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Tuesday, January 4, 2011

दिल तो बच्चा है जी.....मधुर भण्डारकर की रोमांटिक कोमेडी में प्रीतम ने भरे चाहत के रंग

Taaza Sur Taal 01/2011 - Dil Toh Bachha Hai ji

'दिल तो बच्चा है जी'...जी हाँ साल २०१० के इस सुपर हिट गीत की पहली पंक्ति है मधुर भंडारकर की नयी फिल्म का शीर्षक भी. मधुर हार्ड कोर संजीदा और वास्तविक विषयों के सशक्त चित्रिकरण के लिए जाने जाते हैं. चांदनी बार, पेज ३, ट्राफिक सिग्नल, फैशन, कोपरेट, और जेल जैसी फ़िल्में बनाने के बाद पहली बार उन्होंने कुछ हल्की फुल्की रोमांटिक कोमेडी पर काम किया है, चूँकि इस फिल्म में संगीत की गुंजाईश उनकी अब तक की फिल्मों से अधिक थी तो उन्होंने संगीतकार चुना प्रीतम को. आईये सुनें कि कैसा है उनके और प्रीतम के मेल से बने इस अल्बम का ज़ायका.

नीलेश मिश्रा के लिखे पहले गीत “अभी कुछ दिनों से” में आपको प्रीतम का चिर परिचित अंदाज़ सुनाई देगा. मोहित चौहान की आवाज़ में ये गीत कुछ नया तो नहीं देता पर अपनी मधुरता और अच्छे शब्दों के चलते आपको पसंद न आये इसके भी आसार कम है. “है दिल पे शक मेरा...” और प्रॉब्लम के लिए “प्रोब” शब्द का प्रयोग ध्यान आकर्षित करता है. दरअसल ये एक सामान्य सी सिचुएशन है हमारी फिल्मों की जहाँ नायक अपने पहली बार प्यार में पड़ने की अनुभूति व्यक्त करता है. संगीत संयोजन काफी अच्छा है और कोरस का सुन्दर इस्तेमाल पंचम के यादगार "प्यार हमें किस मोड पे ले आया" की याद दिला जाता है.

abhi kuch dinon se (dil toh bachha hai ji)



सोनू निगम की आवाज़ में “तेरे बिन” एक और मधुर रोमांटिक गीत है, जो यक़ीनन आपको सोनू के शुरआती दौर में ले जायेगा. कुमार के हैं शब्द जो काफी रोमांटिक है. अगला गीत “ये दिल है नखरे वाला” वाकई एक चौंकाने वाला गीत है. अल्बम के अब तक के फ्लेवर से एकदम अलग ये गीत गुदगुदा जाता है, जैज अंदाज़ का ये गीत है जिसमें कुछ रेट्रो भी है. निलेश ने बहुत ही बढ़िया लिखा है इसे. शेफाली अल्वरिस की आवाज़ जैसे एकदम सटीक बैठती है इस गीत में. ये गीत ‘पिक ऑफ द अल्बम’ है.

tere bin (dil toh bachha hai ji)



ye dil hai nakhre waala (dil toh bachha hai ji)



कुणाल गांजावाला की आवाज़ में अगले २ गीत हैं. “जादूगरी” में उनकी सोलो आवाज़ है तो “बेशुबा” में उनके साथ है अंतरा मित्रा. जहाँ पहला गीत साधारण ही है, दूसरे गीत में जो कि अल्बम का एकलौता युगल गीत है, प्रीतम अपने बहतरीन फॉर्म में है. सईद कादरी से आप उम्मीद रख ही सकते हैं, और वाकई उनके शब्द गीत की जान हैं.

jaadugari (dil toh bachha hai ji)



beshubah (dil toh bachha hai ji)



हमारी राय – साल की शुरूआत के लिए ये नर्मो नाज़ुक रोमांटिक एल्बम एक बढ़िया पिक है. लगभग सभी गीत प्यार मोहब्बत में डूबे हुए हैं. प्रीतम कुछ बहुत नया न देकर भी अपने चिर परिचित अंदाज़ के गीतों से लुभाने में सफल रहे हैं.



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं। "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है। आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रूरत है उन्हें ज़रा खंगालने की। हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं।

Monday, July 20, 2009

तेरे बिन कहाँ हमसे जिया जायेगा....शान और श्रेया की आवाजों का है ये जादू

ताजा सुर ताल (11)

जाने क्या जादू है प्रेम गीतों में कि हम कभी इनसे ऊबते नहीं. कठोर से कठोर आदमी के मन में कहीं एक छुपा हुआ प्रेम का दरिया रहता है, कभी तन्हाई में जब कभी वो इन गीतों को सुनता है वह दरिया उसके मन का बहने लगता है. यदि मैं आपसे पूछूँ कि आपके सबसे पसंदीदा १० गीत कौन से हैं तो यकीनन उनमें से कम से कम ६ गीत प्रेम गीत होंगें और उनमें भी युगल गीतों के क्या कहने, यदि किसी प्रेम गीत को गायक और गायिका ने पूरी शिद्दत से प्रेम में डूब कर गीत के भावों को समझ कर गाया हो तो वो गीत एकदम ही आपके दिल के तार झनका देता है. अभी कुछ दिन पहले इस शृंखला में हमने आपको फिल्म "शोर्टकट" का एक मधुर प्रेम गीत सुनवाया था. आज भी बारी है एक और प्रेम गीत की. बेहद सुरीले हैं शान और श्रेया घोषाल और जब दोनों की सुरीली आवाजें मिल जाए तो गीत यूं भी संवर जाता है.

आज का गीत है फिल्म "जश्न" से. रॉक ऑन की तरह ये फिल्म भी एक रॉक गायक के जीरो से हीरो बनने की दास्तान है. फिल्म संगीत प्रधान है तो जाहिर है संगीतकार के लिए एक अच्छी चुनौती भी है और एक बहतरीन मौका भी खुद को साबित करने का. शारिब और तोशी की जोड़ी ने संतुलित रॉक गीतों से सजाया है इस एल्बम को. फिल्म के अन्य सभी गीत रॉक आधारित है, पर एक यही गीत है एकलौता जिसमें मेलोडी है. जहाँ अधिकतर गीत पुरुष सोलो है, जो नायक के व्यावसायिक संघर्ष की जुबान है वहीं प्रस्तुत गीत एकदम अलग मन की कोमल भावनाओं का युगल बयां है. चूँकि फिल्म के अन्य गीत कहानी और थीम के हिसाब से अधिक महत्वपूर्ण हैं तो उनके बीच इस गीत का प्रचार ज़रा कम कर हो रहा है. "दर्द - ए- तन्हाई" और "आया रे" जैसे गीत इन दिनों खूब धूम मचा रहे हैं. पर आने वाले समय में ये सुरीला प्रेम गीत श्रोताओं को अवश्य भायेगा ऐसा हमारा अनुमान है. नीलेश मिश्रा के बोलों में कुछ ख़ास नयापन नहीं है. संगीत भी सामान्य ही है, हाँ धुन ज़रूर कर्णप्रिय है, पर ये शान और श्रेया जैसे गायकारों का दम ख़म है जो इस गीत को इतना तारो ताजा बना देता है. गीत एक बार में ही आपके जेहन में घर कर लेता है और धीरे धीरे होंठों पर चढ़ भी जाता है. तो आज ताजा सुर ताल के इस अंक में सुनते हैं हम और आप यही गीत -

तेरे बिन कहाँ हमसे जिया जायेगा,
जिद छोड़ दी लो आज कह दिया...

जिंदगी भाग कर हमसे आगे चली,
थाम लो न हमें चाँद तारों तले...
तोड़ डाली तन्हाई है,
अब मोहब्बत रुत आई है....

तेरे बिन....

जाने कितने बरस धूप में मैं चला,
तुम मिले जिस घडी जैसे बादल मिला...
बरसो न टूट कर ज़रा,
भीग जाए मन ये बावरा....

तेरे बिन....



आवाज़ की टीम ने दिए इस गीत को 3.5 की रेटिंग 5 में से. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसा लगा? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीत को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

क्या आप जानते हैं ?
आप नए संगीत को कितना समझते हैं चलिए इसे ज़रा यूं परखते हैं. फिल्म "जश्न" से एक नए स्टार पुत्र का फिल्म जगत में पदार्पण हो रहा है. क्या आप जानते हैं उस नए कलाकार का नाम ? और हाँ जवाब के साथ साथ प्रस्तुत गीत को अपनी रेटिंग भी अवश्य दीजियेगा.

पिछले सवाल का सही जवाब था गीत "हम जो चलने लगे...." फिल्म जब वी मेट का. पर अफ़सोस किसी ने भी सही जवाब नहीं दिया. हाँ इस बार शमिख जी ने रेटिंग जरूर दी. शुक्रिया जनाब. मनु जी क्या रेटिंग है आपकी ? ये सस्पेंस क्यों. मंजू और दिशा जी आपने गीत का आनंद लिया हमें अच्छा लगा. रेटिंग भी देते तो और मज़ा आता.


अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

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