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Monday, February 22, 2010

कविता और संगीत का अनूठा मेल है "काव्यनाद"

ताज़ा सुर ताल ०८/२०१०

सुजॉय- सजीव आज आपके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी है, इसकी वजह...
सजीव- हाँ सुजॉय मैं हिंद युग्म के अपने प्रोडक्ट "काव्यनाद" को विश्व पुस्तक मेले में मिली आपार सफलता और वाह वाही से बहुत खुश हूँ.
सुजॉय- हाँ सजीव मैंने भी यह अल्बम सुनी, और सच कहूँ तो ये मेरी अपेक्षाओं से कहीं बेहतर निकली, इतनी पुरानी कविताओं पर इतनी मधुर धुनें बन सकती है, यकीं नहीं होता.
सजीव- बिलकुल सुजॉय, ये इतना आसान हरगिज़ नहीं था, पर जैसा कि मैंने हमेश विश्वास जताया है युग्म के सभी संगीतकार बेहद प्रतिभाशाली हैं, ये सब कुछ संभव कर सकते हैं.
सुजॉय- तो इसका अर्थ है सजीव कि आज हम इसी अनूठी अल्बम को ताज़ा सुर ताल में पेश करने जा रहे हैं ?

सजीव- जी सुजॉय, काव्यनाद प्रसाद, निराला, दिनकर, महादेवी, पन्त, और गुप्त जैसे हिंदी के प्रतीक कवियों की ६ कविताओं का संगीतबद्ध संकलन है, ६ कविताओं को संगीत के अलग अलग अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है, कुल १४ गीत हैं, और सबसे अच्छी बात ये हैं कि सभी एक दूसरे से बेहद अलग ध्वनि देते हैं.
सुजॉय- सबसे पहले मैं इसमें से उस गीत को सुनवाना चाहूँगा जो मुझे व्यक्तिगत तौर पर बहुत पसंद आया, धर्मेन्द्र कुमार सिंह की आवाज़ में पन्त की ये रचना बेहद मधुर बन पड़ी है. इसका रेट्रो फील मुझे बहुत भाया.
सजीव- धर्मेन्द्र हिंदी भोजपुरी के एक युवा गायक हैं, जिनमें बहुत संभावना नज़र आती है, संगीत संयोजन अखिलेश कुमार का है, सुनते हैं ये गीत

प्रथम रश्मि का आना (धर्मेन्द्र कुमार), पारंपरिक संस्करण....pratham reshmi (kavyanaad)


सुजॉय -बहुत खूब था ये गीत. धमेन्द्र की आवाज़ में मुकेश की गायिकी झलकती है कहीं न कहीं...
सजीव -हाँ, चलिए अब सुनते हैं जय शंकर प्रसाद की एक देशभक्ति रचना...
सुजॉय- इसे स्वप्न मंजूषा शैल ने भी बहुत अच्छा गाया है, पर आप शायद युवा गायक कृष्ण राज कुमार का संस्करण सुनवाने जा रहे हैं...ठीक ?
सजीव - हाँ, दरअसल कृष्ण एक ऐसे संगीतकार/गायक हैं जिनका दूसरे सत्र में योगदान मात्र एक गीत का था, कोई भी उनसे बहुत उम्मीद नहीं कर रहा था. पर देखिये न सिर्फ उन्होंने हर बार हिस्सा लिया, वो लगभग हर बार कोई न कोई सम्मान भी जीतते चले गए.
सुजॉय- सजीव काव्यनाद के बनने की कहानी भी ज़रा संक्षिप्त में हमारे श्रोताओं को बताईये.
सजीव- हाँ जरूर, दरअसल "पहला सुर" जो युग्म के संगीत का पहला प्रोडक्ट था के माध्यम से हमारे पास नए उभरते हुए कलाकारों का एक अच्छा ख़ासा पूल जमा हो गया था. युग्म से लंबे समय से जुड़े, रेडियो सलाम नमस्ते के उद्‍घोषक, कवि, वैज्ञानिक और हिन्दीकर्मी आदित्य प्रकाश ने इस बेमिसाल सुझाव को सामने रखा. शुरू में हम झिझक रहे थे कि कैसे हमारे नयी सदी के संगीतकार इन क्लास्सिक रचनाओं के साथ न्याय कर पायेंगें, इसलिए प्रतियोगिता का स्वरूप अपनाया, ताकि अधिक से अधिक प्रतिभागी हिस्सा लेने के लिए प्रेरित हों. इन विजेताओं को पुरस्कार दिए गए उस राशि को भी आदित्य प्रकाश जी, शेर बहादुर सिंह जी, डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह जी, अशोक कुमार जी, डॉ॰ कमल किशोर सिंह, दीपक चौरसिया 'मशाल', डॉ॰ शिरीष यकुन्डी, डॉ॰ प्रशांत कोले, डॉ॰ रघुराज प्रताप सिंह ठाकुर और शैलेश त्रिपाठी ने प्रायोजित किया.
सुजॉय- सजीव बातें बहुत से लोग कर लेते हैं, पर वास्तव में कुछ करना क्या होता है ये आदित्य जी और उनकी टीम ने सिखाया है, भाषा के इन सच्चे सपूतों को सलाम करते हुए सुनते हैं, ये गीत

गीत - अरुण ये मधुमय देश हमारा (कृष्ण राजकुमार) arun ye madhumay desh (kavyanaad)


सजीव- जो तुम आ जाते एक बार....
सुजॉय- किसकी बात कर रहे हो सजीव.
सजीव- महादेवी जी की इस अनमोल रचना के बारे में कुछ कहने को मेरे पास शब्द नहीं हैं...
सुजॉय- पर मेरे पास एक युवा गायिका, कुहू गुप्ता के बारे में कहने को बहुत कुछ है...पुणे में रहने वाली कुहू गुप्ता पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। गायकी इनका जज्बा है। ये पिछले 5 वर्षों से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रही हैं। इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई गायन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लिया है और इनाम जीते हैं। इन्होंने ज़ी टीवी के प्रचलित कार्यक्रम 'सारेगामा' में भी 2 बार भाग लिया है। जहाँ तक गायकी का सवाल है तो इन्होंने कुछ व्यवसायिक प्रोजेक्ट भी किये हैं।
सजीव- हिंद युग्म पर आई सबसे सुरीली आवाजों में है कुहू गुप्ता की आवाज़. और देखिये तो ज़रा इस गीत में उन्होंने कितने खूबसूरत रंग भर दिए हैं. वैसे इस गीत के संगीतकार श्रीनिवास के बारे में भी थोडा सा बताना चाहूँगा. मूलरूप से तेलगू और उड़िया गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पांडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों हैदराबाद में हैं और अमेरिकन बैंक में कार्यरत हैं।
सुजॉय- अब सुन लिया जाए ये गीत

गीत - जो तुम आ जाते एक बार (कुहू/श्रीनिवास) jo tum aa jaate ek baar (kavyanaad)


सजीव- कुहू की तरह ही एक और उभरते हुए गायक के साथ टीम बनायीं है श्रीनिवास ने अगले गीत के लिए.
सुजॉय- हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र में इनके 5 गीत (जीत के गीत, मेरे सरकार, ओ साहिबा, रूबरू और वन अर्थ-हमारी एक सभ्यता) ज़ारी हो चुके हैं। ओडिसा की मिट्टी में जन्मे बिस्वजीत शौकिया तौर पर गाने में दिलचस्पी रखते हैं। वर्तमान में लंदन (यूके) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी कर रहे हैं। इनका एक और गीत जो माँ को समर्पित है, उसे हमने विश्व माँ दिवस पर रीलिज किया था।
सजीव- हाँ सुजॉय बिस्वजीत की आवाज़ के बहुत से प्रशंसक हैं पहले ही, तो बिना अधिक कुछ कहे सुन लेते हैं ते गीत

गीत - स्नेह निर्झर (बिस्वजीत/श्रीनिवास)...sneh nirjhar (kavyanaad)


सजीव- सुजॉय यहाँ मैं आदित्य जी एक और साथी और काव्यनाद के एक और प्रायोजक का जिक्र करना चाहूँगा. ये हैं डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह, जो पिछले 30 वर्षों से मानचेस्टर, यूके में प्रवास कर रहे हैं। कवि हृदयी, कविता-मर्मज्ञ और साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाले- ये सभी इनके विशेषण हैं।
सुजॉय- जी बिकुल तभी तो इन्होने आगे बढ़ कर इस बड़े आयोजन में अपना योगदान दिया. इनके अलावा रिवरहेड, न्यूयार्क के कमल किशोर सिंह जी भी हैं जो पेशे से डॉक्टर हैं। हिन्दी तथा भोजपुरी में कविताएँ लिखते हैं। इन्होने गीतकास्ट प्रतियोगिता में हिस्सा भी लिया है हर बार. जीते तो नहीं पर फिर भी आयोजन की एक कड़ी को प्रायोजित कर स्पोर्ट्स मेन् शिप दिखाई और साहित्य सेवा में अपना समर्पण भी.
सजीव- राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता "कलम आज उनकी जय बोल" को स्वरबद्ध करना निश्चित ही आसान नहीं रहा होगा, पर एक बार हमारे संगीतकारों ने अपना लोहा मनवाया.
सुजॉय- इस गीत में एक और नयी आवाज़ सुनाई पड़ती है -प्रदीप सोम सुन्दरन की. जो लोग टीवी पर म्यूजिकल शो देखने के शौक़ीन हैं, उन्होंने भारतीय टेलीविजन पर पहले सांगैतिक आयोजन 'मेरी आवाज़ सुनो' को ज़रूर देखा होगा। प्रदीप सोमसुंदरन को इसी कार्यक्रम में सन 1996 में सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक चुना गया था और लता मंगेशकर सम्मान से सम्मानित किया गया था।
सजीव- प्रदीप कनार्टक शास्त्रीय गायन के अतिरिक्त हिन्दी, मलयालम, तमिल, तेलगू, अंग्रेज़ी और जापानी आदि भाषाओं में ग़ज़लें और भजन गाते हैं। इन्होंने कई मलयालम फिल्मी गीतों में अपनी आवाज़ दी है। इस गीत में आप हिंद युग्मी निखिल आनंद गिरी की भी आवाज़ सुन सकते हैं.

गीत - कलम आज उनकी जय बोल (निखिल/प्रदीप/श्रीनिवास)... kalam aaj unki jai bol (kavyanaad)


सुजॉय- अब बारी आज के अंतिम गीत की. एक चिर प्रेरणा है इस गीत में, यूं तो इस गीत के भी सभी संस्करण बहुत खूब हैं, पर इस गीत के बहाने कुछ चर्चा कर लें रफीक शेख की भी, इन्हें तो आवाज़ के दूसरे सत्र में सर्वश्रेष्ठ गीत का पुरस्कार भी मिला है न ?
सजीव- जी सुजॉय, रफ़ीक़ शेख आवाज़ टीम की ओर से पिछले वर्ष के सर्वश्रेष्ठ गायक-संगीतकार घोषित किये जा चुके हैं। रफ़ीक ने दूसरे सत्र के संगीत मुकाबले में अपने कुल 3 गीत (सच बोलता है, आखिरी बार, जो शजर सूख गया है) दिये और तीनों के तीनों गीतों ने शीर्ष 10 में स्थान बनाया।
सुजॉय- वाह, चलिए रफ़ीक भाई को सुनते हैं मगर उससे पहले दीपक मशाल और उनके साथियों का भी जिक्र कर दें जिन्होंने उस आयोजन को मुक्कमल करने में विद्यार्थी होने के बावजूद योगदान दिया.
सजीव- बिलकुल सुजॉय, अगर चाहत हो मन में तो सब कुछ संभव है....यही सीख है गुप्त जी की एक कविता में भी, सुनिए

गीत - नर हो न निराश करो (रफीक शेख) nar ho na niraash karo (kavyanaad)


"काव्यनाद" के संगीत को आवाज़ रेटिंग ****
काव्यनाद एक अनूठी पहल है, बहुत कुछ नया है और प्रयोगात्मक भी. आज की पीढ़ी को लगभग १०० वर्ष पहले लिखी कविताओं को इस रूप में पेश करने का प्रयास सराहनीय है, पर अभी प्रस्तुति के मामले में सुधार की गुन्जायिश है, हिंद युग्म ने अपने पहले प्रोडक्ट से बेहतर काम दिखाया है इस बार, उम्मीद करेंगें कि आने वाले प्रोडक्ट्स और बेहतर साबित होंगें.

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # २२- काव्यनाद के विमोचन के साथ साथ हिंद युग्म आवाज़ ने एक और अनूठी एल्बम को भी उतरा है, बीते पुस्तक मेले में इसकी भी खूब चर्चा रही, इस अल्बम का नाम बताएं.
TST ट्रिविया # २३ लन्दन ड्रीम्स में एक मशहूर गीत गाने वाले गायक की आवाज़ भी है "काव्यनाद" में, कौन हैं ये गायक ?
TST ट्रिविया # २४ एल्बम "काव्यनाद" का विमोचन किसी मशहूर हस्ती के हाथों हुआ


TST ट्रिविया में अब तक -
अनुराग जी दो सही जवाब मिले आपके और ४ अंकों से खाता खुला है आपका...बधाई

Monday, August 10, 2009

स्नेह निर्झर बह गया है कुछ यूँ संगीतबद्ध हुआ

गीतकास्ट प्रतियोगिता- परिणाम-3: स्नेह-निर्झर बह गया है

देखते-देखते आज वह समय भी आ गया, जब हम गीतकास्ट प्रतियोगिता के तीसरे अंक के परिणाम प्रकाशीत व प्रसारित कर रहे हैं। मई महीने में शुरू हुई इस प्रतियोगिता का एक मात्र उद्देश्य यही था कि हिन्दी कविता के प्रतिमानों या यूँ कह लें आधार-स्तम्भों को संगीत से जोड़ा जाये ताकि नई पीड़ी भी उन्हें गुनगुना सके और अपने मन के आँगन में एक स्थान दे सके। इस प्रतियोगिता की शुरूआती दो कड़ियाँ 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' और 'प्रथम रश्मि' बहुत सफल रहीं। श्रोताओं ने बहुत पसंद किया। प्रतिभागिता बढ़ी। उसी का फल है कि तीसरे अंक में जब हमने निराला की एक मुश्किल कविता 'स्नेह-निर्झर बह गया है' चुना तो भी इसमें 18 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। हमने तीसरे अंक के लिए प्रविष्टि जमा करने की आखिरी तिथि रखी थी 31 जुलाई 2009। 30 जुलाई तक हमें मात्र 1 प्रविष्टि मिली थी, लेकिन 31 तारीख को यह बढ़कर 18 हो गईं।

कविता मुश्किल तो थी ही, लेकिन हम पिछले 3 अंकों से एक और परेशानी का सामना कर रहे हैं, वह यह कि अलग-अलग प्रकाशन की पुस्तक में कविता की पंक्तियों का अलग-अलग होना। 'स्नेह-निर्झर बह गया है' गीत के दूसरे अंतरे में लोकभारती प्रकाशन, इलहाबाद द्वारा प्रकाशित और रामविलास शर्मा द्वारा संपादित पुस्तक 'राग-विराग' में शब्द है 'प्रतिभा', तो वहीं वाणी प्रकाशन, दिल्ली से छपी 'निराला संचयिता' में शब्द है 'प्रभा'। गायन में भी उच्चारण की गलतियाँ हुईं, वह शायद इसलिए क्योंकि संस्कृठनिष्ठ शब्दों को सुर पर बिठाना ख़ासा मुश्किल काम है।

फिर भी पाँच जजों ने गीत में गायकी, संगीत, संगीत संयोजन, उच्चारण और प्रस्तुतिकरण जैसे मापदंडों पर इन्हें परखकर सभी के सकारात्मक पक्ष को सराहा। इस बार निर्णायकों में सजीव सारथी, अनुराग शर्मा, यूनुस खान, आदित्य प्रकाश और शैलेश भारतवासी सम्मिलित थे। इनके द्वारा दी गई प्रतिक्रियाओं के आधार पर श्रीनिवास पांडा द्वारा संगीतबद्ध और बिस्वजीत नंदा द्वारा गाई हुई प्रविष्टि प्रथम स्थान पर रखी गई है। यद्यपि गायक ने उच्चारण की कई गलतियाँ की हैं, फिर भी संगीत इतना अनुकूल है कि मन को मोह लेता है।


बिस्वजीत/श्रीनिवास

श्रीनिवास
बिस्वजीत
बिस्वजीत युग्म पर पिछले 1 साल से सक्रिय हैं। हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र में इनके 5 गीत (जीत के गीत, मेरे सरकार, ओ साहिबा, रूबरू और वन अर्थ-हमारी एक सभ्यता) ज़ारी हो चुके हैं। ओडिसा की मिट्टी में जन्मे बिस्वजीत शौकिया तौर पर गाने में दिलचस्पी रखते हैं। वर्तमान में लंदन (यूके) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी कर रहे हैं। इनका एक और गीत जो माँ को समर्पित है, उसे हमने विश्व माँ दिवस पर रीलिज किया था।

श्रीनिवास हिन्द-युग्म के लिए बिलकुल नये संगीतकार हैं, आज हम इनकी पहली प्रस्तुति जारी कर रहे हैं। मूलरूप से तेलगू और उड़िया गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पांडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों हैदराबाद में हैं और अमेरिकन बैंक में कार्यरत हैं।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 2000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
गीत सुनें-
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दूसरे स्थान के विजेता भी एक दिग्गज हैं।


रफ़ीक़ शेख

रफ़ीक़ शेख आवाज़ टीम की ओर से पिछले वर्ष के सर्वश्रेष्ठ गायक-संगीतकार घोषित किये जा चुके हैं। रफ़ीक ने दूसरे सत्र के संगीत मुकाबले में अपने कुल 3 गीत (सच बोलता है, आखिरी बार, जो शजर सूख गया है) दिये और तीनों के तीनों गीतों ने शीर्ष 10 में स्थान बनाया। रफ़ीक ने पिछले वर्ष अहमद फ़राज़ के मृत्यु के बाद श्रद्धाँजलि स्वरूप उनकी दो ग़ज़लें (तेरी बातें, ज़िदंगी से यही गिला है मुझे) को संगीतबद्ध किया था।

पुरस्कार- द्वितीय पुरस्कार, रु 1000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
गीत सुनें-

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तीसरे स्थान के विजेता बॉलीवुड के गायक हैं।


अभिजीत घोषाल

अभिजीत घोषाल बॉलीवुड के उभरते हुए गायक हैं। अभिजीत को सारेगामा में लगातार 11 बार जीतने का और स्वेच्छा से पुरस्कार छोड़ देने का श्रेय प्राप्त हैं। इलाहाबाद से पढ़े-लिखे, पले-बढ़े अभिजीत स्कूल के दिनों में पढ़ने में चेम्पियन थे, बैंक में मैनेजरी भी की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की जैव विज्ञान शाखा के गोल्ड-मेडलिस्ट रहे। इनकी माँ को केंसर हो जाने के बाद ये इलाज हेतु उन्हें लेकर मुम्बई आ गये और मायानगरी के होकर रह गये। अभी हाल में इनका एक गीत 'झूमो रे झूमो' रीलिज हुआ जो फिल्म 'किसान' का हिस्सा है और डब्बू मल्लिक ने संगीत दिया है। गायक पं॰ अजॉय चक्रवर्ती से बहुत अधिक प्रभावित अभिजीत को मन्ना डे, मो॰ रफी, हरिहरन, सोनू निगम इत्यादि की गायन शैली पसंद है। अभिजीत को वियेना, ऑस्ट्रिया में हुए फेल्ड्करिच इंटरनेशनल संगीत महोत्वसव में दुनिया भर के संगीतकारों के साथ अपना हुनर दिखाने का मौका मिल चुका है। अभिजीत जिंगल-निर्माण से भी जुड़े रहे हैं, जैसे- 'गरमी अलविदा' (शाहरुख खान-नवरत्न ठंडा कूल-कूल), लुइज़ बैंक्स द्वारा संगीतबद्ध मध्य प्रदेश स्वर्ण जयंती वर्ष में, शान्तनु मोएत्रा द्वारा संगीतबद्ध बांग्लादेश के एकटेल मोबाइल के लिए और कैड्बरीज के लिए इत्यादि। इनके कुछ सोलो एल्बम भी आ चुके हैं; एचएमबी द्वारा प्रदर्शित बांग्ला-एल्बम 'ई प्रोथोम अभिजीत' , म्यूजिक टुडे द्वारा प्रदर्शित 'नीमराना'। प्रस्तुत प्रस्तुति में इनकी आवाज़ मन मोहने में कोई कसर नहीं छोड़ती।

पुरस्कार- तृतीय पुरस्कार, रु 1000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
गीत सुनें-

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इन तीनों के अतिरिक्त भी अन्य 4 प्रविष्टियों ने हमारे जजों का ख़ास ध्यान खींचा। एक जज को पारुल ही प्रविष्टि सर्वश्रेषठ लगी तो वहीं एक को कृष्ण राज कुमार की। रुपेश ऋषि के आवाज़ की तारीफ़ लगभग सभी निर्णायकों ने की। गिरीजेश कुमार से कम ही जज इस बार संतुष्ट दिखे क्योंकि उनकी पिछली प्रस्तुति के बाद उनसे उम्मीदें बढ़ गई थीं।


पारुल पुखराज


रुपेश ऋषि


कृष्ण राज कुमार


गिरीजेश कुमार



इनके अतिरिक्त हम कमल किशोर सिंह, रमेश धुस्सा, मनोहर लेले, देवेन्द्र अरोरा, शरद तैलंग, तरुण कुमार, आशुतोष-अभिषेक, नील श्रीवास्तव, अम्बरीष श्रीवास्तव, कवि मुक्तेश्वर बख्श श्रीवास्तव, अभिनव वाजपेयी इत्यादि के भी आभारी है, जिन्होंने इसमें भाग लेकर हमारा प्रोत्साहन किया और इस प्रतियोगिता को सफल बनाया। हमारा मानना है कि यदि आप इन महाकवियों की कविताओं को यथाशक्ति गाते हैं, पढ़ते हैं या संगीतबद्ध करते हैं तो आपका यह छोटा प्रयास एक सच्ची श्रद्धाँजलि बन जाता है और एक महाप्रयास के द्वार खोलता है। हम निवेदन करेंगे कि आप इसी ऊर्जा के साथ गीतकास्ट के अन्य अंक में भी भाग लेते रहें।


इस कड़ी के प्रायोजक हैं डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह, जो पिछले 30 वर्षों से मानचेस्टर, यूके में प्रवास कर रहे हैं। कवि हृदयी, कविता-मर्मज्ञ और साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाले- ये सभी इनके विशेषण हैं। यदि आप भी इस आयोजन को स्पॉनसर करता चाहते हैं तो hindyugm@gmail.com पर सम्पर्क करें।

Wednesday, July 8, 2009

8 तरह से सुनें सुमित्रा नंदन पंत की 'प्रथम रश्मि'

गीतकास्ट प्रतियोगिता- परिणाम-2: प्रथम रश्मि

सुमित्रा नंदन पंत की कविता 'प्रथम रश्मि' को गीतकास्त प्रतियोगिता की दूसरी कड़ी के लिए जब हमने चुना तो यह डर मन में ज़रूर था कि इस कविता के संस्कृतनिष्ठ-शब्द गायन में कहीं बहुत मुश्किल न खड़ी करें। लेकिन अंतिम तिथि यानी 30 जून 2009 तक जब हमें 19 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं तो हमें यह अहसास हुआ कि कविताओं के प्रति कविता प्रेमियों, गायकों और संगीतकारों का अतिरिक्त प्रेम के सामने यह बाधा क्षणिक ही है, जो दृढ़ इच्छाशक्ति से पार की जा सकती है।

19 में से 11 प्रविष्टियाँ तो संगीत के साथ सजी-धजी हुई थीं। इनमें से दो प्रविष्टियों में फिल्म सरस्वती चंद के मशहूर गीत 'फूल तुम्हें भेजा है खत में॰॰॰" की धुन थी, जिसपर बहुत ही मनोरंजक तरीके से पिता-पुत्र (अम्बरीष श्रीवास्तव व नील श्रीवास्तव) ने 'प्रथम रश्मि' के शब्दों को बिठाया था। इनमें से कक्षा 8 के छात्र नील श्रीवास्तव का हम विशेष उल्लेख करना चाहेंगे जिन्होंने फिल्मी धुन पर ही सही, यह प्रयास किया।

शेष प्रविष्टियों के मध्य बहुत काँटे की टक्कर थी। हमने विविध भारती के प्रसिद्ध रेडियो जॉकी यूनुस खान, रेडियो सलाम नमस्ते के उद्‍घोषक और गीतकास्ट प्रतियोगिता के संकल्पनाकर्ता आदित्य प्रकाश, आवाज़ के नियंत्रक सजीव सारथी तथा आवाज़ के तकनीक-प्रमुख और प्रसिद्ध कथावाचक अनुराग शर्मा को इन प्रविष्टियों में श्रेष्ठ प्रविष्टि चुनने का कार्य सौंपा गया।

बहुत से जजों का मानना था कि इस बार गायकों ने उच्चारण में बहुत सी गलतियाँ की हैं, लेकिन कविता को कम्पोज करना, वो भी प्रसाद-पंत शैली की कविताओं को कम्पोज करना खासा मुश्किल, ऐसे में यह ही एक बड़ी बात है कि इन्हें संगीतबद्ध किया जा रहा है। किसी-किसी कम्पोजिशन में गायकी की तारीफ हुई, तो किसी में संगीत संयोजन की। आदित्य पाठक के संगीत को भावों में जान डालने वाला कहा गया, वहीं स्वप्न मंजूषा शैल की आवाज़ की मधुरता की सराहना हमारे जजों ने की। कुमार आदित्य विक्रम के संगीत संयोजन की तारीफ हुई। लेकिन औसत राय यह बनी कि धर्मेन्द्र कुमार सिंह की प्रविष्टि में इन सभी पहलुओं की औसत गुणवत्ता विद्यमान है।

अतः 'प्रथम रश्मि' के लिए आयोजित 'गीतकास्ट प्रतियोगिता' के विजेता हैं धर्मेन्द्र कुमार सिंह। धर्मेन्द्र कुमार सिंह ने पिछली बार भी तीसरा स्थान बनाया था, जबकि इन्होंने बिना किसी संगीत के जयशंकर प्रसाद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' को अपनी आवाज़ दी थी। बहुत से श्रोताओं ने हमें लिखा कि धर्मेन्द्र यदि संगीत के साथ कोशिश करें तो बहुतों को मात दे सकते हैं, शायद श्रोताओं के इसी प्रोत्साहन ने इन्हें विजयी बनने का रास्ता दिखाया, ऊर्जा दी।


धर्मेन्द्र कुमार सिंह

धर्मेन्द्र कुमार सिंह हिंदी-भोजपुरी के युवा गायक हैं। स्टेज, रेडियो, दूरदर्शन और विभिन्न चैनलों पर कार्यक्रम पेश कर चुके हैं और वर्तमान में हमार टीवी में एसोसिएट प्रोड्यूसर है। चैनल के बाद फुर्सत के क्षणों में भोजपुरी के स्तरीय गीतों और गज़लों को आवाज देने में लगे रहते हैं।
ईमेल- singerdharmendrasingh@gmail.com

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 2000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- भारतीय समयानुसार 13 जुलाई 2009 की सुबह 7:30 बजे डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के 'कवितांजलि' कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
गीत सुनें-
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संगीत-संयोजन- अखिलेश कुमार


जयशंकर प्रसाद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' की संगीतबद्ध प्रविष्टियों में से श्रेष्ठतम चुनना जिस प्रकार जजों के लिए मुश्किल रहा था, इसी प्रकार इस बार भी दूसरे स्थान के लिए प्रविष्टि चुनना जजों के लिए काफी मुश्किल रहा। गिरिजेश कुमार द्वारा प्रेषित प्रविष्टि जबकि केवल तानपुरा पर स्वरबद्ध थी, ऑडेसिटी की कच्ची रिकॉर्डिंग थी, फिर भी तीन निर्णायकों ने गिरिजेश के उच्चारण, गायन-क्षमता, मेलोडि और भाव-संप्रेषणियता की बहुत प्रसंशा की। वहीं कृष्ण राज कुमार के गायन में नयापन और संगीत में ताज़ापन की तारीफ सबने खुलकर की। अतः हमने निर्णय लिया कि हम इन दोनों प्रविष्टियों को द्वितीय पुरस्कार देंगे और रु 1000 की जगह रु 2000 की पुरस्कार राशि दोनों में बराबर-बराबर बाँटी जायेगी।


कृष्ण राज कुमार

एक नौजवान संगीतकार और गायक हैं। कृष्ण राज कुमार जो मात्र २२ वर्ष के हैं, और जिन्होंने अभी-अभी अपने B.Tech की पढ़ाई पूरी की है, पिछले १४ सालों से कर्नाटक गायन की दीक्षा ले रहे हैं। इन्होंने हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र के संगीतबद्धों गीतों में से एक गीत 'राहतें सारी' को संगीतबद्ध भी किया है। ये कोच्चि (केरल) के रहने वाले हैं। जब ये दसवीं में पढ़ रहे थे तभी से इनमें संगीतबद्ध करने का शौक जगा। पिछली बार इन्होंने गीतकास्ट प्रतियोगिता में प्रथम स्थान बनाया था।

पुरस्कार- द्वितीय पुरस्कार, रु 1000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- भारतीय समयानुसार 20 जुलाई 2009 की सुबह 7:30 बजे डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के 'कवितांजलि' कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
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गिरिजेश कुमार

इलाहाबाद में पले-बढ़े और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक गिरिजेश कुमार को संगीत का शौक है। प्रयास संगीत समिति, इलाहाबाद में संगीत प्रवीण हैं। इग्नू से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद पत्रकारिता से ही रोज़ी-रोटी का प्रबन्ध किये हैं और फिलहाल सीएनबीसी-आवाज़ में कार्यरत हैं। गाज़ियाबाद (उ॰प्र॰) में निवास कर रहे हैं।

पुरस्कार- द्वितीय पुरस्कार, रु 1000 का नग़द पुरस्कार

विशेष- भारतीय समयानुसार 13 जुलाई 2009 की सुबह 7:30 बजे डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के 'कवितांजलि' कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
गीत सुनें-

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जैसाकि हमने पहले कहा कि इस बार टक्कर बहुत काँटे की थी। हम पाँच अन्य प्रविष्टियों को भी अपने श्रोताओं के समक्ष रख रहे हैं। इनमें से हर प्रविष्टि खास है। हमारे लिए भी विजेता चुनना मुश्किल था, और हमें उम्मीद है कि जब आप इन आठों प्रविष्टियों को सुनेंगे तो आपके लिए भी विजेता चुनना बहुत मुश्किल होगा।


कुमार आदित्य विक्रम


आदित्य पाठक


स्वप्न मंजूषा 'शैल'

संगीत- संतोष 'शैल'

सुनीता यादव

संगीत-संयोजन- रविन्दर प्रधान

मनोहर लेले


विशेष- उपर्युक्त सभी प्रतिभागियों के साक्षात्कार का सीधा प्रसारण आने वाले कवितांजलि कार्यक्रम में किया जायेगा।


इनके अतिरिक्त हम अपराजिता कल्याणी, अम्बरीष श्रीवास्तव, नील श्रीवास्तव, डॉ॰ रमा द्विवेदी, कमल किशोर सिंह, रमेश धुस्सा, पूजा अनिल, कमलप्रीत सिंह, सुनीता चोटिया, दीपाली पंत तीवारी और सुषमा श्रीवास्तव के भी आभारी है, जिन्होंने इसमें भाग लेकर हमारा प्रोत्साहन किया और इस प्रतियोगिता को सफल बनाया। हमारा मानना है कि यदि आप इन महाकवियों की कविताओं को यथाशक्ति गाते हैं, पढ़ते हैं या संगीतबद्ध करते हैं तो आपका यह छोटा प्रयास एक सच्ची श्रद्धाँजलि बन जाता है और एक महाप्रयास के द्वार खोलता है। हम निवेदन करेंगे कि आप इसी ऊर्जा के साथ गीतकास्ट के अन्य अंक में भी भाग लेते रहें।


इस कड़ी के प्रायोजक अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के वरिष्ठ सदस्य तथा इसके न्यू यार्क चैप्टर के अध्यक्ष शेर बहादुर सिंह हैं। यदि आप भी इस आयोजन को स्पॉनसर करता चाहते हैं तो hindyugm@gmail.com पर सम्पर्क करें।

Sunday, June 7, 2009

जयशंकर प्रसाद की कविता का सुरबद्ध और संगीतबद्ध रूप (परिणाम)

गीतकास्ट प्रतियोगिता- परिणाम-1: अरुण यह मधुमय देश हमारा

पिछले महीने जब महान कवियों की कविताओं को सुरबद्ध और संगीतबद्ध करने का विचार बना था, तो हमारे मन एक डर था कि बहुत सम्भव है कि इसमें प्रतिभागिता बहुत कम हो। क्योंकि यह प्रतियोगिता कविता प्रतियोगिता जितनी सरल नहीं है। इसमें एक ही कविता को कई बार गाकर, रिकॉर्ड करके साधना होता है। लेकिन आपको भी यह जानकर आश्चर्य होगा कि गीतकास्ट प्रतियोगिता के पहले ही अंक में 12 प्रतिभागियों ने भाग लिया। जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' को 12 अलग धुनों में पिरोया गया। इतना ही नहीं, हमने बहुत से प्रतिभागियों से जब यह कहा कि रिकॉर्डिंग और उच्चारण में कुछ कमी रह गई है, तो उन्होंने दुबारा, तिबारा रिकॉर्ड करके भेजा।

गीतकास्ट प्रतियोगिता के माध्यम से हमारी कोशिश है कि पॉडकास्टिंग की रचनात्मक परम्परा हिन्दी में जुड़े। इस शृंखला में हम पहला प्रयोग या प्रयास छायावाद के चार स्तम्भ कवियों की कविताओं को संगीतबद्ध/सुरबद्ध करके करना चाहते हैं। पाठकों, श्रोताओं, गायकों और संगीतकारों की पूर्ण सहभागिता के बिना यह सफल नहीं हो पायेगा। छायावाद के कवियों की कविताओं के संगीत-संयोजन की पहली कड़ी गीतकास्ट प्रतियोगिता की पहली कड़ी है, जिसमें हमने जयशंकर प्रसाद की कविता को संगीतबद्ध/सुरबद्ध करवाया है। अगली कड़ी सुमित्रानंदन पंत की कविता की होगी, जिसकी उद्‍घोषणा 10 जून 2009 को की जायेगी।

जयशंकर प्रसाद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' के लिए प्राप्त कुल 12 प्रविष्टियों से श्रेष्ठ प्रविष्टि चुनने के लिए दो चरणों में निर्णय कराया गया। पहले चरण में तीन निर्णयकर्ता रखे गये। यहाँ से 6 प्रविष्टियों को अंतिम निर्णयकर्ता आदित्य प्रकाश को भेजा गया। आदित्य प्रकाश पहले और दूसरे स्थान की प्रविष्टि में उलझ गये। बहुत सोचा कि किसे प्रथम रखूँ, किसे द्वितीय? यह तय कर पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था क्योंकि एक प्रविष्टि में कविता की आत्मा पूरी तरह से मुखरित हो रही थी तो दूसरे में संगीत का नया प्रयोग नवपीढ़ियों को लगभग 100 साल पुरानी कविता से जोड़ पा रहा था। एक में आवाज़ की मधुरता मन मोह रही थी तो दूसरे में संगीत की विविधता थिरका रही थी। तो आखिरकार आदित्य प्रकाश ने यह निर्णय लिया कि दोनों को प्रथम स्थान दिया जाय और रु 1000 का नग़द इनाम दोनों को ही दिया जाय। मतलब कुल रु 2000 का नगद इनाम पहले स्थान के लिए।

ये दोनों कौन हैं और इन्होंने कैसा गाया है आप खुद पढ़ लें और सुन लें।

स्वप्न मंजूषा 'शैल'

24 अगस्त को राँची में जन्मी स्वप्न मंजूषा 'शैल' कविमना हैं। कला के प्रति रुझान बचपन से रहा, नाटक और संगीत में भरपूर रूचि होने के कारण आकाशवाणी और दूरदर्शन से लम्बे समय तक जुड़ी रहीं, टी-सीरिज में गाने का सौभाग्य मिला और प्रोत्साहन भी, संगीत की बहुत सारी प्रतियोगिताओं में भाग लिया और पुरस्कृत हुईं। आकाशवाणी रांची और दिल्ली के कई नाटकों में आवाज़ दी, जैसे महाभारत में रामायण, एक बेचारा शादी-शुदा इत्यादि। इंदिरा गाँधी मुक्त विश्वविद्यालय में, सॉफ्टवेर इंजिनियर के पद पर ५ वर्षों तक कार्यरत होने के बाद, मॉरीसस ब्रोडकास्टिंग कारपोरेशन के लिए २ वर्षों तक टेलिविज़न पर प्रोग्राम प्रस्तुत किया, मॉरीसस में, हिंदी को टेलिविज़न के माध्यम से लोकप्रिय, बनाने की शुरुआत में, पति संतोष शैल और इन्होंने एक छोटी सी लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछले कई वर्षों से कनाडा में हैं और कनाडियन गवर्नमेंट के विभिन्न विभागों ( HRDC, PWGSC, National Defence, Correctional Services of Canada ) में सिस्टम्स अनालिस्ट के पद पर कार्यरत रह चुकी हैं। अब पेशे से प्रोजेक्ट मैनेजेर हैं, हाल ही में Ethiopian Govenment की Educational Television Program production का प्रोजेक्ट जिसमें ४५० फिल्में मात्र ३ महीने में बनायीं गई, कि प्रोजेक्ट मैनेजेर ये ही थीं।
२००४ में कनाडा में Chin Radio पर हिंदी में "आरोही " प्रोग्राम ९७.९ FM की शुरुआत की और उसे लोगों के दिलों तक पहुँचाया, इस कार्यक्रम ने लोकप्रियता का नया कीर्तमान ओटावा कि भूमि पर स्थापित किया।
बचपन से ही कविता लिखने का शौक़ रहा, इनकी २ कवितायेँ पुरस्कृत हुई हैं "गुमशुदा" और 'एकादशानन' ।
कई कविताएँ 'काव्यालय', 'अभिव्यक्ति', 'अनुभूति', 'गर्भनाल', जैसी साइट्स पर छप चुकीं हैं, इनकी एक पुस्तक भी छपी है, जिसका नाम है 'काव्य मंजूषा'।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 1000 का नग़द इनाम
विशेष- भारतीय समयानुसार 8 जून 2009 की सुबह 7:30 बजे डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के 'कवितांजलि' कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
गीत सुनें-
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कृष्ण राज कुमार

एक नौजवान संगीतकार और गायक हैं। कृष्ण राज कुमार जो मात्र २२ वर्ष के हैं, और जिन्होंने अभी-अभी अपने B.Tech की पढ़ाई पूरी की है, पिछले १४ सालों से कर्नाटक गायन की दीक्षा ले रहे हैं। इन्होंने हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र के संगीतबद्धों गीतों में से एक गीत 'राहतें सारी' को संगीतबद्ध भी किया है। ये कोच्चि (केरल) के रहने वाले हैं। जब ये दसवीं में पढ़ रहे थे तभी से इनमें संगीतबद्ध करने का शौक जगा।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 1000 का नग़द इनाम
विशेष- भारतीय समयानुसार 8 जून 2009 की सुबह 7:30 बजे डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के 'कवितांजलि' कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
गीत सुनें-

64kbps

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अब हम बात करते हैं तीसरे स्थान के विजेता की, जिन्होंने संगीतबद्ध तो नहीं किया, लेकिन सुरबद्ध ज़रूर किया है।

धर्मेंद्र कुमार सिंह

हिंदी-भोजपुरी के युवा गायक हैं. स्टेज, रेडियो, दूरदर्शन और विभिन्न चैनलों पर कार्यक्रम पेश कर चुके हैं, लेकिन अभी भी एक ऐसा प्लेटफार्म मिलना बाकी है जो इन्हें मुकाम तक पहुँचा सके। आजकल भोजपुरी के स्तरीय गीतों और गज़लों को आवाज देने में लगे हैं।

पुरस्कार- तृतीय पुरस्कार, रु 500 का नग़द इनाम
विशेष- भारतीय समयानुसार 15 जून 2009 की सुबह 7:30 बजे डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के 'कवितांजलि' कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
गीत सुनें-
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इसके अतिरिक्त हमारी टीम को मनोहर लेले की प्रविष्टि भी सराहनीय लगी। हम वह प्रविष्टि भी अपने श्रोताओं के समक्ष रख रहे हैं।



विभा झालानी, लतिका भटनागर, कमल किशोर सिंह, रमेश धुस्सा, पूजा अनिल, कमलप्रीत सिंह, मुकेश सोनी और अम्बरीष श्रीवास्तव के भी आभारी हैं जिन्होंने इस प्रतियोगिता में भाग लेकर इसे सफल बनाया। इन सभी प्रतिभागियों की प्रविष्टियों में भी कविता को अलग ढंग से सुनने का अपना आनंद है, लेकिन कविता और रिकॉर्डिंग दोनों की तकनीकी और कलात्मक खूबियों और ख़ामियों के मद्देनज़र हमारी टीम ने उपर्युक्त निर्णय लिया है। हम उम्मीद करते हैं कि सभी प्रतिभागी इसे सकारात्मक लेंगे और गुजारिश करते हैं कि अगली बार भी गीतकास्ट आयोजन में ज़रूर भाग लें।

इस कड़ी के प्रायोजक रेडियो सलाम नमस्ते के उद्‍घोषक, कवि, वैज्ञानिक और हिन्दीकर्मी आदित्य प्रकाश हैं। यदि आप भी इस आयोजन को स्पॉनसर करता चाहते हैं तो hindyugm@gmail.com पर सम्पर्क करें।

Wednesday, September 17, 2008

जैसे ही देखा मोहिंदर कुमार जी का गीत, लगा कि धुन मिल गयी...

हिंद युग्म की नयी खोज हैं, संगीतकार और गायक कृष्ण राज कुमार, जो हैं आवाज़ पर इस हफ्ते के उभरते सितारे. २२ वर्षीय कृष्ण राज दक्षिण भारत के कोच्ची केरल से हैं, अभी अभी अपनी पढ़ाई पूरी की है इन्होने. संगीत का शौक बचपन से है और पिछले १४ सालों से कर्णाटक संगीत में दीक्षा ले रहे हैं. आवाज़ पर इनका पहला स्वरबद्ध किया और गाया हुआ गीत "राहतें सारी" इस शुक्रवार को ओपन हुआ था और बेहद सराहा भी गया, जिससे कृष्ण कुमार के हौसले यकीनन बढ़े हैं और हमारे श्रोता आने वाले दिनों में उनसे और बेहतर गीतों की उम्मीद रख सकते हैं. दरअसल हर गीत की तरह इस गीत की भी एक कहानी है. आईये जानते हैं ख़ुद कृष्ण कुमार से की कैसे बना ये सुमधुर गीत. (कृष्ण हिंद युग्म से हिन्दी टंकण अभी सीख रहे हैं, पर यहाँ प्रस्तुत उनका यह अनुभव अभी मूल रूप में ही आपके सामने है)

First of all I thank God for blessing me, second I thank sajeev ji for giving me an opportunity to showcase my talent and last but not the least I thank Mohinder kumar ji for providing such a wonderful lyrics without which I wouldn’t be able to compose the song.


My name is Krishna Raj Kumar. I am from cochin, kerala. I just completed my Btech. Basically I am a singer and I have been learning classical music for 14 years. My interest in composing music started when I was in my 10th. From there onwards I was more interested in composing music.

My introduction to hindyugm was made by Niran kumar of "pehla sur" fame. It was through him that I got to meet Sajeev sarathie ji. First when I visited hindyugm site I saw an ad calling for singers. I thought why not compose a song and also sing the song in my voice. So the next thing that came in my mind was what to compose??? While browsing the site suddenly I saw the poetry section and I browsed through all the poems in that section. To be frank all were poems!!!!! I mean I knew I was in the poetry section but to me it was like oh!! I don’t think I can compose tune for poems….But then I saw mohinder kumar ji’s "Raahate saari aagayi…" Hmmmm…..ok I think I got a tune…then there was no looking back actually….i composed the first stanza and then I send it to sajeev ji…..He liked the tune and my voice. He said to compose the whole song and also suggested me to sing the whole song in one flow as it’s a poem it would be better to sing it in one flow. He also suggested that let the last stanza “dhosto ne nibha di dushmani pyaar se” be repeated.. I did the composing according to what he suggested. It took me sometime to compose the song and also the orchestration as all the work was done by me.And the song was born…

I thank all of you for taking time in listening to this song and also thank all of you for posting your valuable comments. I have your valuable comments and I will improve on it the next time.

Also thank mohinder kumar ji for his beautiful lyrics and once again Sajeev ji and the whole hindyugm team for putting up a blog where people like me are able to showcase their talents. It’s a wonderful thing because we are able to find hidden talents.

All the best hindyugm team.

God bless you!!!!

-Krishna Raj Kumar

दोस्तों, तो ये थे संगीत की दुनिया के नए सुरबाज़, कृष्ण राज कुमार. आईये एक फ़िर आनंद लें उनके इस पहले पहले गीत का और इस प्रतिभावान गायक/संगीतकार को अपना प्रोत्साहन देकर हौंसलाअफजाई करें.
(गीत को सुनने के लिए नीचे के पोस्टर पर क्लिक करें)



आप भी इसका इस्तेमाल करें

Friday, September 12, 2008

दोस्तों ने निभा दी दुश्मनी प्यार से...

दूसरे सत्र के ग्यारहवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

ग्यारहवें गीत के साथ हम दुनिया के सामने ला रहे हैं एक और नौजवान संगीतकार कृष्ण राज कुमार को, जो मात्र २२ वर्ष के हैं, और जिन्होंने अभी-अभी अपने B.Tech की पढ़ाई पूरी की है, पिछले १४ सालों से कर्नाटक गायन की दीक्षा ले रहे हैं. कृष्ण का परिचय हिंद युग्म से, "पहला सुर" के संगीतकार निरन कुमार ने कराया, कृष्ण कुमार जिस दिन हिंद युग्म के कविता पृष्ट पर आए, उसी दिन युग्म के वरिष्ट कवि मोहिंदर कुमार की ताजी कविता प्रकाशित हुई थी, कृष्ण ने उसी कविता / गीत को स्वरबद्ध करने का हमसे आग्रह किया.

लगभग डेढ़ महीने तक इस पर काम करने के बाद उन्होंने इस गीत को मुक्कमल कर अपनी आवाज़ में हमें भेजा, जिसे हम आज आपके समक्ष लेकर हाज़िर हुए हैं, हम चाहेंगे कि आप इस नए, प्रतिभावान संगीतकार/गायक को अपना प्रोत्साहन और मार्गदर्शन अवश्य दें.

गीत को सुनने के लिए प्लेयर पर क्लिक करें -



With this new song, we are introducing another new singer / composer from Cochi, Krishna Raj Kumar, lyrics are provided by another Vattern poet from Hind Yugm, Mohinder Kumar, the song is more like a poetry about relationships and the hard facts of life. We hope you will like this presentation, give your guidance to this young composer, so that he can better himself for the future.

Click on the player to listen to this brand new song



Lyrics - गीत के बोल

राहतें सारी आ गई हिस्से में उनके
और उजाले दामन के सितारे हो गये
चांद मेरा बादलों में खो गया है
कौन जाने इस घटा की क्या वजह है

आखिरी छोर तक जायेगा साथ मेरे
और फ़िर वो साया भी मेरा न होगा
ख्वाबों के लिये हैं ये सातों आसमान
हकीकत के लिये पथरीली सतह है


राहों से मंजिलों का पता पूछता है
बीच राह में गुमराह राही हो गया है
कौन जाने गुजरे पडाव मंजिलें हों
भूलना ही हार को असली फ़तह है

दोस्तों ने निभा दी दुश्मनी प्यार से
सोचने को अब बाकी क्या बचा है
राह शोलों पर भी चल कर कट जायेगी
इस दिल मे जख्मों के लिये जगह है...

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)



VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis


SONG # 11, SEASON # 02, "RAHATEN SAARI" OPENED ON 12/09/2008, ON AWAAZ, HIND YUGM.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion


ब्लॉग/वेबसाइट/ऑरकुट स्क्रैपबुक/माईस्पैस/फेसबुक में "राहतें सारी" का पोस्टर लगाकर नये कलाकारों को प्रोत्साहित कीजिए

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