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Saturday, December 26, 2015

2015 के कमचर्चित सुरीले गीतों की हिट परेड - The Unsung Melodies of 2015



चित्रशाला - नववर्ष विशेष 

2015 के कमचर्चित सुरीले गीतों की हिट परेड

The Unsung Melodies of 2015





रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार! प्रस्तुत है फ़िल्म और फ़िल्म-संगीत के विभिन्न पहलुओं से जुड़े विषयों पर आधारित शोधालेखों का स्तंभ ’चित्रशाला’। वर्ष 2015 हमसे विदा लेना चाहता है। और इसी वर्ष के समाप्त होने से इस दशक का पूर्वार्ध भी समाप्त हो जाएगा। इस दशक में फ़िल्म संगीत का जो स्वरूप अब अक हम सबसे देखा, उससे यही कहा जा सकता है कि वही गाने हिट हो रहे हैं, या उन्हीं गानों को बढ़ावा मिल रहा है जिनमें कोई पंच लाइन, या आइटम वाली बात, और इस तरह का कोई मसाला हो। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कुछ ऐसे गुमनाम गीत आए जिनकी तरफ़ किसी का भी ध्यान नहीं गया, पर स्तर की दृष्टि से ये गीत बहुत से लोकप्रिय और हिट गीतों के मुकाबले कहीं अधिक उत्कृष्ट हैं। ऐसे ही दस गीत को चुन कर आज के ’चित्रशाला’ का यह नववर्ष विशेषांक प्रस्तुत कर रहे हैं। तो पेश है वर्ष 2015 का कमचर्चित हिट परेड, The Top-10 Unsung Melodies of 2015.


10: "साईं बाबा के दरबार आ शीष झुका ले" (साईं महिमा)

एक समय था जब सामाजिक फ़िल्मों के साथ-साथ पौराणिक व धार्मिक फ़िल्मों का जौनर भी काफ़ी लोकप्रिय हुआ करता था। भले ऐसे फ़िल्मों को ज़्यादा व्यावसायिक सफलता ना मिला करता हो, पर इन फ़िल्मों का अलग दर्शक-समूह होता है, सिनेमाघरों में ये फ़िल्में लगती थीं। धीरे-धीरे धार्मिक फ़िल्मों का जौनर लगभग समाप्त हो चुका है, बस इक्का-दुक्का फ़िल्में आ जाती हैं कभी कभार। और जहाँ तक भक्ति रचनाओं का सवाल है, तो सूफ़ी श्रेणी की कुछ भक्तिमूलक क़व्वालियाँ ज़रूर फ़िल्मों में सुनने को मिल जाती हैं आजकल। वर्ष 2015 में ’साईं महिमा’ और ’गौड़ हरि दर्शन’ नामक दो फ़िल्में बनी हैं, पर ये फ़िल्में कब आईं कब गईं कुछ पता नहीं चला। ना किसी सिनेमाघर में ये फ़िल्में लगीं और ना इनके गीत रेडियो पर सुनने को मिले। बस यू-ट्युब पर निर्माता ने अपलोड कर दिए हैं। तो लीजिए प्रस्तुत है ’2015 कमचर्चित हिट परेड’ के पायदान नंबर 10 पर फ़िल्म ’साईं महिमा’ की एक भक्ति रचना, जिसे हिमांशु शर्मा ने गाया और स्वरबद्ध किया है, और इसे लिखा है प्रदीप शर्मा ने।




9: "सज के चली है भारत माँ" (जय जवान जय किसान)

जावेद अली
भक्ति रचनाओं की तरह देशभक्ति रचनाओं का भी अकाल पड़ चुका है हिन्दी फ़िल्म- संगीत संसार में। इस सूखे संसार को हरा-भरा करने हेतु मदन लाल खुराना, सीमा चक्रवर्ती और पंकज दुआ जैसे निर्माता सामने आए और बनाई ’जय जवान जय किसान’। ओम पुरी, प्रेम चोपड़ा, रति अग्निहोत्री जैसे वरिष्ठ अभिनेता भी इस फ़िल्म को नहीं बचा सके। संगीतकार रूपेश गिरिश का संगीत भी अनसुना रह गया। इस फ़िल्म के जिस गीत को हमने इस हिट परेड के पायदान नंबर 9 के लिए चुना है, उसकी ख़ास बात यह है कि यह आपको मनोज कुमार की बहुचर्चित देशभक्ति फ़िल्म ’पूरब और पश्चिम’ के मशहूर गीत "बहन चली, दुल्हन चली, तीन रंग की चोली" की याद दिला जाएगी। किशन पालिवाल के लिखे और जावेद अली की आवाज़ में इस गीत के बोलों "देश प्रेम के गहनों से सज के चली है भारत माँ" की समानता ’पूरब और पश्चिम’ के उस गीत से देखी जा सकती है। कुल मिला कर यह एक कर्णप्रिय रचना है, कम से कम वाद्यों का प्रयोग हुआ है और उससे भी बड़ी बात यह कि किसी कृत्रिम यांत्रिक संगीत का बोलबाला नहीं है इस गीत में।




8: "माँ सुन ले ज़रा " (Take it Easy)

सोनू निगम
भारत माँ के बाद अब एक और माँ के लिए एक बेटे के दिल की पुकार पेश है। धार्मिक और देशभक्ति फ़िल्मों के बाद अब जिस जौनर की हम बात करने जा रहे हैं, वह है बाल फ़िल्मों की, और इस जौनर की भी क्या दशा, ज़्यादा कुछ कहने की आवश्यक्ता नहीं है। ’तारे ज़मीन पर’ जैसी फ़िल्में रोज़ नहीं बनती। 2015 में एक बाल-फ़िल्म आई ’Take it Easy'। इसमें मुख्य चरित्रों में दो दस वर्षीय बालक हैं। एक के पिता खिलाड़ी है और वो चाहते हैं कि उनका बेटा उनकी तरह खिलाड़ी बने जबकि बेटे को पढ़ाई-लिखाई में ज़्यादा रुचि है। दूसरी तरफ़ दूसरे लड़के की कहानी बिल्कुल विपरीत है। उसके माता-पिता अपने सपनों को उस पर थोपना चाहते हैं जबकि बेटे को कुछ और ही करना है। ऐसे में बेटा क्या करे! इस परिदृश्य में प्रस्तुत गीत सार्थक है जिसमें बेटा माँ से कह रहा है कि "दिल पे उम्मीदों का बोझ, कुछ माँगे हर कोई रोज़, हँसी मेरी कहीं छुप गई, कहानी कहीं रुक गई, माँ सुन ले ज़रा, कहता है क्या यह दिल मेरा"। सोनू निगम की आवाज़ ने गीत को काफ़ी असरदार बना दिया है। सुनिल प्रेम व्यास, सुशान्त पवार और अमोल पावले के लिखे इस गीत को संगीत से संवारा है सुशान्त-किशोर ने।




7: "इश्क़ फ़ोबिया" (युवा)

इरफ़ान
जसबीर भट्टी लिखित व निर्देशित फ़िल्म ’युवा’ भी बॉक्स ऑफ़िस पर पिट गई। लेकिन इसके गीतों में दम ज़रूर था। फ़िल्म में संगीत देने के लिए चार संगीतकार लिए गए। यह आजकल फ़िल्मों में एकाधिक संगीतकार का ट्रेन्ड चल रहा है, और यह फ़िल्म व्यतिक्रम नहीं। राशिद ख़ाँ, पलक मुछाल, हनीफ़ शेख और प्रवीण-मनोज इस फ़िल्म के संगीतकार हैं और भूपेन्द्र शर्मा ने गीत लिखे हैं। फ़िल्म के तमाम गीतों में एक गीत है मोहम्मद इरफ़ान का गाया हुआ जिसने हमारा ध्यान आकर्षित किया। ये वही इरफ़ान हैं जिन्होंने ’जो जीता वो ही सुपरस्टार’ का ख़िताब जीता था और ’अमूल स्टार वॉयस ऑफ़ इण्डिया’ और ’सा रे गा मा पा’ के जानेमाने प्रतियोगी रहे। मेलडी, रोमान्स और सुफ़ियाना अंदाज़, कुल मिलाकर इस गीत को अच्छी तरह से स्वरबद्ध किया गया है, पर सबसे अच्छी बात है इसके अंतरों के बोल। गीत फ़िल्म में दो बार है, एक बार इरफ़ान की एकल आवाज़ में और एक बार पलक मुछाल और भानु प्रताप की युगल आवाज़ों में।



6: "एक हथेली तेरी हो, एक हथेली मेरी हो" (इश्क़ के परिन्दे)

केका घोषाल
पिछले दौर के गायकों में अगर कोई गायक आज टिका हुआ है तो वो हैं सोनू निगम। आजे के नवोदित गायकों की भीड़ में सोनू निगम आज भी अपने आप को एक अलग मुकाम पर बनाये रखा है और हर साल उनके कुछ अच्छे गीत सुनने को मिलते हैं। केका घोषाल के साथ सोनू निगम के इस युगल गीत के बोल और संगीत दोनों बहुत सुरीले हैं और एक कर्णप्रिय गीत की जितनी विशेषताएँ होती हैं, वो सब मौजूद हैं। हालाँकि इस गीत की धुन में ज़्यादा नई बात नहीं है और इस तरह की धुन पहले भी सुनाई दी है कई बार, पर एक ताज़गी ज़रूर है जिसकी वजह से इस गीत को सुनना अच्छा लगता है। इस गीत में पारम्परिक और समकालीन वाद्यों का संगम सुनने को मिलता है। एक तरफ़ बाँसुरी है तो दूसरी तरफ़ है गिटार। कई लोगों ने यह धारणा बना ली है कि केका घोषाल गायिका श्रेया घोषाल की बहन है, पर यह तथ्य ग़लत है। इन दोनों का कोई रिश्ता नहीं है संगीत के अलावा। केका घोषाल भी ’सा रे गा मा पा’ से रोशनी में आईं हैं। लीजिए इस गीत सुनिए, पर उससे पहले आपको यह बता दें कि इस गीत का एक सैड वर्ज़न भी है सोनू निगम की आवाज़ में और एक और रीमिक्स वर्ज़न है विजय वर्मा और सुप्रिया पाठक की आवाज़ों में।



5: "हमारी अधुरी कहानी" (हमारी अधुरी कहानी)

अरिजीत सिंह
कुछ अभिनेताओं के साथ ऐसा अक्सर हुआ है कि उनकी फ़िल्मों के गानें हमेशा अच्छे हुए हैं। उदाहरण के तौर पर पुराने समय में शम्मी कपूर और राजेश खन्ना की सभी फ़िल्मों के गाने हिट हुआ करते थे चाहे फ़िल्म चले ना चले। आगे चलकर सलमान ख़ान की फ़िल्मों के गाने हिट होते रहते थे। और इस दौर की अगर हम बात करें तो इमरान हाश्मी एक ऐसे अभिनेता हैं जिनकी फ़िल्मों का संगीत ख़ूब चला। 2015 में इमरान हाश्मी और विद्या बालन अभिनीत एक फ़िल्म आई ’हमारी अधुरी कहानी’। फ़िल्म का शीर्षक इमरान हाश्मी अभिनीत फ़िल्म ’गैंगस्टर’ के एक गीत "भीगी भीगी सी है रातें भीगी भीगी" के मुखड़े के अन्तिम तीन शब्द ही हैं। ’हमारी अधुरी कहानी’ मोहित सुरी निर्देशित फ़िल्म है, इसलिए इस फ़िल्म के गीत-संगीत से लोगों को उम्मीदें थीं, मोहित सुरी को अच्छे संगीत की परख जो है। फ़िल्म तो नहीं चली पर इसके गीत-संगीत ने निराश नहीं किया। फ़िल्म के कुल पाँच गीतों के हर गीत में कुछ ना कुछ ख़ास बात है। ’कमचर्चित हिट परेड’ के पायदान नंबर 5 के लिए हमने इस फ़िल्म का शीर्षक गीत ही चुना है जिसे अरिजीत सिंह ने गाया है। रश्मी विराग के लिखे और जीत गांगुली द्वारा स्वरबद्ध इस गीत का स्तर आजे के दौर के आम गीतों से काफ़ी उपर है। प्रेम और विरह के भावों को व्यक्त करता यह गीत सुनने वाले के मन पर असर ज़रूर करता है। और एक बार सुनने के बाद लूप में सुनने का मन होता है। कम से कम साज़ों का इस्तमाल, सुरीली धुन, मनमोहक गायकी, असरदार बोल, कुल मिलाकर यह भावुक गीत इस ऐल्बम का श्रेष्ठ गीत है।





4: "तू, मेरे सारे इम्तिहानों के जवाब तू" (दम लगाके ह‍इशा)


अनु और सानू
वर्ष 2015 हिन्दी सिने संगीत के लिए एक उल्लेखनीय वर्ष माना जा सकता है क्योंकि इस वर्ष पुनरागमन हुआ तीन कलाकारों का जिन्होंने 90 के दशक में काफ़ी धूम मचाई थी। ये हैं संगीतकार अनु मलिक, गायक कुमार सानू और गायिका साधना सरगम। जी हाँ, ’दम लगाके ह‍इशा’ फ़िल्म में अनु मलिक ने 90 के उसी सुरीले रोमान्टिक दौर को वापस लाने की कोशिश की है, और इसमें वो कामयाब भी रहे हैं। इस फ़िल्म में कुल छह गीत हैं जिनमें कुमार सानू का एकल गीत "तू..." और कुमार-सानू-साधना सरगम के युगल गीत "दर्द करारा" ख़ास उल्लेखनीय हैं। ख़ास कर "तू..." तो शायद पिछले दस वर्षों के तमाम श्रेष्ठ रोमान्टिक गीतों में से एक है। और ऐसे गीतों के लिए ही तो कुमार सानू जाने जाते रहे हैं। इस गीत में हमें निराश नहीं करते और इस गीत को सुनते हुए हम उसी 90 के दशक में पहुँच जाते हैं। किसी को अपने स्कूल या कॉलेज के दिन याद आते हैं, तो किसी को अपने दफ़्तर-जीवन के दिन। निस्संदेह यह गीत इस ऐल्बम का श्रेष्ठ गीत है। इसके बारे में ज़्यादा कुछ कहने की आवश्यक्ता नहीं, बस सुनिए...



3: "भोर भयी और कोयल जागे" (बेज़ुबान इश्क़)

ओस्मान मीर
कुछ गीत आज ऐसे भी बन रहे हैं जिहें सुनते हुए मन में यह उम्मीद जागती है कि शायद सुरीले और अच्छे गीतों का दौर अभी समाप्त नहीं हुआ है। इस हिट परेड के तीसरे पायदान के लिए हमने जो गीत चुना है वह है ’बेज़ुबान इश्क़’ फ़िल्म का "भोर भयी और कोयल जागे"। जी नहीं, इस गीत का ’सत्यम शिवम सुन्दरम्’ के "भोर भयी पनघट पे" के साथ कोई समानता नहीं है। इसे राजस्थानी लोक गायक ओस्मान मीर ने गाया है। ओस्मान मीर के लोक गीत लोकप्रिय रहे हैं। प्राकृतिक सुन्दरता को दर्शाता यह गीत भी उतना ही सुन्दर है। राजस्थान की मिट्टी की ख़ुशबू लिए यह गीत ना केवल एक लोक गीत है बल्कि इसमें भक्ति रस का भी एक पुट है। फ़िल्म की नायिका स्नेहा उल्लाल के एन्ट्री सॉंग् के रूप में इस गीत को रखा गया है। स्नेहा ने इसमें एक श्रद्धालु का चरित्र निभाया है। इस गीत में प्रस्तुत ध्वनियाँ और वाद्य तरंगें इतने कर्णप्रिय हैं कि सुबह सुबह सुन कर मन-मस्तिष्क पवित्रा हो जाता है। बाँसुरी, घण्टियों और शंख की ध्वनियों से गीत की आध्यात्मिक्ता और भी निखर कर सामने आई है। ’बेज़ुबान इश्क़’ फ़िल्म के अन्य गीत भी सुनने लायक है, पर प्रस्तुत गीत सबसे ज़्यादा ख़ास है। रूपेश वर्मा के संगीत निर्देशन में इस गीत को लिखा है यशवन्त गंगानी ने।



2: "आजा मेरी जान" (I Love NY)

पंचम
'2015 कमचर्चित हिट परेड’ के शीर्ष के दो गीत ऐसे हैं जिनसे सीधे सीधे जुड़े हैं फ़िल्म-संगीत संसार के दो दिग्गज, दो स्तंभ, दो किंवदन्ती, जिनकी तारीफ़ में कुछ कहना सूरज को दीया दिखाना है। इनमें जो पहला नाम है, उन्हीं का स्वरबद्ध गीत है इस हिट परेड के दूसरे पायदान का गीत। और ये शख़्स हैं राहुल देव बर्मन, हमारे पंचम दा। आश्चर्य हो रहा है आपको? आपको याद होगा 1993 में एक फ़िल्म आई थी ’आजा मेरी जान’, जिसमें अमर-उत्पल का संगीत था। इसमें गुल्शन कुमार ने अपने भाई कृषण कुमार को लौन्च करने के लिए एक गीत राहुल देव बर्मन के कम्पोज़िशन का भी रखा था। उन्हीं दिनों अनुराधा पौडवाल चाहती थीं कि पंचम उनके गाये आठ गीतों के एक ऐल्बम के लिए संगीत तैयार करे। और उन्हीं गीतों में से एक गीत था "आजा मेरी जान", जिसे गुल्शन कुमार ने फ़िल्म ’आजा मेरी जान’ में इस्तमाल किया। इसे अनुराधा पौडवाल और एस. पी. बालसुब्रह्मण्यम ने गाया था। पर इसे फ़िल्म के साउण्डट्रैक में नहीं रखा गया और जो ऐल्बम लोगों के हाथ आया उसमें केवल अमर-उत्पल के स्वरबद्ध गीत ही थे। इस तरह से पंचम का यह गीत गुमनाम ही रह गया (हालाँकि बांगला में पंचम की आवाज़ में इस धुन पर आधारित गीत काफ़ी लोकप्रिय रहा)। 2015 की फ़िल्म ’I Love NY' में इस गीत को DJ फुकन ने बड़ी ख़ूबसूरती से अरेंज कर मौली दवे से गवाया है। गीत के बोल लिखे हैं मयुर पुरी ने। मौली की थोड़ी कर्कश (husky) आवाज़ ने गीत में एक कामुक पुट जोड़ा है। आर. डी. बर्मन के नाम इस हिट परेड का दूसरा पायदान!



1: "जीना क्या है जाना मैंने" (Dunno Y2 - Life is a Moment)

लता मंगेशकर
अभी हमने दो दिग्गज कलाकारों का उल्लेख किया था, जिनमें एक हैं राहुल देव बर्मन, जिनका गीत अभी हमने सुना। दूसरी किंवदन्ती हैं स्वर-साम्राज्ञी, भारतरत्न लता मंगेशकर। यह किसी विस्मय, किसी आश्चर्य से कम नहीं कि 86 वर्ष की आयु में लता जी ने किसी फ़िल्म में गीत गाया है, वर्ष 2015 के हिट परेड में लता जी का गाया गीत शामिल हो रहा है। 1945 में लता जी ने ’बड़ी माँ’ फ़िल्म में "माता तेरी चरणों में" गीत गाया था, और उससे 70 वर्ष बाद भी उनका गाया नया गीत रिलीज़ हो रहा है। वर्ष 2010 में 'Dunno Y - Na Jaane Kyun' फ़िल्म का शीर्षक गाने के बाद जब 2015 में इस फ़िल्म का सीकुइल बना ’'Dunno Y - Life is a Moment' के शीर्षक से, तब संगीतकार निखिल कामत ने इसमें भी लता जी से गीत गवाने की इच्छा व्यक्त की। गीत लिखा है विमल कश्यप ने। इसी फ़िल्म में सलमा आग़ा ने भी एक गीत गाया है पर उस गीत को सुन कर ऐसा लगता है कि सलमा आग़ा के स्तर की गायिका के लिए यह गीत ज़रा हल्का हो गया है। ख़ैर, हम लता जी के गीत की बात कर रहे थे। आप सुनिए यह गीत और इस हिट परेड को समाप्त करने की मुझे दीजिए अनुमति। नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ मैं, सुजॉय चटर्जी, प्रस्तुति सहायक कृष्णमोहन मिश्र के साथ आपसे विदा लेता हूँ, नमस्कार!




तो यह थी नववर्ष की हमारी विशेष प्रस्तुति। आशा है आपको हमारी यह कोशिश पसन्द आई होगी। अपनी राय टिप्पणी में ज़रूर लिखें। चलते चलते हाप सभी को नववर्ष की एक बार फिर से शुभकामनाएँ देते हुए विदा लेता हूँ, नमस्कार।



प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी
प्रस्तुति सहयोग : कृष्णमोहन मिश्र

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