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मंगलवार, 23 अक्तूबर 2012

बोलती कहानियाँ - "श्री अशफाक उल्ला खां – मैं मुसलमान तुम काफिर?"

'बोलती कहानियाँ' स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में प्राख्यात साहित्यकार श्री अन्तोन चेख़व की कहानी ""कमज़ोर" का पॉडकास्ट सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं शहीद अशफ़ाक़ उल्लाह खाँ के जन्मदिन पर काकोरी काण्ड के शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि प्रस्तुत करते हुए प्राख्यात स्वाधीनता सेनानी अमर शहीद पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल की जीवनी से एक अंश "श्री अशफाक उल्ला खां – मैं मुसलमान तुम काफिर ?", अनुराग शर्मा की आवाज़ में।

मार्मिक संस्मरण "मैं मुसलमान तुम काफिर?" का टेक्स्ट "काकोरी काण्ड" पर उपलब्ध है। कहानी का कुल प्रसारण समय 3 मिनट 19 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

 यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

श्री अशफाक उल्ला खां (22 अक्टूबर 1900 - 19 दिसम्बर 1927)

“मरते बिसमिल रोशन, लहरी, अशफाक, अत्याचार से, होंगे पैदा सैकड़ों उनके रूधिर की धार से ।।”
श्री रामप्रसाद बिस्मिल (1897-19 दिसम्बर 1927)


हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी कहानी

"घर वालों के लाख मना करने पर भी अशफाक आर्य समाज जा पहुँचे और राम प्रसाद बिस्मिल से काफी देर तक गुफ्तगू करने के बाद उनकी पार्टी मातृवेदी के ऐक्टिव मेम्बर भी बन गये। यहीं से उनकी जिन्दगी का नया फलसफा शुरू हुआ। वे शायर के साथ-साथ कौम के खिदमतगार भी बन गये।"  ("श्री अशफाक उल्ला खां – मैं मुसलमान तुम काफिर?" से एक अंश)

नीचे के प्लेयर से सुनें.
यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
VBR MP3

 #35th Story, Ashfaq Ullah Khan - Musalmaan-Kafir: Pt. Ramprasad Bismil/Hindi Audio Book/2012/35. Voice: Anurag Sharma

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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