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Tuesday, June 22, 2010

बहुत कुछ खत्म होके भी हिमेश भाई और संगीत के दरम्यां कुछ तो बाकी है.. और इसका सबूत है "मिलेंगे मिलेंगे"

ताज़ा सुर ताल २३/२०१०

सुजॊय - सभी श्रोताओं व पाठकों का स्वागत है 'ताज़ा सुर ताल' के एक और ताज़े अंक में। इस शुक्रवार वह फ़िल्म आख़िर रिलीज़ हो ही गई जिसकी लोग बड़ी बेसबरी से इंतज़ार कर रहे थे। 'रावण'। अभी दो दिन पहले एक न्यूज़ चैनल पर इस फ़िल्म से संबंधित 'ब्रेकिंग्‍ न्यूज़' का शीर्षक था "मिया पर बीवी हावी"। ग़लत नहीं कहा था उस न्यूज़ चैनल ने। हालाँकि अभिषेक ने अच्छा काम किया है, लेकिन ऐश की अदाकारी की तारीफ़ करनी ही पड़ेगी। देखते हैं फ़िल्म कैसा व्यापार करता है इस पूरे हफ़्ते में।

विश्व दीपक - मैने रावण देखी और मुझे तो बेहद पसंद आई। मैने ना सिर्फ़ इस फिल्म का हिन्दी संस्करण देखा बल्कि इसका तमिल संस्करण (रावणन) भी देखा.. और दुगना आनंद हासिल किया । चलिए 'रावण' से आगे बढ़ते हैं। आज हम इस स्तंभ में जिस फ़िल्म के गानें सुनने जा रहे हैं, वह कई दृष्टि से अनोखा है। पहली बात तो यह कि इस फ़िल्म की मेकिंग बहुत पहले से ही शुरु हो गई थी जब शाहीद और करीना का ब्रेक-अप नहीं हुआ था। तभी तो यह जोड़ी नज़र आएगी इस फ़िल्म में। शायद यही बात फ़िल्म की सफलता का कारण बन जाए, किसे पता! दूसरी बात यह कि इसमें हिमेश रेशम्मिया का संगीत है, लेकिन वैसा संगीत नहीं जैसा कि वो आजकल की फ़िल्मों में दे रहे हैं। मेरा ख़याल है कि इस फ़िल्म के गानें भी बहुत पहले से ही बन चुके होंगे, जिस समय हिमेश अपनी आवाज़ के मुकाबले सोनू निगम, शान, अलका याज्ञ्निक, श्रेया घोषाल जैसे गायकों को ज़्यादा मौका दिया करते थे। इसलिए जिन श्रोताओं को हिमेश की आवाज़ से ऐलर्जी है, वो शायद इस बार इस फ़िल्म के गानें सुनने में दिलचस्पी लें।

सुजॊय - सही कहा आपने। दरसल मुझे जितना पता है, 'मिलेंगे मिलेंगे' आज से पाँच साल पहले प्लान की गई थी, और उस समय हिमेश का स्टाइल कुछ और ही हुआ करता था। इस फ़िल्म के गीतों में सुनने वालों को उस पुराने हिमेश और आज के हिमेश का संगम सुनाई देगा। 'मिलेंगे मिलेंगे' के निर्देशक हैं सतीश कौशिक, जिनके साथ हिमेश ने अपनी सब से बेहतरीन फ़िल्म 'तेरे नाम' में संगीत दिया था। इसके अलावा 'वादा' और 'रन' फ़िल्म में भी ये दोनों साथ में आए थे। और कहने की ज़रूरत नहीं कि इन दो फ़िल्मों के गानें भी चले थे भले ही फ़िल्में फ़्लॊप हुईं थीं। आज इस फ़िल्म के गीतों को सुनते हुए हमें अहसास हो जाएगा कि क्या हिमेश फिर से एक बार पिछले दशक के अपने मेलोडियस गीतों की तरह इस फ़िल्म में भी वैसा ही कुछ संगीत दे पाएँ हैं! 'तेरे नाम', 'दिल मांगे मोर', 'चुरा लिया है तुमने' आदि फ़िल्मों का ज़माना क्या वापस आ पाएगा इस फ़िल्म के ज़रिए?

विश्व दीपक - अब बातों को देते हैं विराम और सुनते हैं फ़िल्म का पहला गीत हिमेश की आवाज़ में। फ़िल्म के गानें लिखे हैं गीतकार समीर ने। और आपको बता दें कि इस गीत के ज़रिए ही फ़िल्म का प्रोमो इन दिनों दिखाया जा रहा है टेलीविज़न पर।

गीत: कुछ तो बाक़ी है


सुजॊय - "कुछ तो बाक़ी है"। विश्व दीपक जी, इस गीत को सुन कर हिमेश की आवाज़ और गायन शैली के बारे में कुछ नहीं कहूँगा क्योंकि कुछ नयी बात कहने की कोई गुंजाइश बाक़ी नहीं है। लेकिन संगीत और संगीत संयोजन अच्छा है और इतना तो ज़रूर कह सकते हैं कि हिमेश के संगीत में अभी बहुत कुछ बाक़ी है। आपका क्या ख़याल है?

विश्व दीपक - यह गीत यक़ीनन एक ऐसा गीत है जो एक मूड बना देता है और दोबारा सुनने के लिए उकसा देता है। समीर की लेखन शैली और स्टाइल साफ़ झलकता है इस गीत में। और जहाँ तक ऒर्केस्ट्रेशन का सवाल है, इसमें तबला, हारमोनियम और सारंगी जैसे साज़ों की ध्वनियों का सुंदर प्रयोग किया गया है। और सब से बड़ी बात यह कि इस गीत के जो बोल हैं वो फ़िल्म के किरदारों पर ही नहीं बल्कि शाहीद-करीना की निजी ज़िंदगी को भी छू जाते हैं। "सब ख़त्म होके भी तेरे मेरे दरमीयाँ कुछ तो बाक़ी है" - अब इस तरह के बोल जान बूझ कर डाले गऎ है या फिर एक महज़ इत्तेफ़ाक़ है, यह तो हम नहीं जानते हैं, लेकिन जो भी है मज़ेदार बन पड़ा है। मीडिया को भी भरपूर ख़ुराक मिलने वाला है इस फ़िल्म के रिलीज़ पर।

सुजॊय - आगे बढ़ते हैं और दूसरा जो गीत है उसे गाया है अलका याज्ञ्निक और जयेश गांधी ने। यह फ़िल्म का शीर्षक गीत है "मिलेंगे मिलेंगे", और इसी का एक और वर्ज़न भी है जिसे हम आगे चलकर सुनेंगे।

गीत: मिलेंगे मिलेंगे (अलका/जयेश)


सुजॊय - बहुत दिनों के बाद अलका की आवाज़ सुन कर अच्छा लगा। एक बात जो मैंने नोटिस की इस गीत को सुनते हुए कि इस गीत का जो ऒरकेस्ट्रेशन है, वह हिमेश के पहले के गीतों में कई कई बार हो चुका है। मुझे पता नहीं वह कौन-सा साज़ है, लेकिन इस गीत में आपको उस साज़ की धुन सुनाई देगी जिसका हिमेश ने "चुरा लिया है तुमने" गीत में भी प्रोमिनेण्ट तरीके से किया था। पार्श्व में कोरस का इस्तेमाल भी हिमेश ने अपने उसी पुराने शैली में किया है। गीत ठीक ठाक है, लेकिन कोई नई बात नज़र नहीं आई।

विश्व दीपक - और अब सोनू निगम और अलका याज्ञ्निक की युगल आवाज़ें। सुजॊय, क्या आप बता सकते हैं कि इससे पहले आपने सोनू और अलका की युगल आवाज़ें किस फ़िल्म में आख़िरी बार सुना था?

सुजॊय - मेरा ख़याल है पिछले ही साल फ़िल्म 'लाइफ़ पार्टनर' में "कल नौ बजे तुम चांद देखना" जो गीत है, उसी में ये दोनों साथ में आए थे।

विश्व दीपक - और उस गीत की तरह यह गीत भी नर्मोनाज़ुक है और इस जोड़ी ने पूरा न्याय किया है। वैसे इसे पूरी तरह से युगल कहना ग़लत होगा। भले ही फ़िल्म के सी.डी पर सोनू और अलका के नाम दिए गए हैं, लेकिन इसमें सुज़ेन डी'मेलो ने अंग्रेज़ी के बोल गाए हैं जिनकी इस गीत में कोई ज़रूरत नहीं थी।

गीत: तुम चैन हो


सुजॊय - बिलकुल सही कहा था आपने कि उन अंग्रेज़ी के शब्दों की कोई ज़रूरत नहीं थी। ज़रा याद कीजिए फ़िल्म 'लगान' के उस गीत को, "ओ री छोरी", जिसमें वसुंधरा दास ने अंग्रेज़ी की पंक्तियाँ गाईं थीं। इसका ज़िक्र मैं यहाँ इसलिए कर रहा हूँ यह बताने के लिए कि उस गीत में वह न्यायसंगत था, लेकिन इस गीत में उसकी ज़रूरत शायद ही थी। ख़ैर, सोनू निगम ने फिर एक बार अपने बेहतरीन अंदाज़ में गायन प्रस्तुत किया है, और हिमेश के अनुसार वो हैं ही आज के नंबर वन गायक। एक बार करण जोहर के 'कॊफ़ी विथ करण' में जब करण ने कई गायकों को १ से १० के स्केल में रेट करने को कहा था, तब हिमेश ने उदित नारयण को ७ और सोनू निगम को १० की रेटिंग्‍ दी थी। अलका के खाते में आए थे ८ की रेटिंग। ख़ैर, ये तो हिमेश की व्यक्तिगत राय थी।

विश्व दीपक - अगला गीत है "इश्क़ की गली है मखमली"। राहत फ़तेह अली ख़ान और जयेश गांधी की आवाज़ें। राहत साहब गाने की शुरुआत करते हैं और फिर उसके बाद जयेश गीत को आगे बढ़ाते हैं। राहत साहब अपने अंदाज़ के ऊँचे सुर में "इश्क़ की गली है मखमली रब्बा" गाते हैं, जब कि जयेश भी अपने ही अंदाज़ में "मेरे दिल को तुमसे कितनी मोहब्बत" गाते हैं। उनकी आवाज़ भी मौलिक आवाज़ है और किसी और से नहीं मिलती।

सुजॊय - इससे पहले राहत फ़तेह अली ने हिमेश रेशम्मिया की धुन पर फ़िल्म 'नमस्ते लंदन' का मशहूर गीत "मैं जहाँ रहूँ" गाया था। लेकिन उस गीत में जो बात थी, वह असर 'मिलेंगे मिलेंगे' के इस गीत में नहीं आ पाया है। चलिए सुनते हैं।

गीत: इश्क़ की गली है मखमली


विश्व दीपक - अगला जो गीत है वह थोड़ा सा अलग हट के है इसलिए क्योंकि आजकल इस तरह के गानें बनने लगभग बंद ही हो गए हैं। ९० के दशक और २००० के दशक के शुरुआती सालों तक इस तरह के "चूड़ी-कंगन" वाले गानें बहुत बनें हैं, लेकिन आज के फ़िल्मों के विषयवस्तु इस तरह के होते हैं कि इस तरह के गीतों के लिए कोई जगह या सिचुएशन ही नहीं पैदा हो पाती। यह है अलका यज्ञ्निक और साथियों की आवाज़ों में "ये हरे कांच की चूड़ियाँ, पहनी तेरे नाम की, राधा हो गई श्याम की"। वैसे बोल तो साधारण हैं लेकिन धुन ऐसी कैची है कि सुनते हुए अच्छा लगता है।

सुजॊय - और गाने के अंत में "मिलेंगे मिलेंगे" वाले गीत की धुन पर कोरस "मिलेंगे मिलेंगे" गा उठते हैं। और विश्व दीपक जी, इस गाने से याद आया कि ६० के दशक में एक फ़िल्म आई थी 'हरे काँच की चूड़ियाँ', जिसमें आशा भोसले का गाया शीर्षक गीत था "बज उठेंगे हरे काँच की चूड़ियाँ"। शैलेन्द्र जी ने उस गीत में मुखड़े और अंतरे में अंतर ना रखते हुए बड़े ही ख़ूबसूरत तरीक़े से लिखा था "धानी चुनरी पहन, सज के बन के दुल्हन, जाउँगी उनके घर, जिन से लागी लगन, आयेंगे जब सजन, जीतने मेरा मन, कुछ न बोलूँगी मैं, मुख न खोलूँगी मैं, बज उठेंगी हरे कांच की चूड़ियाँ, ये कहेंगी हरे कांच की चूड़ियाँ"।

विश्व दीपक - बिलकुल मुझे भी याद है यह गीत और इसे हमने 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर भी तो सुनवाया था। ख़ैर, अलका और सखियों की आवाज़ों में आइए यह गीत सुना जाए और हमारे श्रोताओं को सुनवाया जाए।

गीत: ये हरे काँच की चूड़ियाँ


सुजॊय - और अब हम आ पहुँचे हैं इस फ़िल्म के अंतिम गीत पर। जैसा कि उपर हमने बताया था कि अलका याज्ञ्निक और जयेश गांधी के गाए फ़िल्म के शीर्षक गीत "मिलेंगे मिलेंगे" का एक और वर्ज़न है, तो अब बारी है उसी दूसरे वर्ज़न को सुनने की जिसे ख़ुद हिमेश भाई और श्रेया घोषाल ने गाया है। यक़ीन मानिए, अलका-जयेश वाले वर्ज़न से यह वला वर्ज़न मुझे ज़्यादा अपील किया। और "मिलेंगे मिलेंगे" वाले जगह की ट्युन ऐसी है कि एक हौंटिंग वातावरण जैसा बन जाता है, और इसमें शक़ नहीं कि पूरे फ़िल्म में इसी ट्युन का बार बार इस्तेमाल होता रहेगा।

विश्व दीपक - और इस गीत में शाहीद कपूर भी कुछ लाइनें कहते हैं। सिंथेसाइज़र्स का ख़ूबसूरत इस्तेमाल हुआ है। और फिर से उसी "चुरा लिया है तुमने" वाले साज़ का इस्तेमाल ऒरकेस्ट्रेशन में सुनाई देता है। हिमेश और श्रेया की आवाज़ें एक साथ अच्छी लगती है। फ़िल्म 'रेडियो' का "जानेमन" गीत भी इन दोनों ने ख़ूब गाया था।

गीत: मिलेंगे मिलेंगे (हिमेश/श्रेया)


"मिलेंगे मिलेंगे" के संगीत को आवाज़ रेटिंग ***१/२

सुजॊय - इन सभी गीतों को सुन कर मैं यह कह सकता हूँ कि भले ही इन गीतों में बहुत ख़ास कोई बात नहीं है, लेकिन गानें मेलोडियस हैं, सुन कर अच्छा लगा। हालाँकि इन गीतों में वो बात नहीं है कि जो फ़िल्म को हिट करा दे, लेकिन अगर फ़िल्म दूसरे पक्षों की वजह से हिट हो जाती है तो ये गानें भी ख़ूब चलेंगे, जैसा कि हमेशा से होता आया है। बस हिमेश भाई को शुभकामनाएँ देते हुए यही कहूँगा कि हिमेश भाई, अभी भी आप में बहुत कुछ बाक़ी है, बेस्ट ऒफ़ लक!

विश्व दीपक - फिर भी इतना तो कहना होगा कि हिमेश भाई का पुराना प्रयास उनके नए प्रयासों से कई कदम आगे है। अपने हीं आप में टाईप-कास्ट हो चुके हिमेश भाई से हम यही अपील करते हैं कि कभी-कभार वो अपने खोल से बाहर निकला करें और "तेरे नाम" जैसे गाने तैयार किया करें। इसी उम्मीद के साथ हम चलते हैं। हाँ, चलते चलते 'ताज़ा सुर ताल' के श्रोताओं व पाठकों से हम यही कहेंगे कि अगले हफ़्ते फिर एक बार आप से इस स्तंभ में यकीनन मिलेंगे मिलेंगे।

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ६७- "मिलेंगे मिलेंगे" शीर्षक गीत में शाहीद कपूर ने कुछ लाइनें कही हैं। क्या आप कोई और गीत बता सकते हैं जिसमें शाहीद कपूर की आवाज़ शामिल है?

TST ट्रिविया # ६८- 'मिलेंगे मिलेंगे' बोनी कपूर की फ़िल्म है। बोनी कपूर की वह और कौन सी फ़िल्म है जिसमें हिमेश रेशम्मिया ने संगीत दिया है?

TST ट्रिविया # ६९- यह एक सोनू निगम - अलका याज्ञ्निक डुएट है। हिमेश रेशम्मिया का म्युज़िक है। शाहीद कपूर ही नायक हैं। गीत का मुखड़ा उन चार शब्दों से ख़त्म होता है जिन चार शब्दों से अलका याज्ञ्निक का गाया हुआ वह गीत शुरु होता है जो एक मशहूर हॊरर फ़िल्म का है और जिसमे नायिका बनी थीं बिपाशा बासु। बताइए हम किन दो गीतों की बात कर रहे हैं।


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. नरेश शर्मा
२. 'चश्म-ए-बद्दूर'
३. पलाश सेन

सीमा जी, आपने तीनों सवालों के सही जवाब दिए। बधाई स्वीकारें। "इंडलि" जी, हमें आपके प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कुछ वक्त चाहिए। विधु जी, गाने पसंद करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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