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शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

अपने हाथों करें 'अनुगूँज' का विमोचन

साहित्यप्रेमियो,

हिन्द-युग्म विगत 20 महीनों से प्रकाशन में सक्रिय है। हम अपने यहाँ से प्रकाशित पुस्तकों के ऑनलाइन विमोचन का अनूठा कार्यक्रम संयोजित करते हैं, जिससे हर पाठक लोकार्पण करने का सुख प्राप्त कर लेता है।

आज हम हिन्द-युग्म प्रकाशन की नवीनतम पुस्तक 'अनुगूँज' का ऑनलाइन विमोचन कर रहे हैं। इस पुस्तक में 28 कवियों की प्रतिनिधि कविताएँ संकलित हैं। संग्रह के लिए कविताओं का संकलन और संपादन रश्मि प्रभा ने किया है। रश्मि प्रभा संग्रह पर टिप्पणी करते हुए कहती हैं-

एक कदम के साथ मिलते क़दमों की गूँज अनुगूँज हिंदी साहित्य की साँसों को प्रकृति से जोड़ता है.... वैसे सच तो ये है कि हिंदी के बीज हम क्या लगायेंगे, हिंदी तो हमारा गौरव है- हिंदी साहित्य की जड़ें इतनी पुख्ता रही हैं कि इसे कितना भी काटो, पर इसके पनपने की क्षमता अक्षुण है .... हिन्दुस्तान की मिट्टी हमेशा उर्वरक रही है, बस बीज डालना है और उस पर उग आए अनचाहे विचारों को हटाना है- यही इन्कलाब अनुगूँज है और इसमें शामिल क़दमों को देखकर- साहित्य से जुड़े स्वर कह उठते हैं -

'नहीं है नाउम्मीद इकबाल अपनी किश्ते वीरां से
ज़रा नम हो तो यह मिट्टी बड़ी ज़रखेज है साकी'


इस मिट्टी पर उभरे कुछ पदचिन्ह साहित्य के अमरत्व को दुहराते हैं -

अंजना दयाल
अंजु चौधरी
अभिषेक 'निशांत'
आनन्द कुमार द्विवेदी
आशीष अवस्थी 'सागर'
एम वर्मा
किशोर खोरेन्द्र
देवेन्द्र कुमार शर्मा
निपुण पाण्डेय
नीलम पुरी
पूजा
प्रतीक महेश्वरी
बाबुषा कोहली
मुकेश कुमार सिन्हा
रश्मि प्रभा
राजेंद्र तेला 'निरंतर'
रामपति
वाणभट्ट
वाणी शर्मा
वीणा श्रीवास्तव
शोभना चौरे
शोभा सारड़ा
सत्यम शिवम
सरस्वती प्रसाद
सीमा सदा
सुमन सिन्हा
सुषमा आहुति
हेमंत कुमार दुबे

शब्दों की शंख ध्वनि, शब्दों के मंगलाचार में आइये इस 'अनुगूँज ' को हम अपनी अर्चना का स्पर्श दें ... खोलें द्वार .... आप सबका भावनाओं के इस मंदिर में स्वागत है ....


(यहाँ से फीटा काटकर विधिवत लोकार्पण करें)

पुस्तक का फेसबुक-पेज

मंगलवार, 23 अगस्त 2011

सीमा सिंघल के कविता-संग्रह 'अर्पिता' का विमोचन अपने कर-कमलों द्वारा करें

सभी साहित्यप्रेमियों को जन्माष्टमी की बधाइयाँ!

आज हम इस अवसर पर हिन्द-युग्म प्रकाशन की नवीनतम पुस्तक 'अर्पिता' का ऑनलाइन विमोचन कर रहे हैं। यह पुस्तक युवा कवयित्री सीमा सिंघल का प्रथम काव्य-संग्रह है। चूँकि हिन्द-युग्म का यह मंच ज्यादा बोलने-सुनने और कम लिखने का है। इसलिए हम पुस्तक पर अधिक कलम न चलाकर, सर्वप्रथम तो आपको विमोचन का अवसर प्रदान करते हैं। उसके पश्चात अर्चना चावजी की आवाज़ में पुस्तक पर उनके विचार जानते हैं और उनकी आवाज़ में चुनिंदा कविताएँ सुनते हैं।

पहले यहाँ से फीटा काटकर विधिवत लोकार्पण करें।



अब नीचे के प्लेयर से अर्चना जी की आवाज़ में पुस्तक-चर्चा सुनें।

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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