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Saturday, May 5, 2012

दिग दिग दिगंत - नया ओरिजिनल

Manoj Agarwal
प्लेबैक ओरिजिनलस् एक कोशिश है दुनिया भर में सक्रिय उभरते हुए गायक/संगीतकार और गीतकारों की कला को इस मंच के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने की. इसी कड़ी में हम आज लाये हैं दो नए उभरते हुए फनकार, और उनके समागम से बना एक सूफी रौक् गीत. ये युवा कलाकार हैं गीतकार राज सिल्स्वल (कांस निवासी) और संगीतकार गायक मनोज अग्रवाल, तो दोस्तों आनंद लें इस नए ओरिजिनल गीत का, और हमें बताएं की इन प्रतिभाशाली फनकारों का प्रयास आपको कैसा लगा

गीत के बोल -

दिग दिग दिगंत 
तू भी अनंत, में भी अनंत 
चल छोड़ घोंसला, कर जमा होंसला 
ये जीवन है, बस एक बुदबुदा 
फड पंख हिला और कूद लगा  
थोडा जोश में आ, ज़ज्बात जगा 
पींग बड़ा आकाश में जा 
ले ले आनंद, दे दे आनंद
दिग दिग दिगंत
दिग दिग दिगंत 
 
तारा टूटा, सारा टूटा 
जो हारा , हारा टूटा 
क्यों हार मना, दिल जोर लगा 
सोतान का सगा है कोन यहाँ 
तेरे रंग में रंगा है कौन यहाँ 
तू खुद का खुदा है, और खुद में खुदा है 
ढोंगी है संत झूठे महंत 
दिग दिग दिगंत
दिग दिग दिगंत 
 
ये ढूंडा और वो ढूंडा 
जो खोया वो खोया ढूंडा 
इससे पुछा उससे पुछा 
तेरा भेद भला क्या जाने दूजा 
क्यों ठगा ठगा है मोन यहाँ 
Raj Silswal
मंजिल है मंजिल का पता 
ये तेरा ढंग जीवन का संग 
दिग दिग दिगंत
दिग दिग दिगंत 
 
 
लड़ लड़े लडाई 
कर जोर भिडाई 
हूंकार लगा मैदान में जा 
रात से लड़ सूरज को पकड़ 
सीधी कर राहों के अकड़ 
तू हाथ बड़ा और गात चला 
मरने के दर से मत मर मत मर 
ये तेरी जंग खेले उमंग 
दिग दिग दिगंत
दिग दिग दिगंत


और अब सुनिए मनोज की आवाज़ में इस गीत को -

 

Dig Digant- A Radio Playback Original Season 2012, @All rights reserved with the artists and RPI for broadcasting

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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