मे और पले-बढे श्रीराम गायन के क्षेत्र में महज़ ७ साल की उम्र से सक्रिय हैं। ये लगभग एक दशक से कर्नाटक संगीत की शिक्षा ले रहे हैं। आई०आई०टी० बम्बे से स्नातक करने के बाद इन्होंने कुछ दिनों तक एक मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी में काम किया और आज-कल नेशनल सेंटर फॉर द परफ़ोर्मिंग आर्ट्स (एन०सी०पी०ए०) में बिज़नेस डेवलपेंट मैनेज़र के तौर पर कार्यरत हैं। श्रीराम ने अपने स्कूल और आई०आई०टी० बम्बे के दिनों में कई सारे स्टेज़ परफोरमेंश दिए थे और कई सारे पुरस्कार भी जीते थे। ये आई०आई०टी० के दो सबसे बड़े म्युज़िकल नाईट्स "सुरबहार" और "स्वर संध्या" के लीड सिंगर रह चुके हैं। श्रीराम हर ज़ौनर का गाना गाना पसंद करते हैं, फिर चाहे वो शास्त्रीय रागों पर आधारित गाना हो या फिर कोई तड़कता-फड़कता बालीवुड नंबर। इनका मानना है कि कर्नाटक संगीत में ली जा रही शिक्षा के कारण हीं इनकी गायकी को आधार प्राप्त हुआ है। ये हर गायक के लिए शास्त्रीय शिक्षा जरूरी मानते हैं। हिन्द-युग्म (आवाज़) पर यह इनका दूसरा गाना है।

श्रीनिवास पंडा
तेलगू, उड़िया और हिंदी गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पंडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों मुंबई में हैं और बैंक ऑफ अमेरिका में कार्यरत हैं। गीतकास्ट में लगातार चार बार विजेता रह चुके हैं। 'काव्यनाद' एल्बम में इनके 3 गीत संकलित हैं। पेशे से तकनीककर्मी श्रीनिवास हर गीत को एक नया ट्रीटमेंट देने के लिए जाने जाते हैं

सजीव सारथी
हिन्द-युग्म के 'आवाज़' मंच के प्रधान संपादक सजीव सारथी हिन्द-युग्म के वरिष्ठतम गीतकार हैं। हिन्द-युग्म पर इंटरनेटीय जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीत निर्माण का बीज सजीव ने ही डाला है, जो इन्हीं के बागवानी में लगातार फल-फूल रहा है। कविहृदयी सजीव की कविताएँ हिन्द-युग्म के बहुचर्चित कविता-संग्रह 'सम्भावना डॉट कॉम' में संकलित है। सजीव के निर्देशन में ही हिन्द-युग्म ने 3 फरवरी 2008 को अपना पहला संगीतमय एल्बम 'पहला सुर' ज़ारी किया जिसमें 6 गीत सजीव सारथी द्वारा लिखित थे। पूरी प्रोफाइल यहाँ देखें।

आसिफ (रेग्गड़ स्कल)
आसिफ एक रैपर हैं जो त्रिचूर केरल में रहते है, बहुत से व्यावसायिक विज्ञापनों के लिए गा चुके हैं, मलयालम फिल्म "अनवर" के लिए भी गायन कर चुके हैं. हिंद युग्म के ये पहले रैपर हैं. अभी अंग्रेजी में गाते हैं, पर हमें उम्मीद है कि हिंद युग्म इनसे कभी हिंदी रैप भी गवा लेगा
Song - Sansen Chubhe (Tears and Hope)
Vocals - Sreeram Emaani & Asif (Ragged Skull)
Music - Srinvias Panda
Lyrics - Sajeev Sarathie (hindi)
rap lyrics - Asif (Ragged Skull)
Graphics - Prashen's media


Song # 19, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

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Friday, April 16, 2010

प्रभु जी से मन की गुहार कुहू से स्वर में, श्रीनी के संगीत में और सजीव के शब्दों में

Season 3 of new Music, Song # 03



फिर एक नया शुक्रवार आया और लाया हिंद युग्म के तीसरे संगीत सत्र का तीसरा गीत. दोस्तों कुहू गुप्ता से आप हमारी पिछली पेशकश में रूबरू हो चुके हैं, कुहू की तरह ही काव्यानद के माध्यम से आवाज़ से जुड़े एक बेहद प्रतिभाशाली संगीतकार जिन्होंने लगातार ३ बार काव्यनाद प्रतियोगिता में विजय पताका फहराई, और उनका गीत "जो तुम आ जाते एक बार" तो जैसे सबकी जुबाँ पर चढ गया, प्रदीप सोमसुन्दरन और निखिल आनंद के साथ उन्होंने "कलम आज उनकी जय बोल" से भी खूब वाह वाही लूटी. जी हाँ हम बात कर रहे हैं श्रीनिवास पंडा की. संगीत महोत्सव के इस तीसरे संस्करण में आज पहली बार श्रीनिवास पंडा एक बार फिर एक नए अंदाज़ में आपके सामने आ रहे हैं, साथ हैं युग्म के वरिष्ठ गीतकारों में से एक सजीव सारथी. इन दोनों के संगम से बना एक आत्मीय भजन जिसे दो संस्करणों में प्रस्तुत किया गया है. एक में आवाज़ है कुहू की तो दूसरा संस्करण खुद श्रीनिवास ने गाया है. तो दोस्तों आज आम प्रेम गीतों से कुछ अलग, भक्ति रस में डूब कर सुना जाए ये भजन, अपने व्यस्त और उलझे बिगड़े इस जीवन में जब दो पल फुर्सत के निकलते हैं तब "उसकी" शरण में कुछ ऐसे ही भाव लेकर हम पहुँचते हैं. सुनिए और अपने स्नेह सुझावों से इन कलाकारों का मार्गदर्शन करें.

गीत के बोल -

(Female)
प्रभु जी,
प्रभु जी , ये दिल मेरा टूटा तारा,
आँखों में नम है खारा खारा,
प्रभु जी,
प्रभु जी, जीवन मेरा दुःख से हारा,
आँखों में नम है खारा खारा….
प्रभु जी….

तुम्हीं दो उजाले,
घना है अँधेरा,
भंवर में है नैय्या,
दिखा दो किनारा,
मुझे पार उतारो, आओ ना,
सुधि न बिसारो, आओ ना,
प्रभु जी,
प्रभु जी, सहारा हो तुम्हीं मेरा,
तुम बिन न कोई आसरा मेरा,
प्रभु जी, संवारो जीवन भी मेरा,
तुम बिन न कोई आसरा मेरा,
प्रभु जी……

भुला दो न मेरे,
अव गुण सारे,
पथ है कठिन ये,
सुनो अब सखा रे
कोई छाँव दे दो आओ ना,
बिगड़ी बना दो आओ ना,
प्रभु जी,
प्रभु जी, मेरी है आस बस तुमसे,
शंका मिटा दो सारी दिल से,
प्रभु जी,
प्रभु जी, हाथ अपना रख दो सर पे,
शंका मिटा दो सारी दिल से,
प्रभु जी……




(Male)
प्रभु जी,
प्रभु जी, ये दिल मेरा टूटा तारा,
आँखों में नम है खारा खारा,
प्रभु जी,
प्रभु जी, जीवन मेरा दुःख से हारा,
आँखों में नम है खारा खरा,
प्रभु जी…….

कहीं तोड़ दे न,
मुझे ये निराशा,
जला कोई दीपक,
जगा दो न आशा,
अँधेरे बुझा दो आओ न,
कोई राह सुझा दो आओ न,

प्रभु जी,
प्रभु जी, करो न अनसुनी मेरी,
विनती सुनो न अब करो देरी,
प्रभु जी,
प्रभु जी, यही है प्रार्थना मेरी,
विनती सुनो न अब करो देरी,
प्रभु जी……

कड़े रास्तों पे,
मेरे पग न डोले,
घनी धूप है तुम,
र खना संभाले,
विपदा छुड़ाने आओ न,
दुविधा मिटाने आओ न….

प्रभु जी,
प्रभु जी, तुम्हीं हो संबल मेरा,
मांगें सहारा निर्बल तेरा,
प्रभु जी, तेरी शरण मेरा डेरा,
मांगें सहारा निर्बल तेरा….

प्रभु जी ….
प्रभु जी……


यह गीत अब आर्टिस्ट एलोड़ पर बिक्री के लिए उपलब्ध है...जिसकी शर्तों के चलते इस पृष्ठ से निकाल दिया गया है, कृपया सुनने और खरीदने के लिए यहाँ जाएँ.


मेकिंग ऑफ़ "प्रभु जी" - गीत की टीम द्वारा

श्रीनिवास पंडा- इस गीत ने लगभग ६ साल का सफर पूरा किया है. मई २००४ जब इंजीनियरिंग के फाईनल वर्ष में था, तब रोज शाम को मेडिटेशन करने लिए होस्टल की छत पर अकेला जाया करता था. ठंडी ठंडी हवा चल रही थी, तभी जाने कहाँ से ये धुन जेहन में आ गयी, मेडिटेशन पूरा करने के बाद पाया कि धुन अपना आकार ले चुकी थी, लगा जैसे खुद प्रभु ने ये धुन भेजी है मेरे लिए, वापस कमरे में आकर उस धुन पर दो पंक्तियाँ ओडिया में लिख डाली और एक छोटे से रिकॉर्डर में रिकॉर्ड कर लिया, कुछ दोस्तों को सुनाया, सब ने खूब तारीफ़ की, पर फिर वो मुखडा उसी टेप में ही धरा रह गया. समय गुजरता चला गया, इतना व्यस्त हो चुका था कि मेडिटेशन तो छूट ही गया, बस सुबह ५ मिनट भागवत गीता के २ श्लोक अवश्य पढ़ लेता हूँ. एक शाम थोडा उदास था, सोचा एक भजन क्यों न किया जाए प्रभु जी से प्रार्थना करके मन भी थोडा हल्का हो जायेगा...तब से वही धुन कई बार गुनगुनाता रहा, फिर की बोर्ड लेकर बैठा और अंतरा को भी रिकॉर्ड कर लिया कंप्यूटर में. उसी दिन शाम को सजीव जी को फोन किया, और उनके कहने पर जितना भी रिकॉर्डएड था भेज दिया. इस बीच बाकी संयोजन में जुट गया. होली के अगले दिन सजीव ने शब्द भेज दिए थे. बात बनती हुई लगी तो गीत को थोडा और बढ़ा दिया, फिर लगा कि एक फीमेल संस्करण भी होना चाहिए सेम फीलिंग का, तय हुआ कि दोनों में मुखडा एक सा रखेंगें और अंतरे में जेंडर के अनुरूप बदलाव होंगें. एक हफ्ते में दोनों संस्करण तैयार हुए....मैंने पहली बार कोई गाना गाया है, सजीव जी ने बहुत जगह मेरी मदद की शब्दों को सही करने में, और कुहू ने तो अपने अंदाज़ में इसे एक अलग ही मुकाम दे दिया है...अंतिम परिणाम आपके सामने हैं.

कुहू गुप्ता- श्रीनिवास बहुत ही प्रतिभापूर्ण संगीतकार और सोफ्ट स्पोकेन इंसान हैं. उनके साथ मैं कुछ और गाने भी कर चुकी हूँ. जब उन्होंने ये भजन मुझे भेजा तो मैंने ये मौक़ा मैंने दोनों हाथों से लपक लिया. इसकी रचना बहुत ही सुन्दर है और शब्द भी बहुत ही संवेदनशील जो सजीव ने बखूबी लिखे हैं. इस भजन का पुरुष संस्करण खुद श्रीनिवास ने गाया है. बहुत अच्छे संगीतकार होने के साथ साथ ये बहुत अच्छे गायक भी हैं. मैंने आज तक कोई भी भजन नहीं रिकॉर्ड किया था और मुझे लगा मेरी क्षमता को विस्तारने के लिए ये भजन बिलकुल सही रहेगा. मैं कुछ और कामों में व्यस्त थी तो थोड़ा समय लगा इसे रिकॉर्ड करने में मगर एक दिन लग कर बैठी और भेज दिया श्रीनिवास को मिक्सिंग के लिए. उन्होंने कुछ सुझाव दिए और मैंने एक रीटेक और करके उन्हें फिर भेज दिया. और अगले ही दिन श्रीनिवास ने मिक्सिंग करके फ़टाफ़ट भजन मुझे मेल कर दिया ! मैं तो स्तब्ध ही रह गयी. इस भजन में एक लड़की अपने जीवन का सबके खराब हिस्सा व्यतीत कर रही है और प्रभुजी से उसे बचाने की प्रार्थना कर रही है. आशा करती हूँ आप सभी इस अभिव्यक्ति को मेरी गायकी के द्वारा महसूस कर पायेंगे!

सजीव सारथी-काव्यानाद में श्रीनी और कुहू का काम देखकर बहुत दिनों से मन में इच्छा थी इन दोनों से साथ मिलकर कुछ करने का. एक गीत मैंने खास कुहू के लिए लिखा और श्रीनी को भेजा पर पता नहीं क्यों उस गीत में भी और उसके बाद भी एक आध गीतों में भी कोशिश तो हुई पर बात बन नहीं पायी. फिर २३ तारीख़ शाम को मुझे श्रीनी का फोन आया और कहा कि एक भजन लिखना है, २४ तारीख़ को मेरा जन्मदिन था, और हर जन्मदिन पर कुछ अवश्य लिखता हूँ मैं, मुझे लगा इस बार मुझे सौभाग्य मिला है एक भजन लिखने का, "प्रभु जी" शब्द श्रीनी का ही था, मुझे भी उसे बदलना सही नहीं लगा, धुन सुनने में बहुत सरल लगती थी, पर मीटर बड़ा ही मुश्किल था, शायद "प्रभु जी" ने ही मदद की और अंतिम परिणाम बेहद संतोषजनक रहा. श्रीनी की आवाज़ बहुत अस्वाभाविक है, और उनके गायन में मिटटी की सी खुशबू है कुछ शब्द उनके मुंह से बहुत बढ़िया लगते है जैसे- अनसुनी, बिपदा, दुविधा आदि. और कुहू के लिए क्या कहूँ. मैं उनकी आवाज़ का एक बहुत बड़ा फैन हूँ, उनकी आवाज़ पाकर गीत और भी सुरीला हो जाता है. उनके बाकी सब गीतों से अलग इस गीत में उन्होंने जो स्ट्रेन दिया है, जो कंपन लिया है आवाज़ में वो गजब का है और दर्द के भाव अंतिम पंक्तियों में बहुत उभर कर सामने आते हैं, शुक्रिया श्रीनी इस जन्मदिन के तोहफे के लिए और शुक्रिया कुहू, इतनी सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए



श्रीनिवास पांडा
मूलरूप से तेलगू और उड़िया गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पांडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों हैदराबाद में हैं और अमेरिकन बैंक में कार्यरत हैं। गीतकास्ट में लगातार चार बार विजेता रह चुके हैं। 'काव्यनाद' एल्बम में इनके 3 गीत संकलित हैं। पेशे से तकनीककर्मी श्रीनिवास हर गीत को एक नया ट्रीटमेंट देने के लिए जाने जाते हैं

कुहू गुप्ता
पुणे में रहने वाली कुहू गुप्ता पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। गायकी इनका जज्बा है। ये पिछले 6 वर्षों से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रही हैं। इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई गायन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लिया है और इनाम जीते हैं। इन्होंने ज़ी टीवी के प्रचलित कार्यक्रम 'सारेगामा' में भी 2 बार भाग लिया है। जहाँ तक गायकी का सवाल है तो इन्होंने कुछ व्यवसायिक प्रोजेक्ट भी किये हैं। वैसे ये अपनी संतुष्टि के लिए गाना ही अधिक पसंद करती हैं। इंटरनेट पर नये संगीत में रुचि रखने वाले श्रोताओं के बीच कुहू काफी चर्चित हैं। कुहू ने हिन्द-युग्म ताजातरीन एल्बम 'काव्यनाद' में महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' को गाया है, जो इस एल्बम का सबसे अधिक सराहा गया गीत है।

सजीव सारथी
हिन्द-युग्म के 'आवाज़' मंच के प्रधान संपादक सजीव सारथी हिन्द-युग्म के वरिष्ठतम गीतकार हैं। हिन्द-युग्म पर इंटरनेटीय जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीत निर्माण का बीज सजीव ने ही डाला है, जो इन्हीं के बागवानी में लगातार फल-फूल रहा है। कविहृदयी सजीव की कविताएँ हिन्द-युग्म के बहुचर्चित कविता-संग्रह 'सम्भावना डॉट कॉम' में संकलित है। सजीव के निर्देशन में ही हिन्द-युग्म ने 3 फरवरी 2008 को अपना पहला संगीतमय एल्बम 'पहला सुर' ज़ारी किया जिसमें 6 गीत सजीव सारथी द्वारा लिखित थे। पूरी प्रोफाइल यहाँ देखें।

Song - Prabhu ji
Voices - Kuhoo Gupta, Srinivas Panda
Music - Srinivas Panda
Lyrics - Sajeev Sarathie
Graphics - Samarth Garg


Song # 02, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

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Monday, February 22, 2010

कविता और संगीत का अनूठा मेल है "काव्यनाद"

ताज़ा सुर ताल ०८/२०१०

सुजॉय- सजीव आज आपके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी है, इसकी वजह...
सजीव- हाँ सुजॉय मैं हिंद युग्म के अपने प्रोडक्ट "काव्यनाद" को विश्व पुस्तक मेले में मिली आपार सफलता और वाह वाही से बहुत खुश हूँ.
सुजॉय- हाँ सजीव मैंने भी यह अल्बम सुनी, और सच कहूँ तो ये मेरी अपेक्षाओं से कहीं बेहतर निकली, इतनी पुरानी कविताओं पर इतनी मधुर धुनें बन सकती है, यकीं नहीं होता.
सजीव- बिलकुल सुजॉय, ये इतना आसान हरगिज़ नहीं था, पर जैसा कि मैंने हमेश विश्वास जताया है युग्म के सभी संगीतकार बेहद प्रतिभाशाली हैं, ये सब कुछ संभव कर सकते हैं.
सुजॉय- तो इसका अर्थ है सजीव कि आज हम इसी अनूठी अल्बम को ताज़ा सुर ताल में पेश करने जा रहे हैं ?

सजीव- जी सुजॉय, काव्यनाद प्रसाद, निराला, दिनकर, महादेवी, पन्त, और गुप्त जैसे हिंदी के प्रतीक कवियों की ६ कविताओं का संगीतबद्ध संकलन है, ६ कविताओं को संगीत के अलग अलग अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है, कुल १४ गीत हैं, और सबसे अच्छी बात ये हैं कि सभी एक दूसरे से बेहद अलग ध्वनि देते हैं.
सुजॉय- सबसे पहले मैं इसमें से उस गीत को सुनवाना चाहूँगा जो मुझे व्यक्तिगत तौर पर बहुत पसंद आया, धर्मेन्द्र कुमार सिंह की आवाज़ में पन्त की ये रचना बेहद मधुर बन पड़ी है. इसका रेट्रो फील मुझे बहुत भाया.
सजीव- धर्मेन्द्र हिंदी भोजपुरी के एक युवा गायक हैं, जिनमें बहुत संभावना नज़र आती है, संगीत संयोजन अखिलेश कुमार का है, सुनते हैं ये गीत

प्रथम रश्मि का आना (धर्मेन्द्र कुमार), पारंपरिक संस्करण....pratham reshmi (kavyanaad)


सुजॉय -बहुत खूब था ये गीत. धमेन्द्र की आवाज़ में मुकेश की गायिकी झलकती है कहीं न कहीं...
सजीव -हाँ, चलिए अब सुनते हैं जय शंकर प्रसाद की एक देशभक्ति रचना...
सुजॉय- इसे स्वप्न मंजूषा शैल ने भी बहुत अच्छा गाया है, पर आप शायद युवा गायक कृष्ण राज कुमार का संस्करण सुनवाने जा रहे हैं...ठीक ?
सजीव - हाँ, दरअसल कृष्ण एक ऐसे संगीतकार/गायक हैं जिनका दूसरे सत्र में योगदान मात्र एक गीत का था, कोई भी उनसे बहुत उम्मीद नहीं कर रहा था. पर देखिये न सिर्फ उन्होंने हर बार हिस्सा लिया, वो लगभग हर बार कोई न कोई सम्मान भी जीतते चले गए.
सुजॉय- सजीव काव्यनाद के बनने की कहानी भी ज़रा संक्षिप्त में हमारे श्रोताओं को बताईये.
सजीव- हाँ जरूर, दरअसल "पहला सुर" जो युग्म के संगीत का पहला प्रोडक्ट था के माध्यम से हमारे पास नए उभरते हुए कलाकारों का एक अच्छा ख़ासा पूल जमा हो गया था. युग्म से लंबे समय से जुड़े, रेडियो सलाम नमस्ते के उद्‍घोषक, कवि, वैज्ञानिक और हिन्दीकर्मी आदित्य प्रकाश ने इस बेमिसाल सुझाव को सामने रखा. शुरू में हम झिझक रहे थे कि कैसे हमारे नयी सदी के संगीतकार इन क्लास्सिक रचनाओं के साथ न्याय कर पायेंगें, इसलिए प्रतियोगिता का स्वरूप अपनाया, ताकि अधिक से अधिक प्रतिभागी हिस्सा लेने के लिए प्रेरित हों. इन विजेताओं को पुरस्कार दिए गए उस राशि को भी आदित्य प्रकाश जी, शेर बहादुर सिंह जी, डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह जी, अशोक कुमार जी, डॉ॰ कमल किशोर सिंह, दीपक चौरसिया 'मशाल', डॉ॰ शिरीष यकुन्डी, डॉ॰ प्रशांत कोले, डॉ॰ रघुराज प्रताप सिंह ठाकुर और शैलेश त्रिपाठी ने प्रायोजित किया.
सुजॉय- सजीव बातें बहुत से लोग कर लेते हैं, पर वास्तव में कुछ करना क्या होता है ये आदित्य जी और उनकी टीम ने सिखाया है, भाषा के इन सच्चे सपूतों को सलाम करते हुए सुनते हैं, ये गीत

गीत - अरुण ये मधुमय देश हमारा (कृष्ण राजकुमार) arun ye madhumay desh (kavyanaad)


सजीव- जो तुम आ जाते एक बार....
सुजॉय- किसकी बात कर रहे हो सजीव.
सजीव- महादेवी जी की इस अनमोल रचना के बारे में कुछ कहने को मेरे पास शब्द नहीं हैं...
सुजॉय- पर मेरे पास एक युवा गायिका, कुहू गुप्ता के बारे में कहने को बहुत कुछ है...पुणे में रहने वाली कुहू गुप्ता पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। गायकी इनका जज्बा है। ये पिछले 5 वर्षों से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रही हैं। इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई गायन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लिया है और इनाम जीते हैं। इन्होंने ज़ी टीवी के प्रचलित कार्यक्रम 'सारेगामा' में भी 2 बार भाग लिया है। जहाँ तक गायकी का सवाल है तो इन्होंने कुछ व्यवसायिक प्रोजेक्ट भी किये हैं।
सजीव- हिंद युग्म पर आई सबसे सुरीली आवाजों में है कुहू गुप्ता की आवाज़. और देखिये तो ज़रा इस गीत में उन्होंने कितने खूबसूरत रंग भर दिए हैं. वैसे इस गीत के संगीतकार श्रीनिवास के बारे में भी थोडा सा बताना चाहूँगा. मूलरूप से तेलगू और उड़िया गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पांडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों हैदराबाद में हैं और अमेरिकन बैंक में कार्यरत हैं।
सुजॉय- अब सुन लिया जाए ये गीत

गीत - जो तुम आ जाते एक बार (कुहू/श्रीनिवास) jo tum aa jaate ek baar (kavyanaad)


सजीव- कुहू की तरह ही एक और उभरते हुए गायक के साथ टीम बनायीं है श्रीनिवास ने अगले गीत के लिए.
सुजॉय- हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र में इनके 5 गीत (जीत के गीत, मेरे सरकार, ओ साहिबा, रूबरू और वन अर्थ-हमारी एक सभ्यता) ज़ारी हो चुके हैं। ओडिसा की मिट्टी में जन्मे बिस्वजीत शौकिया तौर पर गाने में दिलचस्पी रखते हैं। वर्तमान में लंदन (यूके) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी कर रहे हैं। इनका एक और गीत जो माँ को समर्पित है, उसे हमने विश्व माँ दिवस पर रीलिज किया था।
सजीव- हाँ सुजॉय बिस्वजीत की आवाज़ के बहुत से प्रशंसक हैं पहले ही, तो बिना अधिक कुछ कहे सुन लेते हैं ते गीत

गीत - स्नेह निर्झर (बिस्वजीत/श्रीनिवास)...sneh nirjhar (kavyanaad)


सजीव- सुजॉय यहाँ मैं आदित्य जी एक और साथी और काव्यनाद के एक और प्रायोजक का जिक्र करना चाहूँगा. ये हैं डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह, जो पिछले 30 वर्षों से मानचेस्टर, यूके में प्रवास कर रहे हैं। कवि हृदयी, कविता-मर्मज्ञ और साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाले- ये सभी इनके विशेषण हैं।
सुजॉय- जी बिकुल तभी तो इन्होने आगे बढ़ कर इस बड़े आयोजन में अपना योगदान दिया. इनके अलावा रिवरहेड, न्यूयार्क के कमल किशोर सिंह जी भी हैं जो पेशे से डॉक्टर हैं। हिन्दी तथा भोजपुरी में कविताएँ लिखते हैं। इन्होने गीतकास्ट प्रतियोगिता में हिस्सा भी लिया है हर बार. जीते तो नहीं पर फिर भी आयोजन की एक कड़ी को प्रायोजित कर स्पोर्ट्स मेन् शिप दिखाई और साहित्य सेवा में अपना समर्पण भी.
सजीव- राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता "कलम आज उनकी जय बोल" को स्वरबद्ध करना निश्चित ही आसान नहीं रहा होगा, पर एक बार हमारे संगीतकारों ने अपना लोहा मनवाया.
सुजॉय- इस गीत में एक और नयी आवाज़ सुनाई पड़ती है -प्रदीप सोम सुन्दरन की. जो लोग टीवी पर म्यूजिकल शो देखने के शौक़ीन हैं, उन्होंने भारतीय टेलीविजन पर पहले सांगैतिक आयोजन 'मेरी आवाज़ सुनो' को ज़रूर देखा होगा। प्रदीप सोमसुंदरन को इसी कार्यक्रम में सन 1996 में सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक चुना गया था और लता मंगेशकर सम्मान से सम्मानित किया गया था।
सजीव- प्रदीप कनार्टक शास्त्रीय गायन के अतिरिक्त हिन्दी, मलयालम, तमिल, तेलगू, अंग्रेज़ी और जापानी आदि भाषाओं में ग़ज़लें और भजन गाते हैं। इन्होंने कई मलयालम फिल्मी गीतों में अपनी आवाज़ दी है। इस गीत में आप हिंद युग्मी निखिल आनंद गिरी की भी आवाज़ सुन सकते हैं.

गीत - कलम आज उनकी जय बोल (निखिल/प्रदीप/श्रीनिवास)... kalam aaj unki jai bol (kavyanaad)


सुजॉय- अब बारी आज के अंतिम गीत की. एक चिर प्रेरणा है इस गीत में, यूं तो इस गीत के भी सभी संस्करण बहुत खूब हैं, पर इस गीत के बहाने कुछ चर्चा कर लें रफीक शेख की भी, इन्हें तो आवाज़ के दूसरे सत्र में सर्वश्रेष्ठ गीत का पुरस्कार भी मिला है न ?
सजीव- जी सुजॉय, रफ़ीक़ शेख आवाज़ टीम की ओर से पिछले वर्ष के सर्वश्रेष्ठ गायक-संगीतकार घोषित किये जा चुके हैं। रफ़ीक ने दूसरे सत्र के संगीत मुकाबले में अपने कुल 3 गीत (सच बोलता है, आखिरी बार, जो शजर सूख गया है) दिये और तीनों के तीनों गीतों ने शीर्ष 10 में स्थान बनाया।
सुजॉय- वाह, चलिए रफ़ीक भाई को सुनते हैं मगर उससे पहले दीपक मशाल और उनके साथियों का भी जिक्र कर दें जिन्होंने उस आयोजन को मुक्कमल करने में विद्यार्थी होने के बावजूद योगदान दिया.
सजीव- बिलकुल सुजॉय, अगर चाहत हो मन में तो सब कुछ संभव है....यही सीख है गुप्त जी की एक कविता में भी, सुनिए

गीत - नर हो न निराश करो (रफीक शेख) nar ho na niraash karo (kavyanaad)


"काव्यनाद" के संगीत को आवाज़ रेटिंग ****
काव्यनाद एक अनूठी पहल है, बहुत कुछ नया है और प्रयोगात्मक भी. आज की पीढ़ी को लगभग १०० वर्ष पहले लिखी कविताओं को इस रूप में पेश करने का प्रयास सराहनीय है, पर अभी प्रस्तुति के मामले में सुधार की गुन्जायिश है, हिंद युग्म ने अपने पहले प्रोडक्ट से बेहतर काम दिखाया है इस बार, उम्मीद करेंगें कि आने वाले प्रोडक्ट्स और बेहतर साबित होंगें.

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # २२- काव्यनाद के विमोचन के साथ साथ हिंद युग्म आवाज़ ने एक और अनूठी एल्बम को भी उतरा है, बीते पुस्तक मेले में इसकी भी खूब चर्चा रही, इस अल्बम का नाम बताएं.
TST ट्रिविया # २३ लन्दन ड्रीम्स में एक मशहूर गीत गाने वाले गायक की आवाज़ भी है "काव्यनाद" में, कौन हैं ये गायक ?
TST ट्रिविया # २४ एल्बम "काव्यनाद" का विमोचन किसी मशहूर हस्ती के हाथों हुआ


TST ट्रिविया में अब तक -
अनुराग जी दो सही जवाब मिले आपके और ४ अंकों से खाता खुला है आपका...बधाई

Tuesday, December 15, 2009

इस बार नर हो न निराश करो मन को संगीतबद्ध हुआ

गीतकास्ट प्रतियोगिता- परिणाम-6: नर हो न निराश करो मन को

आज हम हाज़िर हैं 6वीं गीतकास्ट प्रतियोगिता के परिणामों को लेकर और साथ में है एक खुशख़बरी। हिन्द-युग्म अब तक इस प्रतियोगिता के माध्यम से जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर और मैथिलीशरण गुप्त की एक-एक कविता संगीतबद्ध करा चुका है। इस प्रतियोगिता के आयोजित करने में हमें पूरी तरह से मदद मिली है अप्रवासी हिन्दी प्रेमियों की। खुशख़बरी यह कि ऐसे ही अप्रवासी हिन्दी प्रेमियों की मदद से हम इन 6 कविताओं की बेहतर रिकॉर्डिंगों को ऑडियो एल्बम की शक्ल दे रहे हैं और उसे लेकर आ रहे हैं 30 जनवरी 2010 से 7 फरवरी 2010 के मध्य नई दिल्ली के प्रगति मैदान में लगने वाले 19वें विश्व पुस्तक मेला में। इस माध्यम से हम इस कवियों की अमर कविताओं को कई लाख लोगों तक पहुँचा ही पायेंगे साथ ही साथ नव गायकों और संगीतकारों को भी एक वैश्विक मंच दे पायेंगे।

6वीं गीतकास्ट प्रतियोगिता में हमने मैथिली शरण गुप्त की प्रतिनिधि कविता 'नर हो न निराश करो मन को' को संगीतबद्ध करने की प्रतियोगिता रखी थी। इसमें हमें कुल 9 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई। लेकिन इस बार हमारे निर्णायकों ने अलग-अलग प्रविष्टियों पर अपनी मुहर लगाई। तो निश्चित रूप से नियंत्रक के लिए मुश्किल होनी थी। अतः हमने तीन प्रविष्टियों को संयुक्त रूप से विजेता घोषित करने का निश्चय है। आइए मिलते हैं विजेताओं से और उनके हुनर से भी।


कृष्ण राज कुमार

कृष्ण राज कुमार ने इस प्रतियोगिता की हर कड़ी में भाग लिया है। जयशंकर प्रसाद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' के लिए प्रथम पुरस्कार, सुमित्रा नंदन पंत की कविता 'प्रथम रश्मि' के लिए द्वितीय पुरस्कार, महादेवी वर्मा के लिए भी प्रथम पुरस्कार। निराला की कविता 'स्नेह निर्झर बह गया है' के लिए भी इनकी प्रविष्टि उल्लेखनीय थी। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता 'कलम! आज उनकी जय बोल' के लिए द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। और इस बार भी इन्होंने पहला स्थान बनाया है। कृष्ण राज कुमार जो मात्र 22 वर्ष के हैं, और जिन्होंने अभी-अभी अपने B.Tech की पढ़ाई पूरी की है, पिछले 14 सालों से कर्नाटक गायन की दीक्षा ले रहे हैं। इन्होंने हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र के संगीतबद्धों गीतों में से एक गीत 'राहतें सारी' को संगीतबद्ध भी किया है। ये कोच्चि (केरल) के रहने वाले हैं। जब ये दसवीं में पढ़ रहे थे तभी से इनमें संगीतबद्ध करने का शौक जगा।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 2000 का नग़द पुरस्कार

गीत सुनें-




रफ़ीक़ शेख़

रफ़ीक़ शेख आवाज़ टीम की ओर से पिछले वर्ष के सर्वश्रेष्ठ गायक-संगीतकार घोषित किये जा चुके हैं। रफ़ीक ने दूसरे सत्र के संगीत मुकाबले में अपने कुल 3 गीत (सच बोलता है, आखिरी बार, जो शजर सूख गया है) दिये और तीनों के तीनों गीतों ने शीर्ष 10 में स्थान बनाया। रफ़ीक ने पिछले वर्ष अहमद फ़राज़ के मृत्यु के बाद श्रद्धाँजलि स्वरूप उनकी दो ग़ज़लें (तेरी बातें, ज़िदंगी से यही गिला है मुझे) को संगीतबद्ध किया था। गीतकास्ट प्रतियोगिता में ही रफ़ीक़ शेख़ ने निराला की कविता 'स्नेह निर्झर बह गया है' को संगीतबद्ध करके दूसरा स्थान बनाया था।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 2000 का नग़द पुरस्कार

गीत सुनें-


(संगीत संयोजन, मिक्सिंग और और रिकॉर्डिंग- अनिमेश श्रीवास्तव)



श्रीनिवास / शम्पक चक्रवर्ती

श्रीनिवास

शम्पक
संगीतकार श्रीनिवास पांडा बहुत ही मेहनती संगीतकार हैं। हर बार किसी नये गायक को अपने कम्पोजिशन से जोड़ते हैं और उसे एक बड़ा मंच देते हैं। इस बार भी इन्होंने शम्पक चक्रवर्ती नामक युवा गायक को हिन्द-युग्म से जोड़ा है। शम्पक कोलकाता से ताल्लुक रखते हैं। 24 वर्षीय शम्पक के संगीत का शौक रखते हैं। बचपन से ही गा रहे हैं और मानते हैं कि यह कला उन्हें ईश्वरीय वरदान के रूप में मिली है।

मूलरूप से तेलगू और उड़िया गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पांडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों हैदराबाद में हैं और अमेरिकन बैंक में कार्यरत हैं। गीतकास्ट में लगातार चार बार विजेता रह चुके हैं।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 2000 का नग़द पुरस्कार

गीत सुनें-


इनके अतिरिक्त हम प्रतीक खरे, प्रो॰ (डॉ॰) एन॰ पाण्डेय, मधुबाला श्रीवास्तव, शरद तैलंग, सुषमा श्रीवास्तव, ब्रजेश दाधीच इत्यादि के भी आभारी है, जिन्होंने इसमें भाग लेकर हमारा प्रोत्साहन किया और इस प्रतियोगिता को सफल बनाया। हमारा मानना है कि यदि आप इन महाकवियों की कविताओं को यथाशक्ति गाते हैं, पढ़ते हैं या संगीतबद्ध करते हैं तो आपका यह छोटा प्रयास एक सच्ची श्रद्धाँजलि बन जाता है और एक महाप्रयास के द्वार खोलता है।


इस कड़ी के प्रायोजक आयरलैंड के क्विन्स विश्वविद्यालय के शोधछात्र दीपक मशाल और उनके कुछ साथी हैं। यह हिन्द-युग्म का सौभाग्य है कि इस प्रतियोगिता के आयोजन में ऐसे ही हिन्दी प्रेमियों की वजह से इस प्रतियोगिता के आयोजन में कभी कोई बाधा नहीं आई।

Sunday, October 11, 2009

कलम, आज उनकी जय बोल कविता की संगीतमयी प्रस्तुति

गीतकास्ट प्रतियोगिता- परिणाम-5: कलम, आज उनकी जय बोल

मई 2009 में जब गीतकास्ट प्रतियोगिता की शुरूआत हुई थी, तब हमने आदित्य प्रकाश के साथ मिलकर इतना ही तय किया था कि हम छायावादी युगीन कवियों की कविताओं को संगीतबद्ध करने की प्रतियोगिता रखेंगे। आरम्भ की दो कड़ियों की सफलता के बाद हमने यह तय किया कि गीतकास्ट प्रतियोगिता में प्रमुख राष्ट्रकवियों की कविताओं को भी शामिल किया जाय। कमल किशोर सिंह जैसे सहयोगियों की मदद से हमने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता 'कलम, आज उनकी जय बोल' से गीतकास्ट प्रतियोगिता की 'राष्ट्रकवि शृंखला' की शुरूआत भी कर दी।

आज हम पाँचवीं गीतकास्ट प्रतियोगिता के परिणाम लेकर उपस्थित हैं। पिछले महीने राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती थी, इसलिए हमने उनके सम्मान में उनकी कविता को स्वरबद्ध करने की प्रतियोगिता रखी। इस प्रतियोगिता में कुल सात प्रतिभागियों ने भाग लिया। संख्या के हिसाब से यह प्रतिभागिता तो कम है, लेकिन गुणवत्ता के हिसाब से यह बहुत बढ़िया है। सजीव सारथी, अनुराग पाण्डेय, शैलेश भारतवासी और आदित्य प्रकाश ने निर्णायक की भूमिका निभाई और तीसरी बार श्रीनिवास पंडा की प्रविष्टि को ही प्रथम चुना है।

इस बार से इनाम की राशि रु 4000 से बढ़ाकर रु 7000 की गई है।

इससे पहले की हम प्रविष्टियों के बारे में बात करें, हम श्रीनिवास की तारीफ़ कर लेना चाहेंगे। श्रीनिवास के रूप हिन्दी साहित्य-जगत और संगीत-जगत को एक बड़ा सितारा मिला है। श्रीनिवास कविता के भावों को पकड‌़ते हैं, समझते हैं और उसी के हिसाब संगीत देते हैं और गायक चुनते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि श्रीनिवास निकट भविष्य में हिन्दी संगीत जगत को बहुत कुछ देंगे।


श्रीनिवास / प्रदीप सोमसुंदरन / निखिल आनंद गिरि
श्रीनिवास
प्रदीप
निखिल
संगीतकार श्रीनिवास पांडा ने इस बार एक स्टार गायक को इस आयोजन से जोड़ा है। उस गायक का नाम है प्रदीप सोमसुंदरन। जो लोग टीवी पर म्यूजिकल शो देखने के शौक़ीन हैं, उन्होंने भारतीय टेलीविजन पर पहले सांगैतिक आयोजन 'मेरी आवाज़ सुनो' को ज़रूर देखा होगा। प्रदीप सोमसुंदरन को इसी कार्यक्रम में सन 1996 में सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक चुना गया था और लता मंगेशकर सम्मान से सम्मानित किया गया था। 26 जनवरी 1967 को नेल्लूवया, नेल्लूर, केरल में जन्मे प्रदीप पेशे से इलेक्ट्रानिक के प्राध्यापक हैं। त्रिचुर की श्रीमती गीता रानी से 12 वर्ष की अवस्था में ही प्रदीप ने कर्नाटक-संगीत की शिक्षा लेना शुरू कर दी थी और 16 वर्ष की अवस्था में स्टेज-परफॉर्मेन्स देने लेगे थे। प्रदीप कनार्टक शास्त्रीय गायन के अतिरिक्त हिन्दी, मलयालम, तमिल, तेलगू, अंग्रेज़ी और जापानी आदि भाषाओं में ग़ज़लें और भजन गाते हैं। इन्होंने कई मलयालम फिल्मी गीतों में अपनी आवाज़ दी है। और गैर मलयालम फिल्मी तथा गैर हिन्दी फिल्मी गीतों में ये काफी चर्चित रहे हैं। वस्तुतः इनका परिचय और इनकी उपलब्धियाँ इतनी अधिक हैं कि यह परिणाम फिर केवल उन्हीं की चर्चा बनकर ही रह जायेगा। जो श्रोता प्रदीप के बारे में अधिक जानने को इच्छुक हैं वे प्रदीप के वीकिपीडिया पृष्ठ और इनकी निजी वेबसाइट देखें।

इस गीत में शुरूआती उद्‍घोष में आवाज़ हिन्द-युग्म के मशहूर वाहक निखिल आनंद गिरि की है। निखिल की आवाज़ के हिन्द-युग्म के सभी श्रोता कायल हैं। हमारे सभी ज़िंगलों में इनकी ही आवाज़ गूँजती है। मन से कवि हैं, लेकिन इन दिनों रोज़ी-रोटी के लिए ज़ी (यूपी) चैनल की नौकरी कर रहे हैं। हिन्द-युग्म के बैठक-मंच के संपादक है।

मूलरूप से तेलगू और उड़िया गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पांडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों हैदराबाद में हैं और अमेरिकन बैंक में कार्यरत हैं। गीतकास्ट में लगातार तीन बार विजेता रह चुके हैं।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 4000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।

गीत सुनें-


दूसरे स्थान के विजता एक बार फिर से कृष्ण राज कुमार हैं।


कृष्ण राज कुमार

कृष्ण राज कुमार एक मात्र ऐसे संगीतकार-गायक हैं, जिन्होंने पाँचों दफ़ा इस प्रतियोगिता में भाग लिया। और इन्होंने मात्र भाग ही नहीं लिया, बल्कि पाँचों बार हमारे निर्णायकों का ध्यान आकृष्ट किया। जयशंकर प्रसाद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' के लिए प्रथम पुरस्कार, सुमित्रा नंदन पंत की कविता 'प्रथम रश्मि' के लिए द्वितीय पुरस्कार, महादेवी वर्मा के लिए भी प्रथम पुरस्कार। निराला की कविता 'स्नेह निर्झर बह गया है' के लिए भी इनकी प्रविष्टि उल्लेखनीय थी। और इस बार द्वितीय पुरस्कार। कृष्ण राज कुमार जो मात्र 22 वर्ष के हैं, और जिन्होंने अभी-अभी अपने B.Tech की पढ़ाई पूरी की है, पिछले 14 सालों से कर्नाटक गायन की दीक्षा ले रहे हैं। इन्होंने हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र के संगीतबद्धों गीतों में से एक गीत 'राहतें सारी' को संगीतबद्ध भी किया है। ये कोच्चि (केरल) के रहने वाले हैं। जब ये दसवीं में पढ़ रहे थे तभी से इनमें संगीतबद्ध करने का शौक जगा।

पुरस्कार- द्वितीय पुरस्कार, रु 1500 का नग़द पुरस्कार

विशेष- डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।

गीत सुनें-



हमने इस बार तृतीय स्थान के किसी को भी विजेता न घोषित कर तीन प्रविष्टियों को रु 500- रु 500 के सांत्वना पुरस्कार दे रहे हैं।


सुकून बैंड
यह दो युवाओं सौरभ मल्होत्रा और भरत हंस का सांगैतिक बैंड है, इनमें बहुत जोश है। हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में इनसे बेहतर कम्पोजिशन मिलेंगे।

पुरस्कार- सांत्वना पुरस्कार, रु 500 का नग़द पुरस्कार

गीत सुनें-


शरद तैलंग

शरद तैलंग महादेवी वर्मा की कविता को संगीतबद्ध कर चुके हैं और तीसरे स्थान के विजेता रहे हैं। इस बार भी इनकी प्रविष्टि उल्लेखनीय रही।

पुरस्कार- सांत्वना पुरस्कार, रु 500 का नग़द पुरस्कार

गीत सुनें-


मधुबाला श्रीवास्तव

मधुबाला नई गायिका हैं। इनके बारे में अधिक जानकारी हमारे पास उपलब्ध नहीं है।

पुरस्कार- सांत्वना पुरस्कार, रु 500 का नग़द पुरस्कार

गीत सुनें-



इनके अतिरिक्त हम सखी सिंह और ब्रजेश दाधीच के भी आभारी है, जिन्होंने इसमें भाग लेकर हमारा प्रोत्साहन किया और इस प्रतियोगिता को सफल बनाया। हमारा मानना है कि यदि आप इन महाकवियों की कविताओं को यथाशक्ति गाते हैं, पढ़ते हैं या संगीतबद्ध करते हैं तो आपका यह छोटा प्रयास एक सच्ची श्रद्धाँजलि बन जाता है और एक महाप्रयास के द्वार खोलता है। हम निवेदन करेंगे कि आप इसी ऊर्जा के साथ गीतकास्ट के अन्य अंक में भी भाग लेते रहें।


इस कड़ी के प्रायोजक है रिवरहेड, न्यूयार्क के कमल किशोर सिंह हैं। पेशे से डॉक्टर हैं। हिन्दी तथा भोजपुरी में कविताएँ लिखते हैं। आवाज़ की गीतकास्ट प्रतियोगिता में हर बार ज़रूर भाग लेते हैं। यदि आप भी इस आयोजन को स्पॉनसर करता चाहते हैं तो hindyugm@gmail.com पर सम्पर्क करें।








Sunday, September 13, 2009

महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' का संगीतबद्ध रूप

गीतकास्ट प्रतियोगिता- परिणाम-4: जो तुम आ जाते एक बार

हर वर्ष 14 सितम्बर का दिन हिन्दी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। हिन्दी सेवी संस्थाएँ तरह-तरह के सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन करती हैं। सरकारी उपक्रम तो हिन्दी सप्ताह, हिन्दी पखवाड़ा व हिन्दी मास अभियान चलाने जैसी बातें करते हैं। लेकिन हम ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं। बल्कि इससे एक दिन पहले महीयसी महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' का संगीतबद्ध संस्करण जारी कर रहे हैं।

हिन्द-युग्म डॉट कॉम अपने आवाज़ मंच पर गीतकास्ट प्रतियोगिता के माध्यम से हिन्दी के स्तम्भ कवियों की एक-एक कविताओं को संगीतबद्ध/स्वरबद्ध करने की प्रतियोगिता आयोजित करता है। इसमें हमने शुरूआती शृंखला के तौर पर छायवादी युगीन कवियों की कविताओं को स्वरबद्ध करने की प्रतियोगिता रखी। जिसके अंतर्गत अब तक जयशंकर प्रसाद की कविता ' अरुण यह मधुमय देश हमारा', सुमित्रानंदन पंत की कविता 'प्रथम रश्मि' और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता 'स्नेह निर्झर बह गया है' को संगीतबद्ध किया जा चुका है। आज हम छायावादी युग की अंतिम कड़ी यानी महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' का परिणाम लेकर हाज़िर हैं।

जब हमें लगा कि कविता को स्वरबद्ध करना मुश्किल है, तब हमें बहुत अधिक प्रविष्टियाँ मिली। जबकि इस बार हमें महसूस हो रहा था कि महादेवी वर्मा की यह कविता बहुत आसानी से संगीतबद्ध हो जायेगी तो मात्र 10 प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया। लेकिन सजीव सारथी, अनुराग शर्मा, यूनुस खान, आदित्य प्रकाश और शैलेश भारतवासी सरीखे निर्णायकों ने कहा कि इस बार संगीत संयोजन, गायकी और उच्चारण के स्तर पर प्रविष्टियाँ पहले से कहीं बेहतर हैं। तब हमें बहुत संतोष भी मिला।

पाँच जजों द्वारा मिले औसत अंकों के आधार में हमने कृष्ण राज कुमार और श्रीनिवास पांडा/कुहू गुप्ता को संयुक्त विजेता घोषित करने का निर्णय लिया है। इस तरह से प्रथम स्थान के लिए निर्धारित रु 2000 और दूसरे स्थान के निर्धारित के लिए निर्धारित रु 1000 को जोड़कर आधी-आधी राशि इन दो विजेताओं (विजेता समूहों) को दी जायेगी।

आपको याद होगा की श्रीनिवास पांडा के संगीत-निर्देशन में बिस्वजीत नंदा द्वारा गायी गई निराला की कविता 'स्नेह निर्झर बह गया है' को भी पहला स्थान प्राप्त हुआ था। इस बार संगीतकार श्रीनिवास ने कुहू गुप्ता के रूप में बहुत ऊर्जावान गायिका हिन्द-युग्म को दिया है।


श्रीनिवास/कुहू

श्रीनिवास
कुहू
कुहू युग्म पर पहली बार शिरकत कर रही हैं। पुणे में रहने वाली कुहू गुप्ता पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। गायकी इनका जज्बा है। ये पिछले 5 वर्षों से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रही हैं। इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई गायन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लिया है और इनाम जीते हैं। इन्होंने ज़ी टीवी के प्रचलित कार्यक्रम 'सारेगामा' में भी 2 बार भाग लिया है। जहाँ तक गायकी का सवाल है तो इन्होंने कुछ व्यवसायिक प्रोजेक्ट भी किये हैं। वैसे ये अपनी संतुष्टि के लिए गाना ही अधिक पसंद करती हैं।

श्रीनिवास हिन्द-युग्म के लिए बिलकुल नये संगीतकार हैं। 'स्नेह-निर्झर बह गया है' के माध्यम से आवाज़ पर इन्होंने अपनी एंट्री की थी। मूलरूप से तेलगू और उड़िया गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पांडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों हैदराबाद में हैं और अमेरिकन बैंक में कार्यरत हैं।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 1500 का नग़द पुरस्कार

विशेष- अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।

गीत सुनें-
64kbps

128kbps



इसी स्थान पर कृष्ण राजकुमार की प्रविष्टि भी शामिल है।


कृष्ण राज कुमार

कृष्ण राज कुमार एक ऐसे गायक-संगीतकार हैं जिनके बारे में जानकर और सुनकर हर किसी को सलाम करने का मन करता है। गीतकास्ट प्रतियोगिता अभी तक 4 बार आयोजित हुई है, इन्होंने चारों दफा इसमें भाग लिया है और निर्णायकों का ध्यान आकृष्ट किया है। जयशंकर प्रसाद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' के लिए प्रथम पुरस्कार, सुमित्रा नंदन पंत की कविता 'प्रथम रश्मि' के लिए द्वितीय पुरस्कार और इस बार महादेवी वर्मा के लिए भी प्रथम पुरस्कार। निराला की कविता 'स्नेह निर्झर बह गया है' के लिए भी इनकी प्रविष्टि उल्लेखनीय थी। कृष्ण राज कुमार जो मात्र 22 वर्ष के हैं, और जिन्होंने अभी-अभी अपने B.Tech की पढ़ाई पूरी की है, पिछले 14 सालों से कर्नाटक गायन की दीक्षा ले रहे हैं। इन्होंने हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र के संगीतबद्धों गीतों में से एक गीत 'राहतें सारी' को संगीतबद्ध भी किया है। ये कोच्चि (केरल) के रहने वाले हैं। जब ये दसवीं में पढ़ रहे थे तभी से इनमें संगीतबद्ध करने का शौक जगा।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 1500 का नग़द पुरस्कार

विशेष- डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।

गीत सुनें-
64kbps

128kbps



तीसरे स्थान के विजेता आवाज़ के दैनिक श्रोता हैं। ओल्ड इज़ गोल्ड के गेस्ट-होस्ट रह चुके हैं। आवाज़ से ही कैरिऑके में अपनी आवाज़ डालना सीखे हैं और आज तीसरे स्थान के विजेता हैं। इस प्रविष्टि में संगीत इनका है और संगीत संयोजन इनके मित्र ब्रजेश दाधीच का। आवाज़ भी इन्हीं की है।


शरद तैलंग

शरद तैलंग सुगम संगीत के आकाशवाणी कलाकार, कवि, रंगकर्मी और राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के कार्यकारिणी सदस्य हैं। वे भारत विकास परिषद के अंतर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय सम्मेलन के सांस्कृतिक सचिव भी रह चुके हैं।

आप अनेक साहित्यिक व संगीत संस्थाओँ के सदस्य अथवा पदाधिकारी रह चुके है, अनेकों संगीत एवं नाट्य प्रतियोगिताओँ में निर्णायक रह चुके हैं तथा देश के केरल, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र प्रदेशों के अनेक शहरों में अपनी संगीत प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। आपकी रचनाएँ देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओँ जैसे धर्मयुग, हंस, मरु गुलशन, मरु चक्र, सौगात, राजस्थान पत्रिका, राष्ट्रदूत, माधुरी, दैनिक भास्कर आदि में प्रकाशित हो चुकी हैं।

ऑल इण्डिया आर्टिस्ट एसोसिएशन शिमला, जिला प्रशासन कोटा आई. एल. क्लब तथा अनेक संस्थानों द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका हैं। आप आवाज़ पर बहुचर्चित स्तम्भ 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के अतिथि-होस्ट रह चुके हैं।

पुरस्कार- तृतीय पुरस्कार, रु 1000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।

गीत सुनें-
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इनके अतिरिक्त हम रफ़ीक शेख, कमल किशोर सिंह, रमेश धुस्सा, अम्बरीष श्रीवास्तव, शारदा अरोरा, कमलप्रीत सिंह, और अर्चना चाओजी इत्यादि के भी आभारी है, जिन्होंने इसमें भाग लेकर हमारा प्रोत्साहन किया और इस प्रतियोगिता को सफल बनाया। हमारा मानना है कि यदि आप इन महाकवियों की कविताओं को यथाशक्ति गाते हैं, पढ़ते हैं या संगीतबद्ध करते हैं तो आपका यह छोटा प्रयास एक सच्ची श्रद्धाँजलि बन जाता है और एक महाप्रयास के द्वार खोलता है। हम निवेदन करेंगे कि आप इसी ऊर्जा के साथ गीतकास्ट के अन्य अंक में भी भाग लेते रहें।


इस कड़ी के प्रायोजक है डैलास, अमेरिका के अशोक कुमार हैं जो पिछले 30 सालों से अमेरिका में हैं, आई आई टी, दिल्ली के प्रोडक्ट हैं। डैलास, अमेरिका में भौतिकी के प्रोफेसर हैं, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति के आजीवन सदस्य हैं। और हिन्दी-सेवा के लिए डैलास में एक सक्रिय नाम हैं। यदि आप भी इस आयोजन को स्पॉनसर करता चाहते हैं तो hindyugm@gmail.com पर सम्पर्क करें।

Monday, August 10, 2009

स्नेह निर्झर बह गया है कुछ यूँ संगीतबद्ध हुआ

गीतकास्ट प्रतियोगिता- परिणाम-3: स्नेह-निर्झर बह गया है

देखते-देखते आज वह समय भी आ गया, जब हम गीतकास्ट प्रतियोगिता के तीसरे अंक के परिणाम प्रकाशीत व प्रसारित कर रहे हैं। मई महीने में शुरू हुई इस प्रतियोगिता का एक मात्र उद्देश्य यही था कि हिन्दी कविता के प्रतिमानों या यूँ कह लें आधार-स्तम्भों को संगीत से जोड़ा जाये ताकि नई पीड़ी भी उन्हें गुनगुना सके और अपने मन के आँगन में एक स्थान दे सके। इस प्रतियोगिता की शुरूआती दो कड़ियाँ 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' और 'प्रथम रश्मि' बहुत सफल रहीं। श्रोताओं ने बहुत पसंद किया। प्रतिभागिता बढ़ी। उसी का फल है कि तीसरे अंक में जब हमने निराला की एक मुश्किल कविता 'स्नेह-निर्झर बह गया है' चुना तो भी इसमें 18 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। हमने तीसरे अंक के लिए प्रविष्टि जमा करने की आखिरी तिथि रखी थी 31 जुलाई 2009। 30 जुलाई तक हमें मात्र 1 प्रविष्टि मिली थी, लेकिन 31 तारीख को यह बढ़कर 18 हो गईं।

कविता मुश्किल तो थी ही, लेकिन हम पिछले 3 अंकों से एक और परेशानी का सामना कर रहे हैं, वह यह कि अलग-अलग प्रकाशन की पुस्तक में कविता की पंक्तियों का अलग-अलग होना। 'स्नेह-निर्झर बह गया है' गीत के दूसरे अंतरे में लोकभारती प्रकाशन, इलहाबाद द्वारा प्रकाशित और रामविलास शर्मा द्वारा संपादित पुस्तक 'राग-विराग' में शब्द है 'प्रतिभा', तो वहीं वाणी प्रकाशन, दिल्ली से छपी 'निराला संचयिता' में शब्द है 'प्रभा'। गायन में भी उच्चारण की गलतियाँ हुईं, वह शायद इसलिए क्योंकि संस्कृठनिष्ठ शब्दों को सुर पर बिठाना ख़ासा मुश्किल काम है।

फिर भी पाँच जजों ने गीत में गायकी, संगीत, संगीत संयोजन, उच्चारण और प्रस्तुतिकरण जैसे मापदंडों पर इन्हें परखकर सभी के सकारात्मक पक्ष को सराहा। इस बार निर्णायकों में सजीव सारथी, अनुराग शर्मा, यूनुस खान, आदित्य प्रकाश और शैलेश भारतवासी सम्मिलित थे। इनके द्वारा दी गई प्रतिक्रियाओं के आधार पर श्रीनिवास पांडा द्वारा संगीतबद्ध और बिस्वजीत नंदा द्वारा गाई हुई प्रविष्टि प्रथम स्थान पर रखी गई है। यद्यपि गायक ने उच्चारण की कई गलतियाँ की हैं, फिर भी संगीत इतना अनुकूल है कि मन को मोह लेता है।


बिस्वजीत/श्रीनिवास

श्रीनिवास
बिस्वजीत
बिस्वजीत युग्म पर पिछले 1 साल से सक्रिय हैं। हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र में इनके 5 गीत (जीत के गीत, मेरे सरकार, ओ साहिबा, रूबरू और वन अर्थ-हमारी एक सभ्यता) ज़ारी हो चुके हैं। ओडिसा की मिट्टी में जन्मे बिस्वजीत शौकिया तौर पर गाने में दिलचस्पी रखते हैं। वर्तमान में लंदन (यूके) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी कर रहे हैं। इनका एक और गीत जो माँ को समर्पित है, उसे हमने विश्व माँ दिवस पर रीलिज किया था।

श्रीनिवास हिन्द-युग्म के लिए बिलकुल नये संगीतकार हैं, आज हम इनकी पहली प्रस्तुति जारी कर रहे हैं। मूलरूप से तेलगू और उड़िया गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पांडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों हैदराबाद में हैं और अमेरिकन बैंक में कार्यरत हैं।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 2000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
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दूसरे स्थान के विजेता भी एक दिग्गज हैं।


रफ़ीक़ शेख

रफ़ीक़ शेख आवाज़ टीम की ओर से पिछले वर्ष के सर्वश्रेष्ठ गायक-संगीतकार घोषित किये जा चुके हैं। रफ़ीक ने दूसरे सत्र के संगीत मुकाबले में अपने कुल 3 गीत (सच बोलता है, आखिरी बार, जो शजर सूख गया है) दिये और तीनों के तीनों गीतों ने शीर्ष 10 में स्थान बनाया। रफ़ीक ने पिछले वर्ष अहमद फ़राज़ के मृत्यु के बाद श्रद्धाँजलि स्वरूप उनकी दो ग़ज़लें (तेरी बातें, ज़िदंगी से यही गिला है मुझे) को संगीतबद्ध किया था।

पुरस्कार- द्वितीय पुरस्कार, रु 1000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
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तीसरे स्थान के विजेता बॉलीवुड के गायक हैं।


अभिजीत घोषाल

अभिजीत घोषाल बॉलीवुड के उभरते हुए गायक हैं। अभिजीत को सारेगामा में लगातार 11 बार जीतने का और स्वेच्छा से पुरस्कार छोड़ देने का श्रेय प्राप्त हैं। इलाहाबाद से पढ़े-लिखे, पले-बढ़े अभिजीत स्कूल के दिनों में पढ़ने में चेम्पियन थे, बैंक में मैनेजरी भी की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की जैव विज्ञान शाखा के गोल्ड-मेडलिस्ट रहे। इनकी माँ को केंसर हो जाने के बाद ये इलाज हेतु उन्हें लेकर मुम्बई आ गये और मायानगरी के होकर रह गये। अभी हाल में इनका एक गीत 'झूमो रे झूमो' रीलिज हुआ जो फिल्म 'किसान' का हिस्सा है और डब्बू मल्लिक ने संगीत दिया है। गायक पं॰ अजॉय चक्रवर्ती से बहुत अधिक प्रभावित अभिजीत को मन्ना डे, मो॰ रफी, हरिहरन, सोनू निगम इत्यादि की गायन शैली पसंद है। अभिजीत को वियेना, ऑस्ट्रिया में हुए फेल्ड्करिच इंटरनेशनल संगीत महोत्वसव में दुनिया भर के संगीतकारों के साथ अपना हुनर दिखाने का मौका मिल चुका है। अभिजीत जिंगल-निर्माण से भी जुड़े रहे हैं, जैसे- 'गरमी अलविदा' (शाहरुख खान-नवरत्न ठंडा कूल-कूल), लुइज़ बैंक्स द्वारा संगीतबद्ध मध्य प्रदेश स्वर्ण जयंती वर्ष में, शान्तनु मोएत्रा द्वारा संगीतबद्ध बांग्लादेश के एकटेल मोबाइल के लिए और कैड्बरीज के लिए इत्यादि। इनके कुछ सोलो एल्बम भी आ चुके हैं; एचएमबी द्वारा प्रदर्शित बांग्ला-एल्बम 'ई प्रोथोम अभिजीत' , म्यूजिक टुडे द्वारा प्रदर्शित 'नीमराना'। प्रस्तुत प्रस्तुति में इनकी आवाज़ मन मोहने में कोई कसर नहीं छोड़ती।

पुरस्कार- तृतीय पुरस्कार, रु 1000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
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इन तीनों के अतिरिक्त भी अन्य 4 प्रविष्टियों ने हमारे जजों का ख़ास ध्यान खींचा। एक जज को पारुल ही प्रविष्टि सर्वश्रेषठ लगी तो वहीं एक को कृष्ण राज कुमार की। रुपेश ऋषि के आवाज़ की तारीफ़ लगभग सभी निर्णायकों ने की। गिरीजेश कुमार से कम ही जज इस बार संतुष्ट दिखे क्योंकि उनकी पिछली प्रस्तुति के बाद उनसे उम्मीदें बढ़ गई थीं।


पारुल पुखराज


रुपेश ऋषि


कृष्ण राज कुमार


गिरीजेश कुमार



इनके अतिरिक्त हम कमल किशोर सिंह, रमेश धुस्सा, मनोहर लेले, देवेन्द्र अरोरा, शरद तैलंग, तरुण कुमार, आशुतोष-अभिषेक, नील श्रीवास्तव, अम्बरीष श्रीवास्तव, कवि मुक्तेश्वर बख्श श्रीवास्तव, अभिनव वाजपेयी इत्यादि के भी आभारी है, जिन्होंने इसमें भाग लेकर हमारा प्रोत्साहन किया और इस प्रतियोगिता को सफल बनाया। हमारा मानना है कि यदि आप इन महाकवियों की कविताओं को यथाशक्ति गाते हैं, पढ़ते हैं या संगीतबद्ध करते हैं तो आपका यह छोटा प्रयास एक सच्ची श्रद्धाँजलि बन जाता है और एक महाप्रयास के द्वार खोलता है। हम निवेदन करेंगे कि आप इसी ऊर्जा के साथ गीतकास्ट के अन्य अंक में भी भाग लेते रहें।


इस कड़ी के प्रायोजक हैं डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह, जो पिछले 30 वर्षों से मानचेस्टर, यूके में प्रवास कर रहे हैं। कवि हृदयी, कविता-मर्मज्ञ और साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाले- ये सभी इनके विशेषण हैं। यदि आप भी इस आयोजन को स्पॉनसर करता चाहते हैं तो hindyugm@gmail.com पर सम्पर्क करें।

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