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Thursday, June 4, 2009

ओल्ड इज़ गोल्ड के शुरूआती 100 गीत एक साथ

दोस्तो,

देखते ही देखते ही 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के नियमित स्तम्भ ने 3 जून 2009 को अपना पहला शतक जड़ दिया। इसमें सबसे अधिक सहयोग हमारे श्रोताओं का रहा जिन्होंने रोज़ इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज़ की, जिससे इस कार्यक्रम रूपी स्तम्भ के होस्ट सुजॉय चटर्जी को हर गीत के लिए लगातार खोजबीन करने की प्रेरणा मिली। हम अपने सभी श्रोताओं का धन्यवाद करते हैं।

ग़ौरतलब है कि 20 फरवरी 2009 से हिन्द-युग्म के आवाज़ मंच पर प्रतिशाम 6 बजे से 7 बजे के मध्य पुराने गीतों पर एक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें उस गीत से संबंधित सभी जानकारियों को समाहित किया जाता है, जिसे जान लेने की उत्कंठा हर गीतप्रेमी को होती है। साथ ही साथ इस कार्यक्रम में अगले एपीसोड के गीत से संबंधित एक पहेली भी पूछी जाती है।

हमने सोचा कि क्यों ना 'ओल्ड इज़ गोल्ड' शृंखला के सभी 100 एपीसोडों को एक जगह संजोकर रख लें ताकि हमारे श्रोता जब मन हो, तब अपनी पसंद के गीत सुन पायें और उस गीत के संबंध में सुजॉय द्वारा दी गई जानकारियोंको पढ़ पायें। हमने 100 गीतों को 10 भागों में बाँटा है। साथ ही साथ सभी 100 गीतों की सूची भी बनाई है।

बायें भाग में गीतों की सूची है जिसपर क्लिक करके उस गीत से संबंधित विशेष कार्यक्रम को पढ़ा और सुना जा सकता है।

दायें भाग के प्लेयर पर क्लिक करके सभी 10 गीतों को एक साथ सुना जा सकता है। यदि आपको कोई विशेष गीत सुनना हो तो प्लेलिस्ट में उस संबंधित गीत पर क्लिक करें। इस प्लेयर के कंट्रोल एक आम ऑडियो प्लेयर के कंट्रोल की ही तरह हैं।

'ओल्ड इज़ गोल्ड' के नये अंकों को पढ़ने-सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें।

यदि आपको पुराने गीत बेहद पसंद हैं तो अपने ब्लॉग/वेबसाइट पर, ऑरकुट इत्यादि सोशल नेटवर्किंग प्रोफाइल पर निम्न में से कोई पोस्टर लगायें और पुराने गानों की महक दूर-दूर तक फैलाने में हमारी मदद करें। पोस्टर लगाने के लिए पोस्टर के नीचे के बॉक्स से एचटीएमएम कोड कॉपी करें।



ओल्ड इज़ गोल्ड (1-10)
1. आपको प्यार छुपाने की बुरी आदत है
2. अरे दिल है तेरे पंजे में तो क्या हुआ
3. डम डम डिगा डिगा...मौसम भीगा भीगा
4. माई री मैं कासे कहूँ
5. मेरी दुनिया है माँ तेरे आंचल में
6. रुलाके गया सपना मेरा
7. शोख नज़र की बिजिलियाँ.
8. टिम टिम टिम तारों के दीप जले
9. वो हमसे चुप हैं...हम उनसे चुप हैं
10. यार बादशाह...यार दिलरुबा...


ओल्ड इज़ गोल्ड (11-20)
11. खुद ढूंढ रही है शम्मा जिसे
12. ऐ दिल मुझे बता दे...
13. जब से मिली तोसे अखियाँ जियरा डोले रे
14. चन्दन सा बदन...चंचल चितवन
15. गुडिया हमसे रूठी रहोगी...
16. तुम क्या जानो तुम्हारी याद में हम कितना रोये
17. मैं हूँ झुम झुम झुम झुम झुमरूं
18. मेरी जान तुम पे सदके...
19. मोहे भूल गए सांवरिया...
20. आओ रे आओ खेलो होली बिरज में


ओल्ड इज़ गोल्ड (21-30)
21. जब जब फूल खिले तुझे याद किया हमने
22. जो हमने दास्तां अपनी सुनाई
23. भूलने वाले याद न आ..
24. चुप चुप खड़े हो ज़रूर कोई बात है.
25. एक मंजिल राही दो, फिर प्यार न कैसे हो
26. हम बेखुदी में तुमको पुकारे चले गए.
27. बदले बदले मेरे सरकार नज़र आते हैं.
28. ईन मीना डीका...रम पम पोस
29. जा जा रे जा बालमवा....
30. पिया पिया न लागे मोरा जिया...आजा चोरी चोरी.


ओल्ड इज़ गोल्ड (31-40)
31. सुन मेरे बन्धू रे, सुन मेरे मितवा.
32. अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं
33. तेरे सुर और मेरे गीत...
34. अरे तौबा ये तेरी अदा...
35. आयो कहाँ से घनश्याम...
36. भीगी भीगी फज़ा, छन छन छनके जिया
37. आंसू समझ के क्यों मुझे आँख से
38. आजा रे प्यार पुकारे, नैना तो रो रो हारे
39. एक चतुर नार करके शृंगार
40. है इसी में प्यार की आबरू...


ओल्ड इज़ गोल्ड (41-50)
41. जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम...
42. कर ले प्यार कर ले के दिन हैं यही
43. निगाहें मिलाने को जी चाहता है
44. मुखड़े पे गेसू आ गए आधे इधर आधे उधर
45. रात के हमसफ़र थक के घर को चले
46. जो चला गया उसे भूल जा.
47. आज की ताजा खबर...
48. ठंडी हवा काली घटा आ ही गयी झूम के
49. तुम बिन जीवन कैसे बीता पूछो मेरे दिल से
50. ग़म दिये मुस्तक़िल कितना नाज़ुक है दिल


ओल्ड इज़ गोल्ड (51-60)
51. ये नयन डरे डरे...
52. आजा रे अब मेरा दिल पुकारा.
53. आंसू भरी है ये जीवन की राहें..
54. बेईमान बालमा मान भी जा..
55. दो दिल टूटे दो दिल हारे..
56. हम जब सिमट के आपकी बाहों में आ गए
57. ख्यालों में किसी के इस तरह आया नहीं करते
58. लागी नाही छूटे रामा...
59. सन्डे के सन्डे...
60. तू गंगा की मौज, मैं जमुना का धारा.


ओल्ड इज़ गोल्ड (61-70)
61. चल री सजनी अब क्या सोचें.
62. चंदा मामा मेरे द्वार आना.
63. दुनिया करे सवाल तो हम क्या जवाब दे
64. जाने कहाँ मेरा जिगर गया जी.
65. जवानियाँ ये मस्त मस्त बिन पिए
66. लारा लप्पा लारा लप्पा..
67. मेरा सुंदर सपना बीत गया..
68. तू छुपी है कहाँ, मैं तड़पता यहाँ.
69. झिर झिर झिर झिर बदरवा बरसे...
70. ओ दिलदार बोलो एक बार, क्या मेरा प्यार पसंद है तुम्हें


ओल्ड इज़ गोल्ड (71-80)
71. तुम्हीं मेरे मंदिर तुम्हीं मेरी पूजा.
72. चोरी चोरी जो तुमसे मिली तो लोग क्या कहेंगे
73. देखो कसम से...कसम से, कहते हैं तुमसे हाँ
74. गुमसुम सा ये जहाँ....ये रात ये समां.
75. आप आये तो ख़्याल-ए-दिले नाशाद आया
76. जाऊं कहाँ बता ये दिल...
77. मेरी नींदों में तुम..
78. भूल जा सपने सुहाने भूल जा
79. मेरे महबूब क़यामत होगी..
80. जाओ रे जोगी तुम जाओ रे..


ओल्ड इज़ गोल्ड (81-90)
81. बेकरार करके हमें यूँ न जाइये
82. मेरा दिल ये पुकारे आजा.
83. आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम
84. अखियाँ भूल गयी हैं सोना.
85. सागर मिले कौन से जल में.
86. अपनी आँखों में बसा कर कोई इकरार करूँ
87. बूझ मेरा क्या नाव रे...
88. सखी री मेरा मन उलझे तन डोले
89. देखती ही रहो आज दर्पण ना तुम
90. दिल आज शायर है ग़म आज नग़मा है


ओल्ड इज़ गोल्ड (91-100)
91. हरियाला सावन ढोल बजाता आया.
92. तारों की जुबाँ पर है मोहब्बत की कहानी
93. न ये चाँद होगा न तारे रहेंगें.
94. जिसे तू कबूल कर ले वो अदा कहाँ से लाऊं
95. ना ना ना रे ना ना ...हाथ ना लगाना
96. चरणदास को जो पीने की आदत न होती
97. तेरे ख्यालों में हम...तेरी ही बाहों में हम
98. जवाँ है मोहब्बत हसीं है ज़माना
99. ये कैसी अजब दास्ताँ हो गयी है
100. प्यार किया तो डरना क्या...

Friday, September 26, 2008

बेकरार कर के हमें यूँ न जाइए, आप को हमारी कसम लौट आइए

हेमंत कुमार की 19वीं बरसी पर अनिता कुमार की ख़ास पेशकश


आज 26 सितम्बर, हेमंत दा की 19वीं पुण्यतिथि। बचपन की यादों के झरोंखों से उनकी सुरीली मदमाती आवाज जहन में आ-आ कर दस्तक दे रही है। पचासवें दशक के किस बच्चे ने 'गंगा-जमुना' फ़िल्म का उनका गाया ये गीत कभी न कभी न गाया होगा!
"इंसाफ़ की डगर पे बच्चों दिखाओ चल के, ये देश है तुम्हारा"।

हेमंत कुमार
हेमंत कुमार मुखोपाध्य जिन्हें हम हेमंत दा के नाम से जानते हैं, 16 जून 1920 को वाराणसी के साधारण से परिवार में जन्में लेकिन बचपन में ही बंगाल में स्थानातरित हो लिए। उनके बड़े भाई कहानीकार थे, माता पिता ने सपना देखा कि कम से कम हेमंत इंजीनियर बनेगें। लेकिन नियति ने तो उनकी तकदीर में कुछ और ही लिखा था। औजारों की टंकार उनके कवि हृदय को कहां बाँध पाती, कॉलेज में आते न आते वो समझ गये थे कि संगीत ही उनकी नियति है और महज तेरह वर्ष की आयु में 1933 में ऑल इंडिया रेडियो के लिए अपना पहला गीत गा कर उन्होंने गीतों की दुनिया में अपना पहला कदम रखा और पहला फ़िल्मी गीत गाया एक बंगाली फ़िल्म 'निमयी संयास' के लिए।

1943 में आये बंग अकाल ने उस समय के हर भारतीय पर अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। रबींद्र संगीत का ये महारथी उससे कैसे अछूता रहता। 1948 में उसी अकाल से प्रेरित होकर उन्होंने सलिल चौधरी का लिखा एक गैर फ़िल्मी गीत गाया "गणयेर बधु" । इस गाने से हेमंत दा और सलिल चौधरी जी को बंगाल में इतनी प्रसिद्धी मिली कि फिर कभी पीछे मुड़ कर न देखा, बंगाली फ़िल्मों में बतौर गायक उन्हें टक्कर देने वाला कोई न था।

1951 में उनके मित्र हेमेन गुप्ता बंगाल से बम्बई की ओर चल दिये हिन्दी फ़िल्मों में अपना हाथ आजमाने। हेमेन ने "आनंदमठ" बनाने का फ़ैसला किया और जब उसमें संगीत देने की बात आयी तो उन्होंने हेमंत दा को याद किया। उनके इसरार पर हेमंत दा कलकत्ता से बम्बई आ गये और पहली बार किसी फ़िल्म का संगीत दिया।

सुजलाम-सुफलाम सुनें
देश प्रेम पर आधारित ये फ़िल्म तो इतनी ज्यादा न चली लेकिन लता जी से गवाया हेमंत दा का गाना "सुजलाम सुफलाम…" कौन भूल सकता है। समय के साथ नयी पीढ़ी के संगीत की बदलती रुचि के चलते ये गाना अब रेडियो में भी इतना नहीं बजता। कुछ महीने पहले जब यूनूस जी ने अपने ब्लोग पर इस गाने का जिक्र किया और इसे अपने ब्लोग पर सुनवाया तो इस गाने को वहां से उठाये बिना रह न सके और आज भी अक्सर ये गीत हमारी शामों का साथी बनता है। जितने अच्छे बोल हैं उतना ही मधुर संगीत, और लता जी की आवाज गीत की आत्मा बन गयी।

गीत सुनें

छुपा लो यूँ दिल में


इंसाफ की डगर पे


बेक़रार करके हमें


ज़रा नज़रों से कह दो जी


तुम पुकार लो


ना तुम हमें जानो


जाने वो कैसे लोग थे


तेरी दुनिया में जीने से


या दिल की सुनो
वो कहते हैं न बम्बई है ही ऐसा मायाजाल, जो एक बार आया वो फ़िर जिन्दगी भर मुम्बई का ही हो कर रह जाता है। हेमंत दा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। आनंदमठ से बतौर संगीतकार शुरु हुआ सफ़र कब गायकी की तरफ़ मुड़ गया पता ही न चला। हेमंत दा उस समय के बहुचर्चित हीरो देवानंद की आवाज बन गये। सचिन देव बर्मन के संगीत में पगी उनकी आवाज हर रंग बिखरा सकती थी।
'बीस साल बाद' फ़िल्म के शोख गाने

"बेकरार कर के हमें यूं न जाइए, आप को हमारी कसम लौट आइए"और

" जरा नज़रों से कह दो जी"
आज भी दिल को गुदगुदा देते हैं तो दूसरी तरफ़ 'खामोशी' फ़िल्म में धर्मेंद्र की आवाज बन वहीदा से इसरार " तुम पुकार लो" ,

'ममता' फिल्म का लता मंगेशकर के साथ गाया मेलोडियस गीत 'छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा' हर एक की जुबान पर है।

'बात रात की' फ़िल्म से "न तुम हमें जानो न हम तुम्हें जानें मगर लगता है कुछ ऐसा मेरा हमदम मिल गया"
इश्क और रोमांस की पराकाष्ठा है।
गुरुदत्त की प्यासा में "जाने वो कैसे लोग थे जिनको…"
या फ़िर हाऊस नं॰ 44 का गीत
"तेरी दुनिया में जीने से तो बेहतर है कि मर जाएं"
सुनते-सुनते किस के मुंह से आह न निकलेगी.

और 'अनुपमा' का 'या दिल की सुनो दुनिया वालों॰॰' धीर-गंभीर मगर मधुर गीत के जिक्र के बिना यह आलेख तो अधूरा ही रहेगा।

गीता दत्त के साथ
जहां बम्बई में आनंदमठ के बाद अनुपमा, जाग्रती, मां-बेटा, मंझली दीदी,साहब बीबी और गुलाम, नागिन जैसी फ़िल्मों में हिट संगीत दे कर हेमंत दा संगीतकार और देवानंद, धर्मेंद्र जैसे कई चोटी के नायकों की आवाज बन सफ़ल गीतकार बन गये थे वहीं उन्होनें बंगाली फ़िल्मों में भी अपनी जादुई आवाज से धूम मचा रखी थी। 1955 में जहां उन्हें हिन्दी फ़िल्मों में बतौर संगीतकार पहला फ़िल्म फ़ेअर अवार्ड मिला, वहीं उसी साल बंगाल के मशहूर नायक उत्तम कुमार के लिए पाशर्व गायक बन उन्होनें एक नयी साझेदारी की नींव रखी जो लंबे दशक तक चली। उनके गैर फ़िल्मी गीत भी उतने लोकप्रिय हुए जितने फ़िल्मी गीत। उनका परचम बंगाली और हिन्दी दोनों फ़िल्म जगत में समान रूप से लहराया। पर हेमंत दा को कहां चैन था। 1959 में उन्होंने अपनी पहली बंगाली फ़िल्म "नील अकशेर नीचे" फ़िल्म बना कर फ़िल्म प्रोडकशन में हाथ आजमाया। कहानी कलकत्ता में रह रहे चीनी फ़ेरीवालों की मुसीबतों पर आधारित थी। पहली ही पिक्चर राष्ट्रपति स्वर्ण पदक से सम्मानित हुई। फ़िर तो उन्होंने हिन्दी में भी कई यादगार फ़िल्में बनायी जैसे बीस साल बाद, कोहरा, बीबी और मकान, फ़रार, राहगीर, और खामोशी, बालिका-वधू। पर हर शह और हर शक्स जो आता है उसे जाना होता है, अस्सी के दशक में उन्हें पहला दिल का दौरा पड़ा। इस दिल के दौरे ने कइयों का दिल तोड़ दिया। हेमंत दा की आवाज पर इस दौरे का गहरा असर पड़ा। इसके बावजूद वो कई एलबम निकालते रहे, म्यूजिक कॉन्सर्टस में भाग लेते रहे लेकिन स्वास्थय उनका साथ नहीं दे रहा था और 26 सितम्बर 1989 को संगीत की दुनिया का ये चमकता हुआ सितारा सदा के लिए लुप्त हो गया और छोड़ गया पीछे यादें। उनके गये 19 साल हो गये लेकिन आज भी ग्रामोफ़ोन कंपनी उनके गाये गीतों की नयी एलबम हर साल निकालती है और हाथों हाथ लपकी जाती है।
हेमंत दा शारीरिक रूप से अब हमारे बीच नहीं है पर उनकी आवाज हमारे दिलों पर आज भी राज करती है। कितने ही गाने हैं जो यहां जोड़ नहीं पाये लेकिन वो मेरी यादों में हिलोरे ले रहे हैं। साहब बीबी गुलाम के गाने कोई भूल सकता है क्या?

----अनिता कुमार


हेमंत कुमार- संक्षिप्त परिचय


हेमंत दा
हिन्दी फ़िल्म जगत में बहु प्रतिभाशाली (multi talented) कलाकारों के नामों की सूचि में हेमंत कुमार या हेमंतदा का नाम सम्मान से लिया जाता है| बंगाली परिवार में जन्मे हेंमत कुमार का नाम हेमंत कुमार मुखोपाध्याय था| अभियात्रिकी (engineering) की पढ़ाई छोड़ संगीत की दुनिया को जानने निकले हेमंत पूरी तरह से संगीत के लिए ही बने रहे | १९३३ से आल इंडिया से शुरुवात करके हेमंत दा ने विदेशों तक सफर तय किया| शुरुवाती बरसों में केवल बंगाली भाषा कि फिल्मों के लिए ही काम करते रहे| गीत गाये, संगीत बनाया| गैर बंगाली फिल्मों में लोकप्रियता इतनी थी कि मशहूर संगीत कंपनी Grampphone Company Of India (GCI) प्रति वर्ष उनका एक गीतों का संग्रह प्रस्तुत करती रही| यह उनके ना रहने के कई सालों तक होता रहा |

बंगला का कोई गायक भला रविन्द्र संगीत से अनछुया कैसे रह सकता है? हेमंत दा ने भी इसके गीत गाये| बंगला फिल्मो में भी गाये| खासकर बंगला के गीत-संगीत के लिए वे मशहूर रहे| बतौर संगीतकार उन्होंने १९४७ में बंगला फ़िल्म 'अभियात्री' में काम किया| १०० से अधिक बंगला फिल्मों में उन्होंने गीत-संगीत के लिए काम किए| बंगाल के इस अनोखे रत्न ने हिन्दी फिल्मो में भी प्रयोग किए|

कुछ अमर कृतियाँ -
प्यासा का गीत - जाने वो कैसे लोग थे ..... या फ़िर ये गीत - ये नयन डरे डरे .... ये जाम भरे भरे ....खामोशी का गीत 'तुम पुकार लो॰॰तुम्हारा इंतज़ार है' । हिन्दी फ़िल्म नागीन (१९५१) में उन्हें संगीत के लिए फ़िल्म फेयर पुरस्कार मिला| उन्होंने सलील चौधरी , सचिन देव बर्मन, गुरुदत्त, देव आनद आदि प्रसिद्ध कलाकारों के साथ काम किया| बंगला गायिका बेला जी के साथ शादी की| उनकी दो संतानें भी संगीत से ही जुड़ी रहीं| अपने जीवन के अन्तिम कुछ बरसों में उन्होंने देश-विदेश में स्टेज शो किए, दूरदर्शन और रेडियो पर अपने कार्यक्रम प्रतुत किए| २६ सितम्बर १९८९ को इस सफल कलाकार ने हमसे विदाई ली |
आज के इस दिन पर हम उनको अपनी भाव पूर्ण श्रद्धाँजली देते हैं|

हिन्दी फिल्मों जिनमें संगीत कार के रूप में काम किए -
खामोशी, गर्ल फ्रेंड, हमारा वतन, नागिन, जागृति, बंदिश, साहिब बीबी और गुलाम , एक झलक , फरार, आनंद मठ, अनजान, अनुपमा, इंसपेक्टर, लगान, पायल, रहीर, सहारा, ताज, उस रात के बाद, यहूदी की लड़की, दो दिल, दो दुनी चार, एक ही रास्ता, फेर्री, इन्साफ कहाँ है, हिल स्टेशन, फैशन, चाँद, चम्पाकली, बंधन, बंदी, सम्राट , सन्नाटा आदि।

अवनीश एस॰ तिवारी की पेशकश

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