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Friday, February 7, 2014

कोई इश्क की नामुरादी को रोया तो वफ़ा की तलाश में खोया

ताज़ा सुर ताल - 2014 - 05 : शब्द प्रधान गीत विशेष 

ताज़ा सुर ताल के इस अंक में आपका एक बार फिर से स्वागत है दोस्तों, आज का ये अंक है शब्द प्रधान गीत विशेष. आजकल गीतों में शब्दों के नाम पर ध्यान आकर्षित करने वाले जुमलों की भरमार होती है, संगीतकार अपने हर गीत को बस तुरंत फुरंत में हिट बना देना चाहते हैं, अक्सर ऐसे गीत चार छे हफ़्तों के बाद श्रोताओं के जेहन से उतर जाते हैं. ऐसे में कुछ ऐसे गीतों का आना बेहद सुखद लगता है जिन पर शाब्दिक महत्त्व का असर अधिक हो, आज के अंक में हम ऐसे ही दो गीत चुन कर लाये हैं आपके लिए. पहले गीत के रचनाकार हैं शायर अराफात महमूद ओर इसे सुरों से सजाया है संगीतकार गौरव डगाउंकर ने. गायक के नाम का आप अंदाजा लगा ही सकते हैं, जी हाँ अरिजीत सिंह...उत्सव  से अभिनय की शुरुआत कर शेखर सुमन ने फिल्म ओर टेलीविज़न की दुनिया में अपना एक खास मुकाम बनाया है. हार्टलेस  बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म है जिसमें अभिनय कर रहे हैं उनके सुपुत्र अध्यायन सुमन. चलिए अब बिना देर किये हम आपको सुनवाते हैं ये खूबसूरत गज़ल नुमा गीत. 
मैं ढूँढने को ज़माने में जब वफ़ा निकला 
पता चला कि गलत लेके मैं पता निकला....वाह 
     

डेढ़ इश्किया  से हम आपका परिचय पहले ही करा चुके हैं, अब ऐसा कैसे मुमकिन है कि जिस फिल्म में शेरों-शायरी की खास भूमिका हो, लखनवी अंदाज़ का तडका हो, गुलज़ार साहब जैसा शायर हो गीतकार की भूमिका में ओर कोई नायाब सी गज़ल न हो. राहत साहब की नशीली आवाज़ ओर विशाल भारद्वाज की सटीक धुन. एक बेमिसाल पेशकश. सुनें ओर हमने दें इज़ाज़त, मिलेंगें अगले सप्ताह फिर से दो नए गीतों के साथ.
लगे तो फिर यूँ ये रोग लागे, न साँस आये न साँस जाए, 
ये इश्क है नामुराद ऐसा, कि जान लेवे तभी टले है.....क्या कहने

Friday, January 31, 2014

रेखा भारद्वाज का स्नेह निमंत्रण ओर अरिजीत की रुमानियत भरी नई गुहार

ताज़ा सुर ताल - 2014 -04 

हमें फिल्म संगीत का आभार मानना चाहिए कि समय समय पर हमारे संगीतकार हमारी भूली हुई विरासत ओर नई पीढ़ी के बीच की दूरी को कुछ इस तरह पाट देते हैं कि समय का लंबा अंतराल भी जैसे सिमट गया सा लगता है. मेरी उम्र के बहुत से श्रोताओं ने इस ठुमरी को बेगम अख्तर की आवाज़ में अवश्य सुना होगा, पर यक़ीनन उनसे पहले भी लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के दरबार से निकली इस अवधी ठुमरी को बहुत से गुणी कलाकारों ने अपनी आवाज़ में ढाला होगा. लीजिए २०१४ में स्वागत कीजिये इसके एक ओर नए संस्करण का जिसे तराशा संवारा है विशाल -गुलज़ार के अनुभवी हाथों ने ओर आवाज़ के सुरमे से महकाया है रेखा भारद्वाज की सुरमई आवाज़ ने. मशहूर अभिनेत्री ओर कत्थक में निपुण माधुरी दीक्षित नेने एक बार फिर इस फिल्म से वापसी कर रही हैं रुपहले परदे पर. जी हाँ आपने सही पहचाना, देढ इश्किया  का ये गीत फिर एक बार ठुमरी को सिने संगीत में लौटा लाया है, हिंदी फिल्मों के ठुमरी गीतों पर कृष्णमोहन जी रचित पूरी सीरीस का आनंद हमारे श्रोता उठा चुके हैं. आईये सुनते हैं रेखा का ये खास अंदाज़....शब्द देखिये आजा गिलौरी खिलाय दूँ खिमामी, लाल पे लाली तनिक हो जाए....


काफी समय तक संघर्ष करने के बाद संगीतकार सोहेल सेन की काबिलियत पर भरोसा दिखाया सलमान खान ने ओर बने "एक था टाईगर" के हिट गीत, आज आलम ये है कि सोहेल को पूरी फिल्म का दायित्व भी भरोसे के साथ सौंपा जा रहा है. यश राज की आने वाली फिल्म "गुण्डे" में सोहेल ने जोड़ी बनायीं है इरशाद कामिल के साथ. यानी शब्द यक़ीनन बढ़िया ही होंगें. रामलीला की सफलता के बाद अभिनेता रणबीर सिंह पूरे फॉर्म में है, फिल्म में उनके साथ हैं अर्जुन कपूर ओर प्रियंका चोपड़ा. फिल्म का संगीत पक्ष बहुत ही बढ़िया है. सभी गीत अलग अलग जोनर के हैं ओर श्रोताओं को पसंद आ रहे हैं, विशेषकर ये गीत जो आज हम आपको सुना रहे हैं बेहद खास है. रोमानियत के पर्याय बन चुके अरिजीत सिंह की इश्को-मोहब्बत में डूबी आवाज़ में है ये गीत. जिसका संगीत संयोजन भी बेहद जबरदस्त है. धीमी धीमी रिदम से उठकर ये गीत जब सुर ओर स्वर के सही मिश्रण पर पहुँचता है तो एक नशा सा तारी हो जाता है जो गीत खत्म होने के बाद भी श्रोताओं को अपनी कसावट में बांधे रखता है. लीजिए आनंद लीजिए जिया  मैं न जिया  का ओर दीजिए हमें इज़ाज़त.    

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