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Saturday, December 22, 2012

'सिने पहेली' में आज क्रिस्मस स्पेशल


22 दिसम्बर, 2012
सिने-पहेली - 51  में आज 

पहचानिये सैण्टा क्लॉस के पीछे छुपे चेहरों को


'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी पाठकों और श्रोताओं को सुजॉय चटर्जी का सप्रेम नमस्कार। दोस्तों, पिछली कड़ी में हमने आपसे जो सवाल पूछा था, उसके जो जवाब आप सब ने भेजे हैं, उसे देख कर हम सचमुच चकित रह गए हैं। हमने तो यही सोचा था कि आप ज़्यादा से ज़्यादा 40-50 गीत चुन कर भेजेंगे, पर आप में से कई प्रतियोगियों ने तो इससे कई गुणा अधिक गीत लिख कर भेजे हैं। पर दोस्तों, कई बार क्या होता है कि क्वान्टिटी के अधिक होने से क्वालिटी पर असर पड़ता है, आप सब के साथ भी वही हुआ। बिना जाँच-पड़ताल किए सीधे इंटरनेट से उपलब्ध जानकारी के अनुसार गीतों की सूची भेजने की वजह से कई गीत आप ने ग़लत भी भेज दिए हैं। तीन गायकों वाले कुछ गीतों में चौथा नाम डाल कर भी कुछ गीत आये हैं (उदाहरण - फ़िल्म 'राम लखन' के गीत "माइ नेम इज़ लखन" को मोहम्मद अज़ीज़, अनुराधा पौडवाल और नितिन मुकेश ने गाया है, जबकि कुछ प्रतियोगियों ने अनुराधा श्रीराम का नाम भी शामिल कर दिया है, जो ग़लत है)। इसी तरह से पाँच गायकों वाले गीत में से एक नाम हटा कर भी कुछ गीत हमें मिले हैं (उदाहरण - "दुक्की पे दुक्की हो या सत्ते पे सत्ता", "मिस्टर लोवा लोवा तेरी आंखों का जादू" आदि)। कुछ प्रतियोगियों ने एक ही गीत को एकाधिक बार अपनी सूची में शामिल किया है। एक प्रतियोगी ने तो एक गीत को तीन बार लिखा है। इन सब के चलते केवल दो दिनों में पिछली पहेली के परिणाम व विजेताओं की घोषणा कर पाना हमारे लिए असंभव हो गया है। हम आपके द्वारा भेजे गये हर गीत की जाँच कर रहे हैं, और यह जाँच पूरी होने पर ही 'सिने पहेली-50' के विजेताओं के नाम घोषित किए जायेंगे। सम्भवत: अगली कड़ी या उसकी अगली कड़ी में यह संभव हो पाएगा।

'सिने पहेली - 50' तथा पाँचवे सेगमेण्ट के परिणामों की घोषणा 29 दिसंबर अथवा 5 जनवरी के अंक में की जाएगी। इस विलम्ब के लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं।


तो चलिए 'सिने पहेली' के सफ़र में आगे बढ़ते हैं और शुरू करते हैं इस प्रतियोगिता का छ्ठा सेगमेण्ट, अर्थात् 'सिने पहेली - 51'। क्योंकि नये सेगमेण्ट की शुरुआत हो रही है, इसलिए हम नये प्रतियोगियों का एक बार फिर से आह्वान करना चाहेंगे...


नये प्रतियोगियों का आह्वान

नये प्रतियोगी, जो इस मज़ेदार खेल से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए हम यह बता दें कि अभी भी देर नहीं हुई है। इस प्रतियोगिता के नियम कुछ ऐसे हैं कि किसी भी समय जुड़ने वाले प्रतियोगी के लिए भी पूरा-पूरा मौका है महाविजेता बनने का। अगले सप्ताह से नया सेगमेण्ट शुरू हो रहा है, इसलिए नये खिलाड़ियों का आज हम एक बार फिर आह्वान करते हैं। अपने मित्रों, दफ़्तर के साथी, और रिश्तेदारों को 'सिने पहेली' के बारे में बताएँ और इसमें भाग लेने का परामर्श दें। नियमित रूप से इस प्रतियोगिता में भाग लेकर महाविजेता बनने पर आपके नाम हो सकता है 5000 रुपये का नगद इनाम। अब महाविजेता कैसे बना जाये, आइए इस बारे में आपको बतायें।

आज की पहेली : 'मेरी' क्रिस्मस, तेरी पहेली


'सिने पहेली' के सभी प्रतियोगियों को हमारी तरफ़ से क्रिस्मस की हार्दिक शुभकामनायें। सैण्टा क्लॉस क्रिस्मस का अभिन्न अंग हैं। सैण्टा के बिना बच्चों और बड़ों, सब की क्रिस्मस अधूरी है। इसलिए आज की पहेली को तैयार करने में सैण्टा क्लॉस का ही हमने सहारा लिया है। हमने दस अभिनेता और गायकों को सैण्टा का जामा पहनाया है, अब आपको इस अभिनेताओं व गायकों की शिनाक्त करनी है। तो ये रहे वो दस कलाकार, ध्यान से इन तसवीरों को देखिये और पहचानिये सैण्टा क्लॉस के पीछे छुपे इन चेहरों को....













जवाब भेजने का तरीका

उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 51" अवश्य लिखें, और अन्त में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें गुरुवार, 27 दिसम्बर, शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।



कैसे बना जाए 'सिने पहेली महाविजेता'

1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स।

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जुड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेताओं के रूप में चुन लिया जाएगा।

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। चौथे सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा...


4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम। महाविजेता को पुरस्कार स्वरूप नकद 5000 रुपये दिए जायेंगे, तथा द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वालों को दिए जायेंगे सांत्वना पुरस्कार।


'सिने पहेली' को और भी ज़्यादा मज़ेदार बनाने के लिए अगर आपके पास भी कोई सुझाव है तो 'सिने पहेली' के ईमेल आइडी पर अवश्य लिखें। आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी 100% सम्भावना है महाविजेता बनने का। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, आज के लिए मुझे अनुमति दीजिए, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी, आप सभी को एक बार फिर से "मेरी क्रिस्मस",  नमस्कार। 



Saturday, December 25, 2010

ई मेल के बहाने यादों के खजाने (२२), सभी श्रोताओं को क्रिसमस की शुभकामनाएँ

नमस्कार! 'ओल्ड इज़ गोल्ड' शनिवार विशेष की २२ वीं कड़ी में आप सभी का स्वागत है। आप सभी को क्रिस्मस की बहुत बहुत शुभकामनाएँ। इस साप्ताहिक विशेषांक में अधिकतर समय हमने 'ईमेल के बहाने यादों के ख़ज़ाने' पेश किया, जिसमें आप ही के भेजे हुए ईमेल शामिल हुए और कई बार हमने नामचीन फ़नकारों से संपर्क स्थापित कर फ़िल्म संगीत के किसी ना किसी पहलु का ज़िक्र किया। आज हम आ पहुँचे हैं इस साप्ताहिक शृंखला की २०१० वर्ष की अंतिम कड़ी पर। तो आज हम अपने जिस दोस्त के ईमेल से इस शृंखला में शामिल कर रहे हैं, वो हैं ख़ानसाब ख़ान। हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की तारीफ़ की है और हमारा हौसला अफ़ज़ाई की है। लीजिए ख़ानसाब का ईमेल पढ़िए...

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आदाब,

नौ रसों की 'रस माधुरी' शृंखला बहुत पसंद आई। आपने केवल इन रसों का बखान फ़िल्मी गीतों के लिए ही नहीं किया, बल्कि हमारी ज़िंदगी से जोड़ कर भी आप ने इनको पूरे विस्तार से बताया, जिससे हमें हमारी ज़िंदगी से जुड़े पहलुओं को भी जानने को मिला। और हमें ज्ञात हुआ कि हमारे मन की इन मुद्राओं को भी फ़िल्मी गीतों में किस तरह से अभिव्यक्ति मिली है। आपके इन अथक प्रयासों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। और आपकी बात बिल्कुल सही है। मैं भी यह सोच रहा था कि "फिर छिड़ी रात बात फूलों की" ग़ज़ल और "फूल आहिस्ता फेंको" गीत के बोलों में, बड़े ही सुंदर तरीक़े से "फूल" शब्द का इस्तेमाल किया गया, जिसको सुनकर दिलों में भी फूलों की तरह नर्मोनाज़ुक अहसास पैदा हो जाते हैं। इससे ज़्यादा और किसी गीत की कामयाबी क्या होगी!

'ओल्ड इज़ गोल्ड - सफ़र अब तक' पढ़कर मज़ा आ गया। और हमारे जो साथी बाद में जुड़े थे, जिनमें मैं भी शामिल हूँ, सब को मालूम हो गया कि पिछे का भी 'ओल्ड इज़ गोल्ड' का सफ़र कितना शानदार रहा है। मैं एक दिन ऐसा सोच ही रहा था कि 'ओल्ड इज़ गोल्ड' का पिछला सफ़र कैसा रहा होगा, इसमें किस तरह के और कौन कौन से गीत बजे होंगे, और आपने शायद मेरे मन की आवाज़ को सुन ली। क्योंकि हमारे इस महफ़िल का नाम भी तो आवाज़ ही है, जो कि पीछे की, आगे की, अभी की सारी आवाज़ों को अपने में शामिल किए हुए है। इसके लिए मैं आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। इसकी वजह से हम भी अब आवाज़ की इस महफ़िल से किसी भी तरह से अंजान नहीं रहे हैं।

धन्यवाद।

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वाह ख़ानसाब, और आपका बहुत बहुत शुक्रिया भी। आइए आज एक ऐसा गीत सुनते हैं जो आज के दिन के लिए बहुत ही सटीक है। आज क्रिसमस है और इस अवसर पर बनने वाले फ़िल्मी गीतों की बात करें तो सबसे पहले जिस गीत की याद आती है वह है फ़िल्म 'ज़ख़्मी' का "जिंगल बेल जिंगल बेल.... आओ तुम्हे चाँद पे ले जाएँ"। गौहर कानपुरी का लिखा और बप्पी लाहिड़ी का संगीतबद्ध किया हुआ यह गीत है जिसे लता मंगेशकर और सुषमा श्रेष्ठ ने गाया है। गीत फ़िल्माया गया है आशा पारेख और बेबी पिंकी पर। कहानी के सिचुएशन के मुताबिक़ गीत का फ़िल्मांकन दर्दीला है। गीत "जिंगल बेल्स" से शुरु होकर मुखड़ा "आओ तुम्हे चांद पे ले जाएँ, प्यार भरे सपने सजाएँ" पे ख़त्म होता है। अंतरों में भी एक सपनों की सुखद दुनिया का चित्रण है। गीत के फ़िल्मांकन से अगर बोलों की तुलना की जाये तो एक तरह से विरोधाभास ही झलकता है। राजा ठाकुर निर्देशित इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार थे सुनिल दत्त, आशा पारेख, राकेश रोशन और रीना रॊय। तो आइए सुनते हैं यह गीत और आप सभी को एक बार फिर से किरस्मस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

गीत - जिंगल बेल्स... आओ तुम्हे चाँद पे (ज़ख़्मी)


तो ये था आज का 'ईमेल के बहाने यादों के ख़ज़ाने'। 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की नियमित कड़ी के साथ आपसे कल फिर मुलाक़ात होगी, तब तक के लिए इजाज़त दीजिए, नमस्कार!

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