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Monday, June 10, 2013

थोडा रोमांस तो थोडा मसाला, भैया रे भैया रमैया वस्तावैया

ताज़ा  सुर ताल - रमैया वस्तावैया

प्रभु देवा के निर्देशन से सजी रमैया वस्तावैया  शीर्षक को सुनते ही श्री ४२०  के उस हिट गीत की याद बरबस ही आ जाती है जिसमें रफ़ी, लता और मुकेश के स्वरों शंकर जयकिशन की धुन का सहारा मिला था, और जिसे गीत को आज भी संगीत प्रेमी चाव से सुनते हैं. तेलुगु भाषा में इस शब्द युग्म का अर्थ होता है -रमैया, क्या तुम आओगे ? यानी किसी प्रेमी के वापस लौटने का इन्तेज़ार, शायद यहाँ भी कहानी में कोई ऐसा ही पेच हो, खैर हम बात करते हैं फिल्म के संगीत एल्बम की, संगीत है सचिन जिगर का जिनके हाल ही में प्रदर्शित गो गोवा गोन  के दो गीतों की खासी लोकप्रियता हासिल हुई है. साथ ही चर्चा करेंगें हम गायक आतिफ असलम के संगीत सफर और सचिन जिगर के नए अंदाज़ की भी. 

पाकिस्तानी फनकार आतिफ असलम एक गायक होने के साथ साथ अभिनेता भी हैं, और उनकी फ़िल्मी शुरुआत भी एक गायक अभिनेता के रूप में फिल्म बोल  से हुई (अगर आपने ये फिल्म नहीं देखी हो तो अवश्य देखिये), हालाँकि इससे पहले वो अपनी एल्बम जलपरी से मशहूर हो चुके थे. और उनकी दूसरी एल्बम दूरी  और भी हिट साबित हुई थी. पिछले साल तेरे नाल लव हो गया  में उनका गाया पिया ओ रे पिया  बेहद लोकप्रिय हुआ था और हमारी टॉप लिस्ट में शामिल भी हुआ था. बहरहाल रमैया वस्तावैया  में प्रमुख पुरुष आवाज़ आतिफ असलम की है. आतिफ और श्रेया के गाए तीन युगल गीत हैं एल्बम में.

आतिफ की आवाज़ में एक सुरीला सा जादू है जो रोमांटिक गीतों में खास तौर पर उभर कर आता है, श्रेया के साथ उनकी गायिकी और भी निखर कर आई है. जीने लगा हूँ  एल्बम का सबसे बढ़िया गीत बनकर उभरता है तो वहीँ रंग लाग्यो  का सूफी अंदाज़ भी बेहद नशीला है, बैरिया  में भी इन दो गायक कलाकारों की जुगलबंदी खूब जमती है. सचिन जिगर के रचे ये तीनों ही रोमांटिक गीत एल्बम की जान कहे जा सकते हैं. इसके आलावा एक और गीत है जो बहुत ही खूबसूरत बन पड़ा है, मोहित चौहान की आवाज़ में 'पीछा  छूटे' एक रेट्रो अंदाज़ का गीत है जो किशोर कुमार के रोमानी अंदाज़ की बरबस याद दिला देता है

गुजराती पार्श्व से आये सचिन  जिगर ने शुरुआत की टेलिविज़न से, फिर जुड़े संगीत संयोजन से. जिगर ने राजेश रोशन के सहायक के रूप में 'क्रिश' से शुरुआत की. बाद में इनसे अमित त्रिवेदी भी जुड़े, अमित और जिगर में खासी छनती थी, दरअसल अमित ने ही जिगर को सचिन से मिलवाया जिसके बाद ये जोड़ी हमेशा के लिए एक हो गयी. दरअसल इस जोड़ी को संगीत सहायक से संगीतकार बनाने में प्रीतम दा की प्रेरणा भी बहुत फायेदमंद रही. फालतू  की सफलता में उनके हिट गीत चार बज गए  का भी बड़ा योगदान था. शोर इन द सिटी  में भी सायेबो  की धुन बेहद मधुर थी. गो गोवा गोन  के दो गीत स्लोली स्लोली  और बाबा जी की बूटी  में उनका अंदाज़ सबसे निराला रहा. वास्तव में इन दो गीतों में उनकी प्रतिभा की ताजगी खुलकर सामने आई है. चलिए सचिन जिगर से तो आपका परिचय हो गया . अब वापस आते हैं रमैया......पर 

एल्बम  में रोमांटिक गीतों से इतर भी कुछ झूमते थिरकते गीतों का भी एक अलग ट्रेक है जिसे संभाला है ऊर्जा से भरे मिका सिंह ने. हिप होप पम्मी  एक जबरदस्त डांस नंबर है जो सुनते ही जुबाँ पे चढ जाता है. मोनाली ठाकुर की आवाज़ मिका के रुआब में कहीं दबी सी लगती है. लेकिन नेहा ठाकुर ने एक अन्य आइटम गीत जादू की झप्पी  में मिका को बराबर की टक्कर दी है. पर जादू की झप्पी गीत का शीर्षक जितना अच्छा है गीत उस कसौटी पर खरा नहीं उतरता. 

एल्बम के बहतरीन गीत -
जीने लगा हूँ, रंग लाग्यो, हिप होप पम्मी , पीछा  छूटे

हमारी रेटिंग - 2.7  

संगीत समीक्षा - सजीव सारथी

आवाज़ - अमित तिवारी

 

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