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Friday, February 28, 2014

मिष्टी दोई जैसी बप्पी दा की आवाज़ और "घंटी गीत" बना साल का पहला देशव्यापी हिट

ताज़ा सुर ताल - 2014 - 08 

बप्पी दा 
दोस्तों, साल 2014 के दो माह बीतने को हैं, और अब तक हम आपको 14 गीत सुनवा चुके हैं. आज हम आपको सुनवायेंगे दो ऐसे गीत जो लोकप्रियता के लिहाज से शीर्ष पायदानों पर विराजमान हैं, और ये दोनों ही गीत एक ही फिल्म से हैं. फिल्म "गुण्डे" के बारे में आपको बता दें कि ये फिल्म हिंदी के साथ साथ बांग्ला में भी बनी है. और इसका मशहूर घंटी गीत  बांग्ला में बप्पी दा ने गाया है. वैसे संगीतकार सोहैल सेन ने हिंदी संस्करण में भी बप्पी दा को क्रेडिट दिया है. हिंदी संस्करण आज पूरे भारत में धूम मचा रहा है, मगर हम आपको सुनवा रहे हैं गीत का बांग्ला संस्करण जिसे बप्पी दा से एकदम मस्त गाया है. सुनते सुनते झूमने लगो तो हमें दोष मत दीजियेगा...


नेहा बाशिन 
क्यों दोस्तों, मज़ा आया न...? चलिए अब बढते हैं गुण्डे  के एक और गीत की तरफ जो है एक कैब्रेट गीत. असलमे इश्कुम  फिल्माया गया है प्रियंका चोपडा पर और उनके लिए पार्श्व गायन किया है नेहा भासिन ने, जी हाँ वही जिनकी धुनकी  ने आपको दीवाना बना दिया था. नेहा आज की एक चर्चित आवाज़ का नाम है पर अपने आरंभिक दिनों को याद करते हुए एक हालिया साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि एक बार एक निर्माता के सामने ऑडिशन देते हुए उनसे पूछा गया कि कहीं आपकी आवाज़ बैठी हुई तो नहीं है, जवाब में नेहा डरते डरते बस यही कह पायी थी कि 'मेरी आवाज़ ही ऐसी है'...ये वो दौर था जब एक खास किस्म की आवाजें ही इंडस्ट्री में स्वीकार्य होती थी. दस साल में बहुत कुछ बदल चुका है, और नए अंदाज़ की आवाजें भी आज अपनी पहचान बना रही हैं. नेहा की सफलता इसका ही एक उदाहरण है. माईकल जेक्सन की मुरीद नेहा फिल्मों से इतर भी अपनी आवाज़ में गैर फिल्मों गीत रिलीस करती रहती हैं, और जल्दी ही उनका एक नया सिंगल भी आने वाला है. तो लीजिए फिलहाल सुनिए उनकी आवाज़ में इश्क को नशीला सलाम. 

Friday, January 31, 2014

रेखा भारद्वाज का स्नेह निमंत्रण ओर अरिजीत की रुमानियत भरी नई गुहार

ताज़ा सुर ताल - 2014 -04 

हमें फिल्म संगीत का आभार मानना चाहिए कि समय समय पर हमारे संगीतकार हमारी भूली हुई विरासत ओर नई पीढ़ी के बीच की दूरी को कुछ इस तरह पाट देते हैं कि समय का लंबा अंतराल भी जैसे सिमट गया सा लगता है. मेरी उम्र के बहुत से श्रोताओं ने इस ठुमरी को बेगम अख्तर की आवाज़ में अवश्य सुना होगा, पर यक़ीनन उनसे पहले भी लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के दरबार से निकली इस अवधी ठुमरी को बहुत से गुणी कलाकारों ने अपनी आवाज़ में ढाला होगा. लीजिए २०१४ में स्वागत कीजिये इसके एक ओर नए संस्करण का जिसे तराशा संवारा है विशाल -गुलज़ार के अनुभवी हाथों ने ओर आवाज़ के सुरमे से महकाया है रेखा भारद्वाज की सुरमई आवाज़ ने. मशहूर अभिनेत्री ओर कत्थक में निपुण माधुरी दीक्षित नेने एक बार फिर इस फिल्म से वापसी कर रही हैं रुपहले परदे पर. जी हाँ आपने सही पहचाना, देढ इश्किया  का ये गीत फिर एक बार ठुमरी को सिने संगीत में लौटा लाया है, हिंदी फिल्मों के ठुमरी गीतों पर कृष्णमोहन जी रचित पूरी सीरीस का आनंद हमारे श्रोता उठा चुके हैं. आईये सुनते हैं रेखा का ये खास अंदाज़....शब्द देखिये आजा गिलौरी खिलाय दूँ खिमामी, लाल पे लाली तनिक हो जाए....


काफी समय तक संघर्ष करने के बाद संगीतकार सोहेल सेन की काबिलियत पर भरोसा दिखाया सलमान खान ने ओर बने "एक था टाईगर" के हिट गीत, आज आलम ये है कि सोहेल को पूरी फिल्म का दायित्व भी भरोसे के साथ सौंपा जा रहा है. यश राज की आने वाली फिल्म "गुण्डे" में सोहेल ने जोड़ी बनायीं है इरशाद कामिल के साथ. यानी शब्द यक़ीनन बढ़िया ही होंगें. रामलीला की सफलता के बाद अभिनेता रणबीर सिंह पूरे फॉर्म में है, फिल्म में उनके साथ हैं अर्जुन कपूर ओर प्रियंका चोपड़ा. फिल्म का संगीत पक्ष बहुत ही बढ़िया है. सभी गीत अलग अलग जोनर के हैं ओर श्रोताओं को पसंद आ रहे हैं, विशेषकर ये गीत जो आज हम आपको सुना रहे हैं बेहद खास है. रोमानियत के पर्याय बन चुके अरिजीत सिंह की इश्को-मोहब्बत में डूबी आवाज़ में है ये गीत. जिसका संगीत संयोजन भी बेहद जबरदस्त है. धीमी धीमी रिदम से उठकर ये गीत जब सुर ओर स्वर के सही मिश्रण पर पहुँचता है तो एक नशा सा तारी हो जाता है जो गीत खत्म होने के बाद भी श्रोताओं को अपनी कसावट में बांधे रखता है. लीजिए आनंद लीजिए जिया  मैं न जिया  का ओर दीजिए हमें इज़ाज़त.    

Thursday, September 10, 2009

मने कही दो....आशुतोष गोवारिकर ने क्यों खेला नए संगीतकार सोहैल सेन पर दांव "व्हाट यौर राशि" के लिए

ताजा सुर ताल (21)

ताजा सुर ताल में आज में आज सुनिए गुजराती अंदाज़ में ढाला एक प्यारा सा गीत

सजीव- सुजॉय, तुमने किसी अभिनेता को एक ही फ़िल्म में सब से ज़्यादा कितने किरदार निभाते हुए देखा है?

सुजॉय - जहाँ तक मुझे याद है, संजीव कुमर ने 'नया दिन नई रात' में नौ किरदार निभाए थे। क्या इससे भी ज़्यादा कोई उदाहरण है?

सजीव- हाँ मराठी अभिनेता राजेश श्रृंगारपुरे ने "शंभू मज़ा नावाचा" में १२ अलग अलग किरदारों को निभाया था...

सुजॉय - वाह, यह तो मुझे मालूम नहीं था। लेकिन आज हम इन सब बातों में क्यों उलझ रहे हैं सजीव?

सजीव - वही तो, आज हम सुनने जा रहें हैं फ़िल्म 'व्हाट्स योर राशी' का एक गीत। इस फ़िल्म में प्रियंका चोपड़ा ने कुल १२ किरदार निभाए हैं १२ अलग अलग राशी के लड़कियों के। और यह दिखाया गया है कि किस राशी के किस तरह के चरित्र, गुण और स्वभाव होते हैं अमूमन...

सुजॉय - अच्छा तो ये बात है! इस फ़िल्म में प्रियंका के साथ नज़र आएँगे हरमन बवेजा, जिनका 'लव स्टोरी २०५०' से फ़िल्म जगत में पदार्पण हुआ था बतौर नायक। इस फ़िल्म में भी प्रियंका बनीं थीं उनकी नायिका। फ़िल्म तो बुरी तरह पिटी थी, लेकिन शान का गाया गीत "मिलो ना मिलो" काफ़ी हिट हुआ था।

सजीव- उसके बाद 'विक्टरी' नामक फ़िल्म में भी हरमन कुछ कमाल नहीं दिखा सके। अब देखा यह है कि इस फ़िल्म में वो क्या कमाल दिखाते हैं! अच्छा, तुम्हे पता है 'व्हाट्स योर राशी' के संगीतकार कौन हैं?

सुजॉय - हाँ, ये एक नए संगीतकार हैं, उनका नाम है सोहैल सेन, जो कि एक गायक भी हैं।

सजीव- ठहरो सुजय, कहीं ये सोहैल सेन वही तो नहीं जिन्होने २००८ की फ़िल्म 'सिर्फ़' मे संगीत दिया था?

सुजॉय - बिल्कुल ठीक! सोहैल सेन और शिवानी कश्यप ने मिलकर उस गुमनाम फ़िल्म का संगीत तैयार किया था। लेकिन हैरत की बात है कि आशुतोश गोवारिकर एक तो इस तरह की हास्य फ़िल्म पहली बार बना रहे हैं (स्वदेस, लगान, जोधा अक़बर जैसी फ़िल्में बनानेवाले) और दूसरे कि उन्होंने ए. आर. रहमान के बदले इस नए संगीतकार को मौका दिया है।

सजीव- मैं भी हैरान हूँ, और ख़ास तौर से इस बात पे हैरान हूँ कि इस फ़िल्म में कुल १३ गानें हैं जिनमें से १२ गानों में १२ अलग अलग राशियों के किरदारों को दर्शाया गया है। ऐसे महत्वपूर्ण गीतों के लिए किसी सुप्रतिष्ठित संगीतकार के बजाय इस नए कलाकार को मौका देने के पीछे आशुतोश का कोई तो प्लान ज़रूर होगा! अब देखना यह है कि सोहैल आशुतोश के उम्मीदों पर कितने खरे उतरते हैं।

सुजॉय - हाँ सजीव, १३ अलग अलग तरह के गीतों का संगीत एक दम से तैयार करना आसान काम नहीं है, सोहैल की तारीफ़ किए बगैर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। और ज़रूरी बात यह भी है कि सोहैल ने और संगीतकारों की तरह इस फ़िल्म में ना ही पंजाबी भँगड़े का सहारा नहीं लिया और ना ही हिप-हॊप शैली का रुख़ किया।

सजीव- गीत सुनवाने से पहले हम अपने श्रोताओं और पाठकों को ये बारह गीत और उनसे जुड़ी राशी के बारे में बता देते हैं।

सुजॉय - ज़रूर!

Aries - व्हाट्स यौर राशी (शीर्षक गीत)
Aquarius - जायो ना
Gemini - आजा लहराते
Cancer - बिखरी बिखरी
तुला - मानूँगा मानूँगा
मीन - सौ जनम
scropio - आ ले चल
कन्या- प्यारी प्यारी
Taurus - सु छे
Sagittarius - सलौने क्या
सिंह - धड़कन धड़कन
Capricorns - कोई जाने ना

और जो तेरहवाँ गीत है, "चेहरे जो देखे हैं", वह इन सभी गीतों का निचोड़ है, यानी कि हीरो उन सभी १२ लड़कियों के बारे में कहता है जिनसे वो मिला है।

सजीव- जब इतने सारे गानें हैं तो ज़ाहिर है बहुत से गायकों ने अपनी आवाज़ मिलाई होगी?

सुजॉय - बिल्कुल हाँ, कुछ नए, कुछ पुराने। सोहैल सेन तो हैं ही, साथ में हैं अल्का याज्ञ्निक, मधुश्री, अस्लेशा गोवारिकर, तरन्नुम मलिक, बेला शेंडे, उदित नारायण, रजब अली भारती, भाव्या पंडित, शान, मरियन डी'क्रुज़, पमेला जैन, और ख़ुद आशुतोश गोवारिकर भी।

सजीव- हाँ, मैने आशुतोश की आवाज़ महसूस की है "मानूँगा मानूँगा" गीत में। मुझे तो 'स्वदेस' फ़िल्म का वह गीत "पल पल है भारी विपदा है आई" याद आ गई। और भाव्या पंडित भी वही लड़की है न जिसे हमने 'इंडियन आइडल' में देखा था पिछले साल?

सुजॉय - हाँ, मुझे भी ऐसा ही लगता है। तो सजीव, इतने सारे गीतों में से कौन सा गीत सुनवाया जाए?

सजीव- चलो "सु छे" सुनते हैं और सभी को सुनवाते हैं। क्योंकि यह फ़िल्म एक गुजराती कहानी पर आधारित है, तो गुजराती अंदाज़ वाला यह गीत सुनवाने का कुछ अर्थ तो बनता है। इस गीत को गाया है सोहैल सेन और बेला शेंडे ने। तुमने तो गीत को सुना होगा, कितने अंक दोगे इसे?

सुजॉय - माफ़ी चाहूँगा, लेकिन मैं २.५ से ज़्यादा नहीं दे पा रहा हूँ, संगीत में ना कुछ नयापन दिखा और बहुत ही साधारण कोम्पोसिशन लगा मुझे। X-factor की कमी लगी, बाक़ी सोहैल सेन की क़िस्मत! मैं उन्हे शुभकामनाएँ देता हूँ कि आगे चलकर वो एक कामयाब संगीतकार बनें और अच्छे से अच्छा संगीत सुननेवालो को दें।

सजीव - आ हाँ ....यहाँ एक एक कैच है सुजॉय....दरअसल ये गीत जब मैंने भी पहली बार सुना था मुझे भी कुछ खास नहीं लगा पर मेरी छठी इन्द्री कहती है कि इस गीत कुछ तो ख़ास है, तभी मैंने इसे चुना....बेला ने जिस अंदाज़ में "माने कही दे" बोला है वो धीरे धीरे अपना असर करता है....हाँ दूसरे हिस्से सोहेल की आवाज़ आने पर गीत कुछ कमजोर सा हो जाता है फिर भी मैं इसे ५ में ३ अंक दूंगा, वैसे इस फिल्म के किसी भी गीत में X फैक्टर जैसी कोई बात नहीं है, पर मुझे लगता है यदि ये गीत अच्छे फिल्माए गए हों और फिल्म दिलचस्प बनी हो तो सभी गीत फिल्म के साथ न्याय कर जायेंगें....

सुजॉय - ठीक है सजीव तो बाकी काम श्रोताओं पर छोड़ते हैं......और सुनते हैं "सो छे...."



आवाज़ की टीम ने दिए इस गीत को 2.75 की रेटिंग 5 में से. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसा लगा? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीत को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

क्या आप जानते हैं ?
आप नए संगीत को कितना समझते हैं चलिए इसे ज़रा यूं परखते हैं.फिल्म मोहनदास में दो गीतकारों ने गीत लिखे हैं, कौन हैं इस साहित्यिक कृति पर आधारित फिल्म के गीतकार और संगीतकार...बताईये और हाँ जवाब के साथ साथ प्रस्तुत गीत को अपनी रेटिंग भी अवश्य दीजियेगा.

पिछले सवाल का सही जवाब दिया का सही जवाब दिया एक बार फिर सीमा जी ने. उदय प्रकाश जी से हम आपकी मुलाकात भी जल्द ही करायेंगें...इस शृंखला में....मंजू जी और शमिख जी ने भी रेटिंग दी धन्येवाद...



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

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