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Sunday, March 3, 2013

26/11 की दर्दनाक यादो को मधुर और भावपूर्ण संगीत का मरहम

प्लेबैक वाणी -36 - संगीत समीक्षा - The Attacks of 26/11


राम गोपाल वर्मा की फिल्मों का अपने दर्शकों के साथ धूप छांव का रिश्ता रहा है, या तो उनकी फ़िल्में ताबड तोड़ व्यवसाय करेंगीं या फिर बॉक्स ऑफिस पर औधें मुँह गिर पड़ेंगीं. पर मज़े की बात ये है कि कोई भी कभी भी RGV को सस्ते में लेने की जुर्रत नहीं कर सकता. ‘नॉट अ लव स्टोरी’ से अपनी फॉर्म में वापस आये RGV अब लाये हैं एक ऐसी फिल्म जिस पर मुझे यकीन है हर किसी की नज़र रहेगी, क्योंकि ये फिल्म एक ऐसे कुख्यात आतंकी हमले का बयान है जिसने देश के हर बाशिंदे को हिलाकर रख दिया था और जिससे हर भारतीय की भावनाएं बेहद गहरे रूप में जुडी हुई है. यूँ तो RGV की फिल्मों में गीतों की बहुत अधिक गुन्जायिश नहीं रहती और अमूमन RGV उन्हें एक व्यावसायिक मजबूरी समझ कर ही अपने स्क्रिप्ट का हिस्सा बनाते हैं, पर चूँकि ये फिल्म एक महत्वपूर्ण फिल्म है इसके संगीत की चर्चा भी लाजमी हो जाती है, तो चलिए आज आपसे बांटे कि कैसा है THE ATTACKS OF 26/11 का संगीत.

एल्बम की शुरुआत एक नौ मिनट लंबी ग़ज़ल के साथ होता है – हमें रंजों गम से फुर्सत न कभी थी न है न होगी. मधुश्री की सुरीली आवाज़ में आरंभिक आलाप पर नाना पाटेकर की सशक्त मगर भावपूर्ण आवाज़ का असर जादूई है और ये जादू अगले नौ मिनट तक बरकरार रहता है. हर मिसरे को पहले नाना की आवाज़ का आधार मिलता है जिसके बाद मधुश्री उसे अपने अंदाज़ में दोहराती है. ग़ज़लों का वापस फिल्मों में आना एक सुखद संकेत है. शब्द संगीत और अदायगी हर बात खूबसूरत है इस नगमें की. इसे लूप में लगाकर आप बार बार सुने बिना आप नहीं रह पायेंगें.

अगला गीत तेज बेस गिटार से खुलता है. मौला मौला देवा देवा फिल्म में तेज रफ़्तार एक्शन को सशक्त पार्श्व प्रदान करेगा. सुखविंदर की दमदार आवाज़ और कोरस का सुन्दर इस्तेमाल गीत को एक तांडव गीत में तब्दील कर देते हैं. रोशन दलाल का संगीत संयोजन जबरदस्त है, और कलगी टक्कर के शब्द सटीक.

जसप्रीत जैज की आवाज़ में ‘आतंकी आये’ आज के दौर का गीत है. हर दौर के संगीत में उस दौर की झलक हम देख सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे ए मेरे वतन के लोगों में आप भारत चीन युद्ध के कड़वाहट को महसूस कर पायेंगें, आतंकी आये में आप आज के दौर का खौफ जी पायेंगें. अभी हाल में प्रकाशित एल्बम ‘बीट ऑफ इंडियन यूथ’ में भी एक गीत है मानव बम्ब जो इसी गीत की तरह इस दौर की घातक सच्चाईयों का बयान है, याद रहे जब ऐसे गीत रचे जाते हैं तो रचेताओं के आगे कोई पूर्व सन्दर्भ नहीं होता, जाहिर है नई ज़मीन खोदने के ये प्रयास सराहनीय हैं.

अगला गीत ‘खून खराबा तबाही’ में सूरज जगन की आवाज़ है. सूरज जगन के अब तक के अधिकतर गीत हार्ड रोक्क् किस्म के रहें हैं, पर ये कुछ अलग है. उस खूंखार आतंकी हमले के परिणामों पर कुछ स्वाभाविक सवाल हैं गीत में. पूछ रहा है वो खुदा क्या सच में है ये इंसान....इस एक पंक्ति में गीत का सार है.


रघुपति राघव राजाराम का जिक्र आते ही आपके जेहन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चेहरा उभर कर आता है और गांधी जी के जिक्र के साथ आता है अहिंसा का सिद्धांत. पर ये आतंकी इन सिद्धांतों से कोसों दूर नज़र आते हैं. इस भजन को बहुत ही सुन्दर रूप में इस्तेमाल किया है संगीतकार विशाल और सुशील खोसला ने. भजन का एक और संस्करण भी है जो उतना ही दमदार है.

फिल्म के साउंड ट्रेक को सुनकर इसे देखने की ललक और बढ़ जाती है. एल्बम में हमें रंजों गम से जैसी खूबसूरत ग़ज़ल है तो मौला मौला, आतंकी आये और रघुपति राघव जैसे कुछ अच्छे प्रयोग भी है. रेडियो प्लेबैक दे रहा है इस एल्बम को ३.९ की रेटिंग.     

यदि आप इस समीक्षा को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:

Thursday, July 17, 2008

"बटाटा वड़ा...ये समुन्दर...संगीत...तुम्हे इन छोटी छोटी चीज़ों में कितनी खुशी मिलती है..."

आवाज़ पर आज दिन है - Music video of the month का, हमारी टीम आपके लिए चुन कर लाएगी -एक गीत जो सुनने में तो कर्णप्रिय हो ही, साथ ही उसका विडियो भी एक शानदार प्रस्तुति हो, यानि कि ऐसा गीत जो पांचों इन्द्रियों को संतृप्त करें, हमारी टीम की पसंद आपको किस हद तक पसंद आएगी, ये तो आपकी टिप्पणियां ही हमें बतायेंगीं.

आज हम जिस गीत का विडियो लेकर उपस्थित हैं, वो गीत है फ़िल्म "सत्या" का, सत्या को राम गोपाल वर्मा, एक Hard Core Realistic फ़िल्म बनाना चाहते थे, तो जाहिर है, गीत संगीत के लिए, उसमें कोई स्थान नही था, पर जब फ़िल्म बन कर तैयार हुई, तो निर्माता जिद करने लेगे फ़िल्म में गीत डाले जायें ताकि फ़िल्म की लम्बाई बढ़े और Audio प्रचार भी मिल सके, अन्तता रामू जी को अपनी जिद छोडनी पड़ी, उन दिनों माचिस के गीतों से हिट हुई जोड़ी, विशाल भारद्वाज और गुलज़ार, को चुना गया इस काम के लिए, पटकथा में परिस्थियाँ निकाली गयीं और आनन फानन में ५ गीत रिकॉर्ड हुए और फिल्माए गए, फ़िल्म बेहद कामियाब रही, और संगीत ने लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई, "सपने में मिलती है" और "गोली मार भेजे में" आदि गीत अधिक चले, पर आज आपके लिए, जो गीत हम चुन कर लाये हैं इस फ़िल्म का, वो कुछ ख़ास है, इसकी हर बात निराली है, हालाँकि बहुत अधिक मशहूर नही हुआ, पर गुलज़ार साब के बेहतरीन गीतों में से एक है - यह गीत. इसमें इनकी विशिष्ट शैली खूब जम कर झलकती है, बानगी देखिये -

बादलों से काट काट कर,
कागजों पे नाम जोड़ना,
डोरियों से बाँध बाँध कर,
रात भर चाँद तोड़ना, और...
जामुनों की नर्म डाल पर,
नाखूनों से नाम खोदना.....


विशाल का संगीत, गीत को मूड को पूरी तरह से स्थापित करता है, Guitar का पीस सुनने लायक है, इस गीत से लंबे अरसे बाद Playback Singing में वापसी की, गायक भूपेंद्र ने, गुलज़ार के कोमल शब्दों को बहुत सलीके से अपनी रेशमी आवाज़ में उतारते रहें हैं भूपेंद्र, हमेशा से,और यह गीत भी अपवाद नही रहा इस मामले में.

अब बात करें चित्रांकन की. तो इसमे कोई शक नहीं कि इस मुलायम से गीत को बेहद उन्दा तरीके से परदे पर उतरा है, निर्देशक ने.

नायक एक Angry Young Man है जो मुंबई शहर में ख़ुद को बहुत सहज महसूस करता है, वह चुप चुप रहता है ख़ुद में दबा दबा, संवेदनाएं मर चुकी हैं, और कंक्रीट के शहर में तो बस जीते जाना भी जैसे, एक उपलब्धि है, मगर जब वो नायिका को देखता है तो उसे लगता है, कि वो किसी और ही दुनिया की है,और उसे दिखता है- गुनगुनाता एक आबशार.

गाने के बीच में कुछ संवाद भी है -

नायक - "तुम्हे इन छोटी छोटी चीज़ों में कितनी खुशी मिलती है,…बटाटा वड़ा, ये समुन्दर, संगीत, ये सब...."

नायिका - "हाँ... मगर यही तो जिन्दगी है..."

नायक - "मुझे पहली बार महसूस हो रहा है"


इस छोटे से संवाद में महानगरीय जीवन की तमाम पीडा झलकती है, जहाँ हर खुशी है दामन में, बस जीने के लिए वक्त नही है...लगभग पूरा गीत Outdoor Shoot हुआ है, और पार्श्व में दिख रहा मुंबई महानगर भी एक किरदार बन कर उभर कर आता है, यूँ तो दोनों कलाकारों ने बेहतरीन काम किया है, पर उर्मिला मातोंडकर अपनी नैसर्गिग सुन्दरता और उत्कृष्ट अभिनय से पूरे गीत पर छायी हुई लगती है, कैमरा के सुंदर प्रयोग ने. हर फ्रेम में जैसे जान डाल दी है.

आप भी देखिये और सुनिए ये लाजावाब गीत, और अपनी राय से हमें अवगत कराएँ -



Series - Music Video of the Month Episode 1
Song - Badalon Se...
Album/ Film - Satya
Lyrics - Gulzaar
Music - Vishal Bhardwaj
Singer - Bhupendra
Director - Ram Gopal Verma
Artists - Chakraborthy, Urmila Matondkar, and Mumbai City

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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