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Friday, November 19, 2010

Go Green- दुनिया और पर्यावरण बचाने की अपील- आवाज़ का एक अंतरराष्ट्रीय गीत

हिन्द-युग्म ने इंटरनेट की दुनिया में शुक्रवार की एक नई परम्परा विकसित की है, जिसके अंतर्गत शुक्रवार के दिन इंटरनेटीय जुगलबंदी से रचे गये संगीतबद्ध गीत का विश्वव्यापी प्रदर्शन होता है। हिन्द-युग्म ने संगीत की इस नई और अनूठी परम्परा को देश से निकालकर विदेश में भी स्थापित किया है। वर्ष 2009 में आवाज़ ने भारत में स्थित रूसी दूतावास के लिए भारत-रूस मित्रता के लिए एक गीत 'द्रुज्बा' बनाया था। वह हमारा पहला प्रोजेक्ट था जिसमें हमने एक से अधिक देश की संवेदनाओं को सुरबद्ध किया था।

आज हम एक ऐसा गीत लेकर आये हैं, जिसमें अंतर्निहित संवेदनाएँ, चिंताएँ और सम्भावनाएँ वैश्विक हैं। पूरी दुनिया हरियाली के भविष्य को लेकर चिंतित है। यह चिंता पर्यावरणवादियों को खाये जा रही है कि बहुत जल्द पुरी दुनिया फेफड़े भर हवा के लिए मरेगी-कटेगी। हम सब की यह जिम्मेदारी है कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को हम कम से कम एक ऐसी दुनिया दे जिसमें हवा-पानी की लड़ाई न हो। शायद इसीलए जो थोड़ा भी संजीदा है, वे 'गो ग्रीन' के साथ है।

हमने इस बार फ्यूजन के माध्यम से इसी संदेश को ताज़ा किया है। शास्त्रीय संगीत और पश्विमी संगीत के इस फ्यूजन में मिक्सिंग और साउंड-इंजीनियरिंग का काम बॉलीवुड-फेम के सन्नी सनौर ने किया है, जो संगीतकार संदीप चौठा के सहायक हैं। गाने का अंग्रेजी हिस्सा विदेशी कलाकारों द्वारा परिणित हुआ है, इसलिए यह हिन्द-युग्म का अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट है।


तो सुनिए 'दुनिया बचाने, पर्यावरण बचाने और गो ग्रीन' का संगीतबद्ध संदेश-


गीत के बोल (Song's Lyrics):

See the trees dancing for singing birds
See the waves fighting on the sea shores
Beauty is all we got from nature
Are we gonna see that here forever

Save our mother
Today together
Tell our people
we go we go we go we go we

Go green go green

We go we go we go green

Go green go green
We go we go we go green

हरियाले जंगल, पर्वत, झरने, नदिया और समुन्दर

ये सब हैं अपनी जागीरें

कुदरत ने बांटे हैं बिन मोल ही सबको देखो यारों

जीने की सारी तदबीरें,

नेमतें हजारों मिली है हमें जब

कुछ तो यारों हम भी करें अब ज़रा,

स्वर्ग से भी सुन्दर नज़र आएगी धरा,

रंग दो इसे अब हरा

Save our mother
Today together
Tell our people
we go we go we go we go we

Go green go green
We go we go we go green
Go green go green
We go we go we go green

मेकिंग ऑफ़ "Go Green" - गीत की टीम द्वारा

Juniana Lanning: When I first got a copy of "Go Green" from Bala, I knew right away from the sound of it I was going to have fun with this project! In fact, I immediately began singing it as I was doing my work around the house! Within the next couple of weeks, I was able to record an initial vocal track to accompany the music, send it to Bala for critique, and then begin working on the final version. It was a chance for me to learn to sing in a slightly different style than I usually would in my own music. I found it challenging, educating and rewarding, especially when I got the final mix back from Bala and heard it entirely in context with the song. It sounded so great- I was excited! After that, the song underwent a change that I did not expect! I knew that Bala was working with another woman (Kuhoo Gupta) on the other vocal part,which was originally sung by Unnikrishnan Kb, and I was anxious to hear how it turned out. The final version is actually quite different from the first mix I got, and really sounds beautiful! Everyone did an excellent job, and I am honored and humbled to have had a chance to be a part of this project!.

Balamurali Balu: Making music for a cause is always an additional motivation. I did a Tamil version of this song 6 months ago. Later when I was chatting with Sajeev, we casually decided about doing a Hindi version. Sajeev wrote the lyrics with a lightening speed. I have experimented mixing Indian classical and pop in this song having the experts from both the ends - Kuhoo Gupta and Juniana Lanning. Kuhoo also showed some extra interest in adding sargams and other improvisations - had fun with this process. My very good friend Subbu has played the guitar parts. Later came in Sunny Sanour, a Bollywood sound Engineer working for Sandeep Chowta. I initially contacted him for the mastering work of the song. But he was so kind and volunteered to do the mixing as well. The song portrays different moods with continuous change of instruments/arrangement throughout the song. Its really a changeling task for the sound engineer - Sunny has handled this very well.

Kuhoo Gupta: This song is different in a way, which you all will come to know after listening only :) One thing I liked about this song was the way Western and Indian music blended and the way it gave room for improvisation and the jugalbandi towards the end of the song. I thank Bala for giving me the freedom to improvise as I liked and accommodate it in the song. English and Hindi lyrics have been written very nicely. It was nice working with Bala and the team on this song.

Sajeev Sarathie: इस प्रोजेक्ट पर काम करना मेरे लिए बहुत ही खुशकिस्मती वाली बात थी. एक तो गीत में एक बहुत ज़रूरी सन्देश दिया जा रहा है दुसरे ये सही मायनों हम लोगों का पहला अंतर्राष्ट्रीय फुज़न गीत है. बाला की ये धुन किसी भी राष्ट्रीय - अंतरष्ट्रीय गीत के टक्कर की है उस पर से सन्नी भाई की मिक्सिंग ने जैसे चार चाँद लगा दिये. जुनियाना और कुहू ने मिलकर फुज़न को एक अलग ही मुकाम दे दिया है. इतने शानदार गीत का हिस्सा हूँ ये मेरे लिए फक्र की बात है।


जुनियाना लैनिंग (गायिका)
अमेरिका के शहर पोर्टलैंड ओरेजॉन में रह रही जुनियाना एक फुल-टाइम माँ और पार्ट टाइम साउंड-इंजीनियर और गायिका हैं। जब ये अपने परिवार के साथ व्यस्त नहीं होती है, तब ये पियानो, ड्रम बजा रही होती हैं, गा रही होती हैं या फिर मिक्सिंग कर रही होती हैं। हाल में ही इनका एक युगल एल्बम 'सेवन इंजन्स' रीजिल हुआ है। ये अक्सर लिखती हैं और अपने पति के साथ मिक्सिंग करती हैं। स्थानीय कलाकारों के लिए ये मिक्सिंग और मास्टरिंग का काम करती रही हैं।

सन्नी सनौर (मिक्सिंग व साउंड इंजीनयरिंग)
सन्नी बॉलीवुड में साउंड इंजीनियर हैं। संगीतकार संदीप चौठा के लिए काम करते हैं। ये नई प्रतिभाओं को उभारने में पूरा सहयोग देते हैं, जिनमें भविष्य में कुछ बड़ा करने की सम्भावना है।

बालमुरली बालू (गीत व संगीत)
दिन में रिसर्चर बालामुरली बालू रात में संगीतकार का चोला पहन लेते हैं. १५ साल की उम्र से बाला ने धुनों का श्रृंगार शुरू कर दिया था. एक ड्रमर और गायक की हैसियत से कवर बैंडों के लिए १० वर्षों तक काम करने के बाद उन्हें महसूस हुआ उनकी प्रतिभा का सही अर्थ मूल गीतों को रचने में है. बाला मानते हैं कि उनकी रचनात्मकता और कुछ नया ईजाद करने की उनकी क्षमता ही उन्हें भीड़ से अलग साबित करती है. ये महत्वकांक्षी संगीतकार इन दिनों एक पॉप अल्बम "मद्रासी जेनर" पर काम रहा है, जिसके इसी वर्ष बाजार में आने की सम्भावना है।

कुहू गुप्ता (गायिका)
पुणे में रहने वाली कुहू गुप्ता पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। गायकी इनका जज्बा है। इन्होने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की है । इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई गायन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लिया है और इनाम जीते हैं। जी टीवी के प्रचलित कार्यक्रम 'सारेगामा' में भी 2 बार भाग लिया है। जहाँ तक गायकी का सवाल है तो इन्होंने व्यवसायिक प्रोजेक्ट भी किये हैं और इनका एल्बम "कुहू कुहू बोले कोयलिया" मार्केट में आ चुका है । इंटरनेट पर नये संगीत में रुचि रखने वाले श्रोताओं के बीच कुहू काफी चर्चित हैं। कुहू ने हिन्द-युग्म के ताजातरीन एल्बम 'काव्यनाद' में महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' को गाया है, जो इस एल्बम का सबसे अधिक सराहा गया गीत है।

सजीव सारथी (गीतकार)
हिन्द-युग्म के 'आवाज़' मंच के प्रधान संपादक सजीव सारथी हिन्द-युग्म के वरिष्ठतम गीतकार हैं। हिन्द-युग्म पर इंटरनेटीय जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीत निर्माण का बीज सजीव ने ही डाला है, जो इन्हीं के बागवानी में लगातार फल-फूल रहा है। कविहृदयी सजीव की कविताएँ हिन्द-युग्म के बहुचर्चित कविता-संग्रह 'सम्भावना डॉट कॉम' में संकलित है। सजीव के निर्देशन में ही हिन्द-युग्म ने 3 फरवरी 2008 को अपना पहला संगीतमय एल्बम 'पहला सुर' ज़ारी किया जिसमें 6 गीत सजीव सारथी द्वारा लिखित थे। पूरी प्रोफाइल यहाँ देखें।

Song - Go Green
Singers: Juniana Lanning & Kuhoo Gupta
Guitars: Subramanian Krish
Lyrics: Sajeev Sarathie & Balamurali Balu
Mixing & Mastering: Sunny @ Static Wave
Music: Balamurali Balu


Song # 22, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

Friday, December 12, 2008

खिलखिलाती याद, मुस्कुराती याद, बिगड़ी हुई सी वो चिढ़ाती याद

दूसरे सत्र के २४वें गीत का विश्वव्यापी उद्घाटन


हिन्द-युग्म के १०वें गीत 'खुशमिज़ाज मिट्टी' के बोलों ने आवाज़ के श्रोताओं पर सर चढ़कर बोला। यह ज़ादू किया था गौरव सोलंकी के गीत ने। गौरव सोलंकी जो हिन्द-युग्म के दूसरे यूनिकवि और पाठकों के सबसे प्रिय कवि भी हैं। आज हम जो २४वाँ गीत 'चाँद का आँगन' लेकर आये हैं, उसके बोल भी गौरव ने लिखे हैं।

गीत को स्वरबद्ध किया है ग्वालियर निवासी कुमार आदित्य विक्रम ने। कुमार आदित्य विक्रम की आवाज़ में हमने इन्हीं के कवि पिता डॉ॰ महेन्द्र भटनागर की कविता का पॉडकास्ट प्रसारित किया था, तब ही आवाज़ की टीम ने यह जान लिया था कि इस संगीतकार-गायक के पास कविताओं को कम्पोज़ करने का हुनर है। इसलिए हमने सबसे पहले हमने इन्हें गौरव सोलंकी की कविता 'चाँद कला आँगन' कम्पोज करने के लिए दी। आइए सुनते हैं यह गीत-




कुमार आदित्य
गौरव सोलंकी
When Hind-Yugm released its this session 10th song 'Khushmizaz Mitti' , the lyrics of this song had rocked. This magic was of Hind-Yugm's famous writer and poet Gaurav Solanki's creation. Now this time, as our 24th song, we are releasing a fresh combo which lyrics are written by Gauarv Solanki again. By this composition, we are introducing a composer-cum-singer Gwaliaor borned artist Kumar Aditya Vikram whose first composition 'Geet Mein Tumane Sajaya' was very much appreciated by Aawaaz's team. Listen and give your feedback..



गीत के बोल-

चाँद का आँगन, चरखे की बुढ़िया
चाँदी की रातें, चन्दन की गुड़िया
मुस्काते सपने, खिलती सी निंदिया
तेरी वे बातें, खुशियों की पुड़िया
याद आती है, दिल जलाती है
बहते हैं आँसू, छोड़ जाती है

खिलखिलाती याद, मुस्कुराती याद
बिगड़ी हुई सी वो चिढ़ाती याद,
गूँजती रहती बिन बुलाई याद
किसने है भेजी, क्यों है आई याद


तेरी रातों की वो दीवाली याद
सर्द शामों की बर्फ़ीली याद
तेरे बालों की घुंघराली याद
चाय के कप की भाप वाली याद
याद आती है, दिल जलाती है
बहते हैं आँसू, छोड़ जाती है

खिलखिलाती याद, मुस्कुराती याद
बिगड़ी हुई सी वो चिढ़ाती याद,
उलझी हुई सी भटकी हुई याद
किसने है भेजी, क्यों है आई याद

तेरे हाथों का अमिया का पेड़
तेरे पैरों की खेत की वो मेड़
उस कड़वी सी कॉफ़ी वाली याद
वो चवन्नी की टॉफ़ी वाली याद
याद आती है, दिल जलाती है
बहते हैं आँसू, छोड़ जाती है

खिलखिलाती याद, मुस्कुराती याद
बिगड़ी हुई सी वो चिढ़ाती याद,
तेरे आँगन की वो तिपाई याद
किसने है भेजी, क्यों है आई याद

गीत पसंद आने पर इसे अपने मित्रों तक पहुँचायें। अपने ब्लॉग/वेबसाइट/ऑरकुट स्क्रैपबुक/माईस्पैस/फेसबुक में 'चाँद का आँगन' का पोस्टर लगाने के लिए पसंदीदा पोस्टर का कोड कॉपी करें।



SONG # 24, SEASON # 02, CHAND KA ANGAN, OPENED ON AWAAZ, HIND YUGM.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.

Friday, November 7, 2008

दिल को बहलाना है, इस तरह या उस तरह...

इश्क हो या दुनिया की चाहत, अक्सर वो नसीब नही होता जिसको पाने की आरजू होती है. जिंदगी चलती रहती है, बहती रहती है. पर कहीं न कहीं दिल के किसी कोने में एक खला बनी रहती है. कहीं कुछ रहता है जो कचोटता है तन्हाईयों में. कुछ कमरे ऐसे भी होते हैं जहनो दिल में जो किसी के जाने के बाद भी हमेशा खाली रहते हैं, उन्हें कोई भर नही पाता. कुछ ऐसे ही जज़्बात लिए है इस शुक्रवार का ये नया गीत. जिसके रचनाकार, संगीतकार और गायक हैं सुदीप यशराज. नए सत्र में उनका ये दूसरा गीत है, तो सुनतें हैं सुदीप की आवाज़ में "उड़ता परिंदा". अपनी राय देकर इस उभरते हुए बेहद प्रतिभाशाली संगीतकार गायक का मार्गदर्शन अवश्य करें -

गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लयेर पर क्लिक करें -




After his first song "beintehaa pyar" Sudeep Yashraj is here again in this new season with a brand new song "udta parinda". Penned and composed by Sudeep himself, this song has a retro feel to it which come across with his unique style of singing. So guys, lets enjoy this brand new song and let us know what you feel about it.

To listen to the song please click on the player below -



गीत के बोल - Lyrics

उड़ता परिंदा, उड़ते उड़ते थक के कहीं सो जाएगा,
शायद वो बैचैन हो गई, ख़त को कौन पहुँचायेगा...

हमने खायी है कसम
भूलेंगे न हम तेरा नाम
आके ही सुनायेंगें,
दिल की हर एक दास्तां,
देख के तुमको रंग बदलता क्यों है,
काला सा बादल, रंगों में ढलता क्यों है,
कोई और नही, ये मैं हूँ सनम,
छूने को तुझे लिया बूँदों का जनम,
बूँदें ही सजायेंगीं मांग तेरी दिलबर,
चूम के दे जायेंगीं, नाम मेरा लबों पर,

ये जो हैं, बूँदें ओस की,
क्या है इनसे तुम्हारी दोस्ती,
जब भी नाम लेता हूँ, तुम्हारी महक आए,
अरे चल रे पगले चल, तू क्यों दिल को बहलाए,
दिल को बहलाना है, इस तरह या उस तरह,
जिंदगी फ़साना है, इस तरह या उस तरह,
तेरे मेरे बीच में जो भी आए दीवार,
उनको मैं तोड़ दूँगा,
अनचाहे आए कोई तूफ़ान हज़ार,
उनको मैं मोड़ दूँगा,
और दस्तक दे कोई...
चारों पहर दरवाजे पे....खोलो...
खोलो ...खोलो....खोलो...

दूसरे सत्र के १९ वें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

SONG # 19, SEASON # 02, "UDTA PARINDAA" OPENED ON AWAAZ ON 07-11-2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion

Friday, September 26, 2008

सच बोलता है मुंह पर, चाहे लगे बुरा सा

दूसरे सत्र के तेरहवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

नए गीतों को प्रस्तुत करने के इस चलन में अब तक ऐसा पहली बार हुआ है कि कोई कलाकार अपने पहले गीत के ओपन होने से पहले ही एक जाना माना नाम बन जाए कुछ इस कदर कि आवाज़ के स्थायी श्रोताओं को लगातार ये जानने की इच्छा रही कि अपने संगीत और आवाज़ से उन पर जादू करने वाले रफ़ीक शेख का गीत कब आ रहा है. तो दोस्तों आज इंतज़ार खत्म हुआ. आ गए हैं रफ़ीक शेख अपनी पहली प्रवष्टि के साथ आवाज़ के इस महा आयोजन में. साथ में लाये हैं एक नए ग़ज़लकार अजीम नवाज़ राही को, रिकॉर्डिंग आदि में मदद रहा अविनाश जी का जो रफ़ीक जी के मित्र हैं. दोस्तों हमें यकीन है रफ़ीक शेख की जादू भरी आवाज़ में इस खूबसूरत ग़ज़ल का जादू आप पर ऐसा चलेगा कि आप कई हफ्तों, महीनों तक इसे गुनगुनाने पर मजबूर हो जायेंगे. तो मुलाहजा फरमायें युग्म की नयी पेशकश,ये ताज़ा तरीन ग़ज़ल - " सच बोलता है ....."

ग़ज़ल को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -





After creating a lot of buzz by his rendition of Ahmed Faraz sahab's ghazals (as a musical tribute to the legend) singer/composer Rafique Sheikh, of Pune, Maharashtra is here with his first entry for this season. This ghazal "sach bolta hai" is penned by another new comer of this awaaz team Azeem Nawaaz Rahi, recording help has been done by another online friend of Rafique, Avinaash. So guys, just enjoy this beautiful ghazal today and please don't forget to spare a moment to give your valuable comments.

To listen to the ghazal, please click on the player below-




ग़ज़ल के बोल -

सच बोलता है मुंह पर, चाहे लगे बुरा सा,
किरदार उसका हमको लगता है आईना सा.

कहने को चंद लम्हें था साथ वो सफर में,
यूँ लग रहा था जैसे बरसों का है शनासा.

कलियाँ अगर न होती लफ्जों की मुट्ठियों में,
होता न जिंदगी का चेहरा कभी नया सा.

"राही" मुझे तसल्ली देते हैं मेरे आंसू,
जी हो गया है हल्का रोया जो मैं जरा सा.

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SONG # 13, SEASON # 02, "SACH BOLTA HAI..." OPENED ON AWAAZ HIND YUGM 26/09/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion


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Wednesday, September 17, 2008

जैसे ही देखा मोहिंदर कुमार जी का गीत, लगा कि धुन मिल गयी...

हिंद युग्म की नयी खोज हैं, संगीतकार और गायक कृष्ण राज कुमार, जो हैं आवाज़ पर इस हफ्ते के उभरते सितारे. २२ वर्षीय कृष्ण राज दक्षिण भारत के कोच्ची केरल से हैं, अभी अभी अपनी पढ़ाई पूरी की है इन्होने. संगीत का शौक बचपन से है और पिछले १४ सालों से कर्णाटक संगीत में दीक्षा ले रहे हैं. आवाज़ पर इनका पहला स्वरबद्ध किया और गाया हुआ गीत "राहतें सारी" इस शुक्रवार को ओपन हुआ था और बेहद सराहा भी गया, जिससे कृष्ण कुमार के हौसले यकीनन बढ़े हैं और हमारे श्रोता आने वाले दिनों में उनसे और बेहतर गीतों की उम्मीद रख सकते हैं. दरअसल हर गीत की तरह इस गीत की भी एक कहानी है. आईये जानते हैं ख़ुद कृष्ण कुमार से की कैसे बना ये सुमधुर गीत. (कृष्ण हिंद युग्म से हिन्दी टंकण अभी सीख रहे हैं, पर यहाँ प्रस्तुत उनका यह अनुभव अभी मूल रूप में ही आपके सामने है)

First of all I thank God for blessing me, second I thank sajeev ji for giving me an opportunity to showcase my talent and last but not the least I thank Mohinder kumar ji for providing such a wonderful lyrics without which I wouldn’t be able to compose the song.


My name is Krishna Raj Kumar. I am from cochin, kerala. I just completed my Btech. Basically I am a singer and I have been learning classical music for 14 years. My interest in composing music started when I was in my 10th. From there onwards I was more interested in composing music.

My introduction to hindyugm was made by Niran kumar of "pehla sur" fame. It was through him that I got to meet Sajeev sarathie ji. First when I visited hindyugm site I saw an ad calling for singers. I thought why not compose a song and also sing the song in my voice. So the next thing that came in my mind was what to compose??? While browsing the site suddenly I saw the poetry section and I browsed through all the poems in that section. To be frank all were poems!!!!! I mean I knew I was in the poetry section but to me it was like oh!! I don’t think I can compose tune for poems….But then I saw mohinder kumar ji’s "Raahate saari aagayi…" Hmmmm…..ok I think I got a tune…then there was no looking back actually….i composed the first stanza and then I send it to sajeev ji…..He liked the tune and my voice. He said to compose the whole song and also suggested me to sing the whole song in one flow as it’s a poem it would be better to sing it in one flow. He also suggested that let the last stanza “dhosto ne nibha di dushmani pyaar se” be repeated.. I did the composing according to what he suggested. It took me sometime to compose the song and also the orchestration as all the work was done by me.And the song was born…

I thank all of you for taking time in listening to this song and also thank all of you for posting your valuable comments. I have your valuable comments and I will improve on it the next time.

Also thank mohinder kumar ji for his beautiful lyrics and once again Sajeev ji and the whole hindyugm team for putting up a blog where people like me are able to showcase their talents. It’s a wonderful thing because we are able to find hidden talents.

All the best hindyugm team.

God bless you!!!!

-Krishna Raj Kumar

दोस्तों, तो ये थे संगीत की दुनिया के नए सुरबाज़, कृष्ण राज कुमार. आईये एक फ़िर आनंद लें उनके इस पहले पहले गीत का और इस प्रतिभावान गायक/संगीतकार को अपना प्रोत्साहन देकर हौंसलाअफजाई करें.
(गीत को सुनने के लिए नीचे के पोस्टर पर क्लिक करें)



आप भी इसका इस्तेमाल करें

Friday, September 12, 2008

दोस्तों ने निभा दी दुश्मनी प्यार से...

दूसरे सत्र के ग्यारहवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

ग्यारहवें गीत के साथ हम दुनिया के सामने ला रहे हैं एक और नौजवान संगीतकार कृष्ण राज कुमार को, जो मात्र २२ वर्ष के हैं, और जिन्होंने अभी-अभी अपने B.Tech की पढ़ाई पूरी की है, पिछले १४ सालों से कर्नाटक गायन की दीक्षा ले रहे हैं. कृष्ण का परिचय हिंद युग्म से, "पहला सुर" के संगीतकार निरन कुमार ने कराया, कृष्ण कुमार जिस दिन हिंद युग्म के कविता पृष्ट पर आए, उसी दिन युग्म के वरिष्ट कवि मोहिंदर कुमार की ताजी कविता प्रकाशित हुई थी, कृष्ण ने उसी कविता / गीत को स्वरबद्ध करने का हमसे आग्रह किया.

लगभग डेढ़ महीने तक इस पर काम करने के बाद उन्होंने इस गीत को मुक्कमल कर अपनी आवाज़ में हमें भेजा, जिसे हम आज आपके समक्ष लेकर हाज़िर हुए हैं, हम चाहेंगे कि आप इस नए, प्रतिभावान संगीतकार/गायक को अपना प्रोत्साहन और मार्गदर्शन अवश्य दें.

गीत को सुनने के लिए प्लेयर पर क्लिक करें -



With this new song, we are introducing another new singer / composer from Cochi, Krishna Raj Kumar, lyrics are provided by another Vattern poet from Hind Yugm, Mohinder Kumar, the song is more like a poetry about relationships and the hard facts of life. We hope you will like this presentation, give your guidance to this young composer, so that he can better himself for the future.

Click on the player to listen to this brand new song



Lyrics - गीत के बोल

राहतें सारी आ गई हिस्से में उनके
और उजाले दामन के सितारे हो गये
चांद मेरा बादलों में खो गया है
कौन जाने इस घटा की क्या वजह है

आखिरी छोर तक जायेगा साथ मेरे
और फ़िर वो साया भी मेरा न होगा
ख्वाबों के लिये हैं ये सातों आसमान
हकीकत के लिये पथरीली सतह है


राहों से मंजिलों का पता पूछता है
बीच राह में गुमराह राही हो गया है
कौन जाने गुजरे पडाव मंजिलें हों
भूलना ही हार को असली फ़तह है

दोस्तों ने निभा दी दुश्मनी प्यार से
सोचने को अब बाकी क्या बचा है
राह शोलों पर भी चल कर कट जायेगी
इस दिल मे जख्मों के लिये जगह है...

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SONG # 11, SEASON # 02, "RAHATEN SAARI" OPENED ON 12/09/2008, ON AWAAZ, HIND YUGM.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion


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Friday, August 22, 2008

चले जाना कि रात अभी बाकी है...

दूसरे सत्र के आठवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज

आठवीं पेशकश के रूप में हाज़िर है सत्र की दूसरी ग़ज़ल, "पहला सुर" में "ये ज़रूरी नही" ग़ज़ल गाकर और कविताओं का अपना स्वर देकर, रुपेश ऋषि, पहले ही एक जाना माना नाम बन चुके हैं युग्म के श्रोताओं के लिए. शायरा हैं एक बार फ़िर युग्म में बेहद सक्रिय शिवानी सिंह.

शिवानी मानती हैं, कि उनकी अपनी ग़ज़लों में ये ग़ज़ल उन्हें विशेषकर बहुत पसंद हैं, वहीँ रुपेश का भी कहना है -"शिवानी जी की ये ग़ज़ल मेरे लिए भी बहुत मायने रखती थी ,क्योंकि ये उनकी पसंदीदा ग़ज़ल थी और वो चाहती थी कि ये ग़ज़ल बहुत इत्मीनान के साथ गायी जाए, मुझे लगता है कि कुछ हद तक मैं, उनकी उम्मीद पर खरा उतर पाया हूँ, बाकी तो सुनने वाले ही बेहतर बता पाएंगे".

तो आनंद लें इस ग़ज़ल का और अपने विचारों से हमें अवगत करायें.

इस ताज़ी ग़ज़ल को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें-




The team of "ye zaroori nahi" from "pahla sur" is back again with a bang. Rupesh Rishi is once again excellent here with his rendering as well as composition, While Shivani Singh's lyrical expressions give it a romantic feel, so friends, just enjoy this beautiful ghazal here and let us know what you feel about it, feel free to give your valuable suggestions as your comments.

To listen to this brand new ghazal, click on the player below-



ग़ज़ल के बोल -


चले जाना कि रात अभी बाकी है,
ठहर जाना हर बात अभी बाकी है.

जिंदगी मेरी जो बीती तो युहीं बीत गयी,

जिंदगी मेरी जो बीती तो युहीं बीत गयी,
मगर पल दो पल का, साथ अभी बाकी है.
ठहर जाना....

कैसे भुलाऊं मैं उन चंद बातों को,
बेताब दिन वो मेरे बैचैन रातों को....उन चंद बातों को...

बीते दिनों की, याद बहुत आती है.
ठहर जाना...

मेरे ख्यालों में तुम रोज आते हो,
पलकों से मेरी क्यों नींदें चुराते हो,

तुम्हे भी मेरी याद कभी आती है...
ठहर जाना....


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SONG # 08, SEASON # 02, "CHALE JAANA", OPENED ON 22/08/2008, AWAAZ HIND YUGM.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.

Friday, August 8, 2008

वो पीपल का पत्ता, है अब भी अकेला...

दूसरे सत्र के छठे गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

आज हम अपने संगीत प्रेमियों के समक्ष लेकर आए हैं, एक और ताज़ी आवाज़, सुदीप यशराज की, ये युग्म के संगीत इतिहास में दूसरी बार है, जब किसी भी गीत के समस्त पक्ष को एक ही कलाकार ने संभाला है. सुदीप ने यह गीत ख़ुद ही लिखा, स्वरबद्ध किया और गाया है, उनका संगीत ताजगी भरा है और हमें यकीं हैं कि नयेपन की कमी जो हमारे कुछ श्रोताओं को महसूस हुई है अब तक, वो इस गीत के साथ दूर हो जायेगी. तो सुनें ये ताज़ा गीत, और अपने विचारों से सुदीप का प्रोत्साहन/मार्गदर्शन करें.

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This Friday, we are introducing another very talented upcoming composer and singer, Sudeep Yashraaj to you. Sudeep is here with a new genre of sound, this song has a fresh new feel to it. With a very new way of writing and singing we are sure that he will steal your heart with his "beinteha pyar...". So enjoy this brand new song and do leave your comments as well.

To listen to the song, please click on the player



Lyrics:

Vo o o o o, Beinteha pyar
Vo o o o o, Beinteha pyar
Dooba hua hun, barso se, teri aankho mein, hoooo

Sagar meri zindagi, zindagi hai
Mainey boond boond bhari hai apney aansu se

Meri majboori hai jo ab tak lab hai siley
Aur uspey ek tum jo ab tak chup ho khadey
Kya yeh zaarori hai, ke main izhar karun
Jaana tum samajh bhi jao mai tumsey pyar karun

Vo o o o o, Beinteha pyar
Vo o o o o, Beinteha pyar

Who bachpan ki galtiyaan, Tera woh rona
Mere dil ki dhadkan kaa har aansu pe khona
Woh pipal ke ped ke niche bhooke hi sona

Woh pipal ka patta hai ab bhi akela
Woh toofaan si baarish, Akeley hi jhela
Yehi zindagi hai, akele hi jeena, akele hi jaana

Wo o o o o o o
Vo o o o o, Beinteha pyar
Vo o o o o, Beinteha pyar

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SONG # 06, SEASON # 02, "Beintehaa pyaar...",OPENED ON 08/08/2008 ON AWAAZ,HIND YUGM.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion

Friday, August 1, 2008

एक चांदनी का झरना बन जाती मैं...

दूसरे सत्र के पांचवे गीत का विश्व व्यापी उदघाटन आज.

दोस्तो,
प्रस्तुत है पांचवा गीत, संगीतकार हैं एक बार फ़िर ऋषि एस, जिनका भी संयोगवश ये पांचवा ही गीत है युग्म के संगीत संग्रह के लिए, साथ में हैं उनके जोडीदार गीतकार सजीव सारथी. ये नए सत्र का पहला फिमेल सोलो गीत है और आवाज़ है मानसी पिम्पले की, जो इससे पहले "बढ़े चलो" में अपनी उपस्थिति बखूबी दर्ज करा चुकी है. तो सुनें और बताएं कैसा लगा आपको ये ताज़ा गीत.

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Friends, here we bring another fresh song made through the internet jamming, like many of our earlier songs. This is the first female solo song for this new season, rendered by Mansi Pimpley, composed by Rishi.S and written by Sajeev Sarathie. "Mein nadi..".is essentially a "feel good" song. A song that is intended to make the listener feel natural and playful about life. It reminds people to be happy in life. It reflects this mood through the character of a playful girl. So guys listen to this brand new song and have your comments as well.

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गीत के बोल - ( Lyrics )

मैं नदी , मैं पवन, हूँ धरा या गगन,
मैं बहूँ या उडूं, बेखुदी में मगन,
मैं यहाँ , मैं वहाँ, मुसाफिर मेरा मन...
मैं नदी.....

शाखों से झांकूं,
किरणों की मानिंद,
भोर की धुन में बाजूं,
बांसुरी सी,
मोरनी बन के नाचूं,
कोयल की तान में गाऊं,
देख बदरी मैं झूमूं,
बावरी सी,
महकी महकी,
है सारी गलियाँ,
छू लूँ मैं तो,
खिलती है कलियाँ,

खोले झरोखे अम्बर,
तारों के सारे मंज़र,
बस जाता चन्दा भी यूं,
मेरी आँखों के अंदर,
एक चांदनी का झरना
बन जाती मैं,
मुझसे बातें करती हैं रातें,
देकर सपनों की सौगातें,



चित्र (बायें से दायें) - ऋषि एस, सजीव सारथी, मानसी पिम्पले

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SONG # 05, SEASON # 02, "MAIN NADI...", OPENED ON AWAAZ, HINDYUGM ON 01/08/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.

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