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मंगलवार, 28 अक्तूबर 2008

दीपावली गली गली बन के खुशी आई रे...

आवाज़ के सभी साथियों और श्रोताओं को दीपावली के पावन पर्व की ढेरों शुभकामनाये,हमारे नियमित श्रोता गुरु कवि हकीम ने हमें इस अवसर पर अपना संदेश इस कविता के माध्यम से दिया -

दीप जले प्यार का
जीत का ना हार का
हर किसी के साथ का
हर किसी के हाथ का
दीप जले प्यार का
तोड़ दे दीवार कों
बीच में जो है खडी
स्नेह निर्मल की भीत तो
दीवार से भी है बड़ी
ये दीप ना थके कभी
प्रकाश ना रुके कभी
ये दीप ना बुझे कभी
हर किसी के द्वार का
दीप जले प्यार का
जीत का ना हार का .............
सुधि से सबके मन खिले
सिहर सिहर से ना मिले
पलक भीगी ना रहे
अलक झीनी ना रहे
उज्जवल विलास बन के वो
लौ ज्वाला की धार का
दीप जले प्यार का
जीत का ना हार का....

हिंद युग्म के आंगन में आज हमने कविताओं के दीप जलाये हैं. २४ कवियों की इन २४ कविताओं में गजब की विविधता है. अवश्य आनंद लें. बच्चों की आँखों से भी देखें दिवाली की जगमग.

आवाज़ पर हम अपने श्रोताओं के लिए लाये हैं, एक अनूठा गीत. टेलिविज़न पर एक संगीत प्रतियोगिता में चुने गए टॉप १० में से ५ प्रतिभागियों ने मिलकर दीपावली पर अपने श्रोताओं को शुभकामनायें देने के उद्देश्य से इस गीत को रचा. इन उभरते हुए गायक / गायिकाओं के नाम हैं - कविता, विशाल, संदीप, मीनल और अर्पिता. चूँकि आवाज़ का प्रमुख उद्देश्य नए कलाकारों को बढ़ावा देना है, हम उन प्रतिभाशाली कलाकारों का ये शुभकामनाओं से भरा गीत आपके सामने रख रहे हैं,आप भी इनका प्रोत्साहन बढाएं और अपने मित्रों और परिवारजनों के साथ मिलकर खुशी खुशी आज त्यौहार मनायें -




शुभ दीपावली

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