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Friday, December 2, 2011

विथ लव डेल्ही - एक फिल्म हौंसलों की, हिम्मतों की, युवा ख्वाबों की और विश्वास की

कवर स्टोरी - 01/01/11/2011

दोस्तों "३ इडियट्स" फिल्म याद हैं न आपको. फिल्म का सन्देश भी याद होगा. पर अक्सर हम ये सोचते हैं कि फिल्मों की बात अलग है, कहाँ वास्तविक जीवन में ऐसा होता है कि जमे जमाये करियर को छोड़ कर कोई अपने सपनों का पीछा करने निकल पड़े. पर साथियों, कभी कभी बहुत से फ़िल्मी किरदार हमें वास्तविक दुनिया में हमारे आस पास ही मिल जाते हैं. ऐसे ही एक किरदार से मैं आज आपका परिचय करवाने जा रहा हूँ. ये हैं उभरते हुए अभिनेता आशीष लाल. एक इंजीनियरिंग विद्यार्थी से अभिनेता बने आशीष ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक फुल लेंथ फिल्म बना डाली, जबकि इससे पहले उनमें से किसी का भी बॉलीवुड से कोई रिश्ता नाता नहीं था. आईये आशीष से ही जाने उनकी फिल्म "विथ लव डेल्ही" के बनने की कहानी -

Thursday, August 14, 2008

कृष्णा...अल्लाह...जीसस...

आज़ादी दिवस पर दो नायाब वीडियो

खुदा ने इंसान को बनाया, इंसान ने मजहब. और फ़िर मजहबों, खुदाओं और इंसानों ने मिलकर बाँट ली जमीनें, और खींच दी सरहदें दिलों के दरमियाँ...कल ६१ वीं बार आज़ाद भारत में, लहराएगा तिरंगा लालकिले पर, मगर तमाम उपलब्धियों और भविष्य की असीम संभावनाओं के बीच सुलग रहा है, आज भी हिंद.

Religion is the reason, the world is breaking up into pieces….everybody wants control, don't hesitate to kill one another.... कहते है लुईस, इस महीने के हमारे विडीयो ऑफ़ दा मंथ में, और कितना सही कहते हैं, ये विडियो आज के हिंद के लिए एक प्रार्थना समान है.

Fusion music यानी दो या अधिक तरह के संगीत विधाओं को मिला कर एक नया संगीत रचना, यहाँ ये प्रयोग किया दो महान कलाकारों, हरिहरन और लेसली लुईस ने, भारतीय शास्त्रीय संगीत और वेस्टर्न पॉप को मिलाने का, जब राग यमन कल्याणी को गिटार पर गाया गया तो, युवाओं के मन पर छा गया.

गीत का संदेश, बहुत अच्छे रूप में सबके सामने रखने में हाथ रहा है इसके विडियो का भी, black and white फॉर्मेट में चित्रित हुए इस विडियो में एक मार्मिक कहानी बुनी गई है, इस कहानी में जो बच्चा अपनी राह से भटकता दिखाया गया है, क्या इस बच्चे में हम सब को अपनी तस्वीर नज़र नही आती. यही समय है की हम चेतें और हिंदू , मुस्लिम, दलित या ब्राह्मण कहलाने से पहले भारतीय कहलाने में गर्व महसूस करें....गीत के अंत में जब हरिहरन अपनी मखमली आवाज़ में " गोविन्द बोलो हरी गोपाल बोलो..." का जाप करते हैं, तो वो किसी खास धरम के अनुयायी बन कर नही, वरन इन्सान को इंसान समझने वाले हर हिन्दुस्तानी के मन की आशा का प्रतिनिधित्व करते नज़र आते हैं....देखते हैं ये विडियो और दुआ करें एक बार फ़िर अपने हिंदुस्तान के लिए, कि हर तरफ़ अमन हो, शान्ति हो, प्रेम हो और हो सदभाव....



मगर चूँकि आज हम एक दिन पहले मिल रहे हैं देश की आज़ादी की ६१ वीं वर्षगांठ से, तो एक और विशेष विडियो को आपके सामने रखना अवश्यक लग रहा है. आज से ठीक २० वर्ष पहले यानी कि १९८८ में, यह विडियो ओपन हुआ था, दूरदर्शन पर तत्कालिन प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संदेश के बाद, लोक सेवा संचार परिषद् द्वारा निर्मित इस विडियो के लिए बोल लिखे थे पियूष पाण्डेय ने और स्वरबद्ध किया था एक बार फ़िर लुईस बैंक ने, १४ भाषाओँ में एक ही बात कही गई थी " मिले सुर मेरा तुम्हारा ". हिन्दी, कश्मीरी, पंजाबी, सिन्दी, उर्दू, तमिल, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, बंगला, असामी, ओडिया, गुजरती और मराठी, हर आवाज़ में बस एक ही कामना, मिल कर बनी थी जो आवाज़ पूरे भारत की, वो आज भी हर भारतीय को अपने मन की आवाज़ ही लगती है. इस गीत का जादू इतने बरसों के बाद भी वैसा का वैसा ही है....ज़रा देखें तो कौन कौन दिखेंगे आपको इस नायाब विडियो में - पंडित भीमसेन जोशी, एम् बलामुरालिकृष्ण, और लता मंगेशकर जैसी आवाजें, फिल्मकार मृणाल सेन अगर है तो सैयद किरमानी, अरुण लाल, प्रकाश पादुकोण, नरेन्द्र हिरवानी, जैसे खिलाड़ी भी हैं, मल्लिका साराभाई जैसी नृत्यांगना है तो अमिताभ बच्चन, मिथुन, कमल हसन, रेवती, जीतेन्द्र, वहीदा रहमान, शर्मीला टैगोर, शबाना आज़मी, ओमपुरी, दीना पाठक और मीनाक्षी शेषाद्री, जैसे बड़े फिल्मी सितारों ने भी इस विडियो में अपना योगदान दिया...तो दोस्तो, क्यों न एक बार यादों के गलियारे में लौटें, और कामना करें कि, अलगाव का रास्ता छोड़, सब भारतीय फ़िर एक सुर में गायें, तमाम भारतीय भाषाओँ में, हम सब की आवाजें फ़िर से मिलें और बने एक नया सुर - पूरे भारत का सुर.


जय हिंद

Thursday, July 17, 2008

"बटाटा वड़ा...ये समुन्दर...संगीत...तुम्हे इन छोटी छोटी चीज़ों में कितनी खुशी मिलती है..."

आवाज़ पर आज दिन है - Music video of the month का, हमारी टीम आपके लिए चुन कर लाएगी -एक गीत जो सुनने में तो कर्णप्रिय हो ही, साथ ही उसका विडियो भी एक शानदार प्रस्तुति हो, यानि कि ऐसा गीत जो पांचों इन्द्रियों को संतृप्त करें, हमारी टीम की पसंद आपको किस हद तक पसंद आएगी, ये तो आपकी टिप्पणियां ही हमें बतायेंगीं.

आज हम जिस गीत का विडियो लेकर उपस्थित हैं, वो गीत है फ़िल्म "सत्या" का, सत्या को राम गोपाल वर्मा, एक Hard Core Realistic फ़िल्म बनाना चाहते थे, तो जाहिर है, गीत संगीत के लिए, उसमें कोई स्थान नही था, पर जब फ़िल्म बन कर तैयार हुई, तो निर्माता जिद करने लेगे फ़िल्म में गीत डाले जायें ताकि फ़िल्म की लम्बाई बढ़े और Audio प्रचार भी मिल सके, अन्तता रामू जी को अपनी जिद छोडनी पड़ी, उन दिनों माचिस के गीतों से हिट हुई जोड़ी, विशाल भारद्वाज और गुलज़ार, को चुना गया इस काम के लिए, पटकथा में परिस्थियाँ निकाली गयीं और आनन फानन में ५ गीत रिकॉर्ड हुए और फिल्माए गए, फ़िल्म बेहद कामियाब रही, और संगीत ने लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई, "सपने में मिलती है" और "गोली मार भेजे में" आदि गीत अधिक चले, पर आज आपके लिए, जो गीत हम चुन कर लाये हैं इस फ़िल्म का, वो कुछ ख़ास है, इसकी हर बात निराली है, हालाँकि बहुत अधिक मशहूर नही हुआ, पर गुलज़ार साब के बेहतरीन गीतों में से एक है - यह गीत. इसमें इनकी विशिष्ट शैली खूब जम कर झलकती है, बानगी देखिये -

बादलों से काट काट कर,
कागजों पे नाम जोड़ना,
डोरियों से बाँध बाँध कर,
रात भर चाँद तोड़ना, और...
जामुनों की नर्म डाल पर,
नाखूनों से नाम खोदना.....


विशाल का संगीत, गीत को मूड को पूरी तरह से स्थापित करता है, Guitar का पीस सुनने लायक है, इस गीत से लंबे अरसे बाद Playback Singing में वापसी की, गायक भूपेंद्र ने, गुलज़ार के कोमल शब्दों को बहुत सलीके से अपनी रेशमी आवाज़ में उतारते रहें हैं भूपेंद्र, हमेशा से,और यह गीत भी अपवाद नही रहा इस मामले में.

अब बात करें चित्रांकन की. तो इसमे कोई शक नहीं कि इस मुलायम से गीत को बेहद उन्दा तरीके से परदे पर उतरा है, निर्देशक ने.

नायक एक Angry Young Man है जो मुंबई शहर में ख़ुद को बहुत सहज महसूस करता है, वह चुप चुप रहता है ख़ुद में दबा दबा, संवेदनाएं मर चुकी हैं, और कंक्रीट के शहर में तो बस जीते जाना भी जैसे, एक उपलब्धि है, मगर जब वो नायिका को देखता है तो उसे लगता है, कि वो किसी और ही दुनिया की है,और उसे दिखता है- गुनगुनाता एक आबशार.

गाने के बीच में कुछ संवाद भी है -

नायक - "तुम्हे इन छोटी छोटी चीज़ों में कितनी खुशी मिलती है,…बटाटा वड़ा, ये समुन्दर, संगीत, ये सब...."

नायिका - "हाँ... मगर यही तो जिन्दगी है..."

नायक - "मुझे पहली बार महसूस हो रहा है"


इस छोटे से संवाद में महानगरीय जीवन की तमाम पीडा झलकती है, जहाँ हर खुशी है दामन में, बस जीने के लिए वक्त नही है...लगभग पूरा गीत Outdoor Shoot हुआ है, और पार्श्व में दिख रहा मुंबई महानगर भी एक किरदार बन कर उभर कर आता है, यूँ तो दोनों कलाकारों ने बेहतरीन काम किया है, पर उर्मिला मातोंडकर अपनी नैसर्गिग सुन्दरता और उत्कृष्ट अभिनय से पूरे गीत पर छायी हुई लगती है, कैमरा के सुंदर प्रयोग ने. हर फ्रेम में जैसे जान डाल दी है.

आप भी देखिये और सुनिए ये लाजावाब गीत, और अपनी राय से हमें अवगत कराएँ -



Series - Music Video of the Month Episode 1
Song - Badalon Se...
Album/ Film - Satya
Lyrics - Gulzaar
Music - Vishal Bhardwaj
Singer - Bhupendra
Director - Ram Gopal Verma
Artists - Chakraborthy, Urmila Matondkar, and Mumbai City

Thursday, July 10, 2008

यादों के बदल छाए, उमड़ घुमड़ घिर आए....

दोस्तो,
हमें यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है, की हिंद युग्म के संगीत-सफर के सबसे पहले गायक सुबोध साठे (नागपुर) ने अपनी वेब साईट http://www.subodhsathe.com/ पर अपनी पहली मराठी एल्बम " मेघा दातले " का भव्य विमोचन किया है, जहाँ से आप इनके गीतों को डाउनलोड कर सकते हैं, साथ ही उन्होंने इसी एल्बम के एक गीत "ती जताना" का एक विडियो भी बनाया है जिसे आप यहाँ भी देख सकते हैं -



हमने की इसी बाबत सुबोध से बातचीत की, पेश है कुछ अंश -



Hind Yugm - Hi Subodh, finally a full marathi album, tell us what this "megha datle" is all about, the theme behind the album ?

'पहला सुर' में सुबोध के गीत
सुबह की ताज़गी
वो नर्म सी
झलक
Subodh - Yeah, finally! After starting all my compositions in Hindi, I thought I should do something in Marathi as well and started searching for meaningful poems. I found very tallented people through orkut who penned these songs for me (some of them on demand and some were already written) Lyricists are..Tushar Joshi, Renuka Khatavkar, Arun Nandan, Prasanna Shembekar, Kshipra and Shilpa Deshpande.

"Megh Datle, Aathvaninche..." in hindi, it means "Ghir aaye Badra....yadon ke"............ i think :)


All songs are composed and sung by me and music is arranged by my friend from Pune, Chaitanya Aadkar (who plays Keyboard with Sunidhi Chavan's group)

Hind Yugm - You made a video also, why you choose this perticular song for the video ?

Subodh - I think, this song relates to anyone or atleast it relates to me unknowingly, + lyrics and composition both are very close to my heart. This song is special!

Hind Yugm - How was the response ? What can we expect next, an Hindi album ?

Subodh - Response has been very very good, Thanks to all!! Haven't think about Hindi album (my 1st 3 albums are in Hindi only). But if I find meaningful lyrics will definitely do one Hindi album as well. I am going to launch my 2nd Marathi album in 2009.

Thank you Subodh, all the very best....Hind Yugm is eagly waiting to hear your first self composed song for Awaaz ( for the new season ) " khushmizaaz mitti ".

सुबोध को तलाश है अर्थपूर्ण गीतों की, जो भी गीतकार सुबोध के साथ जुड़ कर अपने गीत रचना चाहें संपर्क करें "subodh sathe" , पर.

हमने इस गीत ( ती जताना ), के गीतकार तुषार जोशी जी, जो कि हिंद युग्म के वरिष्ट कवियों में से एक हैं, उनसे भी पूछे कुछ सवाल, पेश है कुछ अंश -

हिंद युग्म - तुषार जी, सुबोध के साथ आपकी पहली मराठी एल्बम " मेघा दाटले " आ चुकी है, कैसा रहा ये अनुभव आपके लिए ?

तुषार जोशी - बड़ा ही सुखद अनुभव रहा। सुबोध ने गीत बडा़ ही दिल लगाकर गाया है। यूँ गीत में जान आ गई है। इसके पहले भी सुबोध ने मेरे कई हिन्दी और मराठी कविताओं को धुन देकर गाया है मगर इस गीत की बात ही कुछ और है क्योंकि ये गीत और गीतों के साथ अल्बम के रूप में प्रकाशित किया गया है।

हिद युग्म - आपका पहला हिन्दी गीत " भूल गए हो " हिंद युग्म पर आया था सुबोध का बनाया और गाया हुआ, जिसे बहुत अधिक सराहा गया था, आज की इस सफलता पर आप क्या श्रेय देना चाहेंगे हिंद युग्म को ?

तुषार जोशी - हिंद युग्म हमेशा से लोगों को जोडने का माध्यम रहा है। मुझे खुशी है कि हिन्दयुग्म के माध्यम से मेरी कविता और सुबोध ने गाया हुआ गीत लाखों लोगों तक पहुँचा। यूँ हिन्दयुग्म हमारे लिये सारी दुनिया के साथ जोडने वाला दरवाज़ा बन गया है।

हिंद युग्म - तुषार जी, अगला कदम क्या होगा, क्या हम उम्मीद करें की जल्द ही आपकी और सुबोध की जोड़ी एक हिन्दी एल्बम देगी, हिंद युग्म , आवाज़ के श्रोताओं के लिए ?

तुषार जोशी - ये खयाल मुझे पसंद आया। मै कहूँगा जरूर, क्यों नहीं?

हिंद युग्म आवाज़ की पूरी टीम की तरफ़ से सुबोध और तुषार जी को बधाइयाँ और शुभकामनाएं आने वाली समस्त योजनाओं के लिए.

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