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शनिवार, 5 दिसंबर 2015

"जाँ की यह बाज़ी आख़िरी बाज़ी खेलेंगे हम..." - क्यों इस गीत की धुन चुराने पर भी अनु मलिक को दोष नहीं दिया जा सकता!


एक गीत सौ कहानियाँ - 71
 

'जाँ की यह बाज़ी आख़िरी बाज़ी खेलेंगे हम...' 




रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारे जीवन से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़े दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तम्भ 'एक गीत सौ कहानियाँ'। इसकी 71-वीं कड़ी में आज जानिए 1989 की फ़िल्म ’आख़िरी बाज़ी’ के शीर्षक गीत "जाँ की यह बाज़ी आख़िरी बाज़ी खेलेंगे हम..." के बारे में जिसे अमित कुमार ने गाया था। बोल इंदीवर के और संगीत अनु मलिक का।

अनु मलिक
मेरे पोलैंड का सफ़र जारी है। आज एक आश्चर्यजनक बात हुई। कार्यालय में एक पोलिश कर्मचारी के मोबाइल का रिंग् टोन बज उठते ही मैं चौंक उठा। अरे, यह तो एक हिन्दी फ़िल्मी गीत की धुन है! याद करने में बिल्कुल समय नहीं लगा कि यह 1989 की हिट फ़िल्म ’आख़िरी बाज़ी’ के शीर्षक गीत की धुन है। बचपन में यह गीत बहुत बार रेडियो पर सुना है। मुझे यक़ीन हो गया कि इस गीत की धुन ज़रूर किसी विदेशी गीत या कम्पोज़िशन से प्रेरित या ’चोरित’ होगा जो अभी-अभी उस रिंग् टोन में सुनाई दी है। कार्यालय से वापस आकर जब गूगल पर खोजने लगा तो हैरान रह गया कि कहीं पर भी इस गीत के किसी विदेशी गीत से प्रेरित होने की बात नहीं लिखी है। ऐसे बहुत से वेबसाइट हैं जिनमें लगभग सभी प्रेरित गीतों की सूची दी गई है, और कहीं कहीं तो संगीतकारों के नाम के अनुसार क्रमबद्ध सूची दी गई है। उसमें अनु मलिक के प्रेरित गीतों की सूची में इस गीत को न पाकर एक तरफ़ हताशा हुई और दूसरी तरफ़ एक रोमांच सा होने लगा यह सोच कर कि एक ऐसे गीत की खोज की है जो विदेशी धुन से प्रेरित है पर किसी को अब तक इसका पता नहीं है, कम से कम इन्टरनेट पर तो नहीं! अब मुश्किल यह थी कि कैसे पता लगाएँ, कहीं कोई सूत्र मिले भी तो कैसे मिले? ’आख़िरी बाज़ी’ के गीत की धुन को लगातार गुनगुनाते हुए अनु मलिक के प्रेरित गीतों की सूची को ध्यान से देख ही रहा था कि एक गीत पे जाकर मेरी नज़र टिक गई। गीत था 1995 की मशहूर फ़िल्म ’अकेले हम अकेले तुम’ का "राजा को रानी से प्यार हो गया..."। चौंक उठा, इस गीत की पहली पंक्ति की धुन भी तो कुछ हद तक ’आख़िरी बाज़ी’ के गीत के धुन से मिलती जुलती है। पाया कि यह गीत प्रेरित है 1972 की फ़िल्म ’The Godfather' के गीत "speak softly, love" से, जिसका एक instrumental version भी है जिसे ’The Godfather Theme' शीर्षक दिया गया है। संगीतकार हैं निनो रोटा।


निनो रोटा
यू-ट्युब पर ’The Godfather Theme' सुनने पर एक और रोचक बात पता चली। फ़िल्म ’आख़िरी बाज़ी’ का गीत हू-ब-हू इस धुन पर आधारित है, कोई प्रेरणा नहीं, सीधी चोरी है। दूसरी ओर "राजा को रानी से..." गीत में इस धुन से बेशक़ सिर्फ़ प्रेरणा ली गई है, चोरी नहीं। जो गीत हू-ब-हू नकल है (आख़िरी बाज़ी...), उसका कहीं कोई उल्लेख नहीं जबकि एक अच्छी प्रेरणा के उदाहरण (राजा को रानी से...) को लोगों ने चोरी करार दिया है। उसी सूची वाले वेब-पेज पर जब "Godfather" लिख कर खोजा तो पाया कि एक और गीत इसी धुन से प्रेरित है। और वह गीत है वर्ष 2000 की फ़िल्म ’आशिक़’ का गीत "तुम क्या जानो दिल करता तुमसे कितना प्यार...", जिसके संगीतकार हैं संजीव-दर्शन। इस तरह से ’Godfather' के उस धुन पर तीन-तीन हिन्दी फ़िल्मी गीत बन चुके हैं। एक रोचक तथ्य यह भी है कि जिस ’The Godfather Theme' की हम बात कर रहे हैं, वह धुन भी प्रेरित है (या कुछ समानता है) वर्ष 1951 के एक कम्पोज़िशन से। फ़िल्म ’High Noon' में दिमित्री तिओमकिन के संगीत निर्देशन में "Do not forsake me o my darling..." गीत की धुन को अगर ग़ौर से सुनें तो निनो रोटा के कम्पोज़िशन से हल्की समानता महसूस की जा सकती है। दिमित्री को अपने गीत के लिए ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। और निनो को क्या कोई पुरस्कार मिला? इसमें भी एक रोचक कहानी है। निनो रोटा ने ’The Godfather' में जो धुन बनाई थी, उस धुन को एक अलग अंदाज़ में (comedic version) उन्होंने 1958 की फ़िल्म ’Fortunella' के लिए बनाया था। ऑस्कर कमिटी ने शुरू-शुरू में 'The Godfather' की धुन को Best Original Score की श्रेणी के नामांकन में जगह दी थी, पर जैसे ही ’Fortunella' के धुन का सच्चाई सामने आई तो उसे पुरस्कार के अयोग्य ठहराया गया। इसके अगले ही साल जब ’The Godfather Part II' फ़िल्म बनी तो निनो रोटा ने यही धुन फिर एक बार प्रयोग कर एक नई कम्पोज़िशन बनाई। लेकिन इस बार ऑस्कर कमिटी ने न केवल उनकी धुन को नामांकित किया, बल्कि Best Score का पुरस्कार भी दिया।

निनो रोटा की यह धुन इतना ज़्यादा लोकप्रिय हुआ समूचे विश्व में कि बहुत से कलाकारों ने इसे अपने-अपने ऐल्बमों में शामिल किया। जहाँ एक तरफ़ कलाकारों ने मूल गीत को ही अपनी आवाज़ में रेकॉर्ड करवाया, बहुत से कलाकार ऐसे भी थे जिन्होंने अपनी-अपनी भाषाओं के बोलों को इस धुन पर फ़िट किया। अब एक नज़र ऐसे ही कुछ गीतों और भाषाओं पर डालते हैं। 

इटली - "Parla più piano..."
फ़्रांस - "Parle Plus Bas..."
यूक्रेन - "Skazhy scho lyubysh..."
यूगोस्लाविया - "Govori Tiše..."
हंगरी - "Gyöngéden ölelj át és ringass szerelem..."
कम्बोडिया - "Khum Joll Snaeha..."
स्लोवाकिया - "Býval som z tých..."
पोर्तुगल - "Fale Baixinho..."
इरान - "Booye Faryad..."

ये तो थे कुछ ऐसे उदाहरण जिनमें इस धुन पर अलग-अलग भाषाओं के गीत बने। इनके अलावा और भी असंख्य कलाकारों ने अपनी-अपनी साज़ पर इस धुन को instrumental के रूप में रेकॉर्ड करवाया। ऐसे में जहाँ दुनिया भर के कलाकारों ने इस धुन को गले लगाया, तो फिर क्या अनु मलिक या संजीव दर्शन पर इस धुन की चोरी का इलज़ाम लगाना ठीक होगा? फ़ैसला आप पर छोड़ते हैं, फ़िल्हाल सुनते हैं ’The Godfather' की धुन पर आधारित फ़िल्म ’आख़िरी बाज़ी’ का शीर्षक गीत। 


फिल्म आखिरी बाज़ी : 'जाँ की यह बाज़ी आखिरी बार...' : अमित कुमार : इन्दीवर : अनु मालिक





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खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी
प्रस्तुति सहयोग: कृष्णमोहन मिश्र 




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