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Saturday, January 16, 2016

"हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं....", क्या परेशानी थी मनोज कुमार को इस गीत से?


एक गीत सौ कहानियाँ - 74
 

'हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं...' 



रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारे जीवन से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़े दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तम्भ 'एक गीत सौ कहानियाँ'। इसकी 74-वीं कड़ी में आज जानिए 1965 की फ़िल्म ’गुमनाम’ के मशहूर गीत "हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं..." के बारे में जिसे मोहम्मद रफ़ी ने गाया था। बोल हसरत जयपुरी के और संगीत शंकर-जयकिशन का।

महमूद व मनोज कुमार
बात उस वक़्त की है जब महमूद इतना बड़ा नाम हो गया था कि हिन्दी सिनेमा के बड़े-बड़े स्टार महमूद के साथ काम करने से कतराने लगे थे। कहते थे कि अगर इनके साथ हमारा सीन होगा तो ये खा जाएगा हमें! इसलिए बहुत से स्टार्स तो महमूद को अपनी फ़िल्म से निकलवाने या उनके सीन कम करने के लिए निर्माता, निर्देशक और वित्तदाताओं पर दबाव भी डाल दिया करते थे। 1965 की सुपरहिट फ़िल्म ’गुमनाम’ में भी यही हुआ। राजा नवाथे द्वारा निर्देशित और एन.एन. सिप्पी द्वारा निर्मित फ़िल्म ’गुमनाम’ के शुरुआती मसौदे में महमूद वाला किरदार था ही नहीं। वह तो वित्तदाताओं की ज़िद थी कि फ़िल्म की सफलता के लिए इसमें महमूद का होना ज़रूरी है, इसलिए उनके लिए भी रोल निकाला जाए! नहीं है तो लिखो, ऐसा हुकुम था। मनोज कुमार और प्राण इस फ़िल्म के लिए फ़ाइनल हो चुके थे। दोनों ने ही फ़िल्म में महमूद को लिए जाने का विरोध किया, लेकिन वित्तदाताओं और एन.एन. सिप्पी की ज़िद के सामने उनकी चली नहीं। और फ़िल्म में महमूद के लिए रोल लिखवाया गया। फ़िल्म की शूटिंग् शुरू हुई और महमूद पर एक गाना भी फ़िल्माया गया, "हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं..."। गाना फ़िल्माये जाने के बाद जब देखा गया तो मनोज कुमार ने फिर एक बार एन.एन. सिप्पी से कहा कि यह गाना हटा दो, यह गाना बड़ा घटिया है, इससे फ़िल्म का स्तर गिर रहा है। एन.एन. सिप्पी जब नहीं माने तो मनोज कुमार ने अपनी बात को सिद्ध करने के लिए मशहूर निर्देशक और अपने करीबी दोस्त राज खोसला के लिए फ़िल्म का एक स्पेशल शो रखवाया। इसे देख कर राज खोसला ने भी महमूद के गाने को फ़िल्म से हटाने का सुझाव दिया। लेकिन फिर भी एन. एन. सिप्पी नहीं माने। अब सिप्पी साहब के इस रवैये के बाद मनोज कुमार ने तो यहाँ तक कह दिया कि अगर महमूद का यह गाना रहा तो यह फ़िल्म तीन हफ़्ते भी नहीं चल पाएगी। 1965 में जब यह फ़िल्म रिलीज़ हुई तो इसने कामयाबी के कई रेकॉर्ड तोड़ दिए। पूरी फ़िल्म के दौरान जिस महमूद से प्रॉबलेम थी, उसी महमूद को साल के फ़िल्मफ़ेयर में Best Supporting Actor  के लिए नामांकित किया गया, और उन पर फ़िल्माया गीत "हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं", इस गीत ने तो धूम मचा दी। यह गीत महमूद के साथ-साथ इस फ़िल्म की पहचान भी बन गया।


हरिन्द्रनाथ और रफ़ी
इस गीत में महमूद का जितना योगदान था, उतना ही बड़ा योगदान मोहम्मद रफ़ी साहब के गायकी की भी थी। महमूद के अंदाज़ को ध्यान में रखते हुए रफ़ी साहब ने इस गीत जिस तरह का अंजाम दिया इसमें कोई शक़ नहीं कि इस गीत की सफलता के लिए महमूद का जितना श्रेय है, उतना ही श्रेय रफ़ी साहब को भी जाता है। साथ ही श्रेय गीतकार हसरत जयपुरी और संगीतकार शंकर-जयकिशन को भी तो जाता ही है। इस गीत की लोकप्रियता का आलम यह था कि इस फ़िल्म के रिलीज़ होने के चार साल बाद 1969 में इस गीत का एक अंग्रेज़ी संस्करण बनाया गया जिसे रफ़ी साहब की ही आवाज़ में रेकॉर्ड किया गया और HMV ने 45 RPM का ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड जारी किया, जिसकी रेकॉर्ड संख्या है N79866 और रेकॉर्ड का शीर्षक है ’The She I Love'। इस अंग्रेज़ी संस्करण को लिखा था हरिन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय ने और संगीत एक बार फिर शंकर जयकिशन का ही था। ये हरिन्द्रनाथ च्ट्टोपाध्याय वो ही हैं जिन्होंने समय-समय पर हिन्दी फ़िल्मों में अभिनय के साथ-साथ कुछ अंग्रेज़ी गीत भी लिखे हैं। फ़िल्म ’जुली’ का प्रीति सागर का गाया "My heart is beating" भी उन्हीं का लिखा गीत है। अशोक कुमार अभिनीत यादगार फ़िल्म ’आशिर्वाद’ का हिट गीत "रेल गाड़ी" भी उन्हीं की रचना है। फ़िल्म ’बावर्ची’ में पिताजी की भूमिका में हरिन्द्रनाथ जी ने "भोर आई गया अन्धियारा" गीत में थोड़ा अंश गाया भी है। रफ़ी के साहब के विदेशी स्टेज शोज़ के लिए अक्सर वो उन्हें अंग्रेज़ी में गीत लिख कर दिया करते थे उनके हिन्दी गीतों की धुनों पर जिन्हें सुन कर विदेशी ऑडिएन्स ख़ुशी से झूम उठा करते। ख़ैर, हम बात कर रहे थे "हम काले हैं..." के अंग्रेज़ी संस्करण की। तो ये रहे इस संस्करण के बोल -

The she I love is a beautiful beautiful dream come true,
I love her, love her, love her, love her, so will you.
The she I love is a beautiful beautiful dream come true.

Because she thinks its pleases me,
Like a cat a rat she seizes me,
She tickles me, she teases me,
She warms me up, she freezes me.
I love her, love her, love her, love her, what shall I do?
The she I love is a beautiful beautiful dream come true.

O she is a flower lovely and rare,
Her beautiful body seems to bear,
The magical mood of morning air,
And black as night is her raven hair,
I love her, love her, love her, love her, my love is true,
The she I love is a beautiful beautiful dream come true. 


फिल्म 'गुमनाम' के इस गीत और इसी गीत की धुन पर बने अँग्रेजी गाने के वीडियो अब आप देखिए और सुनिए। पहले गीत का अँग्रेजी संस्करण और फिर फिल्म 'गुमनाम' के मूल गीत का वीडियो देखिए। 



अब आप भी 'एक गीत सौ कहानियाँ' स्तंभ के वाहक बन सकते हैं। अगर आपके पास भी किसी गीत से जुड़ी दिलचस्प बातें हैं, उनके बनने की कहानियाँ उपलब्ध हैं, तो आप हमें भेज सकते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि आप आलेख के रूप में ही भेजें, आप जिस रूप में चाहे उस रूप में जानकारी हम तक पहुँचा सकते हैं। हम उसे आलेख के रूप में आप ही के नाम के साथ इसी स्तम्भ में प्रकाशित करेंगे। आप हमें ईमेल भेजें soojoi_india@yahoo.co.in के पते पर। 


खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी
प्रस्तुति सहयोग: कृष्णमोहन मिश्र 




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