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शनिवार, 26 दिसंबर 2015

2015 के कमचर्चित सुरीले गीतों की हिट परेड - The Unsung Melodies of 2015



चित्रशाला - नववर्ष विशेष 

2015 के कमचर्चित सुरीले गीतों की हिट परेड

The Unsung Melodies of 2015





रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार! प्रस्तुत है फ़िल्म और फ़िल्म-संगीत के विभिन्न पहलुओं से जुड़े विषयों पर आधारित शोधालेखों का स्तंभ ’चित्रशाला’। वर्ष 2015 हमसे विदा लेना चाहता है। और इसी वर्ष के समाप्त होने से इस दशक का पूर्वार्ध भी समाप्त हो जाएगा। इस दशक में फ़िल्म संगीत का जो स्वरूप अब अक हम सबसे देखा, उससे यही कहा जा सकता है कि वही गाने हिट हो रहे हैं, या उन्हीं गानों को बढ़ावा मिल रहा है जिनमें कोई पंच लाइन, या आइटम वाली बात, और इस तरह का कोई मसाला हो। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कुछ ऐसे गुमनाम गीत आए जिनकी तरफ़ किसी का भी ध्यान नहीं गया, पर स्तर की दृष्टि से ये गीत बहुत से लोकप्रिय और हिट गीतों के मुकाबले कहीं अधिक उत्कृष्ट हैं। ऐसे ही दस गीत को चुन कर आज के ’चित्रशाला’ का यह नववर्ष विशेषांक प्रस्तुत कर रहे हैं। तो पेश है वर्ष 2015 का कमचर्चित हिट परेड, The Top-10 Unsung Melodies of 2015.


10: "साईं बाबा के दरबार आ शीष झुका ले" (साईं महिमा)

एक समय था जब सामाजिक फ़िल्मों के साथ-साथ पौराणिक व धार्मिक फ़िल्मों का जौनर भी काफ़ी लोकप्रिय हुआ करता था। भले ऐसे फ़िल्मों को ज़्यादा व्यावसायिक सफलता ना मिला करता हो, पर इन फ़िल्मों का अलग दर्शक-समूह होता है, सिनेमाघरों में ये फ़िल्में लगती थीं। धीरे-धीरे धार्मिक फ़िल्मों का जौनर लगभग समाप्त हो चुका है, बस इक्का-दुक्का फ़िल्में आ जाती हैं कभी कभार। और जहाँ तक भक्ति रचनाओं का सवाल है, तो सूफ़ी श्रेणी की कुछ भक्तिमूलक क़व्वालियाँ ज़रूर फ़िल्मों में सुनने को मिल जाती हैं आजकल। वर्ष 2015 में ’साईं महिमा’ और ’गौड़ हरि दर्शन’ नामक दो फ़िल्में बनी हैं, पर ये फ़िल्में कब आईं कब गईं कुछ पता नहीं चला। ना किसी सिनेमाघर में ये फ़िल्में लगीं और ना इनके गीत रेडियो पर सुनने को मिले। बस यू-ट्युब पर निर्माता ने अपलोड कर दिए हैं। तो लीजिए प्रस्तुत है ’2015 कमचर्चित हिट परेड’ के पायदान नंबर 10 पर फ़िल्म ’साईं महिमा’ की एक भक्ति रचना, जिसे हिमांशु शर्मा ने गाया और स्वरबद्ध किया है, और इसे लिखा है प्रदीप शर्मा ने।




9: "सज के चली है भारत माँ" (जय जवान जय किसान)

जावेद अली
भक्ति रचनाओं की तरह देशभक्ति रचनाओं का भी अकाल पड़ चुका है हिन्दी फ़िल्म- संगीत संसार में। इस सूखे संसार को हरा-भरा करने हेतु मदन लाल खुराना, सीमा चक्रवर्ती और पंकज दुआ जैसे निर्माता सामने आए और बनाई ’जय जवान जय किसान’। ओम पुरी, प्रेम चोपड़ा, रति अग्निहोत्री जैसे वरिष्ठ अभिनेता भी इस फ़िल्म को नहीं बचा सके। संगीतकार रूपेश गिरिश का संगीत भी अनसुना रह गया। इस फ़िल्म के जिस गीत को हमने इस हिट परेड के पायदान नंबर 9 के लिए चुना है, उसकी ख़ास बात यह है कि यह आपको मनोज कुमार की बहुचर्चित देशभक्ति फ़िल्म ’पूरब और पश्चिम’ के मशहूर गीत "बहन चली, दुल्हन चली, तीन रंग की चोली" की याद दिला जाएगी। किशन पालिवाल के लिखे और जावेद अली की आवाज़ में इस गीत के बोलों "देश प्रेम के गहनों से सज के चली है भारत माँ" की समानता ’पूरब और पश्चिम’ के उस गीत से देखी जा सकती है। कुल मिला कर यह एक कर्णप्रिय रचना है, कम से कम वाद्यों का प्रयोग हुआ है और उससे भी बड़ी बात यह कि किसी कृत्रिम यांत्रिक संगीत का बोलबाला नहीं है इस गीत में।




8: "माँ सुन ले ज़रा " (Take it Easy)

सोनू निगम
भारत माँ के बाद अब एक और माँ के लिए एक बेटे के दिल की पुकार पेश है। धार्मिक और देशभक्ति फ़िल्मों के बाद अब जिस जौनर की हम बात करने जा रहे हैं, वह है बाल फ़िल्मों की, और इस जौनर की भी क्या दशा, ज़्यादा कुछ कहने की आवश्यक्ता नहीं है। ’तारे ज़मीन पर’ जैसी फ़िल्में रोज़ नहीं बनती। 2015 में एक बाल-फ़िल्म आई ’Take it Easy'। इसमें मुख्य चरित्रों में दो दस वर्षीय बालक हैं। एक के पिता खिलाड़ी है और वो चाहते हैं कि उनका बेटा उनकी तरह खिलाड़ी बने जबकि बेटे को पढ़ाई-लिखाई में ज़्यादा रुचि है। दूसरी तरफ़ दूसरे लड़के की कहानी बिल्कुल विपरीत है। उसके माता-पिता अपने सपनों को उस पर थोपना चाहते हैं जबकि बेटे को कुछ और ही करना है। ऐसे में बेटा क्या करे! इस परिदृश्य में प्रस्तुत गीत सार्थक है जिसमें बेटा माँ से कह रहा है कि "दिल पे उम्मीदों का बोझ, कुछ माँगे हर कोई रोज़, हँसी मेरी कहीं छुप गई, कहानी कहीं रुक गई, माँ सुन ले ज़रा, कहता है क्या यह दिल मेरा"। सोनू निगम की आवाज़ ने गीत को काफ़ी असरदार बना दिया है। सुनिल प्रेम व्यास, सुशान्त पवार और अमोल पावले के लिखे इस गीत को संगीत से संवारा है सुशान्त-किशोर ने।




7: "इश्क़ फ़ोबिया" (युवा)

इरफ़ान
जसबीर भट्टी लिखित व निर्देशित फ़िल्म ’युवा’ भी बॉक्स ऑफ़िस पर पिट गई। लेकिन इसके गीतों में दम ज़रूर था। फ़िल्म में संगीत देने के लिए चार संगीतकार लिए गए। यह आजकल फ़िल्मों में एकाधिक संगीतकार का ट्रेन्ड चल रहा है, और यह फ़िल्म व्यतिक्रम नहीं। राशिद ख़ाँ, पलक मुछाल, हनीफ़ शेख और प्रवीण-मनोज इस फ़िल्म के संगीतकार हैं और भूपेन्द्र शर्मा ने गीत लिखे हैं। फ़िल्म के तमाम गीतों में एक गीत है मोहम्मद इरफ़ान का गाया हुआ जिसने हमारा ध्यान आकर्षित किया। ये वही इरफ़ान हैं जिन्होंने ’जो जीता वो ही सुपरस्टार’ का ख़िताब जीता था और ’अमूल स्टार वॉयस ऑफ़ इण्डिया’ और ’सा रे गा मा पा’ के जानेमाने प्रतियोगी रहे। मेलडी, रोमान्स और सुफ़ियाना अंदाज़, कुल मिलाकर इस गीत को अच्छी तरह से स्वरबद्ध किया गया है, पर सबसे अच्छी बात है इसके अंतरों के बोल। गीत फ़िल्म में दो बार है, एक बार इरफ़ान की एकल आवाज़ में और एक बार पलक मुछाल और भानु प्रताप की युगल आवाज़ों में।



6: "एक हथेली तेरी हो, एक हथेली मेरी हो" (इश्क़ के परिन्दे)

केका घोषाल
पिछले दौर के गायकों में अगर कोई गायक आज टिका हुआ है तो वो हैं सोनू निगम। आजे के नवोदित गायकों की भीड़ में सोनू निगम आज भी अपने आप को एक अलग मुकाम पर बनाये रखा है और हर साल उनके कुछ अच्छे गीत सुनने को मिलते हैं। केका घोषाल के साथ सोनू निगम के इस युगल गीत के बोल और संगीत दोनों बहुत सुरीले हैं और एक कर्णप्रिय गीत की जितनी विशेषताएँ होती हैं, वो सब मौजूद हैं। हालाँकि इस गीत की धुन में ज़्यादा नई बात नहीं है और इस तरह की धुन पहले भी सुनाई दी है कई बार, पर एक ताज़गी ज़रूर है जिसकी वजह से इस गीत को सुनना अच्छा लगता है। इस गीत में पारम्परिक और समकालीन वाद्यों का संगम सुनने को मिलता है। एक तरफ़ बाँसुरी है तो दूसरी तरफ़ है गिटार। कई लोगों ने यह धारणा बना ली है कि केका घोषाल गायिका श्रेया घोषाल की बहन है, पर यह तथ्य ग़लत है। इन दोनों का कोई रिश्ता नहीं है संगीत के अलावा। केका घोषाल भी ’सा रे गा मा पा’ से रोशनी में आईं हैं। लीजिए इस गीत सुनिए, पर उससे पहले आपको यह बता दें कि इस गीत का एक सैड वर्ज़न भी है सोनू निगम की आवाज़ में और एक और रीमिक्स वर्ज़न है विजय वर्मा और सुप्रिया पाठक की आवाज़ों में।



5: "हमारी अधुरी कहानी" (हमारी अधुरी कहानी)

अरिजीत सिंह
कुछ अभिनेताओं के साथ ऐसा अक्सर हुआ है कि उनकी फ़िल्मों के गानें हमेशा अच्छे हुए हैं। उदाहरण के तौर पर पुराने समय में शम्मी कपूर और राजेश खन्ना की सभी फ़िल्मों के गाने हिट हुआ करते थे चाहे फ़िल्म चले ना चले। आगे चलकर सलमान ख़ान की फ़िल्मों के गाने हिट होते रहते थे। और इस दौर की अगर हम बात करें तो इमरान हाश्मी एक ऐसे अभिनेता हैं जिनकी फ़िल्मों का संगीत ख़ूब चला। 2015 में इमरान हाश्मी और विद्या बालन अभिनीत एक फ़िल्म आई ’हमारी अधुरी कहानी’। फ़िल्म का शीर्षक इमरान हाश्मी अभिनीत फ़िल्म ’गैंगस्टर’ के एक गीत "भीगी भीगी सी है रातें भीगी भीगी" के मुखड़े के अन्तिम तीन शब्द ही हैं। ’हमारी अधुरी कहानी’ मोहित सुरी निर्देशित फ़िल्म है, इसलिए इस फ़िल्म के गीत-संगीत से लोगों को उम्मीदें थीं, मोहित सुरी को अच्छे संगीत की परख जो है। फ़िल्म तो नहीं चली पर इसके गीत-संगीत ने निराश नहीं किया। फ़िल्म के कुल पाँच गीतों के हर गीत में कुछ ना कुछ ख़ास बात है। ’कमचर्चित हिट परेड’ के पायदान नंबर 5 के लिए हमने इस फ़िल्म का शीर्षक गीत ही चुना है जिसे अरिजीत सिंह ने गाया है। रश्मी विराग के लिखे और जीत गांगुली द्वारा स्वरबद्ध इस गीत का स्तर आजे के दौर के आम गीतों से काफ़ी उपर है। प्रेम और विरह के भावों को व्यक्त करता यह गीत सुनने वाले के मन पर असर ज़रूर करता है। और एक बार सुनने के बाद लूप में सुनने का मन होता है। कम से कम साज़ों का इस्तमाल, सुरीली धुन, मनमोहक गायकी, असरदार बोल, कुल मिलाकर यह भावुक गीत इस ऐल्बम का श्रेष्ठ गीत है।





4: "तू, मेरे सारे इम्तिहानों के जवाब तू" (दम लगाके ह‍इशा)


अनु और सानू
वर्ष 2015 हिन्दी सिने संगीत के लिए एक उल्लेखनीय वर्ष माना जा सकता है क्योंकि इस वर्ष पुनरागमन हुआ तीन कलाकारों का जिन्होंने 90 के दशक में काफ़ी धूम मचाई थी। ये हैं संगीतकार अनु मलिक, गायक कुमार सानू और गायिका साधना सरगम। जी हाँ, ’दम लगाके ह‍इशा’ फ़िल्म में अनु मलिक ने 90 के उसी सुरीले रोमान्टिक दौर को वापस लाने की कोशिश की है, और इसमें वो कामयाब भी रहे हैं। इस फ़िल्म में कुल छह गीत हैं जिनमें कुमार सानू का एकल गीत "तू..." और कुमार-सानू-साधना सरगम के युगल गीत "दर्द करारा" ख़ास उल्लेखनीय हैं। ख़ास कर "तू..." तो शायद पिछले दस वर्षों के तमाम श्रेष्ठ रोमान्टिक गीतों में से एक है। और ऐसे गीतों के लिए ही तो कुमार सानू जाने जाते रहे हैं। इस गीत में हमें निराश नहीं करते और इस गीत को सुनते हुए हम उसी 90 के दशक में पहुँच जाते हैं। किसी को अपने स्कूल या कॉलेज के दिन याद आते हैं, तो किसी को अपने दफ़्तर-जीवन के दिन। निस्संदेह यह गीत इस ऐल्बम का श्रेष्ठ गीत है। इसके बारे में ज़्यादा कुछ कहने की आवश्यक्ता नहीं, बस सुनिए...



3: "भोर भयी और कोयल जागे" (बेज़ुबान इश्क़)

ओस्मान मीर
कुछ गीत आज ऐसे भी बन रहे हैं जिहें सुनते हुए मन में यह उम्मीद जागती है कि शायद सुरीले और अच्छे गीतों का दौर अभी समाप्त नहीं हुआ है। इस हिट परेड के तीसरे पायदान के लिए हमने जो गीत चुना है वह है ’बेज़ुबान इश्क़’ फ़िल्म का "भोर भयी और कोयल जागे"। जी नहीं, इस गीत का ’सत्यम शिवम सुन्दरम्’ के "भोर भयी पनघट पे" के साथ कोई समानता नहीं है। इसे राजस्थानी लोक गायक ओस्मान मीर ने गाया है। ओस्मान मीर के लोक गीत लोकप्रिय रहे हैं। प्राकृतिक सुन्दरता को दर्शाता यह गीत भी उतना ही सुन्दर है। राजस्थान की मिट्टी की ख़ुशबू लिए यह गीत ना केवल एक लोक गीत है बल्कि इसमें भक्ति रस का भी एक पुट है। फ़िल्म की नायिका स्नेहा उल्लाल के एन्ट्री सॉंग् के रूप में इस गीत को रखा गया है। स्नेहा ने इसमें एक श्रद्धालु का चरित्र निभाया है। इस गीत में प्रस्तुत ध्वनियाँ और वाद्य तरंगें इतने कर्णप्रिय हैं कि सुबह सुबह सुन कर मन-मस्तिष्क पवित्रा हो जाता है। बाँसुरी, घण्टियों और शंख की ध्वनियों से गीत की आध्यात्मिक्ता और भी निखर कर सामने आई है। ’बेज़ुबान इश्क़’ फ़िल्म के अन्य गीत भी सुनने लायक है, पर प्रस्तुत गीत सबसे ज़्यादा ख़ास है। रूपेश वर्मा के संगीत निर्देशन में इस गीत को लिखा है यशवन्त गंगानी ने।



2: "आजा मेरी जान" (I Love NY)

पंचम
'2015 कमचर्चित हिट परेड’ के शीर्ष के दो गीत ऐसे हैं जिनसे सीधे सीधे जुड़े हैं फ़िल्म-संगीत संसार के दो दिग्गज, दो स्तंभ, दो किंवदन्ती, जिनकी तारीफ़ में कुछ कहना सूरज को दीया दिखाना है। इनमें जो पहला नाम है, उन्हीं का स्वरबद्ध गीत है इस हिट परेड के दूसरे पायदान का गीत। और ये शख़्स हैं राहुल देव बर्मन, हमारे पंचम दा। आश्चर्य हो रहा है आपको? आपको याद होगा 1993 में एक फ़िल्म आई थी ’आजा मेरी जान’, जिसमें अमर-उत्पल का संगीत था। इसमें गुल्शन कुमार ने अपने भाई कृषण कुमार को लौन्च करने के लिए एक गीत राहुल देव बर्मन के कम्पोज़िशन का भी रखा था। उन्हीं दिनों अनुराधा पौडवाल चाहती थीं कि पंचम उनके गाये आठ गीतों के एक ऐल्बम के लिए संगीत तैयार करे। और उन्हीं गीतों में से एक गीत था "आजा मेरी जान", जिसे गुल्शन कुमार ने फ़िल्म ’आजा मेरी जान’ में इस्तमाल किया। इसे अनुराधा पौडवाल और एस. पी. बालसुब्रह्मण्यम ने गाया था। पर इसे फ़िल्म के साउण्डट्रैक में नहीं रखा गया और जो ऐल्बम लोगों के हाथ आया उसमें केवल अमर-उत्पल के स्वरबद्ध गीत ही थे। इस तरह से पंचम का यह गीत गुमनाम ही रह गया (हालाँकि बांगला में पंचम की आवाज़ में इस धुन पर आधारित गीत काफ़ी लोकप्रिय रहा)। 2015 की फ़िल्म ’I Love NY' में इस गीत को DJ फुकन ने बड़ी ख़ूबसूरती से अरेंज कर मौली दवे से गवाया है। गीत के बोल लिखे हैं मयुर पुरी ने। मौली की थोड़ी कर्कश (husky) आवाज़ ने गीत में एक कामुक पुट जोड़ा है। आर. डी. बर्मन के नाम इस हिट परेड का दूसरा पायदान!



1: "जीना क्या है जाना मैंने" (Dunno Y2 - Life is a Moment)

लता मंगेशकर
अभी हमने दो दिग्गज कलाकारों का उल्लेख किया था, जिनमें एक हैं राहुल देव बर्मन, जिनका गीत अभी हमने सुना। दूसरी किंवदन्ती हैं स्वर-साम्राज्ञी, भारतरत्न लता मंगेशकर। यह किसी विस्मय, किसी आश्चर्य से कम नहीं कि 86 वर्ष की आयु में लता जी ने किसी फ़िल्म में गीत गाया है, वर्ष 2015 के हिट परेड में लता जी का गाया गीत शामिल हो रहा है। 1945 में लता जी ने ’बड़ी माँ’ फ़िल्म में "माता तेरी चरणों में" गीत गाया था, और उससे 70 वर्ष बाद भी उनका गाया नया गीत रिलीज़ हो रहा है। वर्ष 2010 में 'Dunno Y - Na Jaane Kyun' फ़िल्म का शीर्षक गाने के बाद जब 2015 में इस फ़िल्म का सीकुइल बना ’'Dunno Y - Life is a Moment' के शीर्षक से, तब संगीतकार निखिल कामत ने इसमें भी लता जी से गीत गवाने की इच्छा व्यक्त की। गीत लिखा है विमल कश्यप ने। इसी फ़िल्म में सलमा आग़ा ने भी एक गीत गाया है पर उस गीत को सुन कर ऐसा लगता है कि सलमा आग़ा के स्तर की गायिका के लिए यह गीत ज़रा हल्का हो गया है। ख़ैर, हम लता जी के गीत की बात कर रहे थे। आप सुनिए यह गीत और इस हिट परेड को समाप्त करने की मुझे दीजिए अनुमति। नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ मैं, सुजॉय चटर्जी, प्रस्तुति सहायक कृष्णमोहन मिश्र के साथ आपसे विदा लेता हूँ, नमस्कार!




तो यह थी नववर्ष की हमारी विशेष प्रस्तुति। आशा है आपको हमारी यह कोशिश पसन्द आई होगी। अपनी राय टिप्पणी में ज़रूर लिखें। चलते चलते हाप सभी को नववर्ष की एक बार फिर से शुभकामनाएँ देते हुए विदा लेता हूँ, नमस्कार।



प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी
प्रस्तुति सहयोग : कृष्णमोहन मिश्र

मंगलवार, 28 सितंबर 2010

अब्बास टायरवाला और रहमान आये साथ एक बार फिर और कहा जवां दिलों से - "कॉल मी दिल..."

ताज़ा सुर ताल ३७/२०१०


सुजॊय - दोस्तों, नमस्कार, और एक बार फिर स्वागत है 'ताज़ा सुर ताल' में। जैसा कि पिछले हफ़्ते विश्व दीपक जी ने थोड़ा सा हिण्ट दिया आज के फ़िल्म के बारे में, कि उनके मनपसंद संगीतकार का संगीत होगा आज की फ़िल्म में, तो चलिए अब वह वक़्त आ गया है कि आपको आज की फ़िल्म का नाम बता दिया जाए। आज हम लेकर आये हैं आने वाली फ़िल्म 'झूठा ही सही' के गानें।

विश्व दीपक - ए. आर. रहमान मेरे मनचाहे संगीतकार हैं, और सिर्फ़ मेरे ही नहीं, आज वो सिर्फ़ इस देश के ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में अपने संगीत के जल्वे बिखेर रहे हैं। वो एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संगीतकार बन चुके हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर रहे हैं। तभी तो राष्ट्रमण्डल खेल के शीर्षक गीत के संगीत के लिए उन्ही को चुना गया है।

सुजॊय - 'झूठा ही सही' अब्बास टायरवाला की फ़िल्म है जिसका निर्माण आइ.बी.सी मोशन पिक्चर्स के बैनर तले हो रही है, जिसके मुख्य कलाकार हैं जॊन एब्राहम और पाखी, जो अब्बास साहब की धर्मपत्नी हैं। सोहेल ख़ान, अरबाज़ ख़ान और नसीरुद्दिन शाह ने भी फ़िल्म में अभिनय किया है और सुनने में आया है कि फ़िल्म में माधवन और नंदना सेन अतिथि कलाकार के रूप में नज़र आयेंगे। १५ अक्तुबर २०१० का दिन निर्धारित किया गया है फ़िल्म की शुभमुक्ति के लिए, यानी कि इस साल का यही होगा दशहरा रिलीज़।

विश्व दीपक - सुना है कि पहले इस फ़िल्म का शीर्षक '1-800-Love' रखा गया था, उसके बाद 'Call Me Dil' रखा गया, लेकिन आख़िर में 'झूठा ही सही' का शीर्षक ही फ़ाइनल हुआ। फ़िल्म के प्रोमोज़ देखते हुए ऐसा लग रहा है कि कहानी में कुछ नई बात ज़रूर होगी। जॊन भी एक नए लुक में नज़र आ रहे हैं इस फ़िल्म में। जहाँ तक फ़िल्म के गीत संगीत का सवाल है, साउण्डट्रैक को अच्छा रेस्पॊन्स मिल रहा है।

सुजॊय - तो आइए गीतों का सिलसिला शुरु करते हैं, पहला गीत सुनवा रहे हैं राशिद अली और श्रेया घोषाल की आवाज़ों में।

गीत - क्राई क्राई


विश्व दीपक - एक संक्रामक ट्रैक जिसे कहा जा सकता है, और शायद इसी वजह से यह गीत एक इन्स्टैण्ट हिट भी बन गया है। वैसे भी शुरु से ही अब्बास टायरवाला इस तरह के कैची शब्दों का इस्तेमाल करते आये हैं। "पप्पु काण्ट डान्स साला" के बाद अब्बास और रहमान फिर एक बार एक ऐसा गीत लेकर आये हैं जिसे जनता ने हाथों हाथ लिया है।

सुजॊय - राशिद अली और श्रेया का कम्बिनेशन भी अच्छा लगा, ख़ास कर जहाँ जहाँ राशिद "no no no, kabhi nahi" कहते हैं, बड़ा ही मज़ेदार लगता है। गाना सीधा सरल है, और इस सरलता की वजह से ही यह हिट हो रहा है। एक बार सुनने के बाद जैसे 'क्राई क्राई' दिमाग़ में बैठ जाता है। राशिद अली की आवाज़ जॊन पर फ़िट बैठी है।

विश्व दीपक - रहमान ने अलग अलग साज़ों का इस्तेमाल किया है इस गीत में। जैसे टुकड़ों में बना है यह गीत, लेकिन हर एक टुकड़ा उतना ही आकर्षक, उतना ही लुभाने वाला।

सुजॊय - आइए अब दूसरे गीत की तरफ़ बढ़ा जाए! सुनते हैं जावेद अली और चिनमयी की आवाज़ों में "मैया यशोदा"।

गीत - मैया यशोदा (जमुना मिक्स)


गीत - मैया यशोदा (टेम्स मिक्स)


विश्व दीपक - एक और अच्छा गाना, एक और सुरीला कम्पोज़िशन। रहमान ने जावेद अली और चिनमयी पर जो भार सौंपा, इन दोनों ने उसका पूरा पूरा मान रखा। चिनमयी को बिना सांस छोड़े एक लम्बा सा लाइन इस गीत में गाना पड़ा, जिसे उन्होंने बहुत ही ख़ूबसूरती से निभाया, अंग्रेज़ी में जिसे कहते हैं 'effortlessly'। "मय्या यशोदा" गीत का आधार वही कृष्ण लीला ही है, लेकिन अंतिम अंतरे में यह एक संदेश भी देता है कि बांटने का। अच्छा लिखा हुआ गाना है और शायद इस साल के नवरात्री में डांडिया खेलने वालों को अपना नया गाना मिल गया।

सुजॊय - और इस गीत के बीच में सितार का वह पीस कितना सुरीला, कितना मधुर सुनाई देता है! "मय्या यशोदा" सुनते ही 'हम साथ साथ हैं' का वह हिट गीत भी याद आ जाता है जिसे अनुराधा पौडवाल, अल्का याज्ञ्निक और कविता कृष्णामूर्ती ने गाया था। लेकिन जावेद और चिनमयी का गाया यह गीत उससे बिल्कुल अलग है। दोनों अपने अपने जगह यूनिक है।

विश्व दीपक - यूनिक तो है, लेकिन इस जौनर में रहमान ने इससे पहले जो गीत बनाया था फ़िल्म 'लगान' के लिए, "राधा कैसे ना जले", उसके मुक़ाबले यह गीत बहुत पीछे है। वैसे यह बत भी सच है कि बार बार "राधा कैसे ना जले" जैसा गीत तो नहीं बन सकता ना! ख़ैर, "मैया यशोदा" के दो वर्ज़न हैं, एक है 'जमुना मिक्स', जिसमें भारतीय बीट्स और भारतीय स्वाद है। बांसुरी, सितार आदि साज़ों का इस्तेमाल, लेकिन पूरा गीत परक्युशन और बेस पर आधारित है। साज़िंदों ने भी कमाल का बजाया है।

सुजॊय - इसी गीत का दूसरा वर्ज़न है 'थेम्स मिक्स', जिसमें रहमान ने कुछ और ज़्यादा परक्युशन और ईलेक्ट्रॊनिक बीट्स का इस्तेमाल किया है। और टेलीफ़ोन के टोन्स को भी मिक्स किया गया है। दोनों को सुनने के बाद आप भी यही कहेंगे कि जमुना थेम्स पर हावी है। आइए अब तीसरे गीत की तरफ़ बढ़ा जाए, यह है "हैलो हैलो" कार्तिक और हेनरी कुरुविला की आवाज़ों में।

गीत - हैलो हैलो


विश्व दीपक - "हैलो हैलो" और उस पर कार्तिक की आवाज़, ऐसे में तो "कार्तिक कॊलिंग कार्तिक" की याद आ जाना ही स्वाभाविक है। औएर वैसे भी दोनों गीतों का मूड एक जैसा है, मतलब वही रिंगटोन न और बीप्स की ध्वनियों का इस्तेमाल।

सुजॊय - कार्तिक ने इस गीत को खुले दिल से गाया है, एक केयरफ़्री अंदाज़ में। रहमान कार्तिक से आजकल अपनी हर फ़िल्म में कम से कम एक गीत ज़रूर गवा रहे हैं। कार्तिक और जावेद अली रहमान के मनपसंद गायक बनते जा रहे हैं ऐसा लग रहा है।

विश्व दीपक - वाक़ई कार्तिक की आवाज़ में एक ताज़गी है, और हिंदी फ़िल्मी नायक के प्राश्वगायन के लिए तो बिल्कुल सटीक है। उनके गाये इस गीत में "मुझे छोड़ दो, मुझे थाम लो, खो जाने दो, मेरा नाम लो, सब ठीक है, जो जाएगा" एक बहुत ही सुंदर प्रवाह में चल पड़ता है। पता नहीं यह गीत लम्बी रेस का घोड़ा बन पाएगा या नहीं, लेकिन फ़िल्हाल तो इसे सुनने में अच्चा ही लग रहा है।

सुजॊय - जहाँ तक साज़ों की बात है, तो इसमें रहमान ने वायलिन और चेलो का इस्तेमाल किया है, टेलीफ़ोन के डायल टोन्स तो हैं ही। और इन सब के पीछे ड्रमिंग्‍ बीट्स। रहमान का वैसे टेलीफ़ोन से नाता पुराना है, याद है न आपको 'हिंदुस्तानी' फ़िल्म का गाना "टेलीफ़ोन धुन में हँसने वाली"? चलिए, आगे बढ़ते हैं और सुनते हैं सोनू निगम की आवाज़ में "दो निशानियाँ"।

गीत - दो निशानियाँ


विश्व दीपक - एक और सुंदर कम्पोज़िशन, और सोनू निगम और रहमान का वही पुराना "दिल से" वाला अंदाज़ वापस आ गया है। एक धीमी लय वाला, कोमल और सोलफ़ुल गीत। पियानो की लगातार बजने वाली ध्वनियाँ गीत के ऒरकेस्ट्रेशन का मुख्य आकर्षण है। थोड़ा सा ग़मगीन अंदाज़ का गाना है लेकिन सोनू ने जिस पैशन के साथ इसे निभाया है, यह इस ऐल्बम का एक महत्वपूर्ण ट्रैक बन गया है यकीनन।

सुजॊय - गीत के बोलों की बात करें तो वो भी सुंदर हैं, गहरे अर्थ वाले हैं, बस एक झटका आपको तब लगा होगा जब इन ख़्वाबों ख़यालों वाले बोलों के बीच भी "फ़ोन" शब्द का ज़िक्र आता है। लेकिन फिर यह गीत के बोलों के साथ इस क़दर घुलमिल गया है कि गीत का अभिन्न अंग बन गया है। इस गीत का एक और वर्ज़न है ऐल्बम में जिसका शीर्षक है 'Heartbreak Reprise'।

विश्व दीपक - टूटे दिल की सदा है यह गीत जो एक मल्हम का काम करती है। "दो निशानियाँ" में सोनू निगम के अलावा बहुत से गायकों ने भी आवाज़ें मिलाई जैसे कि ऋषीकेश कामेरकर, थमसन ऐण्ड्रूज़, नोमान पिण्टो, बियांका गोम्स, डॊमिनिक सेरेजो, समंथा एडवार्ड्स, विविएन पोचा और क्लिण्टन सेरेजो। चलिए आगे निकला जाए, अब की बार आवाज़ श्रेया घोषाल और सुज़ेन डी'मेलो के। "पम प रा", यह है गीत, जो फ़िल्म के दूसरे गीतों की तुलना में एक ऐवरेज गीत है।

सुजॊय - श्रेया और सेज़ेन के गाये इस गीत में ना तो "लट्टू" कर देने वाली कोई बात है और ना ही "ऐ बच्चू" वाला ऐटिट्युड है। चलिए सुनते हैं।

गीत - पम प रा


सुजॊय - इस गीत में जो सब से अच्छी बात है वह है श्रेया की गायकी। उन्हें इस गीत में अपने वोकल रेंज के प्रदर्शन का मौका मिला और उन्होंने साबित भी किया अपने रेंज को, अपने टोनल क्वालिटी को। जैज़ शैली का गाना है, रहमान ने श्रेया से स्कैट सिंगिंग्‍ कर दिखाया है, जिसे श्रेया बख़ूबी निभाया है।

विश्व दीपक - अब अगले गीत में एक नई आवाज़। विजय येसुदास की। क्या ये येसुदास जी के साहबज़ादे हैं? जी हाँ, मेरी तरह आपका अंदाज़ा भी सही है। हिंदी फ़िल्मों के लिए भले उनकी आवाज़ नई हो, लेकिन दक्षिण में ये करीब करीब एक दशक से सक्रीय हैं। बहुत ही अच्छा लग रहा है कि रहमान ने विजय येसुदास से हिंदी गीत गवाया है। येसुदास जी के लिए लोगों के दिलों में बहुत ज़्यादा प्यार है। उनका गाया हर एक गीत उत्कृष्ट रहा है। इसलिए हमे पूरी उम्मीद है कि विजय का भी उसी प्यार से हिंदी फ़िल्म संगीत में स्वागत होगा।

सुजॊय - विजय येसुदास के गाये गीत को पहले सुनते है, फिर गीत की चर्चा करेंगे।

गीत - 'I'll be waiting'


सुजॊय - वाह! अंग्रेज़ी और हिंदी, दोनों के शब्दों को विजय ने आसानी से निभाया है, और एक भाषा से दूसरे भाषा का जो ट्रान्ज़िशन है, उसे भी भली भाँति अंजाम दिया है। अपने पिता की तरह उनकी आवाज़ में भी एक सादगी है, उनके गायन में भी वही सरलता है।

विश्व दीपक - इस गीत को हिंग्लिश कहें तो बेहतर होगा, जैज़ शैली की धुन, लेकिन अंत होता है बड़े ही कोमल तरीके से। गीत की अवधि कम होने की वजह से ऐसा लगता है जैसे दिल नहीं भरा। रहमान सर, आशा है आप अपनी अगली फ़िल्म में भी विजय को मौका देंगे, और हमें मौका देंगे उन्हें सुनने का। और अब हम आपको मौका दे रहे हैं 'झूठा ही सही' फ़िल्म के अंतिम गीत को सुनने का, "call me dil - झूठा ही सही", जिसे गाया है राशिद अली ने।

सुजॊय - जैसा कि शुरु में हमने कहा था कि पहले पहले इस फ़िल्म के शीर्षक के लिए 'Call Me Dil' सोचा गया था, शायद इसीलिए इस गीत को बनाया गया है कि दोनों ही शीर्षक इसमें समा जाये। सुंदर बोल, सुंदर संगीत, सुंदर गायकी, बस इतना ही कहेंगे इस गीत के बारे में।

गीत - call me dil - झूठा ही सही


सुजॊय - हाँ तो दोस्तों, कैसे लगे ये गानें? किसी ख़ास गीत का उल्लेख ना करते हुए मैं इस ऐल्बम को अपनी तरफ़ से ४ की रेटिंग्‍ दे रहा हूँ।

विश्व दीपक -

आवाज़ रेटिंग्स: झूठा हीं सही: ****

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # १०९- चिनमयी ने इसी साल एक और फ़िल्म में गीत गाया है जिसे हमने 'ताज़ा सुर ताल' में शामिल किया है। बताइए कौन सी है वह फ़िल्म?

TST ट्रिविया # ११०- राष्ट्रमण्डल खेल २०१० के लिए ए. आर. रहमान द्वारा रचित गीत के बोल क्या हैं?

TST ट्रिविया # १११- सोनू निगम ने बम्बई आने के बाद सब से पहले संगीतकार उषा खन्ना के संगीत में ऋषीकेश मुखर्जी की एक टीवी धारावाहिक के लिए गीत गाया था। क्या आपको याद है उस धारावाहिक का नाम?


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. बेस्ट फ़िल्म ऒन फ़ैमिली वेलफ़ेयर
२. फ़िल्म 'राही' की लोरी "चाँद सो गया, तारे सो गए"।
३. तीन बार।

मंगलवार, 31 अगस्त 2010

किलिमांजारो में बूम बूम रोबो डा.. रोबोट की हरकतों के साथ हाज़िर है रहमान, शंकर और रजनीकांत की तिकड़ी

ताज़ा सुर ताल ३३/२०१०

सुजॊय - आज है ३१ अगस्त! यानी कि आज 'ताज़ा सुर ताल' इस साल का दो तिहाई सफ़र पूरा कर रहा है। पीछे मुड़ कर देखें तो इस साल बहुत ही कम फ़िल्में ऐसी हैं जिन्होंने बॊक्स ऒफ़िस पर कामयाबी के झंडे गाड़े हैं।

विश्व दीपक - हाँ, लेकिन फ़िल्म संगीत की बात करें तो इन फ़िल्मों के अलावा भी कई फ़िल्मों का संगीत सुरीला रहा है। 'वीर', 'इश्क़िया', 'कार्तिक कॊलिंग‍ कार्तिक', 'आइ हेट लव स्टोरीज़', 'मिस्टर सिंह ऐण्ड मिसेस मेहता', 'वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई' जैसे फ़िल्मों के गानें काफ़ी अच्छे हैं। अब देखते हैं कि २०१० का बेस्ट क्या अभी आना बाक़ी है!

सुजॊय - अच्छा विश्व दीपक जी, क्या आप ने कोई ऐसा कम्प्युटर देखा है जिसका स्पीड १ टेरा हर्ट्ज़ हो, और मेमरी १ ज़ीटा बाइट, जिसका प्रोसेसर पेण्टियम अल्ट्रा कोर मिलेनिया वी-२, और एफ़. एच. पी-४५० मोटर हिराटा, जापान का लगा हो?

विश्व दीपक - अरे अरे ये सब क्या पूछे जा रहे हैं आप? यह 'टी. एस. टी' है भई!

सुजॊय - तभी तो! आज हम जिस फ़िल्म के गानें सुनने जा रहे हैं यह उसी से ताल्लुख़ रखता है। ये जो स्पेसिफ़िकेशन्स मैंने अभी बताए, यह दरसल किसी कम्प्युटर का नहीं, बल्कि एक अत्याधुनिक रोबोट का होगा जिसका निर्माण कर रहे हैं फ़िल्म निर्माता कलानिथि मारन निर्देशक शंकर के साथ मिल कर अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म 'रोबोट' में।

विश्व दीपक - 'रोबोट' इस देश में बनने वाली सब से महँगी फ़िल्म है और इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार हैं साउथ सुपरस्टार रजनीकांत और ऐश्वर्या राय बच्चन। फ़िल्म में संगीत दिया है ए. आर. रहमान ने और गीतकार हैं स्वानंद किरकिरे। दोस्तों, इससे पहले कि हम 'रोबोट' की बातों को आगे बढ़ाएँ, आइए फ़िल्म का पहला गाना सुन लेते हैं जिसे गाया है ए. आर. रहमान, सुज़ेन, काश और क्रिसी ने।

गीत - नैना मिले


सुजॊय - फ़िल्म की कहानी और प्लॊट के हिसाब से ज़ाहिर है कि इस फ़िल्म के गानें हाइ टेक्नो बीट्स वाले होंगे और गायन शैली भी उसी तरह का रोबोट वाले अंदाज़ का होगा, और अभी अभी जो हमने गीत सुना उसमें इन सभी बातों का पूरा पूरा ख़याल रखा गया है। "नैना मिले, तुम से नैना मिले", स्वानंद किरकिरे के बोलों को ध्यान से सुना जाए तो उनका ख़ास अंदाज़ महसूस किया जा सकता है। लेकिन जैसा कि मैंने कहा कि 'ध्यान से सुना जाए', क्योंकि टेक्नो बीट्स के चलते गीत के बोल पार्श्व में चले गए हैं और संगीत ही सर चढ़ कर बोल रहा है।

विश्व दीपक - वाक़ई एक 'रोबोटिक' गाना है। हाल में एक फ़िल्म आई थी 'लव स्टोरी २०५०' जिसका संगीत भी कुछ इसी तरह का डिमाण्ड करता था। "मिलो ना मिलो" गीत मशहूर हुआ था लेकिन कुल मिलाकर फ़िल्म पिट गई थी। ख़ैर, 'रोबोट' का दूसरा गीत पहले गीत की तुलना में टेक्नो बीट्स के मामले में हल्का है और एक रोमांटिक युगल गीत है मोहित चौहान और श्रेया घोषाल की आवाज़ों में। सुनते हैं फिर चर्चा करते हैं।

गीत - पागल अनुकन (प्यारा तेरा गुस्सा भी)


विश्व दीपक - भले ही एक नर्मोनाज़ुक रूमानीयत से भरा गीत है, लेकिन स्वानंद किरकिरे इसमें भी वैज्ञानिक शब्दों को डालना नहीं भूले हैं। हिंदी सिनेमा का यह पहला गीत है जिसमें "न्युट्रॊन" और "ईलेक्ट्रॊन" शब्दों का इस्तमाल हुआ है।

सुजॊय - आइए अब इस फ़िल्म के प्रमुख किरदार रोबोट का परिचय आप से करवाया जाए। इस ऐण्ड्रो-ह्युमानोएड रोबोट का नाम है 'चिट्टी'। यह एक इंसान है जिसने जन्म नहीं लिया, बल्कि जिसका निर्माण हुआ है। चिट्टी गा सकता है, नाच सकता है, लड़ सकता है, पानी और आग का उस पर कोई असर नहीं होता। वो हर वो सब कुछ कर सकता है जो एक इंसान कर सकता है लेकिन शायद उससे भी बहुत कुछ ज़्यादा। वो विद्युत-चालित है और वो झूठ नहीं बोल सकता। चिट्टी की कुछ विशेषताओं के बारे में हमने आपको बताया, आइए अब सुनते हैं 'चिट्टी डान्स शोकेस'।

विश्व दीपक - 'चिट्टी डान्स शोकेस' एक डान्स नंबर है प्रदीप विजय, प्रवीन मणि, रैग्ज़ और योगी बी. का।

गीत - चिट्टी डान्स शोकेस


सुजॊय - वाक़ई ज़बरदस्त इन्स्ट्रुमेन्टल पीस था। हिप-हॊप डान्स के शौकीनों के लिए बहुत अच्छा पीस है। इस फ़्युज़न ट्रैक का इस्तमाल टीवी पर होने वाले डान्स रियल्टी शोज़ में किया जा सकता है।

विश्व दीपक - और अब एक ऐसा गीत जिसे सुनते हुए आप शायद ९० के दशक में पहुँच जाएँगे। और वह इसलिए कि इसमें आवाज़ें हैं हरिहरण और साधना सरगम की। लेकिन गाने के अंदाज़ में ९० के दशक की कोई छाप नहीं है। यह तो इसी दौर का गीत है। यह गीत दर-असल इस रोबोट की गरिमा और महिमा का बखान करता है। रहमान के शुरुआती दिनों में दक्षिण के फ़िल्मों में वो जिस तरह का संगीत दिया करते थे, इस गीत में कुछ कुछ उस शैली की छाया मिलती है। सुनते हैं "अरिमा अरिमा"।

गीत - अरिमा अरिमा


विश्व दीपकव - स्वानंद किरकिरे ने केवल "ईलेक्ट्रॊन" और "न्युट्रॊन" तक ही अपने आप को सीमित नहीं रखा, अब एक ऐसा गीत जिसमें किलिमांजारो और मोहंजोदारो का उल्लेख है, और उल्लेख क्या, गीत के मुखड़े में ही ये दो शब्द हैं जिन पर इस गीत को आधार किया गया है। इस तरह के शब्दों के चुनाव का तो यही उद्येश्य हो सकता है कि धुन पहले बनी होगी और उस धुन पर ये शब्द फ़िट किए गए होंगे।

सुजॊय - जावेद अली और चिनमयी का गाया यह गीत एक मस्ती भरा गीत है जिसमें वह रोबोटिक शैली नहीं है, बल्कि तबले का भी इस्तमाल हुआ है। जावेद अली धीरे धीरे कामयाबी की सीढ़ियाँ चढ़ते जा रहे हैं। आज के दौर के गायकों में उन्होंने अपनी एक अलग जगह बना ही ली है और फ़िल्म संगीत संसार में उन्होंने अपने क़दम मज़बूती से जमा लिए हैं। आइए सुनते हैं "किलिमांजारो"।

गीत - किलिमांजारो


विश्व दीपक - फ़िल्म के शुरु में चिट्टी कोई भी काम तो कर सकता है, लेकिन वो इंसान के जज़्बातों को समझ नहीं सकता। उसमें कोई ईमोशन नहीं है। और तभी डॊ. वासी चिट्टी के प्रोसेसर को अपग्रेड करते हैं और उसमें ईमोशन्स का सिम्युलेशन करते हैं यह सोचे बिना कि इसके परिणाम क्या क्या हो सकते हैं। अब चिट्टी महसूस कर सकता है और सब से पहले जो वो महसूस करता है, वह है प्यार। क्या यही प्यार डॊ. वासी के रास्ते पे दीवार बन कर खड़ा हो जाएगा? क्या डो. वासी का क्रिएशन ही उनका विनाश कर देगा? यही कहानी है 'रोबोट' की।

सुजॊय - और अब एक और रोबोटिक नंबर, फिर से टेक्नो बीट्स की भरमार लिए यह है "बोम बूम रोबोडा", जिसे गाया है रैग्ज़, योगी बी., मधुश्री, कीर्ति सगठिया और तन्वी शाह ने। मधुश्री को ए. आर. रहमान ने कई ख़ूबसूरत गीतों में गवाया है। बहुत ही मिठास है उनकी आवाज़ में। यह ताज्जुब की ही बात है कि मुंबई के फ़िल्मी संगीतकार क्यों उनसे गानें नहीं गवाते! ख़ैर, सुनते हैं यह गीत।

गीत - बूम बूम रोबोडा


विश्व दीपक - और अब फ़िल्म का अंतिम गीत "ओ नए इंसान"। श्रीनिवास और खतिजा रहमान का गाया यह गीत है। श्रीनिवास ने बिलकुल रोबोटिक अंदाज़ में यह गाया है। श्रीनिवास ने इस गीत में दो अलग अलग आवाज़ें निकाली हैं, जो एक दूसरे से बिलकुल अलग है। ऒर्केस्ट्रेशन पूरी तरह से ईलेक्ट्रॊनिक है और इस गीत को सुनते हुए एक साइ-फ़ाइ फ़ील आता है।

सुजॊय - और जिन्हें मालूम नहीं है, उन्हें हम यह बताना चाहेंगे कि खतिजा रहमान ए. आर. रहमान की बेटी है जो इस गीत के ज़रिए हिंदी पार्श्व गायन में क़दम रख रही है। चलिए सुनते हैं यह गीत।

गीत - ओ नए इंसान


सुजॊय - हाँ तो विश्व दीपक जी, कैसा रहा इन रोबोटिक गीतों का अनुभव? मुझे तो बुरा नहीं लगा। हाल के कुछ फ़िल्मों में रहमान का जिस तरह का संगीत आ रहा था, ज़्यादातर सूफ़ियाने अंदाज़ का, उससे बिलकुल अलग हट के, बहुत दिनों के बाद इस तरह का संगीत सुनने में आया है। वैसे हाल में 'शिवाजी' में रहमान ने इस तरह का संगीत दिया था, लेकिन हिंदी के श्रोताओं में 'शिवाजी' के गानें कुछ ख़ास असर नहीं कर सके थे। अब देखना है कि 'रोबोट' के गीतों को किस तरह का रेसपॊन्स मिलता है! "पागल अनुकन" और "किलिमांजारो", ये दोनों गीत मुझे सब से ज़्यादा पसंद आए।

विश्व दीपक - सुजॊय जी, भले हीं गाने सुनने के दौरान मैंने इलेक्ट्रान, प्रोटॉन, किलिमांजारो और मोहनजोदाड़ो जैसे शब्दों के लिए स्वानंद किरकिरे को क्रेडिट दिया था, लेकिन एक बात मेरे दिल में चुभ-सी रही थी.. शुरू में सोचा कि रहने देता हूँ, हर बात कहनी ज़रूरी नहीं होती, लेकिन जब हम समीक्षा हीं कर रहे हैं तो हमें कुछ भी छुपाने का हक़ नहीं मिलता। शायद आपने रोबोट के तमिल वर्ज़न ऐंदिरन के गाने नहीं सुने। मैंने सुने हैं.. गाने के बोल तो समझ नहीं आए लेकिन ऊपर बताए गए शब्द पकड़ में आ गए थे} और जब मैंने हिन्दी के गाने सुने और हिन्दी में उन्हीं शब्दों की पुनरावृत्ति मिली तो मुझे पक्का यकीन हो गया कि गीतकार ने गाने का बस अनुवाद हीं किया है और कुछ नहीं। नहीं तो तमिल का "डा" (बूम बूम रोबो डा), जो हिन्दी के "रे" या "अरे" के समतुल्य है, हिन्दी में भी "डा" हीं क्यों होता। और भी ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं.. जिन्हें सुनने पर मुझे लगा था कि किसी साधारण-से गीतकार से गाने लिखवाए (अनुवाद करवाए) गए हैं। लेकिन गीतकार के रूप में "स्वानंद किरकिरे" का नाम देखकर मुझे झटका-सा लगा। अब जैसा कि आपके साथ हुआ और दूसरे हिन्दी-भाषी श्रोताओं के साथ होने वाला है, हम तो बस हिन्दी के गाने हीं सुनते हैं और उसी को "असल" समझ बैठते हैं। अब यहाँ पर दोषी कौन है, यह तो कहा नहीं जा सकता, लेकिन स्वानंद साहब से मुझे ऐसी उम्मीद न थी। वे "गुलज़ार" और "महबूब" की तरह मिसाल बन सकते थे, जो तमिल के गानों (जिसे वैरामुतु जैसे बड़े कवि/गीतकार लिखा करते हैं) से बोल नहीं उठाते, बल्कि रहमान की धुनों पर अपने नए बोल लिखते हैं। बस इतना है कि स्वानंद साहब से निराश होने के बावजूद रहमान के संगीत के कारण हीं मैं इस एलबम को पसंद कर पा रहा हूँ। सुजॊय जी, आपने इस एलबम के लिए साढे तीन अंक निर्धारित किए थे, लेकिन मैं आधे अंक की कटौती गीतकार के कारण कर रहा हूँ। एक गीतकार/कवि के मन में शब्दों के लिए जो टीस उठती है, वह तो आप समझ हीं सकते हैं.. है ना? खैर.. मैं भी किस भावनात्मक दरिया में बह गया... हाँ तो, आज की समीक्षा को विराम देने का वक्त आ गया है, अगली बार "अनजाना अनजानी" के साथ हम फिर हाज़िर होंगे। तब तक के लिए शुभदिन एवं शुभरात्रि!!

आवाज़ रेटिंग्स: रोबोट: ***

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ९७- हरिहरण और साधना सरगम की आवाज़ में उस मशहूर गीत का मुखड़ा बताइए जिसके एक अंतरे में पंक्ति है "ये दिल बेज़ुबाँ था आज इसको ज़ुबाँ मिल गई, मेरी ज़िंदगी को एक हसीं दास्ताँ मिल गई"?

TST ट्रिविया # ९८- फ़िल्म 'रोबोट' के साउण्डट्रैक में आपने जितनी भी आवाज़ें सुनीं, उनमें से एक गायिका हैं जिनका असली नाम है सुजाता भट्टाचार्य। बताइए इस गायिका को अब हम किस नाम से जानते हैं?

TST ट्रिविया # ९९- परिवार की नाज़ुक आर्थिक स्थिति के चलते ए. आर. रहमान को कक्षा-९ में स्कूल छोड़ना पड़ा था। बताइए रहमान उस वक़्त किस स्कूल में पढ़ रहे थे?


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. खुदा जाने (बचना ए हसीनों)
२. ६७
३. इन दोनों फ़िल्मों में विदेशी गीत की धुन का इस्तेमाल किया गया है। 'वी आर फ़मिली' में एल्विस प्रेस्ली के "जेल-हाउस रॊक" तथा 'कल हो ना हो' में रॊय ओरबिसन के "प्रेटी वोमेन"।

एक बार फिर सीमा जी २ सही जवाबों के साथ हाज़िर हुई, बधाई

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