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गुरुवार, 18 जून 2009

आ नीले गगन तले प्यार हम करें....प्रेम में मगन दो प्रेमियों के दिल की जुबाँ

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 115

फ़िल्मकार अमीय चक्रवर्ती और संगीतकार शंकर जयकिशन का बहुत सारी फ़िल्मों में साथ रहा। यह सिलसिला शुरु हुई थी सन् १९५१ में फ़िल्म 'बादल' से। इसके बाद १९५२ में 'दाग़', १९५३ में 'पतिता' और १९५४ में 'बादशाह' जैसी सफल फ़िल्मों में यह सिलसिला जारी रहा। आज 'ओल्ड इज़ गोल्ड' में इसी फ़िल्म 'बादशाह' का एक बेहद ख़ूबसूरत युगल गीत पेश है लता मंगेशकर और हेमन्त कुमार की आवाज़ों में। 'अनारकली' और 'नागिन' जैसी हिट फ़िल्मों के बाद हेमन्त दा की आवाज़ प्रदीप कुमार का 'स्क्रीन वायस' बन चुका था। इसलिए शंकर जयकिशन ने भी इन्ही से प्रदीप कुमार का पार्श्वगायन करवाया। प्रस्तुत गीत "आ नीले गगन तले प्यार हम करें, हिलमिल के प्यार का इक़रार हम करें" एक बेहद नर्मोनाज़ुक रुमानीयत से भरा नग़मा है जिसे सुनते हुए हम जैसे कहीं बह से जाते हैं। रात का सन्नाटा, खोया खोया सा चाँद, धीमी धीमी बहती बयार, नीले आसमान पर चमकते झिलमिलाते सितारे, ऐसे में दो दिल अपने प्यार का इज़हार कर रहे हैं एक दूसरे के बाहों के सहारे। रोमांटिक गीतों के जादूगर गीतकार हसरत जयपुरी ने इस गीत में कुछ ऐसे बोल लिखे हैं, कुछ ऐसा उनका अंदाज़-ए-बयाँ रहा है कि गीत को सुनकर आपके दिल में यक़ीनन एक अजीब सी, मीठी सी, मंद मंद सी हलचल पैदा हो जाती है, दिल जैसे किसी के प्यार में खो जाना चाहता है, डूब जाना चाहता है। फ़िल्म 'बादशाह' में दो बड़ी अभिनेत्रियाँ रहीं, एक उषा किरण और दूसरी माला सिंहा। इस गीत में प्रदीप कुमर और माला सिंहा की जोड़ी नज़र आयी।

शंकर जयकिशन ने इस गीत को राग भीमपलासी ताल दादरा में स्वरबद्ध किया था। अब अगर आप मुझसे यह पूछें कि भीमपलासी राग की क्या विशेषतायें हैं तो मैं बड़ी दुविधा में पड़ जाउँगा क्योंकि रागों की तक़नीकी विशेषज्ञता तो मुझे हासिल नहीं है। हाँ, इतना ज़रूर कर सकता हूँ कि आपको कुछ ऐसे गीत ज़रूर गिनवा सकता हूँ जो आधारित हैं इसी राग पर, ताक़ी इन गीतों को गुनगुनाते हुए आपको इस राग का कुछ आभास हो जाये। ये गानें हैं 'देख कबीरा रोया' फ़िल्म का "हमसे आया न गया, तुमसे बुलाया न गया", 'शर्मिली' फ़िल्म का "खिलते हैं गुल यहाँ, खिलके बिखरने को", 'अनुपमा' फ़िल्म का "कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं", 'चंद्रकांता' फ़िल्म का "मैने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी", 'ग़ज़ल' फ़िल्म का "नग़मा-ओ-शेर की सौग़ात किसे पेश करूँ", 'कोहरा' फ़िल्म का "ओ बेक़रार दिल", और भी न जाने कितने ऐसे हिट गीत हैं जो इस राग पर आधारित हैं। आज के दौर के भी कई गानें इस राग पर आधारित हैं जैसे कि फ़िल्म 'पुकार' में "क़िस्मत से तुम हमको मिले हो", 'दिल से' फ़िल्म में "ऐ अजनबी तु भी कभी आवाज़ दे कहीं से", और 'क्रीमिनल' फ़िल्म में "तुम मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिये"। तो दोस्तों, रागदारी की बातें बहुत हो गयी, अब आप गीत सुनने के लिये उतावले हो रहे होंगे, तो सुनिये।



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाइये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. याद रहे सबसे पहले सही जवाब देने वाले विजेता को मिलेंगें २ अंक और २५ सही जवाबों के बाद आपको मिलेगा मौका अपनी पसंद के ५ गीतों को पेश करने का ओल्ड इस गोल्ड पर सुजॉय के साथ. देखते हैं कौन बनेगा हमारा पहला "गेस्ट होस्ट". अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं -

१. अभिनेत्री कूकू पर फिल्माया गया है ये गीत.
२. शमशाद बेगम की आवाज़.
३. तेजाब के हिट गीत की तरह इस गीत के बोल भी गिनती से शुरू होते हैं.

कुछ याद आया...?

पिछली पहेली का परिणाम -
स्वप्न मंजूषा जी आपके हुए ६ अंक और आपके ठीक पीछे हैं पराग जी ४ अंकों के साथ और बहुत आगे हैं अभी भी शरद जी १४ अंकों के साथ. राज जी बहुत बढ़िया जानकारी दी आपने. धन्यवाद.

खोज और आलेख- सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम ६-७ के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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