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मंगलवार, 28 सितंबर 2010

अब्बास टायरवाला और रहमान आये साथ एक बार फिर और कहा जवां दिलों से - "कॉल मी दिल..."

ताज़ा सुर ताल ३७/२०१०


सुजॊय - दोस्तों, नमस्कार, और एक बार फिर स्वागत है 'ताज़ा सुर ताल' में। जैसा कि पिछले हफ़्ते विश्व दीपक जी ने थोड़ा सा हिण्ट दिया आज के फ़िल्म के बारे में, कि उनके मनपसंद संगीतकार का संगीत होगा आज की फ़िल्म में, तो चलिए अब वह वक़्त आ गया है कि आपको आज की फ़िल्म का नाम बता दिया जाए। आज हम लेकर आये हैं आने वाली फ़िल्म 'झूठा ही सही' के गानें।

विश्व दीपक - ए. आर. रहमान मेरे मनचाहे संगीतकार हैं, और सिर्फ़ मेरे ही नहीं, आज वो सिर्फ़ इस देश के ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में अपने संगीत के जल्वे बिखेर रहे हैं। वो एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संगीतकार बन चुके हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर रहे हैं। तभी तो राष्ट्रमण्डल खेल के शीर्षक गीत के संगीत के लिए उन्ही को चुना गया है।

सुजॊय - 'झूठा ही सही' अब्बास टायरवाला की फ़िल्म है जिसका निर्माण आइ.बी.सी मोशन पिक्चर्स के बैनर तले हो रही है, जिसके मुख्य कलाकार हैं जॊन एब्राहम और पाखी, जो अब्बास साहब की धर्मपत्नी हैं। सोहेल ख़ान, अरबाज़ ख़ान और नसीरुद्दिन शाह ने भी फ़िल्म में अभिनय किया है और सुनने में आया है कि फ़िल्म में माधवन और नंदना सेन अतिथि कलाकार के रूप में नज़र आयेंगे। १५ अक्तुबर २०१० का दिन निर्धारित किया गया है फ़िल्म की शुभमुक्ति के लिए, यानी कि इस साल का यही होगा दशहरा रिलीज़।

विश्व दीपक - सुना है कि पहले इस फ़िल्म का शीर्षक '1-800-Love' रखा गया था, उसके बाद 'Call Me Dil' रखा गया, लेकिन आख़िर में 'झूठा ही सही' का शीर्षक ही फ़ाइनल हुआ। फ़िल्म के प्रोमोज़ देखते हुए ऐसा लग रहा है कि कहानी में कुछ नई बात ज़रूर होगी। जॊन भी एक नए लुक में नज़र आ रहे हैं इस फ़िल्म में। जहाँ तक फ़िल्म के गीत संगीत का सवाल है, साउण्डट्रैक को अच्छा रेस्पॊन्स मिल रहा है।

सुजॊय - तो आइए गीतों का सिलसिला शुरु करते हैं, पहला गीत सुनवा रहे हैं राशिद अली और श्रेया घोषाल की आवाज़ों में।

गीत - क्राई क्राई


विश्व दीपक - एक संक्रामक ट्रैक जिसे कहा जा सकता है, और शायद इसी वजह से यह गीत एक इन्स्टैण्ट हिट भी बन गया है। वैसे भी शुरु से ही अब्बास टायरवाला इस तरह के कैची शब्दों का इस्तेमाल करते आये हैं। "पप्पु काण्ट डान्स साला" के बाद अब्बास और रहमान फिर एक बार एक ऐसा गीत लेकर आये हैं जिसे जनता ने हाथों हाथ लिया है।

सुजॊय - राशिद अली और श्रेया का कम्बिनेशन भी अच्छा लगा, ख़ास कर जहाँ जहाँ राशिद "no no no, kabhi nahi" कहते हैं, बड़ा ही मज़ेदार लगता है। गाना सीधा सरल है, और इस सरलता की वजह से ही यह हिट हो रहा है। एक बार सुनने के बाद जैसे 'क्राई क्राई' दिमाग़ में बैठ जाता है। राशिद अली की आवाज़ जॊन पर फ़िट बैठी है।

विश्व दीपक - रहमान ने अलग अलग साज़ों का इस्तेमाल किया है इस गीत में। जैसे टुकड़ों में बना है यह गीत, लेकिन हर एक टुकड़ा उतना ही आकर्षक, उतना ही लुभाने वाला।

सुजॊय - आइए अब दूसरे गीत की तरफ़ बढ़ा जाए! सुनते हैं जावेद अली और चिनमयी की आवाज़ों में "मैया यशोदा"।

गीत - मैया यशोदा (जमुना मिक्स)


गीत - मैया यशोदा (टेम्स मिक्स)


विश्व दीपक - एक और अच्छा गाना, एक और सुरीला कम्पोज़िशन। रहमान ने जावेद अली और चिनमयी पर जो भार सौंपा, इन दोनों ने उसका पूरा पूरा मान रखा। चिनमयी को बिना सांस छोड़े एक लम्बा सा लाइन इस गीत में गाना पड़ा, जिसे उन्होंने बहुत ही ख़ूबसूरती से निभाया, अंग्रेज़ी में जिसे कहते हैं 'effortlessly'। "मय्या यशोदा" गीत का आधार वही कृष्ण लीला ही है, लेकिन अंतिम अंतरे में यह एक संदेश भी देता है कि बांटने का। अच्छा लिखा हुआ गाना है और शायद इस साल के नवरात्री में डांडिया खेलने वालों को अपना नया गाना मिल गया।

सुजॊय - और इस गीत के बीच में सितार का वह पीस कितना सुरीला, कितना मधुर सुनाई देता है! "मय्या यशोदा" सुनते ही 'हम साथ साथ हैं' का वह हिट गीत भी याद आ जाता है जिसे अनुराधा पौडवाल, अल्का याज्ञ्निक और कविता कृष्णामूर्ती ने गाया था। लेकिन जावेद और चिनमयी का गाया यह गीत उससे बिल्कुल अलग है। दोनों अपने अपने जगह यूनिक है।

विश्व दीपक - यूनिक तो है, लेकिन इस जौनर में रहमान ने इससे पहले जो गीत बनाया था फ़िल्म 'लगान' के लिए, "राधा कैसे ना जले", उसके मुक़ाबले यह गीत बहुत पीछे है। वैसे यह बत भी सच है कि बार बार "राधा कैसे ना जले" जैसा गीत तो नहीं बन सकता ना! ख़ैर, "मैया यशोदा" के दो वर्ज़न हैं, एक है 'जमुना मिक्स', जिसमें भारतीय बीट्स और भारतीय स्वाद है। बांसुरी, सितार आदि साज़ों का इस्तेमाल, लेकिन पूरा गीत परक्युशन और बेस पर आधारित है। साज़िंदों ने भी कमाल का बजाया है।

सुजॊय - इसी गीत का दूसरा वर्ज़न है 'थेम्स मिक्स', जिसमें रहमान ने कुछ और ज़्यादा परक्युशन और ईलेक्ट्रॊनिक बीट्स का इस्तेमाल किया है। और टेलीफ़ोन के टोन्स को भी मिक्स किया गया है। दोनों को सुनने के बाद आप भी यही कहेंगे कि जमुना थेम्स पर हावी है। आइए अब तीसरे गीत की तरफ़ बढ़ा जाए, यह है "हैलो हैलो" कार्तिक और हेनरी कुरुविला की आवाज़ों में।

गीत - हैलो हैलो


विश्व दीपक - "हैलो हैलो" और उस पर कार्तिक की आवाज़, ऐसे में तो "कार्तिक कॊलिंग कार्तिक" की याद आ जाना ही स्वाभाविक है। औएर वैसे भी दोनों गीतों का मूड एक जैसा है, मतलब वही रिंगटोन न और बीप्स की ध्वनियों का इस्तेमाल।

सुजॊय - कार्तिक ने इस गीत को खुले दिल से गाया है, एक केयरफ़्री अंदाज़ में। रहमान कार्तिक से आजकल अपनी हर फ़िल्म में कम से कम एक गीत ज़रूर गवा रहे हैं। कार्तिक और जावेद अली रहमान के मनपसंद गायक बनते जा रहे हैं ऐसा लग रहा है।

विश्व दीपक - वाक़ई कार्तिक की आवाज़ में एक ताज़गी है, और हिंदी फ़िल्मी नायक के प्राश्वगायन के लिए तो बिल्कुल सटीक है। उनके गाये इस गीत में "मुझे छोड़ दो, मुझे थाम लो, खो जाने दो, मेरा नाम लो, सब ठीक है, जो जाएगा" एक बहुत ही सुंदर प्रवाह में चल पड़ता है। पता नहीं यह गीत लम्बी रेस का घोड़ा बन पाएगा या नहीं, लेकिन फ़िल्हाल तो इसे सुनने में अच्चा ही लग रहा है।

सुजॊय - जहाँ तक साज़ों की बात है, तो इसमें रहमान ने वायलिन और चेलो का इस्तेमाल किया है, टेलीफ़ोन के डायल टोन्स तो हैं ही। और इन सब के पीछे ड्रमिंग्‍ बीट्स। रहमान का वैसे टेलीफ़ोन से नाता पुराना है, याद है न आपको 'हिंदुस्तानी' फ़िल्म का गाना "टेलीफ़ोन धुन में हँसने वाली"? चलिए, आगे बढ़ते हैं और सुनते हैं सोनू निगम की आवाज़ में "दो निशानियाँ"।

गीत - दो निशानियाँ


विश्व दीपक - एक और सुंदर कम्पोज़िशन, और सोनू निगम और रहमान का वही पुराना "दिल से" वाला अंदाज़ वापस आ गया है। एक धीमी लय वाला, कोमल और सोलफ़ुल गीत। पियानो की लगातार बजने वाली ध्वनियाँ गीत के ऒरकेस्ट्रेशन का मुख्य आकर्षण है। थोड़ा सा ग़मगीन अंदाज़ का गाना है लेकिन सोनू ने जिस पैशन के साथ इसे निभाया है, यह इस ऐल्बम का एक महत्वपूर्ण ट्रैक बन गया है यकीनन।

सुजॊय - गीत के बोलों की बात करें तो वो भी सुंदर हैं, गहरे अर्थ वाले हैं, बस एक झटका आपको तब लगा होगा जब इन ख़्वाबों ख़यालों वाले बोलों के बीच भी "फ़ोन" शब्द का ज़िक्र आता है। लेकिन फिर यह गीत के बोलों के साथ इस क़दर घुलमिल गया है कि गीत का अभिन्न अंग बन गया है। इस गीत का एक और वर्ज़न है ऐल्बम में जिसका शीर्षक है 'Heartbreak Reprise'।

विश्व दीपक - टूटे दिल की सदा है यह गीत जो एक मल्हम का काम करती है। "दो निशानियाँ" में सोनू निगम के अलावा बहुत से गायकों ने भी आवाज़ें मिलाई जैसे कि ऋषीकेश कामेरकर, थमसन ऐण्ड्रूज़, नोमान पिण्टो, बियांका गोम्स, डॊमिनिक सेरेजो, समंथा एडवार्ड्स, विविएन पोचा और क्लिण्टन सेरेजो। चलिए आगे निकला जाए, अब की बार आवाज़ श्रेया घोषाल और सुज़ेन डी'मेलो के। "पम प रा", यह है गीत, जो फ़िल्म के दूसरे गीतों की तुलना में एक ऐवरेज गीत है।

सुजॊय - श्रेया और सेज़ेन के गाये इस गीत में ना तो "लट्टू" कर देने वाली कोई बात है और ना ही "ऐ बच्चू" वाला ऐटिट्युड है। चलिए सुनते हैं।

गीत - पम प रा


सुजॊय - इस गीत में जो सब से अच्छी बात है वह है श्रेया की गायकी। उन्हें इस गीत में अपने वोकल रेंज के प्रदर्शन का मौका मिला और उन्होंने साबित भी किया अपने रेंज को, अपने टोनल क्वालिटी को। जैज़ शैली का गाना है, रहमान ने श्रेया से स्कैट सिंगिंग्‍ कर दिखाया है, जिसे श्रेया बख़ूबी निभाया है।

विश्व दीपक - अब अगले गीत में एक नई आवाज़। विजय येसुदास की। क्या ये येसुदास जी के साहबज़ादे हैं? जी हाँ, मेरी तरह आपका अंदाज़ा भी सही है। हिंदी फ़िल्मों के लिए भले उनकी आवाज़ नई हो, लेकिन दक्षिण में ये करीब करीब एक दशक से सक्रीय हैं। बहुत ही अच्छा लग रहा है कि रहमान ने विजय येसुदास से हिंदी गीत गवाया है। येसुदास जी के लिए लोगों के दिलों में बहुत ज़्यादा प्यार है। उनका गाया हर एक गीत उत्कृष्ट रहा है। इसलिए हमे पूरी उम्मीद है कि विजय का भी उसी प्यार से हिंदी फ़िल्म संगीत में स्वागत होगा।

सुजॊय - विजय येसुदास के गाये गीत को पहले सुनते है, फिर गीत की चर्चा करेंगे।

गीत - 'I'll be waiting'


सुजॊय - वाह! अंग्रेज़ी और हिंदी, दोनों के शब्दों को विजय ने आसानी से निभाया है, और एक भाषा से दूसरे भाषा का जो ट्रान्ज़िशन है, उसे भी भली भाँति अंजाम दिया है। अपने पिता की तरह उनकी आवाज़ में भी एक सादगी है, उनके गायन में भी वही सरलता है।

विश्व दीपक - इस गीत को हिंग्लिश कहें तो बेहतर होगा, जैज़ शैली की धुन, लेकिन अंत होता है बड़े ही कोमल तरीके से। गीत की अवधि कम होने की वजह से ऐसा लगता है जैसे दिल नहीं भरा। रहमान सर, आशा है आप अपनी अगली फ़िल्म में भी विजय को मौका देंगे, और हमें मौका देंगे उन्हें सुनने का। और अब हम आपको मौका दे रहे हैं 'झूठा ही सही' फ़िल्म के अंतिम गीत को सुनने का, "call me dil - झूठा ही सही", जिसे गाया है राशिद अली ने।

सुजॊय - जैसा कि शुरु में हमने कहा था कि पहले पहले इस फ़िल्म के शीर्षक के लिए 'Call Me Dil' सोचा गया था, शायद इसीलिए इस गीत को बनाया गया है कि दोनों ही शीर्षक इसमें समा जाये। सुंदर बोल, सुंदर संगीत, सुंदर गायकी, बस इतना ही कहेंगे इस गीत के बारे में।

गीत - call me dil - झूठा ही सही


सुजॊय - हाँ तो दोस्तों, कैसे लगे ये गानें? किसी ख़ास गीत का उल्लेख ना करते हुए मैं इस ऐल्बम को अपनी तरफ़ से ४ की रेटिंग्‍ दे रहा हूँ।

विश्व दीपक -

आवाज़ रेटिंग्स: झूठा हीं सही: ****

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # १०९- चिनमयी ने इसी साल एक और फ़िल्म में गीत गाया है जिसे हमने 'ताज़ा सुर ताल' में शामिल किया है। बताइए कौन सी है वह फ़िल्म?

TST ट्रिविया # ११०- राष्ट्रमण्डल खेल २०१० के लिए ए. आर. रहमान द्वारा रचित गीत के बोल क्या हैं?

TST ट्रिविया # १११- सोनू निगम ने बम्बई आने के बाद सब से पहले संगीतकार उषा खन्ना के संगीत में ऋषीकेश मुखर्जी की एक टीवी धारावाहिक के लिए गीत गाया था। क्या आपको याद है उस धारावाहिक का नाम?


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. बेस्ट फ़िल्म ऒन फ़ैमिली वेलफ़ेयर
२. फ़िल्म 'राही' की लोरी "चाँद सो गया, तारे सो गए"।
३. तीन बार।

मंगलवार, 31 अगस्त 2010

किलिमांजारो में बूम बूम रोबो डा.. रोबोट की हरकतों के साथ हाज़िर है रहमान, शंकर और रजनीकांत की तिकड़ी

ताज़ा सुर ताल ३३/२०१०

सुजॊय - आज है ३१ अगस्त! यानी कि आज 'ताज़ा सुर ताल' इस साल का दो तिहाई सफ़र पूरा कर रहा है। पीछे मुड़ कर देखें तो इस साल बहुत ही कम फ़िल्में ऐसी हैं जिन्होंने बॊक्स ऒफ़िस पर कामयाबी के झंडे गाड़े हैं।

विश्व दीपक - हाँ, लेकिन फ़िल्म संगीत की बात करें तो इन फ़िल्मों के अलावा भी कई फ़िल्मों का संगीत सुरीला रहा है। 'वीर', 'इश्क़िया', 'कार्तिक कॊलिंग‍ कार्तिक', 'आइ हेट लव स्टोरीज़', 'मिस्टर सिंह ऐण्ड मिसेस मेहता', 'वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई' जैसे फ़िल्मों के गानें काफ़ी अच्छे हैं। अब देखते हैं कि २०१० का बेस्ट क्या अभी आना बाक़ी है!

सुजॊय - अच्छा विश्व दीपक जी, क्या आप ने कोई ऐसा कम्प्युटर देखा है जिसका स्पीड १ टेरा हर्ट्ज़ हो, और मेमरी १ ज़ीटा बाइट, जिसका प्रोसेसर पेण्टियम अल्ट्रा कोर मिलेनिया वी-२, और एफ़. एच. पी-४५० मोटर हिराटा, जापान का लगा हो?

विश्व दीपक - अरे अरे ये सब क्या पूछे जा रहे हैं आप? यह 'टी. एस. टी' है भई!

सुजॊय - तभी तो! आज हम जिस फ़िल्म के गानें सुनने जा रहे हैं यह उसी से ताल्लुख़ रखता है। ये जो स्पेसिफ़िकेशन्स मैंने अभी बताए, यह दरसल किसी कम्प्युटर का नहीं, बल्कि एक अत्याधुनिक रोबोट का होगा जिसका निर्माण कर रहे हैं फ़िल्म निर्माता कलानिथि मारन निर्देशक शंकर के साथ मिल कर अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म 'रोबोट' में।

विश्व दीपक - 'रोबोट' इस देश में बनने वाली सब से महँगी फ़िल्म है और इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार हैं साउथ सुपरस्टार रजनीकांत और ऐश्वर्या राय बच्चन। फ़िल्म में संगीत दिया है ए. आर. रहमान ने और गीतकार हैं स्वानंद किरकिरे। दोस्तों, इससे पहले कि हम 'रोबोट' की बातों को आगे बढ़ाएँ, आइए फ़िल्म का पहला गाना सुन लेते हैं जिसे गाया है ए. आर. रहमान, सुज़ेन, काश और क्रिसी ने।

गीत - नैना मिले


सुजॊय - फ़िल्म की कहानी और प्लॊट के हिसाब से ज़ाहिर है कि इस फ़िल्म के गानें हाइ टेक्नो बीट्स वाले होंगे और गायन शैली भी उसी तरह का रोबोट वाले अंदाज़ का होगा, और अभी अभी जो हमने गीत सुना उसमें इन सभी बातों का पूरा पूरा ख़याल रखा गया है। "नैना मिले, तुम से नैना मिले", स्वानंद किरकिरे के बोलों को ध्यान से सुना जाए तो उनका ख़ास अंदाज़ महसूस किया जा सकता है। लेकिन जैसा कि मैंने कहा कि 'ध्यान से सुना जाए', क्योंकि टेक्नो बीट्स के चलते गीत के बोल पार्श्व में चले गए हैं और संगीत ही सर चढ़ कर बोल रहा है।

विश्व दीपक - वाक़ई एक 'रोबोटिक' गाना है। हाल में एक फ़िल्म आई थी 'लव स्टोरी २०५०' जिसका संगीत भी कुछ इसी तरह का डिमाण्ड करता था। "मिलो ना मिलो" गीत मशहूर हुआ था लेकिन कुल मिलाकर फ़िल्म पिट गई थी। ख़ैर, 'रोबोट' का दूसरा गीत पहले गीत की तुलना में टेक्नो बीट्स के मामले में हल्का है और एक रोमांटिक युगल गीत है मोहित चौहान और श्रेया घोषाल की आवाज़ों में। सुनते हैं फिर चर्चा करते हैं।

गीत - पागल अनुकन (प्यारा तेरा गुस्सा भी)


विश्व दीपक - भले ही एक नर्मोनाज़ुक रूमानीयत से भरा गीत है, लेकिन स्वानंद किरकिरे इसमें भी वैज्ञानिक शब्दों को डालना नहीं भूले हैं। हिंदी सिनेमा का यह पहला गीत है जिसमें "न्युट्रॊन" और "ईलेक्ट्रॊन" शब्दों का इस्तमाल हुआ है।

सुजॊय - आइए अब इस फ़िल्म के प्रमुख किरदार रोबोट का परिचय आप से करवाया जाए। इस ऐण्ड्रो-ह्युमानोएड रोबोट का नाम है 'चिट्टी'। यह एक इंसान है जिसने जन्म नहीं लिया, बल्कि जिसका निर्माण हुआ है। चिट्टी गा सकता है, नाच सकता है, लड़ सकता है, पानी और आग का उस पर कोई असर नहीं होता। वो हर वो सब कुछ कर सकता है जो एक इंसान कर सकता है लेकिन शायद उससे भी बहुत कुछ ज़्यादा। वो विद्युत-चालित है और वो झूठ नहीं बोल सकता। चिट्टी की कुछ विशेषताओं के बारे में हमने आपको बताया, आइए अब सुनते हैं 'चिट्टी डान्स शोकेस'।

विश्व दीपक - 'चिट्टी डान्स शोकेस' एक डान्स नंबर है प्रदीप विजय, प्रवीन मणि, रैग्ज़ और योगी बी. का।

गीत - चिट्टी डान्स शोकेस


सुजॊय - वाक़ई ज़बरदस्त इन्स्ट्रुमेन्टल पीस था। हिप-हॊप डान्स के शौकीनों के लिए बहुत अच्छा पीस है। इस फ़्युज़न ट्रैक का इस्तमाल टीवी पर होने वाले डान्स रियल्टी शोज़ में किया जा सकता है।

विश्व दीपक - और अब एक ऐसा गीत जिसे सुनते हुए आप शायद ९० के दशक में पहुँच जाएँगे। और वह इसलिए कि इसमें आवाज़ें हैं हरिहरण और साधना सरगम की। लेकिन गाने के अंदाज़ में ९० के दशक की कोई छाप नहीं है। यह तो इसी दौर का गीत है। यह गीत दर-असल इस रोबोट की गरिमा और महिमा का बखान करता है। रहमान के शुरुआती दिनों में दक्षिण के फ़िल्मों में वो जिस तरह का संगीत दिया करते थे, इस गीत में कुछ कुछ उस शैली की छाया मिलती है। सुनते हैं "अरिमा अरिमा"।

गीत - अरिमा अरिमा


विश्व दीपकव - स्वानंद किरकिरे ने केवल "ईलेक्ट्रॊन" और "न्युट्रॊन" तक ही अपने आप को सीमित नहीं रखा, अब एक ऐसा गीत जिसमें किलिमांजारो और मोहंजोदारो का उल्लेख है, और उल्लेख क्या, गीत के मुखड़े में ही ये दो शब्द हैं जिन पर इस गीत को आधार किया गया है। इस तरह के शब्दों के चुनाव का तो यही उद्येश्य हो सकता है कि धुन पहले बनी होगी और उस धुन पर ये शब्द फ़िट किए गए होंगे।

सुजॊय - जावेद अली और चिनमयी का गाया यह गीत एक मस्ती भरा गीत है जिसमें वह रोबोटिक शैली नहीं है, बल्कि तबले का भी इस्तमाल हुआ है। जावेद अली धीरे धीरे कामयाबी की सीढ़ियाँ चढ़ते जा रहे हैं। आज के दौर के गायकों में उन्होंने अपनी एक अलग जगह बना ही ली है और फ़िल्म संगीत संसार में उन्होंने अपने क़दम मज़बूती से जमा लिए हैं। आइए सुनते हैं "किलिमांजारो"।

गीत - किलिमांजारो


विश्व दीपक - फ़िल्म के शुरु में चिट्टी कोई भी काम तो कर सकता है, लेकिन वो इंसान के जज़्बातों को समझ नहीं सकता। उसमें कोई ईमोशन नहीं है। और तभी डॊ. वासी चिट्टी के प्रोसेसर को अपग्रेड करते हैं और उसमें ईमोशन्स का सिम्युलेशन करते हैं यह सोचे बिना कि इसके परिणाम क्या क्या हो सकते हैं। अब चिट्टी महसूस कर सकता है और सब से पहले जो वो महसूस करता है, वह है प्यार। क्या यही प्यार डॊ. वासी के रास्ते पे दीवार बन कर खड़ा हो जाएगा? क्या डो. वासी का क्रिएशन ही उनका विनाश कर देगा? यही कहानी है 'रोबोट' की।

सुजॊय - और अब एक और रोबोटिक नंबर, फिर से टेक्नो बीट्स की भरमार लिए यह है "बोम बूम रोबोडा", जिसे गाया है रैग्ज़, योगी बी., मधुश्री, कीर्ति सगठिया और तन्वी शाह ने। मधुश्री को ए. आर. रहमान ने कई ख़ूबसूरत गीतों में गवाया है। बहुत ही मिठास है उनकी आवाज़ में। यह ताज्जुब की ही बात है कि मुंबई के फ़िल्मी संगीतकार क्यों उनसे गानें नहीं गवाते! ख़ैर, सुनते हैं यह गीत।

गीत - बूम बूम रोबोडा


विश्व दीपक - और अब फ़िल्म का अंतिम गीत "ओ नए इंसान"। श्रीनिवास और खतिजा रहमान का गाया यह गीत है। श्रीनिवास ने बिलकुल रोबोटिक अंदाज़ में यह गाया है। श्रीनिवास ने इस गीत में दो अलग अलग आवाज़ें निकाली हैं, जो एक दूसरे से बिलकुल अलग है। ऒर्केस्ट्रेशन पूरी तरह से ईलेक्ट्रॊनिक है और इस गीत को सुनते हुए एक साइ-फ़ाइ फ़ील आता है।

सुजॊय - और जिन्हें मालूम नहीं है, उन्हें हम यह बताना चाहेंगे कि खतिजा रहमान ए. आर. रहमान की बेटी है जो इस गीत के ज़रिए हिंदी पार्श्व गायन में क़दम रख रही है। चलिए सुनते हैं यह गीत।

गीत - ओ नए इंसान


सुजॊय - हाँ तो विश्व दीपक जी, कैसा रहा इन रोबोटिक गीतों का अनुभव? मुझे तो बुरा नहीं लगा। हाल के कुछ फ़िल्मों में रहमान का जिस तरह का संगीत आ रहा था, ज़्यादातर सूफ़ियाने अंदाज़ का, उससे बिलकुल अलग हट के, बहुत दिनों के बाद इस तरह का संगीत सुनने में आया है। वैसे हाल में 'शिवाजी' में रहमान ने इस तरह का संगीत दिया था, लेकिन हिंदी के श्रोताओं में 'शिवाजी' के गानें कुछ ख़ास असर नहीं कर सके थे। अब देखना है कि 'रोबोट' के गीतों को किस तरह का रेसपॊन्स मिलता है! "पागल अनुकन" और "किलिमांजारो", ये दोनों गीत मुझे सब से ज़्यादा पसंद आए।

विश्व दीपक - सुजॊय जी, भले हीं गाने सुनने के दौरान मैंने इलेक्ट्रान, प्रोटॉन, किलिमांजारो और मोहनजोदाड़ो जैसे शब्दों के लिए स्वानंद किरकिरे को क्रेडिट दिया था, लेकिन एक बात मेरे दिल में चुभ-सी रही थी.. शुरू में सोचा कि रहने देता हूँ, हर बात कहनी ज़रूरी नहीं होती, लेकिन जब हम समीक्षा हीं कर रहे हैं तो हमें कुछ भी छुपाने का हक़ नहीं मिलता। शायद आपने रोबोट के तमिल वर्ज़न ऐंदिरन के गाने नहीं सुने। मैंने सुने हैं.. गाने के बोल तो समझ नहीं आए लेकिन ऊपर बताए गए शब्द पकड़ में आ गए थे} और जब मैंने हिन्दी के गाने सुने और हिन्दी में उन्हीं शब्दों की पुनरावृत्ति मिली तो मुझे पक्का यकीन हो गया कि गीतकार ने गाने का बस अनुवाद हीं किया है और कुछ नहीं। नहीं तो तमिल का "डा" (बूम बूम रोबो डा), जो हिन्दी के "रे" या "अरे" के समतुल्य है, हिन्दी में भी "डा" हीं क्यों होता। और भी ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं.. जिन्हें सुनने पर मुझे लगा था कि किसी साधारण-से गीतकार से गाने लिखवाए (अनुवाद करवाए) गए हैं। लेकिन गीतकार के रूप में "स्वानंद किरकिरे" का नाम देखकर मुझे झटका-सा लगा। अब जैसा कि आपके साथ हुआ और दूसरे हिन्दी-भाषी श्रोताओं के साथ होने वाला है, हम तो बस हिन्दी के गाने हीं सुनते हैं और उसी को "असल" समझ बैठते हैं। अब यहाँ पर दोषी कौन है, यह तो कहा नहीं जा सकता, लेकिन स्वानंद साहब से मुझे ऐसी उम्मीद न थी। वे "गुलज़ार" और "महबूब" की तरह मिसाल बन सकते थे, जो तमिल के गानों (जिसे वैरामुतु जैसे बड़े कवि/गीतकार लिखा करते हैं) से बोल नहीं उठाते, बल्कि रहमान की धुनों पर अपने नए बोल लिखते हैं। बस इतना है कि स्वानंद साहब से निराश होने के बावजूद रहमान के संगीत के कारण हीं मैं इस एलबम को पसंद कर पा रहा हूँ। सुजॊय जी, आपने इस एलबम के लिए साढे तीन अंक निर्धारित किए थे, लेकिन मैं आधे अंक की कटौती गीतकार के कारण कर रहा हूँ। एक गीतकार/कवि के मन में शब्दों के लिए जो टीस उठती है, वह तो आप समझ हीं सकते हैं.. है ना? खैर.. मैं भी किस भावनात्मक दरिया में बह गया... हाँ तो, आज की समीक्षा को विराम देने का वक्त आ गया है, अगली बार "अनजाना अनजानी" के साथ हम फिर हाज़िर होंगे। तब तक के लिए शुभदिन एवं शुभरात्रि!!

आवाज़ रेटिंग्स: रोबोट: ***

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ९७- हरिहरण और साधना सरगम की आवाज़ में उस मशहूर गीत का मुखड़ा बताइए जिसके एक अंतरे में पंक्ति है "ये दिल बेज़ुबाँ था आज इसको ज़ुबाँ मिल गई, मेरी ज़िंदगी को एक हसीं दास्ताँ मिल गई"?

TST ट्रिविया # ९८- फ़िल्म 'रोबोट' के साउण्डट्रैक में आपने जितनी भी आवाज़ें सुनीं, उनमें से एक गायिका हैं जिनका असली नाम है सुजाता भट्टाचार्य। बताइए इस गायिका को अब हम किस नाम से जानते हैं?

TST ट्रिविया # ९९- परिवार की नाज़ुक आर्थिक स्थिति के चलते ए. आर. रहमान को कक्षा-९ में स्कूल छोड़ना पड़ा था। बताइए रहमान उस वक़्त किस स्कूल में पढ़ रहे थे?


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. खुदा जाने (बचना ए हसीनों)
२. ६७
३. इन दोनों फ़िल्मों में विदेशी गीत की धुन का इस्तेमाल किया गया है। 'वी आर फ़मिली' में एल्विस प्रेस्ली के "जेल-हाउस रॊक" तथा 'कल हो ना हो' में रॊय ओरबिसन के "प्रेटी वोमेन"।

एक बार फिर सीमा जी २ सही जवाबों के साथ हाज़िर हुई, बधाई

मंगलवार, 15 जून 2010

कहीं "मादनो" की मिठास से तो कहीं "मैं कौन हूँ" के मर्मभेदी सवालों से भरा है "मिथुन" के "लम्हा" का संगीत

ताज़ा सुर ताल २२/२०१०

विश्व दीपक - ’ताज़ा सुर ताल' में हम सभी का स्वागत करते हैं। तो सुजॊय जी, पिछले हफ़्ते कोई फ़िल्म देखी आपने?

सुजॊय - हाँ, 'राजनीति' देखी, लेकिन सच पूछिए तो निराशा ही हाथ लगी। कुछ लोगों को यह फ़िल्म पसंद आई, लेकिन मुझे तो फ़िल्म बहुत ही अवास्तविक लगी। सिर्फ़ बड़ी स्टारकास्ट के अलावा कुछ भी ख़ास बात नहीं थी। कहानी भी बेहद साधारण। ख़ैर, पसंद अपनी अपनी, ख़याल अपना अपना।

विश्व दीपक - पसंद की अगर बात है तो आज हम 'टी.एस.टी' में जिस फ़िल्म के गानें लेकर हाज़िर हुए हैं, मुझे ऐसा लगता है कि इस फ़िल्म के गानें लोगों को पसंद आने वाले हैं। आज ज़िक्र फ़िल्म 'लम्हा' के गीतों का।

सुजॊय - 'लम्हा' बण्टी वालिया व जसप्रीत सिंह वालिया की फ़िल्म है जिसमें मुख्य भूमिकाएँ निभाई हैं संजय दत्त, बिपाशा बासु, कुणाल कपूर, अनुपम खेर ने। निर्देशक हैं राहुल ढोलकिया। संगीत दिया है मिथुन ने, और यह फ़िल्म परदर्शित होने वाली है १६ जुलाई के दिन, यानी कि ठीक एक महीने बाद। जैसा समझ में आ रहा है कि कश्मीर के पार्श्व पर यह फ़िल्म आधारित है। इस फ़िल्म का म्युज़िक लौम्च किया गया है मुंबई के ओबेरॊय मॊल में।

विश्व दीपक - तो चलिए पहला गीत सुना जाए, और शायद यही गीत फ़िल्म का सब से पसंदीदा गीत बनने वाला है, "मादनो", यह गीत जिसे क्षितिज तारे और चिनमयी ने गाया है। बहुत ही ख़ूबसूरत गीत है, सुनते हैं। और हाँ, इस गीत की अवधि है ८ मिनट २६ सेकण्ड्स। वैसे आजकल गीतों की अवधि ५ मिनट से कम ही हो गई है, लेकिन इस फ़िल्म के अधिकतर गीत ६ मिनट से उपर की अवधि के हैं।

गीत: मादनो


सुजॊय - सच में, बेहद सुकूनदायक गीत था, जिसे दूसरे शब्दों में सॊफ़्ट रोमांटिक गीत कहते हैं। कम शब्दों में बस इतना ही कहेंगे कि ऐल्बम की एक अच्छी शुरुआत हुई है इस गीत से। मिथुन सच में एक रिफ़्रेशिंग अंदाज़ में वापस आए हैं। आपको यह भी बता दूँ कि "मादनो" एक कश्मीरी लफ़्ज़ है, जिसका अर्थ होता है "प्रिय"/"प्रेयसी"। इस शब्द को सबसे ज्यादा प्रसिद्धि मिली थी महजूर के लिखे गाने "रोज़ रोज़ बोज़ में ज़ार मादनो" से , जिसे गाया था "ग़ुलाम हसन सोफ़ी" ने।

विश्व दीपक - क्योंकि मिथुन ने बहुत ज़्यादा काम नहीं किया है, इसलिए ज़ाहिर है कि लोगों को उनके बनाए गीतों की याद कम ही रहती है। तो जिन लोगों को मिथुन के गानें इस वक़्त याद नहीं आ रहे हैं, उनके लिए हम बता दे कि मिथुन की शुरुआत महेश भट्ट कैम्प में हुई थी फ़िल्म 'ज़हर' में जिसमें उन्होने "वो लम्हे, वो बातें कोई ना जाने" गीत आतिफ़ असलम से गवाया था। उसके बाद महेश भट्ट की ही एक और चर्चित फ़िल्म 'कलयुग' में भी उन्होने आतिफ़ की आवाज़ का इस्तेमाल किया था "अब तो आदत सी है मुझको जीने में" गीत में। इस तरह से 'बस एक पल' और 'अनवर' जैसी फ़िल्मों में भी उन्होने अतिथि संगीतकार की हैसीयत से एक आध गानें काम्पोज़ किए। इन फ़िल्मों ने भले हीं बहुत ज़्यादा व्यापार ना किया हो, लेकिन मिथुन का स्वरबद्ध हर एक गीत लोगों को पसंद आया, और मिथुन की प्रतिभा को हर किसी ने सराहा।

सुजॊय - और यकीनन 'लम्हा' का संगीत भी लोग खुले दिल से स्वीकार करेंगे। बहरहाल हम आगे बढ़ते हैं और सुनते हैं इस फ़िल्म का दूसरा गीत जिसे गाया है अरुण दागा और मोहम्मद इरफ़ान ने। इस गीत की अवधि है ६ मिनट ५५ सेकण्ड्स।

गीत: सलाम ज़िंदगी


विश्व दीपक - पहले गीत से एक ख़ूबसूरत शुरुआत होने के बाद इस दूसरे गीत में भी एक नयापन है। बच्चों द्वारा गाए कश्मीरी बोलों को सुन कर एक तरफ़ फ़िल्म 'यहाँ' की याद आ जाती है तो कभी 'परिनीता' का "कस्तो मजा है" की भी झलक दिख जाती है।

सुजॊय - "जिस चीज़ को पाने की थी उम्मीद खो चुकी, उस चीज़ को पाकर बहुत दिल को ख़ुशी हुई, सलाम ज़िंदगी सलाम ज़िंदगी" - ये हैं गीत के बोल, और जैसा कि हम देख रहे है यह एक आशावादी गीत है और इस तरह के गानें बहुत बनें हैं, लेकिन इस गीत के अंदाज़ में नयापन है। पार्श्व में मोहम्मद इरफ़ान के शास्त्रीय अंदाज़ में गायन ने गीत को और ज़्यादा असरदार बनाया है। पहले गीत की तरफ़ हो सकता है कि यह गीत उतना अपील ना करे, लेकिन जो भी है, अच्छा गीत है।

विश्व दीपक - अब तीसरे गीत की बारी, और इस बार स्वर पलाश सेन का। बहुत दिनों से उनकी आवाज़ सुनाई नहीं दी थी। इस गीत के साथ वो वापस लौट रहे हैं। अमिताभ वर्मा के ख़ूबसूरत बोलों को पलाश ने असरदार तरीके से ही निभाया है। संगीत में सॊफ़्ट रॊक का इस्तेमाल हुआ है। यह गीत है "मैं कौन हूँ" और इस गीत का म्युज़िक भी रिफ़्रेशिंग है। इसमें कोई शक़ नहीं कि मिथुन अपनी अलग पहचान बनाने की राह पर चल पड़े हैं। अवधि ७ मिनट ११ सेकण्ड्स।

गीत: मैं कौन हूँ


सुजॊय - आजकल गायक मिका को कई हिट गीत गाने के मौके मिल रहे हैं। या फिर युं कहिए कि मिका के गाए गानें हिट हो रहे हैं। भले ही कुछ लोग उन्हे पसंद ना करें और विवादों से भी घिरे रहे कुछ समय के लिए, लेकिन यह ध्यान देने योग्य बात है कि मिका के गाए गानें हिट हो जाते हैं। "दिल में बजी गिटार", "गणपत चल दारू ला", "मौजा ही मौजा", "इबन-ए-बतुता", और भी कई गानें हैं मिका के जो ख़ूब चले। फ़िल्म 'लम्हा' में भी मिथुन ने मिका से एक गीत गवाया है। दरसल यह पहले गीत "मादनो" का ही दूसरा वर्ज़न है, और मिका के साथ चिनमयी की आवाज़ भी शामिल है।

विश्व दीपक - ऐल्बम में इस गीत को "साजना" का शीर्षक दिया गया है। गीत को सुनने से पहले मिका का नाम देख कर मुझे लगा था कि कोई डान्स नंबर होगा, लेकिन काफ़ी आश्चर्य हुआ यह सुन कर कि मिका ने इस तरह का नर्मोनाज़ुक गीत गाया है। साधारणत: लोग मिका के जिस गायन शैली से वाक़ीफ़ हैं, उससे बिलकुल अलग हट के मिका लोगों को हैरत में डालने वाले हैं इस गीत के ज़रिए। यह तो भई वैसी ही बात है जैसी कि हाल ही में दलेर मेहन्दी ने फ़िल्म 'लाहौर' में "मुसाफ़िर" वाला गीत गाकर सब को चकित कर दिया था।

सुजॊय - इस पीढ़ी की अच्छी बात ही यह है कि वह प्रचलित धारा का रुख़ बदलने में विश्वास रखता है। पहले के ज़माने में जो गायक जिस तरह के गीत गाते थे, उनसे लगातार उसी तरह के गीत गवाए जाते थे। लेकिन आजकल कोशिश यही होती है हर कलाकार की कि कुछ नया किया जाए, नए प्रयोग किए जाएँ। चलिए यह गीत सुन लेते हैं। कुल ८ मिनट २५ सेकण्ड्स।

गीत: साजना


विश्व दीपक - अगला गीत क्षितिज तारे की आवाज़ मे है। कम से कम साज़ों का इस्तेमाल हुआ है। के.के के अंदाज़ का गाना है। वैसे क्षितिज ने कमाल का गाया है, लेकिन इसे के.के. की आवाज़ में सुन कर भी उतना ही अच्छा लगता ऐसा मेरा ख़याल है।

सुजॊय - विश्व दीपक जी, शायद आपने ध्यान न दिया हो कि क्षितिज मिथुन के पसंदीदा गायक हैं। मिथुन ने इनसे इस फिल्म से पहले भी कई सारे गीत गवाए हैं। मुझे "अनवर" का "तोसे नैना लागे" अभी भी याद है। क्या खूब गाया था "क्षितिज" और "शिल्पा राव" ने। जहाँ तक आज के इस गीत की बात है तो यह गीत पार्श्व संगीत की तरह प्रतीत होता है। सिचुएशनल गीत है और फ़िल्म को देखते हुए ही इस गीत का महत्व पता चल सकता है। ऒरकेस्ट्रेशन से एम.एम. क्रीम की याद भी आ जाती है, क्योंकि ग्रूप वायलिन्स का इस्तेमाल हुआ है।

गीत: ज़मीन-ओ-आसमान


विश्व दीपक - और अंतिम गीत में मिथुन ने अपनी गायकी का भी लोहा मनवाया है। आजकल 'पाक़ी-पॊप' संगीत का भी चलन है, और इस गीत में उसी की झलक है। याद है ना आपको मिथुन का गाया फ़िल्म 'दि ट्रेन' का गीत "वो अजनबी देखे जो दूर से"?

सुजॊय - अच्छा इसी फ़िल्म 'दि ट्रेन' में एक और गीत है "मौसम" जिसे लिखा है आतिफ़ असलम ने। तो ज़्यादातर लोग समझते हैं कि इस गीत को आतिफ़ ने ही गाया है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि इसे स्वरबद्ध किया और गाया मिथुन ने है। मिथुन ने फ़िल्म 'अगर' में गाया था "के बिन तेरे जीना नहीं" जिसे भी लोगों ने पसंद किया था। तो लीजिए आज एक लम्बे समय के बाद सुनिए मिथुन की आवाज़ और उनके साथ हैं मोहम्मद इरफ़ान।

गीत: रहमत ज़रा


"लम्हा" के संगीत को आवाज़ रेटिंग ****

मिथुन से हमेशा हीं उम्मीदें रहती है, और इस बार मिथुन उम्मीद पर खड़े उतरे हैं। चूँकि फिल्म कश्मीर पर आधारित है, इसलिए मिथुन को कहानी से भी सहायता मिली... अपनी तरह का संगीत देने में। फिल्म चाहे सफल या हो असफल , लेकिन हम लोगों से यही दरख्वास्त करेंगे कि गानों को नज़र-अंदाज़ न करें। एक बार जरूर सुनें, हमें यकीन है कि एक बार सुनने के बाद आप खुद-बखुद इन गानों से खुद को जुड़ा महसूस करेंगे। इन्हीं बातों के साथ अगली समीक्षा तक के लिए हम आपसे अलविदा कहते हैं।

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ६४- संगीतकार व गायक मिथुन के पिता एक जाने माने बैकग्राउण्ड स्कोरर थे जिन्होने २०० से उपर फ़िल्मों का पार्श संगीत तय्यार किया है। बताइए उनका नाम।

TST ट्रिविया # ६५- २००८ में मिथुन ने एक ऐसी फ़िल्म में संगीत दिया था जिस शीर्षक से एक हास्य फ़िल्म बनी थी जिसमें फ़ारूख़ शेख़ नायक थे और जिसमें येसुदास और हेमन्ती शुक्ला का गाया एक लोकप्रिय युगल गीत था।

TST ट्रिविया # ६६- आप एक मेडिकल डॊकटर हैं, और एक उम्दा गायक भी हैं, एक अभिनेता भी हैं। आपका जन्म बनारस में हुआ और पले बढ़े दिल्ली में। "फ़िल्हाल" दोस्तों, आप यह बताएँ कि हम किस शख़्स की बात कर र्हे हैं?


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. हिमेश रेशम्मिया के पिता विपिन रेशम्मिया ने ख़य्याम साहब के ऒर्केस्ट्रा में काम करते हुए इस गीत की रिकार्डिंग में रीदम बॊक्स साज़ बजाया था।
२. 'दुल्हन हम ले जाएँगे' फ़िल्म का गीत "रात को आऊँगा मैं.... मुझसे शादी करोगी"।
३. सुधाकर शर्मा।

सीमा जी, इस बार आपने दो सवालों के जवाब दिए, जिनमें से एक हीं सही है। खैर.. इस बार के सवाल आपके सामने हैं।

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