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Monday, May 9, 2011

कोई चुपके से आके सपने जगागे बोले.....कि हँसना जरूरी है जीवन को खुशगवार रंगों से भरने के लिए

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 652/2011/92

'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर कल से हमनें शुरु की है शृंखला 'गान और मुस्कान', जिसके अंतर्गत हम कुछ ऐसे गीत चुन कर लाये हैं जिनमें गायक/गायिका की हँसी सुनाई पड़ती है। दोस्तों, हँसना सेहत के लिए बहुत ही अच्छा होता है। ये न केवल हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है, बल्कि रक्त-चाप को भी काबू में रखता है। तभी तो कहा जाता है कि laughter is the best medicine। और इसीलिए आजकल जगह जगह पर लाफ़्टर-क्लब्स खुले हैं, जिनमें लोग जाकर दिल खोल कर हँसते हैं, बिना किसी कारण के ही सही। जीवन-दर्शन में विपरीत परिस्थितियों में भी हँसने और ख़ुश रहने पर ज़ोर दिया गया है, और यही भाव बहुत से फ़िल्मी गीतों में उभरकर सामने आया है। "हँसते जाना, तुम गाते जाना, ग़म में भी ख़ुशियों के दीप जलाते जाना", "गायेजा गायेजा और मुस्कुरायेजा, जब तक फ़ुर्सत दे ये ज़माना", "ग़म छुपाते रहो, मुस्कुराते रहो, ज़िंदगी गीत है, इसको गाते रहो", "हँसते हँसते कट जायें रस्ते, ज़िंदगी युंही चलती रहे, ख़ुशी मिले या ग़म, बदलेंगे ना हम, दुनिया चाहे बदलती रहे", ऐसे और भी न जाने कितने गीत हैं जिनमें हँसने/मुस्कुराने की बात छुपी है। तो चलिए इसी बात पर आप भी ज़रा मुस्कुरा दीजिए न!

दोस्तों, पिछले दिनों मुझे एक ईमेल मिला था जिसमें यह शिकायत की गई है कि 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर गीता दत्त के गानें कभी नहीं बजते और कुछ गिने चुने गायकों को ही बार बार शामिल किया जाता है। यह सच बात है दोस्तों और हम इसे स्वीकारते हैं कि पिछले कई दिनों से गीता जी की आवाज़ इस स्तंभ में नहीं बज पायी है, जिसका हमें भी अफ़सोस है। शृंखलाएँ ही कुछ इस तरह की चल पड़ीं कि गीता जी के गीत शामिल न हो सके। वैसे हम आप सब की जानकारी के लिए बता दें पिछले साल गीता जी पर दस कड़ियों की शृंखला 'गीतांजली' हमनें प्रस्तुत की है और इसके अलावा भी उनके गाये कई एकल व युगल गीत बजे हैं 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर। अभी कुछ हफ़्ते पहले भी शनिवार विशेषांक में संगीतकार बसंत प्रकाश पर केन्द्रित साक्षात्कार में उनका गाया 'अनारकली' का गीत "आ ऐ जानेवफ़ा" हमनें सुनवाया था, और आगे भी जब भी मौका लगेगा उनकी आवाज़ आप तक ज़रूर पहुँचाएंगे। इसी शृंखला की पहली कड़ी में, यानी कल ही आपनें गीता जी की आवाज़ सुनी आशा जी के साथ। और जहाँ तक कुछ गिने चुने गायकों को बार बार शामिल करने की बात है, तो कुछ गायक हुए ही हैं ऐसे कि जिनके दूसरों के मुकाबले बहुत ज़्यादा हिट गानें हैं। इसलिए ज़ाहिर है कि इनके गीत ज़्यादा बजेंगे, लेकिन यकीन मानिए 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के लिए सभी कलाकार बराबर हैं, सभी कलाकारों का और उनके योगदान का हम सम्मान करते हैं। ख़ैर, आते हैं आज के गीत पर। कल के गीत में गीता जी की हँसी का एक रूप था, लेकिन वह गीत जिसमें शामिल गीता जी की हँसी हमारे दिल को सब से ज़्यादा छू लेती है, वह है फ़िल्म 'अनुभव' का गीत "कोई चुपके से आके, सपने सुलाके, मुझको जगा के बोले, कि मैं आ रहा हूँ, कौन आये, ये मैं कैसे जानू"। संगीतकार कानू रॉय की धुन और गीतकार कपिल कुमार के बोल। इस गीत के एक अंतरे में गीता जी की हँसी सुनाई पड़ती है, और कहना ज़रूरी है कि जब १९७१ में यह फ़िल्म रिलीज़ हो रही थी, तब गीता जी अपने जीवन की कुछ बेहद कठिन दिनों से गुज़र रही थीं। ऐसे में उनके गाये इस गीत में उनकी हँसी उनके वास्तविक जीवन से बिल्कुल विपरीत, एक जैसे विरोधाभास कराती है। और इसके अगले ही साल गीता जी की मृत्यु हो गई। इस गीत को जब भी कभी हम सुनते हैं, तो गीता जी की हँसी सुन कर मन प्रसन्न होने की बजाय उनके लिए मन जैसे दर्द से भर उठता है। चुपके से किसी के आने की लालसा लिए इस गीत नें जैसे काल को ही दावत दे दी थी!



क्या आप जानते हैं...
कि गीतकार कपिल कुमार 'अनुभव' के अलावा 'आविष्कार' फ़िल्म में भी गीत लिखे थे, जिसमें भी संगीतकार कानू रॉय ही थे।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 02/शृंखला 16
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - बेहद आसान.

सवाल १ - किस नायिका पर फिलमाया गया है ये गीत - ३ अंक
सवाल २ - फिल्म के निर्देशक कौन हैं - २ अंक
सवाल ३ - गायिका का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
अमित जी चूक गए आप, अनजाना जी सही जवाब देकर ३ अंक चुरा ले गए. प्रतीक जी ने भी ठीक ६.३० पर जवाब दिया पर २ अंकों के सवाल ही हाथ आजमाया, आपको और दीप चंद्रा जी जो शायद पहली बार आये थे सही जवाब के लिए बधाई, हिन्दुस्तानी जी जरा से चूक गए आप भी.

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

Friday, December 4, 2009

मेरा दिल जो मेरा होता....गीता जी की आवाज़ और गुलज़ार के शब्द, जैसे कविता में घुल जाए अमृत

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 280

गीता दत्त जी के गाए गीतों को सुनते हुए आज हम आ पहुँचे हैं इस ख़ास लघु शृंखला 'गीतांजली' की अंतिम कड़ी पर। पराग सांकला जी के सहयोग से इस पूरे शृंखला में आप ने ना केवल गीता जी के गाए अलग अलग अभिनेत्रियों पर फ़िल्माए हुए गीत सुनें, बल्कि उन अभिनेत्रियों और उन गीतों से संबंधित तमाम जानकारियों से भी अवगत हो सके। अब तक प्रसारित सभी गीत ५० के दशक के थे, लेकिन आज इस शृंखला का समापन हो रहा है ७० के दशक के उस फ़िल्म के गीत से जिसमें गीता जी की आवाज़ आख़िरी बार सुनाई दी थी। यह गीत है १९७१ की फ़िल्म 'अनुभव' का, "मेरा दिल जो मेरा होता"। और यह गीत फ़िल्माया गया था तनुजा पर। इस फ़िल्म के गीतों पर और चर्चा आगे बढ़ाने से पहले आइए कुछ बातें तनुजा जी की हो जाए! तनुजा का जन्म बम्बई के एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता कुमारसेन समर्थ एक कवि थे और माँ शोभना समर्थ ३० और ४० के दशकों की एक मशहूर फ़िल्म अभिनेत्री। जहाँ शोभना जी ने अपनी बेटी नूतन को लौंच किया १९५० की फ़िल्म 'हमारी बेटी' में, ठीक वैसे ही उन्होने अपनी छोटी बेटी तनुजा को बतौर बाल कलाकार कास्ट किया था उसी फ़िल्म में। उसके बाद तनुजा को पढ़ाई लिखाई के लिए विदेश भेजा गया जहाँ पर उन्होने अंग्रेज़ी, फ़्रेंच और जर्मन भाषाओं की तालीम प्राप्त की। वापस आकर १९६० की फ़िल्म 'छबिली' में अपनी बड़ी बहन नूतन के साथ उन्होने अभिनय किया, जिसका निर्देशन उनकी माँ ने ही किया था। इस फ़िल्म में गीता दत्त ने नूतन के साथ अपना एक्लौता डुएट गाया था। इसके एक दशक बाद बासु भट्टाचार्य की फ़िल्म 'अनुभव' में तनुजा का किरदार बहुत सराहा गया। तनुजा ने इस फ़िल्म की शूटिंग् के लिए अपना अपार्टमेंट बासु दा को दे रखा था, जिसके बदले बासु दा ने उन्हे दी एक यादगार भूमिका।

'अनुभव' फ़िल्म के गीतों की अगर बात करें तो वह एक ऐसा दौर था जब गीता दत्त बीमार हो चुकीं थीं। उनके पति गुरु दत्त का स्वर्गवास हो चुका था और उन पर अपने तीन छोटे छोटे बच्चों को बड़ा करने और 'गुरु दत्त फ़िल्म्स' के कर्ज़ों को चुकाने की ज़िम्मीदारी आन पड़ी थी। ऐसी स्थिति में फ़िल्म 'अनुभव' उनके जीवन में एक रोशनी की तरह आई और फिर बार फिर उन्होने यह साबित किया कि अब भी उनकी आवाज़ में वही अनूठा अंदाज़ बरक़रार है जो ५० और ६० के दशकों में हुआ करती थी। 'अनुभव' के गानें बेहद लोकप्रिय हुए और आज जब भी गीता जी के गाए गीतों की कोई सी.डी रिलीज़ होती है तो इस फ़िल्म का एक गीत उसमें ज़रूर शामिल किया जाता है। गीता दत्त के गाए 'अनुभव' फ़िल्म के तीनों गानें अपने आप में मास्टरपीस हैं और इन गीतों की चर्चा घंटों तक की जा सकती है। हमें याद रखनी चाहिए कि उस समय बाक़ी सभी संगीतकार उनसे मुँह मोड़ चुके थे। इसमें कोई संदेह नहीं कि गीता जी ने इन गीतों में जान डाल दी थी और वह भी उस समय जब कि उनकी अपनी तबीयत बहुत ख़राब थी और ख़ुद अपनी ज़िंदगी की तमाम परेशानियों से झूझ रही थीं। किसी तरह का नाटकीय या बहुत ज़्यादा जज़्बाती ना होते हुए भी उन्होने इन गीतों में वो अहसासात भरे हैं कि तनुजा के किरदार के साथ पूरा पूरा न्याय हुआ है। "मुझे जाँ ना कहो मेरी जाँ" गीत के अंत में उनकी हँसी कितनी नैचरल लगती है, है न? इस फ़िल्म में संगीत था कमचर्चित संगीतकार कानु रॉय का, जिनके संगीत निर्देशन में गीता जी की ही आवाज़ में फ़िल्म 'उसकी कहानी' का गीत "आज की काली घटा" हमने आपको गीता जी की पुण्य तिथि २० जुलाई को सुनवाया था। दुर्भाग्यवश 'अनुभव' की कामयाबी उस दीपक की तरह थी जो बुझने से पहले दमक उठती है। गीता जी जल्द ही इस दुनिया-ए-फ़ानी को छोड़ कर चली गईं अपनी अनंत यात्रा पर, और पीछे छोड़ गईं वो असंख्य मीठी सुरीली यादें जिनके सहारे आज हम कभी थिरक उठते हैं, कभी मचल जाते हैं, कभी उनकी रोमांटिक कॉमेडी हमें गुदगुदा जाती हैं, तो कभी उनके भक्ति रस वाले गीतों में डूब कर हम ईश्वर को अपने ही अंदर महसूस करने लगते हैं, और कभी उनके दुख भरे गीतों को सुनते हुए दर्द से दिल भर उठता है यह सोचते हुए कि क्यों इस महान और बेमिसाल गायिका को इतने दुख ज़िंदगी ने दिए! दोस्तों, गीता जी पर केन्द्रित यह शृंखला समाप्त करते हुए आइए सुनते हैं 'अनुभव' फ़िल्म का यह गीत, और चलते चलते एक बार फिर से हम आभार व्यक्त करते हैं पराग सांकला जी का इस पूरे शृंखला के लिए गानें और तथ्य संग्रहित करने के लिए। इस शृंखला के बारे में आप अपने विचार हमें टिप्पणी के अलावा hindyugm@gmail.com की ई-मेल पते पर भी भेज सकते हैं। धन्यवाद!



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाइये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. याद रहे सबसे पहले सही जवाब देने वाले विजेता को मिलेंगें 2 अंक और 25 सही जवाबों के बाद आपको मिलेगा मौका अपनी पसंद के 5 गीतों को पेश करने का ओल्ड इस गोल्ड पर सुजॉय के साथ. देखते हैं कौन बनेगा हमारा अगला (अब तक के चार गेस्ट होस्ट बने हैं शरद तैलंग जी (दो बार), स्वप्न मंजूषा जी, पूर्वी एस जी और पराग सांकला जी)"गेस्ट होस्ट".अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं-

१. कल से शुरू होगी उस महान गीतकार/कवि पर हमारी लघु शृंखला, जिनकी आज से १० दिनों बाद पुण्यतिथि है.
२. यूं तो फिल्म का नाम ही मुख्य अभिनेत्री के स्क्रीन नाम पर था, पर इस फिल्म में बलराज सहानी की भी प्रमुख भूमिका रही.
३. एक अंतरा शुरू होता है इस शब्द से -"घायल".

पिछली पहेली का परिणाम -
पाबला जी ८ अंकों के लिए बधाई, और इंदु जी सेहत का ध्यान रखें ज़रा आप भी....

खोज - पराग सांकला
आलेख- सुजॉय चटर्जी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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