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Sunday, February 23, 2020

राग काफी : SWARGOSHTHI – 457 : RAG KAFI






स्वरगोष्ठी – 457 में आज

काफी थाट के राग – 1 : राग और थाट काफी

विदुषी गिरिजा देवी से राग काफी में होरी और मुहम्मद रफी व साथियों से फिल्मी गीत सुनिए




विदुषी गिरिजा देवी
मुहम्मद रफी
“रेडियो प्लेबैक इण्डिया” के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी नई श्रृंखला “काफी थाट के राग” की पहली कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, आप सब संगीत प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। भारतीय संगीत के अन्तर्गत आने वाले रागों का वर्गीकरण करने के लिए मेल अथवा थाट व्यवस्था है। भारतीय संगीत में सात शुद्ध, चार कोमल और एक तीव्र अर्थात कुल बारह स्वरों का प्रयोग होता है। एक राग की रचना के लिए इन बारह स्वरों में से कम से कम पाँच का होना आवश्यक होता है। संगीत में थाट रागों के वर्गीकरण की पद्धति है। सप्तक के बारह में से मुख्य सात स्वरों के क्रमानुसार उस समुदाय को थाट कहते हैं, जिससे राग उत्पन्न होते हों। थाट को मेल भी कहा जाता है। दक्षिण भारतीय संगीत पद्धति में 72 मेल प्रचलित हैं, जबकि उत्तर भारतीय संगीत पद्धति में 10 थाट का प्रयोग किया जाता है। इसका प्रचलन पण्डित विष्णु नारायण भातखण्डे जी ने प्रारम्भ किया था। वर्तमान समय में रागों के वर्गीकरण के लिए यही पद्धति प्रचलित है। भातखण्डे जी द्वारा प्रचलित ये दस थाट हैं; कल्याण, बिलावल, खमाज, भैरव, पूर्वी, मारवा, काफी, आसावरी, तोड़ी और भैरवी। इन सभी प्रचलित और अप्रचलित रागों को इन्हीं दस थाट के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया है। भारतीय संगीत में थाट स्वरों के उस समूह को कहते हैं जिससे रागों का वर्गीकरण किया जा सकता है। पन्द्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में 'राग तरंगिणी’ ग्रन्थ के लेखक लोचन कवि ने रागों के वर्गीकरण की परम्परागत 'ग्राम और मूर्छना प्रणाली’ का परिमार्जन कर मेल अथवा थाट प्रणाली की स्थापना की। लोचन कवि के अनुसार उस समय सोलह हज़ार राग प्रचलित थे। इनमें 36 मुख्य राग थे। सत्रहवीं शताब्दी में थाट के अन्तर्गत रागों का वर्गीकरण प्रचलित हो चुका था। थाट प्रणाली का उल्लेख सत्रहवीं शताब्दी के ‘संगीत पारिजात’ और ‘राग विबोध’ नामक ग्रन्थों में भी किया गया है। लोचन कवि द्वारा प्रतिपादित थाट प्रणाली का प्रयोग लगभग तीन सौ वर्षों तक होता रहा। उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम और बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में पण्डित भातखण्डे ने भारतीय संगीत के बिखरे सूत्रों को न केवल संकलित किया बल्कि संगीत के कई सिद्धान्तों का परिमार्जन भी किया। भातखण्डे जी द्वारा निर्धारित दस थाट में से सातवाँ थाट काफी है। इस श्रृंखला में हम काफी थाट के रागों पर क्रमशः चर्चा करेंगे। प्रत्येक थाट एक आश्रय अथवा जनक राग होता है और शेष जन्य राग कहलाते हैं। आपके लिए इस श्रृंखला में हम काफी थाट के जनक और जन्य रागों पर चर्चा कर रहे हैं। आज के अंक में काफी थाट के जनक अथवा आश्रय जन्य राग काफी पर चर्चा करेंगे। आज श्रृंखला की पहली कड़ी में पहले हम आपको सुप्रसिद्ध विदुषी गिरिजा देवी के स्वर में राग काफी में निबद्ध एक होरी ठुमरी रचना का रसास्वादन कराएंगे और फिर इसी राग पर आधारित एक पुरानी हिन्दी फिल्म का गीत मुहम्मद रफी और साथियों के स्वर में प्रस्तुत करेंगे। 1963 में प्रदर्शित सुप्रसिद्ध उपन्यासकार मुंशी प्रेमचन्द के उपन्यास “गोदान” पर आधारित फिल्म के गीतकार अनजान और संगीतकार पण्डित रविशंकर हैं।


काफी थाट में गान्धार और निषाद स्वर कोमल और शेष सभी स्वर शुद्ध प्रयोग किये जाते हैं। राग काफी, काफी थाट का जनक अथवा आश्रय राग माना जाता है। राग काफी में उसके थाट के अनुकूल स्वरों का प्रयोग किया जाता है। राग का वादी स्वर पंचम और संवादी स्वर ऋषभ होता है। इसकी जाति सम्पूर्ण होती है। इस राग के गायन अथवा वादन का अनुकूल समय मध्यरात्रि माना जाता है, किन्तु फाल्गुन मास में किसी भी समय गायन या वादन किया जा सकता है। राग काफी और काफी थाट के अन्य जन्य रागों में भारतीय पर्व होली की रचनाएँ भरपूर मिलती हैं। होली, उल्लास, उत्साह और मस्ती का प्रतीक पर्व होता है। यह ऋतु परिवर्तन और नई फसल के तैयार होने का प्रतीक पर्व भी माना जाता है। इस अनूठे परिवेश का चित्रण भारतीय संगीत की सभी शैलियों में पाया जाता है। उपशास्त्रीय संगीत में तो होली गीतों का सौन्दर्य खूब निखरता है। ठुमरी, दादरा विशेष रूप से पूरब अंग की ठुमरियों में होली का मोहक चित्रण मिलता है। उपशास्त्रीय संगीत की वरिष्ठ गायिका विदुषी गिरिजा देवी की गायी अनेक होरी हैं, जिनमे राग काफी रंग से रँगी होली में परिवेश का आनन्द भी प्राप्त होता है। बोल बनाव से गिरिजा देवी जी गीत के शब्दों में अनूठा भाव भर देतीं हैं। आम तौर पर होली गीतों में ब्रज की होली का जीवन्त चित्रण होता है। अब हम आपको विदुषी गिरिजा देवी के स्वरों में जो काफी होरी सुनवा रहे हैं, उसमें राधाकृष्ण की होली का अत्यन्त भावपूर्ण चित्रण है। लीजिए, आप भी सुनिए, राग काफी में निबद्ध यह मनमोहक होरी।

काफी होरी : “तुम तो करत बरजोरी...” : विदुषी गिरिजा देवी



राग काफी चंचल प्रकृति का राग है। अतः इस राग में अधिकतर छोटा खयाल और ठुमरी गायी जाती है। अधिकांश ठुमरियों में ब्रज की होली का चित्रण मिलता है। ऐसी ठुमरियों को होली के आसपास फाल्गुन मास में हर समय गाया जा सकता है। दरअसल राग काफी ऋतु प्रधान राग है। अब हम आपको सुनवाते है, राग काफी पर आधारित एक फिल्मी गीत। 1963 में मुंशी प्रेमचन्द के उपन्यास पर आधारित फिल्म “गोदान” प्रदर्शित हुई थी। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द की कालजयी कृति ‘गोदान’ पर आधारित इस फिल्म के संगीतकार थे विश्वविख्यात सितार वादक पण्डित रविशंकर। फिल्म के प्रायः सभी गीत रागों और उत्तर प्रदेश के पूर्वाञ्चल की विभिन्न लोक संगीत शैलियों पर आधारित थे। इन्हीं में एक होली गीत भी था, जिसे गीतकार अनजान ने लिखा और मोहम्मद रफी और साथियों ने स्वर दिया था। यह होली गीत फिल्म में गोबर की भूमिका निभाने वाले अभिनेता महमूद और उनके साथियों पर फिल्माया गया था। इस गीत के माध्यम से परदे पर ग्रामीण होली का परिवेश साकार हुआ था। लोकगीत के स्वरूप में होते हुए भी राग काफी के स्वर समूह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं। यह गीत कहरवा ताल में है, जिसमें ब्रज की होली का चित्रण है। आइए, हम सब आनन्द लेते है, फिल्म “गोदान” के इस होली गीत का। आप यह गीत सुनिए और मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।

राग काफी : “होली खेलत नन्दलाल बिरज में...” मुहम्मद रफी और साथी : फिल्म – गोदान



संगीत पहेली

‘स्वरगोष्ठी’ के 457वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको वर्ष 1997 में प्रदर्शित एक फिल्म के गीत का अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको दो अंक अर्जित करने के लिए निम्नलिखित तीन में से कम से कम दो प्रश्नों के सही उत्तर देना आवश्यक हैं। यदि आपको तीन में से केवल एक अथवा तीनों प्रश्नों का उत्तर ज्ञात हो तो भी आप प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। 460वें अंक की पहेली तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे उन्हें वर्ष के प्रथम सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे वर्ष के प्राप्तांकों की गणना के बाद वर्ष के अन्त में महाविजेताओं की घोषणा की जाएगी और उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।





1 - इस गीतांश को सुन कर बताइए कि इसमें किस राग का प्रभाव है?

2 – इस गीत में प्रयोग किये गए ताल को पहचानिए और उसका नाम बताइए।

3 – इस गीत में किस गायिका का स्वर है?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia9@gmail.com पर ही शनिवार 29 फरवरी, 2020 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। आपको यदि उपरोक्त तीन में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। COMMENTS में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। फेसबुक पर पहेली का उत्तर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विजेताओं के नाम हम उनके शहर/ग्राम, प्रदेश और देश के नाम के साथ “स्वरगोष्ठी” के अंक संख्या 459 में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत, संगीत या कलाकार के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia9@gmail.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के सही उत्तर और विजेता

“स्वरगोष्ठी” के 455वें अंक में हमने आपको 2015 में प्रदर्शित मराठी फिल्म “कटयार कालजात घुसली” से एक राग आधारित नाट्य गीत का अंश सुनवा कर आपसे तीन में से कम से कम दो सही उत्तरों की अपेक्षा की थी। पहेली के पहले प्रश्न का सही उत्तर है; राग – पूरिया कल्याण, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है; ताल – तीनताल तथा तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है; स्वर – शंकर महादेवन और महेश काले

‘स्वरगोष्ठी’ की इस पहेली का सही उत्तर देने वाले हमारे विजेता हैं; वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया, जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी, चेरीहिल न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, अहमदाबाद, गुजरात से मुकेश लाडिया और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी। उपरोक्त सभी प्रतिभागियों को दो दो अंक मिलते हैं। ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से आप सभी को हार्दिक बधाई। सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अपने पते के साथ कृपया अपना उत्तर ई मेल से ही भेजा करें। इस पहेली प्रतियोगिता में हमारे नए प्रतिभागी भी हिस्सा ले सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि आपको पहेली के तीनों प्रश्नों के सही उत्तर ज्ञात हो। यदि आपको पहेली का कोई एक उत्तर भी ज्ञात हो तो भी आप इसमें भाग ले सकते हैं।


अपनी बात

मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी हमारी नई श्रृंखला “काफी थाट के राग” की पहली कड़ी में आज आपने काफी थाट और उसके आश्रय अथवा जनक राग काफी राग का परिचय प्राप्त किया। साथ ही इस राग के उपशास्त्रीय स्वरूप को समझने के लिए आपने सुविख्यात गायिका विदुषी गिरिजा देवी के स्वर में इस राग की एक होरी ठुमरी का रसास्वादन किया। राग काफी के आधार पर रचे गए फिल्मी गीत के उदाहरण के लिए हमने आपके लिए 1963 में प्रदर्शित फिल्म “गोदान” का एक गीत मुहम्मद रफी और साथियों के स्वर में प्रस्तुत किया। फिल्म के संगीतकार पण्डित रविशंकर हैं। कुछ तकनीकी समस्या के कारण अपने फेसबुक के मित्र समूह पर “स्वरगोष्ठी” का लिंक साझा नहीं कर पा रहे हैं। सभी संगीत अनुरागियों से अनुरोध है कि हमारी वेबसाइट http://radioplaybackindia.com अथवा http://radioplaybackindia.blogspot.com पर क्लिक करके हमारे सभी साप्ताहिक स्तम्भों का अवलोकन करते रहें। “स्वरगोष्ठी” के वेब पेज के दाहिनी ओर निर्धारित स्थान पर अपना ई-मेल आईडी अंकित कर आप हमारे सभी पोस्ट को नियमित रूप से अपने ई-मेल पर प्राप्त कर सकते है। “स्वरगोष्ठी” की पिछली कड़ियों के बारे में हमें अनेक पाठकों की प्रतिक्रिया लगातार मिल रही है। हमें विश्वास है कि हमारे अन्य पाठक भी “स्वरगोष्ठी” के प्रत्येक अंक का अवलोकन करते रहेंगे और अपनी प्रतिक्रिया हमें भेजते रहेंगे। आज के इस अंक अथवा श्रृंखला के बारे में यदि आपको कुछ कहना हो तो हमें अवश्य लिखें। यदि आपका कोई सुझाव या अनुरोध हो तो हमें swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia9@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः सात बजे “स्वरगोष्ठी” के इसी मंच पर एक बार फिर संगीत के सभी अनुरागियों का स्वागत करेंगे।


प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र  

रेडियो प्लेबैक इण्डिया 
 राग काफी : SWARGOSHTHI – 457 : RAG KAFI : 23 फरवरी, 2020 


Tuesday, December 26, 2017

ऑडियो: मुंशी प्रेमचंद की 'नेउर'

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछली बार आपने मुंशी प्रेमचंद की एक भावमय कहानी शूद्रा समीर गोस्वामी के स्वर में सुनी थी।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद की एक भावमय कथा नेउर जिसे स्वर दिया है समीर गोस्वामी ने।

एक शताब्दी से हिन्दी (एवं उर्दू) साहित्य जगत में मुंशी प्रेमचंद का नाम एक सूर्य की तरह चमक रहा है। विशेषकर, ज़मीन से जुड़े एक कथाकार के रूप में उनकी अलग ही पहचान है। उनके पात्रों और कथाओं का क्षेत्र काफी विस्तृत है फिर भी उनकी अनेक कथाएँ भारत के ग्रामीण मानस का चित्रण करती हैं। उनका वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। वे उर्दू में नवाब राय और हिन्दी में प्रेमचंद के नाम से लिखते रहे। आम आदमी की बेबसी हो या हृदयहीनों की अय्याशी, बचपन का आनंद हो या बुढ़ापे की जरावस्था, उनकी कहानियों में सभी अवस्थाएँ मिलेंगी और सभी भाव भी। उनकी कहानियों पर फिल्में भी बनी हैं और अनेक रेडियो व टीवी कार्यक्रम भी। उनकी पहली हिन्दी कहानी सरस्वती पत्रिका के दिसंबर 1915 के अंक में "सौत" शीर्षक से प्रकाशित हुई थी और उनकी अंतिम प्रकाशित (1936) कहानी "कफन" थी।

प्रस्तुत कथा का गद्य "हिंदी समय" पर उपलब्ध है। "नेउर" का कुल प्रसारण समय 22 मिनट है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।





मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं।
~ मुंशी प्रेमचंद (1880-1936)

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"तुमसे तम्बाकू पिये बिना कैसे रहा जाता है नेउर काका?”
(मुंशी प्रेमचन्द कृत "नेउर" से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें.


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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
नेउर MP3

#22th Story, Neur: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2017/22. Voice: Sameer Goswami

Tuesday, December 19, 2017

प्रेमचंद की कहानी "शूद्रा"

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछली बार आपने अनुराग शर्मा की कहानी यारी है ईमान उन्हीं के स्वर में सुनी थी।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद की एक भावमय कथा शूद्रा जिसे स्वर दिया है समीर गोस्वामी ने। प्रवासी विमर्श से बहुत पहले लिखी गयी इस कथा में गोरे व्यापारियों द्वारा बहला फुसलाकर मॉरिशस ले जाये गये गिरमिटिया श्रमिकों का एक हृदयस्पर्शी चित्रण है।

एक शताब्दी से हिन्दी (एवं उर्दू) साहित्य जगत में मुंशी प्रेमचंद का नाम एक सूर्य की तरह चमक रहा है। विशेषकर, ज़मीन से जुड़े एक कथाकार के रूप में उनकी अलग ही पहचान है। उनके पात्रों और कथाओं का क्षेत्र काफी विस्तृत है फिर भी उनकी अनेक कथाएँ भारत के ग्रामीण मानस का चित्रण करती हैं। उनका वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। वे उर्दू में नवाब राय और हिन्दी में प्रेमचंद के नाम से लिखते रहे। आम आदमी की बेबसी हो या हृदयहीनों की अय्याशी, बचपन का आनंद हो या बुढ़ापे की जरावस्था, उनकी कहानियों में सभी अवस्थाएँ मिलेंगी और सभी भाव भी। उनकी कहानियों पर फिल्में भी बनी हैं और अनेक रेडियो व टीवी कार्यक्रम भी। उनकी पहली हिन्दी कहानी सरस्वती पत्रिका के दिसंबर 1915 के अंक में "सौत" शीर्षक से प्रकाशित हुई थी और उनकी अंतिम प्रकाशित (1936) कहानी "कफन" थी।

प्रस्तुत कथा "शूद्रा" का कुल प्रसारण समय 45 मिनट 30 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।




मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूँ।
~ मुंशी प्रेमचंद (1880-1936)

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"धीरे-धीरे यह संदेह और भी द़ृढ़ हो गया और अब तक जीवित था। बिरादरी में कोई गौरा से सगाई करने पर राजी न होता था।”
(मुंशी प्रेमचन्द कृत "शूद्रा" से एक अंश)


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शूद्रा MP3

#21th Story, Shudra: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2017/21. Voice: Sameer Goswami

Tuesday, August 1, 2017

राष्ट्र का सेवक: मुंशी प्रेमचंद

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछली बार आपने अनुराग शर्मा के स्वर में राधेश्याम भारतीय की लघुकथा मुआवज़ा का पाठ सुना था।

31 जुलाई को मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिन के अवसर पर आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं उन्हीं की एक भावमय कथा राष्ट्र का सेवक जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

एक शताब्दी से हिन्दी (एवं उर्दू) साहित्य जगत में मुंशी प्रेमचंद का नाम एक सूर्य की तरह चमक रहा है। विशेषकर, ज़मीन से जुड़े एक कथाकार के रूप में उनकी अलग ही पहचान है। उनके पात्रों और कथाओं का क्षेत्र काफी विस्तृत है फिर भी उनकी अनेक कथाएँ भारत के ग्रामीण मानस का चित्रण करती हैं। उनका वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। वे उर्दू में नवाब राय और हिन्दी में प्रेमचंद के नाम से लिखते रहे। आम आदमी की बेबसी हो या हृदयहीनों की अय्याशी, बचपन का आनंद हो या बुढ़ापे की जरावस्था, उनकी कहानियों में सभी अवस्थाएँ मिलेंगी और सभी भाव भी। उनकी कहानियों पर फिल्में भी बनी हैं और अनेक रेडियो व टीवी कार्यक्रम भी। उनकी पहली हिन्दी कहानी सरस्वती पत्रिका के दिसंबर १९१५ के अंक में "सौत" शीर्षक से प्रकाशित हुई थी और उनकी अंतिम प्रकाशित (१९३६) कहानी "कफन" थी।

प्रस्तुत कथा का गद्य "हिंदी समय" पर उपलब्ध है। "राष्ट्र का सेवक" का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 14 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।





मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं।
 ~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"कैसे शुद्ध अंतःकरण का आदमी है! कैसा ज्ञानी!”
 (मुंशी प्रेमचन्द कृत "राष्ट्र का सेवक" से एक अंश)


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#14th Story, Rashtra Ka Sewak: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2017/. Voice: Anurag Sharma

Saturday, May 30, 2015

चित्रशाला - 01 : फ़िल्मों में प्रेमचन्द



चित्रशाला - 01

फ़िल्मों में प्रेमचन्द




'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, आज से महीने के हर पाँचवे शनिवार को हम प्रस्तुत करेंगे फ़िल्म और फ़िल्म-संगीत से जुड़े विविध पहलुओं से सम्बन्धित शोधालेखों पर आधारित श्रृंखला 'चित्रशाला'। आज इसकी पहली कड़ी में प्रस्तुत है शोधालेख – 'फ़िल्मों में प्रेमचन्द’। हमारे देश के जो प्रमुख और महान साहित्यकार हुए हैं, उनमें मुंशी प्रेमचन्द का नाम बहुत ऊँचाइयों पर आता है। 31 जुलाई 1880 को जन्मे और 8 अक्टुबर 1936 को इस दुनिया से जाने वाले प्रेमचन्द जी को उनके जीवन काल में शायद इतनी ख्याति नहीं मिली हो जितना उनके जाने के बाद उनके नाम को मिला, उनकी कृतियों को मिली। और इसके पीछे महत्वपूर्ण योगदान रहा उनकी कहानियों और उपन्यासों पर बनने वाली फ़िल्मों का भी। आइए इस लेख के माध्यम से जाने कि प्रेमचन्द जी की कौन-कौन सी कृतियों पर बनी थी फ़िल्में और पढ़ें उन फ़िल्मों से सम्बन्धित कुछ रोचक तथ्य। 




भारत में साहित्यकारों, कवियों, लेखकों की ना उस ज़माने में कोई कद्र थी, ना ही आज है। और यही कारण है कि अत्यन्त प्रतिभाशाली होते हुए भी ये लेखक, ये साहित्यकार हमेशा ग़रीबी और आर्थिक समस्याओं से जीवन भर जूझते रहे। महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचन्द भी इसमें व्यतिक्रम नहीं रहे। उनकी साहित्यिक पत्रिका ’हंस’ और ’जागरण’ में उन्हें माली नुकसान हुआ, पत्रिका बन्द करने के कगार पर आ गई। इसके चलते प्रेमचन्द जी की आर्थिक स्थिति और भी भायानक हो गई, उनकी जेब बिल्कुल ख़ाली हो चुकी थी। इसलिए 54 वर्ष की आयु में, 31 मई 1934 को वो आ गए बम्बई नगरी फ़िल्म जगत में अपनी क़िस्मत आज़माने। फ़िल्म निर्देशक मोहन भवनानी, जिन्हें हम एम. भवनानी के नाम से जानते हैं, प्रेमचन्द को बम्बई आने का निमंत्रण दिया था। यहाँ भवनानी ने उन्हें 'अजन्ता सिनेटोन’ में स्क्रिप्ट राइटर की नौकरी दिला दी। उन्होंने 'अजन्ता सिनेटोन’ के लिए एक कहानी लिखी ’मिल मज़दूर’। 1934 में ही इस कहानी पर एम. भवनानी के निर्देशन में फ़िल्म बनी ’मज़दूर’। मिस बिब्बो, जयराज, नयमपल्ली और भुडो अडवानी इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार थे। फ़िल्म में प्रेमचन्द ने भी सरपंच की एक छोटी सी भूमिका निभाई थी। फ़िल्म में मज़दूरों द्वारा शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के दृश्य दिखाए गए जिस वजह से समाज के कुछ बलशाली लोगों ने ब्रिटिश सरकार के कान भर कर फ़िल्म पर रोक लगवा दी। इसके बाद 1936 में भी इसी कहानी पर 'अजन्ता सिनेटोन’ ने ही एक अन्य नाम से एक फ़िल्म दोबारा बना डाली। इस बार फ़िल्म का शीर्षक रखा गया 'ग़रीब परवर’ उर्फ़ ’दयावान’।


साल 1935 में ’अजन्ता सिनेटोन’ की बैनर तले प्रेमचन्द की एक और कहानी पर फ़िल्म प्रदर्शित हुई जिसका शीर्षक था ’नवजीवन’। इस फ़िल्म के निर्देशक भी एम. भवनानी ही थे। ’अजन्ता सिनेटोन’ के बाहर 1934 में ’महालक्ष्मी सिनेटोन’ ने प्रेमचन्द जी की मशहूर कहानी ’सेवा सदन’ पर एक फ़िल्म बना डाली जिसका नाम रखा गया ’बाज़ार-ए-हुस्न’। यह कहानी वेश्याओं की समस्याओं पर आधारित थी। इसका निर्देशन किया था नानूभाई वकील ने। यह वाक़ई रोचक बात है कि इस फ़िल्म के बनने के ठीक 80 वर्ष बाद प्रेमचन्द की इसी ’सेवासदन’ कहानी पर ’बाज़ार-ए-हुस्न’ के नाम से ही दोबारा फ़िल्म बनी। इस बार निर्माता थे ए. के. मिश्र। यह फ़िल्म 18 जुलाई 2014 को प्रदर्शित हुई थी। रेशमी घोष, जीत गोस्वामी, ओम पुरी और यशपाल शर्मा अभिनीत इस फ़िल्म की एक और ख़ास बात यह है कि इस फ़िल्म में संगीत दिया है वरिष्ठ और सुरीले संगीतकार ख़य्याम ने। तमिल फ़िल्मकार सुब्रह्मण्यम ने 1937 में सफल फ़िल्म ’बालायोगिनी’ के बाद और भी कई सामाजिक फ़िल्में बनाने का निर्णय लिया। 1938 में उन्होंने ’सेवासदन’ उर्फ़ ’बाज़ार-ए-हुस्न’ को फ़िल्मी जामा पहनाया तमिल फ़िल्म ’सेवासदनम्’ के नाम से। फ़िल्म की पटकथा उन्होने स्वयं लिखी और इसका अपने ’मद्रास यूनाइटेड आर्टिस्ट्स कॉर्पोरेशन’ बैनर तले निर्माण किया। फ़िल्म का मुख्य चरित्र एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी ने निभाया।


1934-35 के इन दो सालों में ही प्रेमचन्द जी का फ़िल्म जगत पर से जैसे विश्वास उठ गया। जो आशाएँ और सपने लेकर वो बम्बई आए थे, वो जैसे कहीं ऊब गए। उन्होंने इस बारे में एक पत्र अपने मित्र साहित्यकार ज्ञानेन्द्र को लिखा और बताया कि जिन सपनों को लेकर वो बम्बई आए थे, वो सपने बिखर गए हैं। यहाँ निर्देशक सर्वेसर्वा हैं और वो कहानी के साथ मनमर्ज़ी से फेरबदल करते हैं, बेवजह अश्लील गाने ठूस दिए जाते हैं, ये सब कोई भी ख़ुद्दार स्वाभिमानी लेखक बरदाश्त नहीं कर सकता। इस घटना के बाद प्रेमचन्द बम्बई हमेशा हमेशा के लिए छोड़ कर वापस बनारस आ गए। और एक ही वर्ष के भीतर बनारस में ही 8 अक्टुबर 1936 को उनका 56 वर्ष की अल्पायु में निधन हो गया। प्रेमचन्द चले गए, परन्तु उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी लिखी कहानियों और उपन्यासों पर फ़िल्में बनाने का सिलसिला चलता रहा। एम. भवनानी, जिनके कारण प्रेमचन्द बम्बई तशरीफ़ लाए थे, उन्होंने साल 1946 में प्रेमचन्द लिखित कहानी ’रंगभूमि’ पर एक फ़िल्म बनाई थी जिसका नाम था ’चौगान-ए-हस्ती’। 1963 में त्रिलोक जेटली ने प्रेमचन्द की अमर कृति ’गोदान’ पर इसी शीर्षक से फ़िल्म बनाई जिसमें राजकुमार और कामिनी कौशल मुख्य भुमिकाओं में थे। 1966 में सुनील दत्त और साधना को लेकर ॠषीकेश मुखर्जी ने प्रेमचन्द की एक और महत्वपूर्ण कृति ’ग़बन’ पर इसी शीर्षक से फ़िल्म बनाई।


1977 में सत्यजीत रे ने प्रेमचन्द की एक कहानी पर ’शतरंज के खिलाड़ी’ बनाई। यह कहानी लखनऊ के नवाबों के पतन की कहानी थी जिसमें एक खेल के प्रति ऑबसेशन सारे खिलाड़ियों का खा जाती है, और उन्हें एक संकट की घड़ी में अपने दायित्वों को भुला देती है। सत्यजीत रे ने प्रेमचन्द की एक और कृति ’सदगति’ पर साल 1981 में एक फ़िल्म बनाई। यह एक लघु कथा थी ग़रीब ’दुखी’ की एक तुच्छ सहायता के बदले में लकड़ी काटते-काटते थकावट से मर जाता है। 1977 में प्रेमचन्द जी की कहानी ’कफ़न’ पर प्रसिद्ध फ़िल्मकार मृणाल सेन ने तेलुगू में ’ओका ऊरी कथा’ शीर्षक से एक फ़िल्म बनाई थी जो तेलुगू में बनने वाली गिनती भर की कलात्मक फ़िल्मों में गिनी जाती है। प्रेमचन्द की कृतियों पर बनने वाली फ़िल्मों में कुछ और नाम हैं ’गोधूली’ (1977), 'पंचपरमेश्वर’ (1995) और ’गुल्ली डंडा’ (2010)

आपको हमारी यह प्रस्तुति कैसी लगी, हमें अवश्य लिखिए। आपके सुझावों के आधार पर हम अपने कार्यक्रम निर्धारित करते हैं। आप हमें radioplaybackindia@live.com के पते पर अपने सुझाव, समालोचना और फरमाइशें भेज सकते हैं।


खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी





Tuesday, February 18, 2014

मुंशी प्रेमचंद स्त्री और पुरुष

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछली बार आपने अनुराग शर्मा के स्वर में मुनीश शर्मा की कथा "लघु बोधकथा" सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी स्त्री और पुरुष जिसे स्वर दिया है माधवी चारुदत्ता ने।

प्रस्तुत व्यंग्य का गद्य "भारत डिस्कवरी" पर उपलब्ध है। "स्त्री और पुरुष" का कुल प्रसारण समय 15 मिनट 26 सेकंड है। सुनिए और बताइये कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।





मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
 ~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)


हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी


"उन्होंने उस सुंदरी की कल्पना करनी शुरू की जो उनके हृदय की रानी होगी; उसमें ऊषा की प्रफुल्लता होगी, पुष्प की कोमलता, कुंदन की चमक, बसंत की छवि, कोयल की दनि ... ”
 (मुंशी प्रेमचंद कृत "स्त्री और पुरुष" से एक अंश)


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#Third Story, Stree Aur Purush : Munshi Premchand Hindi Audio Book/2014/03. Voice: Madhavi Charudatta

Tuesday, September 24, 2013

मुंशी प्रेमचंद कृत शिकारी राजकुमार

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने माधवी चारुदत्ता के स्वर में मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित व्यंग्य "मोटर की छींटें" सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित रोचक कहानी शिकारी राजकुमार जिसे स्वर दिया है माधवी चारुदत्ता ने।

प्रस्तुत कहानी का गद्य "भारत डिस्कवरी" पर उपलब्ध है। "शिकारी राजकुमार" का कुल प्रसारण समय 23 मिनट 33 सेकंड है। सुनिए और बताइये कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।





मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
 ~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)


हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी


"मृग पृथ्वी पर पड़ा तड़प रहा था और उस अश्वारोही की भयंकर और हिंसाप्रिय आँखों से प्रसन्नता की ज्योति निकल रही थी।”
 (मुंशी प्रेमचंद कृत "शिकारी राजकुमार" से एक अंश)


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#31st Story, Shikari Rajkumar: Munshi Premchand Hindi Audio Book/2013/31. Voice: Madhavi Charudatta

Tuesday, September 17, 2013

मुंशी प्रेमचंद की मोटर की छींटें

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा के स्वर में रयुनासुके अकुतागावाकी जापानी कहानी "संतरे" का हिंदी अनुवाद सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित व्यंग्यात्मक कहानी मोटर की छींटें जिसे स्वर दिया है माधवी चारुदत्ता ने।

प्रस्तुत व्यंग्य का गद्य "भारत डिस्कवरी" पर उपलब्ध है। "मोटर की छींटें" का कुल प्रसारण समय 11 मिनट 17 सेकंड है। सुनिए और बताइये कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।





मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
 ~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)


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"जजमान का दिल देखकर ही मैं उनका निमंत्रण स्वीकार करता हूँ ... ”
 (मुंशी प्रेमचंद कृत "मोटर की छींटें" से एक अंश)


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#30th Story, Motor Ki Chhinten : Munshi Premchand Hindi Audio Book/2013/30. Voice: Madhavi Charudatta

Tuesday, August 6, 2013

बोलती कहानियाँ: मुंशी प्रेमचन्द कृत बालक

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने हिन्दी और मराठी की एक सफल वॉइस ओवर आर्टिस्ट माधवी चारुदत्ता के स्वर में मुंशी प्रेमचन्द की मार्मिक कहानी "अग्निसमाधि" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचन्द की ही एक भावमय कथा बालक जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

प्रस्तुत कथा का गद्य "भारत कोश" पर उपलब्ध है। "बालक" का कुल प्रसारण समय 19 मिनट 17 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।





मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं।
 ~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"पुरखों की पैदा की हुई सम्पत्ति पर आज भी लोग उसी शान से अधिकार जमाये हुए हैं, मानो खुद पैदा किये हों, तो वह क्यों उस प्रतिष्ठा और सम्मान को त्याग दे, जो उसके पुरखों ने संचय किया था।”
 (मुंशी प्रेमचन्द कृत "बालक" से एक अंश)


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#26th Story, Balak: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2013/26. Voice: Anurag Sharma

Tuesday, July 16, 2013

बोलती कहानियाँ: मुंशी प्रेमचन्द कृत अग्निसमाधि

इस साप्ताहिक स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने माधवी चारुदत्ता के स्वर में अनुराग शर्मा की व्यंग्यात्मक कहानी "सम्बन्ध" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचन्द की मार्मिक कहानी अग्निसमाधि जिसे स्वर दिया है हिन्दी और मराठी की एक सफल वॉइस ओवर आर्टिस्ट माधवी चारुदत्ता ने। उनके स्वर में आचार्य विनोबा भावे द्वारा धुले जेल में मराठी भाषा में दिये गए गीता प्रवचन यहाँ सुने जा सकते हैं।

प्रस्तुत कथा का गद्य "भारत कोश" पर उपलब्ध है। "अग्निसमाधि" का कुल प्रसारण समय 28 मिनट 18 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।





मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
 ~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

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एक क्षण में एक ज्वाला-सी दहक उठी। उसने चिल्ला कर पुकारा, “कौन है वहाँ? अरे, यह कौन आग जलाता है?”
 (मुंशी प्रेमचन्द कृत "अग्निसमाधि" से एक अंश)


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#25th Story, Agnisamadhi: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2013/25. Voice: Madhavi Charudatta

Tuesday, June 18, 2013

मुंशी प्रेमचंद की मर्मस्पर्शी कहानी कायर

इस साप्ताहिक स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा के स्वर में सुदर्शन प्रियदर्शिनी की कहानी "देशांतर" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद की मर्मस्पर्शी कहानी कायर जिसे स्वर दिया है अर्चना चावजी ने।

कहानी "कायर" का कुल प्रसारण समय 27 मिनट 9 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।




मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं ~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

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“न जाने कहाँ से यह कुलच्छीनी मेरे कोख में आई।”
 (मुंशी प्रेमचंद रचित "कायर" से एक अंश)


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#22nd Story, Kayar: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2013/22. Voice: Archana Chaoji

Tuesday, April 30, 2013

मुंशी प्रेमचंद की अमर रचना दो बैलों की कथा

इस साप्ताहिक स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा के स्वर में पुरुषोत्तम पाण्डेय की कहानी "लातों का देव" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी दो बैलों की कथा जिसे स्वर दिया है अर्चना चावजी ने।

कहानी "दो बैलों की कथा" का गद्य भारत डिस्कवरी पर उपलब्ध है। इस कथा का कुल प्रसारण समय 26 मिनट 50 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।




मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं ~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

“गधा सचमुच बेवकूफ है या उसके सीधेपन, उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है, इसका निश्चय नहीं किया जा सकता।”
 (मुंशी प्रेमचंद रचित "दो बैलों की कथा" से एक अंश)


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#15th Story, Do Bailon Ki Katha: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2013/15. Voice: Archana Chaoji

Tuesday, March 12, 2013

मुंशी प्रेमचंद की कहानी "खून सफ़ेद"

इस साप्ताहिक स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में शोभा रस्तोगी "शोभा" की लघुकथा "कत्ल किसका" का पॉडकास्ट सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद की कहानी "खून सफ़ेद" जिसे स्वर दिया है अर्चना चावजी ने। कहानी "खून सफ़ेद" का कुल प्रसारण समय 30 मिनट 33 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।




मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ...मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी कहानी

पादरी मोहनदास खेमे से बाहर निकले तो साधो उन्हें खड़ा दिखाई दिया
(मुंशी प्रेमचंद की कहानी "खून सफ़ेद" से एक अंश)


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#9th Story, khoon safed: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2013/09. Voice: Archana Chaoji

Monday, December 5, 2011

बोलती कहानियाँ - कफन- मुंशी प्रेमचन्द

'बोलती कहानियाँ' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में हरिशंकर परसाई की लघुकथा 'ढपोलशंख मास्टर'  का पॉडकास्ट सुना था। रेडियो प्लेबैक इंडिया की ओर से आज हम लेकर आये हैं प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार मुंशी प्रेमचन्द की कालजयी कहानी "कफन ", जिसको स्वर दिया है अमित तिवारी ने।

Saturday, December 12, 2009

सुनो कहानी: मुंशी प्रेमचन्द की "नमक का दरोगा"

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने हरिशंकर परसाई लिखित व्यंग्य "खेती" का पॉडकास्ट अनुराग शर्मा की आवाज़ में सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद की कहानी "नमक का दरोगा", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।
कहानी का कुल प्रसारण समय मात्र 21 मिनट 31 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।




मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ...मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनिए प्रेमचंद की एक नयी कहानी

वेतन मनुष्य देता है, इसी से उसमें वृध्दि नहीं होती। ऊपरी आमदनी ईश्वर देता है, इसी से उसकी बरकत होती हैं।
(प्रेमचंद की "नमक का दारोगा" से एक अंश)


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#Fiftieth Story, Namak Ka Daroga: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2009/44. Voice: Anurag Sharma

Saturday, June 20, 2009

सुनो कहानी: इस्तीफा

मुंशी प्रेमचन्द की "इस्तीफा"

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में विष्णु प्रभाकर की कहानी फ़र्क का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं मुंशी प्रेमचंद की कहानी "इस्तीफा", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।
कहानी का कुल प्रसारण समय 21 मिनट 00 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।



मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ...मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनिए प्रेमचंद की एक नयी कहानी

बेचारे दफ्तर के बाबू को आप चाहे ऑंखे दिखायें, डॉँट बतायें, दुत्कारें या ठोकरें मारों, उसक माथे पर बल न आयेगा। उसे अपने विकारों पर जो अधिपत्य होता हे, वह शायद किसी संयमी साधु में भी न हो। संतोष का पुतला, सब्र की मूर्ति, सच्चा आज्ञाकारी, गरज उसमें तमाम मानवी अच्छाइयाँ मौजूद होती हें।
(प्रेमचंद की "इस्तीफा" से एक अंश)


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#Twenty-sixth Story, Isteefa: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2009/21. Voice: Anurag Sharma

Saturday, February 7, 2009

सुनो कहानी: प्रेमचंद की 'पुत्र-प्रेम'

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'पुत्र-प्रेम'

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने शन्नो अग्रवाल की आवाज़ में प्रेमचंद की रचना ''माँ'' का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं प्रेमचंद की अमर कहानी "पुत्र-प्रेम", जिसको स्वर दिया है लन्दन निवासी कवयित्री शन्नो अग्रवाल ने। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। कहानी का कुल प्रसारण समय है: 15 मिनट।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।



मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ...मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनिए प्रेमचंद की एक नयी कहानी

जब कोई खर्च सामने आता तब उनके मन में स्वाभावत: प्रश्न होता था-इससे स्वयं मेरा उपकार होगा या किसी अन्य पुरुष का? यदि दो में से किसी का कुछ भी उपहार न होता तो वे बड़ी निर्दयता से उस खर्च का गला दबा देते थे। ‘व्यर्थ’ को वे विष के समाने समझते थे।
(प्रेमचंद की "पुत्र-प्रेम" से एक अंश)


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#Twenty Fifth Story, Maa: Munsi Premchand/Hindi Audio Book/2009/05. Voice: Shanno Aggarwal

Saturday, September 20, 2008

सुनो कहानीः प्रेमचंद की कहानी अमृत का पॉडकास्ट

प्रेमचंद की उर्दू कहानी 'अमृत' का प्रसारण

'सुनो कहानी' के स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियों का पॉडकास्ट। अभी पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में प्रेमचंद की कहानी 'अपनी करनी' का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं अनुराग शर्मा की ही आवाज़ में उपन्यास सम्राट प्रेमचंद की कहानी 'अमृत' का पॉडकास्ट। मूलतः उर्दू में लिखी गयी यह कहानी ‘प्रेम पचीसी’ से ली गयी है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

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#Fifth Story, Amrit: Munsi Premchand/Hindi Audio Book/2008/06. Voice: Anurag Sharma

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