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Monday, August 9, 2010

पहले हिन्दी फिल्मी गीत को संगीतबद्ध कीजिए (एक सम्मानजनक मौका)

हिन्द-युग्म का सबसे लोकप्रिय स्तम्भ 'ओल्ड इज गोल्ड' अब अपने 456वें पायदान पर पाँव धर चुका है। हम इसकी सफलता से खुश तो हैं ही साथ ही गौरवान्वित भी हैं कि पुराने फिल्मी पर आधारित इस कार्यक्रम को श्रोताओं/पाठकों ने इतना सराहा।

एक-एक करके हम इसके 500वें अंक की तरफ भी पहुँच जायेंगे, तो आवाज़ टीम ने निश्चय किया कि क्यों न इस अंक को यादगार बनाया जाय। कुछ ऐसा किया जाय, जो अभी तक किसी ने नहीं किया। जी हाँ, हम कुछ ऐसा ही करने जा रहे हैं। आपलोगों में से बहुतों को तो पता ही होगा कि हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री का पहला गीत नष्ट हो चुका है। जी हाँ, 'आलम आरा' फिल्म को पहली बोलती फिल्म और इसके गीत 'दे दे खुदा के नाम पे' को पहला हिन्दी फिल्मी गीत माना जाता है। अब न तो यह फिल्म कहीं मौज़ूद है और न ही इसके गीतों को संरक्षित करके रखा गया है।

तो हमने तय किया है कि 'ओल्ड इज गोल्ड' के 500वें संस्करण में इस गीत का संगीतबद्ध संस्करण हिन्द-युग्म ज़ारी करेगा। चूँकि इस गीत की रिकॉर्डिंग कहीं भी मौज़ूद नहीं है, इसलिए हम इस गीत एक ऑनलाइन प्रतियोगिता के माध्यम से संगीतबद्ध करवा रहे हैं। हमारी टीम द्वारा किये गये शोध के अनुसार इस गीत के बारे में तरह-तरह की बातें कहीं जाती हैं। कोई कहता है कि यह एक ग़ज़ल थी, जिसे फिल्म के ही कलाकार, जिनपर यह फिल्माया गया था, वज़ीर मोहम्मद ख़ान ने लिखी थी। कुछ कहते हैं कि इसमें एक ही शेर था। कोई कहता है कि यह पूरा गीत था। लेकिन हम इसके मुखड़े को ही खोज पाये।

इसलिए पहले हमने अपने कविता प्रभाग पर इस मुखड़े को बढ़ाने की प्रतियोगिता रखी और उसमें से 4 और लाइने चुनीं। अब इस गीत के बोलों की शक्ल कुछ इस तरह से हो गई है-

दे दे ख़ुदा के नाम पे प्यारे, ताक़त हो गर देने की,
चाहे अगर तो माँग ले मुझसे, हिम्मत हो गर लेने की

इत्र, परांदी और महावर, जिस्म सजा, पर बेमानी
दुलहन रुह को कब है ज़रुरत सजने और सँवरने की

चला फकीरा हंसता-हंसता, फिर जाने कब आएगा
जोड़-जोड़ कर रोने वाले, फुर्सत कर कुछ देने की

संगीतकारों/गायकों को क्या करना है-

1) उपर्युक्त गीत को संगीतबद्ध करके 10 सितम्बर 2010 तक podcast@hindyugm.com पर भेजें।
2) गीत के साथ अपना परिचय और चित्र भी भेजें।


पुरस्कारः

1) आवाज़ टीम सर्वश्रेष्ठ संगीतबद्ध गीत का निर्णय करेगी, जिसे 'ओल्ड इज़ गोल्ज़' के 500वें अंक में रीलिज किया जायेगा।
2) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि वाले गीत की टीम को हिन्द-युग्म के वार्षिकोत्सव (जो कि 25 दिसम्बर से 31 दिसम्बर 2010 के मध्य दिल्ली में आयोजित होगा) में सम्मानित किया जायेगा और रु 5000 का नगद इनाम भी दिया जायेगा।


नोट- उपर्युक्त गीत का प्रथम 2 पंक्तियाँ ज्ञात श्रोतों के आधार पर 'आलम आरा' फिल्म से हैं। तीसरी और चौथीं पंक्ति स्वप्निल तिवारी 'आतिश' की हैं और अंतिम 2 पंक्तियाँ निखिल आनंद गिरि की हैं। गीत को आगे बढ़ाने के लिए आयोजित की गई प्रतियोगिता में कुल 7 लोगों ने भाग लिया था (डॉ॰ अरुणा कपूर, शरद तैलंग, मोहन बिजेवर, स्वप्निल तिवारी, निखिल आनंद गिरि, संजय कुमार, आकर्षण कुमार गिरि)। हम सभी का धन्यवाद करते हैं।

Monday, September 1, 2008

हिस्सा बनिए आवाज़ पर " लता संगीत पर्व " का और जीतिए इनाम

दोस्तो,

लता दी
इस माह की 28 तारीख को हम सब की प्रिय गायिका लता मंगेशकर यानी लता दी, अपना 79वां जन्मदिन मनायेंगी. चूँकि लता दी हिन्दी फ़िल्म संगीत जगत की इतनी बड़ी शख्सियत हैं कि मात्र एक दिन का समय काफ़ी नहीं होगा, उनके अपार गीतों के संग्रह का जिक्र करने के लिए, इसलिए आवाज़ की टीम ने तय किया है कि हम महीने भर का "लता संगीत पर्व" मनाएंगे. जिसमें लता दी के संगीत दीवानों के लिए एक नायाब प्रतियोगिता हम आयोजित करने जा रहे हैं. कोई भी व्यक्ति इस प्रतियोगिता में भाग ले सकता है, करना सिर्फ़ इतना है, कि लता दी का कोई एक गीत आपको चुनना होगा, और उस गीत से सम्बंधित तमाम जानकारियों पर 300 से 400 शब्दों का एक आलेख लिखना होगा. जिसमे उस गीत से जुड़ी हुई कोई अनूठी बात, उस गीत को कोई ख़ास विशेषता जिसके कारण वो गीत आपको इतना अधिक पसंद है, उस गीत से जुड़े अन्य कलाकारों के नाम और गीत के बोल आदि शामिल होंगे. सबसे बढ़िया तरीके से प्रस्तुत पहले 3 आलेखों को क्रमशः 500, 300 और 200 रुपए की पुस्तकें मसि कागद की तरफ़ से और 10 अन्य आलेखों को आवाज़ की तरफ़ से "पहला सुर" एल्बम की एक एक प्रति भेंट की जायेगी.


शर्तें -

1. आलेख हिन्दी में लिखा होना चाहिए, हिन्दी में लिखने के लिए आप इस लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं, किसी भी सहायता के लिए आप hindyugm@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं.

2. प्रवाष्ठियाँ podcast.hindyugm@gmail.com पर भेजें.

3. प्रवष्टि भेजनी की अन्तिम तारीख 15 सितम्बर 2008 है.

4. परिणामों की घोषणा 28 तारीख, लता दी के जन्मदिवस पर की जायेगी.

5. एक मेल खाते से एक ही प्रवष्टि भेजी जा सकती है.

6. आप यदि अपनी तस्वीर व अन्य कोई जानकारी अपने बारे में प्रकाशित करना चाहें तो साथ में संलग्न कर भेज सकते हैं.

तो देर किस बात की, लिख डालिए लता दी के अपने पसंदीदा गीत पर एक आलेख और इस लता संगीत पर्व में शामिल होकर उस महान गायिका तक पहुंचाइये अपने दिल की बात जिसके गीतों ने आपके जीवन को कई मधुर और सुरीले लम्हें दिए हैं.

हमारी कोशिश रहेगी की इस माह हम लता दी का एक्सक्लूसिव संदेश (आवाज़ के नाम) आप तक पहुंचायें, इसके आलावा पंकज सुबीर आपके लिए लायेंगे लता दी के कुछ अनमोल नगमें और बातें, और संजय पटेल अपने ख़ास अंदाज़ में बताएँगे लता दी की कुछ अनसुनी बातें.


आप यदि लता का कोई विशेष गीत सुनना चाह रहे हैं, जिसे आप काफ़ी अर्से से सुन नहीं पाये हैं, ऑनलाइन कहीं मिल नहीं पा रहा है तो कृपया कमेंट में आप अपना अनुरोध भेज दें, आवाज़ के पाठक, श्रोता और कर्ता-धर्ता अगले २४ घण्टों के भीतर आवाज़ पर उसे उपलब्ध कराने की कोशिश करेंगे।

लता दी का कोई गीत यदि आप बहुत बढ़िया गाती हैं, और आपको लगता है कि आपके गायकी में है ज़ादू तो उसे भी रिकॉर्ड कर हमें भेजिए, २८ सित्मबर को हम चुने हुए सर्वश्रेष्ठ गीत को प्रसारित करेंगे। इस सब के अलावा और भी बहुत कुछ होगा, जिससे रोशन होगा आवाज़ पर - लता संगीत पर्व.

Sunday, August 10, 2008

समीक्षा के अखाडे में दूसरा दंगल

सरताज गीत बनने की जंग शुरू हो चुकी है, जुलाई के जादूगर गीत, जनता की अदालत में हाज़री बजाने के बाद, पहले चरण की समीक्षा की कठिन परीक्षा से गुजर रहे हैं, जैसा की हम बता चुके हैं कि पहले चरण में ३ समीक्षक होंगे और दूसरे और अन्तिम चरण में दो समीक्षक होंगे, समीक्षा का दूसरा चरण सत्र के समापन के बाद यानी जनवरी के महीने शुरू होगा, फिलहाल देखते हैं कि पहले चरण के, दूसरे समीक्षक ने जुलाई के जादूगरों को कितने कितने अंक दिए हैं. इस समीक्षा के अंकों में पहली समीक्षा के अंक जोड़ दिए गए हैं जिसके आधार पर, हमारे श्रोता देख पाएंगे कि कौन सा गीत है, अब तक सबसे आगे.

गीत समीक्षा

संगीत दिलों का उत्सव है ....

पहला गीत है “संगीत दिलों का उत्सव है…” सभी गीतों में सबसे श्रेष्‍ठ.. गीत संगीत और गायकी सब कुछ एकदम परफेकक्ट ... गीत संगीत और गायकी तीनों पक्षों में ताजगी लगती है। बीच बीच में आलाप बहुत प्रभावित करता है। इस गीत को 8 नंबर दे रहा हूँ।

संगीत दिलों का उत्सव है... को दूसरे निर्णायक द्वारा मिले 8/10 अंक, कुल अंक अब तक 14 /20

बढे चलो.

दूसरा गीत है “बढ़े चलो…”, आज के हिन्द का युवा...ठीक कह सकते हैं। बहुत दिल को छू नहीं पाया। आज के प्रचलन के हिसाब से ठीक है। गायकी अच्छी है पर संगीत तेज है और वाद्ययंत्रों की आवाज हावी हो जाने के कारण गीत में वो बात नहीं बन पाई जो गीत के बोलों के हिसाब से बन सकती थी। इस गीत को मैं 6 नंबर ही दे पा रहा हूँ.

बढे चलो, को दूसरे निर्णयक से अंक मिले 6 / 10, कुल अंक अब तक 13 /20.

आवारा दिल.

तीसरा गीत है, “आवारा दिल…”। बढ़िया गीत... इतनी कम उम्र में संगीतकार ने जो काम किया है उस हिसाब से उनका भविष्य उज्जवल है। गीत अच्छा संगीत बेहतर और गायकी बेहतरीन इस गीत को 7 नंबर दे रहा हूँ।

आवारा दिल, को दूसरे निर्णायक से मिले 7 / 10, कुल अंक अब तक 15 /20.


तेरे चेहरे पे ...

आखिरी गीत एक गज़ल है “तेरे चेहरे पे…”। छोटा सी ग़ज़ल, संगीत गीत और गायकी में ताजगी। बहुत बढ़िया संयोजन। इस गीत को भी 7 नंबर मिल रहे हैं

तेरे चेहरे पे..., को दूसरे निर्णायक ने मिले 7 /10, कुल अंक अब तक 13 /20

चलते चलते...

तो दोस्तों, दो समीक्षकों के निर्णय आ चुके हैं, अभी भी पहले चरण में "आवारा दिल" ने बढ़त कायम रखी है, "संगीत दिलों का उत्सव है..." तीसरे स्थान से उछल कर दूसरे पर आ गया है, और शीर्ष गीत को कड़ी चुनौती दे रहा है. अब तीसरे (पहले चरण के अन्तिम) समीक्षक के निर्णय के बाद ही स्थिति साफ़ हो पायेगी. तीसरे समीक्षक की पारखी समीक्षा लेकर हम उपस्थित होंगे अगले रविवार को. हिंद युग्म, आवाज़ द्वारा संगीत के क्षेत्र में हो रहे इस महाप्रयास के लिए अपना बेशकीमती समय निकल कर, युवा कलाकारों को प्रोत्साहन/ मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से आगे आए हमारे समीक्षकों के प्रति हिंद युग्म की पूरी टीम अपना आभार व्यक्त करती है.

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