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Friday, March 21, 2014

'बेबी डौल' की मादक अदाएं और 'गुलछर्रे' उडाती मस्तियाँ

ताज़ा सुर ताल 2014 -10 

ताज़ा सुर ताल में आज चर्चा इस माह के सबसे हिट गीत की. पोर्न स्टार सनी लियोनि अब तक के सबसे बोल्ड अवतार में अवतरित होने वाली हैं फिल्म रागिनी एम् एम् एस २  में. फिल्म में मुक्तलिफ़ संगीतकारों ने योगदान दिया है. सबसे अधिक चर्चा में है बेबी डौल  गीत जो इन दिनों हर पार्टी में धूम मचा रहा है. मीत बंधुओं और अनजान की तिकड़ी ने इस गीत के लिए एक अनूठी रिदम का चयन किया है, जिसे सुनकर कदम बरबस ही थिरक उठते हैं. कुमार के शब्द भी पूरी तरह मेल खाते हैं गीत के थीम से. जैसा कि हम आपको पहले भी बता चुके हैं कि मीत बंधू अपने रचित हर गीत में अपनी आवाज़ का तडका अवश्य लगाते हैं, लेकिन गीत की प्रमुख गायिका है कनिका कपूर जिनकी आवाज़ और अदायगी में एक अंतरास्ट्रीय अपील है, शायद ये बॉलीवुड में उनका पहला गीत है पर उन्होंने बेहद ऊर्जा के साथ गीत को अंजाम दिया है. तो लीजिए सुनिए और झूमिए बेबी डोल  के संग 
आज का दूसरा गीत भी कुछ थिरकता मचलता ही है. नुपुर अस्थाना निर्देशित बेवकूफियां  की कहानी लिखी है हबीब फैज़ल ने. फिल्म के संगीतकार हैं रघु दीक्षित, जो एक बेहद प्रतिभाशाली गायक-संगीतकार हैं जो दक्षिण भारतीय फिल्मों में काफी सफल फ़िल्में कर चुके हैं. हिंदी फिल्म जगत में उन्होंने कदम रखा मुझसे फ्रेंडशिप करोगे  से वर्ष २०११ में, कह सकते हैं कि प्रस्तुत फिल्म उनका दूसरा प्रोजेक्ट है हिंदी में. फिल्म के ये गीत गुल्चर्रे  इन दिनों युवा श्रोताओं को पसंद आ रहा है. बेनी दयाल की जोशीली आवाज़ की मोहर इस गीत पर पूरी तरह हावी है. बेनी दिन बा दिन निखारते जा रहे हैं. लीजिए सुनिए ये गीत भी जिसे लिखा है अन्विता दत्त ने. 
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Tuesday, January 4, 2011

दिल तो बच्चा है जी.....मधुर भण्डारकर की रोमांटिक कोमेडी में प्रीतम ने भरे चाहत के रंग

Taaza Sur Taal 01/2011 - Dil Toh Bachha Hai ji

'दिल तो बच्चा है जी'...जी हाँ साल २०१० के इस सुपर हिट गीत की पहली पंक्ति है मधुर भंडारकर की नयी फिल्म का शीर्षक भी. मधुर हार्ड कोर संजीदा और वास्तविक विषयों के सशक्त चित्रिकरण के लिए जाने जाते हैं. चांदनी बार, पेज ३, ट्राफिक सिग्नल, फैशन, कोपरेट, और जेल जैसी फ़िल्में बनाने के बाद पहली बार उन्होंने कुछ हल्की फुल्की रोमांटिक कोमेडी पर काम किया है, चूँकि इस फिल्म में संगीत की गुंजाईश उनकी अब तक की फिल्मों से अधिक थी तो उन्होंने संगीतकार चुना प्रीतम को. आईये सुनें कि कैसा है उनके और प्रीतम के मेल से बने इस अल्बम का ज़ायका.

नीलेश मिश्रा के लिखे पहले गीत “अभी कुछ दिनों से” में आपको प्रीतम का चिर परिचित अंदाज़ सुनाई देगा. मोहित चौहान की आवाज़ में ये गीत कुछ नया तो नहीं देता पर अपनी मधुरता और अच्छे शब्दों के चलते आपको पसंद न आये इसके भी आसार कम है. “है दिल पे शक मेरा...” और प्रॉब्लम के लिए “प्रोब” शब्द का प्रयोग ध्यान आकर्षित करता है. दरअसल ये एक सामान्य सी सिचुएशन है हमारी फिल्मों की जहाँ नायक अपने पहली बार प्यार में पड़ने की अनुभूति व्यक्त करता है. संगीत संयोजन काफी अच्छा है और कोरस का सुन्दर इस्तेमाल पंचम के यादगार "प्यार हमें किस मोड पे ले आया" की याद दिला जाता है.

abhi kuch dinon se (dil toh bachha hai ji)



सोनू निगम की आवाज़ में “तेरे बिन” एक और मधुर रोमांटिक गीत है, जो यक़ीनन आपको सोनू के शुरआती दौर में ले जायेगा. कुमार के हैं शब्द जो काफी रोमांटिक है. अगला गीत “ये दिल है नखरे वाला” वाकई एक चौंकाने वाला गीत है. अल्बम के अब तक के फ्लेवर से एकदम अलग ये गीत गुदगुदा जाता है, जैज अंदाज़ का ये गीत है जिसमें कुछ रेट्रो भी है. निलेश ने बहुत ही बढ़िया लिखा है इसे. शेफाली अल्वरिस की आवाज़ जैसे एकदम सटीक बैठती है इस गीत में. ये गीत ‘पिक ऑफ द अल्बम’ है.

tere bin (dil toh bachha hai ji)



ye dil hai nakhre waala (dil toh bachha hai ji)



कुणाल गांजावाला की आवाज़ में अगले २ गीत हैं. “जादूगरी” में उनकी सोलो आवाज़ है तो “बेशुबा” में उनके साथ है अंतरा मित्रा. जहाँ पहला गीत साधारण ही है, दूसरे गीत में जो कि अल्बम का एकलौता युगल गीत है, प्रीतम अपने बहतरीन फॉर्म में है. सईद कादरी से आप उम्मीद रख ही सकते हैं, और वाकई उनके शब्द गीत की जान हैं.

jaadugari (dil toh bachha hai ji)



beshubah (dil toh bachha hai ji)



हमारी राय – साल की शुरूआत के लिए ये नर्मो नाज़ुक रोमांटिक एल्बम एक बढ़िया पिक है. लगभग सभी गीत प्यार मोहब्बत में डूबे हुए हैं. प्रीतम कुछ बहुत नया न देकर भी अपने चिर परिचित अंदाज़ के गीतों से लुभाने में सफल रहे हैं.



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं। "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है। आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रूरत है उन्हें ज़रा खंगालने की। हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं।

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