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Tuesday, May 3, 2011

द अवेकनिंग सीरीस की पहली पेशकश आतंकवाद के खिलाफ - दोहराव

हिंद युग्म ने आधारशिला फिल्म्स के साथ सहयोग कर अलग अलग मुद्दों को दर्शाती एक लघु शृंखला "द अवेकनिंग सीरिस" शुरू की है. अभी शुरुआत में ये एक जीरो बजेट प्रयोगात्मक रूप में ही है, जैसे जैसे आगे बढ़ेगें इसमें सुधार की संभावना अवश्य ही बनेगी.

इस शृंखला में ये पहली कड़ी है जिसका शीर्षक है -दोहराव. विचार बीज और कविता है सजीव सारथी की, संगीत है ऋषि एस का, संपादन है जॉय कुमार का और पार्श्व स्वर है मनुज मेहता का. फिल्म संक्षिप्त में इस विचार पर आधारित है -

जब किसी इलाके में मच्छर अधिक हो जाए तो सरकार जाग जाती है और डी टी पी की दवाई छिडकती है, ताकि मच्छर मरे और जनता मलेरिया से बच सके. आतंकवाद रुपी इस महामारी से निपटने के लिए सरकार अभी और कितने लोगों की बलि का इंतज़ार कर रही है ? क्या हम सिर्फ सरकार के जागने का इंतज़ार कर सकते हैं या कुछ और....

Sunday, May 31, 2009

इस बार का कवि सम्मेलन रश्मि प्रभा के संग

सुनिए पॉडकास्टिंग के इस नए प्रयोग को

Rashmi Prabha
रश्मि प्रभा
नमस्कार!

दोस्तो, हम एक फिर हाज़िर हैं इस माह के आपके अंतिम रविवार और अंतिम दिन को इंद्रधनुषी बनाने के लिए। जी हाँ, आपको भी इसका पूरे एक महीने से इंतज़ार होगा। तो इंतज़ार की घड़िया ख़त्म। सुबह की चाय पियें और साथ ही साथ हमारे इस पॉडकास्ट कवि सम्मेलन का रस लेते रहें, जिसमें भावनाओं और अभिव्यक्तियों के विविध रंग समाहित हैं। सुबह की चाय के साथ ही क्यों, इसका आनंद शाम की शिकंजी के साथ भी लें।

पिछले महीने हमें रश्मि प्रभा के रूप में साहित्य-सेवा की एक नई किरण मिलीं हैं। कविता-मंच पर ये कविताएँ तो लिख ही रही हैं, इस बार के कवि-सम्मेलन के संयोजन का दायित्व भी इन्हीं ने सम्हाला है। और आगे भी अपनी ओर से बेहतरीन प्रयास करते रहने का वचन दिया है।

इस बार के कवि सम्मेलन की सबसे ख़ास बात यह है कि इस बार दुनिया के अलग-अलग कोनों से कुल 19 कवि हिस्सा ले रहे हैं। संचालिका को लेकर यह संख्या 20 हो जाती है। और यह इत्तेफाक ही है कि इस बार जहाँ 10 महिला कवयिता हैं, वहीं 10 पुरुष कवयिता। कम से कम इस स्तर पर रश्मि प्रभा स्त्री-पुरुष समानता के तत्व को मूर्त करने में सफल रही हैं। इस बार के कवि सम्मेलन की एक और ख़ास बात है, और वह यह कि 20 में से 11 कवि पहली बार इस आयोजन के भागीदार बने हैं। जुलाई 2008 में जब हमने इसे शुरू किया था, तभी से हमारा यही उद्देश्य था कि दुनिया से अलग-अलग स्थानों, मंचों, संस्थाओं इत्यादि के शब्दशिल्पी वर्चुअल स्पेस का यह मंच साँझा करें और हमे खुशी है कि इस दिशा में आंशिक तौर पर ही सही, सफल भी हो रहे हैं। पॉडकास्ट कवि सम्मेलन का यह 11वाँ आयोजन है। इसके प्रथम अंक में मात्र 8 कवियों ने भाग लिया था।

यह आयोजन एक प्रयोग है- तकनीक की सड़क पर भावनाओं की पटरी बिछाने का और उन भावनाओं के चालकों को बारी-बारी से मौका देने का ताकि यात्रा लम्बी हो। आप बिना थके साहित्य की यात्रा करते रहें। पॉडकास्ट कवि सम्मेलन की संकल्पना को मूर्त रूप देने का पूरा श्रेय हमारी तकनीकी टीम को जाता है। यह आयोजन आवाज़ के तकनीकी प्रमुख अनुराग शर्मा के मार्गदर्शन में फल-फूल रहा है। इस बार के आयोजन का तकनीकी संपादन हमसे नई-नई जुड़ी तकनीककर्मी खुश्बू ने किया है। हमें बहुत खुशी है कि उन्होंने अपना कीमती वक़्त निकालकर हमारा प्रोत्साहन किया है।

अब हम आपका अधिक वक़्त नहीं लेंगे, उपर्युक्त सारी बातें तभी सार्थक होंगी, जब आपको इस बार का कवि सम्मेलन पसंद आयेगा। कृपया सुने और अवश्य बतायें कि हम अपने प्रयास में कितने सफल हुए हैं-

नीचे के प्लेयर से सुनें:


प्रतिभागी कवि-सरस्वती प्रसाद, किरण सिन्धु, गौरव शर्मा, लावण्या शाह, स्वप्न मंजूषा 'शैल', मनुज मेहता, प्रो॰ सी॰ बी॰ श्रीवास्तव, ज्योत्सना पाण्डेय, प्रीति मेहता, कीर्ति (दीपाली आब), मनोज भावुक, शोभा महेन्द्रू, विवेक रंजन श्रीवास्तव 'विनम्र', शारदा अरोरा, डॉ॰ अनिल चड्डा, एस कुमार शर्मा, कमलप्रीत सिंह, सत्यप्रसन्न और जगदीश रावतानी।

यह भाग डाउनलोड करें।


यह कवि सम्मेलन तकनीक के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर बैठे कवियों को एक वर्चुअल मंच पर एक साथ बिठाने की कोशिश है। यदि आप हमारे आने वाले पॉडकास्ट कवि सम्मलेन में भाग लेना चाहते हैं
1॰ अपनी आवाज़ में अपनी कविता/कविताएँ रिकॉर्ड करके भेजें।
2॰ जिस कविता की रिकॉर्डिंग आप भेज रहे हैं, उसे लिखित रूप में भी भेजें।
3॰ अधिकतम 10 वाक्यों का अपना परिचय भेजें, जिसमें पेशा, स्थान, अभिरूचियाँ ज़रूर अंकित करें।
4॰ अपना फोन नं॰ भी भेजें ताकि आवश्यकता पड़ने पर हम तुरंत संपर्क कर सकें।
5॰ कवितायें भेजते समय कृपया ध्यान रखें कि वे 128 kbps स्टीरेओ mp3 फॉर्मेट में हों और पृष्ठभूमि में कोई संगीत न हो।
6॰ उपर्युक्त सामग्री भेजने के लिए ईमेल पता- podcast.hindyugm@gmail.com


पॉडकास्ट कवि सम्मेलन के अगले अंक का प्रसारण 28 जून 2009 को किया जायेगा और इसमें भाग लेने के लिए रिकॉर्डिंग भेजने की अन्तिम तिथि है 18 जून 2009

हम सभी कवियों से यह अनुरोध करते हैं कि अपनी आवाज़ में अपनी कविता/कविताएँ रिकॉर्ड करके podcast.hindyugm@gmail.com पर भेजें। आपकी ऑनलाइन न रहने की स्थिति में भी हम आपकी आवाज़ का समुचित इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे।

रिकॉर्डिंग करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। हमारे ऑनलाइन ट्यूटोरियल की मदद से आप सहज ही रिकॉर्डिंग कर सकेंगे। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।

# Podcast Kavi Sammelan. Part 11. Month: May 2009.
कॉपीराइट सूचना: हिंद-युग्म और उसके सभी सह-संस्थानों पर प्रकाशित और प्रसारित रचनाओं, सामग्रियों पर रचनाकार और हिन्द-युग्म का सर्वाधिकार सुरक्षित है।


Wednesday, October 1, 2008

एक संवेदनशील फ़िल्म जी बी रोड की सच्चाईयों पर

दिल्ली की इन "बदनाम गलियों" पर गुप्त कैमरे से शूट हुई मनुज मेहता की लघु फ़िल्म का प्रीमिअर, आज आवाज़ पर

ये कूचे, ये नीलामघर दिलकशी के,
ये लुटते हुए कारवाँ जिंदगी के,
कहाँ है कहाँ है मुहाफिज़ खुदी के,
सना- ख्वाने- तकदीसे- मशरिक कहाँ हैं.

ये पुरपेच गलियां, ये बेख्वाब बाज़ार,
ये गुमनाम राही, ये सिक्कों की झंकार,
ये इस्मत के सौदे, ये सौदों पे तकरार,
सना- ख्वाने- तकदीसे- मशरिक कहाँ हैं.

ताअफ़्फ़ुन से पुरनीम रोशन ये गलियां,
ये मसली हुई अधखिली जर्द कलियाँ,
ये बिकती हुई खोखली रंग रलियाँ,
सना- ख्वाने- तकदीसे- मशरिक कहाँ हैं.

मदद चाहती हैं ये हव्वा की बेटी,
यशोदा की हमजिंस, राधा की बेटी,
पयम्बर की उस्मत, जुलेखा की बेटी,
सना- ख्वाने- तकदीसे- मशरिक कहाँ हैं.

बुलाओ, खुदयाने-दी को बुलाओ,
ये कूचे ये गलियां ये मंज़र दिखाओ,
सना- ख्वाने- तकदीसे- मशरिक को लाओ,
सना- ख्वाने- तकदीसे- मशरिक कहाँ हैं.

साहिर लुधिअनावी की इन पंक्तियों में जिन गलियों का दर्द सिमटा है, उनसे हम सब वाकिफ हैं. इन्हीं पंक्तियों को जब रफी साहब ने अपनी आवाज़ दी फ़िल्म "प्यासा" के लिए (जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो कहाँ हैं...) तो ये नग्मा साहित्यप्रेमियों के दायरों से निकल कर आम आदमी की रूह में उतर गया. कोई मर्मस्पर्शी कविता हो या कोई दिल को छू लेने वाला गीत, विचारों को उद्देलित करने वाली कोई कलाकृति हो या फ़िर एक सार्थक सिनेमा, कला का उदेश्य हमेशा ही समाज को आईना दिखाना रहा है. एक ऐसी ही कोशिश की है हिंद युग्म के छायाकार कवि मनुज मेहता ने अपनी इस लघु फ़िल्म के माध्यम से. मनुज की खासियत रही है की वो चाहे जिस रूप में आए (कवि, छायाकार, या फिल्मकार) हर बार चुने हुए विषय को बेहद संवेदनशील अंदाज़ में पेश करते हैं और एक सवाल छोड़ जाते हैं, पढने सुनने और देखने वालों के जेहन में.

तो एक बार फ़िर याद कीजिये साहिर साहब के शब्दों को और देखिये मनुज मेहता की यह लघु फ़िल्म -
(एक बार प्ले पर क्लिक करें, बफ्फर हो जाने दें, फ़िर देखें...)



मनुज इस अनुभव के बारे में लिखते हैं -

We have used the hidden camera in this particular segment. we were not allowed to use camera inside the GB road Kothas. one policeman was with us but he warned me to switch off the camera otherwise pimps may damage the camera and other equipments. pimps are very dangerous at this part, they have blades and knifes with them and they do not feel fear to use them.


I showed them that the camera is off and in between I switched it on again.

you may see some jerks or unbalanced shot because i could not see the actual frame whatever is shot is all hidden.

No one else has taken these kind of inside shots up till now.

पार्श्व स्वर - नज़मा खान
स्क्रिप्ट - दिलीप मकुने
संपादन - रोज़ी पॉल
शोध - बिजोय कलिता
गुप्त कैमरा और निर्देशन - मनुज मेहता

हिंद युग्म का ये प्रयास आपको कैसा लगा हमें अवश्य बतायें.

आवाज़ की टीम इस बात पर विश्वास करती है कि समसामयिक विषयों पर ऑडियो और वीडियो फॉर्मेट में कही गई बात देखने सुनने वालों पर बेहद गहरा प्रभाव डालती है, जिस तरह की कोशिश मनुज और उनकी टीम ने की है,आप भी कर सकते हैं. आप अपने डी वी कैम या handycam से लघु फिल्में (विषय आधारित) बना कर हमें भेज सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए podcast.hindyugm@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं

Sunday, September 28, 2008

पॉडकास्ट कवि सम्मेलन का तीसरा अंक

कविता वाचन की इंटरनेटीय परम्परा

Doctor Mridul Kirt - image courtesy: www.mridulkirti.com
डॉक्टर मृदुल कीर्ति
इंतज़ार की घडियां ख़त्म हुईं। लीजिये आपके सेवा में प्रस्तुत है सितम्बर २००८ का पॉडकास्ट कवि सम्मलेन। पिछली बार की तरह ही इस बार भी इस ऑनलाइन आयोजन का संयोजन किया है हैरिसबर्ग, अमेरिका से डॉक्टर मृदुल कीर्ति जी ने।

पॉडकास्ट कवि सम्मेलन भौगौलिक दूरियाँ कम करने का माध्यम है और इसमें भारत व अमेरिका के कवियों ने भाग लिया है। इस बार के पॉडकास्ट कवि सम्मेलन ने पोंडिचेरी से स्वर्ण-ज्योति, फ़रीदाबाद से शोभा महेन्द्रू, दिल्ली से मनुज मेहता, ग़ाज़ियाबाद से कमलप्रीत सिंह, अशोकनगर (म॰प्र॰) से प्रदीप मानोरिया, रोहतक से डॉक्टर श्यामसखा "श्याम", भारत से विवेक मिश्र, पिट्सबर्ग (अमेरिका) से अनुराग शर्मा, तथा हैरिसबर्ग  (अमेरिका) से डॉक्टर मृदुल कीर्ति को युग्मित किया है।

पिछले सम्मलेन की सफलता के बाद हमने आपकी बढ़ी हुई अपेक्षाओं को ध्यान में रखा है. हमें आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि इस बार का सम्मलेन आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा और आपका सहयोग हमें इसी जोरशोर से मिलता रहेगा।

नीचे के प्लेयरों से सुनें।

(ब्रॉडबैंड वाले यह प्लेयर चलायें)


(डायल-अप वाले यह प्लेयर चलायें)


यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)


VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis


हम सभी कवियों से यह गुज़ारिश करते हैं कि अपनी आवाज़ में अपनी कविता/कविताएँ रिकॉर्ड करके podcast.hindyugm@gmail.com पर भेजें। आपकी ऑनलाइन न रहने की स्थिति में भी हम आपकी आवाज़ का समुचित इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे। (अक्टूबर अंक के लिए रिकॉर्डिंग भेजने की आखिरी तिथि है १९ अक्टूबर २००८। )

रिकॉर्डिंग करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। हिन्द-युग्म के नियंत्रक शैलेश भारतवासी ने इसी बावत एक पोस्ट लिखी है, उसकी मदद से आप रिकॉर्डिंग सीख जायेंगे। अधिक जानकारी के लिए कृपया   यहाँ देखें।

# Podcast Kavi Sammelan. Part 3. Month: Sept 2008.

Wednesday, July 30, 2008

तेज़ बारिश में कबड्डी खेलना अच्छा लगता है ...

दिल्ली के अनुरूप कुकरेजा हैं, आवाज़ पर इस हफ्ते का उभरता सितारा.

इस बेहद प्रतिभाशाली संगीतकार की ताज़ा स्वरबद्ध ग़ज़ल "तेरे चेहरे पे" बीते शुक्रवार आवाज़ पर आयी और बहुत अधिक सराही गयी. ग़ज़लों को धुन में पिरोना इनका जनून है, और संगीत को ये अपना जीवन समर्पित करना चाहते हैं. फरीदा खानम, मुन्नी बेगम और जगजीत सिंह इन्हे बेहद पसंद हैं, अपने भाई निशांत अक्षर, जो ख़ुद एक उभरते हुए ग़ज़ल गायक हैं, के साथ मिलकर एक एल्बम भी कर चुके हैं. संगीत के आलावा अनुरूप को दोस्तों के साथ घूमना, बेड़मिन्टन, लॉन टेनिस, बास्केट बोंल और क्रिकेट खेलना अच्छा लगता है, मगर सबसे ज्यादा भाता है, तेज़ बारिश ( जो हालाँकि दिल्ली में कम ही नसीब होती है ) में कबड्डी खेलना. जिंदगी को अनुरूप कुछ इन शब्दों में बयां करते हैं -

Life always creates new and BIG troubles through which i pass learning new and BIGGER things.
Even A failure is a success if analyzed from the other side of it.


हमने अनुरूप से गुजारिश की, कि वो हिंद युग्म के साथ उनके पहले संगीत अनुभव के बारे में, यूनि कोड का प्रयोग कर हिन्दी में लिखें, तो उन्होंने कोशिश की, और इस तरह उन्होंने हिन्दी टंकण का ज्ञान भी ले लिया, अब हो सकता है जल्द ही वो अपना ख़ुद का हिन्दी ब्लॉग भी बना लें.....तो लीजिये पढिये, क्या कहते हैं अनुरूप, अपने और अपने संगीत के बारे में -

नमस्कार दोस्तों, सबसे पहले तो में हिंद युग्म का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा कि मुझे अपना संगीत प्रस्तुत करने का मौका दिया. उन सभी श्रोतागणों का आभार, जिन्होंने इस ग़ज़ल को सुना और अपने विचार प्रकट किए.

मेरा संगीत का सफर बचपन से ही शुरू हुआ, पिताजी को तबला व् हारमोनियम बजाते देख मैं भी इसी ओर खिंचा चला आया. शुरू से ही मुझे गाने का शौक नही रहा बल्कि संगीत का शौक रहा, जैसे जैसे उम्र बढ़ी, मेरी रूचि संगीत में बढती गई और मैंने गिटर बजाना शुरू किया. ११ वि कक्षा में मुझे एक होम स्टूडियो सेट अप करने का मौका मिला जिसको मैंने पलक झपकते ही पूरा किया. १२वि कक्षा के अंत तक मेरे भाई (निशांत अक्षर) और मैंने मिलकर एक ग़ज़ल एल्बम को पूरा किया जिसका नाम है "चुप की आवाज़ ", जिसका उदघाटन समारोह दिल्ली के हिन्दी भवन में किया गया, और जिसके बोल लिखे विज्ञान व्रत ने.

सफर आगे बढ़ा और मैं दिल्ली विश्व विद्यालय के रेडियो से जुड़ा.

रेडियो पर एक दिन इंटरव्यू देते वक्त मैंने हिंद युग्म के बारे में सुना, जो मुझे बेहद अच्छा लगा. सजीव जी से मेरी मुलाक़ात डी यू रेडियो के मैनेजर के द्वारा हुई, जो कि उस वक्त इंटरव्यू ले रहे थे. बात करने के कुछ हफ्तों बाद ही उन्होंने मुझे कुछ कवियों से ऑनलाइन मिलवाया जिन्होंने मुझे अपनी रचनायें भेजी. काफ़ी समय बाद, मनुज जी की रचना मुझे और मेरे भाई, निशांत अक्षर, को पसंद आयी और हमने इस पर काम शुरू कर दिया, और उसके बाद कि कहानी आपके सामने है.

अंत में एक बार फ़िर से सभी श्रोतागणों, मनुज जी,सजीव जी और हिंद युग्म की पूरी टीम का धन्येवाद, आगे भी आप सब मेरी कोशिशों को युहीं प्रोत्साहित करते रहेंगे इस आशा के साथ -

अनुरूप

मुझसे संपर्क करें -

Web : http://anuroop.in

iLike : http://ilike.com/artist/anuroop

Blog : http://www.anuroopsmusic.blogspot.com

अनुरूप को, आवाज़ और हिंद युग्म की ढेरों शुभकामनायें...अगर आप ने, अब तक नही सुना तो अब सुनिए, इस युवा संगीतकार की स्वरबद्ध की ये खूबसूरत ग़ज़ल, और अपना प्रोत्साहन/मार्गदर्शन दें.

Sunday, July 27, 2008

पॉडकास्ट कवि सम्मेलन का आमंत्रण अंक

दोस्तो,

जैसाकि हमने वादा किया था कि महीने के अंतिम रविवार को पॉडकास्ट सम्मेलन का प्रसारण करेंगे। इंटरनेट की गति हर एक प्रयोक्ता के पास अलग-अलग है, इसलिए हम एक समान गुणवत्ता नहीं तो रख पाये हैं, मगर फिर भी एक सम्मिलित प्रयास किया है। आशा है आप सभी को पसंद आयेगा।

नीचे के प्लेयर से सुनें।



प्रतिभागी कवि
रंजना भाटिया, दिव्य प्रकाश दुबे, मनुज मेहता, नरेश राणा, शोभा महेन्द्रू, शिवानी सिंह, अनिता कुमार, अभिषेक पाटनी
संचालक- हरिहर झा
उप-संचालक- शैलेश भारतवासी

हमें हरिहर झा, ब्रह्मनाथ त्रिपाठी अंजान और पीयूष पण्डया की भी रिकॉर्डिंग प्राप्त हुई थी, लेकिन उन्हें आसानी से सुन पाना सम्भव नहीं था। इसलिए हम उनका इस्तेमाल नहीं कर सके।

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)




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हम सभी कवियों से यह गुज़ारिश करते हैं कि अपनी आवाज़ में अपनी कविता/कविताएँ रिकॉर्ड करके podcast.hindyugm@gmail.com पर भेजें। आपकी ऑनलाइन न रहने की स्थिति में भी हम आपकी आवाज़ का समुचित इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे।

# Podcast Kavi Sammelan. Part 1. Month: July 2008.

Friday, July 25, 2008

तेरे चेहरे पे, एक खामोशी नज़र आती है...

आवाज़ पर संगीत के दूसरे सत्र के, चौथे गीत का विश्व व्यापी उदघाटन आज.
संगीत प्रेमियो,
इस शुक्रवार, बारी है एक और नए गीत की, और एक बार फ़िर संगीत पटल पर दस्तक दे रहे हैं एक और युवा संगीतकार अनुरूप, जो अपने साथ लेकर आए हैं, ग़ज़ल-गायन में तेज़ी से अपनी उपस्थिति दर्ज कराती एक आवाज़ निशांत अक्षर . ग़ज़लकार है युग्म के छायाचित्रकार कवि मनुज मेहता.
"पहला सुर" की दो ग़ज़लों के कलमकार, निखिल आनंद गिरि का आल इंडिया रेडियो पर साक्षात्कार सुनकर, अनुरूप ने युग्म से जुड़ने की इच्छा जताई और शुरू हुआ संगीत का एक नया सिलसिला. मनुज के बोल और निशांत से स्वर मिलें तो बनी, नए सत्र की यह पहली ग़ज़ल -"तेरे चेहरे पे". तो दोस्तो, आनंद लीजिये इस ताजातरीन प्रस्तुति का, और अपनी मूल्यवान टिप्पणियों से इस नई टीम का मार्गदर्शन / प्रोत्साहन करें.

ग़ज़ल को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -



Hind Yugm, once again proudly present another, very young ( just 18 yrs old ) and talented composer, Anuroop from New Delhi, for whom composing ghazal is just natural, this ghazal here has been made keeping in mind the intricacies of a beloved away from his loved one due to some mistake which had taken place in their life. Penned by Maunj Mehta, and rendered by a very talented upcoming ghazal singer Nishant Akshar, enjoy this very first ghazal of this new season, and do leave your valuable comments, and help this new team to perform even better in the coming assignments.

To listen to this ghazal, click on the player below -



ग़ज़ल के बोल -

तेरे चेहरे पे, एक खामोशी नज़र आती है,
जिंदगी और भी, यास अफ्रीं नज़र आती है,

जितना भी रूठता हूँ जिंदगी से मैं,
उतना ही ये मुझे मनाती नज़र आती है.

तुम्ही बताओ कहाँ ढूँढू, किसी आगाह को,
हर तरफ़ मुझको, गर्द -ऐ-राह नज़र आती है.

LYRICS -

Tere chehre pe ek khamoshi nazar aati hai,
zindagi aur bhi *yaas aafreen nazar aati hai.


Jitna bhi ruthta hoon zindagi se main,
utna hi yeh, mujhey manati nazar aati hai.



tumhi batao, kahan dhundoon kisi *aagah ko,
har taraf mujhko gard-e-raah hi nazar aati hai.


*Yaas Aafreen- Na-umeed se bhari hui
*Aagah- Friend/ loved one

चित्र- अनुरूप (ऊपर), निशांत अक्षर (मध्य) और मनुज मेहता (नीचे)

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)




VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis


SONG # 04, SEASON # 02, " Tere Chehare Pe ", opened on 25/07/2008 on Awaaz, Hind Yugm.
Music @ Hind Yugm, where music is a passion

Saturday, March 1, 2008

मेरा कमरा (Mera Kamara)

बहुत दिनों से हमने आवाज़ पृष्ठ को किसी आवाज़ से नहीं नावाज़ा। या यूँ कहलें कि सामूहिक आवाज़ 'पहला सुर' में इतनी आवाज़ें थी कि महीनों से इसकी ज़रूरत नहीं पड़ी। आज हम मनुज़ मेहता की आवाज़ लेकर उपस्थित हैं।

स्वर- मनुज मेहता
बोल- मेरा कमरा

नीचे ले प्लेयर से सुनें और ज़रूर बतायें कि कैसा लगा?

(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)



यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो यहाँ से डाऊनलोड कर लें।

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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