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रविवार, 15 फ़रवरी 2009

बिल्लू को कहना नही कोई हज्ज़ाम...

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (11)
नामांकन में आना भी एक उपलब्धि है - पंडित रवि शंकर
ग्रैमी पुरस्कार विजेता उस्ताद जाकिर हुसैन को बधाई देने वालों में तीन बार ग्रैमी हुए पंडित रवि शंकर भी हैं. एक ताज़ा इंटरव्यू में पंडित जी ने कहा-"विश्व मोहन भट्ट को जब ग्रैमी मिला तब इस बाबत मीडिया में जग्रता आयी. मेरे पहले दो सम्मानों के बारे में तो मुझे भी ख़बर नही लगी देशवासियों की बात तो दूर है. कई बार जूरी के सदस्यों के वोट न मिल पाने के कारण कोई अच्छा संगीतकार विजयी होने से रह जाता है पर इससे उसके संगीत की महत्ता कम नही होती, मेरा मानना है कि नामांकन में आना भी एक बड़े सम्मान की बात है. मुझे दुःख है कि लक्ष्मी शंकर ग्रैमी नही जीत पायी, वे बेहद प्रतिभाशाली हैं.पर खुशी इस बात की है कि जाकिर ने इसे जीता." गौरतलब है कि मोहन वीणा वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट भी पंडित रवि शंकर जी के ही शिष्य हैं. भारत रत्न पंडित रवि शंकर ऐ आर रहमान को भी बधाई देना नही भूले-"मैं हिन्दी फ़िल्म संगीतकारों का सालों से प्रशंसक रहा हूँ, सी रामचंद्र, सलिल चौधरी, एस डी और आर डी बर्मन, इल्ल्याराजा और अब ऐ आर रहमान जो निरंतर इतनी सुंदर धुनों से संगीत को संवार रहे हैं. फिल्मों के लिए उनका पार्श्व संगीत भी सराहनीय रहा है. विदेशों में भी अब उन्हें ख्याति प्राप्त करते देख खुशी हो रही है." दुनिया भर से ढेरों सम्मान पाने वाले पंडित रवि शंकर के लिया सबसे बड़ा सम्मान क्या है ? -"जो कुछ भी मिला है उसके लिए मैं ईश्वर, अपने गुरु और अपने प्रशंसकों को धन्येवाद देना चाहता हूँ, पर जब मैं परफोर्म करता हूँ और अपने संगीत में डूबे हुए किसी श्रोता का गर दिल भर आए और उसकी आँख से आंसू का एक कतरा गिरे, तो वो मेरे लिए सर्वोत्तम पुरस्कार है..". आपको नमन है ऐ संगीत शिरोमणि.



मैं एक खिलाड़ी जैसा महसूस कर रहा हूँ - ऐ आर रहमान

बाफ्टा की फ़तेह के बाद अब रहमान चले हैं एक और गढ़ जीतने न्यू यार्क शहर को. मनीष के ख़ास निर्मित बंद गले के सूट पहने रहमान इस समय ख़ुद को एक खिलाड़ी सा महसूस कर रहे हैं जिस पर सारे देश की नज़र है और जिससे ओलंपिक गोल्ड की पूरी पूरी उम्मीद की जा रही है -"ओलंपिक के लिए निकलते किसी खिलाड़ी से जिसपर पूरे देश को स्वर्ण लेकर आने की उम्मीद रहती है, मैं ख़ुद को इस वक्त उस खिलाड़ी सा महसूस कर रहा हूँ, पता नही मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरूंगा या नही, खुदा ने मुझे पहले ही मेरी काबिलियत से अधिक दिया है, इसलिए मैं कभी भी ज्यादा की महत्वकांक्षा नही कर पाता, ये मेरा स्वाभाविक गुण है...".


भारतीय संगीत एल्बम के लिए ग्रैमी जीतना चाहता हूँ - उस्ताद जाकिर हुसैन

"जब कोई दूसरा देश आपकी कला को सम्मान देता है, सबकी निगाहें आपकी तरफ़ उठ जाती है, पर जब आपका गुरु आपको शाबाशी दे कोई गौर नही करता. पर मेरे लिए दूसरी बात अधिक मायने रखती है", ग्रैमी जीतने वाले उस्ताद जाकिर हुसैन ने एक ताज़ा इंटरव्यू में ये बात कही -"मेरे गुरु और पिता मरहूम उस्ताद अल्लाह रखा खान ने मात्र दो बार मुझसे ये कहा कि मैंने अच्छा बजाया. दो बार उनके इन शब्दों से मिला सम्मान मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है. मैं कभी एक पूरी तरह से भारतीय शास्त्रीय संगीत के किसी एल्बम के लिए ग्रैमी जीतना चाहता हूँ, जैसा कि पंडित रवि शंकर जी ने कर दिखाया था. विदेशी संगीतकारों के साथ गठबंधन ग्रैमी तक पहुँचने का आसान रास्ता बना देता है...".


बिल्लू को कहना नही कोई हज्ज़ाम

एक और बड़ी फ़िल्म और एक और नया विवाद, अब तो जैसे ये एक परम्परा ही हो गई है...खैर हम विवादों की तरफ़ न जाकर सुनते हैं सप्ताह का सॉलिड गीत फ़िल्म "बिल्लू" से. ठेठ देसी अंदाज़ के इस गीत में गुलज़ार साहब ने कमाल के शब्द चुने हैं. "लोशन खुसबुदार" और "उस्तरे की धार" जैसे शब्दों ने गीत को खासा नया पन दे दिया है. प्रीतम ने भी बहुत बढ़िया धुन और संयोजन किया है. आवाजें हैं रघुबीर यादव, अजय जिन्गरान और कल्पना की...हाँ ...और गाने का अन्तिम हिस्सा सबसे शानदार है....सुनिए और आनन्द लीजिये.





मंगलवार, 10 फ़रवरी 2009

रहमान के बाद अब बाज़ी मारी उस्ताद जाकिर हुसैन ने भी...


भारतीय संगीत की थाप विश्व पटल पर सुनाई दे रही है, लॉस एन्जेलेंस और लन्दन में भारत के दो संगीत महारथियों ने अपने अन्य प्रतियोगियों पर विजय पाते हुए शीर्ष पुरस्कारों पर कब्जा जमाया. जहाँ चार अन्य प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए रहमान ने एक बार फ़िर "स्लम डोग मिलिनिअर" के लिए बाफ्टा (ब्रिटिश एकेडमी ऑफ़ फ़िल्म एंड टेलिविज़न आर्ट) जीता तो वहीँ तबला उस्ताद जाकिर हुसैन ने दूसरी बार ग्रैमी पुरस्कार जिसे संगीत का सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है, पर अपनी विजयी मोहर लगायी.जाकिर ने अपनी एल्बम "ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट" के लिए कंटेम्पररी वर्ल्ड म्यूजिक अल्बम श्रेणी में ये पुरस्कार जीता. गोल्डन ड्रम प्रोजेक्ट में हुसैन ने रॉक बैंड "ग्रेटफुल डेड" के मिकी हार्ट के साथ जुगलबंदी की है और उनका साथ दिया नईजीरियन पर्काशानिस्ट सिकिरू एडेपोजू और जैज़ पर्काशानिस्ट प्युरेटो रिकोन ने. ये इस समूह का और ख़ुद हुसैन का दूसरा ग्रैमी है. पहली बार भी १९९१ में उन्होंने मिकी हार्ट ही के साथ टीम अप कर "प्लेनट ड्रम" नाम का एल्बम किया था जिसे १९९२ में ग्रैमी सम्मान हासिल हुआ था.

दूसरी तरफ़ लन्दन में हुए बाफ्टा समारोह में भी गोल्डन ग्लोब की तर्ज पर एक बार फ़िर स्लम डोग पूरी तरह से छाई रही. फ़िल्म को कुल ७ बाफ्टा अवार्ड मिले जिसमें रहमान के आलावा एक भारतीय और भी है. जी हाँ, केरल निवासी और फ़िल्म के साउंड निर्देशक रसूल पुकुट्टी ने भी अपने फन से भारतीय संगीत प्रेमियों का सर गर्व से ऊंचा किया. पहली बार बाफ्टा में भारतीय नाम आए हैं, पुरस्कार पाने वालों में. हालाँकि बाफ्टा ने फिल्मों में उनके योगदान के लिए निर्देशक यश चोपडा का सम्मान किया था सन २००६ में. इसके आलावा संजय लीला बंसाली की "देवदास" को विदेशी फिल्मों की श्रेणी में नामांकन मिला था २००२ में, पर स्पेनिश फ़िल्म "टॉल्क टू हर" ने बाज़ी मार ली थी.

बाफ्टा ने बेशक भारतीय कलाकारों को देर में पहचाना पर ग्रैमी पुरस्कारों में भारतीय पहले भी अपना जलवा दिखा चुके हैं. उस्ताद जाकिर हुसैन के आलावा पंडित रवि शंकर और मोहन वीणा वादक विश्व मोहन भट्ट की कला को भी ग्रैमी ने सम्मानित किया है बारम्बार. पंडित रवि शंकर ने तो ३ बार ये सम्मान जीता है. दरअसल पंडित जी पहले ग्रैमी सम्मान पाने वाले भारतीय कलाकार बने थे जब १९६७ में मशहूर वोइलानिस्ट येहुदी मेनुहिन के साथ वेस्ट मीट ईस्ट कंसर्ट के लिए उन्हें बेस्ट चेंबर म्यूजिक पर्फोर्मांस श्रेणी में पुरस्कृत किया गया था.

खुशी की बात ये भी है की इस बार ग्रैमी की दौड़ में और भी ४ श्रेणियों में ३ अन्य भारतीय भी शामिल रहे. लुईस बैंक को जैज़ एल्बम श्रेणी में दो नामांकन मिले (एल्बम माइल्स फ्रॉम इंडिया, और फ्लोटिंग पॉइंट), कोलकत्ता के संगीतकार को उनकी एल्बम "कोलकत्ता क्रोनिकल" के लिए तो मशहूर शास्त्रीय गायक लक्ष्मी शंकर को "डांसिंग इन दा लाइट" के लिए नामांकन मिला. गोल्डन ग्लोब, बाफ्टा और ग्रैमी के बाद अब सबकी नज़रें २२ तारीख को होने वाले ऑस्कर पर टिकी हैं. उम्मीद है यहाँ भी तिरंगा लहराएगा पूरे आन बान और शान के साथ. अभी के लिए तो उस्ताद जाकिर हुसैन, रहमान, और रसूल पुकुट्टी को हम सब की ढेरो बधाईयाँ. आईये सुनते हैं उस्ताद का तबला वादन १९९९ में आई उनकी जैज़ फुयूज़न एल्बम "दा बिलीवर" से ये ट्रैक "फईन्डिंग दा वे...". साथ में हैं जॉन मेक्लिंग, यू श्रीनिवास, और वी सेल्वागणेश.



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