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Monday, May 17, 2010

संगीत के आकाश में अपनी चमक फैलाने को आतुर एक और नन्हा सितारा - पी. भाविनी

लगभग ७ वर्ष पूर्व की बात है मैं ग्वालियर में ’उदभव’ संस्था द्वारा आयोजित ’राज्य स्तरीय गायन प्रतियोगिता- सुर ताल’ में निर्णायक के रूप में गया था उस दिन वहाँ राज्य भर से लगभग ३०० प्रतियोगी आए हुए थे, जिसमें ५ साल से लेकर ५० साल तक के गायक गायिकाएं शामिल थे। कुछ प्रतियोगियों के बाद मंच पर एक ७ वर्ष की बच्ची ने प्रवेश किया। मंच पर आने के पश्चात उसने जगजीत सिंह की एक ग़ज़ल गाना प्रारम्भ किया। उसकी उम्र को देखते हुए उसकी गायकी, स्वर, ताल तथा शब्दों का उच्चारण सुन कर हम निर्णायक तथा सभी दर्शक मंत्र मुग्ध हो रहे थे। प्रतियोगिता में स्वयं की पसंद के गीत गाने के पश्चात एक गीत निर्णायकों की पंसद का भी सुनाना था। मैंनें उसके कोन्फिडेन्स को देख कर उसे एक कठिन गीत फ़िल्म ’माचिस’ का लता जी का ’पानी पानी रे भरे पानी रे, नैनों में नीन्दे भर जा’ गाने को कहा। उस बच्ची ने जब यह गीत समाप्त किया तो इस गीत की जो बारीकियाँ थी उस को उस बच्ची ने जिस तरह से निभाया मैं समझ नहीं पा रहा था कि उसकी प्रशंसा में क्या कहूँ। फ़िर कुछ दो तीन साल बाद एक दिन जीटीवी के कार्यक्रम ’सारेगामापा’ देखते समय उस कार्यक्रम के प्रतियोगियों में वह बच्ची दिखाई दी। निर्णायक थे भप्पी लहरी, अभिजीत और अलका याग्निक। उस कार्यक्रम में तो वह अपनी जगह नही बना पाई किन्तु उसका हौसला देख कर महसूस हो रहा था कि एक न एक दिन वह जरूर नाम कमाएगी और वह मौका शीघ्र ही आगया। स्टार टीवी का ’अमूल वॉयस ऑफ इण्डिया मम्मी के सुपर स्टार’ कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ और वह बच्ची वहाँ भी अपनी गायकी की खुशबू बिखेरने को तैयार थी। एक लम्बी प्रतिस्पर्धा के पश्चात प्रतियोगिता के निर्णायक शुभा मुदगल, शंकर महादेवन और संगीतकार विशाल और शेखर ने उस प्रतियोगिता के दस लाख रुपए इनाम की विजेता का नाम घोषित किया तो वह कोई और नही वरन वही नन्ही गायिका यानि पी, भाविनी ही थी। आइए आज आपकी मुलाकात करवाते है उस उभरती हुई गायिका पी. भाविनी से जो आजकल भोपाल में रहती है।

शरद- हाय भाविनी! हिन्दयुग्म पर तुम्हारा स्वागत है।
भाविनी- नमस्ते अंकल! यह मेरा सौभाग्य है कि ’हिन्दयुग्म’ के पाठकों से मुझे मिलने का अवसर आपने दिया। हिन्दयुग्म के माध्यम से ही आजकल में Audacity पर अपने गीतों को रिकॊर्ड करना सीख रही हूँ। बहुत ही आसान तथा उपयोगी है यह।

भाविनी के गाये कुछ गीत


एक वीडियो परफॉरमेंस


भाविनी की निजी वेबसाइट पर इनसी जुड़ी बहुत सी सामग्री है। एक बार ज़रूर जायें।
शरद- तुमने इतनी छोटी उम्र में ही स्टार टीवी का कार्यक्रम’ अमूल वॊयस ऒफ इण्डिया मम्मी के सुपर स्टार’ जीत कर अच्छा खासा नाम कमा लिया और बहुत छोटी उम्र से ही मंचों पर गा रही हो लेकिन तुमने अपने गायन की शुरुआत कब प्रारम्भ की तथा तुम्हे किसने प्रेरित किया।
भाविनी - मेरा जन्म १७ फरवरी १९९७ को जबलपुर में हुआ था ।मैं जब ४ साल की थी उस समय भी घर में जगजीत सिंह और चित्रा सिंह जी की ग़ज़लें गुनगुनाया करती थी उनको सुनकर मेरी मम्मी ने सोचा कि जब इसको अभी से गाने का शौक है तो इसको संगीत के क्षैत्र में ही कुछ करना चाहिए। जब मैं ६-७ साल की थी तब मैनें अपना पहला कार्यक्रम संगम कला ग्रुप की प्रतियोगिता में दिया जहाँ पर मैंने ’दिल ने कहा चुपके से, ये क्या हुआ चुपके से’ गाया जिसे गाकर मुझे बहुत आनन्द आया और सबने मेरी खूब प्रशंसा की। मेरी नानीजी ने मुझे संगीत के क्षैत्र में ही आगे बढ़्ने के लिए प्रेरित किया तथा उन्ही के आशीर्वाद के कारण मुझे बहुत से पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

शरद- जब तुम्हारी मन्ज़िल संगीत ही है तो क्या तुम संगीत की शिक्षा भी ले रही हो?
भाविनी- हाँ! मैंने ८ साल की उम्र से ही ग्वालियर में श्री नवीन हाल्वे तथा श्री सुधीर शर्मा जी से संगीत की शिक्षा लेना प्रारम्भ कर दिया था और अब भोपाल में श्री जितेन्द्र शर्मा जी और कीर्ति सूद से सीख रही हूँ। मैं प्रतिदिन २ घन्टे शास्त्रीय संगीत तथा २ घन्टे सुगम संगीत का रियाज़ करती हूँ।

शरद- अपनी इस संगीत यात्रा के बारे में हमारे पाठकों को थोडा और बताओ।
भाविनी- जब मैं ७-८ साल की थी तब मैंनें ग्वालियर में ’उदभव’ संस्था की प्रतियोगिता ’सुर-ताल’ में हिस्सा लिया जहाँ मैं लगातार तीन वर्षों तक विजेता रही । इन तीन वर्षों में उस प्रतियोगिता के निर्णायक साधना सरगम जी, ग़ज़ल गायक चन्दन दास तथा डॊ, रोशन भारती तथा आपने मेरी भरपूर प्रशंषा की तथा मुझे अपना आशीर्वाद प्रदान किया। ९ साल की उम्र में मुझे जीटीवी के सारेगामापा में गाने का मौका मिला जहाँ अभिजीत जी, शान, भप्पी लहरी जी तथा अलका याग्निक ने भी मेरी गायकी को अत्यधिक सराहा। मैं बहुत भाग्यशाली हूँ की उस कार्यक्रम में मुझे आशा भोषले जी से भी मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ तथा उन्होंने भी मुझे अपना आशीर्वाद प्रदान किया। इसके बाद मैं स्टार टीवी के कार्यक्रम ’अमूल वॊयस ऒफ इण्डिया मम्मी के सुपर स्टार’ की कडे़ मुकाबले में विजेता बनी तथा उस प्रतियोगिता के निर्णायक शुभा मुदगल, शंकर महादेवन तथा संगीतकार विशाल और शेखर जी का भरपूर प्यार मिला। इसके साथ ही मैं’तानसेन संगीत अकादमी सम्मान’ तथा इन्दौर में’ ’एम,पी.स्मार्ट आइडल’ सम्मान से भी सम्मानित हो चुकी हूँ।

शरद- उस मुकाबले को जीतने के बाद इस क्षैत्र में तुम्हारी और क्या क्या उपलब्धियाँ रहीं हैं?
भाविनी- इस मुकाबले के पहले और बाद में मैनें कुछ और अच्छे कार्यक्रम किए हैं तथा मैं अपने गायन के साथ साथ अपनी पढ़ाई पर भी एकाग्रचित्त हो कर पूरा पूरा ध्यान देती हूँ। मैं संगीत एवं पढाई में संतुलन बनाए रखती हूँ। जब भी मेरे स्कूल चलते हैं मेरा पूरा ध्यान पढाई पर रहता है उसके बाद कुछ समय निकाल कर संगीत की तैयारी भी कर लेती हूँ। वर्तमान में मैं भोपाल के देहली पब्लिक स्कूल की छात्रा हूँ। मेरे द्वारा दिए गए कार्यक्रमों, मुझे मिले हुए सम्मान, फोटोज़ तथा मेरे द्वारा गाए गए गीतों के वीडियोज़ और कवर वर्ज़न आप मेरी वेब साइट www.pbhavini.com पर देख सकते हैं ।

शरद- आज जब संगीत का स्वरूप एकदम बदल गया तुम अपने कार्यक्रमों में अधिकांश पुराने गीत ही गाती हो इसका क्या कारण है?
भाविनी - मुझे पुराने फिल्मी गीत बहुत पसन्द हैं क्योंकि उनकी धुन बहुत मैलोडियस होती है, उनके शब्द भी इतने अच्छे होते है कि उनका असर एक लम्बे समय तक बरकरार रहता है तथा वे हमारे दिल को छू जाते हैं। मेरा ऐसा मानना है कि यदि पुराने गीतों को अच्छी तरह से गा लिया जाए तो नए गीत आसानी से गाए जा सकते हैं। मैं अपना आदर्श लताजी, आशाजी, जगजीत सिंह, चित्रा सिंह तथा मदन मोहन जी को मानती हूँ । मेरे परिवार के सदस्य मुझे बहुत प्यार करते है तथा संगीत के क्षैत्र में आगे बढ़्ने के लिए मेरी हर संभव सहायता करते हैं। इसके साथ ही मुझे देश विदेश के अनेक लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है। मेरा परिवार मुम्बई में बसने का भी विचार कर रहा है। मेरी अभिलाषा एक अच्छी गायिका बनने की है, देखिए कोशिश कहाँ तक सफल होती है।

शरद- जाते जाते कभी कोई ऐसा वाकया याद आ रहा हो जिसे पाठकों को बताना चाहती हो?
भाविनी- हाँ । मेरा कोटा शहर के राष्ट्रीय दशहरे मेले में कार्यक्रम था। मेले की एक भारी भीड़ के सामने जब मैनें गाना प्रारम्भ किया तो एक के बाद एक गीत गाती ही चली जा रही थी और लोग तालियाँ बजाए जा रहे थे। उस दिन मैनें अपनी पहली सिटिंग में ही लगातार १४ गीत एक साथ गाए उसके बाद ही दूसरे कलाकारों की बारी आई।

शरद- बहुत बहुत बधाई भाविनी! ईश्वर से कामना है कि तुम दिन दूनी रात चौगनी उन्नति करो और संगीत के क्षैत्र में तुम्हारा नाम बहुत रोशन हो।
भाविनी- धन्यवाद! मैं हिन्दयुग्म परिवार की बहुत आभारी हूँ जिसके माध्यम से मुझे अपनी बात कहने का मौका मिला ।

Wednesday, July 30, 2008

अलविदा इश्मित...

स्टार प्लस की संगीत प्रतियोगिता वायस आफ इंडिया के विजेता और पंजाबी के प्रसिद्ध गायक इश्मित सिंह की मंगलवार को डूबने से मौत हो गई, जिसके साथ ही हमने एक उभरती हुई आवाज़ को हमेशा के लिए खो दिया है.
उनके साथ बिताये लम्हों को याद कर रहे हैं, आवाज़ के लिए, लुधिआना से रिपोर्टर
जगदीप सिंह

ईश्वर का मीत हो गया इश्मीत
नाम-इश्मीत सिंह

जन्म-3 सितंबर 1989
उम्र-19 साल
एजूकेशन- बीकॉम, सेकेंड इयर, सीए अधूरी छोड़ी थी।
24 नवंबर 2007 को वॉयस ऑफ इंडिया बना, इसी दिन गुरु नानक देव जी का प्रकाशोत्सव था।
शौक-गायकी, कम्पयूटर इंटरनेट, स्पोट्र्स

आज मैं ऊपर, आसमां नीचे... यह गाना गाने वाला इश्मीत इतनी जल्दी आसमां के पार चला जाएगा, यकीन नहीं होता। हम जितना भी इस युवा गायक के बारे में सोचते हैं, उतनी ही मीठी यादें ताजा हो जाती हैं। 19 साल का यह फरिश्तों सा गायक जो खुद पानी की तरह था, जो हर हाल में खुद को ढाल लेता था, आखिर पानी की भेंट चढ़ गया। दूसरों के छोटे से दुख से उसकी आंखें छलक आती थीं। आज वह अपने चाहने वालों की आखों में ढेरों आंसू छोड़ गया।

सफर जिंदगी का

धर्म को समर्पित और एक कर्मठ परिवार में जन्मा इश्मीत बचपन से ही होनहार था। शास्त्री नगर स्थित घर के आसपास वह अपनी गायकी और रिज़र्व अंदाज़ के कारण बेहद मशहूर था.

बस जीतना था जुनून.

हर मैदान में जीतना उसका जुनून था। चाहे गायकी हो या पढ़ाई उसने हर जगह अच्छा प्रदर्शन किया। गुरु नानक पब्लिक स्कूल का स्टूडेंट रहा इश्मीत अपने दोस्तों में दोस्ती के साथ ही पढ़ाई में होशियारी के लिए भी जाना जाता था। यही वजह थी कि मुश्किल माने जाने वाले चार्टेड अकाउंटेंसी के कोर्स के शुरूआती एग्जाम उसने बहुत आराम से पास कर लिए थे। संस्थान के नियम बदलने की वजह से सीए न कर पाने का उसे अफसोस भी था। मुझे याद है कि एक निजी मुलाकात में उसने कहा था कि अब बीकॉम के साथ सीए नहीं कर पाऊंगा।

अधूरी रही महाराजा रणजीत सिंह बनने की चाहत.

इश्मीत की डील-डोल शख्सियत को देखकर बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता राज बब्बर ने उसे पंजाब के सबसे महान शहंशाह महाराजा रणजीत सिंह की किशोर अवस्था का रोल ऑफर किया था। साल के अंत में शुरू होने वाले सीरियल की शूटिंग उसने विदेश दौरे से लौट कर शुरू करनी थी। इश्मीत को बॉलीवुड के दिग्गज संगीतकार उत्तम सिंह ने भी गाने का प्रस्ताव दिया था।

जगजीत के बेटे की याद में मिला पहला सम्मान

चोटी के गजल गायक जगजीत सिंह के मरहूम बेटे विवेक सिंह की याद में स्थापित किया गया पहला अवार्ड इश्मीत को दिया गया था। लुधियाना में हुए कार्यक्रम के दौरान अवार्ड प्राप्त करते हुए जहां इश्मीत फफक-फफक कर रो पड़ा था, वहीं खुद जगजीत और चित्रा सिंह की छलकती आखें रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। इश्मीत सिंह की जिंदगी का ये यादगार पल था।

कंपनियों का भी बना चहेता

वॉयस ऑफ इंडिया बनने से पहले ही इश्मीत काफी लोकप्रिय हो गया था। कंपनियां भी उसे अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाने के लिए रुचि दिखा रही थीं। फाइनल से पहली ही सोनाटा कंपनी ने अपनी युवा घडिय़ों की रेंज उसी से लांच करवाई थी। कीर्ति लाल ज्यूलर ने उसे हीरों से नवाजा था, तो पंजाब स्टेट लॉजरीज ने भी उसे अपनी लॉटरीज का ब्रांड एम्बेसडर बनाया था।

दुनिया घूमने को था उत्साहित

वॉयस ऑफ इंडिया बनने के बाद जब उसे 50 देशों में शो करने का कार्यक्रम दिया गया तो वह काफी उत्साहित था। उसका कहना था कि दुनिया भर में अपना टैलेंट इस तरह दिखाना खास तजुर्बा रहेगा।

मुंबई में नहीं लगा था दिल.

तरक्की और शोहरत की खातिर मुंबई गए इश्मीत का दिल अपने शहर और दोस्तों में बसा था। एक निजी मुलाकात में उसने कहा था कि मुंबई में तो अपने लिए वक्त ही नहीं मिलता चौबीस घंटे बस काम ही काम।

पब्लिसिटी से दूर

लुधियाना आने पर अक्सर इश्मीत घर में आराम करने और अपने दोस्तों के साथ समय बिताने को तरजीह देता था। कई बार परिवार के लोग चाहते भी थे कि वह मीडिया से इंटरेक्ट करे तो इश्मीत टालने की कोशिश करता था।

विकलांगों के साथ बिताया दिन

संवेदनशील इश्मीत को आम लोगों का दर्द काफी भावुक कर देता था। विकलांग दिवस पर इश्मीत रखबाग में पिकनिक मना रहे मंदबुद्धि और विकलांग बच्चों के पास पहुंच गया। वहां पर उनके साथ वक्त बिताने के साथ ही उन्हें कुछ कर दिखाने को प्रोत्साहित किया।

तिरंगे पर नहीं दिया ऑटोग्राफ

गायकी का दीवाना इश्मीत देश-भक्ति से सराबोर था। जीतने के बाद लुधियाना में एक कार्यक्रम के दौरान एक नन्हे प्रशंसक ने जब छोटे से तिरंगे पर उससे ऑटोग्राफ देने को कहा तो इश्मीत ने बच्चे को समझाया कि राष्ट्रीय झंडे के सम्मान को बरकरार रखने के लिए ऐसा नहीं करते।

कंपनी को झुकाया

गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब में अरदास में किए वादे के मुताबिक इश्मीत अपनी पहली धार्मिक एलबम निकालना चाहता था, लेकिन उसकी कामर्शियल एलबम लाना चाहती थी। आखिर इश्मीत की भावनाओं के आगे झुकते हुए बिग म्यूजिक ने उसकी धार्मिक एलबम को गुरुद्वारा दुखनिवारण साहिब में रिलीज किया।

नहीं मनेगा जन्मदिन का जश्न

तीन सितंबर को इश्मीत के जन्मदिन को लेकर सभी दोस्त उत्साहित थे। वायस आफ इंडिया बनने के बाद सभी ने उसका जन्मदिन ·का जश्न मनाने के बारे में सोच रहे थे, लेकिन अब सबके चहरों पर उदासी छा गई है।


जगदीप सिंह
रिपोर्टर, लुधिआना

दोस्तों, याद करें इश्मित को, VOICE OF INDIA में उनके गाये उनके इस भावपूर्ण गीत के साथ -


Ishmit (Ishmeet) Singh: An unforgotten young voice of Punjab

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