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Saturday, October 10, 2009

चौथी का जोड़ा - इस्मत चुगताई

सुनो कहानी: इस्मत चुगताई की "चौथी का जोड़ा"

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने शरद तैलंग की आवाज़ में हिंदी साहित्यकार पद्मश्री फणीश्वर नाथ "रेणु" की प्रसिद्ध आंचलिक कहानी "पंचलाइट" का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं इस्मत चुगताई की मार्मिक कहानी "चौथी का जोड़ा", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

कहानी का कुल प्रसारण समय 32 मिनट 14 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।




चौथी के जोडे क़ा शगुन बडा नाजुक़ होता है।
~ इस्मत चुगताई (1911-1991)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनें एक नयी कहानी

अब्बा एक दिन चौखट पर औंधे मुंह गिरे और उन्हें उठाने के लिये किसी हकीम या डाक्टर का नुस्खा न आ सका।
(इस्मत चुगताई की "चौथी का जोड़ा" से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें.
(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)


यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
VBR MP3; Ogg Vorbis

#Fourty First Story, Chauthi Ka Joda: Ismat Chugtai/Hindi Audio Book/2009/35. Voice: Anurag Sharma

Thursday, August 28, 2008

अहमद फ़राज़ साहब के आखिरी ३७ दिन - आवाज़ पर 'एक्सक्लूसिव'

अब के बिछडे तो शायद ख्वाबों में मिले,
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिले.


और वो शायर हमसे हमेशा के लिए बिछड़ गया, और अपने पीछे छोड़ गया एक ऐसा खालीपन जिसे भर पाना शायद कभी भी मुमकिन न हो. इस्मत चुगताई ने एक बार मोस्को में, उनसे मुलाकात के बाद कहा था - "अहमद फ़राज़ आम शायरों की तरह नही दिखता है, वह आधुनिक परिधान में रहता है, और उसे पार्टियों में महिलाओं संग नाचने से भी गुरेज नही है."

अहमद फ़राज़ ऐसे शायर थे, जिनका हर शेर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी को बहुत सरलता से छू जाता था. वह शायर सरहदों से परे था, और मोहब्बत को खुदा का दर्जा देता था. बीते सोमवार को ७७ साल की उम्र में उन्होंने अपने चाहने वालों से हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. उनके अन्तिम ३७ दिनों की यह दास्ताँ आवाज़ पर आप के लिए लाये हैं, जगदीप सिंह. सुनते हैं ये विशेष पॉडकास्ट, और उर्दू अदब के उस खुर्शीद को सलाम करें एक बार फ़िर, जिसकी रोशनायी की रोशनी कभी बुझ नही सकती .




अहमद फ़राज़ साहब को आवाज़ के समस्त टीम की भावभीनी श्रदांजली


हिन्द-युग्म पर प्रेमचंद ने भी उन्हें याद किया। पढ़ें

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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