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Thursday, August 14, 2008

कृष्णा...अल्लाह...जीसस...

आज़ादी दिवस पर दो नायाब वीडियो

खुदा ने इंसान को बनाया, इंसान ने मजहब. और फ़िर मजहबों, खुदाओं और इंसानों ने मिलकर बाँट ली जमीनें, और खींच दी सरहदें दिलों के दरमियाँ...कल ६१ वीं बार आज़ाद भारत में, लहराएगा तिरंगा लालकिले पर, मगर तमाम उपलब्धियों और भविष्य की असीम संभावनाओं के बीच सुलग रहा है, आज भी हिंद.

Religion is the reason, the world is breaking up into pieces….everybody wants control, don't hesitate to kill one another.... कहते है लुईस, इस महीने के हमारे विडीयो ऑफ़ दा मंथ में, और कितना सही कहते हैं, ये विडियो आज के हिंद के लिए एक प्रार्थना समान है.

Fusion music यानी दो या अधिक तरह के संगीत विधाओं को मिला कर एक नया संगीत रचना, यहाँ ये प्रयोग किया दो महान कलाकारों, हरिहरन और लेसली लुईस ने, भारतीय शास्त्रीय संगीत और वेस्टर्न पॉप को मिलाने का, जब राग यमन कल्याणी को गिटार पर गाया गया तो, युवाओं के मन पर छा गया.

गीत का संदेश, बहुत अच्छे रूप में सबके सामने रखने में हाथ रहा है इसके विडियो का भी, black and white फॉर्मेट में चित्रित हुए इस विडियो में एक मार्मिक कहानी बुनी गई है, इस कहानी में जो बच्चा अपनी राह से भटकता दिखाया गया है, क्या इस बच्चे में हम सब को अपनी तस्वीर नज़र नही आती. यही समय है की हम चेतें और हिंदू , मुस्लिम, दलित या ब्राह्मण कहलाने से पहले भारतीय कहलाने में गर्व महसूस करें....गीत के अंत में जब हरिहरन अपनी मखमली आवाज़ में " गोविन्द बोलो हरी गोपाल बोलो..." का जाप करते हैं, तो वो किसी खास धरम के अनुयायी बन कर नही, वरन इन्सान को इंसान समझने वाले हर हिन्दुस्तानी के मन की आशा का प्रतिनिधित्व करते नज़र आते हैं....देखते हैं ये विडियो और दुआ करें एक बार फ़िर अपने हिंदुस्तान के लिए, कि हर तरफ़ अमन हो, शान्ति हो, प्रेम हो और हो सदभाव....



मगर चूँकि आज हम एक दिन पहले मिल रहे हैं देश की आज़ादी की ६१ वीं वर्षगांठ से, तो एक और विशेष विडियो को आपके सामने रखना अवश्यक लग रहा है. आज से ठीक २० वर्ष पहले यानी कि १९८८ में, यह विडियो ओपन हुआ था, दूरदर्शन पर तत्कालिन प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संदेश के बाद, लोक सेवा संचार परिषद् द्वारा निर्मित इस विडियो के लिए बोल लिखे थे पियूष पाण्डेय ने और स्वरबद्ध किया था एक बार फ़िर लुईस बैंक ने, १४ भाषाओँ में एक ही बात कही गई थी " मिले सुर मेरा तुम्हारा ". हिन्दी, कश्मीरी, पंजाबी, सिन्दी, उर्दू, तमिल, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, बंगला, असामी, ओडिया, गुजरती और मराठी, हर आवाज़ में बस एक ही कामना, मिल कर बनी थी जो आवाज़ पूरे भारत की, वो आज भी हर भारतीय को अपने मन की आवाज़ ही लगती है. इस गीत का जादू इतने बरसों के बाद भी वैसा का वैसा ही है....ज़रा देखें तो कौन कौन दिखेंगे आपको इस नायाब विडियो में - पंडित भीमसेन जोशी, एम् बलामुरालिकृष्ण, और लता मंगेशकर जैसी आवाजें, फिल्मकार मृणाल सेन अगर है तो सैयद किरमानी, अरुण लाल, प्रकाश पादुकोण, नरेन्द्र हिरवानी, जैसे खिलाड़ी भी हैं, मल्लिका साराभाई जैसी नृत्यांगना है तो अमिताभ बच्चन, मिथुन, कमल हसन, रेवती, जीतेन्द्र, वहीदा रहमान, शर्मीला टैगोर, शबाना आज़मी, ओमपुरी, दीना पाठक और मीनाक्षी शेषाद्री, जैसे बड़े फिल्मी सितारों ने भी इस विडियो में अपना योगदान दिया...तो दोस्तो, क्यों न एक बार यादों के गलियारे में लौटें, और कामना करें कि, अलगाव का रास्ता छोड़, सब भारतीय फ़िर एक सुर में गायें, तमाम भारतीय भाषाओँ में, हम सब की आवाजें फ़िर से मिलें और बने एक नया सुर - पूरे भारत का सुर.


जय हिंद

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