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Saturday, April 12, 2014

"बजाओ रे बजाओ, इमानदारी से बजाओ, पचास हज़ार खर्च कर दिये..."


एक गीत सौ कहानियाँ - 27
 

जय जय शिवशंकर, काँटा लगे न कंकड़...’



'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कप्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारी ज़िन्दगियों से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़ी दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह साप्ताहिक स्तंभ 'एक गीत सौ कहानियाँ'। इसकी 27-वीं कड़ी में आज हम आपके लिए लेकर आये हैं फ़िल्म 'आपकी कसम' के मशहूर गीत "जय जय शिवशंकर, काँटा लगे न कंकड़" से संबंधित कुछ दिलचस्प तथ्यों की जानकारियाँ।


राजेश खन्ना और पंचम
राजेश खन्ना, मुमताज़ और संजीव कुमार अभिनीत 1974 की फ़िल्म 'आप की कसम' की सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ उसके गीतों का रहा है, इसमें कोई संदेह नहीं है। लता-किशोर की युगल आवाज़ों में "करवटें बदलते रहे सारी रात हम", "सुनो कहो कहा सुना" और "पास नहीं आना भूल नहीं जाना", किशोर की आवाज़ में "ज़िन्दगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं जो मुकाम", तथा लता के एकल स्वर में शास्त्रीय संगीत की छाया लिए "चोरी-चोरी चुपके चुपके" जैसे गानें ख़ूब चले। इन पाँच गीतों के अलावा छ्ठा गीत था इस ऐल्बम का मुख्य आकर्षण - "जय जय शिव शंकर काँटा लगे न कंकड़", जिसे लता, किशोर और साथियों ने गाया था। अपने आप में यह अनूठा गीत था यह, फिर इसके बाद कई फ़िल्मकारों ने इस तरह के गानें बनाने की कोशिशें तो की पर ऐसा दूसरा नहीं बना सके। साल 2009 में पंचम की 15-वीं पुण्यतिथि के मौके पर अभिनेता राजेश खन्ना ने इस गीत के बारे में बताया था, "हम लोग कश्मीर में किसी शिव जी के मंदिर के दर्शन के लिए गये थे। वहाँ आरती के समय मंदिर के घंटियों के बजने की आवाज़ों को सुनते हुए हम बाहर निकल रहे थे, और पंचम ने तुरन्त लोकशैली में एक भक्ति-मूलक हूक लाइन गुनगुनाया, और मुझसे कहा कि यह धुन वो मुझे उपहार में देंगे। और वह गीत एक लम्बे समय के बाद "जय जय शिव शंकर" के रूप में रेकॉर्ड हुआ।" पंचम के साथ राजेश खन्ना का ताल-मेल बहुत अच्छा था। लंदन के विख्यात प्रिन्सेस ग्रेस अस्पताल' में अपने बाइपास सर्जरी के बाद पंचम ने डॉ मुकेश हरियावाला के सामने स्वीकार किया कि अमिताभ बच्चन की तुलना में वो राजेश खन्ना को ज़्यादा पसन्द करते थे और इसलिए अच्छी धुनें वो काका के लिए ही सहेज कर रखते थे। डॉ साहब ने बताया कि पंचम यह मानते थे कि अमिताभ 'बॉलीवूड लीजेन्ड' के रूप में हमेशा याद किये जायेंगे, पर राजेश खन्ना अगली कई पीढ़ियों तक एक 'पर्मनेण्ट सुपरस्टार' बने रहेंगे।

लता, किशोर व आनन्द बक्शी
"जय जय शिव शंकर" गीत जितना मज़ेदार है, उससे भी मज़ेदार हैं इस गीत के निर्माण से जुड़े दो किस्से। पहला किस्सा है गीत की गायिका लता मंगेशकर को लेकर। उस दौर में लता जी नायिका के लिए पार्श्वगायन करती थीं जबकि फ़िल्म के अन्य चरित्र या खलनायिका के लिए आशा भोसले गाया करतीं। "जय जय शिव शंकर" गीत को लेकर मुश्किल यह आन पड़ी कि यह लता जी के स्टाइल का गीत नहीं था। उपर से भंग का नशा, उछल-कूद, मौज मस्ती - लता जी के लिए बिल्कुल बेमानी। लता जी की आवाज़ तो एक आदर्श भारतीय नारी की आवाज़ थी। और ऐसे मस्ती-भरे गीतों के लिए आशा जी की आवाज़ और अन्दाज़ बेहतर सिद्ध होती। पर क्योंकि यह गीत फ़िल्म की नायिका मुमताज़ पर ही फ़िल्माया जाना था, इसलिए लता जी को राज़ी करवाना ज़रूरी हो गया। लता जी के सामने जब इस गीत का प्रस्ताव रखा गया तो वो हिचकिचायीं। पर साथ में गये गीतकार आनन्द बक्शी ने लता जी को समझाया कि वो लता जी द्वारा गाये जाने वाले पंक्तियों को कुछ इस तरह से लिखेंगे कि न तो उनमें भंग पीने या नशे से संबंधित कोई भी ज़िक्र आयेगा, और न ही कोई बेहुदा या अशोभनीय शब्द का उल्लेख होगा। बक्शी साहब के इस वादे को देख कर लता जी मान गईं इस गीत को गाने के लिए। अब हम जब इस गीत के बोलों पर ग़ौर करते हैं तो सही में अहसास होता है कि बक्शी साहब ने अपना वादा बहुत ही इमानदारी के साथ निभाया।

जे. ओम प्रकाश
अब इस गीत से जुड़ा एक और मज़ेदार किस्सा। 'आप की कसम' के निर्माता थे जे. ओम प्रकाश। फ़िल्म के कुल 6 गीतों के लिए उनका बजट था 1,50,000 रुपये, यानी कि औसतन 25,000 रुपये प्रति गीत। अब हुआ यह कि "जय जय शिव शंकर" गीत के लिए राहुल देव बर्मन ने काफ़ी ताम-झाम का बन्दोबस्त किया हुआ था। बहुत बड़ा कोरस और ज़रूरत से ज़्यादा साज़िन्दे बुला लिए, क्योंकि वो चाहते थे कि इस गीत का जो मूड है, इस गीत को जिस तरह का ट्रीटमेण्ट चाहिए, उसके साथ पूरा-पूरा न्याय हो। इसमें कितना खर्चा आयेगा, इस बारे में सोचना या जे. ओम प्रकाश जी की सहमती लेना उनके दिमाग़ में ही नहीं आया। पंचम अपने तरीके से गीत को तैयार कर रहे थे। एक दिन शाम को जब गीत की रिहर्सल चल रही थी, तब ओम प्रकाश जी किसी कारण से वहाँ पहुँचे। स्टुडियो में घुसते ही उनकी आँखें बड़ी-बड़ी हो गईं। उनको अन्दर आते देख पंचम ने उन्हें पास बुलाया और पूछा कि कैसा लग रहा है यह गीत? ओम प्रकाश जी के चेहरे पर मुस्कुराहट तो दूर, हिचकिचाते हुए पंचम से कहा कि इतना बड़ा आयोजन, इसमें तो बहुत पैसे लग जायेंगे! इतने सारे साज़िन्दों के लिए तो पचास हज़ार रुपये लग जायेंगे! फिर बोले कि गीत में कुछ मज़ा नहीं आ रहा है। जे. ओम प्रकाश जी के बार-बार इस तरह से "मज़ा नहीं आ रहा है" और "पैसे बहुत लग जायेंगे" सुनते-सुनते राहुल देव बर्मन को भी बुरा लग गया और गुमसुम से हो गये। जिस जोश और उत्साह के साथ वो इस गीत को बना रहे थे, वह उत्साह कम पड़ गया था। उन्हें उदास देख किशोर कुमार ने पूछा कि क्या बात है। पहले-पहले तो पंचम किशोर को मसला बताना नहीं चाहते थे पर किशोर के ज़िद के आगे किसका चला है। जब पंचम ने किशोर को मसला बताया कि किशोर मुस्कुराये और जे. ओम प्रकाश को जाकर इस तरह से समझाया कि वो भी ख़ुश हो गये। गीत रिहर्सल से निकल कर रेकॉर्डिंग्‍ स्टुडियो तक जा पहुँचा। फ़ाइनल रिहर्सल में जैसा-जैसा तय हुआ था, सभी ने वैसा-वैसा किया; पर गीत के बिल्कुल अन्त में जहाँ गीत का रीदम बढ़ता चला जाता है, वहाँ पर किशोर दा सभी को हैरान करते हुए बोल पड़े "बजाओ रे बजाओ इमानदारी से बजाओ, पचास हज़ार खर्च कर दिये"। और इस तरह से किशोर दा ने जे. ओम प्रकाश की चुटकी ली। आप ने इस गीत को सुनते हुए "पचास हज़ार खर्च कर दिये" वाले अंश पर शायद कभी ग़ौर नहीं किया होगा क्योंकि किशोर दा ने बड़े ही हल्की आवाज़ में इसे कहा है, पर ग़ौर से गीत को सुनने पर बिल्कुल साफ़ सुनाई देते हैं ये शब्द। वाक़ई किशोर दा तो किशोर दा थे। यह कोई दूसरा नहीं कर सकता था। इस तरह से इस गीत की रेकॉर्डिंग्‍ पूरी हुई और गीत की सफलता को देख कर जे. ओम प्रकाश ने पंचम से हार मान ली।


फिल्म ‘आप की कसम’ : ‘जय जय शिवशंकर...’ : किशोर कुमार और लता मंगेशकर : संगीत – आर.डी. बर्मन : गीत – आनन्द बक्शी




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खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 

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