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Sunday, November 23, 2008

संगीत जगत की नई सुर्खियाँ

भारत-पाक रॉक बैंड समागम

हिंदुस्तान के हिन्दी रॉक बैंड "यूफोरिया" (धूम पिचक और माये री से मशहूर) ने पाकिस्तानी बैंड स्ट्रिंग्स के साथ जोड़ बनाने के बाद अब एक और पाकिस्तानी बैंड "नूरी" के साथ अपने नए एल्बम पर काम शुरू कर दिया है. पाकिस्तान में हुए एक सम्मान समारोह में यूफोरिया के सदस्य नूरी के अली नूर और अली हमजा बंधुओं से मिले थे. अगस्त में नूरी की टीम भारत दौरे पर भी आई थी. पाकिस्तान के इस बेहद मशहूर बैंड के साथ काम कर यूफोरिया के सदस्य काफ़ी उत्साहित हैं. एक गीत "वो क़समें" है जो आधा भारत और आधा पाकिस्तान में फिल्माया जाएगा. पहली बार पाकिस्तान की किसी बड़ी कंपनी द्वारा किसी हिन्दुस्तानी रॉक बैंड का एल्बम निकला जा रहा है, जो कि निश्चित ही एक अच्छी शुरुआत है.


जेथ्रो तुल और अनुष्का की बेजोड़ जुगलबंदी

मशहूर ब्रिटिश रॉक समूह जेथ्रो तुल अपने एक सप्ताह के भारत दौरे पर हैं, ३० नवम्बर को दिल्ली के प्रगति मैदान में सितार वादिका अनुष्का शर्मा के साथ जुगलबंदी के बाद ये ६ सदस्यया समूह कोलकत्ता, मुंबई, बंगलोरु और हैदराबाद की यात्रा करेगा. १९६७-६८ में गठित हुए इस समूह की खासियत इनके गायन के अंदाज़ के साथ साथ टीम प्रमुख इआन एंडरसन का बांसुरी वादन भी है. हालाँकि एंडरसन का ये पांचवां भारत दौरा है पर ये पहली बार है जब वो पंडित रवि शंकर की सुपुत्री के साथ ताल मिला रहे हैं. इससे पहले वो पंडित हरी प्रसाद चौरसिया जी के साथ भी मंच बाँट चुके हैं. यदि आप उपरोक्त शहरों में हैं तो इस अवसर को जाया मत होने दें.


बॉलीवुड अभिनेत्रियों की नई आवाज़

बॉलीवुड के ताज़ा हिट्स "ठा करके" (गोलमाल रिटर्न), "मेरी एक अदा शोला सी" (किड्नाप) और जोनी गद्दार और वेल्कम के शीर्षक गीत को अपनी आवाज़ देने वाली पार्श्व गायन् की दुनिया की नई सनसनी हैं आकृति ककर. टेलीविजन के एक टेलेंट प्रतियोगिता में जीतने के बाद भी आकृति के लिए बॉलीवुड के दरवाज़े नही खुले, पर परिवार का सहयोग निरंतर बना रहा. दीपल शाह पर फिल्माए गए "रंगीला रे" के रीमिक्स ने आकृति को थोडी बहुत पहचान जरूर दी पर वो ख़ुद मानती हैं कि रीमिक्स गाकर कोई भी अपने हुनर को भरपूर तरीके से पेश नही कर सकता. शंकर एहसान और लोय के लिए गाये गीत "छम से " ने उन्हें सही मौका मिला. कैटरिना कैफ के लिए आदर्श आवाज़ मानी जा रही आकृति अपनी इस शुरूआती सफलता से बेहद खुश है, आने वाली बिल्लू बार्बर, तो बात पक्की और लव हुआ जैसी फिल्मों में हम आकृति की आवाज़ का लुत्फ़ उठा सकेंगें, साथ ही आकृति शंकर महादेवन के साथ एक एल्बम पर भी काम कर रही है. ख़ुद अपने दम पर इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में जुटी आकृति को हिंद युग्म आवाज़ की शुभकामनायें.


भव्य है युवराज का संगीत भी

देश भर में चुनावों की सरगर्मियाँ जोर पकड़ रही हैं. युवाओं को वोट डालने के लिए प्रेरित करने के लिए इन दिनों ए आर रहमान के मशहूर गीत "पप्पू कांट डांस" की तर्ज पर एक पैरोडी गीत बना कर हर जगह बजाया जा रहा है, साथ ही चुनाव आयोग ए आर को व्यक्तिगत तौर पर भी आकर इस मुहीम में शामिल होने की फरमाइश कर चुका है. यूँ भी इन दिनों ए आर की नई फ़िल्म युवराज का संगीत, संगीत प्रेमियों पर जादू चला रहा है. शो-मैन सुभाष घई की इस फ़िल्म का आधार ही संगीत है.फ़िल्म के सभी प्रमुख किरदार किसी न किसी रूप में संगीत से जुड़े हुए दिखाए गए हैं और रहमान ने अपने संगीत से इन सभी किरदारों को अलग अलग रंग दिए हैं. दिल से और साथिया जैसी फिल्मों के बाद गुलज़ार -रहमान एक बार फ़िर अपनी सफलता को दोहराने में कामियाब हुए हैं. अपनी भव्यता और संगीत की मधुरता के लिए ये फ़िल्म देखी जा सकती है.

Saturday, November 15, 2008

परदा है परदा

गायक कलाकार भी बड़े परदे पर दिखने की कसक को रोक नहीं पाते। हिमेश रेशमिया तो अब ख़ुद को स्टार मानने लगे हैं, सोनू निगम भी एक बार फ़िर वापसी का मन बना रहे हैं। हमारे कैलाश खेर मगर ख़ुद को अभिनय से दूर रखना चाहते हैं, हालाँकि अपने पहले ही मशहूर गीत "अल्लाह के बन्दे" में वो अपने गीत को गाते हुए दुनिया को दिखे थे। उस्ताद नुसरत फतह अली खान ने भी बड़े परदे पर अपनी कव्वाली पर अभिनय किया था और अब अपने गुरु के पदचिन्हों पर चलते उस्ताद राहत फतह अली खान साहब भी दिखेंगे फ़िल्म "दिल कबड्डी" में ख़ुद अपने गाने पर अभिनय करते हुए, अभिनेत्री सोहा अली खान के साथ। यकीनन ये गीत फ़िल्म का सबसे खूबसूरत पहलू होने वाला है.


परी को मिला सपनों का शहजादा

"परी हूँ मैं..." गाकर पॉप संगीत को लोकप्रिय बनाने वाली सुनीता राव आखिरकार विवाह के बंधन में बंध ही गईं। फ़िल्म "रॉक ऑन" के सिनेमाटोग्राफर (छायाकार), जर्मनी के जासन वेस्ट हैं इस परी के सपनों के शहजादे। जासन सुनीता को पाने के लिए जर्मनी छोड़ मुंबई भारत में आकर बस गए हैं। फ़िल्म रॉक ऑन के आलावा उन्होंने सुनीता के नये वीडियो "सुन ज़रा" का भी छायांकन किया है। सुनीता और जासन को आवाज़ परिवार की बधाई।


तीन पहर संगीत बजे

मुंबई में धूम मचाने के बाद "तीन पहर" (शास्त्रीय संगीत और लोक संगीत समारोह) इस बार दिल्ली में आयोजित हुआ। दिन के तीन पहर तक चलने वाले इस संगीत उत्सव की खासियत ये है कि इसमें प्रस्तुत होने वाली सभी जुगलबंदियां और वाध्य संगीत के रचयिता नए उभरते हुए कलाकार होते हैं। इस माध्यम से श्रोताओं को इन आने वाले समय के होने वाले उस्तदों के फन का पहला जायका मिल जाता है। सोमबाला सतले, राकेश चौरसिया, उस्ताद शुजात हुसैन खान, देवकी पंडित, और मुकुल शिवपुत्र जैसे बड़े कलाकारों ने भी इस कार्यकम में शिरकत की। संचालक महेश बाबू बताते हैं राहुल शर्मा ने १२ साल पहले इस कार्यक्रम में अपना जौहर दिखाया था और आज वो शिखर पर हैं। हम दुआ करेंगे कि और भी नामी और गुणी कलाकार इस मंच से उभर कर सामने आयें.


बड़े कलाकारों की टक्कर में संगीत प्रेमियों का फायदा

दिसम्बर के अंत तक तीन बड़ी फिल्में प्रर्दशित होने वाली हैं. और इंडस्ट्री की मशहूर "ज़ंग-ए-खान" फिर छिड़ने वाली है। शाहरुख़ खान अपने लौह पुरूष अंदाज़ से बिल्कुल अलग इस बार एक आम आदमी के किरदार में लग रहे हैं फ़िल्म "रब ने बना दी जोड़ी" में तो आमिर ने "माचों मेन" का लुक दिया है अपने "गजनी" के किरदार को। वहीं अपने चिर परिचित प्रेमी के अंदाज़ में हैं सलमान खान फ़िल्म "युवराज" में। अब तीनों ही बड़ी फिल्में बड़े बैनर की हैं। संगीत के धुरंधरों ने इन फिल्मों को सजाया है तो जाहिर सी बात है कि तीनों फिल्मों का संगीत जबरदस्त होगा ही। " रब ने..." में सलीम सुलेमान का संगीत है तो "युवराज" और "गजनी" में ए॰आर॰ रहमान का संगीत हैं। युवराज के गीतकार हैं गुलज़ार साहब और गजनी के प्रसून जोशी। इन फिल्मों के "आजा के हवाओं में...", "धीमे धीमे..." और "गुजारिश" जैसे गीत आजकल सब की जुबान पर चढ़ चुके हैं...कुल मिलाकर संगीत प्रेमियों के लिए एक अच्छी "ट्रीट" होंगीं ये फिल्में, ये तय है।

Sunday, November 9, 2008

रॉक ऑन के सितारे जुटे बाढ़ राहत कार्य में

आवाज़ ने संगीतप्रेमियों से इस फ़िल्म की सिफारिश की थी, और आज यह फ़िल्म साल की श्रेष्ट फिल्मों में एक मानी जा रही है. फ़िल्म के संगीत का नयापन युवाओं को बेहद भाया. फरहान अख्तर ने बतौर अभिनेता और गायक अपनी पहचान बनाई. बिहार में कोसी नदी में आई बाढ़ के पीडितों के लिए मुंबई में अभी हाल ही में इस फ़िल्म के सितारों और संगीत टीम के सदस्यों ने जबरदस्त शो किया और इस नेक काम के लिए धन अर्जित किया. "मेरी लौंड्री का एक बिल..." गीत जब ऋतिक रोशन थिरके तो दर्शक समूह झूम उठा. "रॉक ऑन" का संगीत वास्तव में रोक्किंग है.


रविन्द्र जैन की वापसी

लंबे समय के बाद सुप्रसिद्ध गीतकार संगीतकार रविन्द्र जैन फ़िल्म संगीत में वापसी कर रहे हैं. ७ नवम्बर को राजश्री प्रोडक्शन के साथ उनकी नई फ़िल्म "एक विवाह ऐसा भी" प्रर्दशित हो रही है. रविन्द्र जी ने राजश्री फ़िल्म्स के साथ लगभग १७ फिल्मों में काम किया है. "अबोध" की असफलता के लगभग २० वर्षों के बाद फ़िल्म "विवाह" से रविन्द्र जी ने बड़जात्या परिवार के साथ अपनी वापसी की थी. अब "एक विवाह ऐसा भी" से भी इसी तरह की सफलता की दर्शकों और श्रोताओं को उम्मीदें हैं.


नदीम श्रवण की जोड़ी दिखायेगी फ़िर से कमाल

आशिकी, दिल है कि मानता नहीं, सड़क, सजन, दीवाना, राजा हिन्दुस्तानी और परदेस जैसी फिल्मों से ९० के दशक में संगीत जगत पर राज करने वाली संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण २००५ में हुए "स्प्लिट" के बाद अब फ़िर से एक होकर काम करेगी. धर्मेश दर्शन की "बावरा" और डेविड धवन की "डू नोट डिसटर्ब" होंगीं उनकी आने वाली फिल्में, जहाँ एक बार फ़िर क्रेडिट टाइटल में नदीम और श्रवण का नाम एक साथ देखा जाएगा. संगीत प्रेमियों के लिए यह निश्चित ही एक सुखद ख़बर है...उम्मीद करेंगें कि जतिन ललित की जोड़ी भी अपने मतभेद भूलकर एक साथ आयें जल्द ही...


एक दौर समाप्त

भारतीय फ़िल्म जगत के मशहूर निर्माता-निर्देशक बीआर चोपड़ा का लंबी बीमारी के बाद बुधवार सुबह मुंबई में निधन हो गया। फिल्मी दुनिया को 'नया दौर' देने वाले बलदेव राज चोपड़ा का जन्म 22 अप्रैल 1914 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। ‘दादा साहब फाल्के’ पुरस्कार से सम्मानित चोपड़ा ने धूल का फूल’, ‘वक़्त’, ‘नया दौर’, ‘क़ानून’, ‘हमराज’, ‘इंसाफ़ का तराज़ू’ और ‘निकाह’ जैसी कई सफल फ़िल्में बनाई। 'आवाज़' की विनम्र श्रद्धाँजलि!!


पं॰ भीमसेन जोशी को दिया जायेगा भारत-रत्न

सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित भीमसेन जोशी को सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित करने का फ़ैसला किया है. किराना घराने के ८६ वर्षीय भीमसेन ने महज़ १९ वर्ष की उम्र से गाना शुरू किया था। कर्नाटक के गडक ज़िले के एक छोटे से शहर में वर्ष १९२२ में जन्मे और मुख्य रूप से खयाल शैली और भजन के लिए मशहूर पंडित जोशी को वर्ष १९९९ में पद्मबिभूषण, १९८५ में पद्मभूषण और १९७२ में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।

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