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क्या पेश किया जाए, चाय या काढ़ा ? || A Run For Fun || Episode 04 || Arun kalra

कोरोना महामारी ने दुनिया को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है, जीने का ढंग बदला, सोच का तरीका बदल गया, इन्हीं बदलाओं को एक कलाकार की नजर से सुनिए आज। हल्के फुल्के अंदाज में कोरोना के बाद समाज और दुनिया में आए कुछ बदलाओं पर चुटकी ले रहे हैं, अ रन फॉर फन में अभिनेता अरुण कुमार कालरा अपने ही मुक्तलिफ़ अंदाज में  सुनिए YouTube पर  आप हमारे इस पॉडकास्ट को इन पॉडकास्ट साईटस पर भी सुन सकते हैं  Spotify Amazon Music Google Podcast Gaana  Jiosaawn हम से जुड़ सकते हैं - facebook  instagram  YouTube  To Join the A Run for Fun team, please write to sajeevsarathie@gmail.com  Hope you like this initiative, give us your feedback on radioplaybackdotin@gmail.com
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काव्य तरंग || मुकुल तिवारी || ओपन माइक - नदी की आवाज़ सुनो

काव्य तरंग  रेडियो प्लेबैक इंडिया की प्रस्तुति ' नदी की आवाज़ सुनो ' काव्य तरंग के दूसरे सीजन की थीम है 'नदी'। इस महीने में आप अलग अलग आवाज़ों में नदी पर आधारित कविताओं का आनंद  उठा सकेंगे। नदी के कई रूप है। कभी वो शोख़ है।  कभी चंचल है, कभी अल्हड़, कभी मचलती है बलखाती है कभी ख़ामोश -चुपचाप है! नदी के कई रूपों स्वरूपों से परिचय करवा रही है मुकुल तिवारी।  आवाज़ तथा आलेख - मुकुल तिवारी  कविताएँ - डा. उषा किरण, साधना वैद  तकनीकी सहायता  - अमित तिवारी  आर्ट वर्क - मनुज मेहता, अमित तिवारी सुनिए YouTube पर आप हमारे इस पॉडकास्ट को इन पॉडकास्ट साईटस पर भी सुन सकते हैं  Spotify Amazon music   Google Podcasts Apple Podcasts Gaana JioSaavn हम से जुड़ सकते हैं - facebook  instagram  YouTube  Hope you like this initiative, give us your feedback on radioplaybackdotin@gmail.com

छलिया मेरा नाम || क्यों चली इस गीत के बोलों पर सेन्सर की कैंची || एक गीत सौ अफ़साने || एपिसोड 08

  एक गीत सौ अफ़साने की आठवीं कड़ी॥    राज कपूर की मशहूर फ़िल्म ’छलिया’ और इसके शीर्षक गीत "छलिया मेरा नाम" के बारे में कौन नहीं जानता! पर क्या आपको पता है कि यह गीत जब लिखा गया था, तब इसके मुखड़े और अन्तरों के बोल काफ़ी अलग थे। क्यों चली थी सेन्सर बोर्ड की कैंची इस भोले-भाले से गीत पर? क्यों मुखड़ा और तीनों अन्तरों के बोलों में बदलाव करने पडे गीतकार क़मर जलालाबादी को? और इसी फ़िल्म में रफ़ी साहब का एक गीत क्यों रखा गया और फ़िल्म के अन्त में शीर्षक गीत की झलकी की जगह रफ़ी साहब वाले गीत की झलकी क्यों बजायी गई। आइए आज इन्हीं सब सवालों के जवाब ढूंढ़े फ़िल्म ’छलिया’ के इस शीर्षक गीत की चर्चा के बहाने... Listen on YouTube आप हमारे इस पॉडकास्ट को इन पॉडकास्ट साईटस पर भी सुन सकते हैं  Spotify Amazon music   Google Podcasts Apple Podcasts Gaana JioSaavn हम से जुड़ सकते हैं - facebook  instagram  YouTube  Hope you like this initiative, give us your feedback on radioplaybackdotin@gmail.com

CinemaScope Reviews || Episode 11 || Ramyug

एम एक्स प्लेयर पर ताज़ा प्रदर्शित वेब सिरीज़ "रामयुग" की समीक्षा आज लेकर आए हैं अतुल सक्सेना, रेडियो प्लेबैक इंडिया के लिए इस रिव्यू को लिखा है तेजस पूनिया ने, रामायण की महागाथा पर आधारित इस वेब सीरीज में क्या अच्छा है और क्या खराब, जानते हैं इस पॉडकास्ट में  आप हमारे इस पॉडकास्ट को इन पॉडकास्ट साईटस पर भी सुन सकते हैं  Spotify Amazon music   Google Podcasts Apple Podcasts Gaana JioSaavn हम से जुड़ सकते हैं - facebook  instagram  YouTube  To Join the CinemaScope Reviews team, please write to sajeevsarathie@gmail.com  Hope you like this initiative, give us your feedback on radioplaybackdotin@gmail.com

काव्य तरंग // पूजा अनिल // ओपन माइक - नदी बहती हो क्यों

काव्य तरंग  रेडियो प्लेबैक इंडिया की प्रस्तुति ' नदी बहती हो क्यों ' काव्य तरंग के दूसरे सीजन की थीम है 'नदी'। इस महीने में आप अलग अलग आवाज़ों में नदी पर आधारित कविताओं का आनंद  उठा सकेंगे। उदयपुर की बरसाती नदियों से अठखेलियां करते हुए पेरिस की  सीन नदी तक की सैर करवा रही हैं पूजा अनिल।  आवाज़, कविता तथा आलेख - पूजा अनिल  तकनीकी सहायता  - अमित तिवारी  आर्ट वर्क - मनुज मेहता, अमित तिवारी आप हमारे इस पॉडकास्ट को इन पॉडकास्ट साईटस पर भी सुन सकते हैं  Spotify Amazon music   Google Podcasts Apple Podcasts Gaana JioSaavn हम से जुड़ सकते हैं - facebook  instagram  YouTube  Hope you like this initiative, give us your feedback on radioplaybackdotin@gmail.com

सिस्टर्स मैचिंग सेंटर (दीपक शर्मा) बोलती कहानियाँ सीज़न 1: पॉडकास्ट # 12

रेडियो प्लेबैक इंडिया के साप्ताहिक स्तम्भ ' बोलती कहानियाँ ' के अंतर्गत हम आपको सुनवाते हैं हिन्दी की नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। बोलती कहानियाँ (सीज़न 1) केे पॉडकास्ट # 12 में आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं हिंदी की प्रसिद्ध साहित्यकार दीपक शर्मा की कथा " सिस्टर्स मैचिंग सेंटर ", संज्ञा टण्डन के स्वर में। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा साहित्य भूषण सम्मान से सम्मानित लेखिका दीपक शर्मा की रचनाओं का परिवेश जितना व्यापक है, उतना ही प्रामाणिक भी। उनके जैसी प्रामाणिकता हिंदी में कहीं और नहीं दिखती है, और न ही वैसा विस्तार। बीसियों पत्रिकाओं व अनेक संकलनों में अब तक सैकड़ों कहानियाँ आ चुकी हैं। हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी कहानी “जीजी मुझ से भी बहुत कड़वा बोल जाती हैं,” किशोर को मैं ढाँढस बँधाना चाहती हूँ। उसका बातूनीपन तो मुझे बेहद पसन्द है ही, साथ ही उसकी तीव्र बुद्धि व भद्र सौजन्य भी मुझे लुभाता है ( दीपक शर्मा की ‘सिस्टर्स मैचिंग सेंटर’ से एक अंश ) यूट्यूब पर जियो सावन ऐपल पॉडकास्ट

एक मुलाकात जरूरी है || एपिसोड 08 || गुलराज सिंह

मिलिये गायक संगीतकार गुलराज सिंह से एक मूलकात जरूरी है के आज के एपिसोड में। उंगली, फुकरे रिटर्न्स और दरबान जैसी फिल्मों में अपनी आवाज और धुनों का जादू जगाने वाले इस युवा गायक सगीतकार से बातचीत कर रहे हैं सजीव सारथी।  आप हमारे इस पॉडकास्ट को इन पॉडकास्ट साईटस पर भी सुन सकते हैं  Spotify Amazon music   Google Podcasts Apple Podcasts Gaana JioSaavn हम से जुड़ सकते हैं - facebook  instagram  YouTube  To Join the Ek Mulkaat Zaroori Hai  team, please write to sajeevsarathie@gmail.com  Hope you like this initiative, give us your feedback on radioplaybackdotin@gmail.com