शनिवार, 28 मार्च 2009

भीगी भीगी फज़ा, छन छन छनके जिया...

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 36

ता मंगेशकर और आशा भोंसले, फिल्म संगीत के आकाश में चमकते सूरज और चाँद. यूँ तो यह दोनो बहनें अपने अपने तरीके से नंबर-1 हैं, लेकिन गुलज़ार साहब के शब्दों में, आर्मस्ट्रॉंग और एडविन, दोनो ने ही चाँद पर कदम रखा था लेकिन क्योंकि आर्मस्ट्रॉंग ने पहले कदम रखा, उन्ही का नाम पहले लिया जाता है. ठीक इसी तरह से लताजी को पहला और आशाजी को दूसरा स्थान दिया जाता है पार्श्वगायिकाओं में. सुनहरे दौर में एक प्रथा जैसी बन गयी थी कि जिस फिल्म में लताजी और आशाजी दोनो के गाए गीत होते थे, उसमें लताजी 'नायिका' का पार्श्वगायन करती थी और आशाजी दूसरी नायिका, या नायिका की सहेली, या फिर खलनायिका के लिए गाती थी. ऐसी ही फिल्म थी "अनुपमा" जो आज अमर हो गयी है अपने गीत संगीत की वजह से. हेमंत कुमार के संगीत से संवारे हुए जितनी भी फिल्में हैं, उनमें अनुपमा का एक ख़ास मुकाम है. आज 'ओल्ड इस 'गोल्ड' में फिल्म अनुपमा से एक गीत पेश है.

1966 में बनी थी अनुपमा जिसके मुख्य कलाकार थे शर्मिला टैगोर और धर्मेन्द्र. और शर्मिला की सहेली और धर्मेन्द्र की बहन बनी शशिकला. लता मंगेशकर ने शर्मिला के लिए अगर दो खूबसूरत गीत गाए तो आशा भोंसले ने भी शशिकला के लिए दो बेहद 'हिट' गीत गाए. फिल्म की कहानी के मुताबिक लताजी के गाए यह गाने ज़रा संजीदे किस्म के थे और दूसरी तरफ आशाजी के गाने बेहद खुशमिजाज़ और खुशरंग. इनमें से एक गीत था "क्यूँ मुझे इतनी खुशी दे दी कि घबराता है दिल", और दूसरा गीत जो आज 'ओल्ड इस गोल्ड' की शान बना है, वो था "भीगी भीगी फजा सुन सुन सुन के जिया". फिल्म में यह गीत शशिकला अपने सहेलियों के साथ 'पिकनिक' मनाते हुए गाती हैं. गीतकार कैफ़ी आज़मी के बोल और हेमंत कुमार का संगीत आज 'ओल्ड इस गोल्ड' में पहली बार पेश हो रहा है दोस्तों.



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाईये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं -

१. सलिल चौधरी का संगीत, राजेंदर कृष्ण के बोल.
२. सुनील दत्त थे हृषिकेश मुख़र्जी निर्देशित इस फिल्म की प्रमुख भूमिका में.
३. तलत साहब के गाये इस गीत में मुखड़े में शब्द आता है - "मोती".

कुछ याद आया...?

सूचना - ओल्ड इस गोल्ड का अगला अंक सोमवार शाम को प्रसारित होगा.

पिछली पहेली का परिणाम -
लीजिये वहाँ न्यूजीलैंड में भारतीय बल्लेबाज़ फ्लॉप हुए यहाँ हमारे धुरंधर भी मुंह के बल गिरे. ह्म्म्म क्या किया जाए....गीत का आनंद लीजिये.

खोज और आलेख- सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम ६-७ के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवायेंगे, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.




2 टिप्‍पणियां:

Neeraj Rohilla ने कहा…

फ़िल्म: छाया
आंसू समझ के क्यों मुझे आंख से तुमने गिरा दिया,
मोती किसी के प्यार का मिट्टी में क्यों मिला दिया।

पिछली क्विज में हम सीधे क्लीन बोल्ड हो गये थे, बहुत याद किया लेकिन ये गीत याद नहीं आया। ये गीत पहले सुना हुआ था लेकिन काफ़ी अरसा पहले, आज इस चिट्ठे पर इस गीत को बहुत समय के बाद सुना है।

बहुत धन्यवाद,

manu ने कहा…

raat do baje bijli aayee hai,,,,,jhay pat uthaa hoo pahle dekhne,,,,kal sunoongaa,,,,parr mujhdaaa padh ke yaad aa gayaa,,,

ye waalaa jawaab waakai assaan hai,,,,,

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