शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

रेखा भारद्वाज का स्नेह निमंत्रण ओर अरिजीत की रुमानियत भरी नई गुहार

ताज़ा सुर ताल - 2014 -04 

हमें फिल्म संगीत का आभार मानना चाहिए कि समय समय पर हमारे संगीतकार हमारी भूली हुई विरासत ओर नई पीढ़ी के बीच की दूरी को कुछ इस तरह पाट देते हैं कि समय का लंबा अंतराल भी जैसे सिमट गया सा लगता है. मेरी उम्र के बहुत से श्रोताओं ने इस ठुमरी को बेगम अख्तर की आवाज़ में अवश्य सुना होगा, पर यक़ीनन उनसे पहले भी लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के दरबार से निकली इस अवधी ठुमरी को बहुत से गुणी कलाकारों ने अपनी आवाज़ में ढाला होगा. लीजिए २०१४ में स्वागत कीजिये इसके एक ओर नए संस्करण का जिसे तराशा संवारा है विशाल -गुलज़ार के अनुभवी हाथों ने ओर आवाज़ के सुरमे से महकाया है रेखा भारद्वाज की सुरमई आवाज़ ने. मशहूर अभिनेत्री ओर कत्थक में निपुण माधुरी दीक्षित नेने एक बार फिर इस फिल्म से वापसी कर रही हैं रुपहले परदे पर. जी हाँ आपने सही पहचाना, देढ इश्किया  का ये गीत फिर एक बार ठुमरी को सिने संगीत में लौटा लाया है, हिंदी फिल्मों के ठुमरी गीतों पर कृष्णमोहन जी रचित पूरी सीरीस का आनंद हमारे श्रोता उठा चुके हैं. आईये सुनते हैं रेखा का ये खास अंदाज़....शब्द देखिये आजा गिलौरी खिलाय दूँ खिमामी, लाल पे लाली तनिक हो जाए....


काफी समय तक संघर्ष करने के बाद संगीतकार सोहेल सेन की काबिलियत पर भरोसा दिखाया सलमान खान ने ओर बने "एक था टाईगर" के हिट गीत, आज आलम ये है कि सोहेल को पूरी फिल्म का दायित्व भी भरोसे के साथ सौंपा जा रहा है. यश राज की आने वाली फिल्म "गुण्डे" में सोहेल ने जोड़ी बनायीं है इरशाद कामिल के साथ. यानी शब्द यक़ीनन बढ़िया ही होंगें. रामलीला की सफलता के बाद अभिनेता रणबीर सिंह पूरे फॉर्म में है, फिल्म में उनके साथ हैं अर्जुन कपूर ओर प्रियंका चोपड़ा. फिल्म का संगीत पक्ष बहुत ही बढ़िया है. सभी गीत अलग अलग जोनर के हैं ओर श्रोताओं को पसंद आ रहे हैं, विशेषकर ये गीत जो आज हम आपको सुना रहे हैं बेहद खास है. रोमानियत के पर्याय बन चुके अरिजीत सिंह की इश्को-मोहब्बत में डूबी आवाज़ में है ये गीत. जिसका संगीत संयोजन भी बेहद जबरदस्त है. धीमी धीमी रिदम से उठकर ये गीत जब सुर ओर स्वर के सही मिश्रण पर पहुँचता है तो एक नशा सा तारी हो जाता है जो गीत खत्म होने के बाद भी श्रोताओं को अपनी कसावट में बांधे रखता है. लीजिए आनंद लीजिए जिया  मैं न जिया  का ओर दीजिए हमें इज़ाज़त.    

गुरुवार, 30 जनवरी 2014

निराशा में डूबी रफ़ी साहब की बेखुद आवाज़ का नशा

खरा सोना गीत - हम बेखुदी में तुमको पुकारे चले गए 
प्रस्तोता - अर्शना सिंह 
स्क्रिप्ट - सुजॉय चट्टर्जी 
प्रस्तुति - संज्ञा टंडन 


बुधवार, 29 जनवरी 2014

‘बाँसुरी बाज रही धुन मधुर...’ : रागमाला गीत – 3


प्लेबैक इण्डिया ब्रोडकास्ट





रागों के रंग, रागमाला गीत के संग – 3




राग रामकली, तोड़ी, शुद्ध सारंग, भीमपलासी, यमन कल्याण, मालकौंस और भैरवी के इन्द्रधनुषी रंग


‘बाँसुरी बाज रही धुन मधुर...’

शिष्याओं को संगीत की तालीम देते उस्ताद गुलाम मुस्तफा खाँ


फिल्म : उमराव जान (1981)

गायक : उस्ताद गुलाम मुस्तफा खाँ, शाहिदा खाँ और रूना प्रसाद

संगीतकार : ख़ैयाम

आलेख : कृष्णमोहन मिश्र

स्वर एवं प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन





आपको यह प्रस्तुति कैसी लगी? अपनी प्रतिक्रिया और अपने सुझाव हमें radioplaybackindia@live.com पर भेजें।  




सोमवार, 27 जनवरी 2014

लता ओर मुकेश के स्वर संगम से बुना ये युगल गीत

खरा सोना गीत - एक मंजिल राही दो...
प्रस्तोता - रचेता टंडन 
स्क्रिप्ट - सुजॉय चट्टर्जी 
प्रस्तुति - संज्ञा टंडन 


रविवार, 26 जनवरी 2014

गणतन्त्र दिवस पर विशेष : महात्मा गाँधी का प्रिय भजन



  
स्वरगोष्ठी – 152 में आज

रागों में भक्तिरस – 20

एक भजन जिसे राष्ट्रव्यापी सम्मान मिला 
  
‘वैष्णवजन तो तेने कहिए...’





‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के संचालक मण्डल की ओर से सभी पाठकों-श्रोताओं को आज गणतन्त्र दिवस पर हार्दिक बधाई। आज के इस पावन राष्ट्रीय पर्व पर हम अपने साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर प्रस्तुत कर रहे हैं, एक विशेष अंक। आपको स्मरण ही होगा कि ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ जारी है। आज इस श्रृंखला की समापन कड़ी के साथ मैं कृष्णमोहन मिश्र, आप सब संगीत-रसिकों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। मित्रों, इस श्रृंखला के अन्तर्गत हमने भारतीय संगीत के कुछ भक्तिरस प्रधान राग और कुछ प्रमुख भक्त कवियों की रचनाएँ प्रस्तुत की है। इसके साथ ही उस भक्ति रचना के फिल्म में किये गए प्रयोग भी आपको सुनवाए। श्रृंखला की पिछली 19 कड़ियों में हमने हिन्दी के अलावा मराठी, कन्नड, गुजराती, राजस्थानी, ब्रज, अवधी आदि भाषा-बोलियों में रचे गए भक्तिगीतों का रसास्वादन कराने का प्रयास किया। आज श्रृंखला की समापन कड़ी में राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर हम आपसे एक ऐसे भजन पर चर्चा करेंगे, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक लोकप्रियता प्राप्त है। पन्द्रहवीं शताब्दी के भक्तकवि नरसी मेहता का पद- ‘वैष्णवजन तो तेने कहिए...’ महात्मा गाँधी की प्रार्थना सभाओं में गाये जाने के कारण राष्ट्रीय स्तर का गीत बन चुका है। आज हम आपको यह भजन संगीत के वरिष्ठ कलासाधकों, उस्ताद राशिद खाँ, उस्ताद शाहिद परवेज़ और विदुषी एम.एस. शुभलक्ष्मी सहित चौथे दशक की फिल्मों की सुप्रसिद्ध गायिका अमीरबाई कर्नाटकी के  स्वरों में प्रस्तुत करेंगे। 
 


गुजराती साहित्य के सन्तकवि नरसी मेहता का जन्म गुजरात के जूनागढ़ अंचल में 1414 ई. में हुआ था। उनके कृतित्व की गुणबत्ता से प्रभावित होकर भारतीय साहित्य के इतिहासकारों ने ‘नरसी-मीरा’ के नाम से एक स्वतंत्र काव्यकाल का निर्धारण किया है। पदप्रणेता के रूप में गुजराती साहित्य में नरसी मेहता का लगभग वही स्थान है जो हिन्दी में महाकवि सूरदास का है। उनके माता-पिता का बचपन में ही देहान्त हो गया था। बाल्यकाल से ही साधु-सन्तों की मण्डलियों के साथ भ्रमण करते रहे। यहाँ तक कि एक बार द्वारका जाकर रासलीला के दर्शन भी किए। इस सत्संग का उनके जीवन पर ऐसा गहरा प्रभाव पड़ा कि वे गृहस्थ होते हुए भी हर समय कृष्णभक्ति में तल्लीन रहते थे। नरसी मेहता तत्कालीन समाज में व्याप्त आडम्बर और रूढ़ियों के विरुद्ध संघर्षरत थे। उनके लिए सब बराबर थे। वे छुआ-छूत नहीं मानते थे और हर मानव को बराबर समझते थे। उन्होने हरिजनों की बस्ती में जाकर उनके साथ कीर्तन भी किया करते थे। इससे क्रुद्ध होकर बिरादरी ने उनका बहिष्कार तक कर दिया, पर वे अपने मत से डिगे नहीं। एक जनश्रुति के अनुसार हरिजनों के साथ उनके सम्पर्क की बात सुनकर जब जूनागढ़ के राजा ने उनकी परीक्षा लेनी चाही तो कीर्तन में लीन नरसी मेहता के गले में अन्तरिक्ष से फूलों की माला पड़ गई थी। जिस नागर समाज ने उन्हें बहिष्कृत किया था अन्त में उसी समाज ने उन्हें अपना रत्न माना और आज भी गुजरात में ही नहीं सम्पूर्ण देश में उनकी मान्यता है। भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से अभिसिंचित उनकी कृतियों का एक समृद्ध भण्डार है। उनकी कुछ चर्चित कृतियाँ हैं- सुदामा चरित्र, गोविन्द गमन, दानलीला, चातुरियो, राससहस्त्रपदी, श्रृंगारमाला आदि। अनेक पदों में उन्होने मानव-धर्म की व्याख्या की है। गाँधी जी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए...’ में भी भक्त नरसी ने सच्चे मानव-धर्म को ही परिभाषित किया है। भजन का मूल पाठ इस प्रकार है-

वैष्णव जन तो तेने कहिये, जे पीड परायी जाणे रे। 

पर दुःखे उपकार करे तो ये मन अभिमान न आणे रे।

सकळ लोकमाँ सहुने वन्दे, निन्दा न करे केनी रे। 

वाच काछ मन निश्चळ राखे, धन धन जननी तेनी रे। 

समदृष्टि ने तृष्णा त्यागी, परस्त्री जेने मात रे। 

 जिह्वा थकी असत्य न बोले, परधन नव झाले हाथ रे।

मोह माया व्यापे नहि जेने, दृढ़ वैराग्य जेना मनमाँ रे। 

रामनाम शुं ताळी रे लागी, सकळ तीरथ तेना तनमाँ रे। 

वणलोभी ने कपटरहित छे, काम क्रोध निवार्या रे। 

भणे नरसैयॊ तेनुं दरसन करतां, कुळ एकोतेर तार्या रे॥

‘स्वरगोष्ठी’ के आज के अंक में आप इस भजन को जुगलबन्दी के रूप में सुनेगे। रामपुर सहसवान गायकी में सिद्ध उस्ताद राशिद खाँ और सितार के इटावा बाज के संवाहक उस्ताद शाहिद परवेज़ की अनूठी जुगलबन्दी में नरसी का यह भजन प्रस्तुत है। इन दोनों कलासाधकों ने भजन के भाव पक्ष को राग खमाज के स्वरों में भलीभाँति सम्प्रेषित किया है। राग खमाज की चर्चा हम इस जुगलबन्दी के बाद करेंगे।



गायन और सितार वादन जुगलबन्दी : ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए...’ : उस्ताद राशिद खाँ और उस्ताद शाहिद परवेज़





महात्मा गाँधी के सर्वप्रिय भजनों में सम्मिलित नरसी मेहता के इस भजन को प्रस्तुत करने के लिए राग खमाज के स्वर सम्भवतः सबसे उपयुक्त है। अधिकतर गायक-वादक कलासाधकों ने भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए...’ को खमाज या मिश्र खमाज में ही प्रस्तुत किया है। पण्डित विष्णु नारायण भातखण्डे द्वारा प्रवर्तित दस थाट के सिद्धान्त का खमाज भी एक थाट है। राग खमाज इसी थाट का आश्रय राग माना जाता है। इसके आरोह में ऋषभ स्वर वर्जित होता है। अवरोह में सभी सात स्वरों का प्रयोग होता है। अर्थात इसकी जाति षाड़व-सम्पूर्ण है। इसके आरोह में शुद्ध निषाद और अवरोह में कोमल निषाद का प्रयोग किया जाता है। शेष स्वर शुद्ध होते हैं। इस राग का वादी स्वर गान्धार और संवादी स्वर निषाद माना जाता है। रात्रि का दूसरा प्रहर इस राग के गायन-वादन के लिए उपयुक्त होता है। राग खमाज श्रृंगार और भक्ति भाव की अभिव्यक्ति के लिए उपयुक्त होता है। इसीलिए अधिकतर ठुमरी गायन में इसी राग का प्रयोग किया जाता है।

अब हम आपको नरसी मेहता का यह भजन विदुषी एम.एस. शुभलक्ष्मी के स्वरों में सुनवाते है। संगीत की दक्षिण और उत्तर भारतीय, दोनों संगीत पद्यतियों में दक्ष, विश्वविख्यात गायिका एम.एस. शुभलक्ष्मी ने अनेक भक्त कवियों की रचनाओं को अपना स्वर देकर अविस्मरणीय कर दिया है। भारत की लगभग सभी भाषाओं में गाने वाली एम.एस. शुभलक्ष्मी को 1988 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारतरत्न’ से अलंकृत किया गया था। आइए इन्हीं महान गायिका से सुनते हैं, नरसी मेहता का यह पद।



नरसी भजन : ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए...’ : विदुषी एम.एस. शुभलक्ष्मी





गुजराती के भक्तकवि नरसी मेहता के व्यक्तित्व और कृतित्व पर 1940 में फिल्म ‘नरसी भगत’ का निर्माण हुआ था। उस समय के चर्चित गायक-अभिनेता विष्णुपन्त पगनीस ने इस फिल्म में भक्त नरसी की भूमिका की थी। फिल्म में अभिनेत्री दुर्गा खोटे और अमीरबाई कर्नाटकी ने भी गायन-अभिनय किया था। फिल्म के गीतो को शंकरराव व्यास ने संगीतबद्ध किया था। फिल्म में यह भजन विष्णुपन्त पगनीस और अमीरबाई कर्नाटकी ने अलग-अलग गाया था। इस भजन को गाकर अमीरबाई कर्नाटकी को अपार लोकप्रियता मिली थी। फिल्म में गाये अमीरबाई के इस भजन को सुन कर महात्मा गाँधी ने गायिका की प्रशंसा की थी। अब आप यह भजन गायिका अमीरबाई कर्नाटकी के स्वर में सुनिए और मुझे इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए। 





नरसी भजन : ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए...’ : अमीरबाई कर्नाटकी : फिल्म नरसी भगत





   
आज की पहेली


‘स्वरगोष्ठी’ के 152वें अंक की पहेली में आज हम आपको एक महान गायक की आवाज़ में भक्ति रचना का अंश सुनवा रहे है। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। 160वें अंक की पहेली के सम्पन्न होने तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला (सेगमेंट) का विजेता घोषित किया जाएगा।



1 – आलाप के इस अंश को सुन कर गायक को पहचानिए और हमे उनका नाम लिख भेजिए।

2 – इस आलाप में आपको किस राग का संकेत प्राप्त हो रहा है?

आप अपने उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 154वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।

   
पिछली पहेली और श्रृंखला के विजेता


‘स्वरगोष्ठी’ की 150वीं कड़ी में हमने आपको गोस्वामी तुलसीदास के एक पद के गायन का अंश प्रस्तुत कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- गायक दत्तात्रेय विष्णु पलुस्कर और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- दादरा ताल। इस अंक के दोनों प्रश्नो के सही उत्तर हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी, जबलपुर से क्षिति तिवारी और चण्डीगढ़ से हरकीरत सिंह ने दिया है। तीनों प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।

150वें अंक की पहेली के साथ ही हमारी यह श्रृंखला भी पूरी हुई। इस श्रृंखला में सर्वाधिक 18 अंक लेकर जबलपुर की क्षिति तिवारी ने प्रथम स्थान, 12-12 अंक अर्जित कर हमारे दो प्रतियोगियों, जौनपुर (उत्तर प्रदेश) के डॉ. पी.के. त्रिपाठी और चंडीगढ़ के हरकीरत सिंह ने दूसरा स्थान तथा 5 अंक प्राप्त कर हैदराबाद की डी. हरिणा माधवी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई।

   
अपनी बात


   
मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ के अन्तर्गत आज के अंक के साथ ही हमारी यह लघु श्रृंखला भी पूर्ण हुई। हम शीघ्र ही एक नई श्रृंखला के साथ उपस्थित होंगे। इस बीच हम अपने पाठकों/श्रोताओं के अनुरोध पर कुछ अंक जारी रखेंगे। अगले अंक में हम अवसर विशेष को ध्यान में तैयार किया गया अंक प्रस्तुत करने जा रहे हैं। अगले अंक के साथ रविवार को प्रातः 9 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।



प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र 

शनिवार, 25 जनवरी 2014

'सिने पहेली' में आज प्रस्तुत है गणतंत्र दिवस विशेष...

सिने पहेली –98




'सिने पहेली' के सभी प्रतियोगियों व पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, कल 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस है। इस शुभवसर पर हम आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें देते हैं और आज की 'सिने पहेली' को समर्पित करते हैं देश के नाम। हिंदी सिनेमा में शुरू से ही देशभक्ति फ़िल्मों और देशभक्ति गीतों का चलन रहा है। ब्रिटिश शासन के दौरान भले ही देश भक्ति फ़िल्मों की संख्या उतनी न रह सकी हों, पर स्वाधीनता के बाद हर दशक में बहुत सारी देशभक्ति फ़िल्में बनीं व देशभक्ति के गीत लिखे गये जिन्होंने सिनेमा के इस जौनर को समृद्ध तो किया ही, साथ ही समाज को, नई पीढ़ी को अपने देश के प्रति कर्तवियों से अवगत करवाया। ऐसे फ़िल्मकारों और गीतकारों के हम आभारी हैं जिन्होंने इस दिशा में उल्लेखनीय क़दम उठाये। आज इस अंक के माध्यम से हम उन सभी फ़िल्मकारों और गीतकारों को झुक कर सलाम करते हैं। आज की पहेली में पूछे जाने वाले सवाल भी ऐसे ही देशभक्ति फ़िल्मों और गीतों पर आधारित हैं। आशा है आप सब आसानी से इन्हें सुलझा सकेंगे। तो चलिये, शुरू किया जाये आज के सवालों का सिलसिला...

आज की पहेली : गणतंत्र दिवस  विशेष

आज की पहेली केन्द्रित है देशभक्ति फ़िल्मों व देशभक्ति गीतों से जुड़े पहलुओं पर।

1. तीस के दशक के इस संगीतकार ने उस दशक में कई फ़िल्मों में देशभक्ति मूलक गीत स्वरबद्ध किए। एक गीत के मुखड़े में "भारत माता जय जय जय" आता है तो दूसरे गीत के मुखड़े में है "प्यारा वतन हमारा"। क्या आप बता सकते हैं कि ये संगीतकार कौन हैं? (3 अंक)

2. इस गायक ने मोहम्मद रफ़ी के साथ एक बहुत ही मशहूर देशभक्ति गीत गाया था। ये गायक एक संगीतकार भी रहे और इन्होंने किसी फ़िल्म के लिए एक देशभक्ति गीत को स्वरबद्ध किया था जिसके मुखड़े में "नौजवानों", "सन्तान" और "वतन" जैसे शब्द आते हैं। कौन हैं ये गायक-संगीतकार? (3 अंक)

3. नीचे दिये हुए चित्र को देख कर बताइये कि इस चित्र के माध्यम से कौन से फ़िल्मी देशभक्ति गीत का वर्णन   किया जा सकता है। (1.5 अंक)





4. नीचे चित्र में दिखाये गये पाँच अभिनेताओं को पहचानिये। (2.5 अंक)




अपने जवाब आप हमें cine.paheli@yahoo.com पर 30 जनवरी शाम 5 बजे तक ज़रूर भेज दीजिये।



पिछली पहेली का हल


1. "ऐ मेरे दिल जो चल दिये" (सरहद)

2. "देखने में भोला है" (बम्बई का बाबू)

3. "हम गवनवा न ज‍इबे हो" (ममता)

4. "छुप गया कोई रे दूर से पुकार के" (चम्पाकली)




पिछली पहेली के विजेता


इस बार भी हमारे चार नियमित प्रतियोगियों ने ही केवल भाग लिया। और लगातार तीसरी बार सबसे पहले जवाब भेज कर 'सरताज प्रतियोगी' का ताज ग्रहण किया है लखनऊ के श्री प्रकाश गोविन्द ने। बहुत बहुत बधाई आपको प्रकाश जी! और अब इस सेगमेण्ट के सम्मिलित स्कोर कार्ड पर एक नज़र...



और अब महाविजेता स्कोर-कार्ड पर भी एक नज़र डाल लेते हैं।




इस सेगमेण्ट की समाप्ति पर जिन पाँच प्रतियोगियों के 'महाविजेता स्कोर कार्ड' पर सबसे ज़्यादा अंक होंगे, वो ही पाँच खिलाड़ी केवल खेलेंगे 'सिने पहेली' का महामुकाबला और इसी महामुकाबले से निर्धारित होगा 'सिने पहेली महाविजेता'। 


एक ज़रूरी सूचना:


'महाविजेता स्कोर कार्ड' में नाम दर्ज होने वाले खिलाड़ियों में से कौछ खिलाड़ी ऐसे हैं जो इस खेल को छोड़ चुके हैं, जैसे कि गौतम केवलिया, रीतेश खरे, सलमन ख़ान, और महेश बसन्तनी। आप चारों से निवेदन है (आपको हम ईमेल से भी सूचित कर रहे हैं) कि आप इस प्रतियोगिता में वापस आकर महाविजेता बनने की जंग में शामिल हो जायें। इस सेगमेण्ट के अन्तिम कड़ी तक अगर आप वापस प्रतियोगिता में शामिल नहीं हुए तो महाविजेता स्कोर कार्ड से आपके नाम और अर्जित अंख निरस्त कर दिये जायेंगे और अन्य प्रतियोगियों को मौका दे दिया जायेगा।


तो आज बस इतना ही, नये साल में फिर मुलाक़ात होगी 'सिने पहेली' में। लेकिन 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के अन्य स्तंभ आपके लिए पेश होते रहेंगे हर रोज़। तो बने रहिये हमारे साथ और सुलझाते रहिये अपनी ज़िंदगी की पहेलियों के साथ-साथ 'सिने पहेली' भी, अनुमति चाहूँगा, नमस्कार!

प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी

शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

धूम मचाती कमली ओर यारियाँ का अल्लाह वारियाँ

ताज़ा सुर ताल - 2014 -03 

ताज़ा सुर ताल की नई कड़ी में आप सब का स्वागत है, नए साल के पहले महीने में भी धूम ३ की धूम जारी है. कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म की सफलता में इसके संगीत की भी जबरदस्त भूमिका रही है. धूम ३ से एक ओर धमाकेदार गीत लेकर आज हम हाज़िर हैं. सुनिधि चौहान के क्या कहने, आईटम गीतों के लिए तो वो संगीत निर्देशकों की पहली पसंद मानी जा सकती हैं. यूँ धूम ३ के इस गीत को पूरी तरह एक आईटम गीत भी नहीं कहा जा सकता, पर सुनिधि ने गीत में जो ऊर्जा फूंकी है वो अविश्वसनीय है. गीत की आरंभिक पक्तियों से ही वो श्रोताओं को अपने साथ जोड़ लेती है ओर अगले ४ मिनट तक उस पकड़ में कहीं कोई लचक नहीं छूटती. इस गीत का जिक्र हो ओर प्रीतम दा के अद्भुत संगीत संयोजन की तारीफ न हो ये संभव नहीं है. ये गीत वेस्टर्न रिदम पर शुद्ध भारतीय वाद्यों की जबरदस्त जुगलबंदी करता है. गीत के प्रिल्यूड में ओर इंटरल्यूड में सितार का प्रयोग तो लाजवाब है. सुनिए ये दमदार गीत जिसे लिखा है समीर साहब ने. 

  


नए साल की पहली हिट फिल्म है टीनएज लव की दास्ताँ कहती टी सीरीस की यारियाँ. इस फिल्म के गीत भी खासा पसंद किये जा रहे है इन दिनों. एल्बम के एक गीत बारिश का जिक्र हम पहले ही कर चुके है, आज सुनते हैं पाकिस्तान के मशहूर गायक शफकत अमानत अली खान की रूह को छूती आवाज़ में, अल्लाह वारियाँ. इस आवाज़ में गजब का जादू है दोस्तों, ये गीत एक दर्द भरा सूफियाना अंदाज़ का गीत है जिसे रचा है अर्को प्रवो मुखर्जी ने. अर्को भी टी सिरिस की गुड बुक में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं, और इस गीत की कामयाबी उन्हें नई ऊंचाईयां देगी यक़ीनन. लीजिए आनंद लें इस गीत का भी.


गुरुवार, 23 जनवरी 2014

याद करें संगीतकार जोड़ी हुस्नलाल भगतराम को इस गीत के साथ

खरा सोना गीत - चुप चुप खड़े हो 
प्रस्तोता - रचेता टंडन
स्क्रिप्ट - सुजॉय चट्टर्जी 
प्रस्तुति - संज्ञा टंडन 

बुधवार, 22 जनवरी 2014

रागमाला गीत -2 : प्लेबैक इण्डिया ब्रोडकास्ट





प्लेबैक इण्डिया ब्रोडकास्ट


रागो के रंग, रागमाला गीत के संग – 2



राग भटियार, रामकली, देशी, शुद्ध सारंग, मुलतानी, यमन, बागेश्री और चन्द्रकौंस की छटा बिखेरता रागमाला गीत


दो उस्तादों के गायन और वादन की अनूठी जुगलबन्दी

फिल्म : गूँज उठी शहनाई

संगीतकार : बसन्त देसाई

गायक : उस्ताद अमीर खाँ

शहनाई वादक : उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ


आलेख : कृष्णमोहन मिश्र

स्वर एवं प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन 






मंगलवार, 21 जनवरी 2014

लघु बोधकथा: मुनीश शर्मा

इस साप्ताहिक स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको हिन्दी में मौलिक और अनूदित, नई और पुरानी, प्रसिद्ध कहानियाँ और छिपी हुई रोचक खोजें सुनवाते रहे हैं। पिछली बार आपने अर्चना चावजी के स्वर में मनमोहन भाटिया की कथा "बड़ी दादी" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुनीश शर्मा द्वारा शब्दबद्ध आजके राजनीतिक परिदृश्य पर खरी उतरती एक लघु बोधकथा जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

इस "लघु बोधकथा" का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 16 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।


अपनी मनमोहक वाणी के लिए प्रसिद्ध मुनीश शर्मा आजकल रेडियो जापान के हिन्दी विभाग में कार्यरत हैं और टोक्यो में रहते हैं। उनका ब्लॉग मयखाना है।

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

वह आने जाने वालों को सींग दिखाती और बच्चों को डराती ।
 (मुनीश शर्मा रचित एक लघु बोधकथा से एक अंश)





नीचे के प्लेयर से सुनें.


(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)
यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
लघु बोधकथा MP3

#Second Story, Laghu Bodh katha: Munish Sharma/Hindi Audio Book/2014/02. Voice: Anurag Sharma

सोमवार, 20 जनवरी 2014

मदन मोहन का रचा एक मास्टरपीस गीत

खरा सोना गीत - आप क्यों रोये 
प्रस्तोता - मीनू सिंह 
स्क्रिप्ट - सुजॉय चट्टर्जी 
प्रस्तुति - संज्ञा टंडन 

रविवार, 19 जनवरी 2014

पण्डित पलुस्कर और तुलसी के राम

  
स्वरगोष्ठी – 151 में आज

रागों में भक्तिरस – 19

राम की बाललीला के चितेरे तुलसीदास को पलुस्कर जी ने गाया 

‘ठुमक चलत रामचन्द्र बाजत पैजनिया...’



‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ की उन्नीसवीं कड़ी के साथ मैं कृष्णमोहन मिश्र, आप सब संगीत-रसिकों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। मित्रों, इस श्रृंखला के अन्तर्गत हम आपके लिए भारतीय संगीत के कुछ भक्तिरस प्रधान राग और कुछ प्रमुख भक्त कवियों की रचनाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं। साथ ही उस भक्ति रचना के फिल्म में किये गए प्रयोग भी आपको सुनवा रहे हैं। श्रृंखला की पिछली कड़ी में हमने आपको सोलहवीं शताब्दी के कृष्णभक्त कवि सूरदास के एक लोकप्रिय पद- ‘मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो...’ पर सांगीतिक चर्चा की थी। यह पद कृष्ण की माखन चोरी लीला का वात्सल्य भाव से अभिसिंचित है। इसी क्रम में आज की कड़ी में हम राम की बाललीला का आनन्द लेंगे। गोस्वामी तुलसीदास अपने राम को ठुमक कर चलते हुए और पैजनी की मधुर ध्वनि बिखेरते हुए देखते हैं। तुलसीदास के इस पद को भारतीय संगीत के अनेकानेक शीर्षस्थ कलासाधकों स्वर दिया है। परन्तु ‘स्वरगोष्ठी’ के आज के अंक में हम आपको यह पद पण्डित दत्तात्रेय विष्णु पलुस्कर, भजन गायक पुरुषोत्तमदास जलोटा और लता मंगेशकर की आवाज़ों में प्रस्तुत कर रहे हैं। 

 



सोलहवीं शताब्दी के भक्त कवियों में गोस्वामी तुलसीदास शीर्ष स्थान पर विराजमान हैं। आधुनिक काल में सूरदास और तुलसीदास का मूल्यांकन सूर्य और चन्द्र की उपमा से किया जाता है। तुलसीदास की जन्मतिथि और उनके जन्मस्थान के बारे में कई मत हैं। परन्तु एक प्रचलित धारणा के अनुसार उनका जन्म संवत 1554 को वर्तमान उत्तर प्रदेश के बाँदा जनपद के राजापुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। इनके गुरु बाबा नरहरिदास (नृसिंहदास) थे, जिन्होंने इन्हें दीक्षा दी। इनका अधिकाँश जीवन चित्रकूट, काशी और अयोध्या में बीता। संवत 1631 में अपने अयोध्या प्रवास के दौरान तुलसीदास ने रामचरितमानस का सृजन आरम्भ किया। अभी अरण्य काण्ड की रचना भी न हो पाई थी कि वैष्णवों से विवाद होने के कारण अयोध्या छोड़ कर काशी जाकर निवास करना पड़ा। तुलसीदास श्रीसम्प्रदाय के आचार्य रामानन्द की शिष्य परम्परा में थे। उन्होंने सामाजिक स्थितियों को देखते हुए लोकभाषा में 'रामचरितमानस' की रचना की। उनके साहित्य में वर्णाश्रमधर्म, अवतारवाद, साकार उपासना, सगुणवाद, गो-ब्राह्मण रक्षा, देवादि विविध योनियों का यथोचित सम्मान एवं प्राचीन संस्कृति और वेदमार्ग का मण्डन और साथ ही उस समय के धार्मिक अत्याचारों और सामाजिक दोषों की एवं पन्थवाद की आलोचना भी की है। गोस्वामीजी पन्थ व सम्प्रदाय चलाने के विरोधी थे। उन्होंने भ्रातृप्रेम, स्वराज्य के सिद्धान्त, रामराज्य का आदर्श, अत्याचारों से बचने और शत्रु पर विजयी होने का निदान भी प्रस्तुत किया है। तत्कालीन परिवेश की समस्त शंकाओं का रामचरितमानस में उत्तर है। अकेले इस ग्रन्थ को लेकर यदि गोस्वामी तुलसीदास चाहते तो अपना अत्यन्त विशाल और शक्तिशाली सम्प्रदाय चला सकते थे। परन्तु उन्होने ऐसा नहीं किया। यह एक सौभाग्य की बात है कि आज यही एक ग्रन्थ है, जो साम्प्रदायिकता की सीमाओं को लाँघ कर सारे देश में व्यापक और सभी मत-मतान्तरों को पूर्णतया मान्य है। सबको एक सूत्र में बाँधने का जो कार्य शंकराचार्य ने किया था वही अपने युग में तुलसीदास की प्रवृत्ति साम्प्रदायिक न थी। उनके ग्रन्थों में अद्वैत और विशिष्टाद्वैत का सुन्दर समन्वय उपस्थित है। इसी प्रकार वैष्णव, शैव, शाक्त आदि साम्प्रदायिक भावनाओं और पूजापद्धतियों का समन्वय भी उनकी रचनाओं में पाया जाता है। वे आदर्श समुच्चयवादी सन्त कवि थे। ‘स्वरगोष्ठी’ के आज के अंक में हम आपको गोस्वामी तुलसीदास का एक पद, जो उनके आराध्य श्रीराम की बाललीला पर केन्द्रित है, सुनवाएँगे। यह पद इस प्रकार है-

ठुमक चलत रामचन्द्र बाजत पैंजनियाँ।

किलकि किलकि उठत धाय, गिरत भूमि लटपटाय,

धाय मातु गोद लेत दशरथ की रानियाँ।

अंचल रज अंग झारि, विविध भाँति सो दुलारि,

तन मन धन वारि वारि कहत मृदु बचनियाँ।

विद्रुम से अरुण अधर, बोलत मुख मधुर मधुर,

सुभग नासिका में चारु, लटकत लटकनियाँ।

तुलसीदास अति आनन्द, देख कर मुखारविन्द,

रघुवर छबि के समान रघुवर छबि बनियाँ।

ठुमक चलत रामचन्द्र, बाजत पैंजनियाँ।

आइए, सबसे पहले गोस्वामी तुलसीदास का यह पद सुप्रसिद्ध गायक पण्डित दत्तात्रेय विष्णु पलुस्कर जी (डी.वी. पलुस्कर) के स्वरों में सुनते हैं। इस पद के भाव, गायक पलुस्कर जी और प्रस्तुति में मौजूद राग पीलू की चर्चा हम यह पद सुनने के बाद करेंगे।



तुलसी भजन : ‘ठुमक चलत रामचन्द्र बाजत पैंजनियाँ...’ : पण्डित डी.वी. पलुस्कर





तुलसीदास के मानस में श्रीराम मर्यादापुरुषोत्तम के रूप में विराजमान थे। इसीलिए सूरदास के कृष्ण की भाँति श्रृंगार और चंचल भावों को उन्होने विस्तार नहीं दिया है। रामचरितमानस में भी श्रीराम की बाललीलाओं के प्रसंग संक्षिप्त ही हैं। रामचरितमानस के दोहा संख्या 190 में रामजन्म का प्रसंग है। इसके उपरान्त दोहा संख्या 191 के बाद अत्यन्त प्रचलित छन्द- ‘भए प्रगट कृपाला...’ में माता कौशल्या ‘कीजै शिशुलीला...’ का अनुरोध करतीं हैं। यहाँ से लेकर दोहा संख्या 203 तक गोस्वामी जी ने राम सहित चारो भाइयों के विभिन्न संस्कारों का उल्लेख किया है। बाल सुलभ क्रीडा का जितना मोहक चित्रण तुलसीदास ने इस पद में किया है, वैसा अन्यत्र नहीं मिलता।

इस पद का पण्डित दत्तात्रेय विष्णु पलुस्कर ने भावपूर्ण गायन प्रस्तुत कर अपने पिता पण्डित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर की संगीत परम्परा को आगे बढ़ाया है। पण्डित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर ने भक्त कवियों की कृतियों को सरल रागों में बाँध कर समाज में शास्त्रीय संगीत को ग्राह्य और सर्वसुलभ बनाया था। तुलसीदास का यह पद पलुस्कर जी ने चंचल, श्रृंगार और नटखट भाव की सृष्टि करने वाले राग पीलू के स्वरों में प्रस्तुत किया था। इस पद के लिए यह धुन इतनी लोकप्रिय हुई कि परवर्ती प्रायः सभी गायकों ने इसी धुन का अनुसरण किया। राग पीलू काफी थाट के अन्तर्गत माना जाता है। यह ठुमरी अंग का संकीर्ण राग है। रग भैरवी की तरह रसानुभूति के लिए और रचना के भाव को सम्प्रेषित करने के लिए सभी 12 स्वरों का प्रयोग भी किया जा सकता है। इस राग का वादी स्वर गान्धार और संवादी स्वर निषाद होता है। गोस्वामी तुलसीदास का यही पद अब हम आपको दो प्रमुख कलासाधकों से सुनवाते हैं। पहले प्रस्तुत है, चर्चित भजन गायक पुरुषोत्तमदास जलोटा की आवाज़ में। पुरुषोत्तमदास जी आज के लोकप्रिय भजन गायक अनूप जलोटा के पिता हैं। यह भजन उन्होने कीर्तन शैली में राग मिश्र पीलू के स्वर के साथ गाया है। इसके बाद आप स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की आवाज़ में यही भजन सुनेंगे। इनकी गायकी में अधिकतर पलुस्कर जी के स्वर-समूह को स्वीकार किया गया है। आप तुलसीदास के इस पद के रस-भाव की अनुभूति कीजिए और मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।



तुलसी भजन : ‘ठुमक चलत रामचन्द्र बाजत पैंजनियाँ...’ : पुरुषोत्तमदास जलोटा

 




तुलसी भजन : ‘ठुमक चलत रामचन्द्र बाजत पैंजनियाँ...’ : लता मंगेशकर






आजकी पहेली


‘स्वरगोष्ठी’ की 151वीं संगीत पहेली में हम आपको गायन और सितार वादन की जुगलबन्दी के अन्तर्गत एक बेहद लोकप्रिय भजन का अंश सुनवा रहे हैं। इसे सुन कर आपको निम्नलिखित दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। ‘स्वरगोष्ठी’ के 160वें अंक तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला का विजेता घोषित किया जाएगा।


1 – संगीत के इस अंश को सुन कर पहचानिए कि इस रचना में किस राग की झलक है?

2 – यह किस जनप्रिय भजन की धुन है? भजन की केवल आरम्भिक पंक्ति लिख भेजिए।

आप अपने उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 153वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।



पिछली पहेली के विजेता


‘स्वरगोष्ठी’ की 149वीं संगीत पहेली में हमने आपको सूरदास के एक पद का एक अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग काफी और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- एम.एस. शुभलक्ष्मी। इस अंक के दोनों प्रश्नो के सही उत्तर जबलपुर से क्षिति तिवारी, जौनपुर से डॉ. पी.के. त्रिपाठी, चंडीगढ़ से हरकीरत सिंह और बड़ोदरा, गुजरात से हमारे एक नए प्रतिभागी गोविन्द नामदेव ने दिया है। हैदराबाद की डी. हरिणा माधवी का एक ही उत्तर सही है। पाँचो प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।



अपनी बात


मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ हमने 20 कड़ियों में प्रस्तुत करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। यह इस श्रृंखला की उन्नीसवीं कड़ी थी। आज की कड़ी में हमने आपसे गोस्वामी तुलसीदास के वात्सल्य भाव से परिपूर्ण एक पद का रसास्वादन कराया। अगले अंक में आप एक और भक्तकवि की एक भक्ति-रचना का रसास्वादन करेंगे जिसके माध्यम से अनेक शीर्षस्थ कलासाधकों ने रागों का आधार लेकर भक्तिरस को सम्प्रेषित किया है। इस श्रृंखला की आगामी कड़ियों के लिए आप अपनी पसन्द के भक्तिरस प्रधान रागों या रचनाओं की फरमाइश कर सकते हैं। आप हमें एक नई श्रृंखला के विषय का सुझाव भी दे सकते हैं। हम आपके सुझावों और फरमाइशों का स्वागत करेंगे। अगले अंक में रविवार को प्रातः 9 बजे ‘स्वरगोष्ठी’ के इस मंच पर आप सभी संगीत-रसिकों की हमें प्रतीक्षा रहेगी।



प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र 

शनिवार, 18 जनवरी 2014

"रहे न रहे हम महका करेंगे...", सुचित्रा सेन की पुण्य स्मृति को नमन करती है आज की 'सिने पहेली'

सिने पहेली –97






"जब हम ना होंगे, जब हमारी खाँक़ पे तुम रुकोगे चलते चलते,
अश्कों से भीगी चाँदनी में एक सदा सी सुनोगे चलते चलते,
वही पे कही हम तुम से मिलेंगे, बन के कली, बन के सबा, बाग-ए-वफ़ा में,
रहे ना रहे हम..."!

अभिनेत्री सुचित्रा सेन के निधन की ख़बर सुनते ही फ़िल्म 'ममता' के उन पर फ़िल्माये गीत के ये बोल जैसे कानों में गूंजने लगे। जनवरी के कड़ाके की ठंड से कंपकंपाती रात में इस वक़्त जब मैं अपने लैपटॉप पर सुचित्रा सेन की यादों को ताज़ा कर रहा हूँ, बाहर अचानक मुस्लाधार बारिश शुरू हो गई है, और जैसे सुचित्रा सेन की यादें भी बारिश के साथ घुल मिल कर छम छम बरस रही हैं। चली गईं बांगला सिनेमा की सबसे लोकप्रिय, सदाबहार व ख़ूबसूरत अभिनेत्री सुचित्रा सेन। बंगाल के बाहर के पाठकों को यह बता दूँ कि उत्तम कुमार व सुचित्रा सेन की जोड़ी बांगला सिनेमा की सर्वाधिक लोकप्रिय जोड़ी रही है, और इस जोड़ी की फ़िल्में आज पाँच -छह दशक बाद भी हर बांगला टीवी चैनल पर नियमित रूप से दिखाई जाती है। बदलते दौर के साथ-साथ जहाँ सब कुछ बदल चुका है, सुचित्रा सेन की फ़िल्मों का जादू आज भी सर चढ़ कर बोलते है। हिन्दी में उन्होंने गिनी-चुनी फ़िल्में ही कीं, पर उनका भी अपना अलग मुकाम है, अलग पहचान है। 'सिने पहली' के मेरे दोस्तों, आइए आज की 'सिने पहेली' का यह अंक हम समर्पित करें बांगला सौन्दर्य सुचित्रा सेन की पुण्य स्मृति को।

आज की पहेली : सुचित्रा सेन विशेष

आज की पहेली केन्द्रित है अभिनेत्री सुचित्रा सेन पर। तो ये रहे उनसे जुड़े कुछ सवाल। हर सवाल के सही जवाब पर 2.5 अंक आपको दिये जायेंगे।

1. सुचित्रा सेन पर फ़िल्माये आशा भोसले का गाया यह गीत है संगीतकार सी. रामचन्द्र का स्वरबद्ध किया हुआ। इस गीत को सुनते हुए आपको अहसास होगा कि सी. रामचन्द्र ने फ़िल्म 'अनारकली' के मशहूर गीत "ये ज़िन्दगी उसी की है जो किसी का हो गया" की धुन को कुछ हद तक इसी गीत की धुन पर आधारित किया था। फ़िल्म में नायक रहे देव आनन्द। क्या आप बता सकते हैं आशा भोसले और साथियों का गाया यह गीत कौन सा गीत है?

2. आशा भोसले और साथियों का ही गाया एक और गीत है सुचित्रा सेन पर फ़िल्माया हुआ। कहा जाता है कि इस गीत के मूल धुन की रचना 1920 में वी. जगन्नाथ राव ने किया था। इस धुन का इस्तमाल संगीतकार सी. आर. सुब्बुरमण ने 1950 की अपने किसी फ़िल्म के गीत में किया था। पाँच साल बाद 1955 में संगीतकार मास्टर वेणु ने इसी धुन का इस्तमाल किया अपनी फ़िल्म में, और एक बार फिर इसी धुन का इस्तमाल हुआ इसके अगले ही साल 1956 की एक फ़िल्म में, इस बार संगीतकार थे एस. दक्षिणामूर्ती। और इसी धुन का इस्तमाल आशा भोसले के गाये इस हिन्दी गीत में भी किया गया। तो अंदाज़ा लगाइये यह कौन सा गीत है भला?

3. सुचित्रा सेन पर फ़िल्माये लता मंगेशकर के गाये इस बेहद मशहूर गीत के लिए एक सिचुएशन ऐसी बनी थी कि जिसमें बचपन, जवानी और बुढापा को दर्शाना था संगीत के माध्यम से। और संगीतकार ने क्या ख़ूब उतारा उम्र के इन तीन पड़ावों को इस गीत में! ज़रा सोचिये कि यह मशहूर गीत भला कौन सा हो सकता है?

4. सुचित्रा सेन पर फ़िल्माया हुआ लता मंगेशकर का गाया यह एक बहुत ही कर्णप्रिय गीत है हेमन्त कुमार का स्वरबद्ध किया हुआ। इसका एक बांग्ला संस्करण भी है हेमन्त कुमार का गाया हुआ। गीत का एक दृश्य नीचे दिया गया है। क्या इसे देख कर आप गीत पहचान सकते हैं?




अपने जवाब आप हमें cine.paheli@yahoo.com पर 23 जनवरी शाम 5 बजे तक ज़रूर भेज दीजिये।



पिछली पहेली का हल


1. ख़ूबसूरत
2. ग़ज़ल
3. नैना
4. एक शोला
5. दिल
6. ज़िन्दगी
7. आँचल
8. काजल
9. धड़कन
10. शबनम

गीत - ये नैना ये काजल ये ज़ुल्फ़ें ये आँचल.....ख़ूबसूरत सी हो तुम ग़ज़ल, कभी दिल हो कभी धड़कन कभी शोला कभी शबनम, तुम ही हो तुम मेरी हमदम........ज़िन्दगी..... तुम मेरी, मेरी तुम ज़िन्दगी.........(फिल्‍म - दिल से मिले दिल)




पिछली पहेली के विजेता


इस बार हमारे चार नियमित प्रतियोगियों ने ही केवल भाग लिया और सभी के 100% सही जवाब हैं। सबसे पहले जवाब भेज करइस बार 'सरताज प्रतियोगी' बने हैं लखनऊ के श्री प्रकाश गोविन्द। बहुत बहुत बधाई आपको प्रकाश जी!

और अब इस सेगमेण्ट के सम्मिलित स्कोर कार्ड पर एक नज़र...



और अब महाविजेता स्कोर-कार्ड पर भी एक नज़र डाल लेते हैं।





इस सेगमेण्ट की समाप्ति पर जिन पाँच प्रतियोगियों के 'महाविजेता स्कोर कार्ड' पर सबसे ज़्यादा अंक होंगे, वो ही पाँच खिलाड़ी केवल खेलेंगे 'सिने पहेली' का महामुकाबला और इसी महामुकाबले से निर्धारित होगा 'सिने पहेली महाविजेता'। 


एक ज़रूरी सूचना:


'महाविजेता स्कोर कार्ड' में नाम दर्ज होने वाले खिलाड़ियों में से कौछ खिलाड़ी ऐसे हैं जो इस खेल को छोड़ चुके हैं, जैसे कि गौतम केवलिया, रीतेश खरे, सलमन ख़ान, और महेश बसन्तनी। आप चारों से निवेदन है (आपको हम ईमेल से भी सूचित कर रहे हैं) कि आप इस प्रतियोगिता में वापस आकर महाविजेता बनने की जंग में शामिल हो जायें। इस सेगमेण्ट के अन्तिम कड़ी तक अगर आप वापस प्रतियोगिता में शामिल नहीं हुए तो महाविजेता स्कोर कार्ड से आपके नाम और अर्जित अंख निरस्त कर दिये जायेंगे और अन्य प्रतियोगियों को मौका दे दिया जायेगा।


तो आज बस इतना ही, नये साल में फिर मुलाक़ात होगी 'सिने पहेली' में। लेकिन 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के अन्य स्तंभ आपके लिए पेश होते रहेंगे हर रोज़। तो बने रहिये हमारे साथ और सुलझाते रहिये अपनी ज़िंदगी की पहेलियों के साथ-साथ 'सिने पहेली' भी, अनुमति चाहूँगा, नमस्कार!

प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी

शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

बॉलीवुड के खान'दान की संगीतमयी भिडंत

ताज़ा सुर ताल - 2014 - 02

ताज़ा सुर ताल के नए अंक में आपका स्वागत है. आज हम आमने सामने ला रहे हैं बॉलीवुड के दो बड़े 'खान' को. २०१३ के अंत में आई धूम ३ ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. सबसे अधिक कमाई करने वाली इस फिल्म का संगीत भी श्रोताओं को बहुत रास आया है. प्रीतम ने एक बार फिर से साबित किया है ऐसी बड़ी फिल्मों की बागडोर सँभालने में उनसे बेहतर कोई नहीं है. समीर के शब्दों में सूफी रंग बहुत खूब जचा है. भाग मिल्खा भाग  के गीतों से अपनी दमदार उपस्तिथि दर्ज करने के बाद सिद्धार्थ महादेवन ने एक बार फिर अपनी सशक्त आवाज़ से पूरे गीत पर अपनी पकड़ बनाये रखी है, गीत का एक चौंकाने वाला पक्ष रहा शिल्पा राव की आवाज़. अमित त्रिवेदी की टीम का अहम अंग रही शिल्पा ने पिछले साल ही मुरब्बा  ओर मनमर्जियाँ  जैसे गहरे गीत गाए थे, पर मलंग  में उनका एक नया ही सुखद अंदाज़ सुनने को मिला है. कहा जाता है ये बॉलीवुड में अब तक का सबसे महंगा गीत है. देश विदेश से बड़े बड़े जिमनास्टिकों की पूरी फ़ौज है इसमें ओर इस गीत में लगभग ५ करोड का खर्चा आया है. बहरहाल गीत को परदे पर देखना वाकई सुखद है. एक ओर जानकारी आपको देते चलें कि ऑडियो में इस गीत का केवल एक पैरा ही है, जबकि फिल्म में एक ओर पैरा जोड़ा गया है, ओर गीत की स्क्रीन लम्बाई ६ मिनट से अधिक है. लीजिए सुनिए मलंग  का रूहानी अंदाज़     
शाहरुख की चेन्नई एक्सप्रेस  का रिकॉर्ड तोडा धूम ३ ,तो क्या अब सलमान खान की जय हो  ,धूम ३ का रिकॉर्ड तोड़ पाएगी ये देखने वाला होगा. सलमान की ये नई फिल्म फिर एक बार एक दक्षिण की हिट फिल्म का रिमेक है. प्रस्तुत गीत शायद इस फिल्म का सबसे सुरीला गीत है, जिसे रचा है सलमान के लिए हिट गीतों को रचती आई गीतकार-संगीतकार जोड़ी समीर ओर साजिद वाजिद ने. शान ओर श्रेया की भरोसेमंद आवाजों में ये गीत बेशक कुछ नया ऑफर नहीं करता मगर सुनने में बेहद सुरीला अवश्य है. डब्बू मलिक के बेटे अरमान मलिक भी इस एल्बम के साथ अपनी शुरुआत कर रहे हैं. उन्हें हमारी शुभकामनाएँ. सुनिए तेरे नैना बड़े कातिल मार ही डालेंगें .....    

गुरुवार, 16 जनवरी 2014

जब दिलीप साहब को मिली तलत साहब की मखमली आवाज़

खरा सोना गीत - जब जब फूल खिले 
प्रस्तोता - दीप्ती सक्सेना 
स्क्रिप्ट - सुजॉय चट्टर्जी 
प्रस्तुति - संज्ञा टंडन 

बुधवार, 15 जनवरी 2014

रागमाला गीत – 1 : प्लेबैक इण्डिया ब्रोडकास्ट



 


प्लेबैक इण्डिया ब्रोडकास्ट



रागो के रंग, रागमाला गीत के संग – 1


राग बहार, बागेश्री, यमन कल्याण, केदार, भैरव और मेघ मल्हार के रंग बिखेरता रागमाला गीत

‘मधुर मधुर संगीत सुनाओ...’


फिल्म : संगीत सम्राट तानसेन 
संगीतकार : एस.एन. त्रिपाठी 
गायक : पूर्णिमा सेठ, पंढारीनाथ कोल्हापुरे और मन्ना डे

आलेख : कृष्णमोहन मिश्र 
स्वर एवं प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन







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