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Wednesday, September 17, 2008

जैसे ही देखा मोहिंदर कुमार जी का गीत, लगा कि धुन मिल गयी...

हिंद युग्म की नयी खोज हैं, संगीतकार और गायक कृष्ण राज कुमार, जो हैं आवाज़ पर इस हफ्ते के उभरते सितारे. २२ वर्षीय कृष्ण राज दक्षिण भारत के कोच्ची केरल से हैं, अभी अभी अपनी पढ़ाई पूरी की है इन्होने. संगीत का शौक बचपन से है और पिछले १४ सालों से कर्णाटक संगीत में दीक्षा ले रहे हैं. आवाज़ पर इनका पहला स्वरबद्ध किया और गाया हुआ गीत "राहतें सारी" इस शुक्रवार को ओपन हुआ था और बेहद सराहा भी गया, जिससे कृष्ण कुमार के हौसले यकीनन बढ़े हैं और हमारे श्रोता आने वाले दिनों में उनसे और बेहतर गीतों की उम्मीद रख सकते हैं. दरअसल हर गीत की तरह इस गीत की भी एक कहानी है. आईये जानते हैं ख़ुद कृष्ण कुमार से की कैसे बना ये सुमधुर गीत. (कृष्ण हिंद युग्म से हिन्दी टंकण अभी सीख रहे हैं, पर यहाँ प्रस्तुत उनका यह अनुभव अभी मूल रूप में ही आपके सामने है)

First of all I thank God for blessing me, second I thank sajeev ji for giving me an opportunity to showcase my talent and last but not the least I thank Mohinder kumar ji for providing such a wonderful lyrics without which I wouldn’t be able to compose the song.


My name is Krishna Raj Kumar. I am from cochin, kerala. I just completed my Btech. Basically I am a singer and I have been learning classical music for 14 years. My interest in composing music started when I was in my 10th. From there onwards I was more interested in composing music.

My introduction to hindyugm was made by Niran kumar of "pehla sur" fame. It was through him that I got to meet Sajeev sarathie ji. First when I visited hindyugm site I saw an ad calling for singers. I thought why not compose a song and also sing the song in my voice. So the next thing that came in my mind was what to compose??? While browsing the site suddenly I saw the poetry section and I browsed through all the poems in that section. To be frank all were poems!!!!! I mean I knew I was in the poetry section but to me it was like oh!! I don’t think I can compose tune for poems….But then I saw mohinder kumar ji’s "Raahate saari aagayi…" Hmmmm…..ok I think I got a tune…then there was no looking back actually….i composed the first stanza and then I send it to sajeev ji…..He liked the tune and my voice. He said to compose the whole song and also suggested me to sing the whole song in one flow as it’s a poem it would be better to sing it in one flow. He also suggested that let the last stanza “dhosto ne nibha di dushmani pyaar se” be repeated.. I did the composing according to what he suggested. It took me sometime to compose the song and also the orchestration as all the work was done by me.And the song was born…

I thank all of you for taking time in listening to this song and also thank all of you for posting your valuable comments. I have your valuable comments and I will improve on it the next time.

Also thank mohinder kumar ji for his beautiful lyrics and once again Sajeev ji and the whole hindyugm team for putting up a blog where people like me are able to showcase their talents. It’s a wonderful thing because we are able to find hidden talents.

All the best hindyugm team.

God bless you!!!!

-Krishna Raj Kumar

दोस्तों, तो ये थे संगीत की दुनिया के नए सुरबाज़, कृष्ण राज कुमार. आईये एक फ़िर आनंद लें उनके इस पहले पहले गीत का और इस प्रतिभावान गायक/संगीतकार को अपना प्रोत्साहन देकर हौंसलाअफजाई करें.
(गीत को सुनने के लिए नीचे के पोस्टर पर क्लिक करें)



आप भी इसका इस्तेमाल करें

Wednesday, September 3, 2008

मैं अमर के शब्दचित्र में उतरी एक छोटी-सी कविता हूँ...

मैं अमर के शब्दचित्र में उतरी एक छोटी-सी कविता हूँ,
है फख्र कि मैं भी उस जैसा कई लोकों का रचयिता हूँ।
कहना है विश्व दीपक "तन्हा" का.

विश्व दीपक "तन्हा",एक कवि के रूप में इन्टरनेट पर एक ऐसा नाम है जो किसी परिचय का मोहताज नही है,अपनी कविताओं और कहानियो से एक उभरते हुए साहित्यकर्मी के रूप में अपनी पहचान बनने वाले "तन्हा",का लिखा पहला स्वरबद्ध गीत "
मेरे सरकार",पिछले हफ्ते आवाज़ पर ओपन हुआ,और बेहद सराहा गया,आईये मिलते हैं,कवि कथाकार और गीतकार विश्व दीपक तन्हा से,जो हैं इस हफ्ते हिंद युग्म,आवाज़ के उभरते सितारे -

अपने बारे में ज्यादा क्या बताऊँ? एक संक्षिप्त परिचय यानि कि intro दे देता हूँ बस । जन्म बिहार के सोनपुर में हुआ, दिनांक २२ फरवरी १९८६ को। अब मैं अपने सोनपुर से आप सब को अवगत करा देता हूँ। मेरा/हमारा सोनपुर हरिहरक्षेत्र के नाम से विख्यात है, जहाँ हरि और हर एक साथ एक हीं मूर्त्ति में विद्यमान है और जहाँ एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है। पूरा क्षेत्र मंदिरों से भरा हुआ है। इसलिए बचपन से हीं धार्मिक माहौल में रहा। लेकिन मैं कभी भी पूर्णतया धार्मिक न हो सका। पूजा-पाठ के श्लोकों और दोहों को मैं कविता की तरह हीं मानता था। पर मेरे परिवार में कविता, कहानियों का किसी का भी शौक न था। आश्चर्य की बात है कि जब मैं आठवीं में था, तब से पता नहीं कैसे मुझे कविता लिखने की आदत लग गई । फिर तो चूहा, बिल्ली, चप्पल, छाता किसी भी विषय पर लिखने लगा। मेरे परिवार में पढाई के अलावा कुछ भी करना पढाई से आँख और नाक चुराने जैसा माना जाता था। इसलिए घरवालों से छिपाकर लिखता था।


पहली कविता कौन-सी थी याद नहीं लेकिन पहली कविता जिसे मेरे पिताजी ने स्वीकार किया, वो याद है। जब मैं दसवीं में था, तो मेरी छोटी बहन को १५ अगस्त के अवसर पर अपने स्कूल में एक कविता सुनानी थी। मैने अपनी लिखी एक कविता "तिरंगा के तीन रंग" अपनी बहन को दी और कहा कि पापा से पूछ लेना कि इसे कैसे गाना है। मेरे पिताजी ने मेरी बहन को कहा कि कवि से हीं पूछो ;) । अपनी कविता की स्वीकृति सुनकर मुझे बेहद अच्छा लगा। फिर जब मैं १२वीं में था पिताजी के कार्यालय में होली के अवसर पर एक कविता की आवश्यकता थी। मेरी खुशी का ठिकाना न रहा जब मेरे पिताजी ने खुद मुझसे कविता लिखने के लिए कहा। यह अलग बात है कि वह कविता कार्यालय में पढी नहीं जा सकी , क्योंकि कुछ बड़े कवि आए हुए थे, लेकिन मुझे जो चाहिए था, वह मैने पा लिया था।
इसतरह शनै:शनै: कविता-लेखन का मेरा सफ़र चलता रहा।

१२वीं के बाद आई०आई०टी० जे०ई०ई० की तैयारी के लिए पटना चला गया।माहौल बदला, मूड बदला, उमर बदली तो प्यार-मोहब्बत की कविताएँ लिखने लगा। कभी महसूस होता था कि कहीं मेरी कविताएँ मेरे भविष्य को बर्बाद न कर दे, क्योंकि हर समय कुछ न कुछ लिखता हीं रहता था , तैयारी अधोगति पर थी। फिर भी कुछ दुआओं और सदबुद्धि आने के बाद बहुत सारी मेहनत के बलबूते मैं आई०आई०टी० में प्रवेश पाने में सफल हुआ। नामांकन संगणक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग(Computer science and Engineering Department) में हुआ। बिहार बोर्ड का छात्र होने के कारण मुझे कम्पूटर की कुछ भी जानकारी न थी। इसलिए नामांकन के बाद मुझे बाकी छात्रों के लेवेल में आने के लिए खासी मेहनत करनी पड़ी। लेखन का दौर धीरे-धीरे खत्म होने लगा।

इंजीनियरिंग के प्रथम और द्वितीय वर्षों में मैने नाम-मात्र की कविताएँ लिखीं। हास्टल मैगजीन और इन्स्टीच्युट मैगजीन के लिए एक-दो कविताएँ लिखता रहा बस। फिर तृतीय वर्ष में आरकुट पर "गिरीराज जोशी" ,"शैलेश भारतवासी" और "राजीव रंजन प्रसाद" से मुलाकात हुई। इन लोगों के माध्यम से हिन्द-युग्म के संपर्क में आया। दिसंबर २००६ में मैं हिन्द-युग्म का नियमित सदस्य हो गया। अब तो हर सप्ताह कविताएँ, मुझे लगा जैसे मैने खुद को वापस पा लिया। तकनीकी दुनिया और साहित्यिक दुनिया के बीच का पुल मैने पा लिया था। पहली कविता जो मैने युग्म पर प्रकाशित की थी , वो थी "याद" । आज भी मुझे याद है कि जब इस कविता पर सकारात्मक टिप्पणियाँ आई थीं तो दिल कितना खुश हुआ था। कुछ महीनों के पश्चात काव्य-पल्लवन की शुरूआत हुई। एक दिए गए विषय पर लिखना एक नया हीं अनुभव था। युग्म के अन्य मित्रों के सहयोग से धीरे-धीरे मैं भी अनुभवी होता गया।

फरवरी २००७ के यूनिकवि विजेता "गौरव सोलंकी" के प्रयास से युग्म ने एक नया अभियान शुरू किया , जिसका नाम था "कहानी-कलश" । युग्म बस कविताओं तक हीं सीमित नहीं रहना चाहता था , उसके पास कहानिकारों की भी एक उम्दा फौज थी। इसलिए कहानी-कलश भी चल निकला। मैने कभी पहले कोई कहानी नहीं लिखी थी, लेकिन मित्र गौरव के कहने पर मुझमे भी कहानी-लेखन की जिज्ञासा जगी। कुछ कच्चे शब्दों को जोड़कर मैने भी एक कहानी रच डाली "तुलसी की छांव" । कुछ सुधि पाठकों ने मेरी प्रथम कहानी को सराहा । फिर २-३ महीनों के अंतराल पर मैने कहानी लिखने का प्रण किया। ३-४ कहानियाँ लिख डालीं, लेकिन अब भी मुझे कहानी लेखन बड़ा हीं मेहनत का काम लगता है, इसलिए ज्यादा लिख नहीं पाता।

इसी तरह "राजीव रंजन प्रसाद" की कड़ी निष्ठा के बदौलत युग्म ने बाल-साहित्य पर भी काम करने का वचन लिया। इसी दिशा में "बाल-उद्यान" नाम का एक नया मंच तैयार किया गया। मैने भी अपनी कुछ कविताएँ वहाँ प्रेषित की , जो मैने आठवीं से दसवीं के बीच लिखी थी। जब लिखी थी, तब मुझे वो रचनाएँ बचकानी नहीं लगती थी, लेकिन अब वे बचकानी के अलावा कुछ नहीं लगतीं ;) बाल-उद्यान अभी भी अपने कार्य में सफलतापूर्वक तल्लीन है।

कुछ महीनों के बाद युग्म पर "सजीव सारथी" का पदार्पण हुआ और उन्होंने युग्म को एक नई दिशा हीं दे दी। कविताएँ, कहानियाँ अब बस लिखी हीं नई जाने लगीं, बल्कि उनमें आवाज रूपी जान भी पैदा की गई। गीत बनने लगें, गज़लें तैयार होने लगीं, नए-नए संगीतकार,गीतकार और गायकों का युग्म पर आगमन शुरू हो गया।शुरू-शुरू में हर महीने एक नया गीत युग्म की शोभा बढाने लगा, फिर हर पंद्रह दिनों पर और अब हर सप्ताह। मैने भी सोचा कि अपनी प्रतिभा का इम्तीहान लिया जाए। मैने अपना एक गीत सुभोजित को भेज दिया। २ हफ्तों की माथापच्ची के बाद गीत के बोल में ढेर सारे परिवर्त्तन किए गए । २-३ महीनों की मेहनत के पश्चात सुभोजित ने इसे फाईनल लूक और टच दिया और १-२ हफ्तों की कलाकारी और गलाकारी लगाकर बिस्वजीत ने इसे अपनी आवाज से एक नया हीं रंग दे दिया। आखिरकार वह गीत पिछले सप्ताह आवाज़ के मंच पर रीलिज हो गया। उम्मीद है कि सभी पाठको और श्रोताओं ने उस गीत का रसास्वादन किया होगा।

"मेरे सरकार" इस गीत के पीछे की कहानी कुछ खास नहीं है। आज सबके समक्ष मैं उस कहानी का पर्दाफाश कर रहा हूँ। दर-असल सुभोजित ( हमारे प्यारे संगीतकार साहब) , जो कि अभी ११वीं में पढते हैं, को एक ऎसे गाने की जरूरत थी, जो वे अपनी भावी प्रेमिका को सुना सकें और उसे मोहित कर सकें। भावी इसलिए क्योंकि वो सौभाग्यशाली लड़की अभी तक उनकी प्रेमिका बनी नहीं थी, एकतरफा प्यार था। मैने उसे जो गाना दिया था, उसमें कुछ बांग्ला के भी शब्द थे। मैने सोचा था कि लड़की बंगाली हीं होगा, इसलिए "बोलबो आमि सोना, तुमाके भालो बासि"(मैं तुमसे कहूँगा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ) जैसे वाक्य मैने जानकर डाले थे। लेकिन न जाने क्यों सुभोजित ने वह गाना स्वीकार नहीं किया। शायद लड़की बंगाली नहीं होगी :) । उसने कहा कि एक हिंदी गाना लिखकर दो। तो मैने "मेरे सरकार" लिखा। और वाह............सुभोजित ने वह गाना स्वीकार कर लिया। उसने कहा कि बहुत हीं मीठे बोल हैं, मैं इसपर कुछ क्लासिकल टाईप का म्युजिक दूँगा। मैं हैरान.....इस गाने पर क्लासिकल म्युजिक। मरता क्या न करता....आखिर मेरा पहला गाना था। मैने बोला कि तुम जो भी बनाओगे , अच्छा हीं बनाओगे, तुम्हारी मर्जी क्लासिकल हीं दो। और उसने जो म्युजिक(संगीत) दिया, मैने उसकी आशा भी नहीं की थी। बहुत हीं खूबसूरत.....मजा आ गया।

तो ये रही "मेरे सरकार" के पीछे की कहानी..............। अब पता नहीं सुभोजित अपने सरकार को अपनी प्रेयसी बना पाए कि नहीं ;)

जब मैं युग्म का सदस्य बना था, तो बमुश्किल १० लोग हीं हमारे साथ थे। लेकिन हम सबों के प्रयास से युग्म की सदस्य-संख्या बढती गई। अब तो ५० से भी ज्यादा लोग हमारे कारवां में शामिल हैं। इसलिए युग्म की प्रगति में हम सबका बराबर का सहयोग अपेक्षित है। मैं बस यही दुआ करता हूँ कि हर कोई निस्वार्थ भाव से यूँ हीं युग्म की सेवा करते रहे और युग्म अपने हरेक मंच पर सफलता का परचम लहराए।

- विश्व दीपक "तन्हा"

युग्म परिवार की तरफ़ से भी "तन्हा" जी को बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनायें. इसी बात पर क्यों न एक बार फ़िर आनंद लें सप्ताह के गीत "मेरे सरकार" का, और हौंसलाअफजाई करें आवाज़ की इस नयी संगीत टीम का -




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Monday, July 28, 2008

पहला सुर के गीतों को अपना कॉलर ट्यून बनायें

इंटरनेट के माध्यम से बने पहले संगीतबद्ध एल्बम 'पहला सुर' के गीतों को अपना कॉलर ट्यून बनायें

Very First Musical Albumयह बहुत खुशी की बात है कि हिन्द-युग्म के पहले एल्बम 'पहला सुर' के गीतों/ग़ज़लों को आप अपना कॉलर ट्यून बना सकते हैं। अभी यह सुविधा वोडाफोन के साथ है। जल्द ही यह सुविधा हम अन्य मोबाइल नेटवर्क उपभोक्ताओं को भी देंगे। हिन्दी ब्लॉगिंग के लिए भी यह एक सफलता ही है कि ब्लॉगिंग के माध्यम से एक एल्बम बना और वो इतनी जगह, इतनी बार सुना गया और सराहा गया।

Friends,

We are very happy to announce that the tracks of Hind-Yugm's very first album of 'Pehla Sur' that was made through internet jamming, are uploaded at Vodafone... You can set those as your caller tune..
CODESONG_NAMEALBUM_NAME
10600300Baat Yeh Kya Hai JoPehla Sur
10600301In DinonPehla Sur
10600302JhalakPehla Sur
10600303Mujhe Dard DePehla Sur
10600304SammohanPehla Sur
10600305Subah Jeeta HunPehla Sur
10600306Subah Ki TaazgiPehla Sur
10600307Tu Hal Dil Ke PaasPehla Sur
10600308Wo Narm SiPehla Sur
10600309Yeh Zaroori NahinPehla Sur


SMS CT to 56789 to set the song as your Caller tune

For Example: If you want to set 'Wo Narm Si' as your Vodafone Caller Tune, then create/compose/write a SMS CT space followed by code (CT 10600308) and sent it to 56789..

Rs 15 / Caller tune selection I Rs 30 / month I Rs 3 / SMS


'पहला सुर' के गीतों को कॉलर ट्यून के रूप में अपने मोबाइल में सेट करने से पहले उन्हें यहाँ सुन लें।
Please listen all the tracks of Pehla Sur here, before setting these as your caller tune..

नोट- कॉलर ट्यून अगस्त के पहले सप्ताह से एक्टिवेट किया जा सकेगा। थोड़ी सी प्रतीक्षा।

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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