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Tuesday, January 27, 2009

वर्ष २००८ के टॉप ५० हिन्दी फिल्मी गीतों की माला



हिन्द-युग्म की आवाज़ टीम ने वर्ष २००८ में रीलिज हुई हिन्दी फिल्मों के श्रेष्ठ ५० गीतों की एक माला बनाई है। इस वार्षिक गीतमाला को बनाने में श्रोताओं की राय भी सम्मलित की गई हैं। गीत चुनते वक़्त इस बात का ध्यान रखा गया है कि ऐसे गीत रखें जायें जिनकी उम्र लम्बी हो। आप भी सुनें और अपने विचार दें॰॰॰







Countdown 50-41Countdown 40-31Countdown 30-21Countdown 20-11Countdown 10-1





Top 50 Bollywood Songs, Top 50 Hindi Film Songs 2008

Saturday, December 27, 2008

वार्षिक गीतमाला से पहले वो गीत वो टॉप ५० में स्थान नही पा सके.

इससे पहले कि हम अपनी वार्षिक गीतमाला का शुभारम्भ करें, कुछ बातें हम साफ़ कर देना चाहेंगें. टॉप ५० गीत को आवाज़ के एक पैनल ने बहुत सोच विचार के बाद चुना है जिसमें मुख्य रूप से चार बातों का ध्यान रखा गया है. गीत का नया पन, गीत की मौलिकता, गीत की रिपीट वैल्यू, और गीत की लोकप्रियता. गौर करें कि गीत की लोकप्रियता इन बताये गए चार घटकों में से एक ही है, अर्थात ये हो सकता है कि कोई गीत बहुत लोकप्रिय होने के बावजूद आपको टॉप ५० से नदारद मिले और कोई गीत बहुत कम सुना गया हो पर अपनी मौलिकता, नयेपन, लंबे समय तक सुने जा सकने की योग्यता के दम पर इस सूची में स्थान प्राप्त कर पाने में सफल रहा हो. गीतों की अन्तिम सारणी हमने अपने सुधी श्रोताओं के वोटिंग के आधार पर निर्धारित की है. अन्तिम दिन टॉप १० गीतों के साथ साथ हम अपने श्रोताओं को वर्ष के ५ गैर फिल्मी गीत भी सुनवायेंगे.

पर इससे पहले कि हम अपने टॉप ५० की तरफ़ बढ़ें सुन लेते हैं १० ऐसे गीत जो पिछले साल बेहद मकबूल हुए पर हमारे टॉप ५० में स्थान नही बना सके.

१०. टल्ली - अगली और पगली - पिछले साल ये गीत खूब बजा पर न तो गाने में कोई नयापन है न ही रिपीट वैल्यू.
९. ठ कर के - गोलमाल रिटर्न - ये फ़िल्म पिछले साल की सबसे कामियाब फिल्मों में से एक है, और इस गीत के फिल्मांकन में पानी की तरह पैसा बहाया गया है. गाने की रिपीट वैल्यू शून्य है.
८. तंदूरी नाइट्स - क़र्ज़ - एक बेहद कामियाब पुरानी फ़िल्म का बकवास रीमेक. फ़िल्म संगीत प्रधान होकर भी हिमेश कुछ भी नया नही कर पाये यहाँ. अब इस बेहद प्रतिभाशाली संगीतकार को नए सिरे से अपना संगीत प्लान करने की बहुत सख्त ज़रूरत है. ये गीत हालाँकि खूब बजा पिछले साल पर इसकी धुन "रेस" के एक गीत "ज़रा ज़रा" से बहुत मिलती जुलती है हो सकता है दोनों गीत एक ही जगह से "प्रेरणा' लेकर गढे गए हों.
७. रेस सांसों की - रेस - इस फ़िल्म को कामियाब बनाने के लिए संगीतकार ने जम कर यहाँ वहां से धुन उठा कर हिट गीत दिए हैं. गीत सिर्फ़ आपके पैरों को थिरकाता है.
६. सिंग इस किंग - सिंग इस किंग - एक और चुराया हुआ गीत. फ़िल्म अक्षय कुमार के उत्कृष्ट अभिनय के लिए बरसों याद की जायेगी, फ़िल्म का संगीत ओवारोल अच्छा है, पर ये कॉपी गीत चाँद पर दाग जैसा है.
५. फ़िर मिलेंगें चलते चलते -रब ने बना दी जोड़ी - बॉलीवुड को यादगारी देते हुए बहुत गीत बन चुके हैं, फ़िल्म "ओम् शान्ति ओम्" के शीर्षक गीत के बाद ये गीत मात्र नक़ल ही लगता है. नयेपन का अभाव.
४. पहली नज़र में - रेस - बेअकल नक़ल, मौलिकता लेश मात्र भी नही....दुखद.
३. तू है मेरी सोणिये - किस्मत कनेक्शन - थिरकने पर मजबूर करने वाला गीत. पर मौलिकता और रिपीट वैल्यू का अभाव.
२.अक्सा बीच - गोड़ तुसी ग्रेट हो - नयापन नही है गाने में, पर हास्य का अच्छा पुट है शब्दों में और संगीत संयोजन भी उसे बढ़ावा देता है.
१. लेज़ी लम्हें - थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक - शब्द और संगीत का बढ़िया मेल. बेहद करीब रहा ये गीत टॉप ५० के.

सुनिए ये सभी गीत इसी क्रम में और तैयार हो जाईये हमारे टॉप ५० गीतों पर झूमने के लिए -

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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