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शनिवार, 29 सितंबर 2012

सिने पहेली # 39 - भगत सिंह विशेष

सिने-पहेली # 39 

(29 सितंबर, 2012) 

'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी पाठकों और श्रोताओं को सुजॉय चटर्जी का सप्रेम नमस्कार, और स्वागत है आप सभी का आपके मनपसंद स्तंभ 'सिने पहेली' में। दोस्तों, कल 28 सितंबर स्वरसाम्राज्ञी लता मंगेशकर का जनमदिन था, यह तो आप सभी ने याद रखा होगा। हमने भी 'सिने पहेली' में पिछले सप्ताह उनके गाये गीतों पर अपनी पहेली को केन्द्रित किया। पर क्या आपको पता है कि 28 सितंबर को शहीदे आज़म सरदार भगत सिंह की भी जयन्ती होती है। बहुत ही अफ़सोस की बात है कि बहुत कम लोगों को इस बात का पता है। आज के इस 'सिने पहेली' की शुरूआत हम शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजली अर्पित करते हुए कर रहे हैं।


और अब 'सिने पहेली' संबंधित कुछ ज़रूरी बातें। इस प्रतियोगिता के जवाब ई-मेल द्वारा प्राप्त किए जाने की वजह से कुछ प्रतियोगियों ने इसकी पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगाया है। जो प्रतियोगी भाग लेते हैं, उनके शारीरिक अस्तित्व को लेकर भी संदेह व्यक्त हुआ है। हालाँकि 'सिने पहेली' के प्रस्तुतकर्ता इसमें ख़ास कुछ कर नहीं सकते, पर आप सभी खिलाड़ियों से अनुरोध ज़रूर कर सकते हैं कि आप 'रेडियो प्लेबैक इंडिया' के फ़ेसबूक पेज से जुड़ें (Link: https://www.facebook.com/radioplaybackindia), ताकि आपके प्रोफ़ाइल की जाँच हो जाये और आप फ़ेसबूक पर 'रेडियो प्लेबैक इंडिया' से भी जुड़ जायें। जो प्रतियोगी फ़ेसबूक में हमसे जुड़ना नहीं चाहते, और अपना परिचय गुप्त रखना चाहते हैं, उनसे निवेदन है कि 'सिने पहेली' के ईमेल पते पर अपना फ़ोन नंबर लिख भेजें। हम SMS के द्वारा आपके परिचय की जाँच कर लेंगे। आपका फ़ोन नंबर गुप्त रहेगा। कृपया 'सिने पहेली' का अगला सेगमेण्ट शुरू होने से पहले इन दोनों तरीकों में से जो तरीका आपको पसंद हो, उस पर अमल करें।

आशा भोसले पर केन्द्रित 'सिने पहेली' में फ़िल्म 'काग़ज़ की नाव' का एक गीत शामिल किया गया था "न जैयो सौतन घर सैयां"। हमारे एक प्रतियोगी ने आश्चर्य व्यक्त किया है कि चार-चार खिलाड़ियों ने कैसे इतने मुश्किल गीत को पहचान लिया जबकि यह गीत कहीं पर उपलब्ध नहीं है। इस प्रश्न के जवाब के लिए मैं दायित्व देना चाहूंगा हमारे वरिष्ठ साथी कृष्णमोहन मिश्र जी को क्योंकि यह गीत उन्हीं का सुझाया हुआ था और उन्होंने ही इस गीत का ऑडियो मुझे उपलब्ध करवाया था। जिन प्रतियोगियों ने इसका सही जवाब भेजा था, उनसे भी निवेदन है कि टिप्पणी में लिखें कि इस गीत को उन्होंने कैसे पहचाना?

चलिए बातें बहुत हुईं, अब हम अपने नये प्रतियोगियों के लिए बताते हैं 'सिने पहेली महाविजेता' बनने के आसान से नियम...


कैसे बना जाए 'सिने पहेली महाविजेता?

1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स।

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जुड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेताओं के रूप में चुन लिया जाएगा। 

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। तीसरे सेगमेण्ट की समाप्ति पर अब तक का 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा...


4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम। महाविजेता को पुरस्कार स्वरूप नकद 5000 रुपये दिए जायेंगे, तथा द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वालों को दिए जायेंगे सांत्वना पुरस्कार।

और अब आज की पहेली...


आज की पहेलियाँ : कौन हूँ मैं?

'कौन हूँ मैं' के अन्तर्गत आज हम पूछ रहे हैं चार पहेलियाँ। हर पहेली के लिए आपको मिलेंगे 2.5 अंक। इस तरह से कुल 10 अंकों की है आज की 'सिने पहेली'। तो ये रही आज की पहेलियाँ

1. मैं धर्म से सिख हूँ। संगीतकार के रूप में मेरा फ़िल्मी आगाज़ 'निहाल फ़िल्म कॉर्पोरेशन' की एक फ़िल्म से हुआ जिसमें मैंने टी. के. दास के साथ मिल कर संगीत दिया। इस फ़िल्म का शीर्षक गीत मोहम्मद रफ़ी से हमने गवाया था जो राग भैरवी में था। इस फ़िल्म के अगले ही साल मैंने हुस्नलाल-भगतराम के साथ एक फ़िल्म में संगीतकार की भूमिका निभाई। इस फ़िल्म के अगले ही साल मेरे परिवार ने फ़िल्म प्रोडक्शन कंपनी खोल दी और इस बैनर तले जिस पहली फ़िल्म का निर्माण हुआ उसमें बतौर अभिनेत्री सुरैया और बतौर निर्देशक फणी मजुमदार को लिया गया। इसी प्रोडक्शन ने आगे चलकर एक ऐसी फ़िल्म का निर्माण किया जिस शीर्षक से हाल में अक्षय कुमार अभिनीत एक फ़िल्म भी बनी है। तो फिर बताइए कौन हूँ मैं?

2. मैं एक संगीतकार रहा। मेरे हिस्से में अधिकतर धार्मिक और स्टण्ट फ़िल्में ही आईं। मेरी स्वरबद्ध पहली फ़िल्म में मेरे साथ रामप्रसाद और मोहम्मद शफ़ी भी संगीतकार थे। क्योंकि मैं अच्छा गा भी लेता था, इसलिए इस फ़िल्म में मैंने एक दर्द भरा गीत भी गाया था। मैंने अन्य संगीतकारों की धुनों का इस्तमाल अपने गीतों में किया। मसलन, हंसराज बहल द्वारा स्वरबद्ध गीत "जिन रातों में नींद उड़ जाती है" और ओ.पी. नय्यर द्वारा स्वरबद्ध "एक परदेसी मेरा दिल ले गया" जैसे लोकप्रिय गीतों की धुनों पर मैंने गीत बनाये। मैंने कई नई आवाज़ों को मौका दिया जैसे कि कृष्णा कल्ले, सुरेश राजवंशी, कमल बारोट, उषा बलसावर। आज अगर लोग मुझे याद करते हैं तो मेरे द्वारा स्वरबद्ध आशा भोसले और मन्ना डे के गाये एक युगल गीत की वजह से। तो बताइए कौन हूँ मैं?

3. 22 मार्च 1927 को जन्मे और महाराज उमैद सिंह के यहाँ कार्यरत रहने के बाद लाहौर में पं अमरनाथ और गुलाम हैदर के पास तथा उसके बाद लखनऊ में HMV में नौकरी करने के बाद मैंने बतौर संगीतकार फ़िल्म-संगीत में कदम सामाजिक फ़िल्मों के माध्यम से रखा। 1963 की एक फ़िल्म में मैंने सुमन कल्याणपुर से एक गीत गवाया था और इसी साल एक राजस्थानी फ़िल्म में भी मैंने इसी गीत की धुन पर महेन्द्र कपूर से एक गीत गवाया था। 2 फ़रवरी 1980 को मैंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। मेरे पुत्रों ने संगीतकार की जोड़ी बनाई पर उन्हें कामयाबी नहीं मिली। पर उनके संगीत में लता-रफ़ी का गाया एक युगल गीत लता-रफ़ी के सदाबहार युगल गीतों में शामिल किया जाता है, और आज भी रेडियो पर कभी-कभार सुनाई दे जाता है। तो बताइए कौन हूँ मैं?

4. मेरा जन्म और परवरिश अमरीका में हुआ। मैं मूल रूप से अमरीकी हूँ। जब मैं यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउदर्ण कैलिफ़ोर्णिया में एक फ़िल्म कोर्स कर रहा था, तब मुझे मेरे एक मित्र से भारत आने का निमंत्रण मिला। मैं भारत आया और बिना किसी भारतीय भाषा के ज्ञान के भारत में फ़िल्में निर्देशित करनी शुरू कर दी। बतौर निर्देशक यहाँ मेरी पहली फ़िल्म में मैंने एक लीजेन्डरी स्टार (मरणोपरान्त 'भारत रत्न' से सम्मानित) को लौंच किया। बाद में मैंने एक अन्य लीजेन्डरी कलाकार को भी निर्देशित किया, जो उनके करीयर की एक मीलस्तंभ बनी। इस लीजेन्डरी कलाकार को भी आगे चलकर 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया। तो फिर बताइए कौन हूँ मैं?


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और अब ये रहे इस प्रतियोगिता में भाग लेने के कुछ आसान से नियम....

1. उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब न कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे।

2. ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 39" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान अवश्य लिखें।

3. आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 4 अक्टूबर शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।

4. सभी प्रतियोगियों ने निवेदन है कि सूत्र या हिंट के लिए 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के किसी भी संचालक या 'सिने पहेली' के किसी भी प्रतियोगी से फ़ोन पर या ईमेल के ज़रिए सम्पर्क न करे।

5. कोई भी प्रतियोगी किसी अन्य प्रतियोगी से किसी पहेली का जवाब बताने का निवेदन नहीं करेगा, और न ही हिंट माँगेगा।


पिछली पहेली के सही जवाब

लता मंगेशकर के गाये गीतों की मेडली में क्रम से निम्नलिखित गीत शामिल किये गये थे:

1. मैं खिली खिली फुलवारी (सुभद्रा, 1946)
2. ऐ आँख अब न रोना (सिपहिया, 1949)
3. लम्बी जोरू बड़ी मुसीबत (एक थी लड़की, 1949)
4. जाना ना दिल से दूर (आरज़ू, 1950)
5. माने ना हाय बलम (जागीर, 1957)
6. कैसी ख़ुशी की है रात (नगीना, 1951)
7. साजन ले जाएगा तुझको घर (ग़बन, 1966)
8. वो पास नहीं मजबूर है दिल (नौ बहार, 1952)
9. मचलती आरज़ू खड़ी बाहें पसारे (उसने कहा था, 1960)
10. चला भी आ, आजा रसिया (मन की आँखें, 1970)
11. मैं ना मिलूंगी (प्यार का मौसम, 1969)
12. मैं तो जाऊँगी जाऊँगी रे उस पार (चानी, 1977)
13. देखो कोई प्यार न करना (अपना बना लो, 1982)
14. तेरे प्यार पे भरोसा करती हूँ (हवालात, 1987)
15. पैजनिया बोल (नाचे मयूरी, 1986)
16. सुन सुन सुन मेरे साथिया (अनमोल, 1993)
17. ये दिल बेवफ़ा से वफ़ा कर रहा है (बेवफ़ा से वफ़ा, 1992)
18. होठों पे बस तेरा नाम है (ये दिल्लगी, 1994)
19. अंदेखी अंजानी सी (मुझसे दोस्ती करोगे?, 2002)
20.  हम तो भई जैसे हैं (वीर ज़ारा, 2004)


पिछली पहेली के परिणाम

'सिने पहेली - 38' के परिणाम इस प्रकार हैं...

1. विजय कुमार व्यास, बीकानेर --- 9 अंक

2. गौतम केवलिया, बीकानेर --- 9 अंक

3. सलमन ख़ान, दुबई --- 8.5 अंक

4. शुभ्रा शर्मा, नई दिल्ली --- 8 अंक

5. प्रकाश गोविन्द, लखनऊ --- 8 अंक

6. क्षिति तिवारी, जबलपुर --- 8 अंक

7. चन्द्रकान्त दीक्षित, लखनऊ --- 6.5 अंक

8. रीतेश खरे, मुंबई --- 4 अंक

9. मंदार नारायण, कोल्हापुर --- 2.5 अंक

10. अमित चावला, दिल्ली --- 2.5 अंक

11. निशान्त अहलावत, गुड़गाँव --- 2.5 अंक


और यह रहा चौथे सेगमेण्ट का सम्मिलित स्कोर-कार्ड...



'सिने पहेली' को और भी ज़्यादा मज़ेदार बनाने के लिए अगर आपके पास भी कोई सुझाव है तो 'सिने पहेली' के ईमेल आइडी पर अवश्य लिखें। आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी 100% सम्भावना है महाविजेता बनने का। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, और अनुमति दीजिए अपने इस ई-दोस्त सुजॉय चटर्जी को, लता जी को जनमदिन की ढेरों शुभकामनाओं के साथ आपसे विदा ले रहे हैं, नमस्कार!

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