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Tuesday, May 18, 2010

मोरा पिया मोसे बोलत नाहीं.. लोक, शास्त्रीय और पाश्चात्य-संगीत की मोहक जुगलबंदी का नाम है "राजनीति"

ताज़ा सुर ताल १९/२०१०

विश्व दीपक - नमस्कार दोस्तों, 'ताज़ा सुर ताल' की एक और ताज़ी कड़ी के साथ हम हाज़िर हैं। आज जिस फ़िल्म के संगीत की चर्चा हम करने जा रहे हैं वह है प्रकाश झा की अपकमिंग् फ़िल्म 'राजनीति'। १० बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित प्रकाश झा ने हमेशा ही अपने फ़िल्मों में समाज और राजनीति के असली चेहरों से हमारा बावस्ता करवाया है। और 'राजनीति' भी शायद उसी जौनर की फ़िल्म है।

सुजॊय - हाँ, और सुनने में आया है कि 'राजनीति' की कहानी जो है वह सीधे 'महाभारत' से प्रेरित है। दर-असल यह एक ऐसी औरत के सफर की कहानी है जो भ्रष्टाचार से लड़ती हुईं देश की प्रधान मंत्री बन जाती हैं। कैटरीना कैफ़ ने ही यह किरदार निभाया है और ऐसा कहा जा रहा है कि यह चरित्र सोनिया गांधी से काफ़ी मिलता-जुलता है, वैसे कैटरीना का यह कहना है कि उन्होंने प्रियंका गाँधी के हावभाव को अपनाया है। ख़ैर, फ़िल्म की कहानी पर न जाते हुए आइए अब सीधे फ़िल्म के संगीत पक्ष पर आ जाते हैं।

विश्व दीपक - लेकिन उससे पहले कम से कम हम इतना ज़रूर बता दें कि 'राजनीति' में कैटरीना कैफ़ के अलावा जिन मुख्य कलाकारों ने काम किए हैं वो हैं अजय देवगन, नाना पाटेकर, रणबीर कपूर, नसीरुद्दिन शाह, अर्जुन रामपाल, मनोज बाजपयी, सारा थॊम्पसन, दर्शन जरीवाला, श्रुति सेठ. निखिला तिरखा, चेतन पण्डित, विनय आप्टे, किरण कर्मकार, दया शंकर पाण्डेय, जहांगीर ख़ान, और रवि खेमू।

सुजॊय - वाक़ई बहुत बड़ी स्टार कास्ट है। विश्व दीपक जी, अभी हाल ही में एक फ़िल्म रिलीज़ हुई थी 'स्ट्राइकर', आपको याद होगा। फ़िल्म कब आयी कब गयी पता ही नहीं चला, लेकिन उस फ़िल्म के संगीत में कुछ बात थी। और सब से बड़ी बात यह थी कि उसमें ६ अलग अलग संगीतकार थे और ६ अलग अलग गीतकार। 'स्ट्राइकर' फ़िल्म की हमने जिस अंक में चर्चा की थी, हमने कहा था शायद यह पहली फ़िल्म है इतने सारे संगीतकार गीतकार वाले। अब देखिए, 'राजनीति' में भी वही बात है।

विश्व दीपक - हाँ, लगता है कुछ फ़िल्मकार अब इस राह पर भी चलने वाले हैं। अच्छी बात है कि एक ही एल्बम के अंदर लोगों को और ज़्यादा विविधता मिलेगी। अगर एक ही फ़िल्म में प्रीतम, शान्तनु मोइत्रा, आदेश श्रीवास्तव, और वेन शार्प जैसे बिल्कुल अलग अलग शैली के संगीतकार हों, तो लोगों को उसमें दिलचस्पी तो होगी ही।

सुजॊय - तो चलिए, 'राजनीति' का पहला गाना सुनते हैं मोहित चौहान और अंतरा मित्रा की आवाज़ों में। गीत इरशाद कामिल का है और धुन प्रीतम की।

गीत: भीगी सी भागी सी


सुजॊय - प्रीतम और इरशाद कामिल की जोड़ी ने हमेशा हिट गीत हमें दिए हैं। इस गीत को सुन कर भी लगता है कि यह लम्बी रेस का घोड़ा बनेगा। एक बार सुन कर शायद उतना असर ना कर पाए, लेकिन दो तीन बार सुनने के बाद गीत दिल में उतरने लगती है। मेलडी के साथ साथ एक यूथ अपील है इस गीत में।

विश्व दीपक - जी हाँ, आप सही कह रहे हैं और जिस तरह से गीत को रचा गया है, वह भी काफ़ी अलग तरीके का है। अमूमन मोहित चौहान हीं अपने आलाप के साथ गीत की शुरूआत करते हैं, लेकिन इस गाने में पहली दो पंक्तियाँ अंतरा मित्रा की हैं, जो अपनी मीठी-सी आवाज़ के जरिये मोहित की पहाड़ी आवाज़ के लिए रास्ता तैयार करती हैं। और जहाँ तक मोहित की बात है तो ये किसी से छुपा नहीं है कि मोहित इरशाद-प्रीतम के पसंदीदा गायक हैं और वे कभी निराश भी नहीं करते। इस गाने में इरशाद का भी कमाल दिख पड़ता है। "संदेशा", "अंदेशा", "गुलाबी", "शराबी" जैसे एक-दूसरे से मिलते शब्द कानों को बड़े हीं प्यारे लगते हैं।

सुजॊय - चलिए इस गीत के बाद अब जो गीत हम सुनेंगे वह शायद फ़िल्म का सब से महत्वपूर्ण गीत है। तभी तो फ़िल्म के प्रोमोज़ में इसी गीत का सहारा लिया जा रहा है। "मोरा पिया मोसे बोलत नाही, द्वार जिया के खोलत नाही"। शास्त्रीय और पाश्चात्य संगीत का सुंदर फ़्युज़न सुनने को मिलता है इस गीत में, जिसे आदेश श्रीवास्तव ने स्वरबद्ध किया है और गाया भी ख़ुद ही है। पार्श्व में उनका साथ दिया है शशि ने तो अंग्रेज़ी के शब्दों को अपनी मोहक आवाज़ से सजाया है रोज़ाली निकॊलसन ने। इस गीत को लिखा है समीर ने। बहुत दिनों के बाद समीर और आदेश श्रीवस्तव का बनाया गीत सुनने को मिल रहा है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इन्होने ९० के दशक के अंदाज़ में नहीं, बल्कि समय के साथ चलते हुए इसी दौर के टेस्ट के मुताबिक़ इस गीत को ढाला है।

विश्व दीपक - सुजॊय जी, वैसे शायद आपको यह याद हो कि कुछ सालों पहले पाकिस्तानी ग्रुप फ़्युज़न का एक गीत आया था "मोरा सैंया मोसे बोले ना"। यह गीत बाद में "नागेश कुकुनूर" की फिल्म "हैदराबाद ब्लूज़-२" में भी सुनने को मिला था और हाल-फिलहाल में इसे "अमन की आशा" में शामिल किया गया है। मेरे हिसाब से "समीर"/"आदेश श्रीवास्तव" इस गाने की पहली पंक्ति से प्रेरित हुए हैं और उन्होंने उस पंक्ति में आवश्यक परिवर्त्तन करके इस गाने को एक अलग हीं रूप दे दिया है। या ये भी हो सकता है कि यह पंक्ति किसी पुराने सूफ़ी कवि की हो, जहाँ से दोनों गानों के गीतकार प्रभावित हुए हों। मुझे ठीक-ठीक मालूम नहीं,इसलिए कुछ कह नहीं सकता। वैसे जो भी हो, समीर ने इस गाने को बहुत हीं खूबसूरत लिखा है और उसी खूबसूरती से आदेश ने धुन भी तैयार की है। आदेश श्रीवास्तव हर बार हीं अपने संगीत से हम सबको चौंकाते रहे हैं, लेकिन इस बार तो अपनी आवाज़ के बदौलत इन्होंने हम सबको स्तब्ध हीं कर दिया है। इनकी आवाज़ में घुले जादू को जानने के लिए पेश-ए-खिदमत है आप सबके सामने यह गीत:

गीत: मोरा पिया


सुजॊय - इसी गीत का एक रीमिक्स वर्ज़न भी है, लेकिन ख़ास बात यह कि सीधे सीधे ऒरिजिनल गीत का ही रीमिक्स नहीं कर दिया गया है, बल्कि कविता सेठ की आवाज़ में इस गीत को गवाकर दीप और डी.जे. चैण्ट्स के द्वारा रीमिक्स करवाया गया है। मेरा व्यक्तिगत विचार है कि आदेश श्रीवास्तव वाला वर्जन बेहतर है। आइए सुनते हैं कविता सेठ की आवाज़ में यह गीत:

गीत: मोरा पिया मोसे बोलत नाही (ट्रान्स मिक्स)


विश्व दीपक - प्रीतम-इरशाद कामिल और आदेश-समीर के बाद अब बारी है शांतनु-स्वानंद की। शांतनु मोइत्रा और स्वानंद किरकिरे की जोड़ी भी एक कमाल की जोड़ी है, जिनका स्कोर १००% रहा है। भले इनकी फ़िल्में बॊक्स ऒफ़िस पर कामयाब रही हो या असफल, इनके गीत-संगीत के साथ हमेशा ही 'ऒल इज़ वेल' रहा है। '३ इडियट्स' की अपार लोकप्रियता के बाद अब 'राजनीति' में ये दोनों वापस आए हैं और केवल एक गीत इन्होने इस फ़िल्म को दिया है। यह एक डांस नंबर है "इश्क़ बरसे बूंदन बूंदन"।

सुजॊय - प्रणब बिस्वास, हंसिका अय्यर और स्वानंद किरकिरे की आवाज़ों में यह गीत एक मस्ती भरा गीत है। 'लागा चुनरी में दाग' फ़िल्म के "हम तो ऐसे हैं भ‍इया" की थोड़ी बहुत याद आ ही जाती है इस गीत को सुनते हुए। स्वानंद किरकिरे क्रमश: एक ऐसे गीतकार की हैसियत रखने लगे हैं जिनकी लेखन शैली में एक मौलिकता नज़र आती है। भीड़ से अलग सुनाई देते हैं उनके लिखे हुए गीत। और भीड़ से अलग है शांतनु का संगीत भी। "मोरा पिया" में अगर शास्त्रीय संगीत के साथ पाश्चात्य का फ़्युज़न हुआ है, तो इस गीत में हमारे लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत का संगम है। कुल मिलाकर एक कर्णप्रिय गीत है पिछले गीत की तरह ही। सुनते हैं बारिश को समर्पित यह गीत और इस चिलचिलाती गर्मी में थोड़ी सी राहत की सांस लेते हैं इस गीत को सुनते हुए।

गीत: इश्क़ बरसे


सुजॊय - और अब गुलज़ार के कलम की जादूगरी। "धन धन धरती रे" गीत समर्पित है इस धरती को। वेन शार्प के संगीत से सजे इस गीत के दो रूप हैं। पहले वर्ज़न में आवाज़ है शंकर महादेवन की और दूसरी में सोनू निगम की। सोनू वाले वर्ज़न का शीर्षक रखा गया है "कॊल ऒफ़ दि सॊयल"। एक देश भक्ति की भावना जागृत होती है इस गीत को सुनते हुए। पार्श्व में बज रहे सैन्य रीदम के इस्तेमाल से यह भावना और भी ज़्यादा बढ़ जाती है। मुखड़े से पहले जो शुरुआती बोल हैं "बूढ़ा आसमाँ, धरती देखे रे, धन है धरती रे, धन धन धरती रे", इसकी धुन "वंदे मातरम" की धुन पर आधारित है। और इसे सुनते हुए आपको दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले "बजे सरगम हर तरफ़ से गूंजे बन कर देश राग" गीत की याद आ ही जाएगी।

विश्व दीपक - सुजॊय जी, सही पकड़ा है आपने। वैसे इस गीत के बारे में कुछ कहने से पहले मैं वेन शार्प से सबको परिचित करवाना चाहूँगा। वेन शार्प एक अमेरिकन संगीतकार हैं, जिन्होंने इससे पहले प्रकाश झा के हीं "गंगाजल" और "अपहरण" में संगीत दिया है। साथ हीं साथ पिछले दिनों आई फिल्म "लाहौर" में भी इन्हीं का संगीत था। ये एकलौते अमेरिकन संगीतकार हैं जिन्हें फिल्मफ़ेयर से नवाजा गया है। अब तो ये प्रकाश झा के फेवरेट बन चुके हैं। चूँकि ये हिन्दी नहीं समझते, इसलिए इनका संगीत पूरी तरह से निर्देशक की सोच और गीतकार के शब्दों में छुपी भावना पर निर्भर करता है। इनका मानना है कि हिन्दी फिल्म-संगीत की तरफ़ इनका रूझान "ए आर रहमान" की "ताल" को सुनने के बाद हुआ। चलिए अब इस गाने की भी बात कर लेते हैं। तो इस गाने में "वंदे मातरम" को एक नया रूप देने की कोशिश की गई है। धरती को पूजने की बजाय गुलज़ार साहब ने धरती की कठिनाईयों की तरफ़ हम सबका ध्यान आकर्षित किया है और इसके लिए उन्होंने बड़े हीं सीधे और सुलझे हुए शब्द इस्तेमाल किए हैं, जैसे कि "सूखा पड़ता है तो ये धरती फटती है।" अंतिम पंक्तियों में आप "सुजलां सुफलां मलयज शीतलां, शस्य श्यामलां मातरम" को महसूस कर सकते हैं। अब ज्यादा देर न करते हुए हम आपको दोनों हीं वर्जन्स सुनवाते हैं। आप खुद हीं निर्णय लें कि आपको किसकी गायकी ने ज्यादा प्रभावित किया:

गीत: धन धन धरती (शंकर महादेवन)


गीत: धन धन धरती रिप्राईज (सोनू निगम)


"राजनीति" के संगीत को आवाज़ रेटिंग ****
तो दोस्तों, अब आपकी बारी है, कहिए 'राजनीति' के गानें कैसे लगे आपको? क्या कुछ ख़ास बात लगी इन गीतों में? क्या आपको लगता है कि चार अलग अलग तरह के गीतकार-संगीतकार जोड़ियों से फ़िल्म के गीत संगीत पक्ष को फ़ायदा पहुँचा है? प्रकाश झा के दूसरे फ़िल्मों के गीत संगीत की तुलना में इस फ़िल्म को आप क्या मुक़ाम देंगे? ज़रूर लिख कर बताइएगा टिप्पणी में।

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ५५- हाल ही में ख़बर छपी थी कि रणबीर कपूर लता जी से मिलने वाले हैं किसी ख़ास मक़सद के लिए। बता सकते हैं क्या है वह ख़ास मक़सद?

TST ट्रिविया # ५६- गीतकार समीर एक इंटरविउ में बता रहे हैं - "मैने अपना गीत जब अमित जी (अमिताभ बच्चन) को सुनाया, तो वो टेबल पर खाना खा रहे थे। वो गाने लगे और रोने भी लगे, उनको अपनी बेटी श्वेता याद आ गईं।" दोस्तों, जिस गीत के संदर्भ में समीर ने ये शब्द कहे, उस गीत को आदेश श्रीवास्तव ने स्वरबद्ध किया था। अंदाज़ा लगा सकते हैं कौन सा गीत है यह?

TST ट्रिविया # ५७- प्रकाश झा ने 'राजनीति' में गुलज़ार साहब से एक गीत लिखवाया है। क्या आप १९८४ की वह मशहूर फ़िल्म याद कर सकते हैं जिसमें गुलज़ार साहब ने प्रकाश झा के साथ पहली बार काम किया था?


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. प्रशान्त तामांग।
२. प्रकाश मेहरा, जिन्होने लिखा था "जिसका कोई नहीं उसका तो ख़ुदा है यारों"।
३. फ़िल्म 'अपना सपना मनी मनी' में "देखा जो तुझे यार, दिल में बजी गिटार"।

सीमा जी, आपके दोनों जवाब सही हैं। तीसरे सवाल का जवाब तो आपने जान हीं लिया। दिमाग पर थोड़ा और जोड़ देतीं तो इस सवाल का जवाब भी आपके पास होता। खैर कोई नहीं.. इस बार की प्रतियोगिता में हिस्सा लीजिए।

Monday, November 16, 2009

"ऑल इज वेल" है शांतनु-स्वानंद की जोड़ी के रचे "३ इडियट्स" के संगीत में

ताजा सुर ताल TST (35)

दोस्तो, ताजा सुर ताल यानी TST पर आपके लिए है एक ख़ास मौका और एक नयी चुनौती भी. TST के हर एपिसोड में आपके लिए होंगें तीन नए गीत. और हर गीत के बाद हम आपको देंगें एक ट्रिविया यानी हर एपिसोड में होंगें ३ ट्रिविया, हर ट्रिविया के सही जवाब देने वाले हर पहले श्रोता की मिलेंगें २ अंक. ये प्रतियोगिता दिसम्बर माह के दूसरे सप्ताह तक चलेगी, यानी 5 अक्टूबर से १४ दिसम्बर तक, यानी TST के ४० वें एपिसोड तक. जिसके समापन पर जिस श्रोता के होंगें सबसे अधिक अंक, वो चुनेगा आवाज़ की वार्षिक गीतमाला के 60 गीतों में से पहली 10 पायदानों पर बजने वाले गीत. इसके अलावा आवाज़ पर उस विजेता का एक ख़ास इंटरव्यू भी होगा जिसमें उनके संगीत और उनकी पसंद आदि पर विस्तार से चर्चा होगी. तो दोस्तों कमर कस लीजिये खेलने के लिए ये नया खेल- "कौन बनेगा TST ट्रिविया का सिकंदर"

TST ट्रिविया प्रतियोगिता में अब तक-

पिछले एपिसोड में, अब तो लगता है सीमा जी अकेली रनर रह गयी हैं, अब उन्हें चुनौती देना तो असंभव सा ही लग रहा है...


सजीव - सुजॉय, 'ताज़ा सुर ताल' में इस हफ़्ते हम चर्चा करेंगे विधु विनोद चोपड़ा की आनेवाली फ़िल्म '3 Idiots' का, और इस फ़िल्म के कुछ गीत भी सुनेंगे।

सुजॉय - मैने सुना है कि यह फ़िल्म चेतन भगत के उपन्यास Five Point Someone पर आधारित है, क्या यह सच है?

सजीव - मैने भी पहले पहले यही सुना था, लेकिन औपचारिक तौर पर शायद ऐसा नहीं है। हाल में जब इस फ़िल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी से यह सवाल किया गया था तो उन्होने साफ़ इंकार कर दिया था कि '3 Idiots' का Five Point Someone से कोई संबंध नहीं है। और जब यह सवाल चेतन भगत से किया गया तो उन्होने भी कहा कि वो इस फ़िल्म में किसी भी तरह से नहीं जुड़े, हालाँकि निर्माता ने उन्हे यह बताया है कि भले ही इस फ़िल्म की कहानी उनकी उपन्यास के प्लॊट से मिलती जुलती है लेकिन उनके उपन्यास से इस फ़िल्म का कोई संबध नहीं है।

सुजॉय - अच्छा तभी मैं कहूँ कि फ़िल्म की नामावली में कहानी के लिए राजकुमार हिरानी और अभिजात जोशी को क्यों क्रेडिट किया गया है। यह बात तो सच है कि चेतन भगत का नाम नामावली में कहीं नहीं आता।

सजीव - पता नहीं आमिर ख़ान, माधवन और शरमन जोशी के किरदारों के साथ हम Five Point Someone के आलोक गुप्ता, रियान ओबेरॊय और लेखक के किरदारों में कोई मेल ढ़ूंढ पाएँगे या नहीं, लेकिन मेरे ख़्याल से जिन लोगों ने भी Five Point Someone पढ़ी है, वो बार बार उन्ही चरित्रों को ढ़ूँढने की कोशिश करेंगे।

सुजॉय - इससे पहले भी चेतन भगत की एक और बेहद कामयाब उपन्यास One Night @ the Call Center को आधार बनाकर 'Hello' फ़िल्म बनाई गई थी, लेकिन फ़िल्म उतनी बुरी तरह से पिट गई जितनी उस उपन्यास को कामयाबी मिली थी। अब देखना है कि '3 Idiots' कुछ कमाल दिखाती है या उसकी भी 'Hello' जैसी हालत होती है।

सजीव - नहीं सुजॉय, मुझे लगता है कि यह फ़िल्म चलेगी, एक तो विधु विनोद चोपड़ा और राजकुमार हिरानी की जोड़ी, उपर से आमिर ख़ान भी जुड़े हैं इस फ़िल्म में। बोमन इरानी भी हैं, नायिका हैं करीना कपूर, गीत और संगीत स्वानंद किरकिरे और शांतनु मोइत्रा का, यानी कि लगभग पूरी की पूरी मुन्ना भाई वाली टीम, कुछ तो कमाल ज़रूर करेगी यह फ़िल्म!

सुजॉय - मैं भी चाहता हूँ कि यह एक अच्छी फ़िल्म के रूप में सामने आए, वैसे भी कोई अच्छी फ़िल्म देखे हुए एक अरसा सा हो गया है। और बताइए कि और क्या जानकारी है इस फ़िल्म के बारे में आपके पास?

सजीव - दो एक बातें और है, लेकिन उससे पहले इस फ़िल्म का एक गीत सुन लेते हैं, फिर आगे बातें करेंगे।

गीत: All is well



सुजॉय - सोनू निगम और शान की आवाज़ें बहुत दिनों के बाद किसी गीत में सुन कर अच्छा लगा, क्यों सजीव?

सजीव - हाँ, और साथ में स्वानंद किरकिरे की आवाज़ भी थी। क्योंकि फ़िल्म के तीनों किरदार कॊलेज स्टुडेंट्स हैं तो ज़ाहिर है कि गानों में भी आज की पीढ़ी को लुभाने वाली यूथ अपील होगी। एक और ख़ास बात देखिये इस गीत में....शांतनु ने सभी वाध्य "ट्रेश" सामानों से उठाये हैं, सुनकर आर डी बर्मन की याद आ गयी.

सुजॉय - स्वानंद और शांतनु बहुत चुनिंदा काम करते हैं और दूसरों से बहुत अलग हट कर काम करते हैं। और स्वानंद तो ख़ुद भी एक उम्दा गायक भी हैं। "बावरा मन देखने चला एक सपना" गीत को भला कौन भूल सकता है! अच्छा सजीव, आप '3 Idiots' से संबंधित कुछ और जानकारी देने वाले थे न?

सजीव - हाँ, यह फ़िल्म रिलीज़ होगी क्रीस्मस के दिन, यानी कि २५ दिसंबर को। और इस फ़िल्म में काजोल नज़र आएँगी एक स्पेशल अपीयरेंस में। अच्छा, अब एक और गीत सुनते हैं सोनू निगम और श्रेया घोषाल की आवाज़ों में। बोल हैं "ज़ूबी डूबी"। पहले गीत को सुनो और फिर बताओ कि इस गीत में तुम्हे कौन सी बात अच्छी लगी।

गीत: Zoobi Doobi



सुजॉय - शांतनु मोइत्र के संगीत की ख़ासीयत है कि पाश्चात्य संगीत और रीदम को भी बहुत ही सुरीले तरीके से वो पेश करते हैं। तुम्हे याद है कि नहीं मुझे नहीं मालूम लेकिन एक फ़िल्म आई थी 'खोया खोया चाँद'। उस फ़िल्म में शांतनु ने ५० और ६० के दशकों को जीवित कर दिया था। ख़ास कर सोनू निगम की आवाज़ में "ये निगाहें निगाहें झुकी झुकी" गीत की मुझे याद आ गई इस गीत को सुनते हुए। यह कोई साधारण युगल गीत नहीं है, बल्कि एक बहुत ही नए किस्म का रोमांस है इस गीत में। स्वानंद की पंच लाइन "जैसा फिल्मों में होता है..." कमाल है.

सजीव - हाँ, और कुछ कुछ 'लगे रहो मुन्ना भाई' के "पल पल पल हर पल" गीत से भी थोड़ा बहुत मिलता जुलता है। रीदम light western music पर आधारित है। सोनू और श्रेया ने जब भी युगल गीत गाए हैं वो हर बार मक़बूल हुए हैं, चाहे 'परिणिता' में "पिहू बोले" हो या "पल पल हर पल" हो, 'ख़ाकी' में "तेरी बाहों में हम जीते मरते रहे" हो या फिर 'फिर मिलेंगे' का "बेताब दिल है धड़कनों की क़सम", और 'क्रिश' फ़िल्म में तो कई गानें हैं इस जोड़ी के जिन्हे ख़ूब ख़ूब बजाया और सुना गया है।

सुजॉय - बिल्कुल सही बात कही आपने! चलिए जब सोनू निगम की बात चल ही रही है तो उनकी एकल आवाज़ में इस फ़िल्म का एक और गीत सुन लिया जाए, "जाने नहीं देंगे"।

गीत: जाने नहीं देंगे



सजीव - क्या गाया है सोनू ने इस गीत को। हाल के दिनों में जितने भी नए नए गायक उभरे हैं और उभर रहे हैं, उन सब से अभी भी बहुत आगे हैं पिछली पीढ़ी के गायक, और उन सब में सोनू निगम सब से आगे हैं। उनकी आवाज़ की जो रेंज है ना, कमाल है। इस गीत को सुन कर इसका भली भाँति अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

सुजॉय - सही में, चाहे बहुत लो स्केल में ठहराव वाली जगह हो या फिर बहुत ऊँचा सुर लगाने की बात, सोनू को दोनों में महारथ हासिल है। और ख़ास कर इस गीत में तो उन्होने सही में अपना लोहा मनवाया है। और सजीव, इस फ़िल्म में मैने सुना है कि कुछ नई आवाज़ें भी सुनाई देंगी, क्या ख़याल है इस बारे में आपका?

सजीव - ठीक ही सुना है तुमने। अब हम ऐसे दो गीत सुनेंगे। पहला गीत जिसे गाया है सूरज जगन और शरमन जोशी ने, और दूसरा गीत है शान और शांतनु मोइत्र का गाया हुआ। ये दोनों गीत फ़िल्म की कहानी के अनुसार सिचुएशनल होंगे, जिनका मज़ा फ़िल्म को देखते हुए ही उठाया जा सकेगा।

सुजॉय - लेकिन कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि शांतनु मोइत्र और स्वानंद किरकिरे की तरफ़ से कुछ अलग और रिफ़्रेशिंग् गीत संगीत सुनने को मिलेगा, नहीं तो हम बस एक ही तरह के गानें सुन सुन कर ऊब गए हैं।

सजीव - ज़रूर! तो चलो, अब एक के बाद एक दो गीत सुनते हैं और इस चर्चा को यहीं समाप्त करते हैं।

गीत: Give me some sunshine



गीत: बहती हवा सा



और अब बारी है ट्रिविया की

TST ट्रिविया # 28- '3 Idiots' की शूटिंग्‍ कौन से IIM (Indian Institute of Management) में हुआ है और Five Point Someone उपन्यास किस शैक्षिक संस्थान से संबम्धित है?

TST ट्रिविया # 29- 'मैं हूँ ना', 'कौन है जो सपनों में आया', 'चेहरा' और 'मुस्कान' फ़िल्मों के साथ आप '3 Idiots' को किस तरीके से जोड़ सकते हैं?

TST ट्रिविया # 30- स्वानंद किरकिरे को आकाशवाणी के किस केन्द्र में 'युवावाणी' कार्यक्रम में भाग लेने का मौका मिला था?


३ इडियट्स अल्बम को आवाज़ रेटिंग ***1/2
फिल्म के अधिकतर गीत सिचुएशनल हैं. फिल्म के प्रदर्शन के बाद यदि फिल्म दर्शकों को पसंद आती है तो ये सभी गीत भी खूब सराहे जायेंगे, "आल इस वेल" और "जूबी डूबी" जल्दी ही लोगों को जुबान पर होंगें. "गीव मी सम सनसाईन" और "बहती हवा" बार बार सुने जाने पर और इनके प्रोमोस रीलिस होने पर अधिक पसंद किये जायेंगें, "जाने नहीं दूंगा तुझे..." लम्बे समय तक सोनू निगम की गायिकी के लिए याद किया जायेगा, और संगीत प्रतियोगिताओं ने नए गायक इसे गाकर खूब तालियाँ बटोरेंगें.

आवाज़ की टीम ने इस अल्बम को दी है अपनी रेटिंग. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसे लगे? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत अल्बम को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

शुभकामनाएँ....



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

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